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Monday, August 10, 2026
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देशभर में आज बसंत पंचमी की धूम… सरस्वती पूजा के लिए दिनभर है शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली। पंचांग के अनुसार माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि (Mas Shukla Paksha Panchami Tithi) को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार शुक्रवार को वसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार पंचमी तिथि में कोई घटत बढ़त या संशय की स्थिति नहीं है, सूर्योदय से पूर्व ही पंचमी तिथि शुरू हो गई है।

बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती (Goddess Saraswati) की पूजा का विशेष महत्व है। बसंत पंचमी का दिन शुभ कामों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन शादी-विवाह, मुंडन, नामकरण, गृह-प्रवेश और खरीदारी जैसे काम किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन विवाह के बंधन में बंधने वाले जोड़ों को देवी-देवताओं का विशेष आशीर्वाद मिलता है और उनका रिश्ता सात जन्मों तक बना रहता है। कहते हैं कि बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का तिलकोत्सव हुआ था, इसलिए यह दिन शादी के लिए खास तौर पर शुभ माना जाता है।

 

हिंदू मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। एक पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान ब्रह्मा ने बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की रचना की थी। कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी ने चार भुजाओं वाली देवी की रचना की- एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। जब मां सरस्वती ने वीणा बजाई, तो पूरी सृष्टि में स्वर और संगीत फैल गया। इसी वजह से उन्हें वाणी और ज्ञान की देवी कहा गया। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

पंचमी तिथि उपस्थित- सूर्योदय से रात्रि तक पूरे दिन
बसंत पंचमी पूजन का शुभ मुहूर्त-23 जनवरी सुबह 7:17 से 10:30 के बीच

ऋतुओं में वसंत ऋतुराज
ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत का कहना है कि भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में आने वाली ऋतुओं में वसंत को ऋतुराज माना गया है और वसंत पंचमी के दिन से वसंत ऋतु का आगमन हो जाता है। वसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का दिन भी है। वसंत पंचमी को विशेष रूप से ज्ञान, विद्या, बुद्धि, वाणी और कला की देवी सरस्वती माता के प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा उपासना कर उनसे विद्या बुद्धि ज्ञान प्राप्ति की कामना की जाती है।

पूजन का समय
23 जनवरी को सुबह 7:17 बजे सूर्योदय पंचमी तिथि के साथ होगा और सुबह 7:17 बजे से 10:30 बजे के बीच चर ,लाभ और अमृत के शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपस्थित रहेंगे। इसलिए इस बार बसंत पंचमी के पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 7:17 बजे से 10:30 के बीच रहेगा। सुबह 7:17 बजे से 10:30 बजे के बीच कभी भी पूजन कर सकते हैं।

बसंत पंचमी की पूजा विधि:
बसंत पंचमी के दिन सुबह स्नान करके साफ पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें। घर के मंदिर या साफ जगह पर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर रखें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां सरस्वती को स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाएं और पूजा की शुरुआत करें। मां को पीले फूल चढ़ाएं और हल्दी, अक्षत अर्पित करें। इसके बाद पेन, कॉपी, किताब या वाद्य यंत्र (अगर हों) मां के पास रखें। धूप-दीप दिखाएं और मां सरस्वती का ध्यान करते हुए उनका मंत्र या सरल प्रार्थना करें। पूजा के बाद पीली मिठाई जैसे बेसन के लड्डू, बूंदी, खीर या मालपुआ का भोग लगाएं। अंत में मां से ज्ञान, समझ और सही रास्ते पर चलने की प्रार्थना करें और प्रसाद सभी में बांट दें।

सरस्वती पूजा में ये चीजें जरूर करें शामिल
पीले रंग के फूल
बसंत पंचमी पर पीले रंग का खास महत्व होता है। माना जाता है कि मां सरस्वती को पीले फूल चढ़ाने से वे प्रसन्न होती हैं और ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना भी शुभ माना जाता है।

पेन, कॉपी और किताबें
सरस्वती पूजा में पेन, कॉपी और किताब रखना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इससे ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है, खासकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए यह दिन बहुत खास होता है।

पीली मिठाई का भोग
पूजा के बाद मां सरस्वती को पीले रंग की मिठाई का भोग जरूर लगाएं। बेसन के लड्डू, बूंदी, खीर या मालपुआ चढ़ाया जा सकता है। इससे मां जल्दी प्रसन्न होती हैं।

विवाह के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन का एक और विशेष महत्व है। वसंत पंचमी को मुहूर्त शास्त्र के अनुसार स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। इस दिन कोई भी शुभ मंगल कार्य करने के लिए पंचांग शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार आरंभ करना, सगाई और विवाह आदि मंगल कार्य किए जा सकते हैं।

ग्रहों का भी विशेष संयोग बन रहा है-
इस बार ग्रहों की चाल विशेष फलदायी है। मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र की उपस्थिति से चतुर्थग्रही योग बन रहा है। पंडितों के अनुसार, ग्रहों की इस स्थिति से निम्नलिखित राजयोग बन रहे हैं। बुध और सूर्य की युति से वैभव और ज्ञान में वृद्धि होगी। इस वजह से बुधादित्य व लक्ष्मी नारायण योग बन रहा है। मंगल के अपनी उच्च राशि (मकर) में होने से रुचक राजयोग का शुभ योग बन रहा है। पं. शंभुनाथ द्विवेदी के अनुसार, मीन राशि में चंद्रमा और मिथुन में गुरु के केंद्र भाव में होने से सफलता प्रदायक गजकेसरी योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दोपहर 3:59 बजे तक परिध योग रहेगा, जिसके पश्चात शिव योग प्रारंभ होगा। साथ ही दोपहर 2:33 बजे से रवि योग भी शुरू होगा, जो अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा। इन शुभ योगों में मां सरस्वती की आराधना विद्यार्थियों और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए विशेष सिद्धिदायक मानी जा रही है।

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