चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, तीन तरीकों से घर बैठे कराएं पंजीकरण

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देहरादून । उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।  चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु अब घर बैठे मोबाइल, कंप्यूटर, मोबाइल एप या वॉट्सएप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रशासन यात्रियों की संख्या, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सुचारू रूप से संभाल सके। इस साल यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 से हो रही है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलने है। जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने है। 
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तीन तरीकों से होगा है। पहला, उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट पर जाकर अकाउंट बनाना और यात्रा की जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन स्लिप डाउनलोड करना। दूसरा, टूरिस्ट केयर उत्तराखंड मोबाइल एप के जरिए अकाउंट बनाने के बाद यात्रा विवरण भरकर यात्रा पास डाउनलोड करना। तीसरा, वॉट्सएप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन: 8394833833 पर “यात्रा” मैसेज भेजने के बाद चैटबॉट आवश्यक जानकारी लेकर रजिस्ट्रेशन पूरा करता है। उन यात्रियों के लिए जिन्होंने इंटरनेट की सुविधा नहीं है, हरिद्वार और ऋषिकेश सहित कई प्रमुख स्थानों पर बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर लगाए जाएंगे। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 17 अप्रैल से होगी।
उत्तराखंड सरकार ने यात्रियों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 0135-1364 भी जारी किया है। इस नंबर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, यात्रा मार्ग, व्यवस्थाओं और अन्य जरूरी जानकारी की सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलने वाले है। यह तिथि नरेंद्रनगर राजदरबार में पंचांग गणना के बाद तय की गई। चमौली के बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले वर्ष की तुलना में 11 दिन पहले खुल रहे हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर विधि-विधान के साथ भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इस तरह, श्रद्धालु अब आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सुरक्षित और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा का आनंद ले सकते हैं। यात्रा में शामिल होने से पहले रजिस्ट्रेशन और हेल्पलाइन की जानकारी अवश्य प्राप्त करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

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सतीश नंगल ने निर्दलीय भरा नामांकन, मुकाबला त्रिकोणीय हुआ

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चंडीगढ़। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नंगल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब मैदान में तीन उम्मीदवार हैं। इसके साथ ही हरियाणा राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर पहले से ही बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध मैदान में हैं, लेकिन सतीश नंगल ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ ताल ठोक कर सबको हैरान कर दिया है। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए वोटों का गणित बैठाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि निर्दलीय के रूप में नामांकन के समय उनके साथ स्वतंत्र विधायक सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादियान और राजेश जून मौजूद थे। संजय भाटिया बीजेपी से करनाल के सांसद रह चुके हैं और उन्हें पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। उन्होंने सीएम नायब सैनी और कई बीजेपी विधायकों की मौजूदगी में अपना पर्चा दाखिल किया।

वहीं कांग्रेस ने अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को मैदान में उतारा है। कर्मवीर बौद्ध हरियाणा विधानसभा के पूर्व सचिव रह चुके हैं और दलित अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय हैं। हाल ही में हुए कुछ विवादास्पद मामलों में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही है। कांग्रेस ने उन्हें एक मजबूत दलित चेहरा के रूप में चुना है, ताकि जातिगत समीकरणों को संतुलित किया जा सके।
सतीश नंगल की बात करें तो वह रोहतक के रहने वाले हैं और वे पहले आईएनएलडी में थे, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। साल 2019 विधानसभा चुनाव में उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ गरही-संपला-किलोई सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। हरियाणा राज्यसभा चुनाव के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नंगल को किन विधायकों का गुप्त समर्थन मिलता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने और अवमानना याचिका दायर होने पर देरी से अपील दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जता दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि इसतरह के मामलों में सख्ती नहीं दिखाई गई, तब न्यायपालिका में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।  जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्‍ला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि हाल के वर्षों में देखने में आया हैं कि अदालत के आदेशों का लंबे समय तक पालन नहीं होता और जब अवमानना याचिका दायर होती है, तब उसके बाद काफी देरी के साथ अपील या पुनर्विचार याचिका दाखिल होती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपील में देरी अपवाद होनी चाहिए, लेकिन अब यह करीब-करीब नियम बनती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं कर सकते है। शीर्ष अदालत के अनुसार, जब कोई पक्ष जानबूझकर अदालत के आदेशों का पालन नहीं करता, इस आचरण से न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस तरह के मामलों में यह आचरण कई बार आपराधिक अवमानना की सीमा तक पहुंच सकता है। अदालत ने कहा कि यदि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इन मामलों में दृढ़ता नहीं दिखाते, तब देश के आम नागरिकों का न्यायपालिका में अटूट विश्वास कमजोर पड़ सकता है। 

अदालत के अनुसार, आदेश की जानकारी होने के बावजूद यदि कोई पक्ष जानबूझकर उस आदेश का पालन नहीं करता, तब वहां अवमानना के दायरे में आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवमानना की कार्यवाही केवल अदालत में पक्षकार रहे व्यक्तियों तक सीमित नहीं होगी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी छत्‍तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामला कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण से जुड़े आदेश के पालन न करने से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों को आदेश लागू करने के लिए अंतिम मौका देकर 15 दिन का समय दिया है।

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विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सुस्त, संगठन की निष्क्रियता से कार्यकर्ता निराश

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लखनऊ|यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश के सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं, लेकिन कांग्रेस में इसको लेकर कोई हलचल नहीं है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी लंबे समय से भंग चल रही है और प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती को लेकर कोई कार्य नहीं हो रहा है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भी यूपी चुनाव को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिखाई पड़ रही है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यूपी चुनाव में कांग्रेस और कमजोर पड़ सकती है। यूपी चुनावों को लेकर कोई सक्रियता न होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं में मायूसी का माहौल है। पार्टी ने पूरे देश की तरह यूपी में भी ‘संविधान बचाओ’ यात्रा के अंतर्गत जनवरी में कुछ कार्यक्रम किए थे। संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत भी प्रदेश में संगठन को मजबूत करने का कार्य शुरू किया गया था। इसके अंतर्गत फरवरी माह में कुछ बैठकें आयोजित की गई थी, लेकिन इसके अलावा संगठन का पूरा कामकाज ठप पड़ा हुआ है। जिला से लेकर ब्लॉक और मंडल स्तर पर पार्टी में कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं चल रही है।

‘मतदाताओं को जोड़ने के लिए कोई प्लान नहीं’

यूपी में कांग्रेस के पास अब मुसलमानों को छोड़कर कोई दूसरा ‘डेडीकेटेड वोटर वर्ग’ नहीं है। पार्टी की किसी सियासी गतिविधि से ऐसा भी नहीं लगता कि वह समाज के किसी दूसरे वर्ग को अपने साथ लाने के लिए किसी खास योजना पर काम कर रही है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लेकर दलितों-पिछड़ों में एक भावनात्मक लहर पैदा हुई थी। इसे मजबूती के साथ अपने पाले में लाने की कोशिश की जाती तो कांग्रेस का परंपरागत दलित-पिछड़ा वोट बैंक का एक हिस्सा उसके साथ वापस आ सकता था। ऐसा होने पर पार्टी प्रदेश में खड़ी हो जाती, लेकिन पार्टी ने ऐसी कोई कोशिश नहीं किया। 

‘भारी पड़ेगी सियासी शून्यता’

नेता के अनुसार, ब्राह्मण वर्ग इस समय सत्तारूढ़ दल से नाराज है और अपने लिए विकल्प तलाश रहा है। समाजवादी पार्टी और बसपा इस नाराज वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए तमाम सियासी संदेश दे रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अपने इस पुराने परंपरागत वोट बैंक को अपने पास वापस लाने के लिए कोई प्रयास करती नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सियासी शून्यता पार्टी को भारी पड़ सकती है।

बिहार में हुआ था नुकसान

कांग्रेस के शीर्ष नेता ने बताया कि पार्टी प्रदेश में अब तक सक्रिय नहीं हुई है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन को लेकर भी अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। बिहार में अंतिम समय तक इसी तरह की अनिश्चितता के कारण पार्टी को नुकसान हुआ था। अब उत्तर प्रदेश में भी पार्टी उसी तरह काम करती दिखाई दे रही है। इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है।

दूसरे दलों की सक्रियता 

सत्तारूढ़ भाजपा यूपी को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय है। भाजपा-आरएसएस के शीर्ष नेता लगातार इसको लेकर बैठकें कर रहे हैं। पार्टी सरकार के स्तर पर कई उद्घाटन कार्यक्रम कर जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। 8 मार्च को भी प्रदेश में कई बड़े कार्यक्रम कर जनता को अपने से जोड़ने की तैयारी है। भाजपा-आरएसएस की समन्वय बैठक आयोजित कर बेहतर काम काज करने और कार्यकर्ताओं से सरकार के कामकाज पर जमीनी फीडबैक लेने की कोशिश की जा रही है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी लखनऊ में बड़ी रैली आयोजित कर अपने राजनीतिक विरोधियों को संदेश दे चुकी है। उसके कार्यकर्ता निचले स्तर पर छोटी-छोटी बैठकें कर पार्टी को दुबारा मजबूत करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं। मायावती लगातार सांगठनिक गतिविधियों को लेकर सक्रिय हैं और विधानसभा प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर काम हो रहा है। बसपा में इन प्रभारियों को ही बाद में प्रत्याशी बनाने की परंपरा है। यानी बसपा अभी से प्रत्याशियों के चयन के स्तर पर काम कर रही है।भाजपा को सबसे तगड़ी चुनौती दे रही समाजवादी पार्टी जिला-ब्लॉक स्तर तक संगठन को मजबूत करने का कार्यक्रम चला रही है। 15 मार्च को कांशीराम के जन्मदिन को मनाने के साथ 28 मार्च से अखिलेश यादव नोएडा से शुरू करते हुए पूरे प्रदेश में चुनावी अभियान की शंखनाद करने जा रहे हैं। पार्टी निचले स्तर पर अपना विस्तार करने की कोशिश कर रही है।लेकिन दूसरे दलों की इन चुनावी गतिविधियों के बीच कांग्रेस की अनुपस्थिति लोगों को चौंका रही है। यूपी जैसे राजनीतिक तौर पर सबसे महत्त्वपूर्ण राज्य में कमजोर पार्टी को मजबूत किए बिना उसकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को जमीन नहीं मिल सकती है। 

NSG-NIA समेत 4 केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति अब 7 साल तक

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नई दिल्ली|केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित चार एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ा दी है। अब इन एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कार्मिक पांच वर्ष की बजाए, सात साल तक तैनात रहेंगे। बाकी दो एजेंसियों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पुलिस 2 प्रभाग (कार्मिक-नीति अनुभाग) की तरफ से पांच मार्च को उक्त निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि एनएसजी द्वारा गृह मंत्रालय से अनुरोध किया गया था कि केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कार्मिकों के कार्यकाल की अवधि पांच वर्ष से बढ़ाकर सात साल कर दी जाए। इस मामले को लेकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ‘सीएपीएफ’ और असम राइफल ‘एआर’ के साथ परामर्श किया गया। उसमें यह बात सामने आई कि प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाए जाने से  एनएसजी में कार्मिकों के संस्थागत ज्ञान को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसी तरह से दूसरी एजेंसियों को लेकर फीडबैक मिला है। इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि ‘सीएपीएफ’ और ‘एआर’ कर्मियों को प्रारंभिक नियुक्ति के समय ही सात वर्ष की अवधि के लिए एनएसजी सहित चारों केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय द्वारा 22 नवंबर 2016 के नीतिगत दिशानिर्देशों में संशोधन किए गए हैं। पैराग्राफ 3 (बी) (2) में ‘प्रतिनियुक्ति की अवधि’ शीर्षक के तहत कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है। विशेष कार्यक्षेत्र वाली जॉब, जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एनएसजी में अब प्रतिनियुक्ति की अवधि सात वर्ष कर दी गई है। यह अवधि उक्त एजेंसियों में प्रवेश करने के समय से लागू होगी। इन संगठनों को उपयुक्त प्रतिस्थापन नियुक्त करने के लिए काफी पहले से ही अग्रिम कदम उठाने की आवश्यकता होती है। ये आदेश केंद्रीय गृह मंत्री की स्वीकृति से जारी किए गए हैं। 

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केंद्रीय मंत्री शाह के हरिद्वार दौरे की तैयारियां तेज, सीएस और डीजीपी ने किया जायजा

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हरिद्वार। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के 7 मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार भ्रमण कार्यक्रम को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ और गृह सचिव शैलेश बगौली सहित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैरागी द्वीप स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कार्यक्रम की सुरक्षा से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक की गहन समीक्षा की और संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निरीक्षण के दौरान कार्यक्रम स्थल पर बनाए गए विशाल पांडाल, मंच, अतिथियों की बैठक व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और विद्युत व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने आयोजन स्थल पर स्वच्छता और सुरक्षा प्रबंधों पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर राज्य की विकास यात्रा और नए कानूनों से संबंधित प्रस्तावित प्रदर्शनी की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय गृह मंत्री का यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं त्रुटिरहित और सुव्यवस्थित होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी व्यवस्था में कमी न रहे, इसके लिए कार्यक्रम से पूर्व सभी प्रबंधों का दोबारा परीक्षण कर लिया जाए। सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर पुलिस महानिदेशक ने अधिकारियों को पुख्ता प्लान लागू करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों की भागीदारी संभावित है, ऐसे में आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए एक प्रभावी ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है ताकि स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं को आवाजाही में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी है। निरीक्षण के दौरान आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डे, एडीजी अजय प्रकाश अंशुमन और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक की तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की। बैठक में आपदा प्रबंधन सचिव, सूचना महानिदेशक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित सिडकुल के प्रबंध निदेशक भी मौजूद रहे। बैरागी द्वीप में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

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T20 वर्ल्ड कप में सैमसन की बातों से प्रभावित हुए इयान बिशप, बोले- सच्चे लीडर की तरह सोच

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भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में जगह बना ली है। गुरुवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को सात रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई। संजू सैमसन ने लगातार दूसरा अर्धशतक लगाया और उन्हें उनकी विस्फोटक पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। संजू सैमसन की यह लगातार दूसरी मैच विजयी पारी थी। इसलिए जब वह प्लेयर ऑफ द मैच पुरस्कार लेने पहुंचे तो प्रेजेंटर के तौर पर मौजूद वेस्टइंडीज के पूर्व खिलाड़ी इयान बिशप ने उनकी जमकर तारीफ की। बिशप ने सैमसन को लगातार दूसरे प्लेयर ऑफ द मैच के लिए बधाई दी। इसके जवाब में सैमसन ने कहा, ‘जीत का सारा श्रेय जसप्रीत बुमराह को जाता है। वह एक विश्वस्तरीय गेंदबाज हैं। ऐसे गेंदबाज जेनरेशन में एक बार आते हैं। उनका इस मैच में प्रदर्शन ऐसा ही था। प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड असल में उन्हें जाना चाहिए। अगर हमने डेथ ओवर्स में वैसी बॉलिंग नहीं की होती, तो मुझे लगता है कि मैं यहां खड़ा नहीं होता।’  सैमसन की इस बात को सुनकर इयान बिशप काफी प्रभावित हुए और उन्हें एक सच्चा लीडर बताया। भारतीय टीम की जीत में संजू सैमसन ने बल्ले से तो जसप्रीत बुमराह ने गेंद से अहम भूमिका निभाई। संजू सैमसन ने 42 गेंदों पर 7 छक्कों और 8 चौकों की मदद से 89 रन बनाए, जबकि बुमराह ने चार ओवरों में मात्र 33 रन देकर दो विकेट लिए। इसमें 16वें और 18वें ओवर में क्रमश: आठ और छह रन दिए। इन दो ओवरों ने मैच का पलड़ा भारत की तरफ मोड़ दिया। अगर बुमराह के ओवर के किफायती नहीं रहे होते तो भारतीय टीम ये मैच गंवा सकती थी। इसीलिए संजू ने बुमराह की तारीफ की। मैच पर नजर डालें तो भारत ने टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करते हुए संजू सैमसन के 42 गेंदों पर बनाए गए 89 रन की मदद से 253 रन बनाए थे। जैकब बेथेल के 48 गेंदों पर सात छक्कों और आठ चौकों की मदद से खेली गई 105 रन की यादगार पारी के बावजूद इंग्लैंड सात विकेट पर 246 रन ही बना सकी और मैच सात रन से हार गई। 

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हेल्दी लाइफस्टाइल को सपोर्ट करने वाले विकल्पों में चर्चा में आया Herbsa Care का Keto New

आज के समय में हेल्दी और फिट रहने को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां लोग केवल बीमार होने के बाद स्वास्थ्य पर ध्यान देते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाने और फिटनेस को बनाए रखने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाते नजर आ रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण वजन बढ़ना कई लोगों के लिए एक आम समस्या बन चुका है।

इसी वजह से हेल्थ और वेलनेस से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग भी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल के समय में Herbsa Care का Keto New भी इसी तरह के प्रोडक्ट्स में शामिल है, जो वेट मैनेजमेंट से जुड़ी चर्चाओं में सामने आ रहा है।

बढ़ती लाइफस्टाइल समस्याओं के बीच विकल्पों की तलाश

लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और अनियमित दिनचर्या कई लोगों के लिए वजन बढ़ने का कारण बन रहे हैं। ऐसे में लोग अपने शरीर को संतुलित रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कुछ लोग जिम का सहारा लेते हैं, तो कुछ डाइट प्लान फॉलो करते हैं।

हालांकि हर किसी के लिए सख्त डाइट या नियमित जिम रूटीन को अपनाना आसान नहीं होता। व्यस्त जीवनशैली के कारण कई लोग ऐसे विकल्पों की तलाश करते हैं जिन्हें अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में आसानी से शामिल किया जा सके।

यूजर्स के अनुभवों से बढ़ी चर्चा

पिछले कुछ समय में Keto New को लेकर कई यूजर्स ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपने अनुभव साझा किए हैं। इन अनुभवों के कारण कई लोगों के बीच इस प्रोडक्ट के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ती दिखाई दे रही है।

कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने इसे अपनी फिटनेस रूटीन के साथ इस्तेमाल किया। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी हेल्थ प्रोडक्ट के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी होती है।

Herbsa Care का उद्देश्य

Herbsa Care हेल्थ और न्यूट्रिशन से जुड़े उत्पादों पर काम करने वाली कंपनी है। कंपनी की स्थापना अनस चौहान और सूरज कर्णानी ने की थी। कंपनी के अनुसार उसका उद्देश्य ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार करना है जो लोगों को हेल्दी और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकें।

कंपनी का कहना है कि Keto New को वेट मैनेजमेंट को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके साथ ही इसे आयुर्वेदिक आधारित फॉर्मूले के साथ विकसित किया गया बताया जाता है।

अवॉर्ड मिलने के बाद बढ़ी पहचान

हाल ही में Herbsa Care को एक खास उपलब्धि तब मिली जब बॉलीवुड अभिनेता अरबाज़ खान के हाथों कंपनी को “Best Nutra Product of the Year” का अवॉर्ड दिया गया। इस सम्मान के बाद Keto New का नाम हेल्थ और फिटनेस से जुड़े लोगों के बीच अधिक चर्चा में आने लगा है।

ऐसे अवॉर्ड किसी भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इससे प्रोडक्ट की पहचान और भरोसा दोनों बढ़ने की संभावना रहती है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ रही पहुंच

डिजिटल युग में किसी भी प्रोडक्ट की जानकारी लोगों तक बहुत तेजी से पहुंच जाती है। आज कई ग्राहक इंटरनेट के माध्यम से किसी भी प्रोडक्ट के बारे में जानकारी हासिल करते हैं और फिर अपनी जरूरत के अनुसार ऑर्डर करते हैं।

कंपनी का कहना है कि Keto New के लिए ऑल इंडिया डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है, जिससे देश के अलग-अलग राज्यों से ग्राहक इसे मंगवा रहे हैं।

हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ता रुझान

फिटनेस विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए केवल वजन कम करना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त आराम और मानसिक संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस के इस दौर में लोग अपने शरीर का बेहतर ख्याल रखने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के साथ Herbsa Care का Keto New भी धीरे-धीरे वेट मैनेजमेंट से जुड़ी चर्चाओं में अपनी जगह बनाता नजर आ रहा है।

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अक्षर पटेल का बड़ा बयान, कहा- भरोसा था आखिरी ओवर में पांच छक्के नहीं लगेंगे

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टी20 विश्वकप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में एक वक्त ऐसा आया था कि सभी सोच में पड़ गए थे 20वां ओवर कौन करेगा। इंग्लैंड को जीत के लिए 20वें ओवर में 30 रन बनाने थे। भारत अपने चार गेंदबाजों का इस्तेमाल कर चुका था और सिर्फ अक्षर पटेल का आखिरी ओवर बचा था। हालांकि, कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अहम फैसला लेते हुए गेंद शिवम दुबे को थमाई और दुबे ने निराश नहीं किया। टीम इंडिया को सात रन से जीत मिली और टीम फाइनल में पहुंच गई। मैच के बाद अब अक्षर ने खुलासा किया है कि वह आखिरी ओवर में गेंदबाजी के लिए तैयार थे और उन्हें विश्वास था कि वह पांच छक्के तो नहीं खाएंगे।

20वें ओवर में इंग्लैंड को 30 रन चाहिए थे

दरअसल, इंग्लैंड ने 15 ओवर में पांच विकेट गंवाकर 185 रन बना लिए थे। आखिरी पांच ओवर में उन्हें जीत के लिए 69 रन बनाने थे। तब भारत की ओर से बुमराह के दो ओवर बाकी थे, जबकि हार्दिक-अर्शदीप और अक्षर का एक-एक ओवर  बाकी था। भारत ने पांच गेंदबाजों से ही गेंदबाजी कराई थी। क्रीज पर जैकब बेथल और सैम करन मौजूद थे। 16वें ओवर में बुमराह ने आठ रन दिए। फिर 17वें ओवर में अर्शदीप ने 16 रन खर्च किए। 18वें ओवर में फिर बुमराह गेंदबाजी के लिए आए और छह रन दिए। 19वें ओवर में हार्दिक गेंदबाजी के लिए आए नौ रन दिए। इस तरह 20वें ओवर में 30 रन की दरकार थी। ऐसे में कप्तान के पास एक ही विकल्प थे- अक्षर पटेल। पर सूर्यकुमार ने जोखिम उठाते हुए दुबे को गेंदबाजी दी और दुबे ने अपनी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण ओवर में 22 रन दिए। साथ ही इस ओवर में बेथल रन आउट भी हुए।

अक्षर पटेल ने 20वें ओवर को लेकर क्या कहा?

मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए अक्षर ने कहा कि वह गेंदबाजी की प्रैक्टिस शुरू कर चुके थे। उन्होंने हंसते हुए बताया, ‘मैं तैयार था। मैं लॉन्ग ऑफ पर खड़ा था और तैयार था। मैं बॉलिंग प्रैक्टिस भी कर रहा था। 30 रन तो बहुत, पांच छक्के तो नहीं खाऊंगा, ये पता था।’ अक्षर ने तीन ओवर गेंदबाजी की और 35 रन दिए। उन्होंने खतरनाक दिख रहे टॉम बैंटन को क्लीन बोल्ड भी किया। इतना ही नहीं, अक्षर ने दो कैच लिए और एक कैच में असिस्ट भी किया।

मैच पर नजर डालें

मैच पर नजर डालें तो भारत ने टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करते हुए संजू सैमसन के 42 गेंदों पर बनाए गए 89 रन की मदद से सात विकेट गंवाकर 253 रन बनाए थे। जैकब बेथल के 48 गेंदों पर सात छक्कों और आठ चौकों की मदद से खेली गई 105 रन की यादगार पारी के बावजूद इंग्लैंड सात विकेट पर 246 रन ही बना सकी और मैच सात रन से हार गई। मैच के बाद सूर्यकुमार ने भी फील्डिंग को अहम बताया। उन्होंने कहा कि हमें फील्डिंग कोच दिलीप को श्रेय देना होगा। लड़के फील्डिंग में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सूर्यकुमार ने कहा, ‘टाइटल के लिए जाते हुए दबाव तो होगा, पर सभी उत्साहित भी हैं।’ भारत का अब खिताबी मुकाबले में न्यूजीलैंड से सामना होगा। यह मैच आठ मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा।

वैश्विक तनाव के बीच जयशंकर का बयान- कोई देश खुद को सर्वोच्च ताकत नहीं कह सकता

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नई दिल्ली|वैश्विक तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आज कोई भी देश पूरी तरह से हावी नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि 20वीं सदी के मध्य से एक निश्चित विश्व व्यवस्था बनाए रखने की वैश्विक अपेक्षा ‘अवास्तविक’ थी, और अब शक्ति विभिन्न आयामों में काफी हद तक फैल गई है।

वैश्विक शासन का बदलता स्वरूप

रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए विदेश मंत्री ने पिछले सात दशकों में वैश्विक शासन के विकसित होते स्वरूप पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, ‘जब हम इन 70 वर्षों को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो मुझे लगता है कि 1945 या 1989 को हमेशा के लिए स्थिर करने की उम्मीद एक बहुत ही अवास्तविक उम्मीद थी।  दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 में जयशंकर ने कहा कि 1945 या 1989 के बाद बने विश्व व्यवस्था को हमेशा के लिए बनाए रखने की उम्मीद करना अवास्तविक था। उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल को अगर इतिहास के नजरिए से देखें तो यह भारत के हजारों साल के इतिहास का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है, इसलिए दुनिया का बदलना स्वाभाविक है।

वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के पीछे दो बड़ी ताकतें

जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के पीछे दो बड़ी ताकतें काम कर रही हैं तकनीक (टेक्नोलॉजी) और जनसंख्या का स्वरूप (डेमोग्राफी)। आने वाले दशक में यही दोनों कारक दुनिया की दिशा तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आज वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के इर्द-गिर्द किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दुनिया धीरे-धीरे कई ताकतों में बंट रही है। अब कोई भी देश ऐसा नहीं है, जो हर क्षेत्र-जैसे अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति, तकनीक या कूटनीति में पूरी तरह से हावी हो।विदेश मंत्री के मुताबिक आज ताकत का मतलब सिर्फ जीडीपी या सैन्य शक्ति नहीं रह गया है। दुनिया के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं, इसलिए वैश्विक शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैली हुई है।

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News Desk