बिहार में भिखारियों को मिलेंगे 10-10 हजार, जानें क्या है सरकार की योजना

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पटना: बिहार सरकार (Bihar Goverment) लगातार जनता के ऊपर पैसों की बरसात कर रही है. अब नीतीश (Nitish) सरकार वैसे लोगों को पैसे दे रही है, जो सड़क किनारे भीख (Begging) मांगकर अपना जीवन यापन कर रहे है. सरकार इन भिक्षुकों को चिंहित कर समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समूह बनाकर 10-10 हजार की राशि (Money) बैंक खातों (Bank Account) में डाल रही है. जिससे वह छोटा रोजगार शुरू कर अपना जीवन यापन कर सकें.

सरकार वर्तमान में भीख मांगने की मजबूरी को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना चला रही है, जो पूर्णियां सहित राज्य के 10 जिलों में संचालित है. पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण में 19 पुनर्वास केंद्र समाज कल्याण विभाग की ओर से ये योजना संचालित की जा रही है.

राज्य के इन 10 जिलों में भिक्षुकों को खाना, कपड़ा, इलाज, कंसल्टेशन, योग और मनोरंजन जैसी सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त में दी जा रही हैं. इसके अलावा 14 अन्य जिलों में नए पुनर्वास गृह खोलने की प्रक्रिया चल रही है और भोजपुर जिले में 2 हाफ-वे होम बनाए जा रहे हैं.

पूर्णियां में चल रहे सेवा कुटीर की उत्प्रेरक अफसाना खातून ने बताया कि सड़क किनारे भीख मांगने वाले को पहले चिन्हित किया जाता है. अगर कोई स्वास्थ्य है तो फिर उन्हें भिक्षावृत्ति के धंधे से दूर करने का प्रयास किया जाता है. उनका एक ग्रुप बनाकर पहले सामूहिक बचत के बारे में बताया जाता है फिर सरकार के द्वारा मिलने वाली पहली किस्त 10 हजार रुपए भिक्षावृत्ति छोड़ चुके लोगों को दिया जाता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूर्णियां में 10 ग्रुप सफलतापूर्वक चल रहे हैं, जिसमें कुछ लोग चाय दुकान, अंडा दुकान, सब्जी बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे है.

सेवा कुटीर के अधीक्षक श्रवण कुमार ने बताया कि वर्तमान में इस केंद्र में 39 भिक्षुओं को रखा गया है, जिसमें ज्यादातर अपना घर बताने में असमर्थ है. रहने की व्यवस्था के साथ उनका इलाज भी किया जाता है. रोजाना उनकी काउंसलिंग की जाती है. अगर वह अपना नाम पता बता देते हैं तो उन्हें उनके परिवार से मिला दिया जाता है.

 

 

भारत-अमेरिका संबंध ‘‘मुश्किल दौर से गुजर रहे

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि भारत-अमेरिका संबंध ‘‘मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। हर दिन एक ‘‘नई चुनौती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस विधेयक का समर्थन किया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस का यह बयान आया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी सहयोगी सीनेटर लिंडसे ग्राहम एक विधेयक को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसके तहत रूस के साथ भारत के व्यापार और अन्य संबंधों के लिए उस पर व्यापक रूप से नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इससे पहले, सीनेटर बर्नी मोरेनो ने एक विधेयक पेश किया था जिसके तहत आउटसोर्सिंग के लिए भुगतान करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर 25 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए  ट्रंप लगातार पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रमेश ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में निश्चित रूप से एक ‘नई असामान्य स्थिति पैदा हो गई है। प्रधानमंत्री की ओर से दिए जाने वाले बयानों के बावजूद, हर दिन एक नई चुनौती है।

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भारत के मशहूर इकोलॉजिस्ट और पर्यावरण संरक्षण के अग्रदूत माधव गाडगिल का निधन 

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नई दिल्ली। भारत के मशहूर इकोलॉजिस्ट और पर्यावरण संरक्षण के अग्रदूत माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे में निधन हो गया। वह 83 साल के थे। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, गाडगिल पिछले कुछ समय से बीमार थे और पुणे के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पर्यावरण विज्ञान और पारिस्थितिकी के क्षेत्र में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है।
माधव गाडगिल को पश्चिमी घाट पर उनके काम के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यह इलाका वैश्विक जैव विविधता का हॉटस्पॉट माना जाता है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा गठित पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल की अध्यक्षता की थी। इस पैनल ने विकास गतिविधियों, जनसंख्या दबाव और जलवायु परिवर्तन के असर का गहन अध्ययन किया। उनकी रिपोर्ट, जिसे ‘गाडगिल रिपोर्ट कहा जाता है, ने भारत के नाजुक पर्यावरणीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ठोस सुझाव दिए थे।

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 सोमनाथ में स्वाभिमान पर्व का दिव्य उद्घोष

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गिर सोमनाथ| सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था के 1000 वर्ष के उपलक्ष्य में 8 से 10 जनवरी स्वाभिमान पर्व को श्रद्धापूर्वक उत्सव का प्रारंभ हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10–11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर सोमनाथ में उपस्थित रहेंगे। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की पूर्व संध्या पर राज्य सरकार के मार्गदर्शन में पूरे सोमनाथ क्षेत्र में सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। 
मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल तथा उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं और जनता के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। विभिन्न विभागों के सचिव एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्वाभिमान पर्व अंतर्गत होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में व्यवस्थाएं सुचारु रूप से बनी रहें, इसके लिए अलग-अलग टीमें गठित कर कार्य पूर्ण किया गया है।
7 जनवरी की रात को सोमनाथ के विभिन्न मार्गों को अत्यंत सुंदर ढंग से रोशनी और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीकों से सजाया गया। त्रिवेणी रोड, हमीरसिंह सर्कल, शंख सर्कल, भीडिया-पाटण रोड, सर्किट हाउस रोड तथा सोमनाथ मंदिर क्षेत्र के मार्गों को साज-सज्जा, रोशनी, शिव आराधना के चित्रों, ध्वजों, सड़कों पर भगवान शिव की मूर्तियों सहित विभिन्न तैयारियों से सजाया गया है, जिससे संपूर्ण सोमनाथ सज्ज हो उठा है। समग्र गुजरात से शिव भक्त ट्रेन और बसों के माध्यम से सोमनाथ पहुंच रहे हैं। तीन दिनों तक होने वाले अखंड ‘ओमकार’ मंत्रोच्चार से सोमनाथ का वातावरण अलौकिक अनुभूति के साथ दिव्य बन गया है। वर्ष 1026 से 2026 तक के संघर्ष, शौर्य, वीरता, स्वाभिमान और अटूट श्रद्धा के 1000 वर्षों के साथ स्वाभिमान पर्व का यह संदेश नई पीढ़ी को भारत की शाश्वत सनातन संस्कृति की गाथा को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।

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2026 से शुरू होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना

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नई दिल्ली। भारत की India First Digital Census का आधिकारिक ऐलान हो चुका है। गृह मंत्रालय ने पहली डिजिटल जनगणना के पहले चरण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत देशभर में जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। कोविड-19 के कारण टली जनगणना अब डिजिटल स्वरूप में पूरी की जाएगी, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी।

90 साल बाद होगी जातिगत जनगणना

इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इससे पहले आखिरी बार वर्ष 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी। यानी करीब 90 साल बाद देश में फिर से जाति की आधिकारिक गिनती होगी। दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 1,718.2 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना प्रक्रिया

India First Digital Census दो चरणों में पूरी की जाएगी।
पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा, जिसमें घरों की सूची और आवास जनगणना की जाएगी। इसमें यह जानकारी जुटाई जाएगी कि मकान पक्का है या कच्चा, बिजली-पानी-शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।

दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें देश की जनसंख्या की वास्तविक गणना की जाएगी।

30 लाख कर्मचारी करेंगे डिजिटल डेटा कलेक्शन

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। पहले जहां कागज और कलम से डेटा इकट्ठा किया जाता था, वहीं अब मोबाइल ऐप और टैबलेट के जरिए जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए देशभर में करीब 30 लाख कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।

क्यों जरूरी है जनगणना?

जनगणना का मुख्य उद्देश्य देश में रहने वाले हर व्यक्ति की संख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और बुनियादी जरूरतों की जानकारी जुटाना है। भारत में पहली बार 1871 में जनगणना हुई थी। 1981 के बाद से हर 10 साल में यह प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती रही है।

500% टैरिफ की धमकी के बाद लाल हुआ भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स में 780 अंक तो निफ्टी-50 में आई इतनी गिरावट

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Share Market News: भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में लगातार चौथे दिन गिरावट जारी है. निवेशक परेशान हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि बाजार संभलने का नाम ही नहीं ले रहा है. गुरुवार को एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स में करीब 800 अंक की गिरावट दर्ज की गई. तो वहीं निफ्टी 50 में भी 250 अंक से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा सभी शेयरों में ज्यादातर गिरावट ही जारी रही. तेल और मेटल कंपनियों में इसका ज्यादा प्रभाव देखा जा रहा है. इन कंपनियों के ज्यादातर शेयरों पर 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. एक्सपर्ट की मानें तो इस गिरावट के पीछे की वजह अमेरिका मानी जा रही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही है. अमेरिका में एक नया बिल भी पेश किया जा रहा है. अगर यह बिल लागू हो गया तो भारत पर करीब 500 प्रतिशत की टैरिफ लगाई जाएगी. इसका सबसे ज्यादा असर भारत और चीन के अलावा ब्राजील पर देखने को मिलेगा. नए बिल को मंजूरी मिलने के बाद उन देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए जाएंगे, जो रूस से तेल, गैस या अन्य ऊर्जा खरीदते हैं. हालांकि माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप बिल लाकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं.

अमेरिका की बिल को लेकर निवेशकों की बढ़ी चिंता
अमेरिका की इस बिल के पेश करने को लेकर जब से खबर आई है, तब से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. क्योंकि भारत, रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीददार है. निवेशकों के अंदर एक डर है कि कहीं टैरिफ का असर शेयर बाजार पर ना पड़े. इसलिए बाजार में ज्यादातर बिकवाली जारी है. हालांकि यह सिर्फ भारत के ही बाजार तक सीमित नहीं है बल्कि यह ग्लोबल चुनौती बनी हुई है. जापान और हांगकांग के भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

कब उठेगा शेयर बाजार?
पिछले कुछ दिनों से निवेशकों द्वारा शेयर बिकवाली जारी है. निवेशकों ने जनवरी की शुरुआत से ही हजारों करोड़ रुपए के शेयर्स बेचे हैं. जिसकी वजह से भारतीय शेयर बाजार पर काफी दबाव बढ़ा है और निवेशकों का बाजार को लेकर मनोबल कमजोर हुआ है. लेकिन जैसे ही कुछ दिनों बाद भारतीय कंपनियां अपना तिमाही नतीजा पेश करेंगी. एक बार फिर बाजार का माहौल बदलेगा. इस दौरान तेजी देखी जा सकती है.

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बिहार समेत 4 राज्यों में ईडी की छापेमारी 

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पटना। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फर्जी सरकारी नौकरी दिलाने के मामले में गुरुवार सुबह से व्यापक छापेमारी अभियान शुरू कर दिया है। ईडी की यह कार्रवाई सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रही ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। पेशेवर गिरोह ने विभिन्न सरकारी विभागों के नाम और फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए न केवल आम जनता को ठगा, बल्कि करोड़ों रुपये की आर्थिक ठगी की। ईडी अधिकारियों का कहना है कि इस छापेमारी से कई महत्वपूर्ण सुराग और डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं, जो गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा करेंगे। जानकारी के मुताबिक यह घोटाला खासकर भारतीय रेलवे और देश के अन्य 40 सरकारी विभागों में भर्तियों के नाम पर संचालित किया जा रहा था। ईडी के अनुसार, यह गैंग फर्जी ईमेल अकाउंट और दस्तावेज तैयार कर लोगों को नियुक्ति पत्र, कॉल लेटर और अन्य सरकारी प्रमाण पत्र भेजता था। इन दस्तावेज़ों को इस तरह तैयार किया जाता था कि देखने में यह बिल्कुल सरकारी विभागों के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ लगते थे। इस ठगी में लोगों का विश्वास जीतने के लिए गिरोह ने कुछ लोगों के बैंक खातों में 2 से 3 महीने तक सैलरी भी भेजी। विशेष रूप से आरपीएफ, टीटीई, रेलवे टेक्नीशियन, डाक विभाग, वन विभाग, टैक्स डिपार्टमेंट, हाई कोर्ट, लोक निर्माण विभाग, बिहार सरकार, दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए), राजस्थान सचिवालय आदि के नाम पर यह घोटाला किया गया। इस छापेमारी के दौरान ईडी की टीम ने कई डिजिटल उपकरण, फर्जी दस्तावेज और बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन से जुड़े प्रमाण जुटाए हैं। आने वाले दिनों में इन सबका विश्लेषण कर ईडी गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके धन-आस्तियों तक पहुँचने की कोशिश करेगी। इस मामले में आगे की जांच से पता चल सकता है कि यह घोटाला कितने समय से चल रहा था और इससे कितने लोगों को नुकसान हुआ है। ईडी के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क अत्यंत संगठित और पेशेवर तरीके से संचालित किया जा रहा था। इस मामले में ईडी ने बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और केरल में छापेमारी की है। इन 6 राज्यों के कुल 15 शहरों में छापेमारी जारी हैं।  बिहार के मुजफ्फरपुर में एक स्थान पर और मोतिहारी में दो स्थानों पर छापे मारे जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी इस गिरोह के दो ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इसके अलावा चेन्नई, राजकोट और केरल के चार शहरों में भी ईडी ने छापेमारी की पुष्टि की है। जानकारों के अनुसार, इस तरह के स्कैम में आम तौर पर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का भी इस्तेमाल किया जाता है। इस मामले में ईडी ने अब तक जो जानकारी जुटाई है, उसके मुताबिक गिरोह के पास फर्जी जॉब पोर्टल, ईमेल और बैंक अकाउंट का व्यापक नेटवर्क है। इसके जरिए यह गिरोह लोगों को भर्तियों के नाम पर आकर्षित करता और फिर उनसे भारी रकम ऐंठ लेता।

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द श्राइन इटर्नल’- जहाँ इतिहास, पुरातत्त्व और श्रद्धा एक साथ बोलते हैं

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पीएम मोदी के लेख में उल्लेखित पुस्तक के बहाने सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निर्माण की सम्पूर्ण कथा

अहमदाबाद| आततायी महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण को 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस विदेशी आक्रमणकारी द्वारा हुआ आक्रमण भारत की अस्मिता पर कुठाराघात समान था। इस एक हजार वर्ष के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिखे गए विशेष लेख में एक विशेष पुस्तक का उल्लेख किया गया था। इस पुस्तक के बारे में जानने के लिए जिज्ञासु गूगल सर्च इंजन चला रहे हैं।
यह पुस्तक यानी कनैयालाल माणेकलाल मुनशी द्वारा 1951 में लिखी गई ‘सोमनाथ : द श्राइन इटर्नल’ ! इस पुस्तक में भगवान श्री सोमनाथ के मंदिर के बारे में ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व का परिचय दिया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा हुए उल्लेख के कारण हाल में यह पुस्तक चर्चा एवं पठन के केन्द्र में है। ऐसे में यह इस पुस्तक के बारे में और जानना रुचिप्रद होगा।
गुजरातियों के लिए गुजरात की अस्मिता के ज्योतिर्धर क. मा. मुनशी परिचय के मोहताज नहीं है। वे राजनीतिक पुरुष के अलावा एक अच्छे लेखक थे। उनकी पुस्तकों के केन्द्र में इतिहास एवं सांस्कृतिक आदि विषय रहे हैं। गुजरातियों को अंग्रेजी में लिखी पुस्तकें पढ़ने में बहुत खास आदत नहीं है। अंग्रेजी में भी गुजरात तथा गुजरात के इतिहास के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, जिसमें कनैयालाल मुनशी को भी सिरमौर माना जा सकता है।
उनके द्वारा लिखित ‘पाटणनी प्रभुता’, ‘जय सोमनाथ’, ‘गुजरातनो नाथ’, ‘भग्न पादुका’, ‘कृष्णावतार भाग 1 से 7’ जैसी पुस्तकें पढ़ने से गुजरात के इतिहास के अलावा धार्मिक विभूतियों की दिलचस्प जानकारी स्थल-काल के साथ जानने को मिलती है।
सोमनाथ – द श्राइन इटर्नल पुस्तक में कनैयालाल मुनशी ने भगवान श्री सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक एवं पुरातात्तिवक परिचय दिया है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को भारत की अस्मिता का प्रतीक बताया है। क्यों यह मंदिर भारत की सांस्कृतिक धरोहर के लिए महत्वपूर्ण है ? इसका अहसास इस पुस्तक को पढ़ने से आ सकता है। हाल में सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, तब इस पुस्तक के बारे में भी जानना महत्वपूर्ण है।
यह पुस्तक भारतीय विद्या भवन की ‘बुक्स यूनिवर्सिटी’ श्रृंखला अंतर्गत प्रकाशित की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूलभूत मूल्यों का आधुनिक ज्ञान के साथ संयोजन करना है।
मुनशीजी ने इस पुस्तक का प्रथम संस्करण मई-1951 में सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना तथा ज्योतिर्लिंग प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर लिखा था। लेखक स्वयं स्वीकार करते हैं कि उन्होंने शैक्षणिक विद्वता के दावे के बिना, बल्कि एक अत्यंत श्रद्धालु तथा इतिहास के जिज्ञासु के रूप में यह पुस्तक बहुत ही कम समय में तैयार की थी, जिससे सोमनाथ के इतिहास को लोगों के समक्ष रखा जा सके।
इस पुस्तक का उद्देश्य उच्च शिक्षा एवं संस्कार देना है। इस पुस्तक द्वारा मानव गरिमा एवं नैतिक व्यवस्था (मोरल ऑर्डर) की स्थापना करने का प्रयास किया गया है, जिससे मनुष्य भगवान का सच्चा अंश बन सके।
पुस्तक मुख्यतः चार भागों में बँटी हुई है। पहले भाग में सोमनाथ की पौराणिक कथाएँ तथा इतिहास है, दूसरे भाग में रोमांस इन स्टोन यानी पत्थरों में उत्कीर्णित स्थापत्य है, तीसरे भाग में पुरातात्तिवक उत्खनन (एक्सकैवेशन्स) द्वारा मिले प्रमाण हैं और चौथे भाग में मुस्लिम इतिहासकारों के उल्लेखों तथा विभिन्न शिलालेखों का विवरण दिया गया है।
लेखक ने सोमनाथ को ‘चंद्रना देव’ (लॉर्ड ऑफ सोम) के रूप में वर्णित किया है और प्रभास क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व की चर्चा की है। मंदिर राख से पुनः खड़े होने वाले फिनिक्स पक्षी की तरह राख से पुनः उठ खड़ा होकर अनेक विनाश के बाद भी अजेय रहा है। पुस्तक में भगवान श्री कृष्ण के देहोत्सर्ग के पवित्र स्थान का भी उल्लेख है।
इस पुस्तक में सोमनाथ पर हुए आक्रमणों का विस्तृत इतिहास है। 1025 में महमूद गजनवी द्वारा किए गए विनाश से लेकर अलाउद्दीन खिलजी तथा औरंगजेब के काल तक के कठिन काल का वर्णन यहाँ देखने को मिलता है। मुनशीजी ने इस विनाश को केवल इमारत का विध्वंस नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मा पर हुए आघात के रूप में प्रस्तुत किया है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सोमनाथ के आधुनिक पुनरुत्था पर केन्द्रित है। 13 नवंबर, 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने जर्जर मंदिर के प्रांगण में समुद्री जल के साथ जो संकल्प किया था, उसे क. मा. मुनशी ने भारत के गौरव की पुनर्स्थापना के रूप में आलेखित किया है।
पुस्तक में बी. के. थापर द्वारा किए गए वैज्ञानिक उत्खनन की रिपोर्ट भी शामिल है। इस विभाग में पृथ्वी के गर्भ से प्राप्त प्राचीन मंदिर के स्तरों, शिलालेखों और मूर्तियों के आधार पर मंदिर के प्राचीन स्थापत्य की कड़ियों को जोड़ा गया है, जो इतिहास के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
पुस्तक के नए संस्करणों में नए मंदिर के निर्माण की प्रगति के बारे में बताया गया है। नए मंदिर को ‘कैलास महामेरु प्रसाद’ के रूप में परिचित कराया गया है, जिसकी ऊँचाई 155 फीट है। पुस्तक में अनेक रेखाचित्र तथा फोटोग्राफ हैं, जो सोमनाथ की कलात्मक भव्यता के दर्शन कराते हैं।
‘सोमनाथ : द श्राइन इटर्नल’ केवल इतिहास की पुस्तक नहीं है, बल्कि भारतीय प्रजा की अखंडा श्रद्धा की प्रती है। मुनशीजी के मतानुसार सोमनाथ अनंत ज्योति है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों के साथ जोड़कर रखती है तथा स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा देती है। 
जिस प्रकार गंगा नदी पहाड़ों से निकलकर अनेक मोड़ लेने के बावजूद समुद्र तक पहुँच कर अपनी पवित्रता बनाए रखती है, उसी प्रकार सोमनाथ का इतिहास भी संघर्षों के बावजूद अपनी गरिमा बनाए रखते हुए अनंत रहा है, जिसका सटीक चित्रण इस पुस्तक में देखने को मिलता है।

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Madhu Vohra Brings Star Power to rude lounge Powai Awards Night with Bollywood Actor Abhishek Khanna as Special Guest 18jan 2pm

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Mumbai: Renowned event curator Madhu Vohra, known for successfully organizing fashion shows and award events for many years, is all set to host another grand and prestigious awards night at rude Lounge powai on 18 January, Sunday at 2 PM.
This year’s event is being described as extra special, as it will feature the presence of popular Bollywood actor Abhishek Khanna as a special guest and award presenter. His participation has already created excitement among attendees and industry professionals.
Abhishek Khanna is an Indian Bollywood actor who has worked in notable films such as Singham Returns, Bharat, Sanju, Jalebi, Super 30, along with over 500 television advertisements. His versatile work across cinema and advertising has earned him admiration from audiences and brands alike.
Organizer Madhu Vohra has been consistently creating platforms that celebrate talent, creativity, and achievement. Over the years, she has hosted multiple fashion and award shows, providing opportunities to artists, performers, entrepreneurs, and professionals from various fields. This upcoming edition aims to take the celebration a step higher with stronger recognition and celebrity presence.
The awards ceremony at Powai Lounge is expected to witness participation from distinguished guests, achievers, and community contributors, making it one of the most anticipated events of the season

 

SP ऑफिस के सामने दिनदहाड़े युवती का अपहरण

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भीलवाड़ा।  राजस्थान के भीलवाड़ा शहर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जो कानून व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़ा करता है. एसपी ऑफिस के ठीक सामने से ब्लैक स्कॉर्पियो में आए लोगों ने एक युवती को जबरन उठाकर अपनी गाड़ी में डालकर रफूचक्कर हो गए. इस दौरान पुलिसकर्मियों और मौजूद लोगों द्वारा रोकने का भी प्रयास किया लेकिन वाहन चालक नहीं रुके, भाग निकले. युवती अपने प्रेमी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहती थी, उसके अपने घर से जान का खतरा महसूस हो रहा था. इसकी शिकायत करने वह एसपी कार्यालय गई थी. इसी दौरान यह घटना हुई. जानकारी के अनुसार युवती अपने प्रेमी के साथ काफी समय से लिव-इन रिलेशनशिप में रहती थी लेकिन अभी हाल ही में उसने प्रेमी के साथ कोर्ट मैरिज कर ली. शादी करने के बाद उसे अपने ही मायके पक्ष के लोगों से डर लगने लगा. किसी प्रकार की कोई अनहोनी न हो इसके लिए उसने एसपी ऑफिस पहुंचकर आवेदन करने का विचार किया. बुधवार को हाथ में शपथ पत्र लिए वह एसपी कार्यालय पहुंची ही थी, कि घर वालों का पता चल गया. घर वाले भी एसपी ऑफिस पहुंच गए. युवती को कुछ पता चल पाता कि इससे पहले एसपी ऑफिस से बाहर निकलते समय घर वालों ने काली स्कॉर्पियो के अंदर डाल दिया।

फिल्मी सीन का दिखा नजारा

यह नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था. मौके पर मौजूद लोग देखकर दंग रह गए. कुछ लोग तो इधर-उधर भागते नजर आए तो कुछ ने युवती को बचाने का प्रयास किया लेकिन इस दौरान गाड़ी नहीं रुकी. युवती को लेकर उसके मायके पक्ष के लोग फरार हो गए. मामला एसपी ऑफिस के पास का था और वीडियो भी सामने आ गया तो पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए नाकाबंदी कराकर गाड़ी समेत युवती को डिटेन कर लिया है. साथ ही इसमें शामिल आरोपियों को भी हिरासत में लिया है. पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

बाल-बाल बचे पुलिसकर्मी

युवती के घर वाले प्रेमी के साथ लव मैरिज करने की वजह से नाराज चल रहे थे. युवती के अनुसार कई बार धमकियां भी दी. इसलिए खतरे को भांपते हुए कोर्ट मैरिज करने के बाद युवती पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाने एसपी ऑफिस गई थी. जब यह घटना हुई तो मौके पर मौजूद विशेष शाखा (डीएसबी) के एएसआई प्रताप सिंह मौजूद रहे. उन्होंने गाड़ी के आगे खड़े होकर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने गाड़ी नहीं रोकी. बल्कि कुचलने का प्रयास किया गया. इस दौरान उनका मोबाइल फोन सड़क पर गिरकर टूट गया. गनीमत रही कि वे बाल-बाल बच गए।

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