17.3 C
London
Saturday, August 22, 2026
HomeLatest Newsबच्चों को चढ़ाया गया एचआईवी संक्रमित रक्त, हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर...

बच्चों को चढ़ाया गया एचआईवी संक्रमित रक्त, हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

रांची। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के गंभीर मामले में झारखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद आखिरकार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर चाईबासा सदर थाना में सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के तत्कालीन लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार समेत अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
यह घटना अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है। चाईबासा सदर अस्पताल में 5 से 7 वर्ष की आयु के पांच बच्चों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया। बाद में जब जांच कराई गई तो सभी बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया। बच्चों के परिजनों ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक में रक्त की जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई।
मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम कुमार की अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर और मानव जीवन से जुड़ा मामला बताया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार संबंधित थाना में शिकायत दर्ज कराएं और थाना प्रभारी तत्काल एफआईआर दर्ज करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में देरी अस्वीकार्य है और इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा आती है। अदालत के आदेश के बाद पीड़ित बच्चों में से एक की मां की ओर से दिए गए आवेदन पर चाईबासा सदर थाना में मामला दर्ज किया गया।
सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार ने बताया कि आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ब्लड बैंक में निर्धारित मानकों के अनुसार रक्त की जांच नहीं की गई, जिसके कारण संक्रमित रक्त बच्चों को चढ़ा दिया गया और वे एचआईवी से संक्रमित हो गए। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित दस्तावेजों व कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई थी कि घटना उजागर होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में करीब चार महीने की देरी हुई। अदालत ने इसे सिस्टम की गंभीर विफलता करार दिया था।
मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। साथ ही तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार मांझी को निलंबित किया गया और लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को सेवामुक्त कर दिया गया था। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी चाईबासा जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इस मामले को लेकर झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में परिजनों ने रांची में विधानसभा के सामने धरना दिया था। बाद में संगठन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद अदालत के हस्तक्षेप से एफआईआर दर्ज हो सकी। संगठन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और राज्य के ब्लड बैंक सिस्टम में व्यापक सुधार की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी भयावह घटना दोबारा न हो।

Previous article7 साल बाद पाकिस्तान की जेल से छूटकर घर पहुंचे प्रसन्नजीत, बालाघाट में जश्न का माहौल
News Desk

Amresh Majhi’s Journey from Banking Professional to Entrepreneur and Manufacturer

Sundergarh, Odisha: Amresh Majhi has built a diverse professional career that has taken him from banking and financial services to international corporate assignments and...

Oxford Conference Highlights Alex Sam’s Research on Orphan Care and Family Environments

Oxford, UK: Alex Sam, a social work professional and researcher, presented his research on orphan care and family-based care during the 7th Global Conference...