खत्म हुआ इंतजार, रिलीज हुआ ‘बॉर्डर 2’ का ‘घर कब आओगे’ गीत ; इन गायकों की आवाज ने जीता दिल

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फैंस का इंतजार खत्म हुआ और ‘बॉर्डर 2’ का मच अवेटेड गाना ‘घर कब आओगे’ आज रिलीज हो गया है। हालांकि, अभी मेकर्स ने सिर्फ गाने का ऑडियो जारी किया है। गाने का वीडियो वर्जन शाम को रिलीज किया जाएगा। इस गाने की घोषणा के बाद से ही फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अभी गाने का ऑडियो वर्जन रिलीज किया गया है, जिसे ऑडियो प्लेटफॉर्म्स पर सुना जा सकता है।

इन गायकों ने दी है आवाज

घर कब आओगे’ फिल्म ‘बॉर्डर’ के लोकप्रिय गीत ‘संदेसे आते हैं’ का री-क्रिएटेड वर्जन है। जिसे उसी धुन के साथ नए अंदाज और लिरिक्स में पेश किया गया है। जावेद अख्तर द्वारा लिखित और अनु मलिक के संगीत से सजे ‘संदेसे आते हैं’ के इस नए वर्जन को मनोज मुंतशिर ने लिखा है। जबकि संगीत मिथुन का है। पिछली बार इस गाने को सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ ने गाया था। लेकिन इस बार गाने में दो नहीं बल्कि चार गायकों की आवाज है। इस बार गाने को सोनू निगम के साथ अरिजीत सिंह, दिलजीत दोसांझ और विशाल मिश्रा ने अपनी आवाज दी है। इन चारों की आवाज में इस गाने को सुनकर फैंस उत्साहित हैं।

23 जनवरी को रिलीज होगी फिल्म

अनुराग सिंह द्वारा निर्देशित ‘बॉर्डर 2’ 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होनी है। फिल्म में सनी देओल के साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। जबकि मोना सिंह, सोनम बाजवा, आन्या सिंह और मेधा राणा भी फिल्म में अहम किरदारों में दिखाई देंगे। देशभक्ति से लबरेज इस फिल्म का टीजर थोड़े दिन पहले रिलीज किया गया था। टीजर को फैंस का मिला-जुला रिएक्शन ही हासिल हुआ था। अब दर्शक फिल्म का ट्रेलर का इंतजार कर रहे हैं। देखना ये है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कैसा कमाल दिखा पाती है।

कर्नाटक चुनाव आयोग के सर्वे में EVM पास, BJP ने राहुल गांधी पर बोला हमला

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बेंगलुरु।  कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव पर सर्वे में ईवीएम पर जनता ने मजबूत भरोसा दिखाया है। इस सर्वे के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। सर्वे का शीर्षक ‘नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार पर किए गए अंतिम सर्वे का मूल्यांकन’ था। इसमें 83.61 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा है। कुल मिलाकर 69.39 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि ईवीएम सही नतीजे देती है, जबकि 14.22 फीसदी ने इस बात से पूरी तरह सहमति जताई। यह सर्वे 5,100 प्रतिभागियों के बीच 102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। इसमें बंगलूरू, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूर प्रशासनिक क्षेत्रों को शामिल किया गया। कर्नाटक सरकार ने सर्वे को मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार के माध्यम से कराया गया था। आंकड़ों में सबसे अधिक भरोसा कलबुर्गी में देखा गया, जहां 83.24 फीसदी ने सहमति और 11.24 फीसदी ने पूरी सहमति जताई कि ईवीएम भरोसेमंद हैं। मैसूर में 70.67 फीसदी ने सहमति और 17.92 फीसदी ने पूर्ण सहमति जताई। बेलगावी में 63.90 फीसदी ने सहमति और 21.43 फीसदी ने पूरी सहमति जताई। बंगलूरू में पूर्ण सहमति सबसे कम 9.28 फीसदी रही। हालांकि 63.67 फीसदी ने सहमति जताई। बंगलूरू में तटस्थ मत सबसे अधिक 15.67 फीसदी रहे।

भाजपा ने किया पलटवार 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई बार भाजपा और केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर ईवीएम में हेराफेरी और ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। इस सर्वे के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने एक्स पर लिखा, वर्षों से राहुल गांधी पूरे देश में यही कहानी सुनाते रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र ‘खतरे’ में है, ईवीएम ‘अविश्वसनीय’ हैं और हमारे संस्थानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लेकिन कर्नाटक ने बिल्कुल अलग कहानी बताई है। भाजपा ने कहा कि राज्यव्यापी सर्वे ने यह दिखाया कि लोग चुनाव, ईवीएम और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा, यह कांग्रेस के मुंह पर ‘एक तमाचा’ है। भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव मतपत्रों का उपयोग कर रही कर्नाटक सरकार की आलोचना की। पार्टी ने कहा, जनता का स्पष्ट भरोसा होने बावजूद सिद्धारमैया सरकार कर्नाटक को पीछे ले जा रही है। स्थानीय चुनावों में के मतपत्रों की घोषणा कर रीह है, जो हेरफेर, देरी और दुरुपयोग के लिए जाना जाता है। वहीं, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी कर्नाटक सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर किए गए ताजा सर्वे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी और (सांसद) राहुल गांधी ने कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने कहा, कर्नाटक निगरानी एवं मूल्यांकन प्राधिकरण यानी केएमईए ने 2024 के लोकसभा चुनावों पर यह सर्वे किया, जिसमें 5,100 लोग शामिल हुए। सर्वे बंगलूरू से लेकर बेलगाम और मैसूर तक पूरे राज्य में102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया और 91.3 फीसदी लोगों ने माना कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं।  शाइना एनसी ने आगे कहा, इससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और चुनाव आयोग पर सभी संदेह खत्म हो जाते हैं। मुझे लगता है कि अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए देश से माफी मांगने का समय आ गया है, क्योंकि उन्होंने उन्होंने केवल झूठ फैलाए हैं और यहां आपने देखा है कि इससे इन दावों का हमेशा के लिए अंत हो जाता है। एक सशक्त लोकतंत्र की स्वतंत्रत एजेंसियों और न्यायसंगत कार्यप्रणाली के मामले में यह उनके मुंह पर करारा तमाचा है। 
 

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किस महीने शुरू होगी बुलेट ट्रेन की पहली यात्रा? रेल मंत्री के बड़े ऐलान से मचा हड़कंप

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Bullet Train: भारत के रेलयात्रियों का बुलेट ट्रेन में बैठने का सपना जल्द पूरा होने वाला है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे कॉरिडोर पर ट्रेन जल्द ही दौड़ती हुई नजर आएगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना को लेकर तस्वीर साफ कर दी है. उनके मुताबिक आम लोग जल्द ट्रेन की सवारी कर सकेंगे, इसे चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा.

सूरत से बिलमोरा के बीच चलेगी ट्रेन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन के संचालन के बारे में बड़ा अपडेट दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बुलेट ट्रेन चरणबद्ध तरीके से खोली जाएगी. इसके पहले चरण में सूरत से बिलमोरा का सेक्शन ओपन किया जाएगा. इसके बाद वापी से अहमदाबाद, महाराष्ट्र के ठाणे से गुजरात के अहमदाबाद तक हाई स्पीड ट्रेन चलेगी. सबसे आखिरी चरण में मुंबई और अहमदाबाद के बाद बुलेट ट्रेन का कॉरिडोर पूरा होगा. रेल मिनिस्टर के अनुसार भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगी. इसका संचालन आम लोगों के शुरू हो जाएगा.

320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किमी लंबा हाई स्पीड कॉरिडोर है. इस कॉरिडोर को 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों के संचालन के लिए डिजाइन किया गया है. दोनों प्रमुख शहरों के बीच सफर 2.17 घंटे में पूरा होगा.

गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन को बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, इसकी अंतिम तिथि दिसंबर 2023 तय की गई थी. भूमि अधिग्रहण और अन्य समस्याओं की वजह से इस प्रोजेक्ट में देरी हुई. अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ी सौगात दी है, अगले साल यानी 2027 से बुलेट ट्रेन दौड़ेगी.

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क्या आप भी बार-बार खाते हैं पेनकिलर्स, जानें ये सेहत के लिए कितने खतरनाक?

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आज की तेज भागती जिंदगी में दर्द होना जैसे आम बात हो गई है. सिरदर्द हो, कमर दर्द, जोड़ों में दर्द, पीरियड्स का दर्द या फिर हल्का बुखार, हममें से ज्यादातर लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे सीधे मेडिकल स्टोर जाकर एक पेनकिलर खा लेते हैं. लोग आइबुप्रोफेन, डायक्लोफेनाक, नेप्रोक्सन या टाइलेनॉल जैसी दवाइयां बार-बार लेने लगते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो दवा आपको तुरंत आराम देती है, वही धीरे-धीरे आपके शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट और डॉक्टरों की चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स लेना खतरनाक आदत बन सकती है.  तो आइए जानते हैं कि बार-बार पेनकिलर्स लेना सेहत के लिए कितना खतरनाक है. 

पेनकिलर्स कितनी ज्यादा ली जा रही हैं?

एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल 1 अरब से ज्यादा बार NSAIDs (दर्द निवारक दवाइयां) दी जाती हैं. करीब 3 करोड़ लोग रोजाना इन दवाओं का सेवन करते हैं.  ये आंकड़े बताते हैं कि दर्द की गोली अब जरूरत नहीं, बल्कि आदत बनती जा रही है. NSAIDs का मतलब नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स है. ये ऐसी दवाइयां हैं जो दर्द कम करती हैं, सूजन घटाती हैं, बुखार उतारती हैं. इनका यूज आमतौर पर सिरदर्द, सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू या कोरोना, मोच, खिंचाव, पीरियड्स का दर्द और गठिया (Arthritis)ल जैसी समस्याओं में किया जाता है. 

बार-बार पेनकिलर्स लेना सेहत के लिए कितना खतरनाक है

1. पेनकिलर्स आंतों को  नुकसान – लोग आइबुप्रोफेन जैसी पेनकिलर्स  दवाइयां लेते हैं, उनमें से 75 प्रतिशत लोगों की आंतों में सूजन आ जाती है. हर 4 में से 1 व्यक्ति को पेट में अल्सर हो सकता है. पेनकिलर्स आंतों तक खून पहुंचाने वाली छोटी-छोटी नसों में ब्लड फ्लो कम कर देती हैं. जब आंतों को पूरा खून नहीं मिलता तो आंतों की परत कमजोर हो जाती है, बैक्टीरिया और जहरीले तत्व शरीर में घुसने लगते हैं, सूजन और जलन शुरू हो जाती है इसके लक्षण पेट दर्द, जलन, उल्टी, काले रंग का मल, IBS जैसी समस्याएं हो सकते हैं.

2. किडनी और लिवर पर भी पड़ता है असर – पेनकिलर्स किडनी की नसों को भी प्रभावित करती हैं. धीरे-धीरे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम हो जाती है. कई बार तब पता चलता है जब नुकसान बहुत बढ़ चुका होता है. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि समय-समय पर ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराना चाहिए.

3. लिवर के लिए भी खतरा – टाइलेनॉल जैसी पेनकिलर्स दवाइयां लोग सुरक्षित मानते हैं, लेकिन अमेरिका में 50 प्रतिशत से ज्यादा लिवर फेलियर के मामलों की वजह यही दवा है. खासतौर पर सर्दी-जुकाम में कई दवाओं में टाइलेनॉल मिला होता है. अनजाने में ओवरडोज हो जाता है, इसलिए दवा लेने से पहले लेबल पढ़ना बेहद जरूरी है. 

4. सिरदर्द की दवा सिरदर्द बढ़ा सकती है – एक्सपर्ट्स का कहना है  अगर आप महीने में 10–15 दिन से ज्यादा पेनकिलर लेते हैं, तो शरीर उन पर निर्भर हो जाता है. दवा न लेने पर सिरदर्द शुरू हो सकता है. इसे Medication Overuse Headache कहते हैं. 

बेल्लारी में भिड़े बीजेपी-कांग्रेस कार्यकर्ता, पुलिस ने विधायक को भी बनाया आरोपी; जानें पूरा मामला

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नए साल 2026 के पहले ही दिन कर्नाटक के बेल्लारी जिले में राजनीतिक तनाव हिंसा में बदल गया। Bellary Violence News के अनुसार, अवंबावी इलाके में पोस्टर और बैनर लगाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हो गई, जो देखते ही देखते फायरिंग और पथराव तक पहुंच गई। इस घटना में कांग्रेस कार्यकर्ता राजशेखर की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए हैं।

बैनर लगाने से शुरू हुआ विवाद

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस विधायक नारा भारत रेड्डी के समर्थक भाजपा विधायक जनार्दन रेड्डी के घर के सामने सड़क पर बैनर लगा रहे थे। इसी दौरान कहासुनी शुरू हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई। पुलिस के अनुसार, दोनों गुटों के बीच पथराव और फायरिंग हुई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस की कार्रवाई और धारा 144

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने के लिए भीड़ को तितर-बितर किया। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। Bellary Violence News में पुलिस ने पुष्टि की है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप

कांग्रेस विधायक भारत रेड्डी ने आरोप लगाया कि हमला भाजपा विधायक जनार्दन रेड्डी के समर्थकों ने किया। वहीं, जनार्दन रेड्डी ने पलटवार करते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई और उनके घर के सामने जानबूझकर गोलीबारी की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाल्मीकि की मूर्ति के अनावरण की आड़ में शहर में दंगा भड़काने की कोशिश की जा रही थी।

शहर में तनाव, जांच जारी

घटना के बाद बेल्लारी में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। सिरुगुप्पा रोड पर ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। Bellary Violence News ने एक बार फिर राज्य में राजनीतिक टकराव की गंभीरता को उजागर कर दिया है।

 

 

 

आचार्य उमेश गुरु जी: वैदिक ज्योतिष और वास्तु के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने वाला विश्वसनीय नाम

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तिजारा, अलवर (राजस्थान) | विशेष समाचार

तेज़ी से बदलते सामाजिक और व्यावसायिक परिवेश में जब शिक्षा, करियर, विवाह और भविष्य से जुड़े निर्णय लोगों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं, ऐसे समय में आचार्य उमेश गुरु जी तिजारा, अलवर से वैदिक ज्योतिष और समग्र आध्यात्मिक मार्गदर्शन के क्षेत्र में एक सशक्त और भरोसेमंद नाम बनकर उभरे हैं।
उमेश यादव ‘ब्रेन गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध आचार्य उमेश गुरु जी एक शिक्षाविद्, अनुभवी एस्ट्रोलॉजर, पर्यावरणविद् तथा न्यूरो एवं मर्म थेरेपिस्ट हैं, जो प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं से जोड़कर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

वैदिक ज्ञान और आधुनिक सोच का संतुलित संगम

आचार्य उमेश गुरु जी वैदिक ज्योतिष, अंकज्योतिष, मोबाइल ज्योतिष एवं वास्तु कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत हैं। वे शिक्षा, करियर, शादी, विदेश यात्रा, व्यवसाय, पारिवारिक जीवन से जुड़े प्रश्नों के साथ-साथ सभी प्रकार के रत्न एवं रुद्राक्ष परामर्श भी प्रदान करते हैं। उनकी विशेषता यह है कि वे केवल समस्या बताते नहीं, बल्कि उसके पीछे के कारण और व्यावहारिक समाधान भी स्पष्ट रूप से समझाते हैं।

20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने हजारों लोगों को सही निर्णय लेने, आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायता की है। यही कारण है कि आज उनके साथ जुड़ने वाले लोगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

हजारों लोगों का विश्वास, सिद्ध परिणाम

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जीवन के हर क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ सेवाएँ

आचार्य उमेश गुरु जी द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं:

जन्म कुंडली का विस्तृत विश्लेषण

विवाह एवं कुंडली मिलान

अंकज्योतिष द्वारा व्यक्तित्व और भाग्य विश्लेषण

घर और व्यवसाय के लिए वास्तु परामर्श

रत्न एवं रुद्राक्ष चयन और धारण विधि

मुहूर्त एवं पंचांग सेवाएँ

रेकी हीलिंग और ऊर्जात्मक संतुलन

हस्ताक्षर विश्लेषण और ज्योतिषीय उपाय

इन सेवाओं का उद्देश्य केवल भविष्य बताना नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन को संतुलित, सफल और सकारात्मक बनाना है।

सरल, गोपनीय और व्यक्तिगत परामर्श व्यवस्था

यहाँ व्यक्तिगत एक-से-एक परामर्श, पारिवारिक ज्योतिष सलाह, विवाह एवं करियर योजना बैठकें उपलब्ध हैं। परामर्श की प्रक्रिया पूरी तरह सरल और गोपनीय रखी जाती है।
फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट लेकर ऑनलाइन (वीडियो कॉल) और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से परामर्श लिया जा सकता है।

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क्या सिर्फ हेल्दी फूड खाने से साफ हो जाती हैं खून की नसें? 99 पर्सेंट लोग कर बैठते हैं ये गलतियां

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 हार्ट से जुड़ी बीमारियां आज पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बन चुकी हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं है. नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के मुताबिक, भारत में हार्ट रोगों का बोझ लगातार बढ़ रहा है और साल 2020 में इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा 22.6 लाख से 47.7 लाख के बीच आंका गया था. दिल की सेहत काफी हद तक हमारे खानपान पर निर्भर करती है. हालांकि ऐसा कोई जादुई भोजन नहीं है जो नसों को पूरी तरह साफ कर दे, लेकिन सही डाइट अपनाकर दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है और हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या सही खाना खाने से आपके खून की नसें साफ हो जाती हैं.

कैसे बंद होती हैं खून की नसें

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि खून की नसें बंद कैसे होती हैं. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस या कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहा जाता है. इसमें नसों की अंदरूनी दीवारों पर फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, जिसे प्लाक कहा जाता है. धीरे-धीरे ये जमा परतें नसों को संकरा कर देती हैं, जिससे दिल तक खून का प्रवाह कम हो जाता है. इसका नतीजा हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरी गंभीर समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है. हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग और खराब खानपान इसके मुख्य कारण माने जाते हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, दिल को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और बीन्स शामिल करना चाहिए. इसके साथ ही कम फैट वाले या फैट-फ्री डेयरी प्रोडक्ट्स, मछली, चिकन, नट्स और नॉन-ट्रॉपिकल ऑयल का सेवन फायदेमंद होता है. वहीं, ज्यादा चीनी, मीठे पेय पदार्थ, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, सैचुरेटेड फैट और प्रोसेस्ड मीट से दूरी बनाना जरूरी है.

क्या  हेल्दी फूड खाने से साफ हो जाती हैं खून की नसें?

इसका जवाब है नहीं. हेल्दी फूड आपके सेहत के लिए जरूरी हैं, लेकिन एक बाद का ध्यान रखना चाहिए कि किसी एक चीज पर नहीं, बल्कि पूरी डाइट की गुणवत्ता पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. आपको ब्रेड, पास्ता,चीनी, मैदे के साथ-साथ फ्रूट जूस को भी छोड़ना होगा, क्योंकि ये शरीर में इन्सुलिन की मात्रा को बढ़ाते हैं. रोज-रोज इन्सुलीन हाई होने से आर्टरीज की दीवार पर क्रेक आ जाते हैं. इसको रोकने का सबसे आसान उपाय है फास्टिंग, इससे शरीर को एक ब्रेक मिलता है कि वह शरीर के भीतर चल रहे पुराने डैमेज को सही कर सके और इससे आर्टरीज की सफाई होती है. इसे ऑटोफैगी के नाम से जाना जाता है. इससे इन्सुलिन बेहतर काम करता है और भूख और क्रेविंग आपके अंदर कम हो जाती हैं और हार्ट अटैक का रिस्क कम हो जाता है.  अगर आप 12 से 14 घंटे का गैप अपने डिनर और ब्रेकफास्ट के बीच में रखते हैं, तो यह आपके लिए बेहतर होता है. आप कम समय से शुरू करके आगे समय बढ़ा सकते हैं. हालांकि एक बात का ध्यान रखना है कि अगर आपको किसी तरह की कोई दिक्कत है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही फास्टिंग करना चाहिए.

हिमंता बिस्वा सरमा का कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर बड़ा आरोप

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस नेताओं को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। इस बार उनके निशाने पर असम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई हैं। Assam CM Statement के तहत सीएम सरमा ने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई और उनके परिवार के पाकिस्तान से संबंध हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे जल्द ही इन आरोपों से जुड़े सबूत जनता के सामने पेश करेंगे। वहीं, गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ‘पैजान’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। चर्चा है कि यह शब्द गौरव गोगोई के संदर्भ में प्रयोग किया गया। जब मुख्यमंत्री से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पहले सोशल मीडिया की जानकारी से इनकार किया। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गौरव गोगोई और उनके परिवार का पाकिस्तान से कनेक्शन है और इसका खुलासा जल्द किया जाएगा।

पहले भी लगाए जा चुके हैं गंभीर आरोप

Assam CM Statement के दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वे पहले भी गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित संबंधों का आरोप लगा चुके हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी, जिसने पिछले साल सितंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में ऐसे तथ्यों की बात कही गई, जो देश की संप्रभुता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग

सीएम सरमा ने कहा कि अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाएगी, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो एआई से तैयार किया गया हो सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक माहौल जरूर गर्म हो गया है। फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, अब सबकी नजर इस पर है कि जांच होती है या नहीं और उसके नतीजे क्या सामने आते हैं।

कमर के साइज से भी पता चलता है डायबिटीज का खतरा, दिक्कत बढ़ने से पहले कैसे करें बचाव?

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हम में से बहुत से लोगों को नहीं पता कि हमारी बढ़ती कमर या कमर में जमा होती चर्बी हमारे शरीर को और शरीर के अंगों को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है और कई तरह की बीमारियों को हमारे शरीर में प्रवेश करवाती है. रिपोर्ट के अनुसार, हमारी बड़ी कमर या कमर का बढ़ता घेरा सीधे हमारे लिवर पर हानिकारक असर करता है और हमें डायबिटीज होने का भी खतरा रहता है. कमर की बढ़ती चर्बी धीरे लिवर पर असर करके फैटी लिवर की समस्या का कारण बनती है. हमारे लिवर में जमा चर्बी शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है, जिससे भविष्य में हमें टाइप 2 डायबिटीज होने का मुख्य कारण बनता है. कमर में बढ़ी चर्बी कई तरह की मेटाबॉलिक बीमारियां होने के खतरे को बढ़ाती है.

कमर की चर्बी और लिवर के बीच क्या है संबंध?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हमारी कमर में बढ़ता मोटापा यानी जमा होती चर्बी हमारे शरीर में कई तरह की मेटाबॉलिक बीमारियों को जन्म देती है, जिनका सीधा असर हमारे लिवर पर पड़ता है, जो फैटी लिवर की बीमारी का मुख्य कारण है. हमारे शरीर में बढ़ती चर्बी व मोटापा हमारे शरीर में सूजन होने के खतरे को बढ़ाता है, जिसका सीधा असर हमारे लिवर पर होता है, जिससे लिवर में सूजन होने की संभावना बढ़ती है, जो लिवर की बीमारियां जैसे फाइब्रोसिस होने के खतरे को बढ़ाती है.

भारतीयों में क्यों ज्यादा है फैटी लिवर का खतरा

शोध के अनुसार, भारतीयों को अन्य देशों और यूरोपीय देशों के मुकाबले फैटी लिवर और डायबिटीज होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आपकी कमर सिर्फ 5 प्रतिशत तक भी बढ़ जाती है यानी चर्बी कमर के आसपास बढ़ जाती है, तो आपको फैटी लिवर और डायबिटीज होने का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. अगर आपके शरीर पर चर्बी ज्यादा नहीं है, लेकिन आपके शरीर के अंगों पर चर्बी जमा है, तो भी आपको बीमारी होने का खतरा रहता है. इसलिए अपने वजन के साथ साथ अपने शरीर के अंगों का भी विशेष ध्यान रखें.

बढ़ती कमर कैसे बढ़ाती है बीमारियों का खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, लिवर में बढ़ती चर्बी हमारे लिवर को नुकसान पहुंचाती ही है, लेकिन यह हमें और भी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ाती है, जिसमें सबसे ज्यादा आम है डायबिटीज. जब हमारे शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होती है, तो इससे हमारे लिवर में सूजन पैदा होती है और इसी सूजन के कारण शरीर में मौजूद इंसुलिन अपना काम सही से नहीं कर पाती, यानी इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति बनती है, जिस कारण हमें डायबिटीज होने का खतरा रहता है. अगर आपको डायबिटीज से बचाव करना है, तो कमर और कूल्हे के अनुपात को जांचकर आप डायबिटीज के खतरे का अंदाजा लगा सकते हैं.

अब चुटकियों में होगा FASTag का KYC, NHAI ने नए वाहन मालिकों के लिए प्रक्रिया को बनाया बेहद आसान

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FASTag Users KYC Rules: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority Of India) ने वाहन चालकों को बड़ी राहत दी है. NHAI ने 1 फरवरी 2026 से फास्टैग (Fastag) KYV (Know Your Vehicle) प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला लिया है. इस फैसले का उद्देश्य फास्टैग एक्टिवेशन के बाद यूजर्स को होने वाले अनावश्यक उत्पीड़न से बचाना है.

कुछ मामलों में KYV जरूरी
NHAI ने साफ किया है कि पहले से ही कारों के लिए जारी किए गए फास्टैग पर भी अब नियमित रूप से केवाईवी कराना जरूरी नहीं होगा. इस नियम के बदलाव के बाद भी कुछ विशेष मामलों में ही KYV की आवश्यकता होगी. इनमें FASTag के ढीले होने, गलत तरीके से जारी होने अथवा दुरुपयोग से संबंधित शिकायतें शामिल हैं. NHAI के मुताबिक यदि फास्टैग से जुड़ी कोई शिकायत नहीं होती है, तो मौजूदा कार FASTag पर KYV प्रक्रिया लागू नहीं की होगी. साथ ही NHAI ने FASTag जारी करने वाली बैंकों के लिए प्री-एक्टिवेशन वैलिडेशन प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है.

अब तक क्या व्यवस्था है?
KYV फास्टैग यूजर्स के लिए एक वेरिफिकेशन का प्रोसेस थी, जो यह सुनिश्चित करती थी कि Fastag उसी वाहन पर लगा हो जिसके लिए जारी किया गया है. इससे टोल टैक्स के दुरुपयोग को रोका जा सके, इससे कर्मिशियल वाहन नॉन कमर्शियल वाहनों का फास्टैग उपयोग नहीं कर पाएंगे. KYV के लिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और वाहन की फोटो अपलोड करनी होती थी. ये प्रोसेस हर 3 साल में दोहराई जाती थी, और यह FASTag को एक्टिव रखने के लिए जरूरी भी थी. वाहनों चालकों को इससे अब निजात मिलेगी.

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News Desk