उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक पर सियासी जंग, भारतीय जनता पार्टी-बहुजन समाज पार्टी-समाजवादी पार्टी-भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आमने-सामने

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

Brahmin Power Play Begins in UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ‘ब्राह्मण पावर प्ले’ की चर्चा तेज हो गई है। आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर सक्रिय हो गई हैं। भाजपा, बसपा और कांग्रेस के बीच ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर प्रतिस्पर्धा साफ दिखाई दे रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भी इस समीकरण से खुद को दूर नहीं रखना चाहती।
हाल ही में ब्राह्मण विधायकों की बैठक और उससे जुड़े राजनीतिक संदेशों के बाद प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण समुदाय, जो परंपरागत रूप से राज्य की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है, आगामी चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है।
 

भाजपा की सक्रियता

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने हाल ही में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान बटुकों का तिलक कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। इसे भाजपा की ओर से ब्राह्मण समाज के प्रति सम्मान और जुड़ाव के प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर ब्राह्मण नेतृत्व की मौजूदगी को भी प्रमुखता से रेखांकित किया जा रहा है। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि ब्राह्मण मतदाता भाजपा के पारंपरिक समर्थकों में शामिल रहे हैं, लेकिन बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच इस आधार को और मजबूत करना जरूरी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, भाजपा का प्रयास है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर ब्राह्मण चेहरों को प्रमुखता देकर संतुलन का संदेश दिया जाए।

 

बसपा की रणनीति: सामाजिक संतुलन की वापसी

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो Mayawati ने कई मौकों पर ब्राह्मण समाज के प्रति खुलकर समर्थन जताया है। बसपा पहले भी ‘ब्राह्मण-दलित’ सामाजिक समीकरण के सहारे सत्ता में आ चुकी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बसपा एक बार फिर उसी सामाजिक इंजीनियरिंग मॉडल को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के कार्यक्रमों और बयानों में ब्राह्मण समाज के सम्मान और भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। वरिष्ठ राजनीतिक मनोज श्रीवास्तव  का मानना है कि बसपा की रणनीति का उद्देश्य पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखते हुए नए सामाजिक गठजोड़ तैयार करना है।

सपा की सक्रिय भागीदारी

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav भी इस सियासी समीकरण से दूरी नहीं बनाए हुए हैं। सपा ने भी ब्राह्मण नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ संवाद बढ़ाने की पहल की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सपा का प्रयास है कि वह ‘समाज के सभी वर्गों’ को साथ लेकर चलने का संदेश दे। ब्राह्मण सम्मेलन और प्रतिनिधि बैठकों के जरिए पार्टी अपने आधार का विस्तार करना चाहती है। कहना है कि सपा की रणनीति सामाजिक संतुलन और व्यापक समर्थन हासिल करने की दिशा में है।

कांग्रेस की भूमिका

हालांकि चर्चा में मुख्य रूप से भाजपा और बसपा की सक्रियता दिखाई दे रही है, लेकिन कांग्रेस भी इस होड़ से बाहर नहीं है। पार्टी के नेता लगातार सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को उठा रहे हैं। कांग्रेस का प्रयास है कि वह पारंपरिक वोटरों के साथ-साथ नए सामाजिक वर्गों को भी जोड़ सके। ब्राह्मण समाज के साथ संवाद और संपर्क कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटी है।

क्यों अहम है ब्राह्मण वोट बैंक

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से यह वर्ग राजनीति में प्रभावशाली रहा है और विभिन्न दलों को समर्थन देता रहा है। वरिष्ठ राजनीतिक मनोज  का कहना है कि ब्राह्मण मतदाता अक्सर मुद्दों, नेतृत्व और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं। इसलिए उन्हें साधने के लिए प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर प्रयास किए जाते हैं।

ब्राह्मण विधायकों की बैठक का असर

हाल में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई। इस बैठक को सामाजिक और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा गया। बैठक के बाद विभिन्न दलों ने अपने-अपने स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी। इससे संकेत मिलता है कि आगामी चुनावों से पहले सामाजिक समीकरणों को लेकर दल गंभीरता से काम कर रहे हैं।

सियासी संदेश 

 ‘ब्राह्मण पावर प्ले’ केवल प्रतीकात्मक राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले महीनों में टिकट वितरण, संगठनात्मक पदों और चुनावी रणनीति में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। प्रदेश की राजनीति में सामाजिक संतुलन बनाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में ब्राह्मण मतदाताओं को साथ लाने की कोशिशें आगामी चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं।

भारत से मैच के बाद शादाब के बयान से ससुर सकलैन मुश्ताक खफा, जताई नाराजगी

0

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

भारत के खिलाफ टी20 विश्वकप 2026 मैच में हार के बाद पाकिस्तान टीम में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। पूर्व क्रिकेटर्स जहां मौजूदा टीम की आलोचना करने में लगे हैं, वहीं मौजूदा क्रिकेटर्स ये कह रहे हैं कि सिर्फ हम क्यों पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर्स भी तो भारत के खिलाफ कभी विश्व कप मैच नहीं जीत पाए। अब इस मामले में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने भी दखल दिया है। दरअसल, पाकिस्तान के ऑलराउंडर शादाब खान ने हाल ही में शाहिद अफरीदी और मोहम्मद यूसुफ जैसे पूर्व क्रिकेटरों पर निशाना साधा था। इस के बाद शादाब ने नामीबिया के खिलाफ मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों पूर्व क्रिकेटरों पर तंज कसा था, जिससे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई। अब पीसीबी ने शादाब को उनके हालिया बयान पर कड़ी चेतावनी दी है। साथ ही शादाब के ससुर और पूर्व दिग्गज स्पिनर सकलैन मुश्ताक भी शादाब के बयान से नाखुश हैं।

पीसीबी ने दी सख्त हिदायत

हालांकि, शादाब का यह बयान कई पूर्व खिलाड़ियों को नागवार गुजरा। बताया जा रहा है कि टीम मैनेजर नावीद चीमा के माध्यम से पीसीबी ने शादाब को स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने शब्दों की मर्यादा रखें और दिग्गज खिलाड़ियों के प्रति सम्मान दिखाएं। टेलिकॉम एशिया स्पोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि पीसीबी ने टीम मैनेजर नावीद चीमा के जरिये ऑलराउंडर को यह संदेश दिया कि उन्हें पूर्व महान खिलाड़ियों के खिलाफ कठोर शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चीमा ने पीसीबी का मैसेज पढ़ा, जिसमें लिखा था, ‘शादाब प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी सीमा से बाहर चले गए थे। सभी पूर्व खिलाड़ी, जिनमें उनके ससुर सकलैन मुश्ताक भी शामिल हैं, पाकिस्तान के सम्मानित महान खिलाड़ी हैं। उन्हें ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।’

अफरीदी-यूसुफ ने क्या कहा था?

कोलंबो में 15 फरवरी को भारत के खिलाफ पाकिस्तान की हार के बाद, पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने टीम प्रबंधन से खराब प्रदर्शन के कारण बाबर आजम, शाहीन अफरीदी और शादाब खान जैसे सीनियर खिलाड़ियों को बाहर करने की मांग की। दूसरी ओर, मोहम्मद यूसुफ ने भी इसी तरह की टिप्पणी करते हुए कहा कि बाबर, शाहीन और शादाब का समय अब खत्म हो चुका है और टीम प्रबंधन को बेंच स्ट्रेंथ आजमाते हुए युवा खिलाड़ियों को प्लेइंग इलेवन में मौका देना चाहिए।

सकलैन मुश्ताक की नाराजगी

शादाब के ससुर और पूर्व दिग्गज स्पिनर सकलैन मुश्ताक ने भी इस बयान पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा, ‘ये अनावश्यक टिप्पणियां थीं। अधिकांश खिलाड़ी मेरे साथ खेले हैं। सच तो यह है कि मैं भी उन खिलाड़ियों में से हूं जिन्होंने आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीती, लेकिन हमने पाकिस्तान के लिए कई बड़े टेस्ट और वनडे मुकाबले जीते।’ उनका यह बयान दर्शाता है कि वरिष्ठ खिलाड़ियों को शादाब की भाषा पर आपत्ति है। शादाब ने 2023 में सकलैन की बेटी मलायका सकलैन से शादी की थी। पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज कामरान अकमल ने भी शादाब की टिप्पणी को अनुचित बताया। उन्होंने कहा, ‘पूर्व खिलाड़ियों के खिलाफ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सावधानी की मांग करता है।’

मीडिया प्रबंधन और आगे की रणनीति

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को मीडिया से बातचीत में संयम बरतने की सलाह दे रहा है। भारत के खिलाफ अहम मुकाबले से पहले दो दिनों तक किसी भी खिलाड़ी को मीडिया के सामने नहीं भेजा गया। अब पाकिस्तान को सुपर-आठ चरण में कड़ी चुनौती का सामना करना है। टीम का अगला मुकाबला न्यूजीलैंड से कोलंबो में होगा। इसके बाद वह इंग्लैंड और श्रीलंका टीम से भिड़ेगी।

पांच साल तक पेट में रहा सर्जिकल औजार, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

केरल के अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुन्नप्रा की रहने वाली उषा जोसेफ के पेट में सर्जरी के पांच साल बाद एक सर्जिकल औजार मिला है। एक्स-रे में आर्टरी फोर्सेप्स दिखने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा है कि मामले में सख्त कार्रवाई होगी।

‘अस्सी मेरी सबसे कमर्शियल फिल्म’, अनुभव सिन्हा को नहीं होती बॉक्स ऑफिस नंबर्स की चिंता; बोले- मुद्दा है जरूरी

#LatestBollywoodNews #BollywoodNews #BollywoodUpdate #BollywoodNews #BollywoodHindiNews

अनुभव सिन्हा की ‘अस्सी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। देश में होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं पर आधारित यह फिल्म अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चाओं में हैं। हालांकि, जब इस फिल्म की घोषणा हुई थी, तो लोगों को लगा था कि अनुभव सिन्हा अपने गृहनगर वाराणसी के अस्सी घाट की कहानी लेकर आ रहे हैं। लेकिन जल्द ही पता चल गया कि कहानी एक संवेदनशील और जरूरी मुद्दे पर आधारित है। फिल्म को लेकर निर्देशक का कहना है कि कहानी का मूल विचार समाचार पत्रों की सुर्खियों से ही प्रेरित है।

बॉक्स ऑफिस नंबर्स गपशप का विषय

बॉक्स ऑफिस नंबर्स और क्रिटिक्स की रेटिंग को लेकर निर्देशक का कहना है कि बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और समीक्षाओं में स्टार रेटिंग जैसी मामूली बातें भी चर्चा को एक संख्या तक सीमित कर देती हैं। जबकि असल मुद्दा चिंता का विषय होना चाहिए। ये आंकड़े गपशप का अच्छा जरिया हैं। मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे समझ रहे होंगे। उन्हें यह समझ नहीं आता कि दुनिया भर में कुल कमाई, भारत में कुल कमाई और भारत में शुद्ध कमाई क्या होती है। उन्हें यह नहीं पता कि निर्माता को बताई गई रकम का 50% से भी कम मिलता है। 400 करोड़ रुपये, 700 करोड़ रुपये और 800 करोड़ रुपये जैसे आंकड़े तो बहुत ही महत्वाकांक्षी लगते हैं।लेकिन मुझे उम्मीद है कि दर्शक इन आंकड़ों को गंभीरता से नहीं लेंगे। अगर मैं कर सकता तो मैं अपने आंकड़े घोषित नहीं करता, चाहे वे कितने भी अच्छे या बुरे क्यों न हों। लेकिन मैं इसे नहीं रोक सकता।

छोटे शहरों में भी देखी जाती हैं ‘अस्सी’ जैसी फिल्में

अनुभव सिन्हा का मानना है कि वो इस धारणा को तोड़ देंगे कि ‘अस्सी’ जैसी फिल्में जनता के लिए नहीं होती हैं। उन्होंने अपने जमीनी स्तर के अभियान ‘चल सिनेमा चलें’ के तहत भारत के 40 दूसरे दर्जे के शहरों का दौरा किया है। उनका कहना है कि यह एक गलत धारणा है। उन्होंने कहा कि अब मैं कह सकता हूं कि दूसरे दर्जे के शहरों में इस तरह की फिल्में नहीं देखी जातीं। वे सिर्फ जवान या कांतारा जैसी फिल्में देखते हैं। बेशक उन्हें वो फिल्में ज्यादा पसंद आती हैं। लेकिन इन फिल्मों में भी उनकी काफी दिलचस्पी है। दिक्कत ये थी कि हम उन्हें सही तरीके से फिल्म नहीं दिखा पा रहे थे। इसलिए इस बार मेरा पूरा अभियान घर-घर जाकर प्रचार करने पर केंद्रित है। पिछले दो महीनों से हम छोटे शहरों में फिल्म का प्रचार कर रहे हैं।

बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगी ‘अस्सी’

अनुभव का कहना है कि अस्सी मेरे इस अवतार में बनी सबसे कमर्शियल फिल्म है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी क्योंकि यह बेहद नाटकीय और तेज गति वाली है। इसमें झूठ और चौंकाने वाले मोड़ हैं। अदालत का सीन दर्शकों के लिए हमेशा ही दिलचस्प होता है क्योंकि उन्हें बहस में भाग लेने का मौका मिलता है। वे न्यायाधीश का मूल्यांकन करते हैं।

कोर्टरूम के अंदर के माहौल से असल में हुआ वाकिफ

कोर्टरूम को लेकर अनुभव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में मेरी दो वरिष्ठ महिला वकील दोस्त हैं। हमने उन्हें कहानी सुनाई। उन्होंने कहा, ‘आप लोग इतनी गंदी कोर्ट शूटिंग करते हो। आपने कभी कोर्ट देखी है?’ मैंने कहा, ‘जी हां, सुप्रीम कोर्ट।’ तो उन्होंने कहा, ‘इसीलिए! आपने वो शांत, परिष्कृत कोर्टरूम देखा है जहां हर कोई चुपचाप सुनता रहता है। लेकिन फिल्म का मामला उस कोर्ट में नहीं जाएगा। अगले ही दिन मैंने नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट का दौरा किया और वहां का नजारा देखकर दंग रह गया। मुझे एहसास हुआ कि मैंने फिल्म ‘मुल्क’ के कोर्टरूम सीन गलत तरीके से फिल्माए थे। यह कोर्टरूम बहुत भीड़भाड़ वाला और अव्यवस्थित है। मुझे कोर्टरूम की यह शीतलता बहुत पसंद आई। कोर्टरूम अपने काम में इतना मशगूल रहता है जबकि आपका जीवन इस पर निर्भर करता है।

योगी से मुलाकात के बाद दोनों डिप्टी CM से मिले संघ प्रमुख मोहन भागवत, सियासी तापमान बढ़ा

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

लखनऊ. लखनऊ (Lucknow) में मुख्यमंत्री (CM) योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री (deputy CMs) केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक से मुलाकात की। इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है। हालांकि, प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में फेरबदल की चर्चाओं के बीच सीएम व डिप्टी सीएम से संघ प्रमुख की मुलाकात ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। संघ प्रमुख ने दोनों डिप्टी सीएम से बृहस्पतिवार सुबह करीब 10-10 मिनट के लिए मुलाकात की।

इसके पहले, मुख्यमंत्री बुधवार को रात आठ बजे संघ प्रमुख से मिले राजधानी के निराला नगर स्थित संघ कार्यालय परिसर में सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे। एकांत में दोनों के बीच करीब 35 मिनट तक बातचीत हुई।

संघ प्रमुख दो दिवसीय प्रवास पर राजधानी लखनऊ में थे और बुधवार को उनके प्रवास का अंतिम दिन था। सीएम की भागवत से मुलाकात निहायत ही एकांत में बंद कमरे में हुई। मौजूदा समय में प्रदेश की सियासत के स्तर पर होने वाले बदलाव को देखते हुए इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। दोनों के बीच मुलाकात को भले ही शिष्टाचार बताया जा रहा है किस लेकिन योगी की बार-बार संघ प्रमुख से होने वाली मुलाकातों को लेकर अटकलों का बाजार गरम है।

2027 का तानाबाना बुनने में संघ की अहम भूमिका के संकेत
सूत्रों का कहना है कि इधर बीच जिस तरह से संघ प्रमुख का फोकस यूपी को लेकर दिख रहा है और वह किसी न किसी कार्यक्रम के बहाने यूपी आ रहे हैं। उससे साफ है कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का ताना-बाना बुनने में संघ परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वह जब भी यूपी के दौरे पर होते हैं, सीएम योगी की मुलाकात भी होती रही है। यूपी में अगले साल विधानसभा का चुनाव होने वाला है। इस लिहाज से भी सरकार और संघ के मुखिया की मुलाकात अहम है।

Previous articleपांच साल तक पेट में रहा सर्जिकल औजार, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश
News Desk

‘हम औसत रहे’, सुपर-आठ राउंड से पहले अश्विन ने बताई टीम इंडिया की सच्चाई; एनालिसिस कर दी यह राय

0

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

टी20 वर्ल्ड कप में भारत का ग्रुप चरण समाप्त हो चुका है और अब टीम की नजर सुपर 8 मुकाबलों पर है। अगले चरण में भारत को दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे जैसी मजबूत टीमों का सामना करना है।भारत ने डिफेंडिंग चैंपियन की छवि के अनुरूप प्रदर्शन किया है, लेकिन अनुभवी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि टीम अभी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं पहुंची है।
 
‘औसत दिन पर भी जीतने की क्षमता’

अश्विन ने ‘ऐश की बात’ कार्यक्रम में भारत के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए कहा, ‘सूर्यकुमार ने बहुत समझदारी भरी पारी खेली। रन गति बढ़ाने के लिए दुबे, हार्दिक और रिंकू मौजूद थे। उन्हें पता था कि वे स्कोरिंग रेट को संभाल सकते हैं। लेकिन आज (नीदरलैंड्स के खिलाफ) भारत बल्लेबाजी में बेहद शानदार नहीं था, उतना प्रभावी भी नहीं था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह इतनी मजबूत टीम है कि अपने साधारण दिन पर भी विपक्ष को हरा सकती है। हम औसत थे, अपने सर्वश्रेष्ठ पर नहीं थे। लेकिन वरुण चक्रवर्ती ने इतनी अच्छी गेंदबाजी की कि नीदरलैंड्स उन्हें पढ़ नहीं सका। जसप्रीत बुमराह को पावरप्ले में स्विंग मिली और उन्होंने यॉर्कर भी डाले।’ अश्विन के मुताबिक, टीम की सबसे बड़ी ताकत है यही है कि टीम कमजोर प्रदर्शन के बावजूद परिणाम अपने पक्ष में करने में कामयाब रहते हैं।

तिलक वर्मा की बल्लेबाजी पर खास टिप्पणी

अश्विन ने युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा की भी तारीफ की। उन्होंने टी20 क्रिकेट में टाइमिंग और तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘तिलक वर्मा चोट के बाद वापसी कर रहे हैं। हम पावर और ताकत की बात करते हैं, लेकिन बल्लेबाजी का असली सार स्वीट स्पॉट और टाइमिंग है। तिलक बड़े पावर हिटर नहीं हैं। उनके लिए टाइमिंग और गैप ढूंढना ज्यादा अहम है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘कृपया याद रखें, आप वैभव की तरह खेल सकते हैं, लेकिन आप तिलक की तरह भी खेल सकते हैं, जो टाइमिंग पर भरोसा करते हैं और गैप तलाशते हैं।’ अश्विन का मानना है कि टी20 में सिर्फ बड़े शॉट्स ही सफलता की गारंटी नहीं हैं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार समझदारी भी उतनी ही जरूरी है।

सुपर 8 की तस्वीर साफ

सुपर 8 चरण की लाइनअप अब पूरी हो चुकी है। पाकिस्तान ने नामीबिया पर जीत दर्ज कर ग्रुप ए से भारत के साथ क्वालिफाई किया। ग्रुप बी से श्रीलंका और जिम्बाब्वे, ग्रुप सी से वेस्टइंडीज और इंग्लैंड, जबकि ग्रुप डी से दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड अगले चरण में पहुंचे हैं। साथ ही, 2028 टी20 विश्वकप की 12 क्वालिफाई करने वाली टीमें भी तय हो चुकी हैं। इस साल सुपर आठ की सभी टीमें और साथ ही सह-मेजबान होने के कारण ऑस्ट्रेलिया को 2028 टी20 विश्वकप के लिए स्वतः क्वालिफिकेशन मिला है। वहीं, रैंकिंग के आधार पर अफगानिस्तान, बांग्लादेश, आयरलैंड भी शामिल हैं।

आगे की चुनौती

अब भारत के सामने असली परीक्षा है। सुपर-आठ में हर मुकाबला नॉकआउट जैसा होगा। अश्विन की बातों से साफ है कि टीम में आत्मविश्वास तो है, लेकिन सुधार की गुंजाइश भी मौजूद है। यदि भारत अपनी कमजोरियों को दूर कर लेता है, तो खिताब बचाने की राह और मजबूत हो सकती है।
 

तीन दिवसीय दौरे पर नितिन नवीन, बैठकों और जनसंपर्क पर रहेगा जोर

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शुक्रवार से तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनकी यह पहली गुजरात यात्रा है। दौरे के दौरान अहमदाबाद और गांधीनगर में संगठनात्मक बैठकें, जनसंवाद और कई सार्वजनिक कार्यक्रम तय किए गए हैं। पार्टी इसे संगठन मजबूत करने और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद का अवसर बता रही है।

पहले दिन का कार्यक्रम क्या रहेगा?

गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नितिन नवीन दोपहर 12:30 बजे अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। यहां पार्टी नेता और कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद वे नारनपुरा स्थित जीएससी बैंक में सांसदों और विधायकों से बातचीत करेंगे। शाम को गांधीनगर के इन्फोसिटी में ‘बजट बैठक’ में उद्योगपतियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टरों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे।
विज्ञापन

दूसरे दिन किन कार्यक्रमों में रहेंगे शामिल?

21 फरवरी की सुबह वे साबरमती रिवरफ्रंट जाएंगे और स्थानीय लोगों से मिलेंगे। इसके बाद भद्रकाली माता मंदिर में पूजा करेंगे। फिर गांधीनगर स्थित भाजपा के राज्य मुख्यालय में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। सोशल मीडिया टीम के साथ बैठक भी होगी। दोपहर में गिफ्ट सिटी में यंग वॉइस समिट में भाषण देंगे और युवा उद्यमियों से मिलेंगे। शाम को अहमदाबाद के जीएमडीसी हॉल में बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

तीसरे दिन क्या खास रहेगा?

22 फरवरी को नितिन नवीन खाडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के सार्वजनिक श्रवण कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वे दिल्ली लौट जाएंगे।

संगठन पर जोर क्यों?

जगदीश विश्वकर्मा ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संगठन से ही आगे बढ़े हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 45 वर्षीय नितिन नवीन पार्टी के इतिहास में सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह दौरा संगठनात्मक समन्वय और जनसंपर्क को मजबूत करने पर केंद्रित है।
 

लखनऊ में धीरेंद्र शास्त्री की हनुमत कथा रद्द, LDA ने रद्द किया मैदान आवंटन

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

यूपी : की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमत कथा अब आयोजित नहीं होगी। 14 से 18 मार्च के बीच होने वाले इस धार्मिक आयोजन के लिए तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन प्रशासनिक कारणों से कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वसंत कुंज योजना स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल मैदान का आवंटन निरस्त कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, आयोजन के लिए पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिल सका। संभावित भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट अनुमति नहीं दी। इसी वजह से एलडीए ने आवंटन आदेश वापस ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पुलिस और प्रशासन से सभी जरूरी अनुमतियां नहीं मिलतीं, तब तक सार्वजनिक स्थल किसी बड़े आयोजन के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

आयोजनकर्ता संस्था हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के हर्षवर्धन अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारी अक्टूबर 2025 से चल रही थी। प्रारंभिक योजना के अनुसार कथा का आयोजन डिफेंस एक्सपो स्थल पर होना था। हालांकि, पुलिस ने वीआईपी मूवमेंट और शहीद पथ पर जाम की आशंका जताते हुए अनुमति नहीं दी। इसके बाद राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लिए आवेदन किया गया।

एलडीए ने 33 लाख रुपये जमा करने की शर्त पर मैदान आवंटित किया था। आयोजकों के मुताबिक, ऑनलाइन भुगतान में तकनीकी दिक्कत आई। प्रतिदिन 2.5 लाख रुपये जमा करने का विकल्प भी दिया गया और दो दिन की राशि जमा की गई, लेकिन सिस्टम में गड़बड़ी के कारण भुगतान दर्ज नहीं हो सका। इस तरह, धीरेंद्र शास्त्री की हनुमत कथा फिलहाल रद्द हो गई है।

Previous articleआज से शुरू CGBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा, कड़े सुरक्षा इंतज़ाम
Next articleरायपुर में फरार आरोपी की सक्रियता से हड़कंप, वीडियो वायरल
News Desk

पीएम मोदी ने पेश किया ‘MANAV’ विजन, जानिए क्या है यह

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

 

नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली में आज गुरुवार को पीएम मोदी ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 (AI Impact Summit 2026) का उद्घाटन किया. इस अवसर पर पीएम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भारत के बड़े ‘MANAV विजन’ को पेश किया, जिसमें नैतिक, जवाबदेह और सबको साथ लेकर चलने वाले AI गवर्नेंस के लिए इंसानी सोच वाला फ्रेमवर्क बताया गया.

प्रधानमंत्री मोदी ने दुनियाभर के AI कंपनियों के तमाम सीईओ (CEO) को संबोधित करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सही दिशा पर जोर दिया. बता दें, राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित हो रहे समिट में डेलीगेट्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज AI इम्पैक्ट समिट में, मैं AI के लिए MANAV विजन पेश करता हूं. MANAV का मतलब है इंसान.
पीएम मोदी ने कहा कि MANAV विजन ग्लोबल AI इकोसिस्टम के लिए एक गाइडिंग फ्रेमवर्क के तौर पर काम करेगा. उन्होंने कहा कि भारत का यह MANAV विजन 21वीं सदी की AI-बेस्ड दुनिया में मानवता की भलाई के लिए एक जरूरी कड़ी बनेगा. उभरते खतरों के बारे में चिंताओं पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने खास तौर पर बच्चों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सावधान रहना होगा. AI स्पेस भी बच्चों के लिए सुरक्षित और परिवार के हिसाब से होना चाहिए.

इसके अलावा, पीएम मोदी ने कहा कि यह विजन बदलते टेक्नोलॉजिकल माहौल को दिखाता है. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे दौर में जा रहे हैं जहां इंसान और इंटेलिजेंट सिस्टम मिलकर काम करते हैं, और मिलकर आगे बढ़ते हैं. इस सेक्टर में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत AI में एक मजबूत भविष्य देखता है. हमारे पास टैलेंट, एनर्जी कैपेसिटी और पॉलिसी क्लैरिटी है. प्रधानमंत्री ने समिट में नए घरेलू इनोवेशन की भी घोषणा की. उन्होंने कहा कि मुझे आप सभी को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस समिट में तीन भारतीय कंपनियों ने अपने AI मॉडल और ऐप लॉन्च किए हैं. ये मॉडल हमारे युवाओं के टैलेंट को दिखाते हैं.

ग्लोबल सहयोग को न्योता देते हुए, पीएम मोदी ने टेक्नोलॉजी लीडर्स और इनोवेटर्स से भारत के साथ पार्टनरशिप करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मैं आप सभी को भारत में डिजाइन और डेवलप करने, दुनिया और मानवता तक पहुंचाने के लिए आमंत्रित करता हूं. इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit 2026) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली में दुनिया भर के सरकारी पॉलिसीमेकर्स, इंडस्ट्री AI एक्सपर्ट्स, एकेडेमिक्स, टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स और सिविल सोसाइटी को एक साथ लाया है.

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट, ग्लोबल साउथ में होने वाला पहला ग्लोबल AI समिट है. यह ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सबका भला, सबकी खुशी) के नेशनल विजन और AI फॉर ह्यूमैनिटी के ग्लोबल प्रिंसिपल के साथ AI के बदलाव लाने वाले पोटेंशियल को दिखाता है. यह समिट एक डेवलप हो रहे इंटरनेशनल प्रोसेस का हिस्सा है जिसका मकसद AI के गवर्नेंस, सेफ्टी और सोशल इम्पैक्ट पर ग्लोबल कोऑपरेशन को मजबूत करना है.
 

‘क्या यूपी भाजपा में सब ठीक है ?’ सरसंघचालक मोहन भागवत ने सीएम योगी समेत दोनों उप मुख्यमंत्रियों से क्यों की मुलाकात, जानें

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में सब ठीक है या घमासान मचा हुआ है ? सरकार और केंद्र के बीच क्या चल रहा है ? उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सनातन धर्म और हिंदुत्व के मुद्दे पर हलचल तेज हो गई है.

सनातन धर्म, शंकराचार्य विवाद और यूजीसी नियमों को लेकर आंतरिक असंतोष और डिप्टी सीएम के अलग-अलग रुख ने सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ स्थानीय मुद्दे हैं या केंद्र सरकार के साथ कोई गहरा तनाव है ? केंद्र अभी तक चुप है, जिससे कुछ लोग इसे “पर्दे के पीछे की रणनीति” भी मान रहे हैं. हाल की घटनाओं पर नजर डालें, तो एक के बाद एक उत्तर प्रदेश की सियासत में होते घटनाक्रम और केंद्र की चुप्पी ने बहुत से सवालों को जन्म दे दिया है.

उत्तर प्रदेश में माघ मेले में बटुक ब्राह्मणों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पहले इसका विरोध किया था और अब वह समर्थन करते नजर आ रहे हैं. दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी 101 बटुकों का सम्मान किया है. ब्रजेश पाठक ने अपने लखनऊ आवास पर बटुकों को तिलक लगाया, फूल बरसाए और उनका आशीर्वाद लिया. उन्होंने इस घटना को “महापाप” करार दिया और कहा कि परंपराओं का सम्मान करना समाज की जिम्मेदारी है.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को “कालनेमि” (रामायण का राक्षस) कहकर विवाद खड़ा कर दिया था.

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था और उनसे मुलाकात की थी, तब सीएम योगी ने इसे “मर्यादा” का मुद्दा बताया था. हालांकि, शंकराचार्य ने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के सम्मान पर तंज कसते हुए कहा था, “पहले मारते हो, फिर फूल चढ़ाते हो. क्या इससे शांति हो जाएगी?” उन्होंने आरोप लगाया कि गेरुआ वस्त्र पहनने के बावजूद शासन में सनातन प्रतीकों का अपमान हो रहा है.

इसी बीच, सीएम योगी आदित्यनाथ ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से लखनऊ में मुलाकात की. यह तीन महीनों में दूसरी बैठक है, जो आरएसएस के शताब्दी वर्ष के प्रचार कार्यक्रम के तहत हुई.

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में 2027 के विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई. इसमें हिंदुत्व लहर को मजबूत करने, समाजवादी पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति का मुकाबला करने और बूथ स्तर पर समन्वय पर जोर दिया गया.

संघ प्रमुख ने सीएम के साथ बैठक के बाद एक-एक करके दोनों डिप्टी सीएम से भी गुरुवार को मुलाकात की. इस मुलाकात को हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करने का संकेत भी बताया गया है. लेकिन यूजीसी नियमों जिनसे सवर्ण समाज नाराज है, इस पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं आया.

देखा जाए, तो यूपी में विकास पर सबकी नजरें टिकी हैं. केंद्र सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. पार्टी के कुछ नेताओं का जो कैमरे पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, दबी जुबान में यह भी कह रहे कि यह सनातन धर्म के नाम पर योगी के खिलाफ पर्दे के पीछे चल रही रणनीति हो सकती है. ये नेता भाजपा में आंतरिक कलह की बातें भी कह रहे हैं.

जहां डिप्टी सीएम मौर्या और पाठक जैसे नेता खुद को मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं, वहीं यूजीसी की नई इक्विटी रेगुलेशंस ने हिंदू एकता की कोशिशों को झटका दिया है. इससे जातिगत असंतोष बढ़ा है. क्या यह मुख्यमंत्री को ‘एक्सपोज’ करने की साजिश है ?

विपक्षी नेता, जैसे अखिलेश यादव ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया, जबकि भाजपा विधायक नंदकिशोर गुज्जर ने पाठक को सनातन का झंडाबरदार करार दिया. 2027 चुनाव नजदीक है, और यूपी भाजपा में यह घटनाक्रम हिंदुत्व, जाति और विकास के बीच संतुलन की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है. मगर सवाल ये है कि क्या केंद्र की चुप्पी एक सोची-समझी रणनीति है, या सिर्फ संयोग? ये बातें आने वाले दिन ही तय होंगे.