केएल राहुल को मिला ODI‑कप्तानी का जिम्मा, विराट कोहली को मिलेगा पूरा फोकस बल्लेबाज़ी पर

0

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

क्रिकेट | भारत और साउथ अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज खत्म होने के बाद 30 नवंबर से तीन मैचों की वनडे सीरीज शुरू हो जाएगी. इस सीरीज में भारतीय टीम की कमान केएल राहुल के हाथों में होगी, क्योंकि नियमित कप्तान शुभमन गिल चोट के कारण बाहर हैं. राहुल पहले भी कई बार टीम इंडिया को वनडे में लीड कर चुके हैं और अब उनकी दो सबसे बड़े दिग्गज रोहित शर्मा और विराट कोहली मैदान पर उतरेंगे. खासकर विराट कोहली के लिए यह सीरीज किसी तोहफे से कम नहीं है, क्योंकि जब-जब केएल राहुल कप्तान रहे हैं, विराट का बल्ला आग उगलता नजर आया है |

राहुल की कप्तानी में विराट का रिकॉर्ड

विराट कोहली ने केएल राहुल की कप्तानी में अभी तक 4 वनडे मैच खेले हैं. इस दौरान उन्होंने 57.25 की औसत से 229 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 2 अर्धशतक शामिल हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन 4 मैचों में से 3 मुकाबले साउथ अफ्रीका के खिलाफ ही थे. प्रोटियाज टीम के खिलाफ राहुल की कप्तानी में विराट ने दो अर्धशतक जड़ते हुए कुल 116 रन ठोके हैं. यानी साउथ अफ्रीका के खिलाफ केएल राहुल जब कप्तान होते हैं, कोहली का बल्ला और भी खतरनाक हो जाता है |

30 नवंबर से शुरू हो रही इस सीरीज में एक बार फिर वही जोड़ी देखने को मिलेगी, कप्तान केएल और उनके सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज विराट, अगर पुराना रिकॉर्ड दोहराया गया तो साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों की शामत आनी तय है. इस सीरीज का पहला मैच रांची के JSCA इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. टीम इंडिया 3 साल के बाद इस मैदान पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे मैच खेलने उतरेगी. पिछली बार भारतीय टीम ने मेहमान टीम को 7 विकेट से हराया था |

महीनों बाद खेलेंगे घरेलू वनडे

विराट कोहली टेस्ट और टी20I फॉर्मेट से संन्यास ले चुके हैं, जिसके चलते वह अब सिर्फ वनडे मैच खेलते हैं. टीम इंडिया अपने घर पर लगभग 9 महीनों के बाद वनडे मैच खेलने वाली है. ऐसे में विराट कोहली भी एक लंबे इंतजार के साथ टीम इंडिया की जर्सी में अपने घर पर खेलते हुए नजर आएंगे. वह आखिरी बार फरवरी में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलते हुए नजर आए थे |

ऑपरेशन सिंदूर पर अंतरराष्ट्रीय सराहना, ब्रिटिश विशेषज्ञ बोले—भारत की रणनीति बदली

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। 26/11 मुंबई हमलों के सत्रह वर्ष बाद भारत की सुरक्षा, काउंटर-टेररिज्म और तटीय निगरानी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने न केवल अपनी तटीय निगरानी, इंटेलिजेंस-शेयरिंग और विशेष प्रतिक्रिया इकाइयों की गति को उन्नत किया है, बल्कि आतंकी खतरों पर सक्रिय व निर्णायक प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी विकसित की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 की तुलना में आज पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों के वैश्विक नेटवर्क को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझ कहीं अधिक स्पष्ट है। ‘ग्लोबल ऑर्डर’ के लिए लिखे एक लेख में राजनीतिक एवं सुरक्षा विश्लेषक क्रिस ब्लैकबर्न ने बताया कि मई 2025 में शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर भारत की बदलती रणनीति का महत्वपूर्ण संकेतक है।

सीधी कार्रवाई में हिचक नहीं
इस ऑपरेशन ने दिखाया कि भारत अब अपनी “लक्ष्मण रेखा” पार होने पर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ढांचों पर सीधी कार्रवाई करने में हिचक नहीं दिखाता। ब्लैकबर्न के अनुसार, चुनौती का बड़ा हिस्सा अब भी बरकरार है, क्योंकि 26/11 के कई मुख्य साजिशकर्ता, प्रशिक्षक और विचारक पाकिस्तान में खुले तौर पर मौजूद हैं।

“ये संगठन खुद को नए नामों और ढांचों में ढाल लेते हैं, लेकिन मकसद वही रखते हैं,” उन्होंने लिखा। रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ढुलमुल नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं। लेख के अनुसार, दुनिया अक्सर संवाद और संलग्नता की सरल भाषा में लौट आती है, जबकि इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि ये आतंकी नेटवर्क उतनी ही जटिलता और क्षमता से संचालित होते हैं जितना कोई भी जिम्मेदार राष्ट्र अस्वीकार्य मानता है।

रिपोर्ट बताती है कि 26/11 की बरसी हर साल केवल जनहानि पर नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा रणनीति में आए मूलभूत परिवर्तन पर भी चिंतन का अवसर देती है। मुंबई को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह भारत की वित्तीय शक्ति, फिल्मी प्रतिष्ठा और बहुसांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। और हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठकर लश्कर-ए-तैयबा ने रची थी।

सेलिना जेटली ने पति पीटर हाग पर लगाया घरेलू हिंसा का आरोप, मांगे 50 करोड़

#LatestBollywoodNews #BollywoodNews #BollywoodUpdate #BollywoodNews #BollywoodHindiNews

बॉलीवूड | बॉलीवूड एक्ट्रेस सेलिना जेटली इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। इस बीच सेलिना ने अपने पति पीटर हाग के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया है। अदाकारा ने डोमैस्टिक वायलेंस एक्ट के प्रोविजन के तहत मुंबई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और हाग पर घरेलू हिंसा, क्रूरता और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। साथ ही अदाकारा ने अपने पति की वजह से अपनी इनकम के नुकसान के लिए 50 करोड़ रुपये की मांग की है। आइए इस रिपोर्ट में जानते है पूरी बात…

सेलिना जेटली ने मागां 50 करोड़ का मुआवजा

सेलिना जेटली हाग ने अपने ऑस्ट्रियन पति पीटर हाग के खिलाफ घरेलू हिंसा एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। 47 साल की सेलिना तीन बेटों की मां हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि पति के हाथों उन्हें लगातार शारीरिक, मानसिक, यौनिक और आर्थिक हिंसा का शिकार होना पड़ा। उन्होंने कोर्ट से हर महीने 10 लाख रुपये भरण-पोषण और कुल 50 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पीटर, सेलिना को अपने बच्चों से मिलने नहीं दे रहे रहे हैं। सेलिना ने बच्चों से बिना रुकावट वीडियो कॉल और फोन पर बात करने की मांग की है। साथ ही सेलिना ने अपने बच्चों की कस्टडी भी मांगी है।

अगली सुनवाई होगी इस दिन

21 नवंबर 2025 को अंधेरी कोर्ट में दाखिल याचिका पर जज ने पीटर को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 12 दिसंबर तय की। सेलिना का कहना है कि 18 सितंबर 2010 में हुई शादी के बाद पीटर ने उन्हें धीरे-धीरे काम करने से रोक दिया। सेलिना ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए है। सेलिना ने कहा उनकी पति उनको नौकरानी कहते थे। बताते चलें कि सेलिना जेटली ने एक से एक फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा। हालांकि शादी के बाद वो फिल्मी दुनिया से दूर हो गई।

NCW ने लॉन्च किया 24×7 महिला हेल्पलाइन नंबर 14490, अब तुरंत मिलेगी मदद

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

NCW Women helpline:  महिलाओं की सुरक्षा और त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नया NCW Women Helpline नंबर लॉन्च किया है। अब महिलाएं किसी भी संकट, हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में बिना किसी झिझक के 24×7 मदद प्राप्त कर सकती हैं। यह पहल महिलाओं को अधिक सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 24 दिसंबर को नया टोल-फ्री शॉर्ट कोड हेल्पलाइन नंबर 14490 जारी किया। यह आसानी से याद रहने वाला नंबर आयोग की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा है। नए शॉर्ट कोड का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को तुरंत सहायता प्रदान करना है, ताकि वे किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में तुरंत संपर्क कर सकें।

NCW Women Helpline पर कॉल करने के बाद महिलाओं की शिकायतें प्रशिक्षित काउंसलर सुनेंगे और उन्हें आवश्यक सलाह देंगे। यदि मामले में तुरंत कार्रवाई की जरूरत हो, तो कॉल को संबंधित अधिकारियों के पास तुरन्त भेजा जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों और शहरों की महिलाएं तेज और प्रभावी मदद प्राप्त कर सकेंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं कभी अकेला महसूस न करें और हर स्थिति में उनके पास भरोसेमंद मदद का विकल्प मौजूद हो।

यदि देर रात किसी महिला को कोई गंभीर समस्या होती है और वह 14490 पर कॉल करती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस को भेजकर उसकी सहायता की जाएगी। इस तरह NCW Women Helpline महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और सुलभ प्लेटफॉर्म बनकर सामने आई है।

धोनी का शहर गूँजा रोहित-कोहली के नाम से, IND‑SA वनडे का टिकट पाने को फैंस ने ठंडी रात को भी नहीं छोड़ी क़तार

0

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

क्रिकेट | महेंद्र सिंह धोनी का शहर रांची एक बार फिर क्रिकेट के रंग में रंगा हुआ है. करीब तीन साल बाद JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में 30 नवंबर को भारत-साउथ अफ्रीका वनडे मैच होने जा रहा है और इसकी दीवानगी ऐसी है कि सर्दी की कड़क रात में भी हजारों क्रिकेट फैंस आधी रात से ही स्टेडियम के बाहर लाइन में लग गए. जैकेट, मफलर, टोपी और कंबल ओढ़े लोग बैरिकेड्स के पीछे अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए, सिर्फ इसलिए कि सुबह 9 बजे काउंटर खुलते ही उन्हें भारत के अपने चहेते सितारों रोहित शर्मा, विराट कोहली को लाइव खेलते देखने का मौका मिल जाए|

टिकट के लिए रात 12 बजे से लगी कतारें

JSCA स्टेडियम में होने वाले इस इंटरनेशनल मैच के लिए आज यानी 25 नवंबर की सुबह 9:00 से 3:00 तक JSCA स्टेडियम के बाहर बने 6 टिकट काउंटर से ऑफलाइन टिकट की बिक्री होगी, लेकिन क्रिकेट की दीवानगी ऐसी है की फैंस रात 12:00 से ही स्टेडियम के बाहर काउंटर टिकट वाले लाइन के बैरिकेडिंग में लग गए. बता दे इस मैच के लिए टिकटों के कीमत 1200 से लेकर 12,000 रुपए तक का रखी गई है. जिसमें अलग-अलग विंग के लोअर टियर और ऊपर टियर के लिए अलग-अलग दाम रखे गए हैं, इसके साथ ही हॉस्पिटैलिटी की सुविधा के साथ टिकटों के दाम अलग हैं|

बता दें, ऑफलाइन टिकट के लिए कुल 6 काउंटर बनाए गए हैं, जिसमें दो काउंटर पर जिन लोगों ने ऑनलाइन टिकट खरीदा था उन्हें रसीद दिखाने पर ऑफलाइन टिकट वहां से दिया जाएगा, जबकि एक काउंटर महिलाओं के लिए आरक्षित है. वहीं, एक व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा 2 टिकट मिलेगी और उसे आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा. इसके अलावा टिकटोक की कालाबाजारी रोकने और टिकट काउंटर पर फैंस को व्यवस्थित तरीके से टिकट मिल सके इसके लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है|

पहले बेच में 5 खिलाड़ी पहुंचेंगे रांची

भारतीय टीम के पांच खिलाड़ी आज ही रांची पहुंचेंगे जिसमें ऋतुराज गायकवाड, हर्षित राणा ,तिलक वर्मा, प्रसिद्ध कृष्णा और अर्शदीप सिंह शामिल हैं. जबकि बाकी भारतीय टीम और साउथ अफ्रीका की टीम के खिलाड़ी 27 नवंबर को गुवाहाटी से रांची पहुंचेगी, खिलाड़ी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट एयरपोर्ट से निकलकर सीधे रेडिसन ब्लू होटल जाएंगे, जहां वह लोग ठहरेंगे और 28 और 29 नवंबर को जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में प्रैक्टिस करेंगे|

अयोध्या में पीएम मोदी का ऐतिहासिक ध्वजारोहण, बोले—“सत्य ही धर्म है, राम एक मूल्य हैं”

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

PM Modi Speech: अयोध्या ने 25 नवंबर को एक और ऐतिहासिक दिन देखा, जब PM Modi Speech Ayodhya कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर के शिखर पर अभिजीत मुहूर्त में धर्म ध्वज फहराया गया। इस अवसर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत, सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद रहे। ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सभी को प्रणाम किया और कहा कि ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ यही ध्वज का संदेश है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज संपूर्ण भारत और विश्व राम-मय है। उन्होंने इसे सदियों की वेदना के अंत और पांच सौ वर्षों से जलती यज्ञ-अग्नि की पूर्णाहुति बताया। मोदी ने कहा कि यह धर्म ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के कायाकल्प का ध्वज है। भगवा रंग, सूर्यवंश का चिन्ह, ‘ॐ’ और कोविदारा वृक्ष मिलकर रामराज्य के आदर्शों को दर्शाते हैं।

PM Modi Speech Ayodhya में उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली हजारों शताब्दियों तक यह ध्वज सत्य, शांति, समानता और करुणा जैसे राम के मूल्यों का उद्घोष करता रहेगा। उन्होंने उन सभी रामभक्तों और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया जिन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान दिया।

अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अगले 1000 वर्षों के लिए मजबूत नींव रखनी होगी। वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखने की जरूरत है। उन्होंने 1835 में मैकॉले द्वारा फैलाई गई गुलामी की मानसिकता से मुक्त होने के मिशन का भी आह्वान किया।

मोदी ने कहा कि राम एक व्यक्ति नहीं, बल्कि मूल्य हैं। विकसित भारत का लक्ष्य पाने के लिए हर भारतीय को अपने भीतर इन मूल्यों को जागृत करना होगा। कार्यक्रम में RSS प्रमुख और सीएम योगी ने भी राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष और आस्था को याद किया।

टेस्ट टीम की बल्लेबाजी पर अनिल कुंबले की बड़ी चिंता, बोले—“टॉप ऑर्डर में बदलाव ने बढ़ाई मुश्किलें”

0

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

Anil Kumble: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच गुवाहाटी में जारी दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। साउथ अफ्रीका ने दूसरी पारी में 3 विकेट खोकर 77 रन बना लिए हैं और कुल बढ़त 365 रन तक पहुंचा दी है। ऐसे हालात में Anil Kumble on India Test Batting की चर्चा फिर तेज हो गई है, क्योंकि भारत की बल्लेबाज़ी लगातार सवालों के घेरे में है।

पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ने हाल ही में टीम इंडिया की टेस्ट बल्लेबाजी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि टॉप ऑर्डर में हुए बड़े बदलावों के कारण टीम की बैटिंग लाइन-अप में अस्थिरता साफ दिखाई दे रही है।

कुंबले ने कहा कि विराट कोहली, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के संन्यास लेने से टेस्ट टीम के शीर्ष क्रम में बड़ा खालीपन आ गया है। इसके साथ ही अजिंक्य रहाणे का चयन में न होना भी टीम की मजबूती को प्रभावित कर रहा है। मौजूदा सीरीज़ में कप्तान शुभमन गिल गर्दन की चोट के कारण बाहर हो गए, जिससे टीम की चुनौतियाँ और बढ़ गईं।

उन्होंने स्पष्ट कहा, “पिछले तीन-चार साल में टॉप-5 में से चार बल्लेबाज़ बदल चुके हैं। विराट, रोहित, पुजारा—इनके रिटायर होने और रहाणे के बाहर होने से टीम का संतुलन बिगड़ गया है। इसके ऊपर शुभमन गिल की चोट ने एक अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान दोनों की कमी पैदा कर दी है।”

Anil Kumble on India Test Batting के इस बयान ने वर्तमान टीम की स्थिति को लेकर गंभीर चर्चा खड़ी कर दी है। कुंबले का मानना है कि इतने बड़े बदलावों के बीच स्थिरता और निरंतरता बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है, और यही वजह है कि टीम उसकी कीमत मैदान पर चुका रही है।

हिडमा की मौत के बाद टॉप नक्सली कमांडरों में हडक़ंप

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

मप्र-छग-महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों के नाम पत्र जारी, हथियारबंद संघर्ष सफल नहीं हो सकता

नई दिल्ली। कुख्यात माओवादी कमांडर हिडमा के मारे जाने के बाद संगठन के भीतर तेजी से हलचल बढ़ गई है। नक्सली अब सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने राजी हो गए हैं। एमएमसी जोन (मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ कमेटी) के प्रवक्ता अनंत ने प्रेस रिलीज जारी कर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सरकार से हथियार छोडक़र पुनर्वास योजना स्वीकार करने की इच्छा जताई है। वहीं इस लेटर पर सीएम साय ने कहा है कि नक्सलियों को पहले ही सरेंडर करने कहा गया है, सरकार उनके साथ न्याय करेगी।
इसके लिए 15 फरवरी 2026 तक समय देने की मांग की गई है। इसके अलावा पीएलजीए सप्ताह भी रद्द करने की बात कही गई है। केंद्रीय कमेटी का कहना है कि प्रेस रिलीज पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद अगली प्रेस रिलीज जारी कर हथियार छोडऩे की अंतिम तारीख घोषित की जाएगी।

सशस्त्र संघर्ष को अस्थाई विराम देने का फैसला
प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय कमेटी के सदस्य और पोलित ब्यूरो मेंबर कॉमरेड सोनू दादा ने बदलती परिस्थितियों का आकलन करते हुए सशस्त्र संघर्ष को अस्थाई विराम देने का फैसला लिया है, जिसका समर्थन सीसीएम सतीश दादा और सीसीएम चंद्रन्ना भी कर चुके हैं। एमएमसी जोन ने भी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।

नहीं मनाएंगे पीएलजीए सप्ताह
अनंत ने कहा कि संगठन जनवादी केंद्रीयता की पद्धति पर चलता है, इसलिए सभी साथियों तक संदेश पहुंचाने और सामूहिक राय बनाने में समय लगेगा। उन्होंने तीनों राज्यों की सरकारों से इस अवधि तक सुरक्षाबलों के अभियान रोकने की अपील की। यहां तक कि पीएलजीए सप्ताह के दौरान भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया है। समिति ने आश्वासन दिया है कि वे इस बार पीएलजीए सप्ताह नहीं मनाएंगे और सभी गतिविधियों पर विराम देंगे।

ऑपरेशनों पर भी रोक लगाने की मांग
प्रेस रिलीज में सरकार से मुखबिर गतिविधियों और इनपुट-आधारित ऑपरेशनों पर भी रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही, सरकार से रेडियो पर उनके संदेश को प्रसारित करने का अनुरोध किया है ताकि दूर-दराज क्षेत्रों में मौजूद साथियों तक सूचना पहुंच सके, क्योंकि यह उनके पास बाहरी दुनिया से अपडेट रहने का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम है। एमएमसी जोन ने यह भी इच्छा जताई है कि इस बीच उन्हें कुछ जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और यूट्यूबर पत्रकारों से मिलने का अवसर दिया जाए, ताकि हथियार त्यागने की निश्चित तारीख तय कर जल्द घोषणा की जा सके। समिति ने मध्यस्थों से भी सरकार और संगठन के बीच संवाद बढ़ाने की अपील की है।

सरकार से ‘पहला कदम’ उठाने की अपील
पत्र में एक अहम बिंदु यह है कि केंद्रीय कमेटी के संदेश में मार्च 2026 तक जनयुद्ध को रोकने की बात कही गई है। यह माओवादियों का अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है। कई कमांडरों ने इसे जीवन बचाने और भविष्य सुरक्षित करने का मौक़ा समझा है। संगठन ने अपने सदस्यों को आगे के आदेश तक संघर्ष बंद रखने को कहा है। यह संकेत है कि आने वाले महीनों में बड़े स्तर पर आत्मसमर्पण देखने को मिल सकता है। नक्सली प्रवक्ता ने सरकारों से अपील की है कि वे इस पत्र को गंभीरता से पढ़ें और सकारात्मक कदम उठाएं। संगठन चाहता है कि सरकार उनकी बात सुने और आत्मसमर्पण के इच्छुक कमांडरों को सुरक्षित रास्ता दे। शिविरों में बेहतर सुरक्षा, कानूनी प्रक्रिया में मदद और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की गई है। पत्र में यह भी कहा गया कि यदि सरकार आगे आएगी तो नक्सली भी हथियार छोडऩे की तारीख घोषित करेंगे। इस कार्रवाई को हिडमा की मौत के बाद बनी नई जमीनी हकीकत का नतीजा माना जा रहा है।

नक्सल कमांडरों में टकराव और डर के हालात
पत्र में यह भी स्वीकार किया गया है कि संगठन के भीतर कई गुटों में टकराव बढ़ गया है। हिडमा की मौत ने यह डर और बढ़ा दिया कि अगला टारगेट कौन होगा। साथ ही कई कमांडर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि लगातार दबाव, सुरक्षाबलों की घेराबंदी और कम होती ताकत से जनयुद्ध आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसी डर और असुरक्षा के कारण कमांडरों ने संघर्ष रोकने और सुविधा मिलने पर आत्मसमर्पण की इच्छा जताई है। जंगलों में माहौल अब पहले जैसा नहीं रह गया है।

जंगलों में तैनात दस्तों का मनोबल गिरा
पीएलजीए और एमएमसी जोन से जुड़े कई दस्तों के मनोबल में तेजी से गिरावट आई है। पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि उनके पास सूचनाएं पहुंचाने का माध्यम सिर्फ चुनिंदा लोग हैं, जिससे वे दुनिया से कटते जा रहे हैं। हिडमा की मौत और अंदरूनी कमजोरियों ने उन्हें यह यकीन दिलाया है कि अब लड़ाई टिक नहीं पाएगी। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें सुरक्षित रास्ता दे ताकि वे संगठन छोडक़र सामान्य जीवन जी सकें। यह संकेत बड़ा है कि जंगल में लडऩे वाली पीढ़ी बदलाव चाहती है।

खनन, विकास और विस्थापन के मुद्दों पर नरमी
पत्र में एक दिलचस्प बात यह है कि संगठन अब खनन कंपनियों, विस्थापन और सरकारी विकास योजनाओं पर पहले जैसी कठोर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार चाहती है तो केंद्र से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकाले। यह बदलाव बताता है कि नक्सल एजेंडा अब कमजोर हो चुका है। हिडमा के बाद नेतृत्व में ठोस दिशा नहीं है, इसलिए कई कमांडर चाहते हैं कि सरकार उन्हें साथ लेकर चलने की कोशिश करे। इसी कड़ी में आत्मसमर्पण की राह तलाशना उनके लिए आसान विकल्प बन गया है।

तीनों राज्यों के लिए बड़ा सुरक्षा बदलाव
महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में यह पत्र बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सलवाद के कमजोर होते प्रभाव का बड़ा संकेत मान रही हैं। हिडमा की मौत ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है। अब कई कमांडर अंडरग्राउंड होने के बजाय सामने आने को तैयार हैं। यदि सरकार इस मौके को पकड़े, तो आने वाले महीनों में नक्सल मोर्चे पर बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

क्यों हो गए थे मनीष मल्होत्रा फराह खान से नाराज़? 2 दिन तक चला साइलेंट ट्रीटमेंट

#LatestBollywoodNews #BollywoodNews #BollywoodUpdate #BollywoodNews #BollywoodHindiNews

डायरेक्टर और कोरियोग्राफर फराह खान अपनी फिल्मों से ज्यादा कुकिंग चैनल को लेकर सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं. उनके व्लॉग बहुत पसंद आते हैं. वो कुकिंग चैनल में बॉलीवुड सेलेब्स के घर अपने कुक दिलीप के साथ जाती हैं और वहां उनकी पसंद की डिश ट्राई करती है. हाल ही में फराह खान डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के घर गई थीं. जहां पर उन्होंने कुछ पुरानी यादें ताजा कीं|

फराह खान और मनीष मल्होत्रा एक-दूसरे को कई सालों से जानते हैं और बहुत अच्छे दोस्त हैं. दोनों की दोस्ती बहुत गहरी है. मगर दोनों की लड़ाई भी खूब हुई है. फराह खान ने मनीष मल्होत्रा के साथ अपनी लड़ाइयों के बारे में भी बताया. उन्होंने बताया कि कैसे मनीष फराह से गुस्सा हो गए थे और उन्होंने दो दिनों तक बात नहीं की थी|

2 दिन तक मनीष ने नहीं की थी बात

जब फराह ने मनीष से उनके बारे में कुछ कहने को कहा तो वह मान गए और उन्होंने कहा- ‘फराह, कोरियोग्राफर और डायरेक्टर दो अलग-अलग लोग हैं. फराह, कोरियोग्राफर, सच में कमेंट करती हैं, ये क्या है? ऐ ये कैसे है? ये कॉस्ट्यूम कैसा है?  एक दिन मैं परेशान हो गया और सेट से चला गया. क्योंकि जूही चावला का गाना था- फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, और वो कह रही थीं, ये ग्रे कुर्ता हिल नहीं रहा है! मैं कह रहा था, तुम हमेशा कमेंट करते रहते हो.’ जब मनीष ने फेविकॉल से गाने का उदाहरण दिया तो फराह ने कहा- ‘हां मुझे याद है ये बहुत गुस्सा हो गया था और दो दिन तक मेरा फोन नहीं उठाया था|

फराह कैसी डायरेक्टर है

इस पर मनीष ने कहा- फराह एक अलग इंसान बन जाती है. वो इतनी अच्छी हो जाती है कि जो आप बोलो कि अच्छा ऐसे करेंगे. फराह भी मनीष की बात सुनकर हंसती नजर आईं|

कर्नाटक में CM पद को लेकर हलचल जारी, शिवकुमार के समर्थन में विधायकों का एक और समूह दिल्ली पहुंचा

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) में कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही रस्साकशी अब नई दिल्ली तक पहुंच गई है। इसी क्रम में चर्चा ज्यादा तेज तब हो गई जब कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Deputy Chief Minister DK Shivakumar) के समर्थन में एक और विधायकों का समूह नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ है। सूत्रों की माने तो ये दल रविवार रात नई दिल्ली पहुंच भी गए। इस दल में कम से कम छह विधायक शामिल है। सूत्रों का तो ये भी मानना है कि कुछ और विधायक भी जल्द दिल्ली जा सकते हैं ताकि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का मुद्दा पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने रखा जा सके।

बता दें कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की बातें भी सामने आई हैं। ऐसे में चर्चा तेज हो गई कि क्या अब डीके शिवकुमार को अगले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। अब बात अगर नई दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायकों की करे तो नई दिल्ली पहुंचे विधायकों में एचसी बालकृष्णा (मगड़ी), केएम उदय (मद्दुर), नयना मोतम्मा (मुडिगेरे), इकबाल हुसैन (रमणगर), शरथ बचेगौड़ (होसकोटे) और शिवगंगा बसवराज (चनागिरी) शामिल हैं।

नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) में कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही रस्साकशी अब नई दिल्ली तक पहुंच गई है। इसी क्रम में चर्चा ज्यादा तेज तब हो गई जब कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Deputy Chief Minister DK Shivakumar) के समर्थन में एक और विधायकों का समूह नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ है। सूत्रों की माने तो ये दल रविवार रात नई दिल्ली पहुंच भी गए। इस दल में कम से कम छह विधायक शामिल है। सूत्रों का तो ये भी मानना है कि कुछ और विधायक भी जल्द दिल्ली जा सकते हैं ताकि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का मुद्दा पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने रखा जा सके।

बता दें कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की बातें भी सामने आई हैं। ऐसे में चर्चा तेज हो गई कि क्या अब डीके शिवकुमार को अगले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। अब बात अगर नई दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायकों की करे तो नई दिल्ली पहुंचे विधायकों में एचसी बालकृष्णा (मगड़ी), केएम उदय (मद्दुर), नयना मोतम्मा (मुडिगेरे), इकबाल हुसैन (रमणगर), शरथ बचेगौड़ (होसकोटे) और शिवगंगा बसवराज (चनागिरी) शामिल हैं।