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Friday, September 11, 2026
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आज अंतरराष्ट्रीय बेड़े की सलामी लेंगी द्रौपदी मुर्मू

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सिटी ऑफ डेस्टिनी कहे जाने वाले विशाखापत्तनम के समुद्री तट पर बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) के जरिये दुनिया को भारत की बढ़ती नौसैनिक शक्ति का परिचय देंगी। इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू मंगलवार शाम विशाखापत्तनम पहुंची।मुर्मू सुबह बंगाल की खाड़ी में स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर समुद्र के बीच खड़े बेड़े का निरीक्षण करेंगी। इस रिव्यू में भारतीय नौसेना के साथ-साथ मित्र देशों के कुल 71 जहाज और पनडुब्बियां शामिल होंगी। कार्यक्रम के दौरान 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर फ्लाई-पास्ट कर राष्ट्रपति को सलामी देंगे। आकाश में मिग-29के, एलसीए तेजस, पी-8आई टोही विमान और सी-किंग हेलिकॉप्टरों की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। दुनिया के सबसे घातक समुद्री कमांडो माने जाने वाले नौसेना के मार्कोस समुद्र के बीच विशेष युद्ध कौशल का प्रदर्शन भी करेंगे। 

समुद्री कूटनीति का बड़ा मंच

यह आयोजन सैन्य शक्ति के साथ-साथ भारत की समुद्री कूटनीति का एक बड़ा मंच है। प्रधानमंत्री मोदी के महासागर विजन के तहत, भारत खुद को हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षा प्रदाता के तौर पर पेश कर रहा है। अगले कुछ दिन यहां आईएफआर के साथ ही मिलन युद्धाभ्यास और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी जैसे आयोजन होंगे। 

65 देशों की नौसेनाओं की मौजूदगी

इनमें एकसाथ 75 देशों और कुल 65 नौसेनाओं की मौजूदगी भारत के बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाती है। भारत अपनी नौसैनिक शक्ति के जरिए विकासशील देशों की आवाज बन रहा है, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक सामरिक बढ़त मिल रही है। भारतीय नौसेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि समुद्री व्यवस्था को आकार देने वाली एक कूटनीतिक शक्ति में तब्दील हो रही है।

सबसे पहले राजेंद्र प्रसाद ने किया था फ्लीट रिव्यू

भारत में फ्लीट रिव्यू की परंपरा 1953 में शुरू हुई थी। तब प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 33 भारतीय जहाजों का निरीक्षण किया था। 2016 में विशाखापत्तनम में ही यह भव्य समारोह हुआ था। इस बार का आयोजन इसलिए विशेष है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक अभ्यासों में से एक मिलन-2026 के साथ आयोजित हो रहा है।
 

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