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Thursday, October 29, 2026
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पुडुचेरी में कांग्रेस संभाले गठबंधन की कमान, राजनीति में नंबर ही सर्वोपरि: नारायणसामी

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पुडुचेरी। पुडुचेरी का सियासी पारा तब चढ़ गया जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम वी. नारायणसामी ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले बयान दे दिया। उनका तर्क है कि पुडुचेरी में कांग्रेस को गठबंधन की कमान संभालनी चाहिए। यह मांग केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी है जिसने साथी दल डीएमके की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।
नारायणसामी की इस दावेदारी की बुनियाद हालिया प्रदर्शन और वोट शेयर पर टिकी है। राजनीति में नंबर ही सर्वोपरि होते हैं, और यहां कांग्रेस का पलड़ा भारी है। पार्टी का दावा है कि उनके पास 26फीसदी का मजबूत वोट बैंक है। साथ ही गठबंधन सहयोगी डीएमके फिलहाल 8फीसदी वोट शेयर के साथ पीछे खड़ी दिख रही है। इन्हीं आंकड़ों के दम पर नारायणसामी का तर्क है कि जिस पार्टी की जड़ें जनता में ज्यादा गहरी हैं, नेतृत्व का हक भी उसी का बनता है।
पुडुचेरी के राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस का इतिहास काफी पुराना और दमदार रहा है। केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते यहां की सत्ता की चाबी अक्सर कांग्रेस के पास रही है जो स्थानीय भावनाओं को दिल्ली की राजनीति के साथ तालमेल बिठाकर चल सके। 2026 के चुनावों की आहट ने अब क्षेत्रीय दलों को अपनी ताकत दिखाने पर मजबूर कर दिया है। कांग्रेस को लगता है कि पिछले कुछ चुनावों के उतार-चढ़ाव के बाद अब वक्त आ गया है कि वह जूनियर पार्टनर की छवि से बाहर निकलकर फ्रंट सीट पर बैठे।
रिपोर्ट के मुताबिक अब सवाल उठ रहा है कि क्या डीएमके इस मांग के आगे झुकेगी? तमिलनाडु में मजबूत स्थिति रखने वाली डीएमके के लिए पुडुचेरी में कांग्रेस की शर्तों पर समझौता करना आसान नहीं होगा। उनके फैसले को कई कारक प्रभावित करेंगे। क्या डीएमके के समर्थक नेतृत्व छोड़ने के फैसले को स्वीकार करेंगे? और क्या विपक्षी दलों को हराने के लिए क्या दोनों दल अपनी ईगो को किनारे रख पाएंगे? पुडुचेरी का यह फैसला केवल एक छोटे प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह इंडिया गठबंधन के भविष्य के समीकरणों की दिशा भी तय करेगा। वी. नारायणसामी का यह रुख केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दबाव है। 2026 के चुनावों की छाया में, कांग्रेस और डीएमके के बीच की यह सौदेबाजी भारतीय गठबंधन राजनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। यदि कांग्रेस नेतृत्व हथियाने में सफल रहती है, तो यह पार्टी के पुनरुत्थान के लिए एक बड़ा बूस्टर शॉट होगा। आने वाले महीनों में होने वाली वार्ताएं न केवल पुडुचेरी का भविष्य तय करेंगी, बल्कि पूरे देश में यह संदेश भी देंगी कि क्षेत्रीय गठबंधन में शक्ति संतुलन किस करवट बैठ रहा है।

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