सरकारी कर्मचारियों के आश्रित भाई-बहनों को भी मिलेगा मुफ्त इलाज

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गुजरात सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा निर्णय लिया गया है। ‘गुजरात राज्य सेवा (चिकित्सा उपचार) नियम, 2002’ के तहत ‘परिवार’ की परिभाषा में बड़ा संशोधन किया गया है। इस सुधार के माध्यम से अब सरकारी कर्मचारियों पर आर्थिक रूप से निर्भर अन्य सदस्यों को भी मुफ्त चिकित्सा उपचार का लाभ मिल सकेगा।
 ‘परिवार’ की परिभाषा का विस्तार पिछले नियमों के अनुसार, चिकित्सा लाभ केवल कर्मचारी के पति या पत्नी, बच्चों और माता-पिता तक ही सीमित थे। लेकिन, सरकार ने इस पुरानी परिभाषा को रद्द कर इसे अधिक व्यापक बना दिया है। नई परिभाषा के अनुसार, अब कर्मचारी पर निर्भर भाई-बहन और दत्तक (गोद ली गई) संतानों को भी इस चिकित्सा उपचार योजना के तहत शामिल किया गया है, ताकि वे भी उचित इलाज प्राप्त कर सकें।
 
लाभ के लिए मुख्य शर्तें और आय सीमा इस लाभ को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कुछ शर्तें और आर्थिक निर्भरता की सीमा स्पष्ट की है। पहली शर्त यह है कि संबंधित सदस्य कर्मचारी के साथ ही रहते होने चाहिए। दूसरी शर्त के अनुसार, यदि परिवार के उस सदस्य की पेंशन सहित सभी स्रोतों से होने वाली कुल मासिक आय 500 रुपए से अधिक नहीं है, तभी उन्हें कर्मचारी पर ‘पूर्णतः आश्रित’ माना जाएगा और योजना का लाभ दिया जाएगा।
तत्काल प्रभाव से कार्यान्वयन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक परिपत्र (Circular) जारी कर दिया गया है और ये नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। सरकार के इस कदम से लाभार्थियों की सूची में अधिक स्पष्टता आएगी और पात्र आश्रित सदस्य बिना किसी बाधा के चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।मध्यम वर्ग को बड़ी आर्थिक राहत राज्य सरकार के इस निर्णय से मध्यम वर्गीय सरकारी परिवारों को बहुत बड़ा फायदा होगा। बीमारी के समय जब मेडिकल खर्चे बढ़ जाते हैं, तब आर्थिक रूप से निर्भर भाई-बहन या अन्य सदस्यों के इलाज का बोझ अब काफी कम हो जाएगा। यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों की चिंता दूर करने और उनके परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी साबित होगा।

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‘आधे घंटे में ही फाइनल खत्म हो गया…!’ सौरव गांगुली ने न्यूजीलैंड की बड़ी गलती बताई

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टी20 वर्ल्ड कप के आखिरी चार मैचों में भारत की बल्लेबाजी पूरी तरह से हावी रही। सेमीफाइनल और फाइनल में तो टीम इंडिया ने दो बार 250+ रन बना दिए। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 253/7 का विशाल स्कोर बनाया और मैच सात रन से जीत लिया। इसके बाद फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज जारी रखा। फाइनल में भारत ने 255/5 का बड़ा स्कोर खड़ा किया और मुकाबला 96 रन से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। भारतीय टीम की कामयाबी के बाद सौरव गांगुली का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि वह न्यूजीलैंड के टॉस फैसले से काफी हैरान थे। साथ ही गांगुली ने कोच गौतम गंभीर की तारीफ की और कहा कि टीम उनके अंदर कई खिताब जीतेगी, खासतौर पर व्हाइट बॉल क्रिकेट में।

गांगुली बोले- 7:30 बजे ही हार गया था न्यूजीलैंड

गांगुली ने टॉस जीतने वाले न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर के फैसले को लेकर हैरानी जताई और कहा कि उन्हें पहले गेंदबाजी का फैसला समझ नहीं आया। उन्होंने कहा, ‘न्यूजीलैंड वर्ल्ड कप शाम 7:30 बजे ही हार गया था। मैच सात बजे शुरू हुआ और आधे घंटे में साफ हो गया कि क्या होने वाला है। मैं भी यही बात अपने साथ मैच देख रहे लोगों से कह रहा था।’गांगुली ने भारतीय बल्लेबाजी की गहराई का जिक्र करते हुए कहा, ‘ईशान, अभिषेक, संजू सैमसन, सूर्यकुमार, शिवम, तिलक, हार्दिक और अक्षर, इतनी मजबूत बल्लेबाजी के सामने टीम अगर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजे तो यह सीधे-सीधे टैक्टिकल डिजास्टर है।’ उन्होंने तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की भी तारीफ की और कहा कि उनके रहते मैच और भी मुश्किल हो जाता है।

कोच गौतम गंभीर की भी तारीफ

गांगुली ने भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की रणनीति और नेतृत्व की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘व्हाइट बॉल कोच के तौर पर वह बहुत अच्छे हैं और उनके पास शानदार टीम है। 12 महीने के भीतर चैंपियंस ट्रॉफी और वर्ल्ड कप जीतना किसी भी कोच के लिए बड़ी उपलब्धि है।’ गांगुली के मुताबिक गंभीर टीम के माहौल को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा टीम के हित को सबसे ऊपर रखते हैं।

भारत के पास दो मजबूत टीमें बनाने की ताकत

गांगुली का मानना है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा इतनी ज्यादा है कि दो मजबूत व्हाइट-बॉल टीमें बनाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘जरा सोचिए कितने खिलाड़ी टीम से बाहर हैं और फिर भी कितने शानदार हैं। श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ी को भी जगह नहीं मिल रही। सूर्यवंशी किसी भी टीम में खेल सकते हैं। जायसवाल और गिल जैसे खिलाड़ी भी बाहर बैठे हैं। भारत आसानी से दो मजबूत टीमें उतार सकता है।’

इन टीमों से ही मिल सकती है चुनौती

गांगुली के अनुसार व्हाइट-बॉल क्रिकेट में भारत को असली चुनौती कुछ चुनिंदा टीमों से ही मिल सकती है। उनका मानना है कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ही ऐसी टीमें हैं जो भारत को कड़ी टक्कर दे सकती हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका अनुकूल परिस्थितियों में प्रतिस्पर्धी हो सकती है।

 

दिल्ली की हवा जहरीली, बमबारी के बाद भी तेहरान की हवा साफ क्यों?

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नई दिल्ली। ईरान में बीते दो हफ्तों से ताबड़तोड़ धमाके और बमों-मिसाइलों के धुओं से आमसान काला हो चुका है। तेल ठिकानों पर हमले के बाद कई मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया गया कि ईरान के आसमान से जहरीली बारिश की बूंदे भी गिरने लगी हैं। इसके बावजूद भी आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि चारों तरफ काले धुएं के बाद भी तेहरान की हवा भारत की राजधानी नई दिल्ली की हवा से ज्यादा साफ है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार तेहरान का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)  50-70 के अच्छा से मध्यम स्तर पर बना हुआ है। इसके ठीक उलट दिल्ली का एक्यूआई 150 से ऊपर, यानी खराब से अस्वस्थ स्तर पर बना हुआ है। चारों तरफ काला धुआं, काला आसमान, ताबड़तोड़ हमले, जहरीले हालात और आग के बावजूद तेहरान की साफ हवा ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक गतिविधियां और कृषि प्रदूषण नागरिकों की सांसों को कितना गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर युद्ध के बावजूद प्राकृतिक और मानवजनित प्रदूषण का वास्तविक असर कैसा होता है।

अब समझिए क्यों दिल्ली की हवा खराब है या रहती है?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि दिल्ली का खराब प्रदूषण युद्ध से नहीं बल्कि भौगोलिक और औद्योगिक कारणों से है। यह शहर इंडो-गैंगेटिक मैदान में स्थित है, जो दुनिया के सबसे प्रदूषित इलाकों में से एक माना जाता है। यहां भारी ट्रैफिक और उद्योग हैं, निर्माण कार्य और धूल भी खूब फैलती है। इसके साथ ही इस बात को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा में कृषि अपशिष्ट (पराली) जलाना आम है। इन कारणों से पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कण वायु में फैलते हैं, जो सबसे जहरीली स्मॉग का कारण बनते हैं। ठंडी हवाओं और तापमान की उलटफेर (इनवर्जन) के कारण यह धुआं जमीन के पास फंसा रहता है। नतीजा यह होता है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अक्सर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहता है।

अब बात तेहरान की हवा की

इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि तेहरान पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। तेहरान में भी प्रदूषण है, लेकिन यहां सबसे बड़ा स्रोत वाहनों से निकलने वाला धुआं है। यहां कृषि अपशिष्ट जलाने जैसी गतिविधियां नहीं हैं।  आसपास के इलाके में भारी उद्योगों का घना नेटवर्क कम है। हां यह बात जरूर है कि भूगोल के कारण सर्दियों में धुआं फंस सकता है, लेकिन औसत स्तर दिल्ली से कम है।  हालांकि, अमेरिका-इस्राइल-ईरान संघर्ष के दौरान तेल डिपो पर हुए हमलों से तेहरान की हवा में जहरीले तत्व आए हैं,  लेकिन फिर भी इसकी हवा दिल्ली से ज्यादा खराब नहीं हुई।

युद्ध प्रदूषण का मुख्य कारण नहीं

हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने पहले सोचा था कि तेल ठिकानों की आग से पूरे क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ सकता है। लेकिन वायु गुणवत्ता विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में हालिया धुंध का कारण बलूचिस्तान और थार मरुस्थल से उड़ता धूल है, ईरान के धुएं से नहीं। गौरतलब है कि ऐसे समय में दिल्ली और तेहरान की हवा का यह तुलना दिखाता है कि शहरी प्रदूषण, जो ट्रैफिक, उद्योग और कृषि गतिविधियों से पैदा होता है, छोटे समय के युद्ध प्रभावों से भी ज्यादा लगातार हवा को खराब करता है। दिल्ली में 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए साफ हवा की लड़ाई लंबी है, जिसे केवल नीति, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग से ही हल किया जा सकता है।

ऋतिक की गर्लफ्रेंड सबा आजाद से लेकर शिखर धवन तक, एमएक्स प्लेयर पर आएंगे सेलेब्स के खास शोज

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अमेजन एमएक्स प्लेयर ने गुरुवार को अपनी इस साल की बड़ी रिलीज की घोषणा कर दी है। इसके अंतर्गत शिखर धवन का शो ‘बैटलग्राउंड सीजन 2’, नसीरुद्दीन शाह की ‘मेड इन इंडिया’ और संजय कपूर की ‘अब होगा हिसाब’ रिलीज होंगी। जानिए इनके बारे में डिटेल।

बैटलग्राउंड सीजन 2

शिखर धवन की अगुवाई वाला शो ‘बैटलग्राउंड सीजन 2’ जल्द ही रिलीज होने वाला है। इसमें भारत के जबरदस्त फिटनेस के दीवाने और प्रोफेशनल एथलीट जीत के लिए संघर्ष करेंगे। नए सिरे से बने ‘बैटलग्राउंड हाउस’ में एक ही छत के नीचे 16 कंटेस्टेंट होंगे। इस शो के निर्देशक उत्तम डोमाले, दीपदत्त पांडे और नेहा सेठ हैं।

वेटिंग है

दिव्येंदु शर्मा और भावना अरोड़ा की अदाकारी वाला शो ‘वेटिंग है’ इसी साल रिलीज होने वाला है। इसकी कहानी एक रेलवे पुलिस फोर्स के जवान के आस-पास घूमती है, जो तत्काल टिकट पाने की जद्दोजहद के दौरान, करोड़ों के एक घोटाले का पर्दाफाश करता है। इसके निर्देशक समीर विध्वंस होंगे।

विमल खन्ना 

सनी हिंदुजा और मीरा चोपड़ा की अदाकारी वाली सीरीज ‘विमल खन्ना’ इस साल रिलीज होने के लिए तैयार है। इसके निर्देशक साकेत चौधरी और अभिनव सीकर हैं। इसमें एक ऐसे शख्स की कहानी दिखाई गई है जो हालात का मारा है और रक्षक’ बन जाता है। दर्शकों को इसका इसका इंतजार है।

रक्तांचल सीजन 3

क्रांति प्रकाश झा और निकितिन धीर की अदाकारी वाली सीरीज ‘रक्तांचल 3’ एक पॉलिटिकल-क्राइम सीरीज है। इसमें गैंगवार और पॉलिटिकल दांव-पेच की कहानी दिखाई गई है। इसके निर्देशक रितम श्रीवास्तव हैं, जबकि निर्माता अजय राय हैं। यह इसी साल रिलीज होगी।

अब हिसाब होगा

संजय कपूर, शहीर, मौनी रॉय और निमरत कौर की अदाकारी वाली सीरीज इसी साल रिलीज होने वाली है। इसकी कहानी बॉबी के इर्द-गिर्द घूमती है। बॉबी एक नरम-दिल इंसान है, जिसे हाल ही में कनाडा से डिपोर्ट किया गया है। उसकी जिंदगी में तब अचानक उथल-पुथल मच जाती है, जब उसका भाई लापता हो जाता है।

कप्तान

साकिब सलीम और अंजुम शर्मा की अदाकारी वाली यह सिरीज भी इसी साल ओटीटी पर दस्तक देगी। यह एक मशहूर पुलिस अधिकारी एसएसपी समर की कहानी है। उसका सामना ऐसे शख्स से होता है जो कभी उसका प्रशंसक था हालांकि अब उसका बड़ा दुश्मन है। इसके निर्देशक जतिन वागले हैं।

हू इज योर गायनैक सीजन 2

सीरीज ‘हू इज योर गायनैक 2’ में एक ऐसे डॉक्टर की कहानी है जो पहले अपने करियर में संघर्ष करती है। इसके बाद धीरे-धीरे वह अपने मकसद में कामयाब होती है। वह एक कामयाब गायनैक बनती है। इस सीरीज के निर्देशक हिमाली शाह हैं। इसमें सबा आजाद, करिश्मा सिंह और कुणाल ठाकुर अहम किरदार में होंगे।

कैंपस डायरीज

‘कैंपस डायरीज’ के पहले सीजन में छह पक्के दोस्तों की कॉलेज लाइफ को दिखाया गया था। हालांकि इन लोगों के रिश्ते कैसे खराब होते हैं। उनको जिंदगी में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है वह इस सीरीज में दिखाया गया है। इसके निर्देशक प्रेम मिस्त्री हैं। इसमें हर्ष बेनीवाल, ऋत्विक साहोर, अभिनव शर्मा, सृष्टि गांगुली रिन्दानी, सलोनी पटेल और सलोनी गौर अहम किरदार में हैं।

मेड इन इंडिया- टाइटन स्टोरी

यह सीरीज विनय कामत की किताब ‘टाइटन: इंडियाज मोस्ट सक्सेसफुल कंज्यूमर ब्रांड’ पर आधारित है। यह शो जर्क्सिस देसाई के सफर को दिखाता है, जिन्हें टाटा प्रेस को फिर से खड़ा करने का काम सौंपा जाता है। इसमें नसीरुद्दीन शाह, जिम सरभ और वैभव तत्ववादी अहम किरदारों में हैं।

कैंपस बीट्स रिटर्न्स- न्यू बीट्स ऑफ लव

शांतनु महेशवरी, श्रुति सिन्हा और पारस कलनावत की अदाकारी वाली यह सीरीज इसी साल रिलीज होने वाली है। इसकी कहानी डांस और प्यार के आस-पास घूमती है। इसके निर्देशक अनिरुद्ध राजदेरकर हैं।

एलपीजी संकट पर कांग्रेस पर हमलावार कंगना……….जनता को गुमराह करने की साजिश 

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नई दिल्ली। देश में एलपीजी संकट को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रानोत ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधकर कहा कि जनता को गुमराह करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है, लेकिन भारत में लगातार नई परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। रनौत ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को कथित एलपीजी संकट से उसी तरह बाहर निकलने वाले हैं, जैसे उन्होंने कोविड महामारी के दौरान देश का नेतृत्व किया था।
मंडी से सांसद कंगना रनौत ने कहा कि एलपीजी की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने पूर्ण आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष दहशत फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत लगातार प्रगति कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देश में एलपीजी की कमी की स्थिति पैदा हो रही है और इस पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

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100 शहरों में कल से शुरू होगा काउंटडाउन

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नई दिल्ली । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (Yoga Day 2026) अब सिर्फ 100 दिन दूर है। इसकी शुरुआत के तौर पर 13 मार्च 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में योग महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन होगा। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) 13 मार्च, 2026 को विज्ञान भवन में योग महोत्सव-2026 का आयोजन कर रहा है। 

100 संगठन 100 शहरों में होगा योग का प्रचार 
आपको बता दे कि, यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 100 दिन शेष रहने की शुरुआत का प्रतीक है। आयुष मंत्रालय ने अपने विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर 100 दिन शेष रहने के तहत कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें 100 संगठन 100 स्थानों/शहरों में योग का प्रचार कर रहे हैं । 13 मार्च, 2026 को विज्ञान भवन में प्रात: 9:00 बजे से एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

ये रहेंगे मौजूद 
इस कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा; बेंगलुरु स्थित एस-व्यासा सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एचआर नागेंद्र; आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मोनालिसा दाश के साथ-साथ गणमान्य व्‍यक्तित्‍व, योग गुरु, योग विशेषज्ञ, आयुष विशेषज्ञ, आधुनिक चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान के विशेषज्ञों के अलावा प्रतिनिधि, योग प्रेमी और योग साधक उपस्थित रहेंगे।

आयुष मंत्री ने कहा- योग हमारी सांस्कृतिक 
आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। योग की यह विश्वव्यापी स्वीकृति हमारे देश के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि योग हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न अंग है। आयुष मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के आयोजन के लिए नोडल मंत्रालय है। प्रत्येक वर्ष, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम एक सामूहिक योग प्रदर्शन होता है, जिसका नेतृत्व स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां पहले से ही चल रही हैं।

योग के संदेश को आमजन तक ले जाना 
मालूम हो कि. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व के शेष दिवसों के लिए प्रत्येक वर्ष उत्सव की तैयारियों को एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में मनाया जाता है। इस अवधि के दौरान, मंत्रालय अपने प्रचार-प्रसार को व्यापक बनाने और योग के संदेश को व्यापक रूप से बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जिसका उद्देश्य देश भर के लोगों से जुड़ना और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पूर्व के 100 दिनों में जनता की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

100 स्थानों पर मनाने का प्रस्ताव 
आगामी 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, मंत्रालय ने देश भर के 100 प्रतिष्ठित स्थानों पर इस अवसर को मनाने का प्रस्ताव रखा है। 100 दिनों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां गति पकड़ रही हैं, जो देश भर के लोगों को योग को समग्र कल्याण के मार्ग के रूप में अपनाने और मनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

Devendra Fadnavis और Eknath Shinde के नाम पर बनाए फर्जी आधार और जाति प्रमाणपत्र

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महाराष्ट्र की रमाई घरकुल योजना (Ramai Awas Gharkul Yojana) में बड़ा घोटाला होने का दावा एआईएमआईएम (AIMIM) नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने किया है। इम्तियाज जलील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में पिछले कई वर्षों से इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धांधली की जा रही है। AIMIM नेता जलील के अनुसार इस कथित घोटाले की गंभीरता इतनी ज्यादा है कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और जाति प्रमाणपत्र तक बनाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर घरकुल योजना का पैसा हड़पा गया।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम पर बने फर्जी दस्तावेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इम्तियाज जलील ने कई दस्तावेज मीडिया के सामने पेश किए। उन्होंने दावा किया कि इन कागजात में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर ‘महार’ जाति का प्रमाणपत्र तक जारी किया गया है।इतना ही नहीं, जलील के मुताबिक एकनाथ शिंदे के नाम से फर्जी राशन कार्ड भी बनाया गया है, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी जोड़े गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर नकली आधार कार्ड तैयार कर रमाई घरकुल योजना के तहत आवेदन दाखिल किए गए और सरकारी पैसे की हेराफेरी की गई।

भाजपा नेताओं पर साधा निशाना
इम्तियाज जलील ने आरोप लगाया कि शहर के कुछ बड़े नेता दलालों के साथ मिलकर इसी तरह से कई वर्षों से गरीबों के हक का पैसा लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के दबाव में महानगरपालिका के आयुक्त से करोड़ों रुपये की फाइलों पर हस्ताक्षर कराए गए।

2010 से चल रहा पूरा खेल?
पूर्व सांसद ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि इस पूरे सिंडिकेट में कुछ बड़े रसूखदार चेहरे शामिल हैं जो गरीबों के हक का पैसा डकार रहे हैं। इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली नेताओं ने संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारियों पर फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया था।उन्होंने आरोप लगाया कि 2010 से अब तक जिन हजारों घरों का वितरण दिखाया गया है, उनमें से कई जमीन पर अस्तित्व में ही नहीं हैं। योजना का लाभ वास्तविक गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है।

हाईकोर्ट में जाने की तैयारी
इम्तियाज जलील ने कहा कि जब प्रशासन के कुछ बड़े अधिकारी ही इस मामले में शामिल नजर आ रहे हैं तो केवल शिकायतों से न्याय मिलना मुश्किल है। इसलिए वह सभी दस्तावेज और सबूतों के साथ जल्द ही बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो रमाई घरकुल योजना में हुए कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ सकती है।

 

ऊर्जा संकट और गैस की कमी पर सरकार को घेरने की तैयारी

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नई दिल्ली। संसद में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव भले ही गिर गया हो, लेकिन विपक्षी दलों ने अब सरकार को घेरने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उपजे ईंधन संकट और देश में रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत को लेकर सरकार पर हमलावर होने जा रहे हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब भारतीय रसोई और आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट किया कि अब पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति तथा ऊर्जा सुरक्षा की विफलता को प्रमुखता से उठाएगी। राहुल गांधी का तर्क है कि यह संकट सीधे तौर पर आम जनता से जुड़ा है, क्योंकि युद्ध के कारण न केवल रसोई गैस की कमी हुई है, बल्कि ईंधन संकट के चलते महंगाई और हवाई किराए में भी अप्रत्याशित उछाल आया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के दबाव में झुक रही है और अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में नाकाम रही है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है और वहां जारी युद्ध ने कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को बाधित कर दिया है।
संसद के भीतर इस मुद्दे पर घमासान पहले ही शुरू हो चुका है। सोमवार और मंगलवार को विपक्ष ने एलपीजी संकट को लेकर सदन में भारी हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों ने सदन में स्लोगन लिखे थे। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने मांग की है कि सरकार को अन्य सभी मुद्दों को छोड़कर सबसे पहले रसोई गैस की कीमतें कम करने और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, तो सरकार के भीतर इतनी घबराहट क्यों है? वहीं, सीपीआई(एम) नेता जॉन ब्रिट्टास ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पर्याप्त स्टॉक होने का झूठा दावा कर रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को युद्ध रोकने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन वह केवल मूकदर्शक बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि सरकार संसद में विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है।

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सरकार का बयान- घबराहट के कारण बढ़ी सिलेंडर बुकिंग

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भारत सरकार के विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने माना कि देश में हालात चुनौतीपूर्ण हैं और घबराहट के कारण देशभर में सिलेंडर बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है। देश में रोजाना करीब 50 लाख LPG सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल की सप्लाई की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है और देश के करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी पर भी ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है।

अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के बीच भारत में LPG की डिमांड बढ़ गई है। देशभर में गैस सिलेंडर एजेंसियों के बार लम्बी लाइनें लग रही हैं। सिलेंडरों की कालाबाजारी भी होने लगी है। राज्यों में ₹900 के घरेलू गैस सिलेंडर के लिए ₹1800 तक वसूले जा रहे हैं।
 

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News Desk

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वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर लोकसभा में चर्चा. राज्यसभा में भी सामान्य रूप से चर्चा जारी.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जगदंबिका पाल ने वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में एक समाधान करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने इसके तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये की एक आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाई है.वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच पर चर्चा की शुरूआत करते हुए पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट (इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध) के कारण पूरे विश्व में अनिश्चितता की स्थिति है.उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति श्रृंखला टूट जाने का असर कच्चा तेल की ढुलाई पर पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे ईरान ने उस समुद्री मार्ग से तेल की ढुलाई की अनुमति दी है.’’भाजपा सांसद ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चा तेल के दाम बढ़े हैं और यह 88 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 119 डॉलर हो गया है, जिसका सीधा असर गैस, उर्वरक और परिवहन क्षेत्र पर पड़ेगा. पूरे विश्व में इसका असर पड़ने जा रहा है.पाल ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में और इस तरह की वैश्विक चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह केवल अनुपूरक मांग नहीं है, बल्कि दुनिया के समक्ष उत्पन्न हुए संकट का एक समाधान है.’’भाजपा सांसद ने कहा कि अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच का कुल आकार 2.81 लाख करोड़ रुपये है और इसमें दो लाख करोड़ रुपये नया नकद व्यय है जो दर्शाता है कि विकास कार्यों को गति दी जाएगी.उन्होंने उल्लेख किया कि इसमें एक लाख करोड़ रुपये ‘टेक्निकल सप्लीमेंट्री टोकन’ प्रावधान के लिए है.

पाल ने कहा, ‘‘अनुपरक मांगों के दूसरे बैच में, वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला व समाधान करने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाया है, जो मौजूदा संकट को दूर करेगा. यह भविष्य में आने वाले किसी भी संकट के लिए एक ढाल का काम करेगा.’’उन्होंने कहा कि यह निधि नये वित्त वर्ष के बजट के लिए एक मजबूत नींव रखेगा. यह वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के लिए एक बफर का काम करेगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का भारत पर असर न पड़े.

विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच, पाल ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2013-14 में 304 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वर्तमान में 686 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है.उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि संप्रग के शासनकाल के दौरान विदेशी निवेश देश से निकाला जा रहा था और यह 308 अरब अमेरिकी डॉलर था, लेकिन वर्तमान में 748 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है, जिसपर विपक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया.विपक्षी सदस्यों का शोरगुल नहीं थमने पर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान में, विश्व में जिस तरह की समस्या है उसे ध्यान में रखते हुए सबको एकजुट होकर उसका समाधान करना होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘जब कभी देश में संकट आए तो पूरे देश को एकजुट होकर उसका समाधान करना चाहिए, राजनीति नहीं करनी चाहिए.’’इसके बाद, पाल ने कहा कि देश के किसानों के लिए उर्वरक की आपूर्ति बनाये रखने के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच में 19,230 करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी के लिए प्रावधान किया गया है क्योंकि आयात किये जाने वाले प्राकृतिक गैस की लागत दोगुनी हो गई है.

देश में कहीं भी एलपीजी या पेट्रोल की कमी नहीं है: जेडीयू सांसद संजय कुमार
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा, ‘140 करोड़ लोग प्रधानमंत्री पर भरोसा करते हैं. जनता प्रधानमंत्री की कही बातों पर भरोसा करती है. दुनिया ने देखा कि उन्होंने कोविड के दौरान देश को संकट से कैसे निकाला. इतनी बड़ी लड़ाई चल रही है. यह भारत के कंट्रोल में नहीं है और कोई नहीं जानता कि यह कब तक चलेगी. देश में कहीं भी एलपीजी या पेट्रोल की कमी नहीं है. लोग लाइन में लग रहे हैं और घर में 4-4 सिलेंडर रख रहे हैं, इसी से दिक्कत हो रही है.’

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, ये कहा
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि वह (राहुल गांधी) चाहते हैं कि प्रधानमंत्री सुबह डोनाल्ड ट्रंप, दोपहर में व्लादिमीर पुतिन और शाम को शी जिनपिंग को गाली दें. अगर प्रधानमंत्री तीनों का अपमान करेंगे, तो राहुल गांधी की आत्मा को शांति मिलेगी. जब रूस, अमेरिका और चीन मिलकर भारत का बॉयकॉट करेंगे या हमला भी करेंगे, तो उन्हें खुशी होगी क्योंकि जॉर्ज सोरोस का भारत को कमजोर करने का एजेंडा सफल हो जाएगा.’