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Tuesday, August 11, 2026
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बुंदेलखंड की सुध लेने आगे आए केरल के सांसद जॉर्ज कुरियन

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नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश से राज्यसभा के कुल 11 सांसद हैं. इनमें अकेले मालवा क्षेत्र से तीन सदस्य हैं. लेकिन विकास निधि खर्च करने में सभी सांसदों का फोकस मालवा-निमाड़ के इंदौर सहित अन्य विकसित जिलों पर अधिक रहा है. जबकि बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र से कोई राज्यसभा सांसद नहीं होने के कारण यहां की लगातार उपेक्षा होती रही है. इन हालातों में केरल से राज्यसभा सांसद जॉर्ज कुरियन ही ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा फोकस बुंदेलखंड के जिलों पर किया है।

बालयोगी उमेशनाथ ने उज्जैन पर किया फोकस

बालयोगी उमेशनाथ ने अपने 98 प्रतिशत प्रस्ताव उज्जैन जिले के विकास के लिए दिए हैं. कांग्रेस के विवेक तन्खा ने प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में राशि दी है. राज्यसभा सांसदों को भी लोकसभा सांसदों की तरह हर साल पांच करोड़ रुपए विकास निधि के तौर पर मिलती है. विवेक तन्खा ऐसे सांसद हैं जिन्होंने सबसे अधिक 435 प्रस्ताव दिए हैं. ये प्रस्ताव 30 से अधिक जिलों के लिए हैं लेकिन इसके बावजूद बुंदेलखंड के जिले इससे अछूते रहे हैं।

मालवा और निमाड़ पर ध्‍यान देने वाले सांसद

मालवा और निमाड़ पर ध्यान देने वाले सांसदों में कविता पाटीदार शामिल हैं. उन्होंने 197 प्रस्तावों में से 114 पूरे कराए हैं. उन्होंने खरगोन, देवास, आगर मालवा, धार और उज्जैन में फोकस किया है. इंदौर जिले के विकास में उन्होंने सबसे ज्यादा प्रस्ताव दिए हैं. सुमेर सिंह सोलंकी ने 257 प्रस्तावों में से 42 कार्य पूरे कराए हैं. वे अपनी राशि का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बड़वानी जिले के विकास में खर्च कर रहे हैं. इसके अलावा धार, खंडवा, मंदसौर और खरगोन को भी राशि दी गई है।

किन सांसदों ने ज्यादा प्रस्‍ताव दिए

सुमित्रा वाल्मिकी ने 139 प्रस्ताव दिए जिनमें से केवल 8 पूर्ण हुए हैं. उनका फोकस भोपाल और जबलपुर पर रहा है. धार और आगर को भी इसमें शामिल किया गया है. दिग्विजय सिंह ने 301 प्रस्ताव दिए हैं जिनमें से 13 पूरे हुए हैं. उन्होंने खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर और इंदौर को राशि दी है. साथ ही राजगढ़, गुना और भोपाल में भी फोकस किया गया है. अशोक सिंह ने 54 प्रस्ताव दिए हैं लेकिन एक भी पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने खरगोन सहित अन्य जिलों को राशि दी है. बालयोगी उमेशनाथ ने कुल 55 प्रस्ताव दिए हैं जिनमें से 40 से अधिक उज्जैन जिले के लिए हैं लेकिन एक भी कार्य पूरा नहीं हुआ है. बंशीलाल गुर्जर ने 40 प्रस्ताव दिए हैं जिनमें से 39 मंदसौर जिले के लिए और एक उज्जैन के लिए है. उनका एक कार्य पूरा हो चुका है. प्रदेश के राज्यसभा सांसदों की राशि का कुल हिसाब देखें तो कुल 137.49 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. इनमें से दो साल में 66.06 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. कुल 1,653 प्रस्तावों की अनुशंसा की गई जिनमें से 212 कार्य पूरे हुए हैं. जॉर्ज कुरियन ने 41 प्रस्ताव दिए हैं।

कुरियन के प्रस्ताव को मिली गति

केरल के जॉर्ज कुरियन के प्रस्तावों को अपेक्षाकृत ज्यादा गति मिली है. उन्होंने अपने 41 प्रस्तावों में छतरपुर, पन्ना, सागर और टीकमगढ़ जिले में सबसे ज्यादा राशि दी है. इसके अलावा धार, श्योपुर, भिंड और नर्मदापुरम के साथ अपने जन्म जिला कोट्टायम को भी विकास प्रस्ताव दिए हैं. उनके केवल एक कार्य को अब तक पूर्ण किया गया है. अन्य राज्यसभा सांसदों के अपने-अपने तर्क और प्राथमिकताएं हैं लेकिन मध्यप्रदेश के अधिकांश जिलों को किसी न किसी रूप में राशि दी गई है. इसके बावजूद बुंदेलखंड के जिले अधिकांश सांसदों की प्राथमिकता में शामिल नहीं हो सके हैं।

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