विदेशी गैजेट्स होंगे महंगे, अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग लौटाने की तैयारी…

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Trump Tariffs: अमेरिका में सस्ते गैजेट्स का दौर अब शायद खत्म होने वाला है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई चाल ने टेक वर्ल्ड में भूचाल मचा दिया है। प्लान ये है कि अब विदेशी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर उनमें मौजूद चिप्स की गिनती के हिसाब से टैरिफ लगेगा।

यानी छोटा-सा इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश हो या आपका हाई-एंड लैपटॉप – सबकी कीमतें आसमान छुएंगी!

ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक

  • वाणिज्य विभाग चाहता है कि हर चिप की वैल्यू पर टैरिफ वसूला जाए।
  • मकसद: कंपनियों को मजबूर करना कि वे अपनी मैन्युफैक्चरिंग अमेरिका में वापस लाएँ।
  • ट्रंप प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है – “विदेशी चिप्स पर डिपेंडेंसी खत्म करनी ही होगी।”

जेब पर महंगाई का वार

  • टूथब्रश, स्मार्टफोन, लैपटॉप… सब महंगे होंगे।
  • अमेरिका में महंगाई वैसे ही 2% के टारगेट से ऊपर है, अब और झटका तय।
  • एक्सपर्ट्स का कहना है – “घरेलू सामान भी सस्ते नहीं होंगे, क्योंकि उनके इनपुट्स पर भी टैरिफ लगेगा।”

Trump Tariffs: छूट या चाल?

  • हाल ही में दवाओं पर 100% और हैवी-ड्यूटी ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाया जा चुका है।
  • अब सवाल – किन प्रोडक्ट्स को टैरिफ के दायरे में लाया जाएगा?
  • ट्रंप की पेशकश: अगर कोई कंपनी अपना आधा प्रोडक्शन अमेरिका में शिफ्ट करती है, तो छूट संभव।

कितना भारी होगा टैरिफ?

  • इलेक्ट्रॉनिक सामान पर 25% टैरिफ पर विचार।
  • जापान और EU से आने वाले प्रोडक्ट्स पर 15% टैरिफ का सुझाव।
  • कंपनियों को लुभाने के लिए “अमेरिका में निवेश = छूट” का फार्मूला।

नतीजा: टेक वर्ल्ड में भूचाल

  • अमेरिकी मार्केट में महंगे गैजेट्स की बाढ़।
  • विदेशी कंपनियों पर प्रेशर और घरेलू कंपनियों पर डबल कॉस्ट का असर।
  • आम लोगों की जेब पर बड़ा वार – स्मार्टफोन, लैपटॉप और छोटे गैजेट्स खरीदना होगा मुश्किल।
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Shreya Pandey

17 साल का जैकब शॉल बना सीनियर्स का डिजिटल सुपरहीरो!

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America’s AI: सिलिकॉन वैली में 17 वर्षीय हाई स्कूल छात्र जैकब शॉल ने ऐसा कमाल किया है कि वरिष्ठ नागरिक भी अब टेक्नोलॉजी के मास्टर बन रहे हैं।
जैकब ने अपनी गैर-लाभकारी संस्था “Mode to Code” शुरू की, जो AI, वेब डेवलपमेंट और वीडियो गेम डेवलपमेंट जैसी चीजें मुफ्त में सिखाती है।

युवा जादूगर + सीनियर्स = डिजिटल धमाका

  • 2024 में शुरू हुआ यह प्रोग्राम अब फैल चुका है 20+ असिस्टेड लिविंग सेंटर और 30+ स्कूलों तक।
  • मार्च 2025 से इसे वरिष्ठ नागरिकों तक बढ़ाया गया।
  • शॉल और उनके सह-नेता आयडिन खलीली का मिशन: “पीढ़ियों के बीच डिजिटल गैप खत्म करना।”

स्कैम से बचाव और सुपरकॉन्फिडेंस

  • अमेरिका में 60+ उम्र के लोग 2024 में 4.9 बिलियन डॉलर स्कैम में फंस चुके थे।
  • शॉल की कक्षाओं में ऑनलाइन और फोन स्कैम से बचाव पर जोर।
  • सीनियर्स अब इतने आत्मविश्वासी हैं कि एड कपलन ने चैटजीपीटी का इस्तेमाल अपने मित्र के लिए ओबिटुअरी बनाने में किया!

America’s AI: एजटेक की नई क्रांति

  • CVS Health, Hyundai और Best Buy जैसी कंपनियां 50+ उम्र के उपभोक्ताओं के लिए AI और डिजिटल टूल्स डेवलप कर रही हैं।
  • शॉल का मानना है कि व्यक्तिगत, आमने-सामने की शिक्षा तकनीक सीखने का सबसे असरदार तरीका है।

तकनीक सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि जीवनशैली का सुपरपावर

  • पाउलेट अरोएस्टी (87) कहती हैं, “फेसटाइम और अलेक्सा अच्छे हैं, लेकिन व्यक्तिगत बातचीत का मज़ा अलग है।”
  • मोड टू कोड वरिष्ठ नागरिकों को आत्मविश्वास, सुरक्षा और आधुनिक जीवनशैली का सही संतुलन सिखाता है।
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Shreya Pandey

PM मोदी का खुमड़ी पहनाकर हुआ स्वागत, ब्रह्माकुमारी शांति शिखर भवन का किया उद्घाटन

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रायपुर।  छत्तीसगढ़ में 25वें स्थापना दिवस की धूम है. प्रदेश में 5 दिनों तक राज्योत्सव मनाया जा रहा है. राज्योत्सव के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर पहुंचे. यहां उन्होंने नवा रायपुर के सेक्टर-20 में ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवनिर्मित शांति शिखर भवन का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने संबोधित कहा- ‘राज्य के विकास से देश का विकास… इसी मंत्र पर चलकर हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं. विकसित भारत की अहम यात्रा में ब्रह्मकुमारी जैसी संस्था की बहुत बड़ी भूमिका है. मैं अतिथि नहीं हूं. मैं आप ही का हूं.’

‘आज का दिन बहुत विशेष है‘ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘आज का दिन बहुत विशेष है. आज हमारा छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है. छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड और उत्तराखंड की स्थापना के भी 25 वर्ष पूरे हुए हैं. आज देश के और भी कई राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। मैं इन सभी राज्यों के निवासियों को स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूं. राज्य के विकास से देश का विकास, इसी मंत्र पर चलते हुए हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं.’

‘विकसित भारत की इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्था’

उन्होंने आगे कहा- ‘विकसित भारत की इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्था की बहुत बड़ी भूमिका है. मेरा सौभाग्य रहा है कि मैं बीते कई वर्षों से आप सभी के साथ जुड़ा हुआ हूं. मैं जब भी आपके बीच आया हूं, मैंने आपके प्रयासों को बहुत गंभीरता से देखा है. मैंने हमेशा अनुभव किया है, जहां शब्द कम और सेवा ज्यादा है.’

‘आचारण ही सबसे बड़ा धर्म है’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- टहमारे यहां कहा जाता है, ‘आचारः परमो धर्म आचारः परमं तपः. आचारः परमं ज्ञानम् आचरात् किं न साध्यते. अत: आचारण ही सबसे बड़ा धर्म है, आचरण ही सबसे बड़ा तप है और आचरण ही सबसे बड़ा ज्ञान है. आचरण से क्या कुछ सिद्ध नहीं हो सकता. यानी बदलाव तब होता है जब अपने कथन को आचरण में भी उतारा जाए और यही ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है.’

7 साल में बना शिखर भवन

जानकारी के मुताबिक ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवनिर्मित शांति शिखर भवन को बनने में 7 साल का समय लग गया. संस्था की तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी बीके कमला के मार्गदर्शन में 15 जनवरी 2018 को इस भवन की नींव रखी गई थी. साल 2022 में उनके देवलोकगमन से पहले भवन का करीब 80% काम हो गया था. जमीन ठोस नहीं होने की वजह से काफी गहराई तक मिट्टी निकाल कर स्लैब ढाला गया. इसके बाद भवन के सारे कॉलम खड़े किए गए. जोधपुर के कारीगरों ने 7 साल में राजस्थानी शैली के इस भवन को तैयार किया है. यह भवन जोधपुर के पिंक स्टोन से तैयार किया गया है. इसके लिए जोधपुर से 150 से अधिक ट्रकों में पिंक स्टोन मंगाए गए थे.

‘बिहारी’ कहलाना अब गर्व की बात, अपमान नहीं

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनाव से पहले एक वीडियो संदेश जारी कर राज्यवासियों से संवाद किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से लगातार बिहार की सेवा करने का अवसर जनता ने उन्हें दिया है और इस दौरान राज्य में विकास व सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता दी गई है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि जब हमने शासन संभाला था, तब ‘बिहारी’ कहलाना एक अपमान माना जाता था। हमने ईमानदारी और पूरी मेहनत से काम किया। आज ‘बिहारी’ कहलाना गर्व की बात है।

सरकार ने हर वर्ग के लिए समान रूप से काम किया है
पीएम मोदी ने आगे कहा कि सरकार ने हर वर्ग के लिए समान रूप से काम किया है। चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, सवर्ण, पिछड़े, अति-पिछड़े, दलित या महादलित सबके विकास के लिए काम हुआ है। मैंने अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया, केवल जनता की सेवा की है। सीएम नीतीश ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बिहार के विकास की कुंजी बताया।

एनडीए की सरकार होने से विकास की रफ्तार और तेज हुई
उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य दोनों जगह एनडीए की सरकार होने से विकास की रफ्तार और तेज हुई है। बिहार में अब विकास के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी मजबूत हुई है। नीतीश कुमार का यह वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर जारी किया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बड़ा बयान, RSS पर प्रतिबंध की मांग की

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नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध की मांग की है. सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उन्होंने कहा, आज देश में जो गड़बड़ियां हो रही हैं और कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो रही है यह सब बीजेपी और आरएसएस की वजह से है. संघ पर फिर से प्रतिबंध लगाना चाहिए. इसके पहले उनके मंत्री बेटे की मांग पर कर्नाटक में संघ की गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध को हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया. संघ को लेकर कांग्रेस के भीतर अजीब डर दिखाई पड़ता है. यह डर कांग्रेस के पतन और आरएसएस के राजनीतिक चेहरे के उत्थान के कारण है. कांग्रेस के सुर, लय, ताल तुष्टिकरण सॉन्ग रचने और गाने में लगे हुए हैं. प्रतिबंध का राग उसी का नया संगीत है. कांग्रेस के लिए संघ ही अब राजनीतिक एजेंडा बचा है. संघ के विरोध से ही उनकी राजनीतिक ताकत बची है. कांग्रेस इसे वैचारिक लड़ाई बताती है, लेकिन यह उसकी सियासी लड़ाई का सबसे मजबूत अस्त्र बचा है. 140 साल की कांग्रेस और 100 साल के आरएसएस के वर्तमान में कांग्रेस का डर छुपा हुआ है. गांधी परिवार की विरासत बाबर की मजार पर तो जाती रही है, लेकिन आज तक इस परिवार का कोई भी व्यक्ति अयोध्या में राम मंदिर नहीं जा सका है. संघ परिवार के लिए राम मंदिर राष्ट्र के धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, जिसे कांग्रेस जाने योग्य स्थल भी नहीं मानती. संघ जिन विचारों के साथ पहले दिन खड़ा था, उन्हीं पर आज भी खड़ा है. यह एक सांस्कृतिक संगठन है. उसके राजनीतिक फेस बीजेपी का उत्थान कांग्रेस के पतन से जुड़ा हुआ है. जो कांग्रेस कभी देश की राजनीतिक सत्ता के हिमालय पर खड़ी थी, उसे आज कुछ राज्यों की तलहटी में संतोष करना पड़ रहा है. आरएसएस पर कांग्रेस ने प्रतिबंध पहले भी लगाए हैं. इस प्रतिबंध ने ही संघ की सेवा विस्तार करने में भूमिका निभाई. जिस समय प्रतिबंध लगा था उस समय कांग्रेस की सरकार में गृहमंत्री सरदार भाई पटेल वल्लभभाई पटेल थे. संघ और बीजेपी सरदार वल्लभभाई पटेल को अपना आदर्श मानती है. गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी ने विशाल प्रतिमा स्थापित कर पटेल की गौरव गाथा को पूरी दुनिया में स्थापित किया है. आधुनिक भारत में पटेल की विरासत को संभालने में कांग्रेस असफल हो गई है. इस विरासत का स्वाभाविक दायित्व निभाते हुए संघ और बीजेपी ने अपना वैचारिक विस्तार करने में सफलता हासिल की है.संघ का एजेंडा ओपन है. कुछ भी सीक्रेट नहीं है. हिंदू आस्था और गौरव का संरक्षण और विस्तार उनका लक्ष्य है. चरित्र निर्माण मार्ग है. सेवा भावना, मंत्र है. सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक समरसता उद्देश्य है. राष्ट्र की मजबूती और समाज की एकता उनका घोषित लक्ष्य है.  इसके विपरीत कांग्रेस का एजेंडा राजनीतिक सत्ता हासिल करना है. इसके लिए विभाजन को बढ़ाना उनका मार्ग है. संघ का हिंदुत्व सफल न हो इसके लिए कांग्रेस देश को जातियों में बांटने का काम करती है. मुस्लिम समाज में जातिवाद पर कांग्रेस चुप रहती है, लेकिन हिंदुओं को जातियों में बांटकर सत्ता हथियाने की कोशिश की जाती है. यहां तक की कांग्रेस सामाजिक न्याय की जड़ी बूटी आरक्षण की व्यवस्था का भी राजनीतिक उपयोग कर समाज में विभाजन को बढ़ाने का प्रयास करती है. यह तो अनुभव की बात है, कि जो दूसरों के लिए गड्ढा होता है वह उसी में खुद गिरता है. कांग्रेस तुष्टिकरण और बैंक के लिए पार्टी की आधारशिला जिस नींव पर खड़ी की है. आज वही उसको सबसे ज्यादा दुख दे रही है.आरएसएस तो सामाजिक समरसता का अभियान चलाती है. संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मस्जिदों में जाकर भी मौलवियों से मिलकर उन्हें अपना दृष्टिकोण समझाने से परहेज नहीं करते. यह भी समरसता का ही प्रयास है. संघ का मुस्लिम मंच इस दिशा में निरंतर काम करता दिखाई पड़ता है. कांग्रेस संघ का वैचारिक मुकाबला नहीं कर पा रही है. इसीलिए प्रतिबंध का राग अलाप रही है. कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन का अंदाजा लगाया जा सकता है, कि संघ को प्रतिबंधित करने की मांग जिस सरकार से की जा रही है, वही सरकार संघ को अपना आदर्श मानती है. सरकारी स्तर पर संघ की गतिविधियों की प्रधानमंत्री सराहना कर चुके हैं.शताब्दी वर्ष में संघ पर डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया है. कांग्रेस की आंखें इस बात से खुल जाना चाहिए, कि सौ साल में संघ की सेवा और चरित्र निर्माण का सुफल है कि उसका प्रचारक देश का प्रधानमंत्री है और उसने भारतीय मुद्रा पर संघ की स्मृति को संजोने का ऐतिहासिक काम करके दिखाया है. जो कांग्रेस संघ पर प्रतिबंध का सोच रखती है, जो किसी को प्रतिबंधित कर अपनी प्रगति सोचती है, उसका तो चिंतन ही दूषित दिखाई पड़ता है. कोई भी व्यक्ति, संगठन किसी को मिटाकर नहीं बल्कि जीत कर आगे बढ़ सकता है. संघ पर प्रतिबंध लगाने की तो कांग्रेस की राजनीतिक  हैसियत बची नहीं है. लेकिन ऐसी बातें करके ही संघ के विस्तार में कांग्रेस नकारात्मक भूमिका निभा रही है ऐसा लगता है.संघ को लेकर कांग्रेस का डर सिर पर चढ़ गया लगता है. कांग्रेस प्रतिबंध के राग से तुष्टिकरण का सॉन्ग गाने की कितनी भी कोशिश करें, उसका वैचारिक धरातल खोखला हो चुका है. पहले इसको भरना होगा, फिर संघ का मुकाबला करने के लिए खड़े होने की ताकत बनेगी.

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News Desk

पीरियड्स खत्म होने के बाद जरूर करवाएं यह आसान टेस्ट, समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा

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नई दिल्ली। आज के समय में महिलाओं की सेहत को लेकर सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है सर्वाइकल कैंसर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लाखों महिलाएं इसकी चपेट में आती हैं। डॉक्टर तरंग कृष्णा का कहना है कि दुर्भाग्य की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी होती है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि एक बेहद आसान और सिर्फ 5 मिनट का टेस्ट इस खतरे को काफी हद तक टाल सकता है। इस टेस्ट का नाम है- पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear Test)।

क्या है पैप स्मीयर टेस्ट?
पैप स्मीयर एक साधारण-सी जांच है जिसमें गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से कुछ कोशिकाएं लेकर माइक्रोस्कोप से देखी जाती हैं। इसका मकसद यह पता लगाना होता है कि कहीं कोशिकाओं में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं हो रहा। यही बदलाव आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं।

कब और कैसे कराना चाहिए यह टेस्ट?
डॉक्टर तरंग कृष्णा के मुताबिक, पैप स्मीयर टेस्ट कराने का सबसे सही समय पीरियड खत्म होने के तुरंत बाद माना जाता है। यह प्रक्रिया न तो दर्दनाक होती है और न ही ज्यादा समय लेती है। जी हां, यह बस कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।

क्यों है यह टेस्ट जरूरी?
अगर सर्वाइकल कैंसर को शुरुआती स्टेज पर पकड़ लिया जाए, तो उसका इलाज बहुत आसान और सफल हो सकता है।
यह टेस्ट महिलाओं को शुरुआती चेतावनी देता है। यानी बीमारी की शुरुआत से पहले ही अलर्ट कर देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अगर हर महिला समय-समय पर पैप स्मीयर टेस्ट कराए, तो सर्वाइकल कैंसर के मामलों को आधा किया जा सकता है।

छोटी-सी सतर्कता, बड़ी सुरक्षा
कई बार हम सोचते हैं कि गंभीर बीमारियों से बचने के लिए बहुत महंगे इलाज या बड़ी प्रक्रियाओं की जरूरत होती है, लेकिन पैप स्मीयर टेस्ट इस सोच को बदल देता है। यह छोटा-सा कदम, जो केवल पांच मिनट लेता है, लाखों महिलाओं की जिंदगी बचा सकता है। इसलिए, हर महिला को चाहिए कि वह नियमित अंतराल पर पैप स्मीयर टेस्ट कराए और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाए। आखिरकार, समय पर किया गया एक छोटा-सा कदम, जीवनभर की बड़ी परेशानी से बचा सकता है।

पेट की चर्बी से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी, रिसर्च में सामने आया विसरल फैट घटाने का आसान और कारगर उपाय

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विसरल फैट पेट के अंदर इंटरनल ऑर्गन्स जैसे लिवर, आंत और हार्ट के आसपास जमा होने वाली एक प्रकार की चर्बी होती है। विसरल फैट के कारण इंफ्लेमेशन और हानिकारक केमिकल पैदा होता है जो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर के साथ अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स सके अनुसार ज्यादा चीनी के सेवन से बॉडी में इंसुलिन का लेवल बढ़ता है जिससे विसरल फैट जमने लगता है। ऐसे में इस खतरनाक फैट को कम करने का सही तरीके फास्टिंग यानी उपवास होता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले (Ref) से डॉक्टर्स के अनुसार फास्टिंग से इंसुलिन को कम करने के अलावा बॉडी को और एनर्जी के लिए फैट बर्न करने में मदद मिलती है। इससे पेट की चर्बी कम होती है और यह मेटाबॉलिज्म में भी सुधार करता है। उपवास से सूजन कम होती है साथ ही हार्ट और मेटाबॉलिज्म हेल्थ बेहतर होती है। (Photo credit):iStock

क्या है विसरल फैट?
दरअसल विसरल फैट हर किसी की बॉडी में होता है। यह आपके कई इंटरनल ऑर्गन्स के चारों ओर एक मुलायम और सॉफ्ट सुरक्षा परत होती है। यह बॉडी में एनर्जी को स्टोर और उसके इस्तेमाल में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन अगर इसकी मात्रा बढ़ जाए तो अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। विसरल फैट एक प्रकार चर्बी है जो बॉडी के अंदर गहराई में इकट्ठा होती है।

हाई इंसुलिन और विसरल फैट
लगातार ग्लूकोस से भरपूर चीजों का सेवन करने से पेनक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है। लंबे समय तक ग्लूकोज का सेवन करने से इंसुलिन का स्टार हाई रहता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनता है। इस स्थिति में बॉडी को ब्लड शुगर मैनेज करने के लिए और भी अधिक इंसुलिन की जरूरत पड़ती है जिससे फैट स्टोर होने लगता है।

हाई इंसुलिन के नुकसान
लगातार हाई इंसुलिन के कारण लिवर ग्लूकोज को फैट के रूप में इक्कठा करने लगता है जिससे फैटी लिवर की समस्या हो जाती है। इसके साथ ही बॉडी के इंटरनल ऑर्गन्स के आसपास नए फैट का उत्पादन करने लगती है। दूसरे फैट की तरह विसरल फैट भी बेहद हानिकारक होता है। इससे बॉडी में इंफ्लेमेशन बढ़ता है, साथ ही कार्डियोमेटाबॉलिक डिजीज का खतरा बढ़ता है।

विसरल फैट और बीमारियां 
विसरल फैट गई गंभीर बीमारियों की वजह बनता है जिसमें हार्ट डिजीज टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर फैटी लिवर, स्लीप एपनिया और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी शामिल है।

कैसे कम करें विसरल फैट? 
एक्सपर्ट्स के अनुसार फास्टिंग विसरल फैट को कम करने का सबसे अच्छा तरीका होता है। खासतौर पर इंटरमिटेंट फास्टिंग से इससे छुटकारा पाया जा सकता है। इस तरीके का इस्तेमाल करते हुए आप हफ्ते में कुछ दिन सामान्य रूप से खाते हैं और बस कुछ दिन अपनी कैलोरी की मात्रा को कम कर देते हैं। इस डाइट को फॉलो करने वाले लोग को वेट लॉस में मदद मिलती है, साथ ही पेट की चर्बी और इन्फ्लेमेशन के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।

फास्टिंग के मेटाबॉलिक फायदे 
फास्टिंग के मेटाबॉलिक फायदों में मेटाबॉलिक लचीलेपन में सुधार, इन्सुलिन सेंसटिविटी में बढ़ोतरी, फैट बर्न करने की क्षमता में वृद्धि और इंफ्लेमेशन को कम करना शामिल है। यह फायदे बॉडी को एनर्जी के लिए ग्लूकोज और फैट के बीच बेहतर तरीके से स्विच करने में मदद करते हैं जिससे पूरे दिन एनर्जी का लेवल स्थिर रहता है। इससे टाइप टू डायबिटीज और दूसरे क्रोनिक डिजीज का खतरा कम होता है।

घर में मौजूद इन चीजों से पाएं तुरंत राहत

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बदलता मौसम अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम लेकर आता है. सर्दियों का मौसम बस शुरु ही होने वाला है और उससे पहले ही ठंडी हवाएं चलनी शुरु हो गई हैं. इस मौसम में सुबह-शाम ठंड का एहसास होता है तो दोपहर में गर्मी सताती है. ऐसे में सर्दी-गर्मी मिलकर खांसी और जुकाम का कारण बनती है. बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम और खांसी होना जैसे आम हो जाता है. क्लीनिक पर मरीजों की लाइनें लगी होती है. हालांकि, कई बार दवाई लेने से भी आराम नहीं मिल पाता है.

खांसी-जुकाम से राहत पाने के लिए घरेलू नुस्खे काम आ सकते हैं. जिनका इस्तेमाल पुराने जमाने से हमारे बड़े-बुजुर्ग करते आ रहे हैं. इस बदलते मौसम में अगर आप भी सर्दी, खांसी या जुकाम से परेशान हैं तो हमारे बताए कुछ आसान और असदार नुस्खें अपना सकते हैं.

सर्दी-जुकाम और एलर्जी के लक्षण
बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और एलर्जी होना आम बात है. ऐसा होने पर नाक बंद होना, नाक बहना, लगातार छींक आना, आंखों में पानी आना या जलन होना, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी होने से लक्षण दिखाई देते हैं. इसका कारण के बात करें तो चैंजिंग वेदर में हवा में मौजूद सूक्ष्म कण ( PM2.5, PM10) सांस के साथ शरीर के अंदर चले जाते हैं. ये Respiratory System की सफाई करने वाले छोटे-छोटे रोएं को कमजोर कर देते हैं, जिससे बलगम, खांसी, जुकाम और एलर्जी का समस्या बढ़ सकती है.

सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय
अगर आपको बहुत ज्यादा खांसी आ रही हैं तो तुलसी-अदरक का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं. तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं तो खांसी से राहत दिलाने का काम करते हैं. वहीं, अदरक में जिंजरोल और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में हेल्पफुल है.

अगर जुकाम की वजह से आपकी नाक बंद हो गई है तो भाप लेना फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर 5 मिनट भाप लें. अजवाइन में फाइबर, विटामिन ए, सी, के और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. ये गले को साफ करता है और खांसी, बंद नाक से राहत दिलाने में मददगार है.

ये चीजें भी दिलाएंगी राहत
नींबू और शहद भी खांसी-जुकाम से राहत दिलाने में मददगार है. ये दोनों ही इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत करने का काम करते हैं. वहीं, लहसुन शरीर से कफ और संक्रमण को रोकता है. आयुर्वेद के मुताबिक, रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पानी भी खांसी से राहत दिलाता है. हल्दी में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण को रोकने का काम करते हैं.

‘इक कुड़ी’ के प्रमोशन में शहनाज का खुलासा– शादी से दूर रहना चाहती हैं एक्ट्रेस

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मुंबई: अभिनेत्री शहनाज गिल इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘इक कुड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से सबको चौंका दिया है। ‘बिग बॉस’ से लेकर बॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बनाने वाली शहनाज का कहना है कि आज के दौर में शादी कोई जरूरी नहीं रह गया है। लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि जिंदगी में कभी भी कुछ भी हो सकता है, इसलिए नेवर से नेवर कहना ठीक नहीं।

‘इक कुड़ी’ के प्रमोशन के दौरान बोलीं शहनाज
हाल ही में अपनी नई फिल्म ‘इक कुड़ी’ के प्रमोशन के दौरान शहनाज ने शादी को लेकर अपनी सोच साझा की। उन्होंने साफ कहा, ‘अगर जरूरत न हो तो शादी करना कोई मजबूरी नहीं है। कई लोग शादी करते हैं, ये उनकी पसंद है, लेकिन मैं अभी उस रास्ते पर नहीं जाना चाहती। हां, भविष्य में क्या होगा, ये कौन जानता है।’

‘इक कुड़ी’ फिल्म में शहनाज सिर्फ अभिनय ही नहीं कर रहीं, बल्कि इस बार उन्होंने प्रोड्यूसर के रूप में भी कदम रखा है। फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी है जो सही जीवनसाथी की तलाश में संघर्ष करती है- कुछ-कुछ शहनाज की असली जिदगी जैसी। फिल्म के लेखक-निर्देशक अमरजीत सिंह सारों हैं और यह 31 अक्टूबर को रिलीज हुई।

शादी को लेकर शहनाज ने कही ये बात
शहनाज ने शादी को लेकर कहा, ‘शादी सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं होता, बल्कि यह जिंदगी का बहुत बड़ा फैसला है। उनके शब्दों में, ‘जब एक लड़की अपने माता-पिता का घर छोड़कर किसी लड़के के साथ पूरी जिंदगी बिताने का फैसला करती है, तो वो बहुत बड़ी बात होती है। आपको नहीं पता कि सामने वाला इंसान कैसा होगा, इसलिए सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।’

सिद्धार्थ शुक्ला के साथ कैमिस्ट्री 
‘बिग बॉस 13’ से सुर्खियों में आईं शहनाज ने अपने मासूम स्वभाव और फनी अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लिया था। खासकर सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनकी केमिस्ट्री आज भी फैंस के जेहन में ताज़ा है। सिद्धार्थ के निधन के बाद शहनाज ने खुद को संभालने में जो हिम्मत दिखाई, उसने उन्हें और मजबूत बना दिया। शायद इसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि जिंदगी में खुद से प्यार करना सबसे जरूरी है।

शहनाज गिल का करियर वर्कफ्रंट
अपने करियर की बात करें तो शहनाज ने पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री से शुरुआत की थी। 2015 में उन्होंने म्यूज़िक वीडियो ‘शिव दी किताब’ से मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 2017 में वो फिल्म ‘सत श्री अकाल इंग्लैंड’ में नजर आईं। पंजाबी फिल्मों ‘काला शाह काला’, ‘दाका’ और ‘हौंसला रख’ के बाद उन्होंने सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ और ‘थैंक यू फॉर कमिंग’ में काम किया। हाल ही में वो राजकुमार राव और तृप्ति डिमरी के साथ गाने ‘सजना वे सजना’ में भी दिखीं।

हैदराबाद एयरपोर्ट पर बम का खतरा, सुरक्षा कड़ी

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हैदराबाद में राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आरजीआईए) को शनिवार सुबह बम की धमकी वाला ईमेल मिला, जिसके बाद अधिकारियों ने इंडिगो की फ्लाइट को पास के एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया।

राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक अधिकारी के अनुसार, “01.11.2025 को APOC से एक मैसेज मिला कि कस्टमर सपोर्ट RGIA को एक ईमेल मिला है। Customersupport@gmrgroup.in पर ईमेल आईडी पपीता राजन से 05.25 बजे ये मेल भेजा गया जिसका सब्जेक्ट था: इंडिगो 68 की हैदराबाद जाने वाली लैंडिंग रोकें।”

धमकी भरे मेल में क्या लिखा?
ईमेल में लिखा था, “LTTE-ISI के गुर्गों ने 1984 के मद्रास एयरपोर्ट कार्यप्रणाली शैली में एक बड़ा धमाका करने की योजना बनाई है। यह धमाका RGIA पोर्ट के फ्यूजलेज और माइक्रोबॉट्स से फिक्स किए गए फ्यूल टैंक पर किया जाएगा। आईईडी में ताकतवर नर्व गैस होगी। फ्रैंकफर्ट ऑपरेशन उपायों का अध्ययन के लिए एक टेस्ट है। आईईडी की लोकेशन की जानकारी के लिए कृपया नीचे दिया गया स्टेग्नोग्राफिक डॉक्यूमेंट पढ़ें, लाइनों के बीच में पढ़ें।”

फ्लाइट को किया गया डायवर्ट
धमकी मिलने के बाद बम खतरा आकलन समिति (बीटीएसी) ने एक वर्चुअवली मीटिंग की और इसे एक खास खतरा बताया। समिति ने फैसला लिया कि फ्लाइट को सबसे पास वाले एयरपोर्ट पर डायवर्ट किया जाएगा और फ्लाइट के कैप्टन को एटीसी के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। कैप्टन लैंडिंग की जानकारी एयरपोर्ट को देगा। साथ ही जीएमआर सिक्योरिटी पुलिस में शिकायत दर्ज करेगी।

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News Desk