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Sunday, September 6, 2026
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बुर्का पहनकर कांवड़ लाने का मामला गरमाया, मौलाना का एतराज; महिला बोली-मन्नत पूरी होने पर उठाया कदम

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संभल। संभल में बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) में शामिल हुईं दो मुस्लिम महिलाओं का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। घटना को लेकर जहां कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द  (Communal Harmony) की मिसाल बता रहे हैं, वहीं अन्य लोग धार्मिक परंपराओं और पहचान से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच बरेली के एक मुस्लिम धर्मगुरु ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

 

मौलाना ने जताया विरोध
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजबी ने बयान जारी कर कहा कि कांवड़ यात्रा में बुर्का पहनकर शामिल होने का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है और लोग धार्मिक दृष्टिकोण से इसके बारे में सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार किसी भी मुसलमान-चाहे पुरुष हो या महिला—को दूसरे धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों या परंपराओं को अपनाने की अनुमति नहीं है। मौलाना के मुताबिक ऐसे आयोजनों में भाग लेना अनुचित है और समुदाय को इससे बचना चाहिए। उन्होंने लोगों से “गुनाह से तौबा करने” और भविष्य में ऐसे कदम न उठाने की अपील की।

 

महिला ने बताया-मन्नत पूरी होने पर लाई कांवड़
दूसरी ओर, इस मामले में चर्चा में आई तमन्ना मलिक ने अपनी ओर से सफाई दी है। उनका कहना है कि उन्होंने भगवान से एक मन्नत मांगी थी, जो पूरी होने के बाद उन्होंने कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया। तमन्ना के अनुसार, उन्होंने अमन त्यागी से विवाह की कामना की थी और मन्नत पूरी होने पर वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आईं। उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा के दौरान उनके पति साथ रहे।

 

मंदिर में जलाभिषेक की तैयारी
तमन्ना ने कहा कि वह आगामी पर्व पर संभल स्थित छैमनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेंगी। उनका कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत विश्वास और मन्नत से जुड़ा निर्णय है।

 

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत आस्था और सामाजिक मेलजोल का उदाहरण बता रहे हैं। वहीं अन्य लोग इसे धार्मिक सीमाओं के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर व्यापक सामाजिक और धार्मिक विमर्श का विषय बन गया है।

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