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Thursday, September 10, 2026
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स्वदेशी स्टील से निर्मित आईएनएस अंजदीप नौसेना में शामिल होने को तैयार

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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में जल्द ही एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। दुश्मनों की पनडुब्बियों को समुद्र की अथाह गहराइयों में ही नेस्तनाबूद करने की अचूक क्षमता रखने वाला अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस अंजदीप नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करता यह युद्धपोत न केवल तकनीक के मामले में विश्वस्तरीय है, बल्कि इसका निर्माण पूर्ण रूप से स्वदेशी स्टील से किया गया है, जो देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का एक जीवंत प्रमाण है।
आईएनएस अंजदीप भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कार्वेट है। इससे पहले आईएनएस अरनाला और आईएनएस एंड्रोथ को सफलतापूर्वक नौसेना की सेवा में समर्पित किया जा चुका है। इन जहाजों का मुख्य उद्देश्य नौसेना के पुराने हो रहे अभय-श्रेणी के जहाजों का स्थान लेना और तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों को अधिक सटीक और घातक बनाना है। इस गौरवशाली परियोजना में सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज इस्पात उत्पादक कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सेल ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड द्वारा तैयार किए जा रहे आठ कार्वेट जहाजों के लिए लगभग 3,500 टन विशेष-ग्रेड स्टील की पूरी मात्रा की आपूर्ति की है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का उत्पादन सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में किया गया है। यह उपलब्धि भारत की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और जटिल रक्षा उपकरणों के लिए आवश्यक कच्चा माल देश में ही तैयार करने की क्षमता को रेखांकित करती है। सेल इससे पहले भी आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस सूरत जैसे महत्वपूर्ण युद्धपोतों के लिए विशेष-ग्रेड स्टील की आपूर्ति कर चुकी है। आईएनएस अंजदीप का जलावतरण न केवल नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कद का संदेश भी देगा। यह युद्धपोत आधुनिक रडार, सोनार प्रणालियों और घातक हथियारों से लैस है, जो इसे समुद्री सीमाओं का एक अभेद्य प्रहरी बनाते हैं।

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News Desk

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