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Friday, September 25, 2026
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भारतीय रेल ने रचा इतिहास! कर दिखाया वो कारनामा जो ब्रिटेन, रूस और चीन भी नहीं कर पाए

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नई दिल्ली। देश की लाइफलाइन कही जाने वाली भारतीय रेल (Indian Railways) ने एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसने दुनिया की बड़ी रेल ताकतों को भी पीछे छोड़ दिया है। भारतीय रेल ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क (Broad Gauge Network) का 99.2 फीसदी हिस्सा बिजली (Electrified) से चलने वाला बना दिया है। इसका मतलब है कि अब ज्यादातर ट्रेनें डीजल (Diesel) की बजाय बिजली से चलेंगी।

यह सिर्फ तकनीक की बड़ी सफलता नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी बड़ा फायदा होगा और ईंधन की भी बचत होगी। सबसे खास बात यह है कि इस मामले में भारत अब ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे बड़े देशों से भी आगे निकल गया है। जहां इन देशों में रेलवे नेटवर्क का बड़ा हिस्सा अभी भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक नहीं है, वहीं भारत लगभग 100 फीसदी के लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच चुका है। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय रेल तेजी से आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बन रही है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, जहां ब्रिटेन में सिर्फ 39 फीसदी, रूस में 52 फीसदी और चीन में 82 फीसदी रेलवे नेटवर्क ही इलेक्ट्रिफाइड है, वहीं भारत लगभग 100 फीसदी के टारगेट तक पहुंच चुका है। यह बदलाव बीते एक दशक में बेहद तेज रफ्तार से हुआ है। वर्ष 2014 से 2025 के बीच 46,900 रूट किलोमीटर रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण किया गया, जो पिछले 60 वर्षों में हुए कुल विद्युतीकरण से दोगुना से भी ज्यादा है।

आज देश के 14 रेलवे जोन पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड हो चुके हैं, जिनमें सेंट्रल, ईस्टर्न, नॉर्दर्न और वेस्टर्न रेलवे जैसे बड़े जोन शामिल हैं। इसके साथ ही 25 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100 फीसदी विद्युतीकरण पूरा कर चुके हैं। उत्तर-पूर्वी भारत के अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में भी पूरा नेटवर्क इलेक्ट्रिक हो चुका है, जबकि असम 92 फीसदी के साथ अंतिम चरण में है।

इस उपलब्धि का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को मिलने वाला है। आंकड़ों के अनुसार, रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में करीब 89 फीसदी कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करता है। जहां सड़क मार्ग से एक टन माल को एक किलोमीटर ले जाने पर 101 ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड निकलती है, वहीं रेल से यही उत्सर्जन सिर्फ 11.5 ग्राम है। यही वजह है कि भारतीय रेल को हरित परिवहन की रीढ़ माना जा रहा है। भारतीय रेल अब सिर्फ इलेक्ट्रिफिकेशन तक सीमित नहीं है। देशभर के 2,626 रेलवे स्टेशनों पर 898 मेगावाट सोलर पावर भी शुरू की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय रेल को नेट-जीरो कार्बन एमिटर बनाया जाए।

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