WPL 2026 Points Table में दिल्ली कैपिटल्स ने लगाई छलांग, चौथी हार के बाद कहां है मुंबई इंडियंस?

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वुमेंस प्रीमियर लीग यानी डब्ल्यूपीएल के चौथे सीजन की पॉइंट्स टेबल में आखिरकार दिल्ली कैपिटल्स ने सबसे आखिरी पायदान को छोड़ दिया है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ अपने सीजन के पांचवें मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने जीत दर्ज की, जो पांच मैचों में दिल्ली की दूसरी जीत है। इस एक जीत के साथ दिल्ली कैपिटल्स ने पॉइंट्स टेबल में एक पायदान की छलांग लगाई है। हालांकि, मुंबई इंडियंस की सेहत पर इस हार का कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन टीम के लिए प्लेऑफ्स में पहुंचना कठिन हो गया है।

मलेशिया ने गेंदबाज़ी का फैसला

दिल्ली की टीम पांच मैचों में 2 जीत और 4 अंकों के साथ चौथे पायदान पर पहुंच गई है, जबकि गुजरात जायंट्स को सबसे आखिरी पायदान पर खिसकना पड़ा है। सीजन के पहले दो मैच जीतकर गुजरात की टीम ने सनसनी मचाई थी और ऐसा लग रहा था कि गुजरात की टीम इस बार कमाल करेगी, लेकिन अगले तीन मैचों में गुजरात की टीम हारी और अब हालत ये है कि टीम सबसे आखिरी पायदान पर पहुंच गई है। पांच मैचों में टीम 3 मैच हार चुकी है। 2 ही मैच जीते हैं और खाते में 4 अंक हैं। नेट रेट दिल्ली कैपिटल्स से भी खराब गुजरात की टीम का है इस समय डब्ल्यूपीएल की पॉइंट्स टेबल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु यानी आरसीबी टॉप पर है, जो सभी पांच मैचों को जीत चुकी है और प्लेऑफ्स के लिए भी क्वालीफाई कर चुकी है। आरसीबी के खाते में 10 अंक हैं। मुंबई इंडियंस 6 मैचों में 2 मैच जीतने के बाद 4 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर यूपी वॉरियर्स है, जिसके खाते में भी चार ही अंक हैं। दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें नंबर पर विराजमान टीमों के खातों में 4-4 अंक हैं। हालांकि, नेट रन रेट इस समय सिर्फ एमआई का ही प्लस में है। बाकी टीमों का माइनस में चल रहा है।

Latest WPL Points Table2026
टीम    मैच    जीत    हार    नो रिजल्ट    पॉइंट्स    नेट रन रेट
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु    5    5    0    0    10    +1.882
मुंबई इंडियंस    6    2    4    0    4    +0.046
यूपी वॉरियर्स    5    2    3    0    4    -0.483
दिल्ली कैपिटल्स    5    2    3    0    4    -0.586
गुजरात जायंट्स    5    2    3    0    4    -0.864

जाली नोट और रुपया डबलिंग केस में भाजपा के पूर्व प्रवक्ता के घर हरियाणा-बिहार STF की छापेमारी

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समस्तीपुर : जाली नोट और रुपया डबलिंग के नाम पर ठगी से जुड़े एक गंभीर मामले में बिहार के समस्तीपुर जिले से बड़ी खबर सामने आई है. हरियाणा और बिहार की स्पेशल टास्क फोर्स ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्ति के घर छापेमारी की है. इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं.

संयुक्त STF कार्रवाई से गांव में दहशत : हरियाणा एसटीएफ और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने समस्तीपुर में छापेमारी की. कार्रवाई दलसिंहसराय अनुमंडल के अजनौल गांव में की गई. STF और स्थानीय थाना पुलिस के डेरा डालते ही गांव में दहशत का माहौल बन गया.

रुपया डबलिंग के नाम पर ठगी का आरोप : सूत्रों के अनुसार मामला हरियाणा में दर्ज एक ठगी और लूट की प्राथमिकी से जुड़ा है. आरोप है कि एक व्यक्ति से दो लाख रुपये लेकर चार लाख रुपये देने का झांसा दिया गया. रुपयों के लेन-देन के बाद रास्ते में लूट की वारदात को अंजाम दिया गया.

पंकज कुमार लाल का नाम आया सामने : इस पूरे मामले में पंकज कुमार लाल का नाम सामने आने के बाद जांच तेज हुई. हरियाणा STF ने मामले की कड़ियां बिहार से जुड़ती देख बिहार STF से संपर्क किया. इसके बाद संयुक्त टीम बनाकर अजनौल गांव में छापेमारी की गई.

घर की तलाशी और इलाके की घेराबंदी : STF टीम ने पंकज कुमार लाल के आवास की गहन तलाशी ली. छापेमारी के दौरान घर के आसपास के पूरे इलाके को घेर लिया गया. ग्रामीणों के मुताबिक किसी भी बाहरी व्यक्ति को घर के नजदीक नहीं जाने दिया गया.

भाजपा का पूर्व प्रवक्ता था पंकज : बताया जाता है कि पंकज कुमार लाल पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता रह चुके हैं. फिलहाल वे रेलवे के लिए नीर-नीर पानी की सप्लाई के काम से जुड़े बताए जाते हैं. इसके अलावा विभूतिपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर में रिक्शा एजेंसी भी संचालित करते हैं.

तीन करोड़ से अधिक का आलीशान मकान : जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष पहले उन्होंने अजनौल गांव में जमीन खरीदी थी. इसके बाद लगभग तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आलीशान मकान का निर्माण शुरू कराया गया. मकान का निर्माण कार्य अभी भी जारी बताया जा रहा है.

जांच के दायरे में संपत्ति और नेटवर्क : STF की टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि संपत्ति का स्रोत क्या है. साथ ही जाली नोट और रुपया डबलिंग गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है. संभावना जताई जा रही है कि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है.

DSP का बयान : दलसिंहसराय DSP विवेक शर्मा ने छापेमारी की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि कार्रवाई अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. छापेमारी समाप्त होने के बाद पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी दी जाएगी.

ये चुनाव है या बिग बॉस का खेल…नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने पर कांग्रेस का तंज

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नई दिल्ली। भाजपा (BJP) द्वारा नितिन नवीन (Nitin Naveen) को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष (New National President) घोषित किए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा ने पहले अध्यक्ष घोषित कर दिया और बाद में चुनाव की औपचारिकता की बात कही। कांग्रेस का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और यह आंतरिक लोकतंत्र के दावों पर सवाल खड़े करती है।

कांग्रेस का हमला क्यों?
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि अगर यह चुनाव था तो प्रक्रिया कहां हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले नाम तय करना और फिर चुनाव की बात करना किस तरह का लोकतांत्रिक तरीका है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा में संगठनात्मक चुनाव सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं और असली फैसले पहले ही बंद कमरों में हो जाते हैं।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी घसीट लिया। पवन खेड़ा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग की कोई भूमिका ही नहीं रही, इसलिए उन्हें “छेड़छाड़” का मौका भी नहीं मिला। कांग्रेस पहले से ही चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाती रही है और इस बयान के जरिए उसने अपने हमले को और तेज कर दिया।

 

‘बॉस-बॉस’ की राजनीति पर कटाक्ष
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी मामलों में नितिन नवीन उनके बॉस हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा में कभी कोई किसी का बॉस बन जाता है और कभी कोई और। उन्होंने इसे ‘बॉस-बॉस’ का खेल बताते हुए कहा कि देश और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

कांग्रेस ने हाल ही में गंगा में स्नान को लेकर साधु-संतों से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। पवन खेड़ा ने कहा कि एक तरफ हिंदू धर्म के बड़े संत आहत हैं और दूसरी तरफ भाजपा सत्ता के खेल में व्यस्त है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह राजनीति नहीं बल्कि ‘बिग बॉस’ जैसा शो बन गया है, जहां हर दिन नया ड्रामा दिखाया जाता है।

शहरी नक्सल वाले बयान पर भी कांग्रेस हमलावर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शहरी नक्सल चुनौती का जिक्र किए जाने के बाद कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने संसद में केंद्र सरकार के पुराने जवाब का हवाला देते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मानते हैं कि जो भी उनके विरोध में बोले, उसे शहरी नक्सल मान लिया जाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2020 में गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में साफ किया था कि अर्बन नक्सल शब्द सरकारी शब्दावली का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री बार-बार इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विरोध की आवाजों को बदनाम करने जैसा है।

कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया उस भाषण के बाद आई है, जिसमें प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद ‘शहरी नक्सलों’ को देश के लिए खतरा बताया। मोदी ने कहा कि ये लोग सरकार या उनके पक्ष में बोलने वालों को भी निशाना बनाते हैं और उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस का कहना है कि जाति जनगणना या आर्थिक असमानता पर सवाल उठाने वालों को भी ‘शहरी नक्सल सोच’ से जोड़ना लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है। पार्टी ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या हर असहमति को इसी नजर से देखा जाएगा।

BJP अध्यक्ष बनते ही नितिन नवीन एक्शन में… विनोद तावड़े को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

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नई दिल्ली। बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) का पद संभालते ही नितिन नवीन (Nitin Naveen) ने पहले ही दिन ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। उन्होंने वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े (Vinod Tawde) को केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) के लिए चुनाव प्रभारी और चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनके साथ ही शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है। बता दें कि मंगलवार को ही उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का औपचारिक ऐलान किया गया है। हालांकि कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ही तय हो गया था कि नितिन नवीन बीजेपी का कमान पूरी तरह से संभालने जा रहे हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि तेलंगाना नगर और स्थानीय निकाय के चुनाव के लिए आशीष शेलार को चुनाव प्रभारी और अशोक परनामी व रेखा शर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा वरिष्ठ नेता राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ सतीश पुनिया और संजय उपाध्याय को सह प्रभारी का दातित्व सौंपा गया है।

युवाओं का अह्वान
भाजपा मुख्यालय में पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपने नाम की घोषणा के बाद नवीन ने एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने, “सनातन परंपराओं और आस्था” की रक्षा करने और देश को जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से बचाने का भी आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “15 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के युवाओं से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने का आह्वान किया था। मैं देश के युवाओं से कहना चाहता हूं कि राजनीति से दूर रहना समाधान नहीं, बल्कि सक्रिय योगदान देना ही समाधान है।” नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए युवाओं को आगे आकर “सकारात्मक राजनीति” में भाग लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं युवाओं को यह भी बताना चाहूंगा कि राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं है। राजनीति सौ मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि मैराथन है, जहां गति नहीं बल्कि सहनशक्ति की परीक्षा होती है। आगे आइए और अपनी जड़ों को मजबूत रखते हुए इस राजनीतिक मैदान पर काम कीजिए।”

 

 

राहुल गांधी का मनरेगा को लेकर सरकार पर निशाना, गरीबों को भूखा रखना चाहते हैं PM मोदी

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मनरेगा (MNREGA) को खत्म करके सरकार वीबी-जी-राम-जी (VB-G RAM-G) नाम से एक नया कानून (New Law) लेकर आई है। इसे लेकर कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधा है। राहुल गाधी ने मोदी सरकार पर गरीबों के बजाय नौकरशाहों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। मनरेगा के विरोध में कांग्रेस देश भर में मनरेगा बचाओ अभियान चला रही है। मनरेगा पर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सत्ता को केंद्रीकृत करने, इसे नौकरशाही को सौंपने और गरीब नागरिकों को भूखा मरने के लिए छोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा मनरेगा का मकसद बेरोजगार ग्रामीणों को पैसे कमाने का जरिया देना था। लेकिन प्रधानमंत्री ऐसा नहीं चाहते, वे सत्ता को केंद्रीकृत करना चाहते हैं और इसे नौकरशाही को सौंपना चाहते हैं। वह गरीबों को भूखा मरेने के लिए छोड़ना चाहते हैं। एक्ट में सुधार के नाम पर गरीबों का सुरक्षा कवच हटाया गया है। उन्होंने एक्ट से महात्मा गांधी के नाम को हटाने की भी निंदा की।

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एआर रहमान के बयान पर महबूबा मुफ्ती बोली- जावेद अख्तर भी …

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mehabuba muftiनई दिल्‍ली। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान (AR Rahman) के हालिया बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड में सांप्रदायिक भेदभाव (Communal discrimination) को लेकर बहस छेड़ दी है। रहमान ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि बीते आठ वर्षों में उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपेक्षाकृत कम काम मिला है और इसके पीछे इंडस्ट्री में बढ़ती सांप्रदायिक सोच एक कारण हो सकती है। उनके इस बयान पर जहां कुछ लोगों ने सहमति जताई, वहीं कई दिग्गजों ने इसे नकार दिया। अब इस पूरे विवाद पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि किसी के अनुभवों को खारिज करने से सच्चाई नहीं बदल जाती। उन्होंने जावेद अख्तर द्वारा ए आर रहमान के बयान को नकारने पर सवाल उठाए। महबूबा ने लिखा कि जब जावेद अख्तर बॉलीवुड में सांप्रदायिकता को लेकर ए आर रहमान की चिंताओं को खारिज करते हैं, तो यह भारतीय मुसलमानों के वास्तविक अनुभवों के बिल्कुल उलट नजर आता है।

 

महबूबा मुफ्ती ने किया शबाना आजमी का जिक्र
अपने बयान में महबूबा मुफ्ती ने अभिनेत्री शबाना आजमी का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि शबाना आजमी खुद यह बता चुकी हैं कि उन्हें मुस्लिम होने की वजह से बॉम्बे जैसे आधुनिक और कथित रूप से समावेशी शहर में घर किराए पर देने से इनकार कर दिया गया था। महबूबा ने कहा कि अगर इतने बड़े और प्रतिष्ठित कलाकारों को ऐसे अनुभवों से गुजरना पड़ा है, तो आम लोगों की स्थिति को समझा जा सकता है। महबूबा मुफ्ती ने आगे लिखा कि बॉलीवुड को हमेशा मिनी इंडिया कहा जाता रहा है, क्योंकि यह देश की विविधता और सामाजिक वास्तविकताओं को दर्शाता है।

 

इससे पहले जावेद अख्तर ने एआर रहमान के बयान पर असहमति जताते हुए कहा था कि उन्हें कभी बॉलीवुड में सांप्रदायिकता महसूस नहीं हुई। उन्होंने बातचीत में कहा कि एआर रहमान को इंडस्ट्री में बहुत सम्मान मिलता है। वह बेहद व्यस्त रहते हैं और बड़े-बड़े शो करते हैं। हो सकता है कि छोटे निर्माता ऑस्कर विजेता जैसी बड़ी शख्सियत से संपर्क करने में हिचकते हों। इसमें किसी तरह का सांप्रदायिक एंगल नहीं है।

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नितिन नवीन ने संभाली भाजपा की कमान, नए सेनापति ने आलाकमान का जताया आभार

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नया नेतृत्व (new leader) मिल गया है और इसके साथ ही संगठन की राजनीति में एक नई ऊर्जा देखने को मिली। पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Naveen) ने अपने पहले संबोधन में साफ कर दिया कि भाजपा की ताकत उसका कार्यकर्ता है और आगे की राजनीति भी इसी आधार पर चलेगी। नितिन नवीन ने अपने भाषण की शुरुआत भारत माता की जय के उद्घोष के साथ की। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा के सभी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों का सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया। नितिन नवीन ने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना भाजपा की कार्यकर्ता-आधारित राजनीति का प्रमाण है। कार्यकर्ता आधारित राजनीति भाजपा की सोच है। भाजपा की सोच सर्वव्यापी और सर्वग्राही है।

 

नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के संबोधन की बड़ी बातें
नितिन नवीन ने अपने संबोधन में कहा कि हमने कार्यकर्ता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशसेवा के काम करते हुए देखा। उन्होंने कहा कि आपको देख कर ही सीखा है कि जो व्यक्ति खुद को लोगों की भावनाओं से जुड़ने वाला बना सकता है, वही बड़ा शख्स बनता है। उन्होंने पीएम मोदी के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, ‘मुझे याद है कि जब मैंने पहली बार गुजरात के आनंद में आपके साथ एक कार्यक्रम में भाग लिया था। उस वक्त मैं राष्ट्रीय महासचिव था और मैंने सद्भावना मिशन कार्यक्रम के दौरान आपको प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यान से सुनते हुए देखा था।‘कार्यक्रम खत्म होने के बाद, जब आपने अपने ग्रीन रूम में हमसे बात की तो आपने बड़ी भावुकता से समझाया कि गुजरात से इतने सारे लोग क्यों आए थे। उस दिन मुझे समझ आया कि एक व्यक्ति तभी महान बनता है, जब वह जनता की भावनाओं से जुड़ता है।’ उन्होंने कहा कि हम राष्ट्र प्रथम के नारे से आगे चलते हैं। भाजपा में राजनीति पदभार नहीं, उत्तरदायित्व है। भाजपा अगर आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी है तो प्रेरणादायी नेतृत्व, विचारधारा और कार्यकर्ता हैं।

भाजपा ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया
पीएम मोदी ने नितिन नवीन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नितिन नवीन को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा का ये संगठन पर्व देश के कार्यकर्ता केंद्रित सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस नए दौर की शुरुआत में नितिन नवीन भाजपा की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि नितिन नवीन आज की युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे उस पीढ़ी से हैं, जिसने बचपन में रेडियो के जरिए जानकारी ली और आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक के साथ काम कर रही है। इससे पार्टी के हर कार्यकर्ता को सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

 

 

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निकाय चुनाव में कांग्रेस ने उद्धव और शरद गुट को पछाड़ा, MVA में समीकरण बदलने की तैयारी

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नई दिल्‍ली । महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर से उठापटक का दौर जारी है। किस नगर निगम में कौन मेयर (Mayor) बनेगा इस पर लेकर पार्टियों के बीच चर्चाओं का दौर जारी है। सबसे महत्वपूर्ण बीएमसी (BMC) के मेयर पद को लेकर भी लगातार राजनीति हो रही है। शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को ताज होटल में बैठा कर रखा है, तो उद्धव गुट लगातार भाजपा और शिवसेना के बीच में तनाव पैदा करने के लिए बयानबाजी कर रहा है। हालांकि, इस चुनाव के बाद अब विपक्ष के महाविकास अघाड़ी गठबंधन में भी समीकरण बदलने के आसार लगाए जा रहे हैं। क्योंकि, इन चुनावों में कांग्रेस ने बेहतरी प्रदर्शन करते हुए उद्धव गुट और शरद पवार गुट को भी पीछे छोड़ दिया है। एक तरफ शरद पवार को अपने गढ़ पुणे में करारी हार क्षेलनी पड़ी है, तो वहीं दूसरी तरफ ठाकरे को भी अपने मुंबई की राजशाही को तीन दशक बाद अलविदा कहना पड़ा है। इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी ने कई नगर निगमों में बेहतर प्रदर्शन किया है।

29 नगर निगमों के इस चुनाव में जहां भारतीय जनता पार्टी 1,425 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, तो वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना 399 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद नंबर आता है कांग्रेस का जिसने 324 सीटों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। महायुति के साथ सत्ता का सुख भोग रहे अजित पवार ने निकाय चुनाव के ऐन पहले अपने चाचा के साथ गठबंधन कर लिया था। हालांकि, इसके बाद भी उन्हें इसका केवल घाटा ही उठाना पड़ा। उनकी पार्टी 167 सीटों के साथ चौथे नंबर पर रही। इसके बाद नंबर उद्धव गुट का रहा, जो केवल 155 सीटें जीतने में कामयाब रहा। शरद पवार को अपनी पार्टी की सबसे बुरी दशा देखनी पड़ी उनकी पार्टी केवल 36 सीटें ही जीत सकी।

 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस निकाय चुनाव में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही है। उसने अपने दोनों सहयोगियों उद्धव गुट और शरद गुट से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले एमवीए में सीट बंटवारे को लेकर पुनर्विचार होना तय है। एक तरफ उद्धव गुट ने अपना गढ़ बीएमसी गंवा दिया है, वहीं दूसरी तरफ शरद पवार ने अपना पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ जैसे गढ़ से हाथ धोया है। लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस ने अकेले की दम पर कोल्हापुर, चंद्रपुर और भिंवडी में बेहतर प्रदर्शन किया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने बताया पार्टी अब एमवीए में बड़े हिस्से की मांग करेगी। उनका तर्क है कि ठाकरे और पवार की “क्षेत्रीय अस्मिता” की राजनीति बीजेपी की बढ़त को रोकने में नाकाम रही। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का अकेले या सीमित गठबंधन में चुनाव लड़ने का फैसला एक तरह का “स्ट्रेस टेस्ट” साबित हुआ, जिससे यह दिखा कि पार्टी मौजूदा दौर में भी टिक सकती है और आगे बढ़ सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिवसेना उद्धव गुटभले ही मुंबई में बीजेपी की मुख्य चुनौती बनी हुई हो, लेकिन राज्य के अन्य हिस्सों में उसका प्रभाव घटा है। इससे महाविकास अघाड़ी में खुद को संगठनात्मक ताकत के आधार पर वरिष्ठ साझेदार बताने का उसका दावा कमजोर पड़ता है।

निकाय चुनाव के नतीजे यह भी दिखाते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट की शिवसेना के बीच वोटों का बंटवारा कई वार्डों में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए फायदेमंद रहा। विश्लेषकों के अनुसार, ठाकरे की पार्टी के पास भावनात्मक जुड़ाव और ब्रांड पहचान तो है, लेकिन मजबूत और एकजुट संगठन के अभाव में इसे वार्ड स्तर की जीत में बदलना चुनौती बना हुआ है।

इस चुनाव में सबसे ज्यादा एनसीपी पर टूट का प्रभाव दिखाई दिया। पुणे में पार्टी को दोनों धड़ों के गठबंधन के बाद बी भारी नुकसान उठाना पड़ा और शहरी इलाकों में भी उसे ज्यादा कोई भरोसेमंद जीत नहीं मिली। नतीजों के आधार पर देखें, तो महाराष्ट्र के विपक्ष में इस वक्त कांग्रेस पार्टी ही एक ऐसी पार्टी बची है, जिसकी मौजूदगी पूरे महाराष्ट्र में हैं। इससे कांग्रेस एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, जिसमें उसका राष्ट्रीय एजेंडा प्राथमिकता में होगा।

RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

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पटना। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) (Rashtriya Janata Dal – RJD) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक (National Executive Important meeting) 25 जनवरी को पटना (Patna) में बुलाई गई है. यह बैठक पटना के एक बड़े होटल में आयोजित होगी, जिसमें पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक बदलावों को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो सकता है. अगर यह फैसला होता है तो तेजस्वी यादव को पार्टी के सभी बड़े और अहम निर्णय लेने का अधिकार मिल जाएगा।

 

लालू यादव की उम्र और स्वास्थ्य बना वजह
बताया जा रहा है कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है, ताकि संगठन की जिम्मेदारी युवा नेतृत्व के हाथों में सौंपी जा सके।

चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव की तैयारी
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव और उनकी टीम के फैसलों पर सवाल उठे थे. इसी पृष्ठभूमि में उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, ताकि संगठन को नए सिरे से मजबूत किया जा सके।

तेज प्रताप की वापसी की संभावना होगी खत्म
अगर तेजस्वी यादव राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनते हैं, तो पार्टी में तेज प्रताप यादव की वापसी की अटकलों पर भी विराम लग सकता है.

सितंबर 2025 के बाद पहली बैठक
सितंबर 2025 में आरजेडी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद यह पहली बैठक होगी. बैठक की अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद यादव करेंगे।

करीब 200 नेता होंगे शामिल
इस बैठक में 85 स्थायी सदस्यों को बुलाया गया है. इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों को मिलाकर करीब 200 नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होंगे. बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी डेलीगेट्स के आने की संभावना है।

 

 

77वें गणतंत्र दिवस परेड के साक्षी बनेंगे 10 हजार मेहमान, सरकार बोली- मकसद जन भागीदारी बढ़ाना

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इस साल 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ (Duty Path) पर आयोजित होने वाली परेड (Parade) को देखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों (Guests) को आमंत्रित किया गया है। आमंत्रित अतिथियों में आय और रोजगार सृजन में अनुकरणीय कार्य करने वाले, सर्वश्रेष्ठ नवप्रवर्तक, शोधकर्ता और स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूह और प्रमुख सरकारी पहलों के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सम्मानित करने और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में जन भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें आमंत्रित किया गया है। इन विशेष अतिथियों को कर्तव्य पथ पर प्रमुख स्थान पर बैठाया जाएगा। समारोहों के अतिरिक्त, विशेष अतिथियों के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, प्रधानमंत्री संग्रहालय और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्थानों के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। उन्हें संबंधित मंत्रियों से बातचीत करने का अवसर भी मिलेगा।

इस बीच, 77वें गणतंत्र दिवस समारोह से पहले, खुफिया एजेंसियों से प्राप्त कई आतंकी खतरों की सूचनाओं के मद्देनजर, दिल्ली पुलिस ने कर्तव्य पथ और पूरे नई दिल्ली जिले में एक व्यापक, प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा तंत्र स्थापित किया है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के लिए बैठने की जगहों का नाम भारतीय नदियों के नाम पर रखा गया है। मेहमानों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा तैनाती के तरीके में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा, पुलिस ने सभी आमंत्रित मेहमानों और टिकट धारकों से अपील की है कि वे अपने निमंत्रण कार्ड पर दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ें और निर्धारित मार्गों का ही पालन करें। मार्गों, पार्किंग और निर्धारित स्थानों से संबंधित पूरी जानकारी रक्षा मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की वेबसाइटों पर उपलब्ध है।