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Tuesday, August 11, 2026
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यूं ही याचिकाएं दाखिल करते रहेंगे, तो एसआईआर के मुद्दे की सुनवाई कब होगी?

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कई राज्यों से लगातार दाखिल हो रही याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों से एसआईआर पर लगातार दाखिल हो रही याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जाहिर की। सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर आप लोग यूं ही याचिकाएं दाखिल करते रहेंगे, तो एसआईआर के मुख्य मुद्दे की सुनवाई कब होगी? उन्होंने कहा कि इतनी ज्यादा याचिकाएं दायर होने से मुख्य मामले की सुनवाई पर भी असर हो रहा है।
इसके साथ ही सीजेआई ने यह भी कहा कि लगता है सभी राजनीतिक व्यक्ति यहां सिर्फ सुर्खियां बटोरने आ रहे हैं। कोर्ट ने यूपी, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु से आई कई याचिकाओं पर असंतोष जताते हुए कहा कि “दाखिल करते रहिए, राजनीतिकरण करते रहिए।” अलग-अलग राज्यों की याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणी में विभाजित किया जाए, ताकि मुख्य मुद्दे पर सुनवाई सुचारू रूप से की जा सके। तीन अलग-अलग राज्यों से संबंधित एसआईआर मामलों को अगले हफ्ते तीन अलग-अलग तारीखों पर सूचीबद्ध किया जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि यूपी जैसा बड़ा राज्य तय टाइमलाइन में एसआईआर पूरा नहीं कर पाएगा। इस पर सीजेआई ने यूपी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगले मंगलवार को सुनवाई होगी। सीजेआई ने फिर दोहराया कि आप लोग इसी तरह नई-नई याचिकाएं लाते रहेंगे, तो मुख्य केस की सुनवाई कैसे होगी? तमिलनाडु एसआईआर मुद्दे पर एक वकील ने कहा कि राज्य के प्रवासी मजदूर पोंगल के बाद ही लौटते हैं, इसलिए कोर्ट को इसे ध्यान में रखना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह पहले बिहार मामले को प्राथमिकता देगी, क्योंकि उसमें होने वाला फैसला सभी राज्यों को प्रभावित करेगा।
एसआईआर के कार्य में लगे बीएलओ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बीएलओ से जुड़े सभी निर्देश पूरे देश में लागू होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं में बीएलओ की सुरक्षा और प्रशासनिक निर्देश पूरे देश में लागू होंगे, ये सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं हैं। 
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जमीनी स्तर पर बीएलओ को मिल रही धमकियां गंभीर मुद्दा बन सकती हैं। इनकी सुरक्षा नजरअंदाज नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। उसने कहा कि बीएलओ से जुड़े निर्देश देश भर में लागू होंगे। इस सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि बीएलओ की सुरक्षा राज्य पुलिस के सहयोग पर निर्भर है। जरूरत पड़ी तो केंद्रीय बल तैनात किए जा सकते हैं। प्रभावित कर्मचारी राज्य ईसीआई और जिला निर्वाचन अधिकारी से सुरक्षा के लिए संपर्क कर सकेंगे। मतदाता नामांकन और नागरिकता से जुड़े मामलों की अगली सुनवाई 17 को होगी।

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