वोट देने पहुंचे अक्षय कुमार से एक लड़की ने मांगी मदद, कहा- पापा कर्जे में हैं, एक्टर बोले…

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महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में गुरुवार के दिन वोट डाले जा रहे हैं। सुबह 7:30 बजे से मतदान शुरू हुए हैं और सबसे पहले वोट डालने बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार पहुंचे हैं। अक्षय कुमार के साथ उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना भी आईं। वोट डालने के बाद अक्षय ने कहा, ‘यह वह दिन है जब रिमोट कंट्रोल हमारे हाथों में आता है। मैं सभी मुंबई वालों से वोट डालने की अपील करता हूं।’

अक्षय से लड़की ने मांगी मदद

वोट डालने और मीडिया से बातचीत करने के बाद जब अक्षय अपनी कार की तरफ बढ़ रहे थे तभी एक लड़की उनके पास आई। उस लड़की ने अक्षय से कहा, ‘मेरे पापा बहुत बड़े कर्जे में हैं। प्लीज उन्हें बाहर निकाल दो।’ एक तरफ, जहां अक्षय के सिक्योरिटी गार्ड उस लड़की को हटाने में लगे हुए थे। वहीं दूसरी तरफ अक्षय ने दरियादिली दिखाते हुए उस लड़की से बात की।

अक्षय ने उस लड़की से क्या कहा?

अक्षय ने उस लड़की से कहा कि वह अपना फोन नंबर उनके सिक्योरिटी गार्ड को दे दें। ये सुनते ही लड़की इमोशनल हो गई और अक्षय के पैर छुने लगी। इसके बाद अक्षय ने अपने सिक्योरिटी गार्ड से कहा कि वो उस लड़की का नंबर अपने पास लिख लें। अक्षय का ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इन सेलेब्स ने भी दिया वोट

अक्षय और ट्विंकल के अलावा खबर लिखने तक तमन्ना भाटिया, गुलजार, हेमा मालिनी, आमिर खान का परिवार, सचिन तेंदुलकर और सुनील शेट्टी वोट देने पहुंचे थे।

तमिलनाडु में राहुल के पोस्ट ने बढ़ाई CM स्टालिन की टेंशन; जानिए पूरा मामला ?

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चेन्नई । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) तमिलनाडु के दौरे (Tamil Nadu) पर हैं। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट किया है, जिसने तमिलनाडु की राजनीति में नई सियासी चिंगारी भड़का दी है। उनके पोस्ट ने न सिर्फ एक नाज़ुक समय में अभिनेता से नेता बने विजय का साथ दिया है, बल्कि उन अटकलों को भी मजबूत किया है कि कांग्रेस, DMK के साथ अपने करीबी संबंधों के बावजूद, विजय की पार्टी TVK के साथ आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समझ बनाने पर विचार कर सकती है।

दरअसल, राहुल गांधी ने तमिल सुपरस्टार विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को ‘रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश’ तमिल संस्कृति पर हमला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘तमिल लोगों की आवाज दबाने’ में कभी कामयाब नहीं होंगे। राहुल का यह बयान तमिल फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता के सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाई कोर्ट के एक अंतरिम आदेश को चुनौती देने के एक दिन बाद आया है।

 

मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिलने के एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। राहुल का यह बयान सीधे-सीधे बीजेपी और आरएसएस पर उनके उस आरोप की कड़ी का हिस्सा है, जिसमें वे कहते रहे हैं कि देश की संस्थाओं पर भाजपा और संघ का राजनीतिक दबाव और दखल बढ़ता जा रहा है।

 

समय ने बढ़ाया संदेश का असर
दिलचस्प बात यह रही कि राहुल गांधी का यह बयान पोंगल के दिन आया है, जब वे नीलगिरि के गुडलूर में उत्सव मना रहे थे। वियतनाम से लौटने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। ऐसे में उनके शब्दों में सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि तमिल अस्मिता का संदेश भी साफ झलकता दिखा। बता दें कि ‘जन नायकन’ को लेकर सेंसर बोर्ड, अदालत और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान ने इसे तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस पहले ही फिल्म निर्माताओं के समर्थन में खड़ी थी। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन भी यह कह चुके हैं कि फिल्मों को राजनीतिक वजहों से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा
राहुल गांधी के इस पोस्ट ने अब कांग्रेस के अंदर तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा शुरू कर दी है। नेताओं का एक वर्ग मानता है कि पार्टी को TVK के साथ गठबंधन करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका मानना ​​है कि विजय की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के बीच, कांग्रेस को एक नया राजनीतिक फायदा दे सकती है। पार्टी के अंदर शुरुआती फीडबैक से पता चलता है कि विजय और राहुल गांधी दोनों के नेतृत्व वाले अभियान ज़मीनी स्तर पर लोगों से मज़बूती से जुड़ सकते हैं और राज्य में माहौल बदल सकते हैं।

कांग्रेस के अंदर ही दो मत

हालांकि, कांग्रेस में हर कोई इस विचार से सहमत नहीं है। कई सीनियर नेताओं का मानना ​​है कि पार्टी को DMK के साथ अपने लंबे समय के गठबंधन के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनका कहना है कि इस साझेदारी ने कई सालों से स्थिरता, प्रासंगिकता और राजनीतिक लाभ दिया है। उनके मुताबिक, नई रणनीति के साथ प्रयोग करना, चाहे वह कितना भी रोमांचक लगे, उसमें जोखिम हो सकता है। उनका तर्क है कि कांग्रेस को DMK के साथ मौजूदा गठबंधन से अलग होने के बजाय, मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल करके बेहतर जगह और मौजूदा गठबंधन में मज़बूत भूमिका के लिए बातचीत करनी चाहिए।

एक तीर से तीन शिकार कैसे?

बता दें कि तमिलनाडु में कांग्रेस मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK की सहयोगी है। हाल के दिनों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ी है। कांग्रेस 234 सदस्यों वाली विधानसभा में पहले 40 सीटें चाहती थीं लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें देने के ही संकेत दिए हैं। इससे खिन्न पार्टी का एक धड़ा विजय की टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व से अनुरोध करता रहा है। दूसरी तरफ, बीजेपी AIADMK की अगुवाई वाले गठबंधन के लिए नई-नई रणनीति बना रहा है।

ऐसी सियासी परिस्थितियों में राहुल गांधी की हालिया पोस्ट एक तीर से तीन निशाने जैसा है। पहला तो उन्होंने विजय को उनकी फिल्म के मुद्दे पर समर्थन देकर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की है, दूसरा ऐसा कर उन्होंने सहयोगी DMK पर दबाव बढ़ा दिया है कि उसके पास विजय एक विकल्प हो सकते हैं और तीसरा राहुल ने भाजपा पर करारा प्रहार किया है, और उसे तमिल संस्कृति का विरोधी बताकर उसके दक्षिणी विस्तार के मंसूबों को नाकाम करने की कोशिश की है।

तेलंगाना के कामारेड्डी में सड़क पर तेंदुआ!

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कामारेड्डी: तेलंगाना (Telangana) के कामारेड्डी जिले (Kamareddy District) में प्रकृति और मानव के बीच बढ़ते टकराव का एक रोमांचक और डरावना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिले के मेंगारम (Mangaram) और कोट्टल वन क्षेत्र (Kottal Forest Area) के पास एक तेंदुए (Leopard) को मुख्य सड़क पर बेखौफ घूमते देखा गया. इस घटना ने न केवल राहगीरों के रोंगटे खड़े कर दिए, बल्कि वन विभाग की सुरक्षा तैयारियों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं.

घटना उस समय की है जब एक कार सवार इस वन क्षेत्र से गुजर रहा था. अचानक सड़क के बीचों-बीच एक विशालकाय तेंदुए को देखकर ड्राइवर ने तुरंत ब्रेक लगाए. तेंदुए ने भागने के बजाय कुछ देर सड़क पर ही टहलना जारी रखा, जिसे वाहन के अंदर बैठे व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि तेंदुआ इंसानों की मौजूदगी से जरा भी विचलित नहीं हुआ और अपनी शाही चाल में सड़क पार कर फिर से झाड़ियों में गायब हो गया.मेंगारम, कोट्टल और येलारेड्डी मंडल के आसपास के गांवों में भारी दहशत है. स्थानीय किसानों और चरवाहों का कहना है कि शाम ढलते ही अब वे खेतों में जाने से कतरा रहे हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों के करीब आने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे मवेशियों पर हमले का खतरा बढ़ गया है.

वन विभाग के अधिकारियों ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र तेंदुए का प्राकृतिक आवास है, इसलिए यात्रियों को इस मार्ग पर रात के समय वाहन नहीं रोकने और खिड़कियां बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं. विभाग अब तेंदुए की आवाजाही पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाने की योजना बना रहा है.

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News Desk

Poetry Book That Explores Pain Beyond Words

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Absence’s Pain explores pain beyond words, offering readers a deeply reflective poetry experience. Written by Rejimon Christraj Thekkumpurathu, the anthology blends poetry with visual imagery and thoughtful commentary. Each of the 20 poems reveals a different facet of endurance and emotional survival. This book is perfect for readers who appreciate poetry with depth, meaning, and emotional honesty.

Absence’s Pain: An Anthology of Endurance — A Poetic Journey Through Loss, Hope, and the Human Spirit

Bilaspur, India — In a world where emotional depth is often overshadowed by speed and noise, a new poetry collection emerges as a quiet yet powerful companion for the soul. “Absence’s Pain: An Anthology of Endurance”, authored by Rejimon Christraj Thekkumpurathu, is a deeply moving collection of 20 heart-touching poems that explore pain not as an ending, but as a passage toward resilience and renewal.

Published by Crown Publishing, Bilaspur, this book belongs to the Poetry category and stands apart for its unique, immersive structure. Each poem is not presented as an isolated verse but as a complete thematic experience, thoughtfully designed to engage the reader on multiple levels.

A Distinctive Literary Format

Unlike conventional poetry collections, Absence’s Pain invites readers into an ongoing dialogue. Every poem is accompanied by:

  • A Visual Image that captures the emotional essence of the theme

  • A Preface that sets the emotional and philosophical context

  • The Poem, serving as the core artistic expression

  • Editor’s Analysis, offering literary insight and critical depth

  • Author’s Reflection, providing a personal window into the poet’s inner world

This layered approach allows readers not only to feel the poems but to understand their emotional and literary nuances.

Themes That Resonate Universally

The anthology traverses a wide spectrum of human emotions and experiences. Poems such as “The Plumage of Darkness” and “The Eternal Cry!” reflect raw vulnerability, while “Turns of Hope” and “The Rose Beyond Seasons” embody quiet resilience and renewal.
Family, nature, and inner conflict form the emotional backbone of the collection, with notable pieces like “My Mother,” “The Moon’s Reverie,” “Why Can’t I Remain?” and “The Shadow of Trials.” The sonnet “The Mat: A Sonnet of Endurance” stands as a symbolic reminder of strength found in humility and perseverance.

A Book for the Times We Live In

Absence’s Pain serves as a pause in a fast-paced world—a space to reflect, heal, and reconnect with one’s emotions. It speaks to those who have known loss, those searching for hope, and readers who value language that heals as much as it expresses.

As the title suggests, this is truly an anthology of endurance, affirming that while pain is inevitable, the human spirit’s capacity to endure, transform, and bloom again is boundless.

Book Details

  • Title: Absence’s Pain: An Anthology of Endurance

  • Author: Rejimon Christraj Thekkumpurathu

  • Publisher: Crown Publishing, Bilaspur

  • Category: Poetry

  • Price: ₹299

Available On

Absence’s Pain is more than a book—it is an emotional companion, reminding readers that even in absence, meaning can be found, and through pain, endurance is born.

इसरो का मिशन फेल, लेकिन जिंदा बच निकला छोटू कैप्सूल, भेज रहा सिग्नल

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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुंसाधन केंद्र इसरो का पीएसएलवी रॉकेट मिशन तकनीकी खराबी के कारण असफल हो गया, लेकिन स्पेन की निजी कंपनी का छोटा स्पेस कैप्सूल सुरक्षित रह गया और इस कैप्सूल से जमीन पर सिग्नल मिल रहा है। यह कैप्सूल, जो कि केआईडी कहा जाता है, रॉकेट फेल होने के बावजूद करीब 190 सेकंड तक उड़ान का डेटा भेजने में सफल रहा। इस विशेष रूप से धरती के वातावरण में फिर प्रवेश के परीक्षण के लिए बनाया गया था।
बात दें कि पीएसएलवी-सी62 ने सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी थी। रॉकेट में भारत का उपग्रह अन्वेषा और कुल 15 सैटलाइट के साथ स्पेन का यह कैप्सूल शामिल था। हालांकि, रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी के कारण उपग्रह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच सके और खो गए। नष्ट हुए उपग्रहों में डीआरडीओ का अन्वेषा उपग्रह था, जो करीब 500 किलोमीटर दूर से सैन्य गतिविधियों और छलावरण को निगरानी करने में सक्षम है। इसके अलावा भारत का पहला इन-ऑर्बिट ईंधन भरने वाला उपग्रह, आयुलसैट, और आपातकालीन संचार तथा आपदा प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया एक छोटा एलईओ उपग्रह, सीजीयूसैट भी शामिल थे। पृथ्वी अवलोकन के लिए थाईलैंड और ब्रिटेन ने संयुक्त रूप से एक उपग्रह बनाया था। मई 2025 में किया गया पिछला पीएसएलवी मिशन (सी61-ईओएस-09) भी मोटर दबाव की समस्या के कारण असफल हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि इसरो को घटना का डेटा इकट्ठा करने, विश्लेषण करने और सुधारात्मक कदम तय करने में समय लगेगा। आधिकारिक निष्कर्ष आने वाले दिनों में जारी होने की उम्मीद है।

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दिल्ली में 81 नए ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ का शुभारंभ, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार लोगों को बेहतर और सुलभ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में बुधवार को 81 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर जनता को समर्पित किए हैं. दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बने इन जन आरोग्य मंदिरों का उद्घाटन किया गया. रेखा सरकार की इस पहल से दिल्ली में वार्ड और मोहल्ला स्तर पर प्राइमरी हेल्थकेयर सेवाओं को और ज्यादा मजबूती मिलेगी. वहीं, कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र के गीता कॉलोनी चार ब्लॉक में शुरू किए गए जन आरोग्य मंदिर का उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया.

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता चुनाव के दौरान किए गए सभी वादों को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रही हैं. उन्होंने बताया कि बुधवार को एक साथ पूरी दिल्ली में 81 जन आरोग्य मंदिरों का उद्घाटन किया गया है, जिन्हें सीधे जनता को समर्पित किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि पिछले 11 महीनों में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान दिल्ली में 200 से अधिक जन आरोग्य मंदिर शुरू किए जा चुके हैं.

केंद्रीय राज्य मंत्री मल्होत्रा ने कहा; ”जन आरोग्य मंदिरों को शुरू करने के लिए पहले से मौजूद सरकारी भवनों और इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग किया जा रहा है. पुरानी इमारतों की मरम्मत और सुधार कर इन केंद्रों को विकसित किया गया है, जिससे सरकारी धन की बचत के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. इन जन आरोग्य मंदिरों में डॉक्टर द्वारा जांच के साथ-साथ ब्लड टेस्ट जैसी जांचें पूरी तरह मुफ्त होंगी. जरूरत पड़ने पर बाहर की जांच भी सरकार की ओर से मुफ्त कराई जाएगी. जन आरोग्य मंदिरों में जनरल फिजिशियन और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर विशेष रूप से तैनात रहेंगे”

81 आरोग्य मंदिरों के उद्घाटन पर दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने कहा, “मकर संक्रांति के इस त्योहार पर, आज दिल्ली में हम अगले 81 आरोग्य मंदिरों को जनता को समर्पित करने का काम आगे बढ़ा रहे हैं. इससे पहले, दिल्ली में 238 आरोग्य मंदिर पहले ही खोले जा चुके हैं. लगातार, इन आरोग्य मंदिरों के ज़रिए, हम दिल्ली को प्राइमरी हेल्थ के लिए एक सुविधाजनक जगह दे रहे हैं. लोगों को दिल्ली में अच्छी हेल्थकेयर मिलेगी. हमारा लक्ष्य 1100 आरोग्य मंदिरों का है, और हम उसे हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं.”

 

 

 

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दिल्ली भाजपा के ‘खिचड़ी उत्सव’ में दिखा शक्ति प्रदर्शन, कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का जोरदार अभिनंदन

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नई दिल्ली: मकर संक्रांति के अवसर पर दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बुधवार को जबरदस्त उत्साह और राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिला. अवसर था ‘मकर संक्रांति मिलन समारोह’ का, जिसमें भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का दिल्ली इकाई द्वारा भव्य अभिनंदन किया गया. ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘भारत माता की जय’, ‘जय श्रीराम’ नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने अपने नए कार्यकारी अध्यक्ष का स्वागत किया. इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति रही.

तिल-गुड़ की मिठास और एकजुटता का संदेश

कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने नितिन नबीन का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया. उन्होंने नबीन को मखाने का हार पहनाया और मकर संक्रांति के प्रतीक स्वरूप खिचड़ी व तिल-कुट भेंट किया. कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सचदेवा ने कहा, “आज का दिन दोहरी खुशी का है. एक ओर सूर्य देव उत्तरायण हो रहे हैं, तो दूसरी ओर हमें नितिन नबीन जी जैसा कर्मठ और युवा नेतृत्व मिला है. दिल्ली भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता आज संकल्प लेता है कि हम उनके मार्गदर्शन में दिल्ली की सेवा के लिए खुद को समर्पित करेंगे.”

 

प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस मौके पर समस्त दिल्ली वासियों को पर्व की बधाई देते हुए कहा, ”मकर संक्रांति का यह त्यौहार समाज में समरसता और भाईचारे का प्रतीक है. हमें विश्वास है कि जिस तरह सूर्य का प्रकाश अंधकार को मिटाता है, उसी तरह दिल्ली की जनता के आशीर्वाद से प्रदेश में खुशहाली का नया सवेरा आएगा.”

 

स्वागत से अभिभूत नितिन नबीन ने दिल्ली भाजपा की टीम की सराहना की. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा “मकर संक्रांति परिवर्तन का पर्व है. आज दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं का यह जोश बता रहा है कि वे दिल्ली के विकास और संगठन की मजबूती के लिए पूरी तरह तैयार हैं. भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक परिवार है और खिचड़ी उत्सव हमें इसी एकजुटता का पाठ पढ़ाता है.” उन्होंने आगामी सांगठनिक कार्यों और चुनावों की ओर इशारा करते हुए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को दिल्ली के घर-घर तक पहुँचाएं.

 

खिचड़ी भोज और सांस्कृतिक समागम

समारोह के दौरान ‘खिचड़ी भोज’ का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने एक साथ खाया. इस दौरान दिल्ली के सांसद, विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व मेयर, विधायक, निगम पार्षद सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे. मंच पर कुलजीत चहल, वीरेंद्र सचदेवा, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया विधानसभा, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संजय मयूख, पूर्वांचल मोर्चा दिल्ली अध्यक्ष संजय ओझा, कमलजीत सेहरावत, महामंत्री विष्णु मित्तल मौजूद थे.

 

बता दें कि कार्यक्रम के दौरान पूरे कार्यालय परिसर को केसरिया झंडों और फूलों से सजाया गया था. मकर संक्रांति की परंपरा को निभाते हुए कार्यकर्ताओं के बीच तिल-गुड़ और खिचड़ी का प्रसाद भी वितरित किया गया. यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब नितिन नबीन जल्द ही पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. दिल्ली भाजपा द्वारा आयोजित इस भव्य स्वागत समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है. वहीं, कार्यकर्ताओं में नए नेतृत्व को लेकर भारी उत्साह है.

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले बढ़ी हलचल, अलग प्रशासन की मांग पर अड़े कुकी संगठन

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नई दिल्ली: मणिपुर में सरकार गठन को लेकर चल रही गहमागहमी के बीच, कुकी जो काउंसिल (KZC) और इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने बुधवार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239A के तहत ‘विधायिका के साथ केंद्र शासित प्रदेश’ के रूप में एक अलग प्रशासन की अपनी मांग को फिर से दोहराया है. कुकी-जो काउंसिल के अध्यक्ष हेनलियनथांग थांगलेट ने गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपा है.

ज्ञापन में कहा गया है- “भारत सरकार इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि कुकी-जो समुदाय के लोग न तो इंफाल वापस जा सकते हैं और न ही संघर्ष से पहले जैसी स्थिति को स्वीकार करेंगे. इसलिए, हम केंद्रीय गृह मंत्री से विनम्र अपील करते हैं कि वे इन शिकायतों का अत्यंत गंभीरता से संज्ञान लें. हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए हमारे अधिकृत प्रतिनिधियों (KNO और UPF) के साथ राजनीतिक बातचीत तेज करे, ताकि जल्द ही एक उचित और संवैधानिक राजनीतिक समाधान निकाला जा सके.”

थांगलेट ने गृह मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में जिसकी एक प्रति ETV Bharat के पास उपलब्ध है, कहा कि पिछले लगभग तीन वर्षों से कुकी-जो लोग मैतई समुदाय के साथ हुए जातीय संघर्ष के कारण अत्यधिक कष्ट सह रहे हैं.

थांगलेट ने कहा, “250 से अधिक निर्दोष कुकी-जो लोगों की जान गई है. 7,000 से ज्यादा घर जला दिए गए. 360 पूजा स्थलों को अपवित्र या क्षतिग्रस्त किया गया, और 40,000 से अधिक लोगों को उनके घरों और संपत्तियों से जबरन बेदखल कर दिया गया. कुकी-जो आबादी को इंफाल घाटी से पूरी तरह बाहर निकाल दिया गया है, जिससे कुकी-जो और मैतई लोगों के बीच शारीरिक, प्रशासनिक और मनोवैज्ञानिक रूप से पूर्ण अलगाव हो गया है. यह स्पष्ट रूप से देखा और दर्ज किया गया है कि राज्य सरकार की मशीनरी के कुछ हिस्से इन अत्याचारों में शामिल थे या इन्हें रोकने में विफल रहे. ऐसी परिस्थितियों में, कुकी-जो लोगों के लिए उसी प्रशासन के अधीन बने रहने की कोई गुंजाइश नहीं बची है.”

बफर ज़ोन क्षेत्रों में मैतई आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के पुनर्वास का विरोध करते हुए थांगलेट ने कहा, “ऐसी विश्वसनीय रिपोर्टें हैं कि मैतई विस्थापितों को चुराचांदपुर के तोरबुंग और सुगनु के सेरो इलाके में फिर से बसाया गया है, और डोइलाथाबी क्षेत्र में भी ऐसी ही कोशिशें की गई हैं. ये सभी इलाके बफर ज़ोन और कुकी-जो बस्तियों के भीतर या उनके बेहद करीब आते हैं. ऐसी कार्रवाइयों को सीधे उकसावे के रूप में देखा जा रहा है, जिससे फिर से संघर्ष शुरू होने की भारी आशंका है.”

उन्होंने कहा कि बफर ज़ोन की स्थापना विशेष रूप से आमना-सामना और खून-खराबे को रोकने के लिए की गई थी. थांगलेट ने चेतावनी दी, “इस व्यवस्था का कोई भी उल्लंघन, इसे कमजोर करना या इसे चुनिंदा तरीके से लागू करना जनता के विश्वास को कम करता है, कानून व्यवस्था को कमजोर करता है और इस नाजुक शांति के लिए खतरा पैदा करता है.”

इंफाल घाटी में कुकी-जो समुदाय की ज़मीन और संपत्तियों की सुरक्षा की मांग करते हुए थांगलेट ने कहा कि 3 मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद, हजारों कुकी-जो लोगों को इंफाल घाटी से जबरन बेदखल कर दिया गया, जिससे उन्हें अपनी ज़मीन, घर और संपत्तियां पीछे छोड़नी पड़ीं.

थांगलेट ने कहा, “ऐसी व्यापक रिपोर्टें हैं कि इनमें से कई संपत्तियों को जला दिया गया, लूटा गया, नष्ट कर दिया गया या उन पर अवैध कब्जा कर लिया गया, जबकि बची हुई संपत्तियों पर भी अवैध कब्जे और गैर-कानूनी हस्तांतरण का खतरा बना हुआ है. गृह मंत्री से विनम्र आग्रह करते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इंफाल घाटी में कुकी-जो समुदाय की सभी ज़मीनों और संपत्तियों को सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए, और किसी भी परिस्थिति में उनके हस्तांतरण या आवंटन की अनुमति न दी जाए.”

इस बीच, मणिपुर में लंबे समय तक चलने वाली शांति सुनिश्चित करने के लिए गृह मंत्रालय में सलाहकार (उत्तर-पूर्व) ए.के. मिश्रा, राज्य के विभिन्न विद्रोही गुटों के ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (SoO) समूहों के साथ अलग से बातचीत कर रहे हैं. यहां यह बताना जरूरी है कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का वर्तमान चरण 13 फरवरी 2026 को समाप्त हो जाएगा. पिछले साल मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद, 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था.

 

Sohla and the Beauty of Understated Storytelling

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At the Third Eye Asian Film Festival, Sohla showcased the beauty of understated storytelling. The film’s gentle narrative and emotional realism connected deeply with viewers. Through silence and simplicity, debut director Saaikat Bagban delivers a moving portrait of loss, responsibility, and growing up.

 

Sachin srivastav
Sachin srivastav
Saaikat Bagbaan
Saaikat Bagbaan

At the 22nd Third Eye Asian Film Festival, Sohla – Celebration Under the Grey Sky emerged as a quiet yet powerful presence, leaving an impression that lingered far beyond the screening. Rather than demanding attention, the Marathi film invited the audience into stillness—creating a deeply immersive and emotional experience.

As the film unfolded, the atmosphere inside the theatre subtly transformed. Conversations faded, movements stilled, and time seemed to slow. Viewers leaned forward, absorbed not just in the story on screen, but in the emotions unfolding within themselves. Sohla did not feel like a performance—it felt lived.

The emotional impact was particularly visible among older members of the audience. For many, the film resonated as a mirror of their own memories. Its restrained portrayal of grief, its silences, and its tenderness embedded in everyday gestures stirred deeply personal recollections. Some wiped away tears quietly, while others sat motionless, holding on to emotions long tucked away.

When the credits rolled, applause arrived slowly—not from hesitation, but from reflection. The silence that followed carried weight, the kind that comes after encountering something deeply honest. Several viewers, especially elderly attendees, remained seated long after the screening ended, visibly moved.

Outside the theatre, conversations unfolded in hushed tones. The film sparked personal stories—of parents, partners, loss, and lives shaped under similar grey skies. Sohla became a bridge, connecting strangers through shared vulnerability and memory.

The response around the festival was understated yet unmistakable. Rather than loud praise, the film was spoken of with care. “You must watch it,” many said, “but be prepared to feel.” At a festival celebrated for reflective and meaningful cinema, Sohla found its natural home.

About the Film

Title: Sohla
English Title: Celebration Under the Grey Sky
Language: Marathi (with English subtitles)
Duration: 1 hour 45 minutes 50 seconds
Year of Completion: November 2025

Cast:
Pravin Dalimkar, Devdatta Prashant Gone, Varsha Sunil Malwadkar, Vaishnavi Sanjay Godke, Alessandra Tarawhelan Marediz

Producer: Carryon Films
Producers: Sachin Srivastav & Kavita Bagban

Director & Writer: Saaikat Bagban (Debut Feature)

Tagline:
Between borrowed dreams and sudden grief, a boy discovers the weight of becoming a man.

Logline:
A flamboyant young boy inspired by Bollywood dreams of stealing the spotlight at his village’s coming-of-age ceremony, Sohla—until a family tragedy forces him to grow up too soon and confront what becoming a man truly means.

Short Synopsis:
After his father’s tragic downfall, young Pashya must set aside his childhood dreams to support his grieving family. As the village’s sacred Sohla ceremony approaches—a tradition marking the passage into manhood—he must decide whether to abandon it or reclaim it in his father’s memory. Sohla is a tender coming-of-age story about grief, resilience, and quiet transformation.

Director’s Statement:
“Sohla is a reflection of what I have seen and felt growing up. It is about the moment when a boy is forced to become a man—not by choice, but by circumstance. Through this film, I wanted to share that quiet struggle of loss, responsibility, and resilience.”

“राज्य में फैल सकती है अशांति” — अमित शाह पर टिप्पणी से भड़की BJP

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बेंगलुरु|कर्नाटक में कांग्रेस के प्रवक्ता एम. लक्ष्मण के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ और भ्रामक बयान देने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एम. ए. सलीम से मुलाकात कर की है। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि एम. लक्ष्मण ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना के खिलाफ बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाए, जिससे राज्य में अशांति फैलने और जनता में डर और नफरत पैदा होने की आशंका है।शिकायत के अनुसार, 8 जनवरी 2026 को मैसूर स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम. लक्ष्मण ने दावा किया कि अमित शाह के इशारे पर ही बेल्लारी में दंगा हुआ, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शव मिले। लक्ष्मण ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने अमित शाह का संदेश कुछ नेताओं तक पहुंचाया था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान भाजपा पर “शव गिराकर राजनीति करने” जैसी बेहद आपत्तिजनक आरोप भी लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अगर अमित शाह का संदेश लाने वाले केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना की ब्राउन मैपिंग की जाए, तो साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा। उन्होंने दावा किया था कि वी. सोमन्ना के बेल्लारी जाने और जनार्दन रेड्डी और श्रीरामुलु से बातचीत करने के बाद ही दंगा हुआ।

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शांति भंग होने का खतरा

भाजपा प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ये बयान बिना किसी दस्तावेज़, सबूत या ठोस आधार के दिए गए हैं। शिकायत में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे झूठे बयान (i) जनता के बीच डर, चिंता और अशांति पैदा कर सकते हैं। (ii) सरकार के खिलाफ नफरत और अविश्वास पैदा करने के इरादे से दिए गए हैं। (ii) केंद्र और राज्य सरकारों और जनता के बीच शांति और सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं, और (iv) उच्च पदस्थ केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ झूठे आरोप फैलाकर लोगों को भड़का सकते हैं।

पहले से लंबित हैं मामले

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दावा किया कि एम. लक्ष्मण इससे पहले भी इस तरह के बयान दे चुके हैं और उनके खिलाफ मानहानि के कई मामले पहले से अदालतों में लंबित हैं। भाजपा नेताओं ने पुलिस से मांग की है कि एम. लक्ष्मण के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक फायदे के लिए समाज की शांति और सौहार्द बिगाड़ने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। फिलहाल, पुलिस ने शिकायत को संज्ञान में ले लिया है और मामले की जांच की जा रही है।