होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए ही खुला – हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया

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Loksabha Session: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया. इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत (Voice Vote) से खारिज कर दिया गया. पिछले चार दशकों में यह पहली बार था जब किसी स्पीकर को पद से हटाने के लिए ऐसा प्रस्ताव लाया गया. गुरुवार यानी कि 12 मार्च को ओम बिरला फिर से सदन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए. हालांकि, सदन की शुरु होते ही हंगामे की वजह से दिन के बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

Parliament Session Update:-

  • ‘भारत को इजाज़त की ज़रूरत क्यों है?’ राहुल का केंद्र पर हमला
    लोकसभा के LoP ने आगे कहा कि, “हर देश की नींव उसकी एनर्जी सिक्योरिटी होती है; अलग-अलग तेल सप्लायर के साथ हमारे रिश्ते तय करने के अधिकार की अदला-बदली की गई है.”
  • राहुल गांधी ने लोकसभा में ईरान विवाद का मुद्दा उठाया
    राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जंग चल रही है; इस जंग के दूरगामी नतीजे होंगे. राहुल ने मिडिल ईस्ट संकट पर बात करते हुए होर्मुज स्ट्रेट का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट, वह सेंट्रल रास्ता जहां से दुनिया का 20% तेल बहता है, बंद है; इसके बहुत बुरे नतीजे होंगे.”
  • एलपीजी के दाम पर विरोध
    संसद में लोकसभा के अंदर विपक्षी सांसदों की तरफ़ से, जहां वो बैठते हैं वहां से बर्तन बजाने की आवाज़ सुनाई दी है. विपक्षी सांसद बढ़े हुए एलपीजी के दाम को लेकर लोकसभा सदन में विरोध कर रहे थे. सदन के भीतर प्लेट बजाने की आवाज़ सुनाई दी दोपहर 2.25 बजे. उस वक्त स्पीकर चेयर पर बैठी संध्या राय ने विपक्षी सांसदों को टोकते हुए कहा कि ये ठीक नहीं.
  • चुप्पी डिप्लोमेसी नहीं है: वेस्ट एशिया विवाद पर कांग्रेस के परम्बिल
    केरल के INC के शफील परम्बिल ने कहा कि ट्रेजरी बेंच ने आज सुबह तक सप्लीमेंट्री ग्रांट की डिटेल्ड मांगों को सर्कुलेट नहीं किया, जो प्रोसीजर के नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा, ‘प्रोसीजर के नियम सिर्फ विपक्ष पर लागू नहीं होते. हमारी करेंसी एशिया में सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करेंसी है.’ उन्होंने विवाद की वजह से वेस्ट एशिया में फंसे भारतीयों की मदद करने में सरकार के शामिल होने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘इस संकट में, चुप्पी डिप्लोमेसी नहीं; यह पूरी तरह सरेंडर है. सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में बिज़ी हैं.’
  • ईरान संकट के गहराते साये के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है, जिसके मद्देनजर अब चार मंत्रालयों की महत्वपूर्ण जॉइंट ब्रीफिंग शाम 5:30 बजे आयोजित की जाएगी. इस पूरे संकट पर गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गठित एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय मंत्री समूह पैनी नजर बनाए हुए है, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी शामिल हैं. यह पावरफुल समूह अब तक कई दौर की रणनीतिक बैठकें कर चुका है. आने वाले समय में ये तीनों मंत्रालय अन्य संबंधित विभागों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश की सुरक्षा एवं ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए समन्वय स्थापित करेंगे.
  • लंच के बाद पार्लियामेंट फिर से शुरू हुई. ब्रेक के बाद लोकसभा और राज्यसभा फिर से शुरू हुईं. राज्यसभा में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSCs), टूरिज्म और आर्कियोलॉजी, और कम्युनिकेशन कनेक्टिविटी पर चर्चा होनी है. लोकसभा में वोटिंग से पहले ग्रांट की सप्लीमेंट्री डिमांड पर चर्चा हुई.
  • सदन का नेता हो या विपक्ष का नेता या कोई भी मंत्री, नियम से चलना होगा- ओम बिरला
    लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि चाहे सदन का नेता हो या विपक्ष का नेता या कोई भी मंत्री, सभी को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सदन में बोलने का अधिकार है. कुछ लोगों का मानना ​​था कि विपक्ष का नेता हमेशा बाकियों से ऊपर रहा है और किसी भी विषय पर बोल सकता है; किसी को यह विशेष अधिकार नहीं है.
  • ‘किसी भी माइक को चालू या बंद करने के लिए चेयर के पास कोई बटन नहीं है’: स्पीकर ओम बिरला
    स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि मेंबर के माइक को अपनी मर्ज़ी से कंट्रोल करने और अपोज़िशन के माइक बंद करने के आरोपों पर बात करते हुए कहा कि चेयर के पास माइक को कंट्रोल करने के लिए कोई बटन नहीं है. उन्होंने कहा कि मेंबर तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी हो. अपोज़िशन की महिला MPs के विरोध के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला संसद की गरिमा की रक्षा के लिए किया, जब MPs प्लेकार्ड लेकर ट्रेजरी बेंच पर चढ़ गए.
  • स्पीकर ओम बिरला ने कल अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बात की.  उन्होंने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि वह पार्लियामेंट में संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे. इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है. बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी. उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े.
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News Desk

बीजेपी के बटुए से निकले 146.71 करोड़, सबसे ज्यादा 89 विधायक जीते

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नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जीतने के लिए बीजेपी ने सभी पार्टियों से ज्यादा खर्च किया है। बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं कांग्रेस ने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।  बीजेपी ने जमा पूंजी का 2 फीसदी खर्च किया, जबकि कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी पैसा खर्च किया है। बीजेपी ने बीते बिहार विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार ज्यादा पैसा खर्च किया। 2020 में बीजेपी ने करीब 54 करोड़ खर्च किए थे, लेकिन इस बार 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 
बिहार में बीजेपी को पैसा खर्च करने का फल भी मिला। राज्य में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना में भले ही पैसा कम खर्च किया हो, लेकिन अपनी जमा पूंजी का बहुत बड़ा हिस्सा बिहार में खर्च किया। 
चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अपने खर्च की हिसाब देती हैं। इसके तहत बिहार चुनाव में खर्च किए पैसे का लेखा-जोखा सियासी दलों ने चुनाव आयोग को दिया हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने बिहार चुनाव खर्च की रिपोर्ट 10 फरवरी को चुनाव आयोग को सौंपी है, जिसमें पार्टी ने बताया है कि उसने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, तब सीपीआई (एम) ने महज 26.75 लाख रुपये खर्च किए हैं। बहुजन समाज पार्टी ने बिहार चुनाव में सिर्फ 9.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आरजेडी और जेडीयू सहित दूसरे दलों के खर्च का लेखा-जोखा अभी चुनाव आयोग को उपलब्ध नहीं कराया हैं। 
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के विज्ञापन पर खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा गूगल इंडिया लिमिटेड पर किया, जिसे पार्टी ने 14.27 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर दिया है। कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च किए गए 35 करोड़ रुपये में से 12.83 करोड़ रुपये स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर दिए। इसके अलावा कांग्रेस ने सोशल मीडिया कैंपने के लिए 11.24 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा पर भी खर्च किए। 
रिपोर्ट से पता चलता है कि बीते साल नवंबर में बिहार चुनाव खत्म होने पर बीजेपी का क्लोजिंग बैलेंस 7,088.58 करोड़ रुपये था। इसके मुताबिक चुनाव से पूर्व बीजेपी के पास 7235.26 करोड़ रुपये था, जिसमें से 146.71 करोड़ खर्च किया। इसके बाद 7,088.58 करोड़ रुपये बचे थे। इस तरह बीजेपी ने अपनी जमापूंजी का करीब 2 फीसदी पैसा ही बिहार चुनाव में खर्च किया है। 
वहीं, कांग्रेस के पास बिहार चुनाव के बाद कुल 89.13 करोड़ रुपये बचे थे। कांग्रेस ने चुनाव में 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस लिहाज से कांग्रेस के चुनाव से पहले 124.2 करोड़ रुपये था, जिसमें से 35.07 करोड़ रुपये खर्च करने का मतलब साफ है कि पार्टी ने अपनी जमापूंजी का 28.23 फीसदी पैसा बिहार चुनाव में खर्च किया।
बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 89 विधायक जीतने में सफल रही, जबकि कांग्रेस को महज 6 सीटें मिली हैं। बिहार चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के द्वारा खर्च किए गए पैसे को विधायकों की संख्या के लिहाज से बीजेपी को एक विधायक 1 करोड़ 64 लाख का पड़ा। वहीं कांग्रेस के सिर्फ 6 विधायक जीते हैं, इसके बाद कांग्रेस को एक विधायक 5 करोड़ 83 लाख का पड़ा। 

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एमपी में राज्यसभा की एक सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर

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भोपाल।  मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जिन पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते की है, जिस पर फिलहाल दिग्विजय सिंह सांसद हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं।

कांग्रेस में बढ़ी दावेदारी

दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

जीतू पटवारी – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद
कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री
अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री
कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री, विंध्य क्षेत्र का बड़ा चेहरा
सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार – दलित वर्ग के नेता
दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है।

कांग्रेस को क्यों है खतरा

कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि 5–6 विधायक भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है।

विधानसभा के आंकड़े

मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 164 विधायक हैं। यदि भाजपा को एक-दो अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है तो उसके लिए समीकरण और मजबूत हो सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।

पहले भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग

2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले थे। अनुमान था कि उन्हें करीब 103 वोट मिलेंगे, लेकिन उन्हें केवल 79 वोट ही मिले। माना गया कि लगभग 19–20 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था।

विपक्ष और भाजपा के बयान

इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा तोड़फोड़ की राजनीति करती है, लेकिन कांग्रेस के विधायक मजबूत हैं और राज्यसभा सीट कांग्रेस की ही रहेगी। वहीं भाजपा विधायक अभिलाष पांडे का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त विधायक हैं और पार्टी अपने संगठन और काम पर भरोसा करती है।

जीत का गणित

इस बार राज्यसभा चुनाव 230 विधायकों के गणित पर होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का समीकरण बदल सकती है।

निष्कर्ष:

मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई दावेदार हैं, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।

हार्दिक पांड्या पर राष्ट्रीय ध्वज के अनादर का आरोप

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भारत की टी20 वर्ल्ड कप जीत के जश्न के बाद स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या एक नए विवाद में घिर गए हैं। उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत पुणे के वकील वाजिद खान बिडकर ने दी है, जिन्होंने मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पुलिस को लिखित आवेदन सौंपकर क्रिकेटर के खिलाफ जांच और कार्रवाई की अपील की है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह शिकायत बंगलूरू के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है, वहीं न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि यह शिकायत पुणे के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है। इस मामले में वाजिद ने पुलिस से हार्दिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर शिकायत

शिकायत के मुताबिक, भारत की जीत के बाद खिलाड़ियों के जश्न के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। इन वीडियो में पांड्या को कंधे पर तिरंगा लपेटकर मैदान पर दौड़ते और डांस करते हुए देखा जा सकता है। वकील का आरोप है कि जश्न के दौरान एक वीडियो में पांड्या अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मंच पर लेटे हुए दिखाई देते हैं, जबकि उस समय भी उनके कंधे पर तिरंगा लिपटा हुआ था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह का व्यवहार राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के खिलाफ है।

वकील ने कानून का हवाला दिया

वाजिद खान बिडकर ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और इसके लिए कानून भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े कानून का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘आपने टी20 वर्ल्ड कप देखा होगा। हार्दिक पांड्या अपनी जीत का जश्न मनाते हुए अपनी गर्लफ्रेंड के साथ डांस कर रहे थे। उनके पीछे राष्ट्रीय ध्वज बंधा हुआ था। 1971 के राष्ट्रीय ध्वज कानून की धारा दो के अनुसार हमें राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। लेकिन हार्दिक पांड्या जीत के जश्न में इतने खो गए थे कि वे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ लेटे हुए थे और उस समय भी राष्ट्रीय ध्वज उनके शरीर पर था। मुझे लगता है कि यह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है।’

शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया

वकील ने बताया कि शुरुआत में पुलिस ने कहा कि घटना अहमदाबाद में हुई है, इसलिए वहां शिकायत करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह तर्क दिया कि राष्ट्रीय ध्वज पूरे देश का प्रतीक है और इसकी गरिमा से जुड़ा मामला कहीं भी उठाया जा सकता है।उन्होंने कहा, ‘मैंने शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। जब मैं शिकायत करने गया तो उन्होंने कहा कि घटना यहां नहीं हुई है। तब मैंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज पूरे देश का प्रतीक है, इसलिए यहां भी शिकायत की जा सकती है। उन्होंने मेरी शिकायत स्वीकार कर ली और उसकी कॉपी भी दी है। अब देखते हैं आगे क्या होता है।’

पांड्या ने जीत को बताया व्यक्तिगत वादा पूरा होना

दूसरी ओर हार्दिक पांड्या ने टी20 वर्ल्ड कप जीत को अपने व्यक्तिगत संकल्प की पूर्ति बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और टीम आगे भी ट्रॉफियां जीतना चाहती है। पांड्या ने कहा, ‘2024 में बारबाडोस में मिली जीत के बाद मैंने खुद से वादा किया था कि जिस भी टूर्नामेंट में खेलूंगा, जीतने के लिए खेलूंगा और ट्रॉफी उठाऊंगा। अहमदाबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली यह जीत इस बात का प्रमाण है कि मेरा वह वादा सच हो गया। और यह तो बस शुरुआत है।’

टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन

32 वर्षीय पांड्या ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में नौ विकेट लिए और अहम मौकों पर मैच जिताने वाली गेंदबाजी की। बल्लेबाजी में भी उनका योगदान अहम रहा। कई मैचों में उन्होंने छोटी मगर तेज और प्रभावशाली पारी खेली। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें आईसीसी की टी20 वर्ल्ड कप 2026 टीम ऑफ द टूर्नामेंट में भी जगह मिली।

भारत ने रचा इतिहास

दूसरी ओर भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत कई बड़ी उपलब्धियां हासिल करने में सफल रहा। किसी टीम ने पहली बार अपने घरेलू मैदान पर टी20 वर्ल्ड कप जीता। इसके अलावा यह लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का रिकॉर्ड भी बन गया। भारत अब तीन बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन गई है। इससे पहले भारत ने 2007 में पहला खिताब जीता था और फिर 2024 में दूसरी बार चैंपियन बना था। ऐतिहासिक जीत के बीच अब हार्दिक पांड्या से जुड़ा यह विवाद चर्चा का विषय बन गया है, जिस पर आगे पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति साफ हो सकेगी।

हरदीप पुरी ने लोकसभा में कहा—भारत में गैस-तेल की कोई कमी नहीं

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नई दिल्ली। लोकसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और उसके कारण तेल-गैस आपूर्ति पर पड़ रहे असर को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया के ऊर्जा इतिहास में शायद ही कभी ऐसी स्थिति देखने को मिली हो जैसी अभी पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण बन रही है। यह संकट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए गंभीर माना जा रहा है। मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के लगभग 33 करोड़ परिवारों की रसोई में ईंधन की कोई कमी न हो। उन्होंने साफ किया कि भारत में फिलहाल पेट्रोल, डीजल, गैस या एलपीजी की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

 तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई: हरदीप पुरी 

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली जहाजों की आवाजाही करीब 20 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है। यह दुनिया का एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दूसरे देशों तक पहुंचता है। मंत्री के अनुसार भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल अन्य देशों से भी प्राप्त कर रहा है, इसलिए सप्लाई को लेकर स्थिति फिलहाल सुरक्षित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सीएनजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और एलएनजी के जहाज लगातार देश में पहुंच रहे हैं। गैस सिलेंडर को लेकर जो कमी की अफवाहें फैल रही हैं, वे सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अफवाहों के कारण लोगों में घबराहट बढ़ती है और जरूरत से ज्यादा खरीदारी होने लगती है, जिससे मांग अचानक बढ़ जाती है।

एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि की: पेट्रोलियम मंत्री

मंत्री ने जानकारी दी कि देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, ताकि किसी भी संभावित संकट से निपटा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अभी भी कनाडा, नॉर्वे और रूस जैसे देशों से तेल आयात कर रहा है। साथ ही सरकार ने गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने जैसी स्थिति बन गई है। दर्ज इतिहास में यह पहली बार है जब यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग व्यावसायिक जहाजों के लिए लगभग ठप जैसा हो गया है। इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति होती है।

सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही, जरूरी कदम उठाएंगे

उन्होंने संसद में कहा कि भारत इस संघर्ष का हिस्सा नहीं है, लेकिन वैश्विक बाजार से जुड़े होने के कारण इसके प्रभाव से पूरी तरह बच पाना संभव नहीं है। इसलिए सरकार को बहुत सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े।

संजू सैमसन और चारुलता की रोमांटिक लव स्टोरी

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आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने वाले संजू सैमसन इस समय खूब सुर्खिया बटोर रहे हैं. संजू ने इस टूर्नामेंट में सिर्फ 5 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 80.25 की बेहतरीन औसत और 199.38 की दमदार स्ट्राइक रेट से कुल 321 रन बनाए. इस दौरान सैमसन ने 27 चौके और 24 गगनचुंबी छक्के भी लगाए. संजू की बल्लेबाजी जैसे ही उनकी लव स्टोरी भी कमाल की है. उन्होंने रात के 11 बजे फेसबुक के जरिए चारुलता को मैसेज किया था, जो वर्तमान में उनकी धर्मपत्नी हैं.

संजू की लव स्टोरी रही है काफी दिलचस्प

क्रिकेट के मैदान पर संजू सैमसन ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक खास पहचान बनाई है, चाहे वो भारत के लिए खेले हों या इंडियन प्रीमियर लीग में खेल रहे हों. हालांकि, उनकी निजी जिंदगी, खासकर उनकी प्रेम कहानी भी उतनी ही दिलचस्प रही है. केरल में जन्मे संजू सैमसन ने अपनी पत्नी चारुलता रमेश से कॉलेज के दिनों में तिरुवनंतपुरम के मार इवानियोस कॉलेज में मुलाकात हुई थी.

सैमसन ने रात के 11 बजे किया था मैसेज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चारुलता से संजू सैमसन की पहली बातचीत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर हुई थी. संजू ने उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा था, जिसे बाद में चारुलता ने एक्सेप्ट किया था. सैमसन ने पहला मैसेज 22 अगस्त, 2013 को रात 11 बजे किया था. उन्होंने बातचीत शुरू करने के लिए ‘हाई’ लिखकर भेजा था |

फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ था संजू-चारुलता का रिश्ता

संजू सैमसन और चारुलता रमेश दोनों का रिश्ता फेसबुक के जरिए शुरू हुआ था. फिर दोनों के बीच फेसबुक पर ही बातचीत शुरू हुई, जो जल्द ही गहरी दोस्ती में बदल गई. संजू और चारुलता पांच साल तक रिलेशनशिप में रहे. इसके बाद साल 2018 में उन्होंने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया. दोनों ने 22 दिसंबर 2018 को केरल के कोवलम में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत एक निजी समारोह में शादी की थी |

पैरों से भी मिलते हैं डायबिटीज के संकेत, इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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डायबिटीज की बात आते ही लोगों के मन में सबसे पहले हाई ब्लड शुगर, बार-बार प्यास लगना या बार-बार यूरिन आने जैसे लक्षण आते हैं. लेकिन अक्सर यह नजरअंदाज हो जाता है कि यह बीमारी धीरे-धीरे पैरों में भी अपने संकेत देने लगती है. दरअसल हमारे पैर शरीर का पूरा वजन उठाते हैं और उनकी सेहत काफी हद तक सही ब्लड फ्लो और नसों के सही काम करने पर निर्भर करती है. TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज इन दोनों चीजों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए कई बार इसके शुरुआती संकेत पैरों में दिखाई देने लगते हैं |

 पैरों में झनझनाहट या सुई चुभन

कई लोगों को पैरों में झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होता है. आम तौर पर लोग इसे लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने का परिणाम मान लेते हैं. लेकिन अगर यह एहसास बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे, तो यह नसों को होने वाले नुकसान का संकेत हो सकता है. इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है, जो डायबिटीज से जुड़ी एक आम समस्या है. यह झनझनाहट खासकर रात के समय ज्यादा महसूस हो सकती है |

पिंडलियों में जलन का अनुभव

कुछ लोगों को पिंडलियों में जलन जैसा अनुभव भी होता है. कई बार इसे ज्यादा चलने-फिरने या थकान से जोड़ दिया जाता है, लेकिन डायबिटीज में यह नसों के ठीक से काम न करने का संकेत हो सकता है. कई मरीज बताते हैं कि रात के समय पैरों में तेज जलन महसूस होती है, जैसे किसी तरह की गर्मी या आग जैसी अनुभूति हो रही हो |

पैरों पर बाल का कम होना

पैरों पर अचानक बाल कम होना भी एक संकेत हो सकता है. आमतौर पर लोग इसे उम्र बढ़ने या त्वचा की सामान्य समस्या मान लेते हैं, लेकिन डायबिटीज में खराब ब्लड फ्लो के कारण बालों की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता. इससे पैरों पर बाल धीरे-धीरे कम होने लगते हैं या जगह-जगह से गायब हो सकते हैं |

त्वचा का रंग बदलना

कुछ मामलों में टखनों या पिंडलियों के आसपास त्वचा का रंग भी बदलने लगता है. यह काले या गहरे धब्बों के रूप में दिखाई दे सकता है. कई बार लोग इसे धूप या गंदगी समझ लेते हैं, लेकिन यह डायबिटिक डर्मोपैथी का संकेत भी हो सकता है. हाई ब्लड शुगर छोटे ब्लड वेसल्स को प्रभावित करती है, जिससे त्वचा में ऐसे बदलाव दिखाई देने लगते हैं |

पैरों में अचानक ऐंठन

रात के समय पैरों में अचानक ऐंठन होना भी डायबिटीज से जुड़ा हो सकता है. आमतौर पर लोग इसे पानी की कमी या शरीर में मिनरल की कमी से जोड़ते हैं, लेकिन कई बार यह खराब ब्लड फ्लो या नसों की समस्या के कारण भी हो सकता है. जब मांसपेशियों तक पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंचता, तो दर्द भरी ऐंठन होने लगती है |

 पैरों की त्वचा असामान्य रूप से चमकदार 

कुछ लोगों के पैरों की त्वचा असामान्य रूप से चमकदार और कसी हुई दिखाई देने लगती है. यह स्थिति शरीर में तरल पदार्थ जमा होने यानी सूजन के कारण हो सकती है, जो ब्लड फ्लो से जुड़ी समस्याओं का संकेत देती है. इसके अलावा पैरों पर छोटी-मोटी खरोंच या घाव का देर से भरना भी डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है, क्योंकि हाई ब्लड शुगर शरीर की इम्यून  क्षमता को प्रभावित करती है |

 पैरों के तापमान में बदलाव

कई बार पैरों के तापमान में भी बदलाव महसूस होता है. कुछ लोगों को पैर असामान्य रूप से ठंडे लगते हैं, जबकि कुछ को उनमें ज्यादा गर्माहट महसूस होती है. यह स्थिति नसों और ब्लड वेसल्स के प्रभावित होने का संकेत हो सकती है. इसलिए अगर पैरों में ऐसे बदलाव लगातार दिखाई दें, तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है |

सुरक्षा बलों की तैनाती का फैसला अब चुनाव आयोग करेगा, ममता सरकार नहीं

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही निर्वाचन आयोग ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने राज्य की राजनीति और पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। इस बार बंगाल चुनाव में सुरक्षा बलों की तैनाती का रिमोट कंट्रोल ममता सरकार के एसपी या जिलाधिकारियों के हाथ में नहीं, बल्कि सीधे चुनाव आयोग के पुलिस ऑब्जर्वर्स के पास होगा। आयोग का यह फैसला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए झटके से कम नहीं है।
अब तक के नियमों के मुताबिक चुनाव के दौरान सेंट्रल फोर्सेस की तैनाती का फैसला जिला मजिस्ट्रेट और स्थानीय पुलिस कप्तान मिलकर करते थे, लेकिन बंगाल के हिंसक चुनावी इतिहास और विपक्षी दलों की शिकायतों को देखते हुए आयोग ने इस ‘विशेषाधिकार’ को छीन लिया है। अब आयोग द्वारा नियुक्त सेंट्रल पुलिस ऑब्जर्वर्स ही यह तय करेंगे कि केंद्रीय बल और राज्य पुलिस के जवान किस इलाके में, कितनी संख्या में और कब तैनात होंगे।
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक कोलकाता में हुई बैठकों में कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि राज्य प्रशासन बल का दुरुपयोग करता है। आरोप था कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल नहीं भेजे जाते, जिससे सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं को खुली छूट मिल जाती है। सुरक्षा बलों को उन जगहों पर तैनात कर दिया जाता है जहां उनकी जरूरत नहीं होती। स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर सत्ताधारी दल के कैडर की तरह काम करने के आरोप लगते रहे हैं। इन्हीं शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कर दिया है कि चुनाव में हिंसा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

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News Desk

द हंड्रेड 2026 ऑक्शन में बड़ा झटका, नंबर-1 गेंदबाज सादिया इकबाल रहीं अनसोल्ड

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इग्लैंड में आयोजित द हंड्रेड (The Hundred Auction) के नए सीजन के लिए हुए ऑक्शन के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बुधवार को हुए महिला खिलाड़ियों के ऑक्शन में दुनिया की नंबर-1 टी20 गेंदबाज सादिया इकबाल को कोई खरीदार नहीं मिला. उनके साथ पाकिस्तान की ऑलराउंडर फातिमा सना भी अनसोल्ड रहीं.दोनों खिलाड़ियों का बेस प्राइस 15,000 पाउंड था, लेकिन किसी भी फ्रेंचाइजी ने इन पर बोली नहीं लगाई. इसके बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में चर्चा तेज हो गई कि क्या लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर अनकही दूरी बनाई जा रही है|

आईपीएल मालिकों के आने के बाद उठे सवाल

इस बार द हंड्रेड की कई टीमों में उन कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ी है जिनके पास IPL की फ्रेंचाइजी भी हैं. इसी वजह से कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या आईपीएल से जुड़े मालिकों के प्रभाव के कारण पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मौका नहीं मिला है.हालांकि लीग के आयोजक इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने ऑक्शन से पहले साफ कहा था कि खिलाड़ियों का चयन उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद परिणाम सामने आने के बाद इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है|

पहले भी नहीं खेलीं पाकिस्तानी महिला खिलाड़ी

दिलचस्प बात यह है कि द हंड्रेड लीग के पिछले सीजनों में भी कोई पाकिस्तानी महिला खिलाड़ी इस लीग में नहीं खेल पाई थी. यानी आईपीएल मालिकों के आने से पहले भी पाकिस्तान की महिला क्रिकेटरों को इस लीग में मौका नहीं मिला था. फिर भी सादिया इकबाल जैसी शीर्ष गेंदबाज का अनसोल्ड रहना कई लोगों को चौंकाने वाला लगा है, क्योंकि वह मौजूदा समय में टी20 रैंकिंग में नंबर-1 गेंदबाज मानी जाती हैं|

भारतीय खिलाड़ियों पर हुई पैसों की बारिश

जहां पाकिस्तानी खिलाड़ियों को निराशा हाथ लगी, वहीं भारतीय महिला क्रिकेटरों को ऑक्शन में शानदार कीमत मिली है.ऋचा घोष – 50,000 पाउंड में खरीदा गया है.दीप्ती शर्मा – 27,000 पाउंडवहीं स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स जैसी दिग्गज खिलाड़ियों को पहले ही फ्रेंचाइज ने प्री-साइन या रिटेन कर लिया गया था. इस सीजन में महिला खिलाड़ियों की सैलरी में भी पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी देखने को मिली है.|

अब पुरुषों के ऑक्शन पर नजर

महिला ऑक्शन के बाद अब सबकी नजर पुरुष खिलाड़ियों की नीलामी पर है. पाकिस्तान के कई बड़े खिलाड़ी इस ड्राफ्ट में शामिल हैं, जिनमें शाहिन शाह अफरीदी, नसीम शाह और मोहम्मद आमिर आमिर जैसे खिलाड़ियों के नाम हैं.अब देखना दिलचस्प होगा कि पुरुषों के ऑक्शन में इन पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर टीमें दांव लगाती हैं या फिर उन्हें भी महिला खिलाड़ियों की तरह निराशा हाथ लगती है|

आंखों का रंग बदलना दे सकता है लिवर कैंसर की चेतावनी

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लिवर हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम करता है. जब किसी कारण से लिवर ठीक तरह से काम करना बंद कर देता है, तो इस स्थिति को लिवर फेलियर कहा जाता है. यह एक गंभीर और जानलेवा समस्या हो सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि आंखों में लिवर कैंसर के कौन से लक्षण दिखाई देते हैं |

क्यों होती है दिक्कत?

लिवर फेलियर अक्सर किसी दूसरी बीमारी के कारण होता है. लंबे समय तक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी या सी इंफेक्शन, फैटी लिवर, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी स्थितियां लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. अगर यह नुकसान लंबे समय तक बना रहे तो लिवर में स्थायी दाग पड़ जाते हैं, जिसे सिरोसिस कहा जाता है. यही स्थिति आगे चलकर लिवर फेलियर में बदल सकती है और कई मामलों में मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि शुरुआती चरण में इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से लिवर को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है |

आंखों में दिखती है समस्या

आंखों के बारे में जानकारी देने वाली allaboutvision के अनुसार, शुरुआत में लिवर की समस्या के लक्षण बहुत साफ दिखाई नहीं देते. कई लोगों को लंबे समय तक कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती. लेकिन जब बीमारी बढ़ने लगती है तो कुछ सामान्य संकेत दिख सकते हैं, जैसे लगातार थकान महसूस होना, मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली, पेट दर्द, मतली या उल्टी जैसी समस्याएं.जब लिवर की बीमारी ज्यादा गंभीर हो जाती है, तब इसका असर आंखों पर भी दिखाई देने लगता है. सबसे आम लक्षण आंखों का पीला पड़ना है, जिसे पीलिया कहा जाता है. यह तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नाम का पीला पिगमेंट ज्यादा मात्रा में जमा हो जाता है. सामान्य स्थिति में लिवर पुराने रक्त कोशिकाओं से बनने वाले इस पिगमेंट को शरीर से बाहर निकाल देता है, लेकिन लिवर खराब होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है |कुछ मामलों में लिवर से जुड़ी समस्याएं आंखों में सूखापन भी पैदा कर सकती हैं. इसके अलावा लंबे समय तक लिवर की बीमारी रहने पर शरीर में विटामिन ए की कमी हो सकती है, जिससे रात में देखने में दिक्कत, आंखों में सूखापन या कॉर्निया से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. कुछ लोगों की पलकों के आसपास पीले रंग की छोटी गांठें भी दिखाई दे सकती हैं, जिन्हें जैंथेलाज़्मा कहा जाता है |

आंखों में कब दिखते हैं कैंसर के लक्षण?

vinmec की रिपोर्ट के अनुसार, पीलिया लिवर कैंसर के आखिरी चरण में दिखने वाला एक अहम लक्षण हो सकता है. जब लिवर में ट्यूमर बढ़ने लगते हैं, तो वे बाइल डक्ट पर दबाव डालते हैं, जिससे बिलीरुबिन बढ़ जाता है. इसके कारण आंखें और त्वचा पीली पड़ सकती हैं, इसके साथ ही गहरा यूरिन और खुजली जैसी परेशानी भी हो सकती है |