Nitish Kumar किसके कहने पर भाजपा के करीब आए, Narendra Modi के नाम पर पहले हुए थे दूर

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पटना। नीतीश कुमार की अपनी इच्छा कभी नहीं थी कि वह बिहार छोड़कर जाएं। जैसे लालू प्रसाद यादव नहीं चाहते थे कि वह बिहार से दूर हों, उसी तरह नीतीश कुमार भी हमेशा बिहार में ही सक्रिय रहना चाहते थे। राज्य की ही सेवा करना चाहते थे। अब भी उन्होंने जब राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की तो वह सेवा भाव दोहराया। बताया जा रहा है कि भाजपा ने एक ‘प्रकरण’ का हवाला देकर दबाव बनाया और यह फैसला उन्होंने आखिरकार ले ही लिया। अब उन्हें भाजपा के साथ रिश्ता कैसा रखना है, यह वक्त बताएगा। फिलहाल भविष्य को समझने के लिए भाजपा के उनके रिश्तों की पूरी कहानी जानिए।

अटल-आडवाणी को अस्पताल में देख हो गए थे साथ

‘अंतरंग दोस्तों की नजर से नीतीश कुमार’- यह किताब नीतीश कुमार के अभिन्न मित्र उदयकांत ने लिखी है। इस किताब की हर लाइन नीतीश कुमार पढ़ चुके हैं, इसलिए इससे ज्यादा किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसमें जिक्र है कि कैसे लालू प्रसाद के साथ नीतीश कुमार बन-संवर कर दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय के कभी चक्कर लगाते थे। यह भी बताया गया है कि लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कितनी जद्दोजहद हुई थी और कैसे चारा घोटाले में नाम आने समेत कई कारणों से उन्होंने दूरी बनाई थी। इसी किताब में एक वाकये का जिक्र है, जब पहली बार नीतीश कुमार भाजपा के करीब आए थे। वह वाकया बताता है कि भाजपा से दूर-दूर रहने वाले नीतीश कुमार किस तरह अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी से प्रभावित होकर भाजपा के मंच पर पहुंच गए थे।

समता पार्टी 1994 में कैसे बनी, फिर कब जॉर्ज हुए बीमार

किताब में बताया गया है कि बिहार में लालू राज के दौरान माहौल ऐसा खराब हुआ कि जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में 15 सांसदों ने तत्कालीन जनता दल से किनारा कर लिया। इसमें से 14 अंतिम तौर पर बाहर हो गए- मो. यूनुस सलीम, जॉर्ज फर्नांडीस, नीतीश कुमार, सैयद शहाबुद्दीन, अब्दुल गफूर, मंजय लाल, वृषिण पटेल, हरिकिशोर सिंह, रामनरेश सिंह, महेंद्र बैठा, चरणजीत यादव, मोहन सिंह, हरिकेवल सिंह और रवि राय। इनमें से अंतिम चार को छोड़ सभी बिहार से थे। जनता दल से अलग हुए इस गुट का नाम जनता दल (जॉर्ज) हुआ और फिर समता पार्टी। किताब में लिखा है- “1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में अपार जनसमर्थन दिखने के बावजूद समता पार्टी के 310 प्रत्याशियों में से सात ही जीत सके। 271 की जमानत जब्त हो गई। पार्टी की आर्थिक-मानसिक हालत बुरी थी। तभी जॉर्ज फर्नांडीस बीमार पड़ गए। नीतीश जब उन्हें देखने मुंबई के अस्पताल पहुंचे तो आश्चर्यजनक रूप से उन्हें वहां लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी दिखे, जो जॉर्ज फर्नांडीस की मिजाजपुर्सी के लिए पहले से थे। जब यह दोनों नेता अस्पताल से निकलने लगे तो जॉर्ज ने नीतीश से कहा कि वह आडवाणी को नीचे तक छोड़ आएं। उतरते समय आडवाणी ने नीतीश को अपनी सभा में शामिल होने का अधिकारपूर्वक न्यौता दिया। ऊपर लौटकर जॉर्ज फर्नांडीस को यह बात बताई तो उन्होंने भी कहा कि अवश्य जाना चाहिए। सभा में अटल-आडवाणी ने बहुत सम्मान से बैठाया। उस मंच से अच्छा संबोधन हुआ और इसके बाद इस मुलाकात के बाद से ही गठबंधन का आधार बन गया। प्रमोद महाजन उसके बाद भाजपा में उनके करीबी हो गए। 1996 में यह गठबंधन जमीन पर उतरा और भाजपा-समता पार्टी ने साथ लोकसभा चुनाव लड़ा। नीतीश भी दूसरी बार सांसद बने और फिर मंत्री भी।” अटल, आडवाणी और प्रमोद महाजन के साथ ही अरुण जेटली से नीतीश कुमार के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। नीतीश ने अटलजी के साथ जेटली की प्रतिमा भी पटना में लगवाई है।

नरेंद्र मोदी से 36 का आंकड़ा क्यों रहा? फिर सुधरा-बिगड़ा भी

नीतीश कुमार लगातार अटल बिहारी वाजपेयी के संरक्षण में चल रही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे। वह टूटे तब, जब गुजरात दंगों के लिए कथित तौर पर दोषी मानने की सोच के बावजूद वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया। 2014 के लोकसभा निर्वाचन से पहले चुनावी तैयारी शुरू होते ही 2013 में नीतीश कुमार ने इसी विरोध में भाजपा का साथ छोड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू के 40 प्रत्याशी उतारे, लेकिन जब महज दो सीटें हासिल हुईं तो हार की जिम्मेदारी लेते हुए जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया। इसके बाद 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव महागठबंधन बनाकर लड़े और कुर्सी पर वापस बैठे। इसी सरकार में शराबबंदी हुई, जिसके बाद से राजद-जदयू में टकराव हुआ। सुशील कुमार मोदी ने लालू परिवार और तेजस्वी से जुड़े घोटालों की नई फाइलें खोलीं तो 2017 में नीतीश महागठबंधन से निकल फिर एनडीए के मुख्यमंत्री बन गए।

यह नरेंद्र मोदी की भाजपा थी। बहुत सहज नहीं रहे, खासकर केंद्र में उलटफेर होने से। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भागीदारी को लेकर झंझट चला, हालांकि विधानसभा चुनाव में अपनी बात चलने पर नीतीश कायम रह गए। इस चुनाव में कथित रूप से भाजपा के इशारे पर चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को भारी नुकसान पहुंचाया। इसका असर 2022 में सामने आया, जब नीतीश जनादेश 2020 को दरकिनार कर महागठबंधन वापस चले गए और सीएम पद की शपथ ली। 2024 के जनवरी में कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर भाजपा ने नीतीश की एक पुरानी मांग को जैसे ही माना, रिश्तों में गरमाहट आई और नीतीश फिर एनडीए में आ गए। अब तक वह कायम हैं। राज्यसभा के लिए भेजे जाने के बाद अब आगे क्या रहता है, यह भी देखने वाली बात होगी।

अभिषेक होंगे बाहर? क्या कुलदीप को मिलेगा मौका; प्लेइंग-11 में बदलाव की कितनी संभावना

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गत चैंपियन भारतीय टीम लगातार दूसरी बार टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंचने से एक कदम दूर है। भारत के सामने एक बार फिर सेमीफाइनल में इंग्लैंड की चुनौती होगी। इससे पहले दोनों टीमों के बीच 2022 और 2024 में सेमीफाइनल की टक्कर हो चुकी है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल अभिषेक शर्मा का रन नहीं बना पाना है। फॉर्म में नहीं होने के बावजूद अभिषेक को लगातार मौके मिले हैं, लेकिन क्या उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ मौका मिलेगा ये देखना दिलचस्प होगा। 

एक खिलाड़ी पर निर्भरता पड़ेगी भारी

टूर्नामेंट की शुरुआत में प्रबल दावेदार मानी जा रही भारतीय टीम प्रतियोगिता में मजबूत टीमों के खिलाफ एक भी मैच में शानदार प्रदर्शन नहीं कर पाई। भले ही उसने ग्रुप चरण के अपने सभी मैच जीते, लेकिन सुपर आठ में दक्षिण अफ्रीका से मिली करारी हार से उसकी कमजोरियां भी सामने आ गई। इसके बाद हालांकि भारतीय टीम ने लचीला दृष्टिकोण अपनाया जिससे वह सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रही। भारत के लिए अब तक एक या दो खिलाड़ी ही मैच जिता रहे हैं, लेकिन सेमीफाइनल की बाधा पार करनी है तो टीम के एक यूनिट के रूप में प्रदर्शन करना होगा। भारत के लिए पिछले दो मैचों से रिंकू सिंह को प्लेइंग-11 में मौका नहीं मिला है। पिता के निधन के बाद भी रिंकू टीम से जुड़ गए थे, ऐसे में यह देखना होगा कि किस तरह रिंकू के लिए प्लेइंग-11 में जगह बना सकती है।

कैसा हो सकता है बल्लेबाजी क्रम

अभिषेक भले ही फॉर्म में नहीं है, लेकिन भारत इस अहम मुकाबले के लिए संयोजन में बदलाव करेगा इसकी संभावना कम ही नजर आती है।
भारत के लिए एक बार फिर अभिषेक और संजू सैमसन पारी की शुरुआत करने उतर सकते हैं और तीसरे स्थान पर ईशान किशन आएंगे। 
चौथे नंबर पर कप्तान सूर्यकुमार यादव का उतरना तय है। सूर्यकुमार भी रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें सेमीफाइनल में बड़ी पारी खेलने की जरूरत है।
तिलक वर्मा और हार्दिक पांड्या आईपीएल के अपने घरेलू मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।
भारत को इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाजों की चुनौती का सामना करना होगा जिसमें दोनों टीम एक दूसरे पर अपनी श्रेष्ठ साबित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।

सैमसन को लेने का फैसला रहा कारगार

संजू सैमसन को पावरप्ले में बाएं हाथ के शीर्ष तीन बल्लेबाजों की मौजूदगी को खत्म करने के लिए फिर से प्लेइंग-11 में जगह दी गई और उसका यह फैसला कारगर साबित हुआ। भारत के लिए डेब्यू करने के 10 साल से अधिक समय बाद सैमसन ने आखिरकार भारत की तरफ से अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी खेली। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 रन की नाबाद पारी खेलकर बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ी। खेल में कब किसकी किस्मत चमकने लग जाए कहा नहीं जा सकता। विश्व कप से पहले अभिषेक अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थे, जबकि सैमसन को न्यूजीलैंड के खिलाफ द्विपक्षीय मैचों में निराशाजनक प्रदर्शन के कारण अंतिम एकादश में अपनी जगह गंवानी पड़ी थी। अब हालात बदल गए हैं और अभिषेक को आत्मविश्वास बढ़ाने वाली शानदार पारी की सख्त जरूरत है। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने सुपर आठ में जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक तो बनाया, लेकिन अभी भी वह अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म से काफी दूर हैं।

विजयी संयोजन में बदलाव का जोखिम उठाएगा भारत?

आमतौर पर भारत विजयी संयोजन में बदलाव नहीं करता है, लेकिन इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने कुछ बदलाव किए हैं। पिछले मैच में टीम ने कोई बदलाव नहीं किया था और उसे सफलता मिली थी। इस बार भी बदलाव की संभावना नजर नहीं आती है। अगर खिलाड़ी फिट रहे तो भारत उसी एकादश के साथ उतर सकता है जो वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलने उतरी थी। ऐसे में रिंकू सिंह और कुलदीप यादव को फिर बाहर बैठना पड़ सकता है। 
 

डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज, गृहमंत्री ने लॉन्च किए चार नए टूल; उपग्रह चित्रों से बनेगा मकान सूचीकरण ब्लॉक

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नई दिल्ली|केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- ‘प्रगति’ (महिला) और ‘विकास’ (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया है। देशभर में गणना कार्यों को सुगम बनाने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने एडवांस डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इन टूल्स में डिजिटल जनगणना के दौरान, उपग्रह चित्रों की सहायता से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनेगा। देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना-2027 में शामिल होंगे।दो चरणों में होने वाली जनगणना-2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य है। पहली बार जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी। पहली बार स्व-गणना का विकल्प भी दिया जा रहा है। जनगणना-2027 के शुभंकर ‘प्रगति’ (महिला प्रगणक) और ‘विकास’ (पुरुष प्रगणक) को मैत्रीपूर्ण एवं सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही ‘प्रगति’ और ‘विकास’ 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के भी प्रतीक हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना 2027 से संबंधित जानकारी, उद्देश्य एवं प्रमुख संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और जन-सुलभ रूप में पहुंचाए जाएंगे।

जनगणना-2027 के डिजिटल टूल्स … 

जनगणना-2027 भारत की पहली तकनीकी उपकरणों द्वारा संचालित जनगणना होगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा चार प्लेटफॉर्म, सॉफ्ट लॉन्च किए गए हैं। हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब एप्लिकेशन: यह वेब-मैप एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को उपग्रह चित्रों की सहायता से तकनीकी  रूप से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाने में सक्षम बनाता है, जिससे देशभर में भौगोलिक कवरेज का मानकीकरण सुनिश्चित होता है। एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन: यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से प्रगणक मकान-सूचीकरण डेटा एकत्र एवं अपलोड कर सकते हैं। केवल सीएमएमएस पोर्टल पर पंजीकृत प्रगणक ही इसका उपयोग कर सकते हैं। यह एप्लिकेशन सीधे क्षेत्र से सर्वर तक डेटा प्रेषण की सुविधा प्रदान करता है, जिससे पारंपरिक कागजी कार्य समाप्त हो जाता है। यह एंड्रॉयड एवं आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसे 16 भाषाओं में संचालित किया जा सकता है।स्व: गणना पोर्टल:  पहली बार स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया जा रहा है। यह एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा है, जिसके माध्यम से पात्र उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। सफल पंजीकरण के बाद एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी जारी होगी। इस स्व-गणना आईडी को प्रगणक के साथ साझा किया जाएगा। इसके आधार पर दर्ज की गई सूचना की प्रगणक द्वारा पुष्टि की जा सकेगी।जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल: यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से संबंधित गतिविधियों की योजना, प्रबंधन, क्रियान्वयन और निगरानी की जाएगी। राज्य, जिला एवं तहसील स्तर के अधिकारी एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय में प्रगति और कार्य-स्थिति का अवलोकन कर सकेंगे।

सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल … 

जनगणना-2027 में घर घर जाकर सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर डेटा एकत्रित किया जाएगा। इसके जरिए पूरी कवरेज सुनिश्चित होगी। तकनीक को ध्यान में रखकर अपनाते हुए इनोवेशन और सबको साथ लेकर चलने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जनगणना-2027 सही, सुरक्षित और कम्प्रेहेन्सिव हो। जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण में गृह-सूचीकरण एवं आवास जनगणना होगी। इस दौरान आवास की स्थिति एवं घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। द्वितीय चरण में देश के प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक विवरण दर्ज किए जाएंगे। प्रथम चरण के लिए अधिसूचना सात जनवरी 2026 को जारी की गई है। मकान-सूचीकरण एवं मकान गणना एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच, प्रत्येक राज्य/संघ राज्यक्षेत्र द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की सतत अवधि में संचालित की जाएगी। घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 15 दिनों की वैकल्पिक स्व-गणना अवधि भी होगी।

द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना … 

जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में पूरे भारत में की जाएगी। लद्दाख संघ राज्यक्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों में गणना सितंबर 2026 में संपन्न होगी। जनगणना के द्वितीय चरण में जाति संबंधित प्रश्न भी शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि सभी राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों के लिए एक मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी। लद्दाख तथा हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी।

डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज, गृहमंत्री ने लॉन्च किए चार नए टूल; उपग्रह चित्रों से बनेगा मकान सूचीकरण ब्लॉक

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नई दिल्ली|केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- ‘प्रगति’ (महिला) और ‘विकास’ (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया है। देशभर में गणना कार्यों को सुगम बनाने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने एडवांस डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इन टूल्स में डिजिटल जनगणना के दौरान, उपग्रह चित्रों की सहायता से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनेगा। देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना-2027 में शामिल होंगे।दो चरणों में होने वाली जनगणना-2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य है। पहली बार जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी। पहली बार स्व-गणना का विकल्प भी दिया जा रहा है। जनगणना-2027 के शुभंकर ‘प्रगति’ (महिला प्रगणक) और ‘विकास’ (पुरुष प्रगणक) को मैत्रीपूर्ण एवं सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही ‘प्रगति’ और ‘विकास’ 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के भी प्रतीक हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना 2027 से संबंधित जानकारी, उद्देश्य एवं प्रमुख संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और जन-सुलभ रूप में पहुंचाए जाएंगे।

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जनगणना-2027 भारत की पहली तकनीकी उपकरणों द्वारा संचालित जनगणना होगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा चार प्लेटफॉर्म, सॉफ्ट लॉन्च किए गए हैं। हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब एप्लिकेशन: यह वेब-मैप एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को उपग्रह चित्रों की सहायता से तकनीकी  रूप से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाने में सक्षम बनाता है, जिससे देशभर में भौगोलिक कवरेज का मानकीकरण सुनिश्चित होता है। एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन: यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से प्रगणक मकान-सूचीकरण डेटा एकत्र एवं अपलोड कर सकते हैं। केवल सीएमएमएस पोर्टल पर पंजीकृत प्रगणक ही इसका उपयोग कर सकते हैं। यह एप्लिकेशन सीधे क्षेत्र से सर्वर तक डेटा प्रेषण की सुविधा प्रदान करता है, जिससे पारंपरिक कागजी कार्य समाप्त हो जाता है। यह एंड्रॉयड एवं आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसे 16 भाषाओं में संचालित किया जा सकता है।स्व: गणना पोर्टल:  पहली बार स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया जा रहा है। यह एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा है, जिसके माध्यम से पात्र उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। सफल पंजीकरण के बाद एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी जारी होगी। इस स्व-गणना आईडी को प्रगणक के साथ साझा किया जाएगा। इसके आधार पर दर्ज की गई सूचना की प्रगणक द्वारा पुष्टि की जा सकेगी।जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल: यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से संबंधित गतिविधियों की योजना, प्रबंधन, क्रियान्वयन और निगरानी की जाएगी। राज्य, जिला एवं तहसील स्तर के अधिकारी एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय में प्रगति और कार्य-स्थिति का अवलोकन कर सकेंगे।

सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल … 

जनगणना-2027 में घर घर जाकर सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर डेटा एकत्रित किया जाएगा। इसके जरिए पूरी कवरेज सुनिश्चित होगी। तकनीक को ध्यान में रखकर अपनाते हुए इनोवेशन और सबको साथ लेकर चलने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जनगणना-2027 सही, सुरक्षित और कम्प्रेहेन्सिव हो। जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण में गृह-सूचीकरण एवं आवास जनगणना होगी। इस दौरान आवास की स्थिति एवं घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। द्वितीय चरण में देश के प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक विवरण दर्ज किए जाएंगे। प्रथम चरण के लिए अधिसूचना सात जनवरी 2026 को जारी की गई है। मकान-सूचीकरण एवं मकान गणना एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच, प्रत्येक राज्य/संघ राज्यक्षेत्र द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की सतत अवधि में संचालित की जाएगी। घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 15 दिनों की वैकल्पिक स्व-गणना अवधि भी होगी।

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जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में पूरे भारत में की जाएगी। लद्दाख संघ राज्यक्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों में गणना सितंबर 2026 में संपन्न होगी। जनगणना के द्वितीय चरण में जाति संबंधित प्रश्न भी शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि सभी राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों के लिए एक मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी। लद्दाख तथा हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी।

करण जौहर ने शेयर किए विजय-रश्मिका के रिसेप्शन के इनसाइड फोटोज, इस अंदाज में दिखीं कृति सेनन

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रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों ने 26 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर में शादी की। चार मार्च को हैदराबाद में उनका रिसेप्शन था। रिसेप्शन में कई फिल्मी सितारे पहुंचे। करण जौहर ने इनसाइट फोटो शेयर किया है। इस मौके पर रश्मिका की अपकमिंग फिल्म ‘कॉकटेल 2’ की साथी कलाकार कृति सेनन, फिल्म के निर्देशक होमी अदजानिया भी नजर आए।

इस अंदाज में नजर आईं कृति सेनन

कृति सेनन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर रश्मिका-विजय के रिसेप्शन की कई तस्वीरें शेयर की हैं। एक तस्वीर में वह कपल के साथ नजर आ रही हैं। एक दूसरी तस्वीर में कृति सेनन, रश्मिका को बाहों में पकड़े नजर आ रही हैं। एक और तस्वीर में वह रश्मिका और होमी अदजानिया के साथ नजर आ रही हैं। सभी तस्वीरों में कृति सेनन काफी खुश हैं।

करण जौहर ने कपल के साथ दिए पोज

इसके अलावा फिल्ममेकर करण जौहर ने भी रश्मिका-विजय के रिसेप्शन की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। इस तस्वीर में कृति सेनन, रश्मिका और विजय नजर आ रहे हैं। करण जौहर ने तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है ‘सबसे अच्छे जोड़े रश्मिका और विजय को बधाई। पोज बताने के लिए कृति सेनन का शुक्रिया। आप खूबसूरत लग रही हैं।’

कब रिलीज होगी ‘कॉकटेल 2’?

आपको बता दें कि फिल्म ‘कॉकटेल 2’ 11 जून 2026 को रिलीज होने वाली है। इसमें शाहिद कपूर के साथ कृति सेनन और रश्मिका मंदाना हैं। इस फिल्म के निर्देशक होमी अदजानिया हैं। यह साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘कॉकटेल’ का सीक्वल है

रिसेप्शन में पहुंचे सेलेब्स

विजय-रश्मिका के रिसेप्शन में मृणाल ठाकुर, श्रीलीला, अल्लू अर्जुन, राम चरण, चिरंजीवी, नागा चैतन्य और शाहिद कपूर के अलावा कई फिल्मी सितारे पहुंचे।
 

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन, नामांकन के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मौजूद रहे

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पटना।  10 बार बिहार के सीएम पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने गुरुवार (5 मार्च) को राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन कर दिया. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित एनडीए के सीनियर नेता मौजूद रहे. पिछले साल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद 27 फरवरी को नीतीश कुमार ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली थी. उनके राज्यसभा जाने के फैसले ने सभी को चौंका दिया. नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं. इससे पहले नीतीश ने कहा कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नयी सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा. उन्होंने कहा, ‘दो दशकों से अधिक समय तक आपने लगातार मुझ पर विश्वास और समर्थन जताया है. उसी विश्वास की ताकत से हमने बिहार और आप सभी की पूरी निष्ठा के साथ सेवा की है. आपके भरोसे और समर्थन की शक्ति से ही आज बिहार विकास और गरिमा की एक नयी पहचान प्रस्तुत कर रहा है.’ कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें।

नामांकन से पहले क्या बोले नीतीश कुमार?

उन्होंने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा, ‘इसी आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए मैं इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखता हूं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी ईमानदारी के साथ आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में भी आपसे मेरा संबंध बना रहेगा और विकसित बिहार के निर्माण के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का मेरा संकल्प अडिग रहेगा. राज्य में बनने वाली नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा.’ वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को भारी जीत दिलाने के बाद कुमार के पद छोड़ने से अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के किसी नेता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना है. यदि ऐसा होता है तो बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा. हिंदी भाषी राज्यों में बिहार ही अब तक ऐसा राज्य रहा है जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा है. बिहार से राज्यसभा की पांच सीट के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है और बृहस्पतिवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है. राज्य विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कुमार का संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है।

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News Desk

भारत के सामने होगी इंग्लैंड की चुनौती, जानें दर्शक कब और कहां देख सकेंगे मैच?

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सेमीफाइनल के सफर तक बीच में लडखड़ाने वाली भारतीय टीम के सामने अब इंग्लैंड की चुनौती होगी। भारत को अब गुरुवार को वानखेड़े स्टेडियम में होने वाले टी20 विश्व कप के अंतिम चार के मुकाबले में इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाजों की चुनौती का सामना करना होगा जिसमें दोनों टीम एक दूसरे पर अपनी श्रेष्ठ साबित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। 

स्पिनरों के खिलाफ करना होगा सुधार

टूर्नामेंट की शुरुआत में प्रबल दावेदार मानी जा रही भारतीय टीम प्रतियोगिता में मजबूत टीमों के खिलाफ एक भी मैच में शानदार प्रदर्शन नहीं कर पाई। भले ही उसने ग्रुप चरण के अपने सभी मैच जीते लेकिन सुपर आठ में दक्षिण अफ्रीका से मिली करारी हार से उसकी कमजोरियां भी सामने आ गई। इसके बाद हालांकि भारतीय टीम ने लचीला दृष्टिकोण अपनाया जिससे वह सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रही।

दोनों टीमें एक दूसरे के खेल से परिचित

भारत और इंग्लैंड लगातार तीसरी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में एक-दूसरे का सामना करेंगे। इंग्लैंड ने 2022 में भारत को करारी शिकस्त दी थी। भारत ने 2024 में गुयाना में इसका बदला चुकता कर दिया था। इंग्लैंड को वर्तमान टूर्नामेंट में हैरी ब्रूक और विल जैक्स ने मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला है, जबकि ऑलराउंडर सैम करन ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। दोनों टीम एक दूसरे के खेल से अच्छी तरह परिचित हैं और ऐसा नहीं कहा जा सकता कि किसी टीम को कुछ विशेष फायदा मिलेगा।सेमीफाइनल जिस पिच पर खेला जाएगा, उस पर अभी तक दो मैच खेले गए हैं। इनमें वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड के खिलाफ 196 रन का बचाव किया और इटली ने नेपाल को 123 रन पर आउट करने के बाद 10 विकेट से आसान जीत हासिल की थी।हम यहां आपको भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मैच की लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं…

भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच कब खेला जाएगा?
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच 05 फरवरी यानी गुरुवार को खेला जाएगा।
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच कहां खेला जाएगा?
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा।
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच कितने बजे से खेला जाएगा?
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे से शुरू होगा। टॉस इससे आधे घंटे पहले यानी शाम 6:30 बजे होगा। 
भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच कहां देख पाएंगे?
टी20 विश्व कप के प्रसारण अधिकार स्टार स्पोर्ट्स के पास है और दर्शक इसके मुकाबले स्टार स्पोर्ट्स के चैनलों पर देख सकेंगे। इसके अलावा मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार एप पर होगी।

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News Desk

37 साल बाद फिर उसी राह पर Nitish Kumar, क्या Narendra Modi सरकार में मिल सकती है बड़ी भूमिका?

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दिल्ली। जब राष्ट्रपति चुनाव के पहले नाम आया तो चुप्पी साधे रहे। जब उप राष्ट्रपति बनाने की बात आई तो तैयार नहीं हुए। अब राज्यसभा सांसद बनने को तैयार हो गए 20 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार! यह चौंकाने वाला फैसला है, जिसकी जानकारी खुद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए दी। भारतीय जनता पार्टी के भारी दबाव के बाद वह 37 साल पुराने रास्ते पर लौटने को तैयार हुए हैं। तो क्या देश की नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें कोई बड़ा ओहदा मिलने जा रहा है या सिर्फ सांसद बनकर वह राजनीति की अंतिम पारी खेलने के लिए उतरे हैं?

उप प्रधानमंत्री जितनी ताकत तो रख रहे नीतीश

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चंद्र बाबू नायडू और नीतीश कुमार के लोकसभा सांसदों की बदौलत टिकी है। इसमें नीतीश कुमार को जिस तरह से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ राज्यसभा जाना पड़ रहा है, उससे उनके लिए कुछ बड़ा प्लान रखना नरेंद्र मोदी सरकार के लिए शायद जरूरी हो। उप राष्ट्रपति पद की पेशकश नीतीश कुमार तक पहुंची थी, तब वह तैयार नहीं हुए थे। अब राज्यसभा सांसद बनकर रिटायर होना तो उनकी इच्छा में नहीं ही हो शायद। नीतीश ने अप्रत्याशित फैसला लिया है तो क्या आगे कुछ उन्हें आश्चर्यजनक तौर पर मिल सकता है? इस सवाल के जवाब में चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- “वह सीएम की कुर्सी छोड़ने के लिए मान गए, यह बहुत चौंकाने वाला है। लेकिन, अगर अब उन्हें उप प्रधानमंत्री जैसा कुछ बनाया जाए तो बहुत आश्चर्यजनक नहीं होगा। वह अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और केंद्र की मौजूदा सरकार के लगभग सभी मंत्रियों से सीनियर हैं। इसलिए, कुछ अच्छा तो होना ही चाहिए।” 

पहली बार कब सांसद बने थे नीतीश, कब चुनाव हारे?

नीतीश कुमार पहली बार 28 नवंबर 1989 को पटना जिले के बाढ़ संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। तब, सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 13 मार्च 1991 तक रहा था। इस बीच, अप्रैल 1990 में वीपी सिंह सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया था। वह लोकसभा में उलटपुलट का दौर था। वीपी सिंह सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का कार्यकाल भी 10 नवंबर 1990 को खत्म हो गया। इसके बाद कांग्रेस की मदद से चंद्रशेखर पीएम बने, लेकिन 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया तो फिर चंद्रशेखर पदमुक्त हो गए और 13 मार्च 1991 को लोकसभा भंग हो गया।

फिर 1991 में नीतीश कुमार बाढ़ से ही सांसद बने। तत्कालीन जनता दल महासचिव और लोकसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर रहे नीतीश कुमार को तब पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 8 अप्रैल 1993 को कृषि समिति का चेयरमैन बनाया था। लोकसभा का यह कार्यकाल पूरा हुआ तो 1996 में फिर बाढ़ से ही नीतीश कुमार सांसद बने। इस बार 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, हालांकि यह सरकार सात दिन ही चली। दूसरी बार, जब 15 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो सबसे बड़े गठबंधन के 41 दलों में समता पार्टी भी थी।

नीतीश कुमार को केंद्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री बनाया गया। अगस्त 1999 में गैसाल में हुई रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से अपना इस्तीफा दे दिया। फिर करगिल युद्ध के बाद 1999 के लोकसभा चुनाव कराना पड़ा तो भाजपा बड़े दल के उभरी। पहली बार पांच साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार रही। इसमें भी नीतीश केंद्रीय मंत्री रहे। उसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार बाढ़ से हार गए और इसके बाद 2005 से बिहार की राजनीति बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आसपास ही रही। आज तक वही स्थिति है। दस बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार अब 37 साल पुराने रास्ते पर दिल्ली कूच के लिए राज्यसभा जा रहे हैं।

फैशन स्टेटमेंट था या कोई धार्मिक वजह, क्यों विजय-रश्मिका के वेडिंग रिसेप्शन में नंगे पैर पहुंचे राम चरण?

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हैदराबाद में बुधवार को विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की वेडिंग रिसेप्शन पार्टी सितारों से सजी रही, जहां साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम नए जोड़े को आशीर्वाद देने पहुंचे। इस ग्लैमरस शाम में अभिनेता राम चरण की एंट्री ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा। 

क्यों नंगे पैर पहुंचे थे राम चरण?

राम चरण अपनी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला के साथ रिसेप्शन में पहुंचे और पूरी तरह काले कपड़ों में नजर आए। सबसे खास बात यह रही कि वे नंगे पैर समारोह में शामिल हुए। हालांकि यह कोई फैशन स्टेटमेंट नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक धार्मिक कारण है।दरअसल, राम चरण इन दिनों अयप्पा दीक्षा का पालन कर रहे हैं। यह भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा किया जाने वाला एक पवित्र व्रत है, जिसे सबरीमाला मंदिर की यात्रा से पहले किया जाता है। इस दौरान भक्त सादगी और अनुशासन से भरा जीवन जीते हैं। अयप्पा दीक्षा आमतौर पर 41 से 48 दिनों तक चलती है और इसे आध्यात्मिक तैयारी का समय माना जाता है।इस अवधि में भक्त साधारण काले, नीले या भगवा रंग के कपड़े पहनते हैं, अक्सर नंगे पैर चलते हैं और सख्त शाकाहारी भोजन करते हैं। साथ ही उन्हें शराब और अन्य भोग-विलास से दूर रहना होता है और रोजाना पूजा-पाठ और ध्यान करना होता है।

सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय

इस व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना भी जरूरी माना जाता है। भक्त इस अवधि में दाढ़ी या बाल भी नहीं कटवाते और पूरी तरह सादगी व आत्म-संयम का जीवन अपनाते हैं। इस साधना का उद्देश्य मन को शांत करना,अनुशासन बढ़ाना और भगवान अयप्पा की भक्ति में पूरी तरह समर्पित होना है।यही वजह है कि इतने बड़े और हाई-प्रोफाइल रिसेप्शन में शामिल होने के बावजूद राम चरण ने अपने व्रत के नियमों का पूरी तरह पालन किया और नंगे पैर ही समारोह में पहुंचे। उनका यह अंदाज अब सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है।

रिसेप्शन में पहुंचे सेलेब्स 

विजय-रश्मिका के रिसेप्शन में मृणाल ठाकुर, श्रीलीला, अल्लू अर्जुन, राम चरण, चिरंजीवी, नागा चैतन्य और शाहिद कपूर के अलावा कई फिल्मी सितारे पहुंचे।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलें, CM पद के लिए 5 दावेदार

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पटना। बिहार की सियासत ने एक बार फिर सभी को चौंका दिया है. विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद सीएम पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद को छोड़कर अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. गुरुवार 5 मार्च को वे राज्यसभा के लिए नामांकन भर सकते हैं. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में नए सीएम फेस को लेकर चर्चा तेज हो गई है. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर बिहार को जल्द ही नया सीएम चेहरा मिल सकता है।

राज्यसभा के लिए भर सकते हैं नामांकन

राजनीतिक सूत्रों और भाजपा-जदयू के नेताओं के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए अपना नामांकन आज दाखिल कर सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री आज यानी गुरुवार को पटना में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नामांकन में शामिल होने के लिए आ सकते हैं. इसी दौरान नीतीश कुमार के नए भविष्य को लेकर भी आधिकारिक घोषणा हो सकती है. फिलहाल इस बात की किसी भी तरह से आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने नामांकन पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

बिहार का अगला सीएम कौन?

नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफे के बाद सबसे बड़ी चर्चा का विषय है कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी. सूत्रों के अनुसार, इस बार बिहार में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भाजपा से ही हो सकते हैं. सीएम चेहरे के लिए कई नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. इस रेस में दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का नाम जोर-शोर से उभरकर सामने आ रहा है. वहीं इसके अलावा दिलीप जायसवाल, दीघा से भाजपा विधायक संजीव चौरसिया जैसे नाम भी चर्चा में हैं। सीएम फेस की इस रेस में ‘डार्क हॉर्स’ के रूप में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी बड़े दावेदार माने जा रहे हैं. इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री की रेस में विजय चौधरी और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।

बिहार का राजनीतिक समीकरण

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में भाजपा और जेडीयू की भूमिका पूरी तरह बदल सकती है. फिलहाल मौजूदा एनडीए सरकार में सत्ता की कमान जेडीयू के पास है. इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा हैं.राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाते ही सत्ता की कमान जेडीयू के बजाय भाजपा के हाथों में होगी. वहीं भाजपा नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जेडीयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

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