तीन मंजिला बिल्डिंग गिरने से 2 की मौत, मलबे में दबे 10 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया

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कोटा: शिक्षा की नगरी कहे जाने वाले कोटा से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है. यहां शनिवार देर रात एक रेस्टोरेंट की बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई. इस दर्दनाक हादसे में एक कोचिंग छात्र समेत 2 की मौत हो गई है, जबकि 11 अन्य लोग घायल हो गए हैं. घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका उपचार जारी है. घायलों में से 6 लोगों की हालत गंभीर बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट की बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया. इस हादसे में मलबे में दबने से 2 की मौत हो गई है.

​मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा कोटा के व्यस्त इलाके जवाहर नगर थाना क्षेत्र के इंद्र विहार में ओपेरा हॉस्पिटल के नजदीक हुआ. रात के समय जब रेस्टोरेंट में चहल-पहल थी, तभी अचानक तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढह गया. धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए और तुरंत पुलिस व प्रशासन को सूचना दी गई. मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर रेस्टोरेंट चल रहे थे, जिनमें नॉन-वेज रेस्टोरेंट प्रमुख था. नीचे दुकानों में ग्राहक और कर्मचारी मौजूद थे, साथ ही बाहर बाइक पार्किंग एरिया में बैठे कुछ लोग भी प्रभावित हुए है. घटना के समय तेज आवाज आई, जिसे कुछ लोगों ने ब्लास्ट जैसी बताया और पूरी इमारत ढह गई.

​अस्पताल प्रशासन की पुष्टि : ​मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है. डॉ. शर्मा ने बताया कि अस्पताल में कुल 11 लोगों को लाया गया था, जिनमें से एक छात्र को मृत घोषित कर दिया गया है. डॉ. शर्मा के अनुसार मृतक छात्र की पहचान प्रारंभिक तौर पर अरण्य के रूप में की गई है. हालांकि, छात्र के पास से फिलहाल कोई आधिकारिक पहचान पत्र (ID Card) बरामद नहीं हुआ है, जिससे उसके पूर्ण विवरण की पुष्टि की जा सके. प्रशासन उसके परिजनों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है.

​देर रात बढ़ गया मौत का आंकड़ा : ​शुरुआती जानकारी में कई लोग घायल बताए जा रहे थे, लेकिन मलबे से निकाले जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई. देर रात एक और की मौत की खबर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला. घायलों में से कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है.

रेस्क्यू ऑपरेशन और मौके पर स्थिति: सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, नगर निगम की टीमें, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की कंपनियां मौके पर पहुंच गईं. रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है. सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है. सूचना मिलते ही विधायक संदीप शर्मा और वर्तमान महापौर राजीव अग्रवाल भी घटनास्थल पर पहुंचे. संदीप शर्मा ने बताया कि बिल्डिंग तीन मंजिला थी और गिरने के सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं. हालांकि, पास में निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ हो सकता है. उन्होंने राहत-बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं.

घटना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और लोगों को नजदीक जाने से रोका. अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू में कुछ दिक्कत आ रही थी, लेकिन लाइटिंग और अतिरिक्त टीमों के साथ राहत एवं बचाव कार्य किया गया. एक प्रत्यक्षदर्शी आदित्य विजय ने बताया कि बिल्डिंग एकाएक ढह गई, कुछ लोगों को तुरंत निकाला गया, जबकि कई भागकर बच गए. प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और इलाके से दूर रहने की अपील की है. हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है.

घटना की जानकारी मिलने पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर में मौके पर पहुंचे. उन्होंने पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली. मौके पर आसपास के इलाकों की बिजली सप्लाई रोक दी गई है. साथ ही करीब एक दर्जन से ज्यादा बुलडोजर मंगाकर रेस्क्यू किया जा रहा है. फंसे हुए लोगों को निकालने का काम तेजी किया जा रहा है.

मौके पर जिला कलेक्टर पीयूष समारिया, पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम सहित पूरा प्रशासन का अमला पहुंचा. इसके साथ ही भारी भीड़ को रोकने के लिए भी पुलिस जाप्ता भी तैनात किया गया है. जिला कलेक्टर पियूष समरिया के निर्देश पर जिला परिवहन अधिकारी सुरेंद्र सिंह सहित आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. परिवहन अधिकारियों ने तत्काल क्रेन और बुलडोजरों को मंगाया है. बताया जा रहै है पास में ही एक दूसरी दुकान के निर्माण के चलते ये हादसा हुआ है. पास की दुकान को पूरी तरह से खोदकर तोड़ दिया गया था, जिससे हादसे की संभावना जताई जा रही है.

अमरावती में क्वांटम वैली का शिलान्यास, CM नायडू बोले- देश के लिए गेम-चेंजर साबित होगी

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अमरावती (आंध्र प्रदेश): अमरावती ने भारत में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के भविष्य को आकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है. आंध्र प्रदेश को क्वांटम टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर बनाने के उद्देश्य से, शनिवार को ‘अमरावती क्वांटम वैली’ बिल्डिंग की नींव रखी गई. इस पहल से राज्य को भारत की क्वांटम क्रांति को लीड करने का मौका मिलने की उम्मीद है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ टुल्लुरु मंडल में अमरावती क्वांटम वैली का शिलान्यास किया. राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 50 एकड़ जमीन दी है. केंद्रीय राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर, राज्य मंत्री नारा लोकेश, कंडुला दुर्गेश और अन्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए.

ग्लोबल टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियां IBM, TCS और L&T भारत का पहला 133-qubit क्वांटम कंप्यूटर अमरावती लाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. क्वांटम वैली क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, डिफेंस, हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे जरूरी सेक्टर में रिसर्च, इनोवेशन और स्किल डेवलपमेंट के लिए एक हब के तौर पर काम करेगी.

अमरावती को दुनिया के सबसे एडवांस्ड क्वांटम हब के साथ लाने के विजन के साथ, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने इस बड़े प्रोजेक्ट का आइडिया दिया है. क्वांटम वैली से वर्ल्ड-क्लास रिसर्च इंस्टीट्यूशन, ग्लोबल टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार, युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्किल ट्रेनिंग और रोजगार के बड़े मौके मिलने की उम्मीद है.

राज्य सरकार की योजना इस साल अगस्त तक क्वांटम वैली बिल्डिंग को पूरा करने और दिसंबर तक क्वांटम कंप्यूटर लगाने की है. इस सुविधा का मकसद बोस्टन, सिंगापुर और शंघाई जैसे ग्लोबल क्वांटम सेंटर्स के बराबर खड़ा होना है.

अमरावती क्वांटम वैली देश के लिए गेम-चेंजर: सीएम चंद्रबाबू
कार्यक्रम में बोलते हुए, सीएम चंद्रबाबू ने कहा कि अमरावती क्वांटम कंप्यूटिंग सेंटर पूरे देश के लिए गेम-चेंजर साबित होगा. उन्होंने कहा, “राज्य का भविष्य छात्रों पर निर्भर करता है. मेरी उम्मीदें पूरी तरह से उन पर हैं. चाहे इतिहास लिखना हो या उसे फिर से लिखना हो, युवा ही यह कर सकते हैं. हमारे युवा टेक्नोलॉजी सेक्टर में क्वांटम स्पीड से आगे बढ़ रहे हैं. आज, हमने क्वांटम प्रोजेक्ट की नींव रखी है. भविष्य में, प्रोडक्शन और सप्लाई यहीं से होगी.”

उन्होंने कहा, “हाईटेक सिटी (HITEC City) हैदराबाद के लिए गेम-चेंजर बन गया. लेकिन यह क्वांटम कंप्यूटिंग सेंटर देश के लिए गेम-चेंजर होगा. यहीं से दुनिया को नए इनोवेशन देने के मौके मिलेंगे. हमने यह सब अगले 40 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्लान किया है.”

पीएम मोदी की तारीफ करते हुए चंद्रबाबू ने कहा कि देश को सही समय पर सही प्रधानमंत्री मिला है और उन्होंने नेशनल क्वांटम मिशन से आंध्र प्रदेश से अपनी एक्टिविटी शुरू करने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि TCS, IBM और L&T के साथ बातचीत हुई है और कंपनियों से कुछ महीनों में एग्रीमेंट पूरे करने को कहा गया है.

सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “मैंने इस साल के आखिर तक पहला क्वांटम कंप्यूटर आने को कहा है. 14 अप्रैल को हम यहां दो और क्वांटम सेंटर बनाएंगे. 2030 तक देश को 2.5 लाख क्वांटम प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी. भारत में हर 100 आईटी प्रोफेशनल्स में से 35 तेलुगु हैं.”

नायडू ने कहा, “क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन हाइड्रोजन वैली आंध्र प्रदेश के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी. क्वांटम वैली की नींव रखने का यह दिन इतिहास में हमेशा रहेगा. अमरावती हमेशा जितेंद्र सिंह को याद रखेगा. आईटी मंत्री लोकेश आईटी डिपार्टमेंट को अच्छे से संभाल रहे हैं. इस महीने की 16 तारीख को बिल गेट्स अमरावती आएंगे.”

संचार में बड़े बदलाव लाएगी क्वांटम कंप्यूटिंग
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार नेशनल क्वांटम मिशन को पूरा समर्थन दे रही है. उन्होंने कहा, “यह शिलान्यास देश के क्वांटम मिशन की नींव बनेगा. आंध्र प्रदेश तेजी से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अपना रहा है. हमने डीप सी मिशन को भी जल्दी मंजूरी दी. 2024 से, ‘क्वांटम टेक्नोलॉजी’ शब्द हर जगह सुनाई दे रहा है.

सिंह ने कहा, “क्वांटम कंप्यूटिंग मेडिकल सेक्टर में बड़े बदलाव लाएगा. क्वांटम मिशन सभी फील्ड में बहुत जरूरी होगा. इसीलिए हमने नेशनल क्वांटम मिशन के लिए 6,000 करोड़ रुपये दिए हैं. इनोवेशन के समय सब कुछ छोटा लगता है. बाद में ही उन इनोवेशन की असली कीमत पता चलती है. क्वांटम कंप्यूटिंग संचार के फील्ड में भी बड़े बदलाव लाएगा.”

एक्सप्रेस-वे पर कंटेनर ने रौंदा 6 की मौत

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मथुरा। मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस से उतरकर खड़े यात्रियों को तेज रफ्तार कंटेनर ने रौंद दिया। हादसे में 6 की मौके पर मौत हो गई। एक गंभीर घायल है। घटना शनिवार तडक़े 2.45 बजे की है। जानकारी के मुताबिक, बस दिल्ली के नागलोई से कानपुर देहात के रसूलाबाद जा रही थी। रास्ते में कुछ यात्रियों ने ड्राइवर को बाथरूम के लिए बस रोकने को कहा। ड्राइवर ने ग्रीन जोन की बजाय रास्ते में बस रोक दी। कुछ यात्री बस से उतरकर नीचे खड़े हो गए, तभी पीछे से आ रहे कंटेनर ने पहले बस को टक्कर मारी। फिर यात्रियों को रौंद दिया। कंटेनर का चालक मौके से फरार हो गया। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई। हाईवे पर लाशें बिछ गईं। कुछ यात्रियों के चहेरे बुरी तरह कुचल गए। इससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया। परिजनों ने स्वेटर-कपड़ों से उनकी पहचान की। मौके पर लंबा जाम लग गया। राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने एंबुलेंस से घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

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सोनिया गांधी का वोटर लिस्ट केस में कोर्ट को जवाब पेश, कहा-वोटर लिस्ट-नागरिकता सरकार के मसले

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नई दिल्ली । सोनिया गांधी ने नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जाने के केस में अपना जवाब दाखिल किया है। शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट को दिए जवाब में कहा उनके खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका गलत और अनुमानित तथ्यों पर आधारित है। यह याचिका ओछी राजनीति से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। स्पेशल जज विशाल गोगने की कोर्ट में वकील के जरिए दायर जवाब में सोनिया ने भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले वोटर लिस्ट में शामिल होने से जुड़े आरोपों का खंडन किया। साथ ही पुनर्विचार याचिका को खारिज करने की मांग की है। मामले की सुनवाई अब 21 फरवरी को होगी।
सोनिया ने कोर्ट को जवाब देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने ऑथेंटिक रिकॉर्ड की जगह अनुमानों, मीडिया रिपोर्टों और व्यक्तिगत धारणाओं के आधार पर लापरवाही से गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों में किसी भी खास दस्तावेज को जाली या गलत साबित नहीं किया गया है और जरूरी विवरण की कमी है। नागरिकता से जुड़े मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि वोटर लिस्ट तैयार करना और उसका रखरखाव चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। नागरिकता से जुड़े मामले पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) बनाना और उसे अपडेट रखना चुनाव आयोग की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में आपराधिक अदालतें अगर किसी व्यक्ति की निजी शिकायत पर दखल देती हैं, तो यह सही नहीं है। क्योंकि ऐसा करना चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाएगा।

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सुपीम कोर्ट ने नाबालिग को 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को गर्भपात की दी अनुमति 

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 17 साल की एक नाबालिग लड़की की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को गर्भपात करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला, खासकर नाबालिग को, उसकी इच्छा के खिलाफ प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुयान की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट के सामने मामला एक नाबालिग लड़की का था, जो पड़ोस के एक लड़के के साथ रिश्ते के दौरान प्रेग्नेंट हो गई थी और उसने मांग की है कि उसकी प्रेग्नेंसी खत्म कर दी जाए।
कोर्ट ने हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि वे सावधानियों को ध्यान में रखते हुए लड़की का गर्भपात करें। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि गर्भावस्था को पूरा समय दिया जाए तो मां और बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि मां की इच्छा और उसका अपने शरीर पर अधिकार सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर कोई महिला, खासकर नाबालिग प्रेग्नेंसी जारी नहीं रखना चाहती तो कोर्ट उसे मजबूर नहीं कर सकता।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 24 हफ्ते तक गर्भपात की अनुमति हो सकती है, तो फिर 30 हफ्ते में क्यों नहीं। कई बार किसी महिला को यह फैसला लेने में समय लगता है कि वह प्रेग्नेंसी खत्म करना चाहती है या नहीं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यदि अदालतें ऐसे मामलों में मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति नहीं देतीं तो महिलाएं गैर-कानूनी और असुरक्षित तरीकों का सहारा लेने को मजबूर होती हैं। झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाएंगी जो खतरनाक हो सकता है।

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इस बार विधानसभा चुनाव जीतकर ममता सीएम बनी तो तोड़ देंगी शीला दीक्षित का रिकॉर्ड

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव होना है। सीएम ममता बनर्जी अगर अगले कार्यकाल में भी सीएम बनती हैं तो वे दिल्ली की भूतपूर्व सीएम शीला दीक्षित का रिकार्ड तोड़ देंगी। शीला दीक्षित 15 साल 25 दिन तक सीएम रही थीं। बंगाल में फिलहाल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस एकमात्र पार्टी है, जो बीजेपी से लोहा लेती रही हैं। ममता ने अपने दम पर साढ़े 3 दशक से ज्यादा समय तक बंगाल में शासन करने वाले वामपंथी दलों के ग्रुप- लेफ्ट फ्रंट को सत्ताच्यूत करने में पहली बार 2011 में सफलता पाई थी। तब से वे बंगाल पर एकछत्र राज कर रही हैं। देश में बीजेपी के उभार और पीएम मोदी की लहर के बावजूद ममता ने टीएमसी को अभी तक मजबूत बनाए रखा है। बंगाल के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस बार की तरह ही पूरी ताकत झोंक दी थी। पीएम मोदी से लेकर बीजेपी के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने बंगाल के तूफानी दौरे किए थे। नतीजे आए बीजेपी की सीटें विधानसभा में 2 से बढ़ कर 77 हो गईं। टीएमसी की सीटें भी घटीं, लेकिन ममता तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही। 
विश्लेषकों ने इसे उनका करिश्मा नहीं, बल्कि मुस्लिम वोटों का ममता के पक्ष में इकतरफा ध्रुवीकरण माना। बंगाल में तकरीबन 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है। टीएमसी को 2021 में 49 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी टीएमसी से 10 फीसदी वोट लाकर दूसरे नंबर पर रही। बीजेपी के प्रबल विरोध के बावजूद अपनी जीत से उत्साहित ममता ने पीएम बनने के सपने भी देखने शुरू कर दिए थे। 
रिपोर्ट के मुताबिक शीला दीक्षित सबसे लंबे समय तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। वे 3 दिसंबर 1998 से 28 दिसंबर 2013 तक दिल्ली की सीएम रहीं। उनका कुल कार्यकाल 15 साल 25 दिन का रहा। उनके नाम एक और रिकार्ड है। दिल्ली में पुरुष और महिला मुख्यमंत्रियों में उनका नाम सर्वाधिक समय तक सीएम रहने वालों में सबसे ऊपर है। सीएम के रूप में उन्होंने दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने में अहम योगदान दिया। शीला दीक्षित के बाद महिला मुख्यमंत्रियों में सर्वाधिक समय का रिकार्ड ममता बनर्जी ने बना लिया है। ममता ने करीब 14 साल से अधिक का रिकार्ड बना लिया है, जो शीला दीक्षित से कुछ ही महीने कम है। लंबे समय तक सीएम रहने वाली तीसरी सीएम रहीं जे जयललिता वे 14 साल और 124 दिन तक तमिलनाडु की सीएम रही थीं।
बता दें देश में अब तक कुल 18 महिला मुख्यमंत्री बनी हैं। पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में सुचेता कृपलानी का नाम आता है। वे 1963 में यूपी की सीएम बनीं। दूसरी सीएम रहीं शीला दीक्षित। वे दिल्ली 15 साल से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहीं। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी 2011 से अब तक सीएम पद पर हैं। अन्य महिला मुख्यमंत्रियों में सुचेता कृपलानी, नंदिनी सत्पथी (ओडिशा), शशिकला काकोडकर (गोवा), सैयदा अनवरा तैमूर (असम), वीए जानकी रामचंद्रन (तमिलनाडु), जे जयललिता (तमिलनाडु), मायावती (उत्तर प्रदेश), राजिंदर कौर भट्टल (पंजाब), राबड़ी देवी (बिहार), सुषमा स्वराज (दिल्ली), उमा भारती (मध्य प्रदेश), वसुंधरा राजे (राजस्थान), आनंदीबेन पटेल (गुजरात), मेहबूबा मुफ्ती (जम्मू-कश्मीर), आतिशी (दिल्ली) और रेखा गुप्ता (दिल्ली)।
ममता बनर्जी की मूल पार्टी कांग्रेस रही है। बाद में उन्होंने अपनी पार्टी- टीएमसी बनाई। वामपंथी शासन से लगातार लडती रहीं। आखिरकार उन्हें 2011 में वामपंथी शासन को खत्म करने में सफलता मिली। तब से उन्होंने दो अहम काम किए हैं। आधी आबादी के रूप में ख्यात महिला शक्ति को अपने साथ जोड़े रखने के लिए उन्होंने उनके लिए गर्भावस्था से लेकर बुढ़ापे तक के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाईं। उनकी लक्खी भंडार योजना बमाल की महिलाओं में सबसे पापुलर है। इसके अलावा भी उन्होंने कई योजनाएं युवाओं के लिए भी चलाई हैं। नतीजा यह कि मौजूदा विधानसभा में बीजेपी को छोड़ कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के साथ दूसरी विरोधी भी शून्य पर हैं।
ममता बनर्जी यह भी समझ रही हैं कि बीजेपी से मुकाबला इस बार पहले के मुकाबले थोड़ा कठिन है। इसकी वजह यह है कि पिछली बार उन्हें जो 49 फीसदी वोट मिले थे, उसमें 30 फीसदी तो अकेले मुस्लिम थे। बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए मुसलमानों ने कांग्रेस और वामपंथियों का मोह त्याग कर एकमुश्त टीएमसी को वोट किया था यानी 70 फीसदी हिन्दुओं में सिर्फ 19 फीसदी वोट ही उन्हें मिले थे1 इस बार टीएमसी से निष्कासित नेता हुमायू कबीर के अलग पार्टी बना लेने से मुस्लिम वोटों में विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। ओवैसी ने भी हुमायू कबीर से हाथ मिला लिया है1 यह मुस्लिम मतों में विभाजन का स्पष्ट संकेत है। तीसरा खतरा बन कर उभरी हैं ईडी और सीबीआई जैसी केंद्री जांच एजेंसियां उनसे ममता लगातार पंगा लेती रही हैं, लेकिन आई-पैक रेड मामले में उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

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मुंबई में पहली बार BJP की मेयर, रितु तावड़े होंगी महापौर, शिंदे की पार्टी का होगा Deputy Mayor

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BMC Mayor: मुंबई का महापौर कौन होगा, इसकी स्थिति साफ हो गई है. पहली बार मुंबई में BJP का मेयर होगा. मुंबई भाजपा अध्यक्ष ने घोषणा करते हुए जानकारी दी है, कि रितु तावड़े महापौर बनेंगी और शिवसेना गुट के संजय शंकर उपमहापौर होंगे.

मुंबई के मेयर के लिए पहली बार महिला के आरक्षित है. काफी दिनों से कई महिलाओं के नाम की चर्चा हो रही थी. कई नाम को लेकर अटकलें लगा रहे थे, लेकिन उन अचकलों पर विराम लग गया. यानी महापौर का नाम फाइनल हो गया. रितु तावड़े को भाजपा की ओर से महापौर बनाया जाएगा.

कौन हैं रितु तावड़े
रितु तावड़े भाजपा की वरिष्ठ नेत्री हैं. उन्होंने वार्ड नंबर 132 से जीत दर्ज की है. रितु तीन बार पार्षद रह चुकी हैं. पहली वार वार्ड नंबर 127 से दूसरी बार वार्ड नंबर 121 और अब 132 नंबर वार्ड से जीत दर्ज की है. रितु इसके अलावा मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की एजुकेशन कमिटी की चेयरमैन भी रह चुकी हैं. रितु इससे पहले कांग्रेस में थीं. 2012 में कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हुई थी.

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बच्चों को चढ़ाया गया एचआईवी संक्रमित रक्त, हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज

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रांची। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के गंभीर मामले में झारखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद आखिरकार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर चाईबासा सदर थाना में सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के तत्कालीन लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार समेत अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
यह घटना अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है। चाईबासा सदर अस्पताल में 5 से 7 वर्ष की आयु के पांच बच्चों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया। बाद में जब जांच कराई गई तो सभी बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया। बच्चों के परिजनों ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक में रक्त की जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई।
मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम कुमार की अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर और मानव जीवन से जुड़ा मामला बताया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार संबंधित थाना में शिकायत दर्ज कराएं और थाना प्रभारी तत्काल एफआईआर दर्ज करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में देरी अस्वीकार्य है और इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा आती है। अदालत के आदेश के बाद पीड़ित बच्चों में से एक की मां की ओर से दिए गए आवेदन पर चाईबासा सदर थाना में मामला दर्ज किया गया।
सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार ने बताया कि आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ब्लड बैंक में निर्धारित मानकों के अनुसार रक्त की जांच नहीं की गई, जिसके कारण संक्रमित रक्त बच्चों को चढ़ा दिया गया और वे एचआईवी से संक्रमित हो गए। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित दस्तावेजों व कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई थी कि घटना उजागर होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में करीब चार महीने की देरी हुई। अदालत ने इसे सिस्टम की गंभीर विफलता करार दिया था।
मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। साथ ही तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार मांझी को निलंबित किया गया और लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को सेवामुक्त कर दिया गया था। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी चाईबासा जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इस मामले को लेकर झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में परिजनों ने रांची में विधानसभा के सामने धरना दिया था। बाद में संगठन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद अदालत के हस्तक्षेप से एफआईआर दर्ज हो सकी। संगठन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और राज्य के ब्लड बैंक सिस्टम में व्यापक सुधार की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी भयावह घटना दोबारा न हो।

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सीएम रेखा गुप्ता का वादा कहा- दिल्ली की लैंडफिल साइट्स से जल्द खत्म होंगे कचरे के पहाड़ 

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के भलस्वा, गाजीपुर और ओखला क्षेत्रों में स्थित कचरे के विशाल पहाड़ों को खत्म करने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण कार्ययोजना साझा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कचरा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा करते हुए बताया कि सरकार ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट्स पर जमी लीगेसी वेस्ट (सालों से जमा पुराने कचरे) को साफ करने के लिए पूरी शिद्दत से जुटी हुई है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस साल के अंत तक इन दोनों साइट्स पर मौजूद दशकों पुराने कचरे के ढेर को पूरी तरह संसाधित कर समाप्त कर दिया जाएगा।
लीगेसी वेस्ट के निपटान को एक बड़ी चुनौती मानते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026 के अंत तक ओखला और भलस्वा को कचरा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कचरे में मिट्टी, प्लास्टिक, कांच और धातुओं का मिश्रण होता है, जिसे वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग कर (सेग्रीगेट) प्रोसेस किया जा रहा है। हालांकि, गाजीपुर लैंडफिल साइट की जटिलताओं को देखते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि वहां के कचरे के पहाड़ को पूरी तरह खत्म करने में दो साल का अतिरिक्त समय लग सकता है। दिल्ली में प्रतिदिन पैदा होने वाले नए कूड़े के शत-प्रतिशत प्रबंधन के लिए प्रसंस्करण संयंत्रों (प्रोसेसिंग प्लांट्स) की क्षमता में लगातार विस्तार किया जा रहा है। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि पिछले ढाई दशकों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों ने कचरा प्रबंधन और बायोगैस संयंत्रों की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए। उन्होंने दावा किया कि राजधानी का पहला प्रभावी बायोगैस प्लांट उनकी सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हो सका है। कचरा प्रबंधन की नई तकनीकों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 200 टन गोबर संसाधित करने वाला वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट सुचारू रूप से कार्य कर रहा है, जबकि 400 टन की अतिरिक्त क्षमता वाले नए संयंत्र इस वर्ष के अंत तक चालू हो जाएंगे। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को इन कचरे के पहाड़ों से मुक्ति दिलाकर एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है। 

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बाघ जैसी आंखों वाली पप्पू देवी 20 साल बाद फिर हुईं वायरल, बेटी भी कम नहीं खूबसूरत..

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नई दिल्ली । राजस्थान(Rajasthan) की पप्पू देवी(Pappu Devi) फिर से सुर्खियों में हैं। उनकी बाघ जैसी आंखों (eyes like a tigress)वाली फोटो करीब 20 साल(approximately 20 years old) बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह फोटो पुष्कर कैमल फेयर (Pushkar Camel Fair)में ली गई थी, और बाद में पोस्टकार्ड्स पर छपकर देश-विदेश(national and international publications.) में उनकी पहचान बना दी थी। उनकी आंखों की खासियत ने पप्पू देवी को इतना मशहूर बना दिया कि पुष्कर मेले में लोग उन्हें बिना नाम पूछे ही पहचानने लगे।
हालांकि वायरल तस्वीरों के बावजूद पप्पू देवी का जीवन अब भी साधारण है। वे आज भी पुष्कर में ही रहती हैं और हाथ से बने बैग और सॉविनियर्स का छोटा स्टॉल चलाती हैं। उनकी आंखों की खासियत देखकर कई टूरिस्ट्स उनके स्टॉल पर आते ही चौंक जाते हैं।

इतना ही नहीं, पप्पू देवी की बेटी भी अपनी मां की खूबसूरती में कम नहीं है। उसकी आंखें पूरी तरह मां की आंखों जैसी हैं और ये देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। मां-बेटी की तस्वीरें इंस्टाग्राम के हिस्टोरिक पेज पर पोस्ट की गई हैं, जिसे देखकर फैंस उनकी आंखों के जादू की तारीफ कर रहे हैं।

20 साल पुरानी इस तस्वीर ने न सिर्फ पप्पू देवी को पहचान दिलाई बल्कि उनकी बेटी को भी भविष्य में मेले में आने वाले लोगों का ध्यान खींचने वाला बनाया। पप्पू देवी के जीवन में यह पहचान सिर्फ नाम और शोहरत तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी आंखों की वजह से लोगों का आकर्षण हमेशा कायम रहा।

आज भी पुष्कर मेले में आने वाले कई लोग उनकी आंखें देखकर चौंक जाते हैं और फिर समझ पाते हैं कि उन्होंने पहले कहीं पप्पू देवी को देखा था। मां और बेटी की आंखों की खूबसूरती ने सोशल मीडिया पर भी तहलका मचा दिया है, और ये तस्वीरें पप्पू देवी के नाम को आज भी यादगार बनाती

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