अलेक्जेंडर स्टब भारत पहुंचे, नरेंद्र मोदी बोले– नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे रिश्ते

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नई दिल्ली। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब बुधवार सुबह भारत पहुंचे। इस दौरान राष्ट्रपति स्टब का औपचारिक स्वागत हुआ और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री के.वी. सिंह ने उनका स्वागत किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब। मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। आपकी यह यात्रा भारत और फिनलैंड के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। मैं कल हमारी मुलाकात और रायसीना डायलॉग 2026 में आपके मुख्य भाषण का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।”

प्रधानमंत्री ने यह बात राष्ट्रपति स्टब के उस पोस्ट के जवाब में कही, जिसमें उन्होंने अपनी भारत यात्रा की जानकारी दी थी। फिनलैंड के राष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर लिखा था, “मैं भारत की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ दूसरे नेताओं से भी मिलूंगा। इस यात्रा से फिनलैंड और भारत के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे। इसमें व्यापार का क्षेत्र भी शामिल है।”

राष्ट्रपति स्टब रायसीना डायलॉग 2026 में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता होंगे। इसके अलावा, वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ विशेष बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा होगी। साथ ही, वे आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बात करेंगे। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सहयोग को और बढ़ाना है।

 

सड़क पर कचरा फेंकने पर अब भारी जुर्माना – ₹1 लाख तक का फ़टका

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बलूरघाट: अक्सर लोग कुछ भी खाने पीने की चीजों लेकर खाते हैं और उनके रैपर या बॉक्स को सड़क पर ही फेंक देते हैं. लेकिन अब ऐसा करने पर एक लाख रुपए तक जुर्माना देना पड़ सकता है. दरअसल पश्चिम बंगाल के बलूरघाट में नगर निगम ने स्वच्छता बनाए रखने के लिए सख्त नियम बनाए है. नगर निगम ने सड़क पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ एक हजार से एक लाख रुपए तक का जुर्माना वसूले जान की बात कही है.

बलूरघाट निगग निगम की टीम के अनुसार, सड़क पर कचरा फेंकने की वजह से लोगों को परेशानी होती है. फेंका गया कचरा धीरे-धीरे बड़े ढेर में तब्दील हो जाता है. बहुत लोगों को सड़क पर चलते-चलते खाने-पीने की आदत होती है और कचरा सड़क पर फेंकने की आदत होती है. ये जमा होते-होते कचरे का पहाड़ बन जाता है. बदबू आने लगती है. इस दौरान वहां से गुजरने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है.

कचड़े के ढेर और बदबू से परेशान लोग लगातार नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत कर रहे थे. वहीं अब नगर निगम के फैसले पर खुशी जाहिर की है. बलूरघाट नगरपालिका इस कचरे को साफ करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है. नगरपालिका निगरानी के लिए बलूरघाट शहर की विभिन्न सड़कों पर कैमरे लगाने की योजना बना रही है. इस कदम का उद्देश्य गैर-जिम्मेदार नागरिकों को पकड़ना है. निगरानी के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा. कचरा फेंकने पर आप कैमरों में कैद हो जाएंगे. जिसके बाद पहचान कर नगर निगम की टीम आपके घर पर पहुंचेगी और भारी भरकम जुर्माना वसूलेगा.

नगरपालिका ने जानकारी दी है कि 1000 से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. लंबे समय से फैली बदबू के कारण सड़क पर चलते समय नाक ढकनी पड़ती थी. स्थानीय निवासी भी इस पहल से खुश हैं. उनका मानना ​​है कि अब से कोई भी कचरा फेंकने से पहले दो बार सोचेगा.

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News Desk

हरिद्वार में अमित शाह का दौरा, सियासी हलचल तेज़

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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में मार्च का महीना हलचल भरा रहने वाला है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आगामी 7 मार्च को हरिद्वार दौरे पर आ रहे हैं. जिसकी तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है. यह मुख्य रूप से सहकारिता सम्मेलन है. इसके अलावा उनका यह दौरा आधिकारिक रूप से साल 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ की तैयारियों की समीक्षा से जुड़ा है.

वहीं, धामी सरकार के चार साल के उपलक्ष्य में भले ही यह आयोजन हो रहा हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है. खास कर हरिद्वार जैसे स्थान का चयन भी बेहद अहम है.

होली मिलन से अर्धकुंभ तक राजनीतिक संकेत: बीती 2 मार्च को देहरादून स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित होली मिलन समारोह के दौरान सीएम धामी ने इस दौरे की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि साल 2027 में हरिद्वार में प्रस्तावित अर्धकुंभ के आयोजन के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की है

उन्होंने इसके लिए केंद्र का आभार जताते हुए कहा कि यह राशि आयोजन की आधारभूत संरचना को मजबूत करने में सहायक होगी. उन्होंने कहा कि आगामी 2027 का अर्धकुंभ दिव्य और भव्य होगा, इसके लिए मेला प्रशासन अधिकारी और कर्मचारी अभी से जुटे हुए हैं.

समयबद्ध तरीके से सभी काम पूरे किए जाएंगे और आयोजन को ऐतिहासिक बनाया जाएगा. सीएम धामी की मानें तो 7 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह हरिद्वार के बैरागी कैंप पहुंचेंगे. जहां अर्धकुंभ की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और संबंधित अधिकारियों से फीडबैक लेंगे, साथ ही जनता से संवाद भी करेंगे.

उच्चस्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा: गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले आज भी मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण हों.

सीएम धामी ने विशेष रूप से सुरक्षा यातायात प्रबंधन पार्किंग व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सतर्कता बरतने को कहा. उन्होंने ये भी निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

सीएम धामी ने कहा कि हरिद्वार के बैरागी कैंप में प्रस्तावित कार्यक्रम में ऐतिहासिक भीड़ उमड़ने की संभावना है. केंद्र की ओर से 500 करोड़ की राशि जारी किया जाना, इस बात का संकेत है कि कुंभ जैसा धार्मिक आयोजन राज्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है. उन्होंने ये भी संकेत दिए कि अमित शाह राज्य के लिए कुछ नई योजनाओं की घोषणाएं भी कर सकते हैं.

चुनावी शंखनाद की आहट: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल धार्मिक आयोजन की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा. धामी सरकार के चार साल पूरे होने के अवसर पर यह एक बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी हो सकता है.

बीजेपी कार्यालय की मानें तो गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश बीजेपी की टोली की बैठक में भी शामिल होंगे. जिसमें कोर कमेटी के सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे. बैठक में विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति पर मंथन होने की संभावना है.

“गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में आगामी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा होगी. जिसमें भविष्य की रणनीति को और पुख्ता किया जाएगा.“- महेंद्र भट्ट, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष

हरिद्वार की सीटें क्यों अहम? हरिद्वार जिला, राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हरिद्वार ग्रामीण, खानपुर, मंगलौर और पिरान कलियर जैसी सीटों पर सफलता नहीं मिल सकी थी. ऐसे में बीजेपी इस बार धार्मिक आयोजन और विकास कार्यों के जरिए यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है.

“कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ नहीं है. बल्कि, आगामी कुंभ की वैश्विक तैयारी का संदेश देना भी है. हमारी सरकार ने चार साल में जो विकास कार्य किए हैं, उन्हें प्रदर्शनी के माध्यम से जनता के सामने रखा जाएगा. जब केंद्र का बड़ा नेता आता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इस बार हम और बड़ी बढ़त के साथ सरकार बनाएंगे.“- मदन कौशिक, हरिद्वार विधायक/पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष

कांग्रेस का पलटवार: दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक स्टंट बताया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी बात रखी है. उन्होंने सूबे के वर्तमान हालातों पर चिंता जताते हुए घेरा है.

“राज्य में जिस प्रकार का माहौल बनाया जा रहा है, वो चिंता का विषय है. अगर हरिद्वार जैसी पवित्र नगरी में आकर गृह मंत्री विकास की बात करते हैं तो स्वागत है, लेकिन भटकाने वाली राजनीति ठीक नहीं है. बीजेपी चाहे केंद्र की पूरी सरकार को उत्तराखंड भेज दे, जनता बदलाव का मन बना चुकी है.“- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री

राजनीतिक विश्लेषक की राय: राजनीति के वरिष्ठ जानकार सुनील दत्त पांडे का मानना है कि बीजेपी कुंभ और विधानसभा चुनाव दोनों को समानांतर साधने की कोशिश कर रही है. उनके अनुसार, पहले अमित शाह फिर बाद में प्रधानमंत्री मोदी का प्रस्तावित दौरा यह दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक रणनीति के साथ जोड़ा जा रहा है. हरिद्वार में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को चुनौती मिलती रही है. ऐसे में यह कार्यक्रम कितना असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.

पीएम मोदी का भी दौरा प्रस्तावित: बता दें कि 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित दौरा है. यानी गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है. यदि ऐसा होता है तो धामी सरकार के चार साल पूरे होने का यह आयोजन राज्य में चुनावी बिगुल साबित हो सकता है.

 

नितिन नबीन बिहार से चुनावी मैदान में उतरेंगे

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने 9 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में सबसे पहला और चर्चित नाम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का है, जिन्हें बिहार से मैदान में उतारा गया है.

इस फैसले के पीछे पार्टी की सबसे प्रमुख रणनीतिक कदम नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा भेजना है. क्योंकि पार्टी अध्यक्ष के रूप में नवीन को संसद के उच्च सदन में जगह देकर भाजपा सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका शीर्ष नेता संसदीय बहस, नीति-निर्माण और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले सके.

चुनाव आयोग ने 16 मार्च को ही 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की है, जिसमें भाजपा को अपने गठबंधन और सत्ताधारी राज्यों की वजह से मजबूत स्थिति हासिल होने की उम्मीद है. उम्मीदवारों की पूरी सूची इस प्रकार है

  • नितिन नबीन (बिहार)
  • शिवेश कुमार (बिहार)
  • तेराश गोवाल्ला (असम)
  • जोगेन मोहन (असम)
  • लक्ष्मी वर्मा (छत्तीसगढ़)
  • संजय भाटिया (हरियाणा)
  • मनमोहन सामल (ओडिशा)
  • सुजीत कुमार (ओडिशा)
  • राहुल सिन्हा (पश्चिम बंगाल)

भाजपा ने इन नामों को उन राज्यों से चुना है जहां पार्टी या एनडीए गठबंधन विधानसभा में मजबूत स्थिति में है. बिहार से दो उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी उपस्थिति और प्रभाव बढ़ाना चाहती है. पार्टी की इस फैसले के पीछे आखिर रणनीति क्या है ,यदि देखें तो इस फैसले के पीछे कई बातें पार्टी सूत्रों के माध्यम से बताई जा रहीं हैं.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे मुख्य वजह और सबसे बड़ा कदम नितिन नविन को बिहार से राज्यसभा भेजना बताया जा रहा है. पार्टी अध्यक्ष के रूप में नवींन को संसद के उच्च सदन में जगह देकर भाजपा सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका शीर्ष नेता संसदीय कार्यों, और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले सके.

यदि देखा जाए तो बिहार में आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता की सीट खाली हो रही है और एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल है, इसलिए मजबूत उम्मीदवार के जरिए यह सीट आसानी से जीती जा सकती है।दूसरी रणनीति क्षेत्रीय संतुलन बनाने की है. असम और छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा शासित राज्यों से स्थानीय चेहरों को जगह देकर पार्टी संगठन को मजबूत करने का संदेश देना चाहती है.

इसी तरह ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी उम्मीदवार उतारकर भाजपा विपक्षी राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है. हरियाणा से संजय भाटिया जैसे अनुभवी नेता को शामिल कर अनुभव का लाभ उठाने की योजना है. विशेष रूप से महिलाओं में लक्ष्मी वर्मा और बाकी स्थिति स्थानीय, जनजातीय और क्षेत्रीय नेताओं को जगह देकर भाजपा सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है.

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह सूची भाजपा की उस व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है जिसमें 2026 के राज्यसभा चुनावों के जरिए ऊपरी सदन में अपनी ताकत बढ़ाई जाए, ताकि केंद्र में मोदी सरकार की नीतियों को और मजबूती मिल सके.

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, यह पहली सूची है और शेष नामों की घोषणा जल्द की जाएगी। राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष होते हैं, इसलिए विधायकों के समर्थन पर सब कुछ निर्भर करेगा. लेकिन एनडीए की मजबूत स्थिति को देखते हुए भाजपा इन 9 में से अधिकांश सीटें जीतने का भरोसा जता रही है.

इस मुद्दे पर नाम ना लेने की शर्त पर भाजपा के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता का कहना है कि यह फैसला पार्टी का संगठनात्मक सोच का फैसला ,उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से शीर्ष नेतृत्व को सभी फैसलों में सम्मिलित करती है और अभी पार्टी अध्यक्ष संसद के सदस्य नहीं है इसलिए संसदीय प्रणाली में उन्हें शामिल करना आवश्यक था इसलिए पार्टी ने ये फैसला लिया. साथ ही उन्होंने 9 की 9 सभी सीटें जीतने का भी दावा किया और फैसले को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी का भी संकेत बताया.

45 दिनों का कच्चा तेल स्टॉक तैयार

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नई दिल्ली: ईरान संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है. ट्रंप की ओर से साफ कर दिया गया है कि ये वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है. इसका मतलब है कि कच्चे तेल की ग्लोबल सप्लाई चेन में काफी बड़ी बाधा आ सकती है. जिसकी वजह से ग्लोबल इकोनॉमी की टेंशन में इजाफा देखने को मिल सकता है. लेकिन भारत को ऐसी टेंशन बिल्कुल भी नहीं है. भारत के पास कच्चे तेल का इतना स्टॉक है कि 45 दिनों तक उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. इसका मतलब है कि कच्चे तेल की बाधित सप्लाई देश की रफ्तार को नहीं रोक सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कच्चे तेल को लेकर किस तरह के आंकड़े सामने आई है.

ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर के आकलन के अनुसार ईरान संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के पास लगभग 40-45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है. केप्लर के मुताबिक, भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल कमर्शियल कच्चे तेल का स्टॉक है. इसमें रिफाइनरीज के पास मौजूद स्टॉक, भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और देश की ओर आ रहे जहाजों पर लदा तेल शामिल है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और इसका बड़ा भाग होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. भारत प्रतिदिन औसतन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 25 लाख बैरल तेल प्रतिदिन होर्मुज रूट से आता है.

केप्लर के प्रमुख रिसर्च ऐनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया से तेल सप्लाई अस्थायी रूप से रुकती है, तो तत्काल असर सप्लाई व्यवस्था और कीमतों पर पड़ेगा. हालांकि, रिफाइनरीज सामान्यतः वाणिज्यिक भंडार बनाए रखती हैं और पहले से रवाना हो चुके तेलवाहक जहाजों के आते रहने से अल्पकालिक राहत मिलेगी. हालांकि, रितोलिया ने कहा कि लंबे समय तक व्यवधान बने रहने पर तेल आयात की लागत, ढुलाई खर्च और वैकल्पिक मार्गों के कारण दबाव बढ़ेगा. वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड का दाम 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो ईरान संकट शुरू होने के पहले के स्तर से करीब 10 प्रतिशत अधिक है. भारत ने पिछले वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे. चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि में भी 20.63 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं.

मीडिया खबरों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही प्रभावित हुई है. यह 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल निर्यात का लगभग एक-तिहाई तथा गैस आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है. विश्लेषकों का कहना है कि भारत पश्चिम अफ्रीका, लातिनी अमेरिका, अमेरिका और रूस से अतिरिक्त आपूर्ति लेकर इस कमी की भरपाई कर सकता है. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर रूसी तेल की ओर भी रुख किया जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, तात्कालिक जोखिम भौतिक कमी से अधिक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आयात बिल बढ़ने का है. हालांकि, व्यवधान लंबा और गंभीर होने की स्थिति में तेल आयात बिल में उल्लेखनीय वृद्धि और व्यापक आर्थिक दबाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.

 

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कितनी सीटों पर लड़ेगी पार्टी?

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तमिलनाडु। तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव का आयोजन होना है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। चुनावी तैयारियों के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M K स्टालिन से कांग्रेस के सीनियर लीडर P चिदम्बरम ने मुलाकात की है। जानकारी के मुताबिक, करीब एक घण्टे तक चली मीटिंग में सीट शेयरिंग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई है। हालांकि, P चिदम्बरम ने CM स्टालिन के निवास पर हुई इस मुलाकात के बाद मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।

अब तक, तमिलनाडु के AICC इंचार्ज, गिरीश चोडांकर, कांग्रेस सीट-शेयरिंग कमिटी के हेड के तौर पर DMK के साथ बातचीत कर रहे थे, सूत्रों के मुताबिक उनके टोन को लेकर MK स्टालिन ने आपत्ति दर्ज करवाई थी जिसके बाद अपनी स्ट्रैटेजी बदलते हुए, कांग्रेस हाईकमान ने आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए DMK के साथ सीट-शेयरिंग पर बातचीत करने के लिए तमिलनाडु के सीनियर कांग्रेस लीडर पी चिदम्बरम को भेजा।

सूत्रों के मुताबिक, पहले सत्ता में साझेदारी की मांग पर अड़ी कांग्रेस अब सिर्फ बढ़ी हुई सीटों तक सीमित हो गयी है। पहले 41 सीटों की मांग पर अड़ी कांग्रेस अब 36 सीटों तक आई है लेकिन DMK की ओर से साफ-साफ कह दिया गया है पिछली बार जो 25 सीटें दी गयी थीं उससे एक सीट भी ज्यादा देने की हालत में DMK नहीं है। अगर कांग्रेस चाहे तो एक राज्यसभा की सीट अतिरिक्त दी जा सकती है।

चिदम्बरम के साथ सीएम MK स्टालिन की आज की बैठक के बाद सूत्र इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि 29 सीट और 2 राज्यसभा सीट का फाइनल ऑफर DMK ने कांग्रेस को दिया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से विचार विमर्श के बाद इस पर जल्द फैसला लिए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि सोमवार को DMK ने कांग्रेस को दो टूक कह दिया था कि जो 25 सीटें DMK दे रही है अगर कांग्रेस उस पर राजी नहीं है तो वो गठबंधन से बाहर जाने के लिए स्वतंत्र है।

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ओमान में भारतीय शिप पर ईरानी हमला, 3 कर्मियों की मौत

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नई दिल्ली। ओमान के समुद्री क्षेत्र(Oman waters,) में ईरानी हमलों के बीच(Amid Iranian attacks) भारतीय शिप एमकेडी वीओएम(Indian ship MKD VOM) पर भयंकर हादसा (horrific accident)हुआ, जिसमें कम से कम तीन भारतीयों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए। हादसा मार्शैल आइलैंड्स के झंडे वाले जहाज पर मस्कट(Muscat on the Marshall) से 52 नॉटिकल माइलेज दूर हुआ। चालक दल(crew members) के अन्य सदस्यों को पनामा झंडे वाले(Panama flagged) वाणिज्यिक पोत एमवी सैंड की (commercial vessel MV Sand)मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया।

इस हमले के पीछे ईरान का ओमान की समुद्री सीमा पर हमला करना और अमेरिका–इजरायल के हालिया हमलों के जवाब में उठाया गया कदम माना जा रहा है। ओमान की रॉयल नेवी ने प्रभावित टैंकर की निगरानी शुरू कर दी है और समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क किया गया है।

इस हमले से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया। अमेरिकी क्रूड की कीमत 7.6 प्रतिशत बढ़कर 72.12 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 8.6 प्रतिशत बढ़कर 79.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यूरोप में प्राकृतिक गैस वायदा कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई।

ओमान में भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और सभी लापता चालक दल के सदस्यों को खोजने के प्रयास जारी हैं। इस हमले ने न केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को चुनौती दी है बल्कि मध्यपूर्व और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।

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नियाज़ खान का बड़ा दावा, अली खामेनेई को मरवाने में सऊदी अरब का हाथ?

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भोपाल|पूर्व IAS नियाज खान अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं. अब यूएस-इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर उनका बयान सामने आया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मरवाने में सऊदी अरब का हाथ है|

सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?

रिटायर्ड IAS अधिकारी नियाज खान ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर मिडिल ईस्ट में हो रहे संघर्ष को लेकर कई पोस्ट किए. उन्होंने लिखा कि खामेनेई को मरवाने में सऊदी अरब का हाथ निकला है. सऊदी खुद को 57 मुस्लिम देशों का राजा मानता है पर वह मुस्लिम देशों की रानी है. तभी सभी मुस्लिम देश चुप हैं. अपनी रानी के खिलाफ कुछ नहीं सुनना चाहते हैं. इस्लाम का एक ही शेर राजा ईरान है|

‘जो रूस और चीन के साथ रहा, वो मरा’

नियाज खान ने चीन और रूस को भी निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि जो देश रूस और चीन के साथ रहा वो मरा. ईरान के साथ आज न रूस है और न चीन. जो देश अमेरिका के साथ चिपका रहा वह बचा रहा जैसे ईरान को छोड़कर सभी अरब के देश. पोस्ट के उन्होंने आगे लिखा कि शायद ईरान ने रूस और चीन पर बहुत ज्यादा भरोसा कर लिया. आज दुष्ट अमेरिका किसी को भी अपना ग़ुलाम बना सकता है, रूस भी भीगी बिल्ली है|

मुस्लिम देशों पर भी साधा निशाना

पूर्व IAS नियाज खान ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जूते चाटने से बेहतर है, मर्द बनकर मरना. अरब के धनी मुस्लिम देश इजरायल और अमेरिका की जूतियां साफ कर रहे हैं, जबकि ईरान शेरों जैसे दहाड़ रहा है. इस्लाम नामर्दों को पसंद नहीं करता है|

अली खामेनेई की मौत पर सवाल, सोनिया गांधी-राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी का पलटवार

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अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम नेता खामेनेई की मौत हो गई थी. मिडिल ईस्ट लगातार 4 दिनों से जंग जारी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की टारगेट किलिंग पर काग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की चुप्पी पर निशाना साधते हुए सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि केंद्र का ये रुख भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल पैदा कर सकता है. सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी अखबार में अपने लेख में लिखा कि ‘आगामी 9 मार्च से जब संसद के बजट सत्र का जब दूसरा चरण शुरू होगा तो इस मामले में सरकार की इस चुप्पी पर स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए|’

भाजपा ने किया पलटवार

सोनिया गांधी के इस लेख पर भाजपा ने पटलवार करते हुए जवाब दिया है.बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोनिया गांधी के लेख पर जवाब देते हुए खामेनेई की एक पुरानी पोस्ट शेयर की है और कहा कि ‘लिखना तो बनता है.’ खामेनेई की इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि नेहरू की ओर लिखी गई ‘ग्लिम्प्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री’ का अध्ययन करने से पहले मुझे यह नहीं पता था कि उपनिवेशीकरण से पहले भारत ने इतनी महत्वपूर्ण प्रगति की थी, खामेनेई ने ये पोस्ट 6 अगस्त 2013 में किया था. इसी पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए निशिकांत दुबे ने बस इतना ही कहा कि ‘लिखना तो बनता है?’

सोनिया गांधी के पोस्ट पर राहुल गांधी ने भी क्या रिएक्ट

बता दें कि सोनिया गांधी के लेख पर राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की टारगेट किलिंग पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं करता और निष्पक्षता का त्याग कर देता है, तो इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं. इस स्थिति में चुप्पी तटस्थता नहीं है|’

राहुल गांधी की पोस्ट का जवाब

राहुल गांधी के इस पोस्ट पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने जवाब दिया. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘आपकी जानकारी के लिए 1984 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की हत्या हुई थी तो ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता खुमेनी साहब ने भी किसी प्रकार का बयान नहीं जारी किया था. क्या करें आपको भूलने की बीमारी है|’

निशांत कुमार राजनीति में एंट्री कर रहे, होली पर मिली मंत्री की शुभकामनाएँ

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पटना। पिछले काफी समय से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार (Nishant Kumar) के राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन अब नीतीश (Nishant Kumar) के करीबी कहे जाने श्रवण कुमार (Shravan Kumar) ने निशांत के राजनीति में एंट्री पर मुहर लगा दी है। श्रवण कुमार बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। श्रवण कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि होली के मौके पर वो यह बात सभी से शेयर करना चाहते हैं कि निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में आने वाले हैं। इतना ही नहीं मंत्री श्रवण कुमार ने निशांत को शुभकामनाएं भी दी हैं।

श्रवण कुमार ने कहा, ‘होली के अवसर पर यह शेयर करना चाहता हूं कि जिसकी चर्चा लंबे अरसे से हो रही है। निशांत कुमार की चर्चा काफी समय से हो रही है। होली के अवसर पर मैं आप लोगों से कहना चाहता हूं कि निशांत कुमार की एंट्री राजनीति में बहुत जल्द होने वाली है। उनकी एंट्री बहुत सक्रिय राजनीति में होगी। लंबे अरसे से लाखों नौजवान उनके राजनीति में आने का सुझाव दे रहे हैं। जो नौजवान उनके राजनीति में आने की मांग कर रहे हैं तो मैं समझता हूं कि उनकी इच्छा जल्द पूरी होगी। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ राजनीति में आगे बढ़ने की शुभकामनाएं।’

 

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News Desk