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Monday, August 10, 2026
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BMC चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत, मुंबई को पहली बार मिलेगा BJP का मेयर

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मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के निकाय चुनाव (Local Body Elections.) में शुक्रवार को भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (Mahayuti Alliance) को बड़ी जीत मिली। बीएमसी में भी भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन ने मिलकर ठाकरे बंधुओं की शिवसेना यूबीटी और एमएनएस को हरा दिया। शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे तक के आंकड़े के अनुसार, भाजपा 88, शिवसेना 28, शिवसेना यूबीटी 65, एमएनएस 6, कांग्रेस 24 वार्डों में या तो जीत चुकी है या फिर बढ़त बनाए हुए है। बीएमसी में भाजपा का पहली बार मेयर बनने जा रहा है, जोकि भगवा दल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले तीन दशक से बीएमसी की कमान ठाकरे परिवार के पास ही रही है। ऐसे में अब इसमें बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भाजपा की इस जीत के पीछे 5 बड़ी वजहे हैं।

पीएम मोदी पर जनता का भरोसा
पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से भाजपा पीएम मोदी के नेतृत्व में विभिन्न चुनावों में जीत दर्ज करती आई है। लोकसभा में लगातार तीन बार से सत्ता में आ रही भाजपा पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बंपर सीटों से जीती। एक दशक में विपक्ष को भाजपा ने बुरी तरह से उन राज्यों में भी पराजित किया है, जहां कुछ दशक पहले कोई सोच नहीं सकता था। मुंबई में मिली इस जीत के पीछे भी पीएम मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। जीत के बाद देवेंद्र फडणवीस ने भी इसका जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास के विजन के साथ भाजपा ने चुनाव लड़ा और जीत मिली। फिलहाल, विपक्ष के पास पीएम मोदी का तोड़ ढूंढ पाना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है।

शिवसेना में टूट
साल 2019 में शिवसेना और भाजपा की राह तब अलग हो गई, जब विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने ढाई साल के लिए सीएम पद की मांग कर दी। इसके बाद, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने साथ मिलकर सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 2022 में शिवसेना टूट गई और एकनाथ शिंदे कई विधायकों और सांसदों को अपने साथ ले गए। भाजपा ने शिंदे को सीएम बना दिया। बाद में शिंदे की पार्टी को शिवसेना नाम से जाना गया और उद्धव ठाकरे को शिवसेना यूबीटी। इसके बाद से उद्धव ठाकरे की ताकत लगातार कमजोर होती चली गई। इस बीएमसी चुनाव में भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 28 वार्ड्स में जीत हासिल की और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के वोट काटे, जिसका सीधा लाभ भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को मिला।

मनसे के साथ आने पर उत्तर भारतीय शिवसेना यूबीटी से नाराज?
साल 2006 में अलग पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए उद्धव के साथ गठबंधन किया था। मुंबई में रहने वाले मराठी वोटर्स का मनसे को काफी सपोर्ट मिलता रहा है और इस चुनाव में भी शिवसेना और मनसे के गठबंधन को मराठी मतदाताओं के जमकर वोट पड़े। लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो उत्तर भारतीयों का समर्थन भाजपा को ज्यादा मिला। दरअसल, राज ठाकरे की मनसे उत्तर भारतीयों के खिलाफ लंबे समय से हिंसा करती आई है और यही वजह है कि इसका फायदा भाजपा गठबंधन को सीधे तौर पर मिला। मनसे और शिवसेना के गठबंधन ने कुछ खास कमाल नहीं दिखाया और महायुति के सामने हार गया।

भाजपा ने लगा दी पूरी ताकत, खुद फडणवीस ने संभाली कमान
बीएमसी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी कमान संभाली और जमकर प्रचार किया। भाजपा के तमाम महाराष्ट्र के मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया और जनता का समर्थन हासिल किया। उद्धव और राज ठाकरे ने भी चुनावी रैलियां कीं और भीड़ भी इकट्ठी हुई, लेकिन वोटों में यह तब्दील नहीं हो सकी। शिवसेना यूबीटी और मनसे के मुकाबले भाजपा और शिवसेना का चुनाव प्रचार ज्यादा मजबूत रहा और यही नतीजों में भी दिखाई दिया।

उद्धव के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी का भाजपा को फायदा
देश के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी पर पिछले लगभग तीन दशकों से ठाकरे परिवार का कब्जा रहा है। पहली बार भाजपा को जीत मिली है। शिवसेना (अविभाजति) को पिछले बार तक भाजपा से ज्यादा वार्ड पर जीत मिली, जिससे उसका लंबे समय तक मेयर रहा। लंबे समय तक राज करने की वजह से शिवसेना यूबीटी के खिलाफ एक एंटी इनकमबेंसी भी बनी और जिसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिला। साथ ही, एकनाथ शिंदे की शिवसेना का साथ होने के कारण भाजपा का पलड़ा भारी रहा।

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