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Friday, September 25, 2026
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‘सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में, यह किसी को पता नहीं होता’, आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि, किसी को कुत्तों को भी यह सलाह देनी चाहिए कि वे लोगों को न काटें. अदालत ने कहा कि, कोई भी जानवर का मन नहीं पढ़ सकता कि कुत्ता काटने के मूड में है या नहीं.

यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच के सामने आया. जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते किसी को तब काट सकते हैं या उसका पीछा कर सकते हैं जब वह व्यक्ति टू-व्हीलर या साइकिल पर हो, और वह व्यक्ति गिर सकता है या एक्सीडेंट हो सकता है.

जस्टिस नाथ ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल से पूछा, “जबकि वे सड़क पर दौड़ते हैं, यह अपने आप में गुजरने वाली गाड़ियों, खासकर टू-व्हीलर और साइकिल सवारों के लिए खतरनाक है… क्या आप टू-व्हीलर पर रहे हैं या नहीं”, सिब्बल ने जवाब दिया कि वह अपने करियर के शुरुआती दिनों में रहे थे.

जस्टिस नाथ ने कहा कि काटना ही अकेला मुद्दा नहीं है. कुत्ते साइकिल पर लोगों का पीछा करते हैं. इस पर सिब्बल, जो इस मामले में एक पार्टी की तरफ से पेश हुए थे, ने कहा कि हर कुत्ता ऐसा नहीं करता और इसकी पहचान करना जरूरी है.

जस्टिस नाथ ने कहा कि, आप कैसे पहचानेंगे कि सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, आपको नहीं पता. सिब्बल ने सवाल करते हुए कहा कि क्या इसका हल यह है कि सभी कुत्तों को शेल्टर दिया जाए. इस पर बेंच ने कहा कि यह पक्का करने के लिए एक एक्सरसाइज होनी चाहिए कि सड़कें या गलियां कुत्तों से फ्री हों.

सिब्बल ने कहा कि कुत्ते कंपाउंड में रहते हैं और वे यूनिवर्सिटी में रहते हैं. जब वे यूनिवर्सिटी में थे तो वहां कुत्ते थे और किसी ने उन्हें नहीं काटा. सिब्बल ने कहा कि, JNU में कई कुत्ते हैं. इस पर जस्टिस मेहता ने पूछा कि क्या वे गंभीर हैं. जस्टिस मेहता ने कहा सिब्बल से कहा कि, उनकी जानकारी पुरानी हो चुकी है. एनएलएस बैंगलोर ने कई हमलों की रिपोर्ट की है.

जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए एक एक्सरसाइज होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि, कोई यह नहीं कह रहा है कि कुत्तों को हटाकर गोली मार दो, नहीं…सड़कों को कुत्तों से खाली करना होगा. सिब्बल ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए साइंटिफिक तरीका अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना इसका हल नहीं है.

सिब्बल ने कुत्तों के काटने और बेकाबू कुत्तों के रिहैबिलिटेशन से निपटने के लिए सुझाव दिए. जस्टिस मेहता ने कहा, “बस एक चीज जो छूट गई है, वह है कुत्ते को काउंसलिंग देना कि एक बार वापस छोड़े जाने के बाद कुत्ता काटे नहीं…” सिब्बल ने कहा कि यह शायद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया होगा और मुझे यकीन है कि आपका मतलब यह नहीं है.

जस्टिस मेहता ने सवाल करते हुए कहा कि जहां तक ​​इंस्टीट्यूशन की बात है, वे सड़कें नहीं हैं और पूछा, आपको कोर्ट परिसर, यूनिवर्सिटी में कुत्तों की जरूरत क्यों है. बेंच ने कहा कि नियम कहते हैं कि उन्हें (कुत्तों) उसी एरिया में वापस छोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने पूछा कि फिर इंस्टीट्यूशन कुत्तों से कैसे मुक्त होंगे. क्या उन्हें सड़कों पर छोड़ देना चाहिए. मामले पर सुनवाई जारी है.

पिछले साल 7 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे इंस्टीट्यूशनल एरिया में कुत्तों के काटने की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी को देखते हुए, पब्लिक सेफ्टी, हेल्थ और आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के हित में निर्देश जारी करना जरूरी है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे कुत्तों को तय शेल्टर में ले जाया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट एक स्वतः संज्ञान केस की सुनवाई कर रहा था, जो 28 जुलाई को दिल्ली में, खासकर बच्चों में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज होने की एक मीडिया रिपोर्ट पर शुरू किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं से बाहर बढ़ा दिया था और निर्देश दिया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पार्टी बनाया जाए.

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