लोकसभा में सभापति ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

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नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसदों ने वोट किया, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे सदन में पेश करने की अनुमति दे दी।  प्रस्ताव पर लोकसभा में 10 घंटे तक चर्चा होना संभावित है। 
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा नहीं दिख रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने यह अविश्वास प्रस्ताव लाया है। चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार और नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व कमजोर और बुजदिल साबित हो रहा है। गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्पीकर अनुपस्थित हों तो डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल किस अधिकार से सदन की कार्यवाही चला रहे हैं। 
दरअसल, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। परंपरा के अनुसार यह पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता रहा है। 16वीं लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान सहयोगी दल अन्नाद्रमुक के एम. थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। हालांकि 17वीं और 18वीं लोकसभा में अब तक इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। 
सदन की कार्यवाही के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर स्वयं कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और चेयर पर बैठे सदस्य भी स्पीकर की अनुमति से ही आए हैं, इसलिए उन्हें इस प्रस्ताव पर कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ओवैसी ने मांग की कि बहस शुरू होने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। 
इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर की तरह कार्यवाही संचालित करने की शक्ति रखता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस तर्क का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति जरूरी है। अंत में चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जो सदस्य पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना चाहते हैं, उन्हें बाद में बोलने का अवसर दिया जाएगा।  

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26 सदस्य निर्विरोध चुने गए अब 3 राज्यों की 11 सीटों पर होगा मुकाबला 

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नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी सोमवार को गुजर गई है। इसके बाद सात राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि अब तीन राज्यों की 11 सीटों पर मतदान होना तय माना जा रहा है। इन सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होगी और कई जगहों पर दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव जिन राज्यों में हो रहे हैं उनमें पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, असम, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों में सीटों के बराबर उम्मीदवार होने के कारण कई सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए। हालांकि बिहार, हरियाणा और ओडिशा में निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला होना तय है। 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति भी तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने बिहार, हरियाणा और ओडिशा में चुनाव की निगरानी के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। 

ओडिशा में चौथी सीट पर रोचक मुकाबला
ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि दिलीप रे को समर्थन दिया है। वहीं बीजू जनता दल (बीजेडी) ने संतृप्त मिश्रा को और कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा को समर्थन दिया है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाजपा के दो और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चौथी सीट के लिए दिलीप रे और दत्तेश्वर मिश्रा के बीच मुकाबला रोचक होने की संभावना है।

बिहार में पांचवीं सीट पर मुकाबला
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) ने नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को मैदान में उतारा है। एनडीए की ओर से उपेंद्र कुशवाहा को भी उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव को और रोमांचक बना दिया है। ऐसे में पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है।

हरियाणा में भी मुकाबले की स्थिति
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राजनीतिक दलों के बीच जारी रणनीतिक गतिविधियों के बीच अब सबकी निगाहें 16 मार्च को होने वाली वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हैं।

कश्मीर में झूठी खबर फैलाने पर कड़ी कार्रवाई, 150 लोगों से पूछताछ

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जम्मू। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारियां फैलाने वालों के खिलाफ श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने इस मामले में अब तक करीब 150 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही ऐसे कई सोशल मीडिया अकाउंट, पेज और अन्य प्लेटफार्म को ब्लॉक किया है।
आला अफसर ने बताया कि साइबर पुलिस स्टेशन में इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू भी शामिल हैं। करीब 150 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही अन्य कई प्रोफाइल की पहचान कर उनको साइबर सेल में बुलाया जा रहा है। जल्द ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारियां फैलाने वालों के खिलाफ श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि जानबूझकर झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। इस कोशिश के पीछे मकसद अशांति फैलाना है। करीब एक सप्ताह से श्रीनगर पुलिस की विशेष साइबर टीम न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का सर्विलांस कर रही है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर ऐसे तत्वों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि झूठी खबर, भड़काऊ पोस्ट या बिना सत्यापन वाली जानकारियां फैलाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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पूरे परिवार के साथ पीएम मोदी से भेंट की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने

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जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनका परिवार नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचा। इस दौरान वसुंधरा राजे के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। यह मुलाकात शिष्टाचार की रूप में देखी जा रही है, लेकिन मरुधार के राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।
मुलाकात के दौरान विशेष ध्यान विनायक प्रताप सिंह पर गया, जो अपनी दादी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की संभावनाओं के कारण चर्चा में हैं। विनायक ने 2023 में पहली बार मतदान किया था और कुछ चुनावी कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए थे। उनकी फिटनेस के प्रति सजगता और यूट्यूब चैनल पर फिटनेस वीडियो साझा करने के कारण युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और विनायक के बीच मुलाकात में खास बातचीत देखी गई, जिससे यह अटकलें लग रही हैं कि विनायक राजनीति में जल्द ही कदम रख सकते हैं। वर्तमान में वह दिल्ली से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं और जिमिंग व ओपन एक्सरसाइज पर विशेष ध्यान देते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि विनायक की पृष्ठभूमि और युवा छवि उन्हें राजनीतिक क्षेत्र में एक मजबूत उपस्थिति बनाने में मदद कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात वसुंधरा राजे और उनके परिवार के भविष्य की रणनीतियों का हिस्सा हो सकती है। फिटनेस और कानून की पढ़ाई के साथ विनायक अपनी दादी की विरासत को आधुनिक अंदाज में आगे बढ़ा सकते हैं। मुलाकात के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं, जिससे जनता और समर्थकों में उत्सुकता बढ़ी है। इस तरह, यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं का संकेत भी मानी जा रही है।

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सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता को दी जमानत, महाराष्ट्र सरकार का विरोध

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नई दिल्ली|सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के चर्चित पोर्श कार दुर्घटना मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को उस नाबालिग के पिता को जमानत दे दी, जिस पर 2024 में पुणे में शराब के नशे में पोर्श कार चलाकर दो लोगों की मौत का आरोप है। यह घटना 19 मई, 2024 की है, जब कथित तौर पर 17 वर्षीय लड़के द्वारा शराब के नशे में चलाई जा रही पोर्श कार ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था।

आरोपी को मिली राहत

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने विशाल अग्रवाल को राहत दी है। विशाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए ब्लड सैंपल बदलवाने की साजिश रची थी। वे चाहते थे कि मेडिकल रिपोर्ट में शराब की पुष्टि न हो सके। टॉप कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले के दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी पिछले 22 महीनों से जेल में बंद है। बेंच ने आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट जो नियम और शर्तें तय करेगा, उनके आधार पर विशाल अग्रवाल को बेल दी जाए।

सरकार ने किया विरोध

महाराष्ट्र सरकार ने इस जमानत का विरोध किया। सरकार का तर्क है कि विशाल अग्रवाल का मामला दूसरे आरोपियों जैसा नहीं है, इसलिए उन्हें बराबरी के आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशाल अग्रवाल पर कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं। कोर्ट ने उन्हें आदेश दिया है कि वे इस मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। अगर वे किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए।

इससे पहले 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ससून जनरल हॉस्पिटल के पूर्व मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय टावरे को भी जमानत दी थी। उन पर ब्लड सैंपल के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप था। कोर्ट ने 2 फरवरी को तीन अन्य आरोपियों-अमर सतीश गायकवाड़, आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को भी जमानत दी थी। ये लोग करीब 18 महीनों से हिरासत में थे। आदित्य सूद और आशीष मित्तल पर अपने ब्लड सैंपल देने का आरोप था ताकि उनके बच्चों को बचाया जा सके, जो दुर्घटना के समय कार में मौजूद थे।

दस को भेजा गया था जेल

इस मामले की शुरुआत में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को बहुत आसान शर्तों पर जमानत दी थी। उसे सड़क सुरक्षा पर सिर्फ 300 शब्दों का निबंध लिखने को कहा गया था। इस फैसले के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा देखा गया। इसके बाद पुणे पुलिस ने बोर्ड से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। फिर नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, ब्लड सैंपल बदलने के मामले में विशाल अग्रवाल, उनकी पत्नी शिवानी अग्रवाल और डॉक्टरों समेत 10 लोगों को जेल भेजा गया था।

नीतीश के दिल्ली रवाना होने पर उनके किचेन कैबिनेट के मंत्रियों की जिम्मेदारी बदलेगी 

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पटना। सीएम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुने जाएंगे। इसके बाद वे दिल्ली कूच करने वाले है। बिहार की राजनीति में 20 साल बाद पहला मौका है, जब सूबे में बिना नीतीश के चेहरे की सरकार होगी।
वहीं एनडीए सरकार में पहली बार भाजपा का सीएम बनने जा रहा है। साथ ही मंत्रिमंडल में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अभी जेडीयू की ओर से नीतीश के कई बेहद करीबी नेता अहम मंत्रालयों को संभाल रहे हैं। संभव है कि नए सीएम बनने के नीतीश के किचेन कैबिनेट के मंत्रियों की जिम्मेदारी बदल दी जाएगी। 
मौजूदा कैबिनेट में जेडीयू की ओर से सबसे मजबूत और ताकतवार मंत्री हैं। नीतीश के बेहद करीबी और भरोसेमंद हैं। जानकार बताते हैं कि नीतीश इनके फैसलों को ना नहीं करते। कोई बड़ा फैसला करने से पहले इनके साथ विचार कर सहमति लेते हैं। बिजेंद्र यादव की छवि ईमानदार और बिना लाग-लपेट के सीधी बात कहने वाले नेता की है। नीतीश को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने में इनका बड़ा योगदान है। बताया जा रहा कि बिजेंद्र यादव नई सरकार में मंत्री बने रहने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने नीतीश को बताया है कि जब आप नहीं तब मैं भी कैबिनेट में नहीं रहूंगा। बात दें कि बिजेंद्र के पास कई विभागों की जिम्मेदारी है। वित्त मंत्री के रूप में फरवरी 2026 में बिहार विधानसभा में 3.47 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। उनके पास ऊर्जा विभाग का कार्यभार है। वह बिजली क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है।

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छक्कों-शतकों की बरसात, बुमराह का जलवा

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टी20 क्रिकेट हमेशा से तेज और रोमांचक रहा है, लेकिन टी20 विश्वकप 2026 ने इस फॉर्मेट को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया। इस टूर्नामेंट में बल्लेबाजों का दबदबा साफ दिखाई दिया। छक्कों की झड़ी, बड़े-बड़े स्कोर और रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन ने इसे टी20 इतिहास के सबसे यादगार टूर्नामेंटों में शामिल कर दिया।इस विश्व कप में कई ऐसे आंकड़े सामने आए जो बताते हैं कि आधुनिक टी20 क्रिकेट कितनी तेजी से बदल रहा है। बल्लेबाजों की आक्रामकता, बड़े स्कोर और लगातार टूटते रिकॉर्ड इस बात का संकेत हैं कि अब टी20 क्रिकेट पहले से कहीं ज्यादा विस्फोटक हो चुका है। आइए जानते हैं इस टूर्नामेंट के सबसे बड़े 21 रिकॉर्ड।

पहला रिकॉर्ड: छक्कों की रिकॉर्ड बारिश

टी20 विश्वकप 2026 में कुल 780 छक्के लगे, जो किसी भी टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले 2024 के टूर्नामेंट में कुल 517 छक्के लगे थे। यानी इस बार छक्कों की संख्या में लगभग 50.87 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे साफ संकेत मिलता है कि बल्लेबाज अब पहले से ज्यादा आक्रामक अंदाज में खेल रहे हैं।

दूसरा रिकॉर्ड: हर 15 गेंद पर एक छक्का

इस संस्करण में औसतन हर 15.52 गेंद पर एक छक्का देखने को मिला, जो टी20 विश्व कप इतिहास का सबसे बेहतर अनुपात है। भारत में खेले गए मैचों में कुल 600 छक्के लगे, जबकि श्रीलंका में खेले गए मुकाबलों में 180 छक्के देखने को मिले।

तीसरा रिकॉर्ड: संजू सैमसन का अनोखा कारनामा

भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने इस टूर्नामेंट में एक बेहद खास उपलब्धि हासिल की। वह चार मैच नहीं खेलने के बावजूद ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुने गए। सैमसन ने भारत के आखिरी सुपर-8 मुकाबले, सेमीफाइनल और फाइनल में 80 से ज्यादा रन की तीन शानदार पारियां खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। आईसीसी टूर्नामेंट के इतिहास में पहले भी कुछ खिलाड़ियों ने सभी मैच खेले बिना यह पुरस्कार जीता है, लेकिन उन्होंने अधिकतम एक मैच ही मिस किया था। इस लिहाज से सैमसन का यह कारनामा बेहद खास माना जा रहा है।

चौथा रिकॉर्ड: टीमों ने बनाए विशाल स्कोर

टी20 विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर अभी भी 2007 में श्रीलंका द्वारा केन्या के खिलाफ बनाया गया 260/6 ही है। हालांकि 2026 के संस्करण में कई टीमें इस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गईं। दरअसल टी20 विश्व कप इतिहास के सात सबसे बड़े स्कोरों में से छह इसी संस्करण में बने। इतना ही नहीं, चार बार टीमें श्रीलंका के उस रिकॉर्ड से महज दस रन के अंदर पहुंच गईं, जिनमें से तीन बार भारत की टीम शामिल रही।

पांचवां रिकॉर्ड: भारत की फील्डिंग में कमजोरी

हालांकि भारत ने टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया, लेकिन फील्डिंग के मामले में टीम की कुछ कमजोरियां भी सामने आईं। पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारत ने कुल 15 कैच छोड़े, जो किसी भी टीम द्वारा छोड़े गए सबसे ज्यादा कैच रहे। ईएसपीएन क्रिकइनफो के आंकड़ों के मुताबिक, पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के किसी भी टूर्नामेंट या सीरीज में यह सबसे ज्यादा कैच ड्रॉप का रिकॉर्ड है। इससे पहले 2022 टी20 वर्ल्ड कप में आयरलैंड ने 14 कैच छोड़े थे।

छठा रिकॉर्ड: साहिबजादा का ऐतिहासिक प्रदर्शन

पाकिस्तान के बल्लेबाज साहिबजादा फरहान इस टूर्नामेंट के सबसे बड़े रन-स्कोरर साबित हुए। उन्होंने कुल 383 रन बनाए, जो किसी भी टी20 विश्व कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा रन हैं। फरहान ने इस टूर्नामेंट में दो शतक भी लगाए और वह टी20 विश्व कप के इतिहास में ऐसा करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। पाकिस्तान की कुल टीम रन में उनका योगदान लगभग 37.3 प्रतिशत रहा, जो उनके महत्व को दर्शाता है।

सातवां रिकॉर्ड: छक्कों का रिकॉर्ड कई बार टूटा

इस टूर्नामेंट के दौरान एक बल्लेबाज द्वारा एक संस्करण में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड चार बार टूटा। टी20 विश्वकप 2026 में बल्लेबाजों ने छक्कों के रिकॉर्ड भी लगातार तोड़े। 2024 टी20 विश्व कप में वेस्टइंडीज के निकोलस पूरन के नाम एक संस्करण में सबसे ज्यादा 17 छक्के लगाने का रिकॉर्ड था, लेकिन 2026 के टूर्नामेंट में यह रिकॉर्ड कई बार बदला। पहले साहिबजादा फरहान ने 18 छक्के लगाकर नया रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद शिमरोन हेटमायर ने 19 छक्के लगाए, फिर न्यूजीलैंड के फिन एलेन ने 20 छक्के जड़े। आखिरकार संजू सैमसन ने सिर्फ पांच मैचों में 24 छक्के लगाकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

आठवां रिकॉर्ड: बिजली जैसी तेज अर्धशतक

टी20 विश्व कप 2026 में बल्लेबाजों ने बेहद तेज अर्धशतक भी लगाए। पूरे टूर्नामेंट में 25 गेंद से कम में कुल 20 अर्धशतक बनाए गए। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले खेले गए नौ टी20 विश्व कपों में कुल मिलाकर सिर्फ 27 ऐसी फिफ्टी लगी थीं। इतना ही नहीं, 2026 के इस संस्करण में छह अर्धशतक 20 गेंद से भी कम में पूरे किए गए।

नौवां रिकॉर्ड: भारत की ऐतिहासिक जीत

भारत ने इस टूर्नामेंट को जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। टीम इंडिया पुरुष टी20 विश्व कप तीन बार जीतने वाली पहली टीम बन गई। इसके साथ ही भारत लगातार दो बार टी20 विश्व कप जीतने वाली भी पहली टीम बन गया। इतना ही नहीं, भारत इस फॉर्मेट के इतिहास में मेजबान रहते हुए टी20 विश्व कप जीतने वाली भी पहली टीम बना।

10वां रिकॉर्ड: 200 से ज्यादा स्कोर की बाढ़

इस विश्व कप में बल्लेबाजों का दबदबा इस कदर रहा कि 14 बार टीमें 200 से ज्यादा रन बनाने में सफल रहीं। जबकि इससे पहले खेले गए नौ संस्करणों में कुल मिलाकर सिर्फ 18 बार ही 200 से ज्यादा का स्कोर बना था। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि टी20 क्रिकेट अब पहले से कहीं ज्यादा बल्लेबाजी के पक्ष में झुक चुका है।

11वां रिकॉर्ड: शतकों की झड़ी

इस टूर्नामेंट में कुल सात व्यक्तिगत शतक देखने को मिले। यह भी एक नया रिकॉर्ड है, क्योंकि इससे पहले किसी भी टी20 विश्व कप में दो से ज्यादा शतक नहीं लगे थे। दिलचस्प बात यह है कि टी20 विश्व कप इतिहास के दो सबसे तेज शतक भी इसी टूर्नामेंट में देखने को मिले।

12वां रिकॉर्ड: भारत की बल्लेबाजी की गहराई

भारत की बल्लेबाजी इस टूर्नामेंट में बेहद मजबूत रही। टीम के छह बल्लेबाजों ने 200 से ज्यादा रन बनाए। इन खिलाड़ियों में ईशान किशन, संजू सैमसन, सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे शामिल हैं। किसी भी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज या टूर्नामेंट में किसी एक टीम के इतने बल्लेबाजों का 200 से ज्यादा रन बनाना पहली बार हुआ। टी20 विश्वकप में भारत ने एक और अनोखा रिकॉर्ड बनाया। टीम इंडिया इस टूर्नामेंट में ऐसी पहली टीम बन गई, जिसके छह बल्लेबाजों ने कम से कम एक-एक अर्धशतक लगाया। इन खिलाड़ियों में ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे और अभिषेक शर्मा शामिल हैं।

13वां रिकॉर्ड: बुमराह की किफायती गेंदबाजी

भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने भी इस टूर्नामेंट में एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने तीसरी बार टी20 विश्व कप में टूर्नामेंट का सबसे बेहतर इकॉनमी रेट हासिल किया। 2021 में उनका इकॉनमी रेट 5.08 रहा था, जबकि 2024 में यह 4.17 था। 2026 में भी उन्होंने 6.21 की शानदार इकॉनमी के साथ यह उपलब्धि हासिल की। टी20 विश्व कप इतिहास में कोई भी गेंदबाज एक से ज्यादा बार यह रिकॉर्ड हासिल नहीं कर पाया है।

14वां रिकॉर्ड: अमेरिका के इस खिलाड़ी का कमाल

25 दिन तक शैडली वैन शाल्कविक टूर्नामेंट के टॉप विकेट-टेकर बने रहे। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के खिलाफ लगातार दो मैचों में चार-चार विकेट लेकर गेंदबाजी चार्ट में पहला स्थान हासिल किया था। शाल्कविक ने अपना आखिरी मैच 15 फरवरी को खेला था, लेकिन इसके बाद भी फाइनल तक खेले गए 42 मैचों तक वह विकेटों की सूची में शीर्ष पर बने रहे।

15वां रिकॉर्ड: भारत का छक्कों का रिकॉर्ड

भारत ने इस टूर्नामेंट में कुल नौ मैच खेले और इन मुकाबलों में टीम ने 106 छक्के लगाए। पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी टीम ने किसी एक टूर्नामेंट या सीरीज में 100 से ज्यादा छक्के लगाए हों।

16वां रिकॉर्ड: आक्रामक बल्लेबाजी का नया दौर

2026 टी20 विश्व कप में बल्लेबाजों का औसत स्ट्राइक रेट 139 रहा, जो किसी भी संस्करण में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2024 के टी20 विश्व कप में यह 109.96 था। यानी सिर्फ दो साल में स्ट्राइक रेट में लगभग 26.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली।

17वां रिकॉर्ड: पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों का दबदबा

इस विश्व कप में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों का दबदबा भी साफ नजर आया। इस टूर्नामेंट में जीत का औसत अंतर 54.86 रन रहा, जो टी20 विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा है। 29 में से 16 मुकाबले ऐसे रहे जिनमें जीत का अंतर 50 रन से ज्यादा रहा। वहीं केवल चार मैच ऐसे थे जिनमें जीत का अंतर 20 रन से कम रहा।

18वां रिकॉर्ड: शमर जोसेफ ने भी बनाया रिकॉर्ड

आठ विकेट वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज शमर जोसेफ के नाम उस मैच में जुड़े, जो इटली के खिलाफ ईडन गार्डन्स में खेला गया था। उन्होंने गेंदबाजी में चार विकेट लिए और फील्डिंग में चार कैच पकड़े। इसके साथ ही वह सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (वनडे या टी20) में चार विकेट लेने और चार कैच पकड़ने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में उनसे पहले सिर्फ तीन खिलाड़ी ही एक मैच में आठ विकेटों में शामिल रहे थे।

19वां रिकॉर्ड: करियर का पहला चार विकेट हॉल

117 विकेट फाइनल से पहले जसप्रीत बुमराह के नाम टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 117 विकेट थे। दिलचस्प बात यह रही कि 100 से ज्यादा विकेट लेने के बावजूद उनके नाम इससे पहले चार विकेट लेने का कोई स्पेल नहीं था। न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में उन्होंने चार विकेट लेकर 15 रन दिए और यह उनके करियर का पहला चार विकेट हॉल रहा। इसके साथ ही वह टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में चार विकेट लेने वाले दूसरे गेंदबाज बने। इससे पहले 2012 में अजंता मेंडिस ने यह कारनामा किया था।

20वां रिकॉर्ड: 160 से कम के स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव

146/9 श्रीलंका के खिलाफ पल्लेकेले में इंग्लैंड का स्कोर इस विश्व कप में एकमात्र ऐसा उदाहरण रहा, जब किसी टीम ने 160 से कम के स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव किया। पूरे टूर्नामेंट में खेले गए 53 मुकाबलों में केवल 12 बार ही पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम 160 से कम स्कोर बना पाई। इसके अलावा पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों ने 41 में से 28 मैचों में 160 या उससे ज्यादा स्कोर का सफल बचाव किया। वहीं पूरे टूर्नामेंट में 200 से ज्यादा के 12 लक्ष्य दिए गए, लेकिन कोई भी टीम इन लक्ष्यों का पीछा कर जीत हासिल नहीं कर सकी।

गैस की भारी कमी से प्रभावित हो रही होटल इंडस्ट्री

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मुंबई। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध की लपटें अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को प्रभावित करने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल एलपीजी गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इसका सबसे बड़ा झटका होटल और रेस्तरां उद्योग को लगा है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थिति गंभीर होती जा रही है। होटलों की प्रमुख संस्था आहार के अनुसार, गैस की कमी के चलते मुंबई के लगभग 20प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो शहर के 50प्रतिशत से अधिक होटलों पर ताला लग सकता है। हालांकि, एसोसिएशन ने अभी तक सामूहिक रूप से होटल बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन ईंधन के अभाव में व्यक्तिगत स्तर पर होटल मालिक परिचालन बंद करने को मजबूर हैं।
वहीं, दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में भी हाहाकार मचा हुआ है। चेन्नई होटल एसोसिएशन ने शहर में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल गैस की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकने की सूचना ने खाद्य उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। चेन्नई होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. रवि ने बताया कि अधिकांश होटलों के पास अब केवल दो दिनों का स्टॉक बचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि होटल उद्योग केवल व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह अस्पतालों, आईटी पार्कों, कॉलेज हॉस्टलों और ट्रेन यात्रियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत है। यदि सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो आम जनता को खाने-पीने की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा। भू-राजनीतिक तनाव के कारण उपजे इस ऊर्जा संकट ने पूरे देश के सेवा क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है।

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इंडिया गठबंधन की बैठक में वामपंथी दलों का विरोध, राहुल गांधी को लताड़

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नई दिल्ली। केरल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच गया है। विपक्षी एकता के उद्देश्य से बने इंडिया गठबंधन के भीतर सोमवार को उस वक्त तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब एक बैठक के दौरान वामपंथी दलों ने सीधे तौर पर राहुल गांधी के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। संसद सत्र की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई इस बैठक में चुनावी कड़वाहट साफ तौर पर हावी दिखी, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।
वामपंथी नेताओं के इस कड़े रुख पर बैठक में मौजूद अन्य दलों ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की। कई नेताओं का तर्क था कि यह बैठक संसद सत्र के एजेंडे पर चर्चा के लिए बुलाई गई है, इसलिए यहां दो दलों के आपसी क्षेत्रीय विवादों को उठाना उचित नहीं है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राहुल गांधी के भाषण के एक छोटे से हिस्से को मुद्दा बनाना गलत है और इस पर विस्तार से बाद में बात की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपना पक्ष रखने के लिए तैयार है कि आखिर उन टिप्पणियों का संदर्भ क्या था।
विवाद की मुख्य जड़ राहुल गांधी द्वारा केरल में दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कथित सीक्रेट तालमेल होने का आरोप लगाया था। वामपंथी दलों के सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने बैठक में इस बात पर गहरा ऐतराज जताया कि राहुल गांधी कैसे उन पर भाजपा के साथ गठजोड़ का आरोप लगा सकते हैं। विशेष रूप से राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द कम्युनिस्ट जनता पार्टी ने वामपंथी नेताओं को सबसे ज्यादा आहत किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सहयोगी दलों पर इस तरह की टिप्पणियां की जाएंगी, तो गठबंधन का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि जब यह बहस चल रही थी, तब राहुल गांधी स्वयं बैठक में मौजूद थे। उन्होंने फिलहाल इस विवाद को टालते हुए यही कहा कि इस विषय पर उचित समय पर चर्चा की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में चूंकि मुख्य मुकाबला वामपंथी नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच ही है, इसलिए वहां की स्थानीय राजनीति का असर राष्ट्रीय गठबंधन पर पड़ना लाजिमी है। केरल में जहां वामपंथी दल लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि वह इस बार पासा पलट देगी। यह आपसी खींचतान आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है क्योंकि चुनाव करीब हैं।

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चैंपियन बनने के बाद भावुक हुए रिंकू सिंह, बोले—काश पापा आज साथ होते

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भारत ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम किया। यह जीत भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक पल थी, लेकिन टीम इंडिया के बल्लेबाज रिंकू सिंह के लिए यह खुशी पूरी तरह से अधूरी रह गई। वर्ल्ड कप जीतने के बाद रिंकू सिंह ने अपने दिवंगत पिता खानचंद्र सिंह को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश लिखा, जिसने फैंस को भी भावुक कर दिया।पिता के बिना पहली बड़ी जीत |रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का 27 फरवरी को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। वे स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पिता के निधन की खबर रिंकू सिंह को तब मिली थी जब वह भारतीय टीम के साथ टी20 वर्ल्ड कप के लिए तैयारी कर रहे थे। यह खबर उनके लिए बेहद बड़ा झटका थी।
 
‘आपसे बात किए बिना इतने दिन कभी नहीं निकले’

वर्ल्ड कप जीत के बाद रिंकू सिंह ने इंस्टाग्राम पर अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि उनके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है। उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा, ‘आपसे बात किए बिना इतने दिन कभी नहीं निकले। मुझे नहीं पता आगे की जिंदगी आपके बिना कैसे चलेगी, लेकिन मुझे हर कदम पर आपकी जरूरत पड़ेगी।’ रिंकू के इस संदेश ने यह दिखाया कि उनके जीवन में उनके पिता का कितना बड़ा स्थान था।

पिता के सपने को पूरा करने की कोशिश

रिंकू सिंह ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा सिखाया था कि कर्तव्य सबसे पहले आता है। यही सीख उन्हें मैदान पर मजबूती से खड़े रहने की प्रेरणा देती रही। उन्होंने लिखा, ‘आपने सिखाया था कि फर्ज सबसे आगे है, इसलिए मैदान पर बस आपका सपना पूरा करने की कोशिश कर रहा था। अब आपका सपना पूरा हो गया है, तो बस यही लगता है कि काश आप मेरे पास होते।’

अंतिम संस्कार के लिए लौटे थे अलीगढ़

पिता के निधन की खबर मिलने के बाद रिंकू सिंह तुरंत चेन्नई से अपने गृह नगर अलीगढ़ पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। उस दौरान रिंकू गहरे सदमे में नजर आए थे और अपने पिता के पार्थिव शरीर को कंधा देते हुए बेहद भावुक दिखे।

‘हर खुशी में आपकी कमी खलेगी’

रिंकू सिंह ने अपने संदेश में आगे लिखा कि जीवन की हर छोटी-बड़ी खुशी में उन्हें अपने पिता की कमी महसूस होगी। उन्होंने लिखा, ‘हर छोटी-बड़ी खुशी में आपकी कमी खलेगी। बहुत मिस करूंगा आपको पापा… बहुत ज्यादा।’ यह संदेश पढ़कर कई क्रिकेट फैंस और साथी खिलाड़ियों ने भी रिंकू के प्रति संवेदना जताई।

अब IPL में दिखेंगे एक्शन में

टी20 वर्ल्ड कप के बाद अब रिंकू सिंह की नजर इंडियन प्रीमियर लीग 2026 पर है। वह एक बार फिर कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेलते नजर आएंगे। आईपीएल 2026 का सीजन 28 मार्च से शुरू होने वाला है और फैंस को उम्मीद है कि रिंकू अपने आक्रामक अंदाज से टीम के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।