चक्रवाती तूफान मोंथा का खौफ! विशाखापट्टनम हवाई अड्डे की 32 फ्लाइट्स हुईं कैंसिल

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डेस्क: चक्रवाती तूफान मोंथा (Cyclone Montha) की वजह से आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और ओडिशा (Odisha) के तटीय इलाके (Coastal Areas) काफी प्रभावित होंगे. इसके आने से पहले चेन्नई में कई राहत केंद्र बनाए गए हैं. अब तूफान को देखते हुए मंगलवार को विशाखापट्टनम हवाई अड्डे (Visakhapatnam Airport) से संचालित होने वाली कुल 32 उड़ानें रद्द (Flights Cancelled) कर दी गईं.

रिपोर्ट के मुताबिक विशाखापट्टनम हवाई अड्डे के निदेशक एन. पुरुषोत्तम ने कहा कि 27 अक्टूबर को एअर इंडिया एक्सप्रेस की दो उड़ानें रद्द कर दी गई थीं. उन्होंने कहा, ”हम हर दिन 30 से 32 उड़ानें संचालित कर रहे हैं, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों शामिल हैं. आज वे सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं.” उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे ने भारतीय विशाखापट्टनम प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार भीषण चक्रवाती तूफान से बचाव के लिए सावधानियां बरती हैं, जिसमें चक्रवात से पहले और बाद के चरण शामिल हैं.

इसी तरह, विजयवाड़ा हवाई अड्डे ने 16 फ्लाइट्स कैंसिल कर दीं, लेकिन पांच फ्लाइट्स संचालित कीं. विजयवाड़ा हवाई अड्डे के निदेशक लक्ष्मीकांत रेड्डी ने कहा, ”कल (सोमवार) विशाखापट्टनम के लिए केवल एक उड़ान रद्द हुई थी, लेकिन आज दिल्ली और मुंबई सहित देश भर के कई जगहों के लिए 16 उड़ानें रद्द कर दी गईं.”

रेड्डी के अनुसार, एयरलाइनों ने मंगलवार के लिए परिचालन स्थगित करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि बुधवार की उड़ानों के संचालन के बारे में शाम तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है. इसी तरह, तिरुपति हवाई अड्डे पर चार उड़ानें रद्द कर दी गईं. इस बीच, एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि दक्षिण मध्य रेलवे जोन में 27 अक्टूबर और मंगलवार को कुल 120 ट्रेनें रद्द कर दी गईं.

बता दें कि एनडीआरएफ ने चक्रवात मोंथा को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों के लिए बचाव कर्मियों की 45 टीम तैनात की हैं. मोंथा मुख्य रूप से तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा को प्रभावित करेगा तथा इसके कारण झारखंड और तमिलनाडु में भारी बारिश का पूर्वानुमान है.

सूर्य उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ का समापन, आज 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण

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छपरा: चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व छठ का आज मंगलवार को उदयाचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही समापन हो गया. छठ व्रतियों ने सुबह की पहली किरणों में नदी-तालाबों के घाटों पर खड़े होकर दूध, जल और मौसमी फलों से सूर्य देव को नमन किया, जिसके बाद 36 घंटे से चला आ रहा निर्जला उपवास तोड़ा गया.

तोड़ा गया 36 घंटे का निर्जला उपवास: सबसे पहले व्रतियों ने घी मिश्रित चाय का सेवन किया, जो इस कठिन तप के समापन की परंपरा का प्रतीक है. छठ व्रत को अत्यंत कठिन तप माना जाता है, जिसमें शुद्धता, संयम और भक्ति का अनुपम संगम होता है. छठ व्रति 36 घंटे तक निर्जला उपवास को आज तोड़ने के साथ अन्न ग्रहण करती हैं.

नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक की पवित्र यात्रा: इस चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत पहले दिन नहाय-खाय से होती है, जब व्रतधारी सात्विक भोजन के रूप में दाल-चावल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करते हैं. दूसरे दिन खरना का आयोजन होता है, जिसमें साठी चावल की खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनाया जाता है, जिसे व्रतियों द्वारा ग्रहण करने के बाद परिजनों और आसपास के लोगों में वितरित किया जाता है. खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ होता है, जो तीसरे दिन षष्ठी को संध्या अर्घ्य और चौथे दिन सप्तमी को उषा अर्घ्य तक चलता है. सोमवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया था और आज सुबह दूसरा अर्घ्य अर्पित कर पर्व का भावपूर्ण समापन हुआ.

छठ का धार्मिक महत्व: भगवान सूर्य की उपासना का यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला शारदीय छठ कहलाता है, जो जीवन शक्ति, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है. साल में दो बार होने वाला यह पर्व अप्रैल मास में चैत्र छठ के रूप में भी उत्साहित होता है. मौसमी फलों, ठेकुओं और कलसूप में रखे प्रसाद को नदी, तालाब या पोखर के जल में खड़े होकर सूर्य को अर्पित किया जाता है. मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त कोशी भराई करते हैं, जिसमें मिट्टी के हाथी के चारों ओर दीप जलाकर गन्ना स्थापित किया जाता है.

घाटों पर साफ-सफाई और भव्य तैयारी: छठ पर्व की पवित्रता को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय युवाओं ने सभी छठ घाटों पर व्यापक साफ-सफाई अभियान चलाया, साथ ही रोशनी की आकर्षक व्यवस्था की गई. प्रसाद निर्माण में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा गया, जो इस त्यौहार की आत्मा है. घाटों पर पारंपरिक गीतों की धुनें गूंजती रहीं, जो आस्था के सागर में श्रद्धालुओं को डुबोती रहीं. इस वर्ष भी यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता को मजबूत करने का माध्यम बना.

NDRF, SDRF और पुलिस की तैनाती: सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने सभी घाटों पर दंडाधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल, NDRF और SDRF की टीमें तैनात की. विद्युत आपूर्ति की निर्वाध व्यवस्था सुनिश्चित की गई, ताकि रात्रि जागरण और अर्घ्य के समय कोई असुविधा न हो. जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक और स्थानीय विधायक स्वयं घाटों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेते रहे, जिससे लाखों श्रद्धालु बिना किसी हादसे के पर्व मना सके.

छपरा जिले में 350 घाटों पर उमड़ी भक्तों की भीड़: छपरा जिले में इस वर्ष लगभग 350 घाटों पर छठ व्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया, जिनमें से 100 से अधिक घाट खतरनाक होने के बावजूद सुरक्षा कवच के कारण सुरक्षित रहे. मांझी से सोनपुर तक सरयू-गंगा, पानापुर से सोनपुर तक गंडक नदी और जिले के तालाबों पर लाखों भक्त एकत्र हुए. सोमवार शाम और मंगलवार सुबह के अर्घ्यों के समय घाट आस्था के सैलाब से पटे रहे, जहां “जय छठी मइया” के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो गया.

12,000 स्पेशल ट्रेनों से बिहार पहुंचे लाखों प्रवासी: रेल मंत्रालय ने छठ उत्साह को देखते हुए बिहार के लिए 12,000 से अधिक स्पेशल ट्रेनें संचालित कीं, जो 28 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलेगीं. यह संख्या पिछले वर्ष से 50 प्रतिशत अधिक है, जिससे प्रवासी मजदूरों को घर लौटने में आसानी हुई. पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर जैसे स्टेशनों पर छठ भक्ति गीत बजाए गए, जबकि चिकित्सा बूथ और भीड़ प्रबंधन से यात्रा सुगम बनी. इस पहल से त्यौहार की चमक और बढ़ गई.

चुनावी हलचल के बीच आस्था का संगम: विधानसभा चुनाव 2025 के एक हफ्ते बाद होने के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस छठ महापर्व में सक्रिय दिखे, जो जनसंपर्क का माध्यम बना. विपक्षी दलों ने भीड़भाड़ वाली ट्रेनों पर सवाल उठाए, लेकिन रेल मंत्री ने स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था का बचाव किया. यह पर्व न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत किया, जो आगामी चुनावी माहौल में शांति का संदेश देता है.

 

 

गला घोंटकर मारा, शव पर लगाया घी-शराब, फिर…UPSC अभ्यर्थी की जान लेने वाली लिव-इन पार्टनर की खुली पोल

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नई दिल्ली: यूपीएससी का एक अभ्यर्थी जो आईएएस बनना चाहता था, उसे उसी के कमरे में उसी की लिव-इन पार्टनर (live-in partner) ने मार डाला. दिल्ली पुलिस ने जब इस घटना का खुलासा किया तो कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए. इस घटना में कुल 3 किरदार शामिल थे लेकिन बाद में चौथा भी जुड़ गया. अमृता चौहान, रामकेश मीणा और सुमित कश्यप, ये दिल दहला देने वाली कहानी इन्हीं तीनों के आसपास घूमती है.. इस कहानी के चौथे किरदार का नाम है संदीप कुमार.

अमृता और रामकेश दिल्ली के गांधी विहार में रहते थे. रामकेश यूपीएससी की तैयारी करता था और अमृता बीएससी फॉरेंसिक साइंस की स्टूडेंट है. दोनों लिव इन में थे लेकिन बीच में किसी वजह से अमृता रामकेश से अलग हो गई और वह संदीप कुमार, जो अमृता के होम डिस्ट्रिक मुरादाबाद का रहने वाला है, उसके साथ रहने लगी.

अमृता चाहती थी कि रामकेश के साथ उसकी पुराने वक्त की सभी यादें मिट जाएं. लेकिन वह ऐसा करने को राजी नहीं हुआ क्योंकि रामकेश के पास उसके कुछ प्राइवेट वीडियो थे. बस यहीं से अमृता ने खून की साजिश रची और इसके लिए उसने अपने बॉयफ्रेंड संदीप की मदद ली. बता दें कि संदीप एसएससी सीजीएल का अभ्यर्थी है.

संदीप ने अपने एक और दोस्त सुमित को भी इसमें शामिल किया. सुमित एलपीजी डीलर है और यूपी के मुरादाबाद का ही रहने वाला है. 6 अक्टूबर को सुमित और अमृता प्लान के मुताबिक रामकेश के घर पहुंचे और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी. सुमित ने गैस सिलेंडर खोलकर रामकेश के पास ऐसे रखा कि एक निश्चित वक्त के बाद उसमें धमाका हो जाए.

इन दोनों ने रामकेश के शव पर घी, शराब और कमरे में जो भी ज्वलनशील पदार्थ था, सब लगा दिया ताकी यह हत्या नहीं हादसा लगे. 6 अक्टूबर को घटना को अंजाम देकर दोनों वहां से निकले. सबकुछ प्लान के मुताबिक ही हुआ. धमाका हुआ. आग लग गई और प्लान सक्सेसफुल हो गया. लेकिन दिल्ली पुलिस ने जब पड़ताल शुरू की तो कैमरे बोल उठे और मोबाइल गवाही देने लगा कि यह हादसा नहीं हत्या है.

32 साल का नौजवान जो आईएएस बनने का सपना देखता था. दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी करता था. लेकिन एक दिन कमरे में उसकी जली हुई लाश मिलती है. आग इतनी भयावह थी कि कमरे में रखा सारा सामान जल गया. पुलिस को पहला सुराग सीसीटीवी फुटेज से मिला, जिसमें कुछ ऐसा दिखा जिससे पुलिस को शक हुआ कि यह हादसा नहीं बल्कि हत्या है.

गांधी विहार के जिस मकान में रामकेश की हत्या हुई उसी मकान के कैमरे ने अमृता चौहान के खूनी प्लान का भांडा फोड़ दिया. घटना वाले दिन दो नकाबपोश बिल्डिंग के अंदर घुसते हैं और कुछ देर बाद दोनों बाहर निकल जाते हैं. उनके निकलते ही वहां धमाका हो जाता है. ये दोनों नकाबपोश कोई और नहीं बल्कि अमृता चौहान और सुमित कश्यप थे.

दिल्ली पुलिस ने जब कड़ियों को जोड़ना शुरू किया तो परतें खुलने लगीं. रामकेश बिल्डिंग के चौथे फ्लोर पर रहता था. अमृता और सुमित रात के अंधेरे में रामकेश के कमरे में पहुंचे और उसकी हत्या कर दी. उन्होंने ऐसा दिखाने का प्रयास किया यह हत्या नहीं हादसा है. चूंकि सुमित ए़लपीजी डीलर है इसलिए उसे इसका अच्छी तरह ज्ञान था कि कितनी गैस खोलनी है, कितनी दूरी से खोलनी है और धमाका कितनी देर में होगा.

सुमित और अमृता बिल्डिंग से बाहर निकले लेकिन निकलते वक्त अमृता ने अपना फॉरेंसिक साइंस वाला दिमाग लगाया और दरवाजे को ऐसे बंद किया कि लगे रूम अंदर से ही लॉक था. दिल्ली पुलिस ने इस खूनी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है. फॉरेंसिक एक्सपर्ट और टेक्निकल एडवांस सिस्टम का इस्तेमाल करके दिल्ली पुलिस अपराधियों तक पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया.

छठ की तैयारियों के बीच दर्दनाक हादसा, घाट बनाने के दौरान गंगा में डूबने से चार बच्चों की मौत

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नई दिल्ली। लोक आस्था के महापर्व छठ (Chhath) की तैयारियों के बीच भागलपुर (Bhagalpur) से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। नवगछिया अनुमंडल के इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के नवटोलिया गांव में छठ घाट बनाने के दौरान गंगा नदी में डूबने से चार बच्चों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार की दोपहर गांव के कुछ बच्चे गंगा किनारे छठ घाट तैयार करने पहुंचे थे। घाट की सफाई और सजावट के बाद चारों बच्चे नदी में स्नान करने लगे। इस दौरान एक बच्चा अचानक गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने के लिए बाकी तीनों बच्चे भी नदी में उतर गए, लेकिन वे सभी तेज धारा में बह गए और देखते ही देखते पानी में समा गए।

स्थानीय लोगों ने शोर सुनकर गोताखोरों की मदद से सभी को किसी तरह बाहर निकाला और आनन-फानन में इस्माइलपुर अस्पताल ले जाया गया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान नवटोलिया गांव निवासी मिथिलेश कुमार का पुत्र प्रिंस कुमार (11) और किशोरी मंडल का पुत्र नंदन कुमार (10) के रूप में हुई है। अन्य दो बच्चे पास के छठठु टोला के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

घटना की सूचना मिलते ही इस्माइलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से पूछताछ की। वहीं, गोपालपुर के निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मंडल भी अस्पताल पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। मृतकों के घरों में कोहराम मचा हुआ है। माताएं अपने बच्चों के शवों से लिपटकर बिलखती रहीं। छठ की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

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CM योगी ने मुस्तफाबाद का नाम बदला, अब इस नाम से जाना जाएगा

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लखीमपुर। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर-खीरी (Lakhimpur-Kheri) से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। सीएम योगी (CM Yogi) ने यहां के गांव मुस्तफाबाद (Mustafabad village) का नाम बदल (Change Name) दिया है। अब इस गांव को कबीरधाम (Kabirdham) के नाम से जाना जाएगा। सीएम योगी ने खुद लखीमपुर-खीरी में मंच से जनता को संबोधित करते हुए इस बात का ऐलान किया।

सीएम योगी ने कहा, “मैं जब यहां पर आया और मैंने गांव के बारे में पूछा तो मुझे बताया गया कि गांव का नाम मुस्तफाबाद है। मैंने पूछा कि यहां पर कितनी मुस्लिम आबादी रहती है? तो मुझे पता लगा कि यहां एक भी मुस्लिम आबादी नहीं है। लेकिन नाम मुस्तफाबाद हो गया। हमने कहा कि अब ये नाम बदलना चाहिए और इसका नाम मुस्तफाबाद नहीं, कबीरधाम रख दो। हम यहां से प्रस्ताव मंगाएंगे और प्रस्ताव मंगाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ा देंगे।”

सीएम योगी ने कहा, “बहनों और भाईयों, यही आत्मीयता का भाव है। उन लोगों ने अयोध्या को फैजाबाद किया था, प्रयागराज को इलाहाबाद किया था, कबीरधाम को मुस्तफाबाद किया था और ये हमारी सरकार है जो फैजाबाद को अयोध्या बना रही है, इलाहाबाद को प्रयागराज बना रही है और मुस्तफाबाद को कबीरधाम स्थल बनाकर के उस गौरव की दोबारा स्थापना कर आपको उससे जोड़ रही है।”

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इन इलाकों में बरपाएगा कहर, 110 किमी. की रफ्तार से चलेगी हवा, रेड अलर्ट जारी

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हैदराबाद: मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती तूफान मोंथा के बंगाल खाड़ी से बढ़कर इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और आज (28 अक्टूबर) की सुबह तक एक गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की संभावना है.

इन इलाकों में कहर बरपाएगा चक्रवाती तूफान मोंथा
उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर आगे बढ़ते हुए इसके आज शाम या फिर रात के दौरान एक भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंध्र प्रदेश के तटों पर टकराने का अनुमान है. इस दौरान चक्रवाती तूफान मोन्था प्रभावित इलाकों में कहर बरपा सकता है. इसका सबसे अधिक प्रभाव आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और ओडिशा के तटीय इलाकों पर पड़ेगा.

तूफान की रफ्तार बढ़कर 110 किमी होने का अनुमान
आईएमडी के अनुसार चक्रवाती तूफान मोन्था के मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के आसपास आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की प्रबल संभावना है. इस दौरान इसकी रफ्तार 90-100 किमी प्रति घंटे की गति से बढ़कर 110 किमी प्रति घंटे तक होने का अनुमान है.

इन इलाकों में भीषण बारिश का अनुमान
मौसम विभाग (आईएमडी) ने भविष्यवाणी की है कि चक्रवात मोन्था एक गंभीर चक्रवात में बदल सकता है क्योंकि यह मंगलवार शाम तक आंध्र प्रदेश के तटीय तटों से टकराएगा. एएनआई से बात करते हुए आईएमडी हैदराबाद के अधिकारी जीएनआरएस श्रीनिवास राव ने कहा, ‘मंगलवार शाम या रात तक मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा क्षेत्र के आसपास आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की उम्मीद है. आंध्र प्रदेश के अधिकांश जिलों में अत्यधिक भारी वर्षा और तेज हवा चलेगी.

उन्होंने आगे कहा, ‘हमने तीन जिलों, पेड्डापल्ली, जयशंकर भूपलपल्ली और मुलुगु में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. बाकी सभी पूर्वोत्तर जिले येलो अलर्ट पर हैं.’ चक्रवात मोन्था के बारे में आर्यपल्ली स्थित मरीन पुलिस स्टेशन की प्रभारी निरीक्षक विद्याभारती नायक ने कहा, ‘आंध्र प्रदेश से आई मछली पकड़ने वाली नावें चक्रवात के कारण वापस नहीं लौट पा रही हैं.

तूफान से निपटने की तैयारी
उन्होंने कहा, ‘हमारे गंजम जिला कलेक्टर ने उन सभी को बंदरगाह में बसने का आदेश दिया है. हमने गोपालपुर बंदरगाह पर 30 नावों को आश्रय प्रदान किया है. जब तक चक्रवात जारी रहेगा, वे वहीं रहेंगी.’ चक्रवात मोन्था के पूर्वी तट के करीब पहुँचने के साथ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को तटीय क्षेत्रों में लोगों की जान बचाने और नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अतिरिक्त रूप से संवेदनशील तटीय क्षेत्रों के निवासियों को पुनर्वास केंद्रों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्रों में उच्च गुणवत्ता वाला भोजन और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने इन केंद्रों के कामकाज की निगरानी के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति का भी आदेश दिया. उन्होंने कहा, ‘पेयजल के प्रदूषण को रोकने के लिए सावधानियां बरती जानी चाहिए.’

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जिला कलेक्टरों को चक्रवात राहत उपायों की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें तालाबों और सिंचाई चैनलों में दरारों की निगरानी भी शामिल है.

 

 

 

 

 

 

 

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कई जिलों के अफसरों का तबादला, विपक्ष ने उठाए सवाल

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पश्चिम बंगाल सरकार ने SIR के ऐलान से ठीक पहले राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है. नबन्ना (स्टेट सेक्रेटेरिएट) ने एक आदेश जारी कर कुल 64 IAS अधिकारियों समेत 10 जिलाधिकारियों (DM) और 5 WBCS अधिकारियों का तबादला किया है. इसके अलावा कई ADM और SDO को भी तबादले की इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह फैसला उन अधिकारियों को लंबे समय से एक ही पद पर तैनात रहने की वजह से किया गया है, कहना है कि इस कदम से प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना में मदद मिलेगी. लेकिन इस निर्देश की समय सीमा इसका अलग ही मतलब निकलवा रही है.

राजनीतिक हलकों में शुरू हुई चर्चा
राज्य में विपक्षी दलों ने इस कदम को राजनीतिक मोड़ दे दिया है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि SIR से पहले ममता सरकार ने ने अपने ‘वफादार’ अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं. गौरतलब है कि दोनों 24 परगना, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में भी बदलाव किए गए हैं. जहां कई दक्षिणपंथियों ने दावा किया कि यहां बांग्लादेशी वोट हैं.

कुछ प्रमुख जिलों में नए जिलाधिकारी
तबादले की इस कवायद में कुछ प्रमुख जिलों में नए जिलाधिकारी बनाए गए हैं. उत्तर 24 परगना में शरद कुमार द्विवेदी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है. उनकी जगह IAS शशांक नए जिलाधिकारी बनाए गए हैं.

दक्षिण 24 परगना में सुमित गुप्ता को कोलकाता नगर निगम (KMC) का Municipal Commissioner बनाया गया है. मालदा में शेटी को उत्तर 24 परगना का नया जिलाधिकारी बनाया गया है.

मुर्शिदाबाद में नितिन सिंघानिया नए जिलाधिकारी बने हैं. बीरभूम में ढवल जैन को जिले का नया जिलाधिकारी बनाया गया है. यह बड़े पैमाने पर तबादला प्रशासनिक कार्यों में नई गति लाने के सरकार के इरादे का संकेत दे रहा है, लेकिन विपक्ष इसे SIR जैसी बड़ी परियोजनाओं से जोड़ के देख रहा है.

केरल के इडुक्की में भूस्खलन से बड़ा हादसा, पति की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल

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इडुक्की। केरल (Kerala) के पहाड़ी जिले इडुक्की (Idukki) में शनिवार रात एक भूस्खलन (Landslide) ने तबाही मचा दी। हादसे में 48 वर्षीय व्यक्ति की मौत (Dead) हो गई, जबकि उसकी पत्नी (Wife) गंभीर रूप से घायल (Injured) हो गई। घटना अदिमाली के मन्नमकंदम इलाके में हुई, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग NH-85 के चौड़ीकरण कार्य के दौरान पहाड़ की मिट्टी ढह गई और कम से कम आठ घर जमींदोज हो गए। मृतक की पहचान लक्षमवीडु उन्नाथी के बीजू (48) के रूप में हुई है। उनकी पत्नी संध्या घायल हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस के अनुसार, कॉलोनी में कुल 22 घर थे। भूस्खलन का खतरा देखते हुए शनिवार शाम सभी परिवारों को राहत शिविरों में शिफ्ट कर दिया गया था। हालांकि, बीजू और संध्या रात में घर लौट आए ताकि कुछ जरूरी सामान और खाना तैयार कर सकें। अदिमाली ब्लॉक पंचायत सदस्य कृष्णमूर्ति ने बताया कि जब वे घर के अंदर थे, तभी रात करीब 10.30 बजे पहाड़ की मिट्टी खिसक गई और आठ घर पूरी तरह दब गए।

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर एंड रेस्क्यू सर्विस को सूचना दी। इसके बाद पांच घंटे तक चला बचाव अभियान चलाया गया। बीजू और संध्या को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन बीजू ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। कृष्णमूर्ति ने बताया कि संध्या को पहले अदिमाली के अस्पताल में भर्ती किया गया था, बाद में उन्हें अलुवा अस्पताल शिफ्ट किया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।

भारत मित्र देशों के साथ मजबूती से खड़ा, हम ग्लोबल साउथ का अहम हिस्सा…PM मोदी ने ASEAN शिखर सम्मेलन को किया संबोधित

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को 47वें ASEAN शिखर सम्मेलन (ASEAN Summit) को वर्चुअली संबोधित किया है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ASEAN मिलकर दुनिया की 25 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह दिखाता है कि भारत और ASEAN के अन्य देश कितना मजबूत हैं. उन्होंने कहा कि भारत से इन देशों के गहरे और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ASEAN परिवार के साथ जुड़ने पर खुशी जताई और सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को बधाई दी.

पीएम मोदी ने जोर दिया कि आसियान भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” का स्तंभ है और दोनों के बीच सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए अहम है. उन्होंने कहा कि भारत और आसियान “ग्लोबल साउथ” के सारथी हैं और भारत हर आपदा के समय अपने आसियान मित्र देशों के साथ मजबूती से खड़ा रहता है. उन्होंने कहा कि भारत अपने हर मित्र देश को किसी भी हालत में अकेला नहीं छोड़ता है. अगर मित्र देश को हमारी जरूरत है तो भारत उनके साथ खड़ा दिखाई देता है.

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘मैं तिमोर-लेस्ते का ASEAN के सबसे नए सदस्य के तौर पर स्वागत करता हूं. मैं थाईलैंड की महारानी मां के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं. भारत और ASEAN मिलकर दुनिया की एक-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं. हम न केवल भूगोल साझा करते हैं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक संबंध और साझा मूल्य भी साझा करते हैं. हम ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं. हम न केवल व्यापारिक संबंध, बल्कि सांस्कृतिक संबंध भी साझा करते हैं.’

वहीं कुआलालंपुर में रविवार से शुरू हो रहे 47वें आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मलेशिया पहुंच गए हैं. माना जा रहा है कि ट्रंप की यह यात्रा व्हाइट हाउस में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद एशिया की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है. इसे अमेरिका की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोबारा सक्रिय भागीदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. अमेरिकी टैरिफ और व्यापार नीतियों के असर से क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव है, और यह शिखर सम्मेलन उस समय हो रहा है जब ASEAN की तटस्थता और सामूहिकता की परीक्षा हो रही है.

इस साल का सम्मेलन कई दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है. पूर्वी तिमोर-लेस्ते को औपचारिक रूप से ASEAN का 11वां सदस्य देश बना दिया गया है. यह ब्लॉक का 26 साल बाद पहला विस्तार है. लगभग 14 लाख की आबादी वाला यह छोटा देश अब ASEAN के व्यापार, निवेश और विकास ढांचे का हिस्सा बनेगा.