अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फैंस को बड़ा सरप्राइज, फिल्म ‘AA22xA6’ का टीजर होगा लॉन्च

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अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फैंस को एक बड़ा सरप्राइज मिलेगा। एक्टर की अपकमिंग फिल्म ‘AA22xA6’ का टाइटल सामने आया। इस फिल्म का टीजर एक खास इवेंट में बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान रिवील करेंगे। फिल्म ‘AA22xA6’ के डायरेक्टर एटली शाहरुख खान को फिल्म ‘जवान’ में निर्देशित कर चुके हैं। 

बड़े पैमाने पर लॉन्च होगा फिल्म का टाइटल

वैरायटी इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ‘AA22xA6’ के मेकर्स अल्लू अर्जुन के जन्मदिन (8 अप्रैल) पर ऑफिशियल टाइटल फैंस काे बताएंगे। टाइटल की घोषणा खास अंदाज में हाेगी। टाइटल और टीजर वीडियो में वीएफएक्स का इस्तेमाल होगा। साथ ही दर्शकों को फिल्म की कहानी की झलक भी मिलेगी। 

फिल्म में दीपिका के अलावा ये एक्ट्रेसेस भी आएंगी नजर 

अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण फिल्म ‘AA22xA6’ का हिस्सा हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें मृणाल ठाकुर, रश्मिका मंदाना और जान्हवी कपूर भी नजर आएंगी। डायरेक्टर एटली अलग तरह की कहानी फिल्म में दिखाएंगे। साथ ही इसमें एक्शन भी भरपूर होगा।

30 की उम्र में छोटी-छोटी बातें भूल रहे हैं? कहीं ‘ब्रेन फॉग’ का संकेत तो नहीं

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Why Do I Feel Mentally Slow In My 30s: तीस की उम्र में याददाश्त कम होना आम बात नहीं है.  लेकिन कई लोग एक अलग तरह की परेशानी महसूस कर रहे हैं जैसे कि दिमाग में धुंध-सा छाया रहना, सोचने की रफ्तार धीमी पड़ जाना, मीटिंग में ध्यान न टिक पाना, या बात करते-करते साधारण शब्द भूल जाना. जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, अब बोझ जैसे लगते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह किन कारणों के चलते हो रहा है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है. 

क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने TOI को बताया कि यह डिमेंशिया नहीं, बल्कि ‘ब्रेन फॉग’ है. इसमें मेंटल थकान, उलझन और एकाग्रता में कमी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है.  एक्सपर्ट के अनुसार,  लगातार तनाव, नींद की कमी, पोषण की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और कुछ मामलों में कोविड के बाद की रिकवरी इसकी बड़ी वजहें हैं. यानी दिमाग जवाब नहीं दे रहा, वह संकेत दे रहा है कि उसे संभालने की जरूरत है|

क्या यह कोई बीमारी है?

ब्रेन फॉग कोई आधिकारिक बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का मेल है जिसमें मानसिक सुस्ती, छोटी-छोटी बातें भूलना, मल्टीटास्किंग में दिक्कत और दोपहर तक थकावट शामिल होती है. दिमाग शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इस्तेमाल करता है. जब नींद अधूरी हो, तनाव ज्यादा हो या पोषण कम मिले, तो सबसे पहले सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है. ब्रेन बंद नहीं होता, बस लो पावर मोड में चला जाता है|

क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?

तीस की उम्र बॉयोलॉजिकल रूप से मेंटल क्षमता का अच्छा दौर माना जाता है, लेकिन लाइफस्टाइल बदल चुकी है. काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश, सोशल मीडिया की तुलना और लगातार डिजिटल एक्सपोजर तनाव बढ़ाते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन बताते हैं कि लंबी कार्य अवधि और कम नींद ध्यान और वर्किंग मेमोरी को कमजोर करती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एक तिहाई एडल्ट पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जबकि नींद के दौरान ही दिमाग खुद को रिपेयर करता है|

आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पोषक तत्वों की कमी भी अहम कारण हो सकती है. विटामिन B12, विटामिन D3 और आयरन की कमी से एकाग्रता और एनर्जी घटती है. इसके साथ में थकान, झुनझुनी, बाल झड़ना या पीली त्वचा जैसे संकेत मिलें तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. नींद, नियमित व्यायाम और पानी की पर्याप्त मात्रा, ये तीन चीजें अक्सर नजरअंदाज होती हैं. रोज 30 मिनट हल्का-फुल्का एक्सराइज ब्लड फ्लो बढ़ाता है और ध्यान सुधारता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी फोकस बिगाड़ सकता है. संतुलित आहार और स्क्रीन से दूरी भी मददगार है. अगर भूलने की समस्या रोजमर्रा के काम या नौकरी को प्रभावित करे, या अचानक भ्रम, तेज सिरदर्द, बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें|
 

Gujarat Legislative Assembly में घमासान, Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच तीखी नोकझोंक

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अहमदाबाद| गुजरात विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। खास तौर पर मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जीतू वाघाणी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शैलेष परमार के बीच हुई तीखी बहस से सदन का माहौल काफी गरमा गया। 
चर्चा की शुरुआत में जीतू वाघाणी ने आक्रामक अंदाज में कहा कि भाजपा पहले ही सात विधानसभा सीटें जीत चुकी है और आने वाली आठवीं सीट भी भाजपा के खाते में ही जाएगी। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है। हालांकि विवाद उस समय बढ़ गया जब वाघाणी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर व्यक्तिगत टिप्पणी करनी शुरू कर दी। सदन में बोलते हुए उन्होंने कई बार सोनिया गांधी का नाम लेते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता “इम्पोर्ट होकर आए हैं”, जबकि देश को नरेंद्र मोदी जैसे स्वदेशी नेता की जरूरत है।
वाघाणी द्वारा सोनिया गांधी को “इम्पोर्टेड नेता” कहने पर विपक्षी बेंचों पर बैठे कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में शोरगुल शुरू हो गया। वाघाणी के इन तीखे बयानों के जवाब में कांग्रेस विधायक शैलेष परमार ने मोर्चा संभालते हुए उन्हें कड़ी चेतावनी दी। परमार ने कहा, “आप अपनी सीमा में रहें। यदि आप मर्यादा पार करेंगे तो मुझे पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि यदि पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया गया तो पूरी टिप्पणी सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होगी, जिससे भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
मांगों पर चर्चा के दौरान जब शैलेष परमार ने इस तरह का कड़ा रुख अपनाया तो कुछ देर के लिए सदन में सन्नाटा छा गया। परमार ने स्पष्ट कहा कि बार-बार सोनिया गांधी और विदेशी मूल का मुद्दा उठाना सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। इस दौरान दोनों पक्षों के विधायकों के बीच जोरदार नारेबाजी और तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे विधानसभा का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

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News Desk

जसप्रीत बुमराह की घातक स्लोअर गेंद का राज क्या है? पाक मूल के पेसर ने किया बड़ा दावा

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यूएई के तेज गेंदबाज जाहूर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि भारतीय टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की घातक स्लोअर गेंद की तकनीक को बेहतर बनाने में उनका योगदान रहा है।जाहूर खान के मुताबिक यह घटना साल 2020 में हुई, जब कोविड-19 के कारण आईपीएल का आयोजन यूएई में किया गया था। उस दौरान वह मुंबई इंडियंस के लिए नेट बॉलर के रूप में टीम से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि बुमराह पहले भी स्लोअर गेंद डालते थे, लेकिन उनकी तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने कुछ सुझाव दिए थे।

अबू धाबी मैच के बाद शुरू हुई बातचीत

जाहूर खान ने उस समय की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अबू धाबी में खेले गए एक मुकाबले में बुमराह, ट्रेंट बोल्ट और नाथन कूल्टर-नाइल ने काफी रन खर्च कर दिए थे। उन्होंने कहा, ‘एक कहानी सुनाता हूं। बुमराह पहले भी स्लोअर गेंद डालते थे, लेकिन सामान्य एक्शन से। अबू धाबी के एक मैच में उन्होंने, ट्रेंट बोल्ट और नाथन कूल्टर-नाइल ने काफी रन दे दिए थे। उस समय सितंबर में यूएई में तापमान करीब 50 डिग्री होता है और इतनी गर्मी में गेंद पकड़ना भी मुश्किल हो जाता है।’

मुंबई इंडियंस के साथ अभ्यास सत्र में बुलाया गया

जाहूर ने बताया कि इसके बाद उन्हें मुंबई इंडियंस के साथ अभ्यास सत्र में बुलाया गया और उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी का ध्यान खींचा। जाहूर ने वीडियो में कहा, ‘मुंबई इंडियंस ने मुझे बुलाया। मैंने छह दिन क्वारंटीन किया और सातवें दिन प्रैक्टिस के लिए गया। उस रात मैं टीम के साथ था। जहीर खान और रॉबिन सिंह मुझे जानते थे, क्योंकि मैंने टी10 लीग में एक मेडन ओवर फेंका था। मैंने पहली गेंद यॉर्कर डाली और अगली पांच गेंदें स्लोअर थीं। हम सब साथ बैठे हुए थे, बुमराह आकर टेबल के सामने बैठ गए, रोहित शर्मा भी वहीं बैठ गए और मैं भी वहीं बैठा था, बस सब देख रहा था।’

मुंबई इंडियंस मैनेजमेंट को पहले से पता थी खासियत

जाहूर खान ने बताया कि मुंबई इंडियंस का टीम मैनेजमेंट उनकी स्लोअर गेंदों के बारे में पहले से जानता था। टी10 लीग में उनके प्रदर्शन की वजह से टीम के कई सदस्य उनकी गेंदबाजी से परिचित थे। उन्होंने याद किया कि इसी दौरान उनकी भारतीय स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह के साथ स्लोअर गेंद की तकनीक को लेकर लंबी बातचीत हुई। इसके बाद दोनों ने नेट्स में साथ गेंदबाजी भी की। जाहूर के मुताबिक, उन्होंने बुमराह से कहा, ‘वही एक्शन और वही ग्रिप रखकर स्लोअर गेंद डाली जाती है। उन्होंने पूछा कि यह कैसे संभव है? मैंने कहा कि प्रैक्टिस में बताऊंगा। उन्होंने कहा कि ठीक है, अगली प्रैक्टिस में अपनी ग्रिप जरूर दिखाना।’

नेट्स में दिखाई स्लोअर गेंद की तकनीक

जाहूर ने बताया कि जब अगला अभ्यास सत्र शुरू हुआ तो उन्होंने नेट्स में अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। उस समय मुंबई इंडियंस के गेंदबाजी कोच शेन बॉन्ड और मुख्य कोच महेला जयवर्धने भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘जब प्रैक्टिस शुरू हुई तो मैं गेंदबाजी कर रहा था। उस समय शेन बॉन्ड गेंदबाजी कोच थे और महेला जयवर्धने नेट्स के पीछे खड़े थे। मैंने एक स्लोअर बाउंसर डाली, जिस पर बल्लेबाज चकमा खा गया। तब शेन बॉन्ड ने मुझसे पूछा कि तुम्हारी ग्रिप क्या है? क्या तुम ऑफ-कटर डालते हो? मैंने कहा नहीं, यह उसी ग्रिप से डाली गई गेंद है।’

कोच शेन बॉन्ड और जयवर्धने भी हुए हैरान

जाहूर के मुताबिक, शेन बॉन्ड ने जयवर्धने से कहा कि यह क्रिकेट में नई चीज है, देखो कैसे यह एक ही एक्शन और आर्म स्पीड में स्लोअर गेंद डाल रहा है। जाहूर का कहना है कि उनकी इस तकनीक ने टीम के कोचिंग स्टाफ को भी प्रभावित किया था। जाहूर खान ने आगे बताया कि जब उनसे ग्रिप दिखाने को कहा गया तो उन्होंने नेट्स में वही तकनीक दोहराकर दिखाई। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मुझसे कहा कि दिखाओ कैसे करते हो। मैंने ऐसे ही गेंद फेंककर दिखाई और फिर दो-तीन स्लोअर गेंदें डालीं। इसके बाद उन्होंने जयवर्धने से कहा कि यह क्रिकेट में नई चीज है। उन्होंने कहा- देखो यह कितनी शानदार स्लोअर गेंद डालता है, वही एक्शन और वही आर्म स्पीड रखते हुए।’

बुमराह ने खुद पूछा था स्लोअर गेंद का राज

जाहूर के मुताबिक, इसके एक-दो दिन बाद उनकी नेट्स में जसप्रीत बुमराह के साथ गेंदबाजी हुई। उसी दौरान बुमराह ने उनसे स्लोअर गेंद की ग्रिप के बारे में पूछा। उन्होंने कहा, ‘बुमराह ने मुझसे कहा- पाजी, आपकी ग्रिप क्या है, मुझे दिखाओ।’ मैंने उन्हें वही ग्रिप दिखा दी और बताया कि गेंद उसी एक्शन में आनी चाहिए। फिर उन्होंने गेंद डाली और कहा, यह तो नेक्स्ट लेवल चीज है।’ जाहूर ने अंत में कहा कि उन्हें यह बात काफी पसंद आई कि इतने बड़े स्टार गेंदबाज होने के बावजूद बुमराह नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने कहा, ‘मैं इस समय यूएई के लिए खेल रहा हूं और वह विश्व स्तरीय गेंदबाज हैं। मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी कि इतने बड़े स्टार होने के बावजूद वह मुझसे पूछ रहे थे।’हालांकि जाहूर खान के इस दावे पर आधिकारिक तौर पर जसप्रीत बुमराह और मुंबई इंडियंस की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट फैंस के बीच इस दावे को लेकर चर्चा जरूर तेज हो गई है।
 

लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग तेज, 12 मार्च को विरोध मार्च का आह्वान

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श्रीनगर: लद्दाख के संगठनों ने राज्य का दर्जा और अन्य मांगों को लेकर 12 मार्च को शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आह्वान किया है. राजनीतिक और धार्मिक निकायों के समूह, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने लद्दाख के लोगों से शांतिपूर्ण मार्च में भाग लेने का आग्रह किया है. इसका उद्देश्य अपनी मांगों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति के साथ बातचीत के एक और दौर के लिए दबाव बनाना है.एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भारतीय संविधान में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा पाने के लिए अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

गृह मंत्रालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के सदस्य और लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि विरोध मार्च का मकसद केंद्र सरकार पर अपनी मांगों पर बातचीत करने और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वानचुक की रिहाई के लिए दबाव डालना है. दो अन्य एक्टिविस्ट भी हिरासत में हैं.

दोरजे ने ईटीवी भारत से कहा, “बातचीत में देरी हो रही है. सरकार गंभीर नहीं लग रही है. पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों के बाद बनाया गया न्यायिक आयोग धीमा रहा है, जिससे युवा अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं. हम उनके केस वापस लेने की मांग कर रहे हैं.”

जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक के नेतृत्व में 14 दिन की भूख हड़ताल के बाद 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में विरोध प्रदर्शन हुए, जो पुलिस के साथ हिंसक झड़पों में बदल गया. इसमें चार लोग मारे गए और लगभग 90 घायल हो गए. तब से वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया है. वह राजस्थान के जोधपुर जेल में कैद हैं. हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है.

दोरजे ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व वाली लद्दाख पर हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने फरवरी की मीटिंग में इन मांगों को ‘उपयुक्त’ नहीं पाया. उन्होंने कहा, “बातचीत बेनतीजा रही, क्योंकि वे हमारी मांगों को लेकर गंभीर नहीं थे. उनके अनुरोध पर हमने अपनी मांगों को सही ठहराते हुए 26 पन्नों का मसौदा प्रस्ताव दाखिल किया. लेकिन उन्होंने बैठक में हमसे कहा कि मांगें संभव नहीं हैं. हमसे प्रस्ताव मांगने का क्या उद्देश्य था?”

पिछले साल अक्टूबर में लद्दाख के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के साथ तब तक बातचीत करने से मना कर दिया था, जब तक कि हत्याओं की न्यायिक जांच समेत उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं. तब HPC के साथ बातचीत रुक गई थी.

विरोध मार्च के शुरुआती प्लान के मुताबिक, लेह चौक से एक जुलूस शुरू होगा और पोलोग्राउंड पर इकट्ठा होगा. दोरजे ने कहा कि इजाजत मिलने के बाद लेह एपेक्स बॉडी के नेता दिन में मार्च को संबोधित करेंगे.

लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि अधिकारियों ने विरोध मार्च के लिए इजाजत दी है या नहीं, क्योंकि लेह के उपायुक्त (DC) से संपर्क करने की बार-बार कोशिश करने पर भी बात नहीं हो पाई.

दूसरी ओर, न्यायिक जांच आयोग के संयुक्त सचिव रिगजिन स्पैलगन (Rigzin Spalgon) ने तीन सदस्यों वाले आयोग की प्रगति रिपोर्ट दी. उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच सही, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है और जिन लोगों ने हलफनामा जमा किया है, उन पर आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के हिसाब से ध्यान दिया जाएगा. उनके अनुसार, आयोग को आम जनता के साथ-साथ प्रशासन के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों से बड़ी संख्या में हलफनामे मिले हैं और उनकी जांच की गई है.

स्पैलगन ने आगे कहा, “दिसंबर 2025 तक प्रशासन की तरफ से कुल 22 गवाहों से पूछताछ की गई थी. मार्च 2026 में जांच फिर से शुरू हुई और अब तक 18 प्रशासनिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है. इसके अलावा 45 पब्लिक एफिडेविट जमा किए गए हैं.”

उन्होंने कहा कि आयोग अभी प्रशासन के जमा किए गए एफिडेविट की जांच कर रहा है और सरकारी और नागरिक गवाहों से पूछताछ करेगा. स्पैलगन ने कहा, “उनके बयान चल रही न्यायिक कार्यवाही के हिस्से के रूप में दर्ज किए जाएंगे.”

प्रियंका चोपड़ा ने बेटी मालती को पब्लिक से दूर रखने की वजह बताई, बोलीं– ‘अजनबी ने स्कूल से घर तक पीछा किया’

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प्रियंका और निक जोनस ने 2018 में शादी की थी। 2022 में सरोगेसी के जरिए उनकी बेटी मालती का जन्म हुआ। प्रियंका चोपड़ा अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस को सार्वजनिक जीवन से दूर रखना चाहती हैं। उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस फैसले का कारण बताया। प्रियंका और उनके पति निक जोनस अपनी बेटी की पर्सनल लाइफ और सुरक्षा को बहुत महत्व देते हैं।

क्यों मालती को पब्लिक से दूर रखती हैं प्रियंका

प्रियंका ने ‘नॉट स्किनी बट नॉट फैट’ पॉडकास्ट में बताया कि जैसे-जैसे मालती बड़ी हो रही है, वह उसे ज्यादा छिपाकर रखने की कोशिश कर रहे हैं। वह चाहती हैं कि मालती आम जीवन जी सके, बिना किसी डर के। वह नहीं चाहते कि लोग उसकी तस्वीरें या वीडियो बिना इजाजत के बनाएं।

प्रियंका ने बताया एक किस्सा

इस दौरान प्रियंका ने एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक अजनबी व्यक्ति स्कूल से घर लौटते समय मालती का पीछा कर रहा था और उसका वीडियो बना रहा था। इसी वजह से जब भी मालती बाहर जाती हैं सुरक्षा गार्ड उनके साथ रहते हैं। प्रियंका कहती हैं कि उन्होंने खुद सार्वजनिक जीवन चुना है, लेकिन बेटी को यह फैसला खुद लेने का हक मिलना चाहिए। लोगों की एक्साइटमेंट अच्छी है, लेकिन सुरक्षा सबसे पहले आती है।

‘वाराणसी’ में नजर आएंगी प्रियंका

हाल ही में उनकी फिल्म ‘द ब्लफ’ रिलीज हुई, जो समुद्री डाकुओं पर आधारित एक्शन फिल्म है। अब प्रियंका जल्द ही एसएस राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ में नजर आएंगी। इस फिल्म में महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन भी हैं। यह एक टाइम-ट्रैवल एडवेंचर फिल्म है। इसका बजट लगभग 1300 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। यह फिल्म अप्रैल 2027 में रिलीज होगी। इसके अलावा प्रियंका वेब सीरीज ‘सिटाडेल’ के दूसरे सीजन में भी नजर आएंगी।

अब तक इन कलाकारों ने जीती ‘द गोल्डन बॉय’ ट्रॉफी

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फिल्म जगत के सबसे प्रमुख ऑस्कर अवॉर्ड के 98वें संस्करण का आयोजन 15 मार्च को होगा। लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में आयोजित होने वाले इस अवॉर्ड समारोह में भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा भी प्रेजेंटर के तौर पर शामिल होंगी। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत में इस अवॉर्ड्स समारोह को 16 मार्च की सुबह लगभग 4:30 बजे से देखा जा सकेगा। जानते हैं कि ऑस्कर में अब तक कैसा रहा है भारत का इतिहास और किन भारतीय कलाकारों ने जीता है अब तक ये अवॉर्ड?

भारत की किसी फिल्म को नहीं मिला ऑस्कर

ऑस्कर अवॉर्ड को अकादमी अवॉर्ड भी कहते हैं। इन्हें साल 1927 में शुरू किया गया था, लेकिन पहला अवॉर्ड 1929 में आयोजित हुआ था। 98 साल के इतिहास में भारत की तरफ से 50 से ज्यादा फिल्में ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भेजी गईं, लेकिन एक भी भारतीय फिल्म को ये अवॉर्ड नहीं मिल सका।साल 1957 में पहली बार भारत से महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ को ऑस्कर भेजा गया था। लेकिन फिल्म सिर्फ एक वोट से हॉलीवुड फिल्म ‘नाइट्स ऑफ कैबिरिया’ से पीछे रह गई और अवॉर्ड जीतने से चूक गई।इसके बाद 1989 में ‘सलाम बॉम्बे’, 2003 में ‘लगान’ और 2004 में मराठी फिल्म ‘श्वास’ को फाइनल नॉमिनेशन मिला, लेकिन तीनों ही फिल्में अवॉर्ड नहीं जीत सकीं।

सिर्फ 9 भारतीयों को मिला ऑस्कर

भारत की तरफ से 13 कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्हें अब तक ऑस्कर में नॉमिनेशन मिला। इनमें से सिर्फ नौ भारतीय कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें ऑस्कर अवॉर्ड्स मिला है। इनमें भानू अथैया से लेकर, सत्यजीत रे, एआर रहमान, गुलजार, रेसुल पूकुट्टी, एमएम कीरवानी, चंद्रबोस, गुनीत मोंगा और कार्तिकी गोंजाल्विस के नाम शामिल हैं। 

प्रियंका चोपड़ा बनेंगी प्रेजेंटर

भारतीय फैंस के लिए इस बार का ऑस्कर और भी खास है। इस बार ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा इस समारोह में प्रेजेंटर के तौर पर नजर आएंगी। वह मंच पर विजेताओं को अवॉर्ड देती दिखाई देंगी। उनके साथ रॉबर्ट डाउनी जूनियर और ऐन हैथवे जैसे बड़े हॉलीवुड सितारे भी मंच पर नजर आएंगे, जिससे इस साल का शो और भी ग्लैमरस होने की उम्मीद है।

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदार

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नई दिल्ली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (स्रिपी) ने ग्लोबल आर्म्स सेल्स को लेकर ताजा रिपोर्ट दी है। इसमें कहा गया है कि भारत अभी भी अपनी 48 प्रतिशत रक्षा साम्रगी की सप्लाई रूस से कर रहा है लेकिन रूस पर भारत की निर्भरता कम हो रही है। वहीं भारत अब अपने 24 प्रतिशत हथियार फ्रांस से खरीद रहा है। भारत अब दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीददार है और यूक्रेन पहले नंबर पर पहुंच गया है। स्रिपी रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस से भारत का मोहभंग हो चुका है और नई दिल्ली तेजी से पश्चिमी देशों की तरफ मुड़ गया है।
फ्रांस जो 2021-2025 में बड़े हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है उसका सबसे बड़ा खरीददार अब भारत बन चुका है। इसी टाइम फ्रेम में रूस का सबसे बड़ा खरीददार अभी भी भारत (48प्रतिशत) बना हुआ है। भारत के बाद चीन (13प्रतिशत) सबसे ज्यादा रूसी हथियार खरीद रहा है जबकि बेलारूस (13प्रतिशत) रूसी हथियार खरीदने के मामले में तीसरे नंबर पर है।
स्रिपी रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के कुल आयात का 48 प्रतिशत हिस्सा अब भी रूस से आता है, लेकिन यह पहले की तुलना में कम हुआ है। भारत अब फ्रांस (24प्रतिशत) और अन्य पश्चिमी देशों की ओर देख रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान अपने हथियारों के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान 80 प्रतिशत से ज्यादा हथियार सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर हो चुका है। जो भारत के खिलाफ एक टू फ्रंट वॉर की स्थिति बनाता है। वहीं, यूक्रेन अब दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है (9.7प्रतिशत), जबकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक (42 प्रतिशत शेयर) बना हुआ है।
स्रिपी रिपोर्ट से पता चला है कि 2016-20 के बीच यूक्रेन दुनिया के कुल हथियार आयात का सिर्फ 0.1 प्रतिशत हिस्सा था। लेकिन अब (2021-25) वह 9.7 प्रतिशत के साथ दुनिया का नंबर 1 हथियार खरीदने वाला देश बन गया है। यह दिखाता है कि युद्ध ने कैसे एक देश को हथियारों की सबसे बड़ी मंडी बना दिया। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बना हुआ है। दुनिया के कुल हथियारों का 42 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ अमेरिका बेचता है। पिछले 5 सालों में अमेरिका का हथियारों का निर्यात 27 प्रतिशत बढ़ गया है। बीतें 5 सालों में यूरोप में हथियारों का आयात 210 प्रतिशत बढ़ा है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य हलचल है। रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोपीय देशों का डर बढ़ गया है। पोलैंड, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देश अब अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च कर रहे हैं। अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन यूक्रेन के मुख्य सप्लायर अभी भी बने हुए हैं जिन्होंने उसे एयर डिफेंस सिस्टम, टैंक और मिसाइलें बेची हैं।

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युवा विधायकों ने बनाई टीम निशांत, संभाली कमान

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पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिलते दिख रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के युवा विधायकों ने अब स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को राज्य की कमान सौंपने की मांग बुलंद कर दी है। हाल ही में विधायक रूहेल रंजन के आवास पर पार्टी के 14 युवा विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें खुद को टीम निशांत बताते हुए इन नेताओं ने घोषणा की कि वे भविष्य में निशांत कुमार के नेतृत्व में ही काम करना चाहते हैं।
बैठक में शामिल विधायकों ने दावा किया कि वर्ष 2030 का विधानसभा चुनाव निशांत कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाना चाहिए। विधायकों का तर्क है कि 2025 के चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर भरोसा जताते हुए एनडीए को भारी बहुमत दिया है, लेकिन अब समय आ गया है कि विकास की इस विरासत को निशांत कुमार आगे बढ़ाएं। विधायक रूहेल रंजन ने खुलकर कहा कि निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए, जबकि शुभानंद मुकेश ने उन्हें नीतीश कुमार का वर्जन टू करार दिया। वहीं, समृद्ध वर्मा और चेतन आनंद जैसे युवा नेताओं का मानना है कि निशांत ही बिहार की वर्तमान जरूरतों और उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। विधायक नचिकेता और विशाल ने खुलासा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष अपनी यह मांग मजबूती से रखी है। उन्होंने निशांत कुमार से भी सीधा संवाद कर उन्हें बताया है कि अब राजनीति में आने या न आने का विकल्प उनके पास नहीं बचा है, बल्कि यह बिहार की जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी बन चुकी है। विधायकों के अनुसार, बिहार की युवा पीढ़ी निशांत में अपना भविष्य देख रही है। इन चर्चाओं के बीच, निशांत कुमार ने खुद भी सक्रिय राजनीति की ओर कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। सोमवार को पटना के कंकड़बाग स्थित एक पार्क में अपनी माता स्वर्गीय मंजू सिन्हा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे निशांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे जल्द ही पूरे बिहार के दौरे पर निकलेंगे। उन्होंने बताया कि वे राज्य के सभी 38 जिलों का भ्रमण कर आम लोगों से सीधा संवाद करना चाहते हैं ताकि जमीनी हकीकत और जनता की समस्याओं को करीब से समझ सकें। निशांत कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें अपनी मां की बहुत याद आती है और आज के हालातों को देखकर वे बेहद प्रसन्न होतीं। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे युवा विधायकों द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर सवाल पूछा, तो वे कुछ भी बोलने के बजाय केवल मुस्कुराकर रह गए। राजनीतिक गलियारों में निशांत कुमार के चंपारण से अपनी यात्रा शुरू करने की संभावना जताई जा रही है, जिसे जेडीयू के भविष्य के संगठनात्मक विस्तार और नेतृत्व परिवर्तन के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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News Desk

Dr. Sanjeev Sinha Featured in the London Book of World Records, a Landmark Achievement in the Field of Education

Giridih (Jharkhand).
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