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Sunday, August 9, 2026
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डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज, गृहमंत्री ने लॉन्च किए चार नए टूल; उपग्रह चित्रों से बनेगा मकान सूचीकरण ब्लॉक

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नई दिल्ली|केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- ‘प्रगति’ (महिला) और ‘विकास’ (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया है। देशभर में गणना कार्यों को सुगम बनाने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने एडवांस डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इन टूल्स में डिजिटल जनगणना के दौरान, उपग्रह चित्रों की सहायता से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनेगा। देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना-2027 में शामिल होंगे।दो चरणों में होने वाली जनगणना-2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य है। पहली बार जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी। पहली बार स्व-गणना का विकल्प भी दिया जा रहा है। जनगणना-2027 के शुभंकर ‘प्रगति’ (महिला प्रगणक) और ‘विकास’ (पुरुष प्रगणक) को मैत्रीपूर्ण एवं सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही ‘प्रगति’ और ‘विकास’ 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के भी प्रतीक हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना 2027 से संबंधित जानकारी, उद्देश्य एवं प्रमुख संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और जन-सुलभ रूप में पहुंचाए जाएंगे।

जनगणना-2027 के डिजिटल टूल्स … 

जनगणना-2027 भारत की पहली तकनीकी उपकरणों द्वारा संचालित जनगणना होगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा चार प्लेटफॉर्म, सॉफ्ट लॉन्च किए गए हैं। हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब एप्लिकेशन: यह वेब-मैप एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को उपग्रह चित्रों की सहायता से तकनीकी  रूप से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाने में सक्षम बनाता है, जिससे देशभर में भौगोलिक कवरेज का मानकीकरण सुनिश्चित होता है। एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन: यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से प्रगणक मकान-सूचीकरण डेटा एकत्र एवं अपलोड कर सकते हैं। केवल सीएमएमएस पोर्टल पर पंजीकृत प्रगणक ही इसका उपयोग कर सकते हैं। यह एप्लिकेशन सीधे क्षेत्र से सर्वर तक डेटा प्रेषण की सुविधा प्रदान करता है, जिससे पारंपरिक कागजी कार्य समाप्त हो जाता है। यह एंड्रॉयड एवं आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसे 16 भाषाओं में संचालित किया जा सकता है।स्व: गणना पोर्टल:  पहली बार स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया जा रहा है। यह एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा है, जिसके माध्यम से पात्र उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। सफल पंजीकरण के बाद एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी जारी होगी। इस स्व-गणना आईडी को प्रगणक के साथ साझा किया जाएगा। इसके आधार पर दर्ज की गई सूचना की प्रगणक द्वारा पुष्टि की जा सकेगी।जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल: यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से संबंधित गतिविधियों की योजना, प्रबंधन, क्रियान्वयन और निगरानी की जाएगी। राज्य, जिला एवं तहसील स्तर के अधिकारी एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय में प्रगति और कार्य-स्थिति का अवलोकन कर सकेंगे।

सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल … 

जनगणना-2027 में घर घर जाकर सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर डेटा एकत्रित किया जाएगा। इसके जरिए पूरी कवरेज सुनिश्चित होगी। तकनीक को ध्यान में रखकर अपनाते हुए इनोवेशन और सबको साथ लेकर चलने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जनगणना-2027 सही, सुरक्षित और कम्प्रेहेन्सिव हो। जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण में गृह-सूचीकरण एवं आवास जनगणना होगी। इस दौरान आवास की स्थिति एवं घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। द्वितीय चरण में देश के प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक विवरण दर्ज किए जाएंगे। प्रथम चरण के लिए अधिसूचना सात जनवरी 2026 को जारी की गई है। मकान-सूचीकरण एवं मकान गणना एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच, प्रत्येक राज्य/संघ राज्यक्षेत्र द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की सतत अवधि में संचालित की जाएगी। घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 15 दिनों की वैकल्पिक स्व-गणना अवधि भी होगी।

द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना … 

जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में पूरे भारत में की जाएगी। लद्दाख संघ राज्यक्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों में गणना सितंबर 2026 में संपन्न होगी। जनगणना के द्वितीय चरण में जाति संबंधित प्रश्न भी शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि सभी राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों के लिए एक मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी। लद्दाख तथा हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी।

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