SA दौरे से पहले वैभव सूर्यवंशी ने ली गुरु से मुलाकात, क्या करेंगे सलाह मानेंगे?

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नए साल के लिए नए इरादे लिए वैभव सूर्यवंशी साउथ अफ्रीका दौरे के लिए कूच कर चुके हैं. ये वैभव सूर्यवंशी का पहला साउथ अफ्रीका दौरा है. मगर इसके खास होने की वजह बस यही नहीं है. बल्कि कप्तानी में होने वाला उनका डेब्यू भी है. वैभव पहली बार अंडर 19 टीम की कप्तानी करते दिखेंगे. साउथ अफ्रीका में या साउथ अफ्रीका की अंडर 19 टीम के खिलाफ भी वो पहली बार कोई मुकाबला खेलेंगे | इतने खास दौरे पर जाने से पहले वैभव सूर्यवंशी ने अपने गुरु यानी बचपन के कोच मनीष ओझा से मुलाकात की. मनीष ओझा ने मुलाकात के दौरान 3 बातें कही. लेकिन, सवाल है कि क्या वैभव साउथ अफ्रीका में उन बातों पर अमल करेंगे?

वैभव सूर्यवंशी की कहां हुई गुरु से मुलाकात?

वैभव सूर्यवंशी की अपने गुरु यानी मनीष ओझा से मुलाकात रांची में हुई. बिहार के लिए विजय हजारे ट्रॉफी का मुकाबला खेलने के लिए वैभव 29 दिसंबर को रांची में ही थे, जहां मैच के बाद वो मनीष ओझा से मिले | खास बातचीत में मनीष ओझा ने बताया कि दोनों के बीच बातचीत बहुत छोटी रही. मगर उतने समय में उन्हें वैभव से जो कहना था, वो उन्होंने कह दिया |

वैभव सूर्यवंशी से ‘गुरु’ ने कही कौन सी 3 बातें?

मनीष ओझा के मुताबिक, उन्होंने वैभव सूर्यवंशी से पहली बात तो ये कही कि साउथ अफ्रीका में लग के खेलना है. मतलब, अपना 100 प्रतिशत हर हाल में देना है. साउथ अफ्रीका दौरे पर वैभव सूर्यवंशी कप्तान भी रहने वाले हैं. ऐसे में मनीष ओझा ने वैभव सूर्यवंशी से दूसरी बात कप्तानी के मौके को भुनाने को लेकर कही |

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात कोच मनीष ओझा ने वैभव सूर्यवंशी से ये कही कि उन्हें अपनी बल्लेबाजी का ध्यान रखना होगा. मनीष ओझा के मुताबिक साउथ अफ्रीका में कंडीशन अलग और बिल्कुल नई होगी. ऐसे में वैभव को संभलकर खेलने की जरूरत होगी |

क्या वैभव सूर्यवंशी मानेंगे कोच की बात?

वैभव सूर्यवंशी को अपने विस्फोटक मिजाज और तेज तर्रार खेल के लिए जाना जाता है. इसी तर्ज पर वो अपनी पहचान कायम कर चुके हैं. क्रिकेट के गलियारे में वैभव सूर्यवंशी मतलब पहली गेंद से ही बरस पड़ने वाले बल्लेबाज से है. इस पहचान के साथ वैभव अगर अपने कोच की कही बातों को भी अमल में लाते हैं. उसका ध्यान रखते हैं तो दो राय नहीं कि साउथ अफ्रीका दौरा उनके लिए मील का पत्थर बन सकता है |

घुसपैठ और कुशासन पर टीएमसी सरकार पर अमित शाह का तीखा हमला

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Amit Shah in Kolkata :  के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने एक प्रेसवार्ता के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी शासन के दौरान बंगाल में भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ के कारण आम नागरिकों में असुरक्षा का माहौल बना है।

घुसपैठ के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत–बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर वे अब तक सात पत्र लिख चुके हैं। इसके अलावा पिछले छह वर्षों में गृह सचिव तीन बार पश्चिम बंगाल का दौरा कर राज्य के मुख्य सचिव से मुलाकात भी कर चुके हैं। इसके बावजूद सीमा पर बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा रही है। अमित शाह ने सवाल उठाया कि आखिर बंगाल सरकार को जमीन देने में क्या डर है और क्या वह घुसपैठ को जानबूझकर जारी रखना चाहती है।

Amit Shah in Kolkata के दौरान गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल सरकार घुसपैठियों के लिए दस्तावेज तैयार कर रही है, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना खतरनाक रूप से बदल रही है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा, असम, राजस्थान, पंजाब, कश्मीर और गुजरात की सीमाओं पर घुसपैठ रुक चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हो पा रहा है, क्योंकि यहां राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि बंगाल सीमा से हो रही घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर मुद्दा है और आने वाला चुनाव इसी विषय पर लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि आज से अप्रैल तक का समय राज्य के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसी दौरान चुनाव होंगे। भाजपा बंगाल के नागरिकों को भरोसा दिलाती है कि सत्ता में आते ही राज्य की विरासत को पुनर्जीवित किया जाएगा, विकास को प्राथमिकता दी जाएगी और घुसपैठ रोकने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय ग्रिड तैयार किया जाएगा।

5 बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स में साउथ हीरो पर भारी बॉलीवुड के 5 विलेन, अक्षय खन्ना नहीं शामिल

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बस 2 दिन और. फिर शुरुआत होगी नए साल यानी 2026 की. इस साल की ही तरह अगले साल भी कई बड़ी-बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं. जिसके लिए अभी से ही तगड़ा बज भी बना हुआ है. कुछ बॉलीवुड फिल्मों का साउथ से क्लैश होगा. जिसके बाद पहले 6 महीने किस इंडस्ट्री के नाम रहे ये तय किया जाएगा. पर कई ऐसी फिल्में भी अगले साल आ रही हैं, जिसमें आपको साउथ और बॉलीवुड का संगम देखने को मिलेगा. आज ऐसी ही 5 फिल्मों की बात करेंगे, जिसमें साउथ हीरो वर्सेज बॉलीवुड विलेन देखने को मिलेंगे. साल 2026 के पहले ही महीने से ये जंग शुरू हो जाएगी. जिसमें देखना दिलचस्प होगा कि कौन बाजी मारेगा. पर बॉलीवुड विलेन वाली लिस्ट में अक्षय खन्ना नहीं दिखेंगे |

साल 2026 में कई बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं. जिस लिस्ट में प्रभास, थलपति विजय, राम चरण, रजनीकांत समेत कई साउथ सुपरस्टार्स की फिल्में शामिल हैं. जबकि बॉलीवुड वाले अगले साल जितनी धांसू फिल्में लेकर आ रहे हैं, अगर सब फिल्में चल गईं तो मामला सेट है. हालांकि, साउथ के कई मेकर्स ने बॉलीवुड विलेन पर बड़ा दांव खेला है. इस लिस्ट में बॉबी देओल और संजय दत्त का नाम भी है. जिनकी फिल्मों का क्लैश देखने का सबको काफी इंतजार है. साथ ही लिस्ट में एक ऐसी फिल्म है, जो 2027 में आएगी |

साउथ हीरो की बैंड बजाएंगे बॉलीवुड विलेन!

1. जन नायगन: साल 2026 के शुरुआती महीने यानी जनवरी में ही थलपति विजय की आखिरी फिल्म आ रही है. 9 जनवरी को रिलीज हो रही इस फिल्म का कई और पिक्चरों से क्लैश होगा. क्योंकि ये फिल्म पोंगल वाले विंडो में आ रही है | इस फिल्म के बाद विजय फिल्में छोड़कर फुल टाइम पॉलिटिक्स जॉइन कर लेंगे. इस फिल्म में हीरो थलपति विजय हैं और उनके सामने विलेन होंगे बॉबी देओल. जो पहले ही कई साउथ फिल्मों में विलेन बने दिख चुके हैं |

2. द राजा साब: प्रभास की अपकमिंग फिल्म ‘द राजा साब’ भी इन दिनों चर्चा में है. 9 जनवरी यानी पोंगल वाले विंडो में ही यह फिल्म भी आ रही है. यूं तो फिल्म को लेकर लगातार हो रही बयानबाजी के चलते फैन्स खुश नहीं है. पर पिक्चर के लिए माहौल तो सेट होगा, क्योंकि यह प्रभास की पिक्चर है. इस फिल्म में हीरो बनकर प्रभास आएंगे, पर सामने एक बार फिर एक बॉलीवुड विलेन है. जो इतने खूंखार हैं कि उनका फिल्म से लुक देखकर फैन्स की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. जनवरी में प्रभास जीत के लिए संजय दत्त से भिड़ते हुए नजर आएंगे |

3. जेलर 2: रजनीकांत की इस साल ‘कुली’ रिलीज हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक कमाई कर ली थी. पर अब हर किसी की निगाहें ‘जेलर 2’ पर है. जिसकी पहली फिल्म साल 2023 में रिलीज हुई थी. और देखते ही देखते ब्लॉकबस्टर बन गई. अब साल 2026 में इसका पार्ट 2 आने वाला है | जिसमें रजनीकांत के सामने इस बार मिथुन चक्रवर्ती होंगे. हाल ही में उन्होंने शाहरुख खान की एंट्री को लेकर एक बड़ा हिंट भी दे दिया था. मिथुन 75 साल के हैं, तो रजनीकांत की उम्र भी एकदम सेम है. यहां भी बॉलीवुड वर्सेज साउथ देखने को मिलेगा |

4. पैराडाइज: तेलुगु एक्शन-एडवेंचर ड्रामा ‘द पैराडाइज’ भी चर्चा का विषय बनी हुई है. इस पिक्चर में नानी लीड रोल में होंगे, जिसे साल 2026 में ही रिलीज किया जाना है. श्रीकांत ओडेला की फिल्म सिस्टमैटिक उत्पीड़न को चुनौती देते हुए एक कबीले की कहानी दिखाएगी. जिसमें बॉलीवुड एक्टर राघव जुयाल को साइन किया गया है | उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म में खूंखार विलेन बनकर सबको इम्प्रेस किया था. इस बार भी कुछ ऐसा ही रोल मिल गया है. साथ ही यह उनका तेलुगु डेब्यू होगा |

5. स्पिरिट: लिस्ट में प्रभास की एक और फिल्म शामिल है. जिसे संदीप रेड्डी वांगा फिलहाल बना रहे हैं. ऐसी उम्मीद है कि पिक्चर को साल 2027 तक रिलीज किया जाएगा. फिल्म में प्रभास को पुलिस वाला बना हुआ देखने के लिए लोग काफी एक्साइटेड हैं | इसी बीच फिल्म में एक बड़ी एंट्री हुई है. विवेक ओबेरॉय पिक्चर में विलेन बने दिखेंगे और प्रभास से टक्कर लेंगे. देखना होगा कि फिल्म का काम कबतक कंप्लीट कर लिया जाएगा |

उद्धव गुट ने खोला कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा……….इस बार कांग्रेस मुक्त मुंबई का नारा चल रहा 

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मुंबई। बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव के कुछ दिनों पहले ही इंडिया गठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) ने दो टूक कहा कि इस बार कांग्रेस मुक्त मुंबई का नारा चल रहा है। पार्टी ने कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी के गठबंधन पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही कांग्रेस पर पीठ में छुरा भोंकने के आरोप लगाए हैं। 15 जनवरी को बीएमसी सहित महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में चुनाव होने हैं।
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, कांग्रेस पार्टी ने हमारी पीठ में छुरा भोंका है। पहले भाजपा ने भोंका और अब कांग्रेस ने भोंका दिया है। ये महाराष्ट्र और मुंबई की जनता ने देखा है। कांग्रेस पार्टी केवल तुष्टिकरण की राजनीति चाहती है। जिस वंचित अघाड़ी से पूरे जीवन कांग्रेस लड़ती आई। आज उसी साथ खड़ी है और 60 से ज्यादा सीटें देकर वंचित अघाड़ी को बड़ा भाई बनाना चाह रही है। जबकि, वंचित के पास उम्मीदवार नहीं है पूरी मुंबई में।
उन्होंने कहा, किसी से नाम पूछ लो कि वंचित बहुजन अघाड़ी का क्या इतिहास है, तब मुंबई की जनता बता नहीं पाएगी। लेकिन उसी वंचित अघाड़ी के साथ कांग्रेस जा रही है। यह सब बड़ा मुंबई में खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है और हमें लग रहा है कि ये सब भाजपा करा रही है। ये वंचित अघाड़ी हो या कांग्रेस हो, भाजपा की बी टीम बनकर जो काम कर रही हैं। इनका सूपड़ा 16 को साफ होगा। शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता दुबे ने कहा, एमवीए और इंडिया गठबंधन राज्य और केंद्र सरकार के लिए बना था। यह मुंबई महानगरपालिका का चुनाव है। इस चुनाव में राज और उद्धव ठाकरे साथ है। जो हमारे साथ आ रहा है, उसका स्वागत है। 

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News Desk

भूटान के स्पिनर ने रचा इतिहास, 7 रन देकर झटके 8 विकेट

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Sonam Yeshe : ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भूटान का नाम रोशन करते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। भूटान और म्यांमार के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में युवा स्पिनर सोनम येशे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो आज तक टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में कोई गेंदबाज नहीं कर पाया था। उन्होंने महज 7 रन देकर 8 विकेट झटकते हुए नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया।

इस मुकाबले में Sonam Yeshe की फिरकी के आगे म्यांमार के बल्लेबाज पूरी तरह बेबस नजर आए। येशे ने अपने चार ओवर के स्पेल में सिर्फ 7 रन खर्च किए और 8 बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया। उनकी इकोनॉमी महज 1.75 रही, जो इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को और भी खास बनाती है। उनकी घातक गेंदबाजी की बदौलत म्यांमार की पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और सिर्फ 26 रन पर सिमट गई।

म्यांमार को इतने कम स्कोर पर ढेर करने के बाद भूटान ने यह मैच 82 रन के बड़े अंतर से जीत लिया। इस जीत के साथ भूटान ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 4-0 की अजेय बढ़त भी बना ली है। यह भूटान क्रिकेट के लिए एक यादगार पल माना जा रहा है।

इससे पहले टी20 इंटरनेशनल में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड मलेशिया के सयाजरुल इद्रस के नाम था, जिन्होंने 2023 में चीन के खिलाफ 8 रन देकर 7 विकेट लिए थे। लेकिन Sonam Yeshe अब टी20 इंटरनेशनल की एक पारी में 8 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए हैं।

टी20 इंटरनेशनल में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़ों की सूची में अब येशे का नाम सबसे ऊपर दर्ज हो गया है। उनका यह प्रदर्शन न केवल भूटान क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि वैश्विक क्रिकेट मंच पर भी लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

2000 बैच के पूर्व छात्रों ने किया 100 करोड़ का ऐतिहासिक दान

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IIT Kanpur Donation : को लेकर एक बड़ी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के साल 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने अपने सिल्वर जुबली पुनर्मिलन समारोह के दौरान संस्थान को 100 करोड़ रुपए दान करने की घोषणा की है। यह दान न केवल संस्थान के इतिहास में खास है, बल्कि एक ही बैच द्वारा दिया गया अब तक का सबसे बड़ा योगदान भी माना जा रहा है।

IIT कानपुर को हर साल पूर्व छात्रों से करोड़ों रुपए का सहयोग मिलता है, जिसका उपयोग शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में किया जाता है। अगर पिछले साल की बात करें तो विभिन्न एलुमनी मीट के माध्यम से संस्थान को कुल 265.24 करोड़ रुपए का दान प्राप्त हुआ था। हालांकि, इस बार खास बात यह है कि यह पूरी राशि केवल साल 2000 बैच के छात्रों ने दी है।

IIT Kanpur Donation से मिलने वाली इस राशि का उपयोग ‘मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी’ (MSTAS) की स्थापना के लिए किया जाएगा। इस दान में सबसे बड़ा योगदान इनमोबी और ग्लांस के संस्थापक नवीन तिवारी का है। संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि यह दान पूर्व छात्रों और IIT कानपुर के मजबूत और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इससे शैक्षणिक और शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और विकास के नए अवसर खुलेंगे।

गौरतलब है कि IIT कानपुर के अलावा अन्य शिक्षण संस्थानों को भी एलुमनी का भरपूर सहयोग मिल रहा है। IIT BHU को पिछले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपए से अधिक का दान मिला है, जिससे लाइब्रेरी और रिसर्च सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स विकसित किए जा रहे हैं। वहीं MNNIT में पूर्व छात्रों के सहयोग से अत्याधुनिक स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का निर्माण हो रहा है।

अगर इसी तरह देश के प्रमुख संस्थानों से निकले छात्र अपने अल्मा मेटर को सहयोग देते रहें, तो IIT Kanpur Donation जैसी पहलें भारतीय शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

“मैं तो खुद वनवास भुगत रहा हूं”, इंदौर में छलका जीतू पटवारी का दर्द; क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं?

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इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह और गुटबाजी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन इस बार खुद प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक बयान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर प्रवास के दौरान अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच पटवारी का दर्द छलक उठा, जिसने पार्टी के भीतर चल रहे तालमेल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार्यकर्ता के सामने छलकी बेबसी: “मैं तो वनवास में हूं”
इंदौर में एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान जब कार्यकर्ताओं ने संगठन और अपनी समस्याओं को लेकर पटवारी से बात की, तो पीसीसी चीफ ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, “भैया, मैं तो खुद वनवास भुगत रहा हूं।” जीतू पटवारी का यह छोटा सा वाक्य अब मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़े मायने निकाल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल हंसी-मजाक नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर उनकी स्थिति और वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके समीकरणों की ओर इशारा करता है।

क्या वरिष्ठों से तालमेल की कमी है वजह?
पटवारी के इस “वनवास” वाले बयान के बाद कांग्रेस के भीतर समन्वय को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं:

अनदेखी का आरोप: क्या कांग्रेस के भीतर जीतू पटवारी की बातों की सुनवाई नहीं हो रही है?

वरिष्ठ नेताओं से दूरी: क्या कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के साथ पटवारी का तालमेल नहीं बैठ पा रहा है?

संगठन में खींचतान: हाल के दिनों में कई नियुक्तियों को लेकर जिस तरह के विवाद सामने आए, क्या यह “वनवास” उसी गुटबाजी का परिणाम है?

बीजेपी को मिला हमला करने का मौका
जीतू पटवारी के इस बयान के बाद बीजेपी ने भी चुटकी लेना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि जिस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष खुद को “वनवासी” और “बेबस” महसूस कर रहा हो, वह पार्टी जनता की लड़ाई क्या लड़ेगी।

एक्स-फैक्टर: जीतू पटवारी ने विधानसभा चुनाव में अपनी हार के बाद पीसीसी चीफ की कमान संभाली थी, लेकिन तब से लेकर अब तक संगठन विस्तार और बड़े नेताओं को साथ लेकर चलने में उन्हें कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऑस्ट्रेलिया ने कमिंस-स्मिथ को किया बाहर, टेस्ट की बेस्ट 11 में शामिल हुए 3 भारतीय खिलाड़ी

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क्रिकेट | क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने साल 2025 में टेस्ट के बेस्ट खिलाड़ियों की प्लेइंग इलेवन चुनी है. अपनी टीम में उसने ना तो पैट कमिंस को जगह दी है और ना ही स्टीव स्मिथ को. जबकि ये दोनों ही खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम के दो मजबूत स्तंभ हैं. पैट कमिंस तो कप्तान भी हैं. वहीं स्टीव स्मिथ टीम के सबसे धुरंधर बल्लेबाज, जिन्होंने साल 2025 में जरूरत पड़ने पर टीम की कप्तानी की बागडोर भी संभाली. मगर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की साल 2025 की टेस्ट XI से कमिंस और स्मिथ दोनों बाहर हैं |

कमिंस- स्मिथ नहीं, इन्हें मिला मौका

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की साल 2025 की टेस्ट की बेस्ट प्लेइंग इलेवन में हालांकि सबसे ज्यादा जगह पाने वाले खिलाड़ी ऑस्ट्रेलियाई ही हैं. मगर उनमें कमिंस और स्मिथ नहीं हैं. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कुल 4 ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी साल 2025 की टेस्ट इलेवन में चुने हैं, जिनमें मिचेल स्टार्क, ट्रेविस हेड, एलेक्स कैरी और स्कॉट बोलैंड हैं |

3 भारतीय खिलाड़ियों को टेस्ट XI में जगह

ऑस्ट्रेलियाईयों के अलावा भारत से 3 खिलाड़ियों को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट इलेवन में जगह मिली है. भारत की ओर से केएल राहुल, शुभमन गिल और जसप्रीत बुमराह ने अपनी जगह पक्की की है | वहीं इनके अलावा रवींद्र जडेजा को टीम का 12वां खिलाड़ी बनाया गया है |

टेंबा बावुमा को बनाया कप्तान

इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका से 2-2 खिलाड़ियों को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने साल 2025 की अपनी टेस्ट इलेवन में चुना है. इंग्लैंड से जगह बनाने वाले जो रूट और बेन स्टोक्स रहे. वहीं साउथ अफ्रीका से उसके टेस्ट कप्तान टेंबा बावुमा के अलावा स्पिनर साइमन हार्मर को जगह मिली है |

टीम में किसका क्या रोल?

टेंबा बावुमा को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टेस्ट इलेवन का कप्तान बनाया है. वहीं केएल राहुल और ट्रेविस हेड को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी है. जो रूट को नंबर 3 पर जबकि शुभमन गिल को नंबर 4 की पोजिशन अपनी टेस्ट इलेवन में उसने दी. इसके अलावा स्टार्क, बुमराह और बोलैंड उस टीम में पेस अटैक के सिपाहसलार होंगे |क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने टीम में बस एक स्पिनर को जगह दी है |

 नववर्ष पर मथुरा वृंदावन में उमड़ेगी भारी भीड़, 29 से 5 जनवरी तक यात्रा से करें परहेज 

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मथुरा। नववर्ष 2026 के मौके पर श्री बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए वृंदावन में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखकर मंदिर प्रशासन और हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने 29 से 5 जनवरी 2026 तक अत्यधिक भीड़ रहने की चेतावनी देकर श्रद्धालुओं से इस अवधि में वृंदावन यात्रा टालने या भीड़ की स्थिति का आकलन कर ही आने की अपील की है।
हर साल नए साल के मौके पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार भी प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना से बचने के लिए यह एडवाइजरी जारी की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर में प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे प्रशासन द्वारा तय किए गए रास्तों का ही उपयोग करें और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। किसी भी स्थिति में धक्का-मुक्की या जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपने साथ बैग, कीमती सामान या अनावश्यक वस्तुएं न लाएं। जूते-चप्पल निर्धारित स्थानों पर ही उतारें, जिसके लिए मुख्य मार्गों पर विशेष व्यवस्था की गई है। भीड़भाड़ के दौरान जेबकतरे और मोबाइल चोर सक्रिय रहते हैं, इसलिए अपने सामान और बच्चों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है। परिजनों से बिछड़ने की स्थिति से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की जेब में नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखी हुई पर्ची रखने की सलाह दी गई है। इससे किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और पुलिस को मदद करने में आसानी होगी। 

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News Desk

जीतू पटवारी और संजय शुक्ला को बड़ी राहत, राजवाड़ा धरना मामले में कोर्ट ने किया दोषमुक्त

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Indore News : इंदौर की विशेष अदालत (MP-MLA Court) ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को एक बड़े कानूनी मामले में राहत दी है। कोरोना महामारी के दौरान कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन कर राजवाड़ा पर धरना देने के आरोपी जीतू पटवारी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल और विनय बाकलीवाल को कोर्ट ने दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया है।

क्या था 13 जून 2020 का पूरा घटनाक्रम?
बता दें कि जून 2020 में जब पूरा देश कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की बंदिशों से गुजर रहा था, तब इंदौर के राजवाड़ा स्थित देवी अहिल्या प्रतिमा के नीचे तत्कालीन कांग्रेस विधायकों ने एक प्रदर्शन किया था।

सराफा थाना पुलिस ने आरोप लगाया था कि इन नेताओं ने बिना अनुमति भीड़ जुटाई और तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के धारा 144 के आदेशों का उल्लंघन किया। पुलिस ने इनके खिलाफ भादवि की धारा 188 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था।

कोर्ट में क्यों टिक नहीं पाया पुलिस का केस?
विशेष न्यायाधीश श्री देव कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं, जो बचाव पक्ष के लिए जीत का आधार बनीं:

स्वयं ही फरियादी और विवेचक: इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी अमृता सोलंकी ही फरियादी थीं और उन्होंने ही मामले की जांच (Investigating Officer) की। कोर्ट ने इसे निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के विपरीत माना।

स्वतंत्र गवाहों की कमी: राजवाड़ा जैसे सार्वजनिक स्थान पर हुई घटना में पुलिस ने किसी भी आम नागरिक को गवाह नहीं बनाया। सभी गवाह सराफा थाने के ही पुलिसकर्मी थे।

तकनीकी साक्ष्यों का अभाव: पुलिस ने दावा किया था कि प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है, लेकिन कोर्ट में कोई भी वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

स्पष्टता की कमी: कोर्ट में गवाही के दौरान पुलिसकर्मी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि नेताओं की मांगें क्या थीं या प्रदर्शन में असल में कितने लोग शामिल थे।

एडवोकेट सौरभ मिश्रा और जय हार्डिया की दलीलें
नेताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सौरभ मिश्रा और जय हार्डिया ने कोर्ट को बताया कि यह मामला केवल राजनीतिक आधार पर दर्ज किया गया था। पुलिस यह साबित करने में विफल रही कि वहां वास्तव में किसी आदेश का उल्लंघन हुआ या उससे जनहानि का खतरा पैदा हुआ। साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए अदालत ने सभी चारों नेताओं को ससम्मान बरी करने का आदेश दिया।