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Friday, September 25, 2026
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कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

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kapilनई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रेल मंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की कथित लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम मामले को रद्द करने की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। लालू यादव की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मामले में पैरवी कर रहे थे, जबकि सीबीआई की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू पक्ष रख रहे थे लेकिन कोर्ट रूम कुछ ऐसा हुआ कि दोनों आपस में ही उलझ गए और दोनों के बीच खूब बीच तीखी बहस हुई। लालू यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कथित लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

किस बात पर हुआ विवाद?
इस दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति (सैंक्शन) जरूरी है, जो नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने खुद पहले इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, ऐसे में अब उसी के खिलाफ दलील देना गलत है। इस पर सीबीआई की ओर से पेश ASG एसवी राजू ने सिब्बल की दलीलों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वह नए मुद्दे उठा रहे हैं और कानून की गलत व्याख्या कर रहे हैं। ASG राजू ने कहा, “सिब्बल ने नए मुद्दे पर बहस की है। मुझे सही कानून बताना है। मिस्टर सिब्बल गुमराह करने वाली दलीलें देते हैं और मुझे बहस नहीं करने देते।”

 

कोर्ट में बढ़ा तनाव, तीखी बहस
ASG राजू के इस आरोप पर कपिल सिब्बल नाराज हो गए और उन्होंने तपाक के कहा, “आपने ऐसा कहने की हिम्मत कैसे की कि मैंने अदालत को गुमराह किया है। मैंने कभी किसी कोर्ट को गुमराह नहीं किया। आप होंगे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, लेकिन जज नहीं हैं।” इसके जवाब में ASG राजू ने कहा, “हां, आपने कोर्ट को गुमराह किया है, यह मेरी दलील है और मैं बताऊंगा कि आपने कैसे गुमराह किया और आप मुझे बताने नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अदालत के सामने सही कानून रखना उनका कर्तव्य है और वह अपनी बात पर कायम हैं।

 

जज ने किया हस्तक्षेप
बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने राजू की पेशेवर मर्यादा पर भी सवाल उठाए, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, ASG राजू ने अपेक्षाकृत शांत लहजे में कहा कि वह सिब्बल का सम्मान करते हैं, लेकिन कानूनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ररविंदर डुडेजा ने कोर्ट रूम में स्थिति को संभालते हुए कहा, “माहौल को थोड़ा शांत होने दीजिए।” इसके बाद कोर्ट ने दिन की सुनवाई समाप्त कर दी।

आगे क्या फैसला हुआ?

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करें। ये दलीलें अधिकतम पांच पन्नों की होंगी और एक सप्ताह के भीतर जमा करनी होंगी। इसके बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।

क्या है लैंड-फॉर-जॉब्स मामला?

सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उनके परिवार और करीबी लोगों के नाम पर जमीन ली गई। सीबीआई ने इस मामले में 2022 में केस दर्ज किया और बाद में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लालू यादव ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जरूरी पूर्व अनुमति के बिना शुरू की गई, इसलिए पूरा मामला रद्द किया जाना चाहिए।

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