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Saturday, October 31, 2026
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घर में बिखरा ‘शेर’! भारत vs SA, गुवाहाटी टेस्ट में 461/8, पंत की कप्तानी पर गाज?

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Team India: टीम इंडिया के लिए ‘घर में शेर’ यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि एक सच्चाई थी. लेकिन पिछले कुछ समय से यही घर के शेर अपने ही मैदान पर लाचार नजर आ रहे हैं. जिस किले पर टीम के साथ भारतीय फैंस को भी गर्व था वो अब टूटता नजर आ रहा है. पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-0 से हार और अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी भारतीय टीम घर में कमजोर नजर आ रही है. यह टीम के लिए खराब स्ट्रेटरजी और गलत फैसलों के चलते खराब दौर है, जो कई सवाल खड़े करता है.

घर में लगातार मिल रही हैं शर्मनाक हार
भारतीय टीम की न्यूजीलैंड के खिलाफ 12 साल बाद घर में सीरीज हारने को इस पतन की शुरुआत माना जा सकता है. 36 साल बाद कीवी टीम की भारत में जीत को ‘किले’ में दरारें की तरह देखा जाए तो गलत नहीं है. उम्मीद थी कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया वापसी करेगी, लेकिन कोलकाता में शर्मनाक हार ने सभी का दिल तोड़ दिया. मात्र 124 रनों का पीछा करते हुए 93 पर ढेर हो जाना, यह दिखाता है कि परेशानी केवल पिच में नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और टीम में भी है.

कहाँ हो रही है गलती?
टीम के खराब प्रदर्शन के बीच सबसे बड़ी निराशा तो ये है कि जिन पिचों को हम ‘विदेशी टीमों के लिए जाल’ मानते थे, अब हम उसी में फंस रहे हैं. हमारे बल्लेबाज अब स्पिन को उस तरह नहीं खेल पा रहे हैं जैसे पहले खेला करते थे. टर्निंग ट्रैक पर कमजोर डिफेंसिव शॉट्स और टी20 स्टाइल की बैटिंग पर ज्यादा भरोसा टीम को ले डूब रहा है. कभी स्पिन के खिलाफ गर्दा उड़ाने वाले भारतीय शेर अब ‘मेमने’ बन चुके हैं.

टॉस पर ज्यादा भरोसा
मैच को 3 दिन में खत्म करने की जिद में भारतीय टीम खुद ही फंसती नजर आ रही है. ऐसा लगता है कि कोच और कप्तान दोनों ही ‘स्पिन फ्रेंडली’ पिच की मांग करते हैं ताकि टॉस जीतते ही मैच में आगे हो जाएं. लेकिन टॉस हारने के बाद जब विदेशी स्पिनर अच्छी गेंदबाजी करते हैं, तो हमारे पास कोई ‘बैकअप प्लान’ नहीं होता. दुश्मन के लिए तैयार किए गए जाल में हम खुद ही फंस जाते हैं.

कन्फ्यूज नजर आ रहे हैं कोच
इस सब के बीच बड़ा सवाल टीम के हेड कोच गौतम गंभीर से भी है. उन्होंने जब टीम की कमान संभाली थी तो अग्रेसिव क्रिकेट और नए युग की बात की थी. जो अब तक तो नजर नहीं आ रहा है. टीम को जिस नए युग का वादा किया गया था उसकी बजाए केवल पैनिक देखने को मिल रहा है.

टीम सेलेक्शन में कंसिस्टेंसी नहीं है, किसी खिलाड़ी को लगातार मौका नहीं मिल रहा हैं. टीम में लगातार छेड़छाड़ की जा रही है और किसी एक स्ट्रेटरजी पर काम होता नजर नहीं आ रहा है. गंभीर केवल अपनी जिद पर टिके हुए हैं और कुछ नया करने के चक्कर में टीम का नुकसान करा रहे हैं.

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