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कोयंबटूर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कि भारतीय सेना भगवान शिव से प्रेरणा लेकर कार्य करती है। जैसे भगवान शिव सृजन और संहार दोनों के प्रतीक हैं, वैसे ही भारतीय सशस्त्र बल मानवीय सहायता और कठोर कार्रवाई—दोनों में समान रूप से सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि संकट के समय सेना शिव की करुणा का रूप धारण कर लोगों की मदद करती है और आवश्यकता पड़ने पर रुद्र की गति से “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी निर्णायक कार्रवाई भी करती है।
रक्षा मंत्री रविवार को ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के साथ कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान शिव अनादि, अनंत और सत्य के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा जो सत्य है, वही शिव है। वेल्लंगिरी पहाड़ियों को शिव की पवित्र गुफाओं से जोड़ते हुए उन्होंने इसे ‘दक्षिण का कैलाश’ बताया और कहा कि यह भूमि आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है।
रक्षा मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे अंतरिक्ष मिशन केवल तकनीकी उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि वे भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत अंतरिक्ष में उपग्रह भेज रहा है, उसी तरह वह अपनी वैज्ञानिक संस्कृति को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सुरक्षा केवल हथियारों, तकनीक और सैनिकों की शारीरिक शक्ति तक सीमित नहीं है।
“सच्ची सुरक्षा एक मजबूत राष्ट्रीय सोच से आती है। उन्होंने कहा, डर पर आधारित समाज लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर काशी दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में गिना जाता है, वहीं तमिल संस्कृति भी विश्व की सबसे प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। भाषा, संस्कृति और खानपान की समृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पवित्र धरती पर आना उनके लिए आशीर्वाद जैसा है। अंत में उन्होंने कहा, मैं यहां एक अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि एक साधक और आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में आया हूं।
