SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप पर SC सख्त, सरकारी दफ्तरों के बाहर सूची लगाने के निर्देश

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली। तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई थी। जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगति सूची में शामिल किए गए हैं, उनकी सूची को ग्राम पंचायत भवन, प्रत्येक उपखंड कार्यालय और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किया जाए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम इस सूची में हैं, वे सूची प्रकाशित होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर खुद या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। सूची में विसंगति के संक्षिप्त कारण भी दर्ज किए जाएंगे। आपत्तियां उपखंड स्तर के कार्यालयों में दर्ज कराई जा सकेंगी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सभी जिला कलेक्टरों को चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने और एसआईआर प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा है। इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त यह सुनिश्चित करें कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं सुचारू रूप से संपन्न हो। बता दें कि तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होंगे। 234 विधानसभा सीट वाले राज्य में चुनावी माहौल शुरू हो गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की दलों ने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। बता दें कि तमिलनाडु में इस वक्त डीएमके की सरकार है, जो कि कांग्रेस के साथ सहयोगी दल है।

 

 

Previous articleपुलिस महकमे में ‘बड़ा धमाका…16 IPS की कमान, जानें कौन है आपके जिले का नया कप्तान
News Desk

डेडलाइन्स, दबाव से मुक्ति और डायरेक्शन में एंट्री! अरिजीत सिंह के रिटायरमेंट की जानें बड़ी वजह

#LatestBollywoodNews #BollywoodNews #BollywoodUpdate #BollywoodNews #BollywoodHindiNews

मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने प्लेबैक सिंगिंग (Playback Singing) छोड़ने का इशारा क्या दिया, पूरी इंडस्ट्री (Industry) में जैसे भूकंप आ गया है. जिस आवाज के दम पर फिल्में थोड़ा ज्यादा कमाई करती थीं, वो आवाज अब फिल्मों से विदाई ले रही है. अरिजीत सिंह की आवाज ने पिछले एक दशक से हर आशिक का दिल बहलाया और हर टूटे दिल को सहारा दिया, यही वजह है कि उनके अचानक प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट (Retirement) के ऐलान से उनके फैंस भी दंग रह गए. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर रिटायरमेंट के बाद अरिजीत क्या करेंगे? आइए समझते हैं अरिजीत के इस कदम के पीछे की 4 सबसे बड़ी थ्योरीज, जो फैंस के सवालों का जवाब दे सकती हैं.

1. पिछले 4 दशकों से म्यूजिक इंडस्ट्री कवर कर रहीं सीनियर जर्नलिस्ट लिपिका वर्मा कहती हैं कि अब तक अरिजीत सिंह एक गाना गाते थे, फिल्म हिट होती थी, म्यूजिक कंपनी करोड़ों कमाती थी, लेकिन अरिजीत को मिलती थी सिर्फ एक बार की ‘फिक्स फीस’. इसे एक तरह से ‘फ्री पीआर टूल’ की तरह इस्तेमाल करना भी कहते हैं. लेकिन अब अरिजीत ने खेल पलट दिया है. उनके पास अब उनका करोड़ों का ‘फैनबेस है, उसे वो अपने ‘इंडी लेबल’ (ओरियन म्यूजिक) पर शिफ्ट कर रहे हैं. जब अरिजीत सिंह अपना गाना खुद के चैनल पर रिलीज करेंगे, तो उस गाने की ‘आईपी’ (मालिकाना हक) उनके पास होगी, जिसके लिए ताउम्र जो भी रॉयल्टी आएगी, वो सीधा अरिजीत की जेब में जाएगी. ये वही मॉडल है, जिसे आज के बड़े एक्टर्स अपनाते हैं, यानी खुद की फिल्म बनाओ और खुद ही मालिक बनो! हाल ही में जावेद अख्तर और शंकर महादेवन ने भी कई सिंगर और म्यूजिशियन के साथ मिलकर गुनगुनालो ऐप बनाया है, इस ऐप पर आर्टिस्ट खुद का म्यूजिक बनाकर अपलोड कर सकते हैं और अगर किसी फिल्म के लिए मेकर्स को वो खरीदना है, तो उन्हें सीधे आर्टिस्ट से बात करनी होगी और उनकी शर्तों पर म्यूजिक खरीदना होगा. अरिजीत भी इसी पैटर्न का इस्तेमाल कर सकते हैं.

 

2. एक बड़े म्यूजिक लेबल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बॉलीवुड में अब कई प्रोजेक्ट्स में कॉर्पोरेट्स और मार्केटिंग की दखलंदाजी बढ़ रही है. कई बार यहां गायक को गाना कैसे गाना है, ये म्यूजिक डायरेक्टर से ज्यादा कुछ और लोग तय करते हैं और अरिजीत जैसे कलाकार के लिए यह ‘क्रिएटिव जेल’ से कम नहीं है. अरिजीत अब उस लेवल पर हैं जहां उन्हें किसी बैनर की जरूरत नहीं. रिटायरमेंट का मतलब है कि अब वो ‘मसाला’ गानों की डिमांड से आजाद हैं. लेकिन यहां एक डर भी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अरिजीत जैसे बड़े नाम हट गए, तो म्यूजिक कंपनियां ‘सस्ते और नए टैलेंट’ को और भी बुरी तरह निचोड़ेंगी. यानी शोषण का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जहां अच्छी आवाजों को कौड़ियों के भाव खरीदा जाएगा.

3. सीनियर जर्नलिस्ट और फिल्म क्रिटिक आरती सक्सेना ने कहा, “आज के दौर में प्लेबैक सिंगिंग सिर्फ एक ‘विजिटिंग कार्ड’ रह गया है. असली पैसा फिल्मों में नहीं, बल्कि ‘स्टेडियम कॉन्सर्ट्स’ में है. अरिजीत अब खुद को एक ग्लोबल ब्रैंड की तरह देख रहे हैं. फिल्मों के लिए घंटों स्टूडियो में बंद रहने के बजाय, वो अपना समय वर्ल्ड टूर और लाइव परफॉर्मेंस को देना चाहते हैं और इन कॉन्सर्ट के लिए भारत एक अच्छा मार्केट है. एक फिल्म के गाने से ज्यादा कमाई वो एक रात के शो से कर सकते हैं. ऐसा हो सकता है कि रिटायरमेंट लेकर वो बॉलीवुड की ‘डेडलाइन्स’ से मुक्त होना चाहते हो ताकि वो अपने लाइव म्यूजिक के अनुभव को अगली पीढ़ी के लिए ‘लेजेंडरी’ बना सकें. उनका ये फैसला सफल रहा तो ये बाकी सिंगर्स के लिए मिसाल बनेगा. आगे चलकर उनकी तरह कुछ और सिंगर्स भी प्लेबैक सिंगिंग को बाय-बाय कहकर अपना खुद का अलग अस्तित्व बनाने की ओर कदम बढ़ा सकते हैं.”

4. हालांकि ये बात अब थ्योरी नहीं रही, बल्कि लगभग कन्फर्म हो गई है कि अरिजीत सिनेमा से दूर नहीं जा रहे, बल्कि वो अब खुद के बैनर के तहत फिल्में बना रहे हैं. जल्द ही वो अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस लॉन्च करेंगे. वो ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो उनकी सादगी और गहरी सोच को दिखा सकें. वो अब दूसरों के गानों के लिए चेहरा नहीं बनेंगे, बल्कि खुद अपनी फिल्में प्रोड्यूस करेंगे. यानी अब ‘अरिजीत सिंह फिल्म्स’ के बैनर तले आपको वो कहानियां देखने को मिलेंगी, जिनमें संगीत रूह तक उतरेगा. उम्मीद की जा रही है, अरिजीत का प्रोडूसर बनना, बॉलीवुड के उस ‘मसाला’ कल्चर को जवाब होगा जहां कंटेंट से ज्यादा शोर होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

SC on UGC New Rules: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाते हुए साफ किया है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक वर्ष 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि नए नियमों का दुरुपयोग होने की आशंका है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 19 मई तय की गई है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समाज में बढ़ते जातिगत विभाजन पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी हम जाति की दीवारों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। ऐसे फैसले देश को पीछे की ओर ले जाते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भारत को उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग स्कूल हों, जैसा कि अमेरिका में कभी गोरे बच्चों के लिए अलग स्कूल हुआ करते थे।

केंद्र सरकार को नोटिस जारी

SC on UGC New Rules के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट का मानना है कि यूजीसी के नए जाति संबंधी नियम स्पष्ट नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट होने के कारण उनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। शिक्षा संस्थानों में एकता दिखनी चाहिए, क्योंकि अगर वहां भेदभाव का माहौल बनेगा, तो देश में सामाजिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

सेक्शन 3C को दी गई चुनौती

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि उन्होंने यूजीसी अधिसूचना के सेक्शन 3C को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि इसमें जनरल कैटेगरी को बाहर रखते हुए SC, ST और OBC से जुड़े मामलों को ही जातिगत भेदभाव माना गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप नहीं है।

सब कुछ ठीक, सब एक साथ- राहुल और खरगे से मुलाकात के बाद बोले शशि थरूर

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

नई दिल्ली: कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) की लंबे समय से पार्टी के प्रति नाराजगी के कयास लगाए जाते रहे हैं. नाराजगी की खबरों के बीच थरूर ने आज गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. देर तक चली मुलाकात के बाद थरूर ने कहा कि सब कुछ ठीक है और सब एक साथ हैं.

संसद भवन स्थित मल्लिकार्जुन खरगे के ऑफिस में यह मुलाकात हुई. केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद थरूर ने इस मुलाकात को बहुत अच्छी, सार्थक और सकारात्मक करार दिया. शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, “सब कुछ ठीक है और हम सब एक साथ आगे बढ़ रहे हैं.”

थरूर ने कहा, “मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) और कांग्रेस अध्यक्ष (खरगे) के साथ हमारी बातचीत हुई. हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई. अब सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं. मैं और क्या कह सकता हूं? मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?”

 

अगले कुछ महीने में केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार की संभावना को लेकर शशि थरूर ने कहा, “मैंने हमेशा प्रचार किया है, आगे भी प्रचार करता रहूंगा.”

उन्होंने केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी से इनकार करते हुए कहा कि यह उनके लिए कभी मुद्दा ही नहीं रहा. क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई के सवाल पर उन्होंने कहा, “नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई. मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है. मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है.” उनका कहना है कि मैं मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं, मैं पहले से सांसद हूं.

शशि थरूर की नाराजगी को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे हैं. इससे पहले पिछले दिनों कांग्रेस सांसद थरूर ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPM) की ओर उनके झुकाव की अटकलें लगाई जा रही थीं.

अटकलें तब से लगाई जाने लगी हैं जब से उन्होंने कांग्रेस की कई बैठकों से दूरी बनाकर रखी. पिछले दिनों एक अहम बैठक में नहीं आने पर सफाई में कहा कि उनके पास न्योता इतनी देर से आया कि उनके पास अपने पहले से तय कार्यक्रम को बदलने का कोई विकल्प नहीं था. यह बैठक पिछले दिनों सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित की गई थी.

UGC New Rule पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जातिगत भेदभाव को लेकर उठे सवाल

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

UGC New Rule को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान इन नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि ये नियम अस्पष्ट हैं तथा इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश ने जातिविहीन समाज की दिशा में काफी कुछ हासिल किया है, ऐसे में यह देखना होगा कि कहीं हम उल्टी दिशा में तो नहीं बढ़ रहे।

अगली सुनवाई कब होगी?

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील विष्णु जैन ने अदालत में दलील दी कि UGC के रेगुलेशन के सेक्शन 3C, जिसमें SC, ST और OBC से जुड़े प्रावधान हैं, जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रों के लिए अलग-अलग हॉस्टल जैसी व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग में भी कई लोग अब आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं और उनके पास अन्य छात्रों की तुलना में बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं।

UGC के नए नियमों पर विवाद क्यों?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स’ के तहत नए नियम लागू किए थे। इन नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति, लिंग, धर्म, जन्मस्थान आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था।

 

अलविदा अजित पवार, अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, बेटों ने दी मुखाग्नि

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

बारामती. महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख अजित पवार (Ajit Pawar) का बुधवार सुबह विमान हादसे (plane crash) में निधन हो गया। महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। अजित का अंतिम संस्कार आज बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में किया गया। बेटे पार्थ और जय पवार ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। अपने नेता के आखिरी दर्शन करने के लिए समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग नम आंखों से अजित पवार को अंतिम विदाई दी।

 

दोनों बेटों ने दी पिता को मुखाग्नि
दोनों बेटों पार्थ और जय ने अपने पिता अजित पवार को मुखाग्नि दी।

राजकीय सम्मान के साथ हुआ अजित पवार का अंतिम संस्कार
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार बारामती में राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

गडकरी ने अर्पित की अंतिम श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बारामती में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

शिंदे ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अजीत पवार को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

अंतिम संस्कार में पहुंचे अभिनेता रितेश देशमुख
अजित पवार के अंतिम संस्कार में पहुंचे अभिनेता रितेश देशमुख।

फडणवीस ने अजित पवार को अर्पित किया पुष्पचक्र
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

 

नितिन नवीन ने अजित पवार को पुष्पांजलि अर्पित की
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अजित पवार को अर्पित की पुष्पांजलि, दी अंतिम विदाई।

शाह, फडणवीस, नीतीन नवीन समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नीतीन नवीन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और नितीन गडकरी ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

घरेलू कामगारों की याचिका पर CJI की सख्त टिप्पणी, सुनवाई से किया इनकार

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली|देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि घरेलू कामगारों या घरेलू सहायकों को न्यूनतम मजदूरी पाने का मौलिक अधिकार है पेन थोजिलालारगल संगम और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य के मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने जैसे नीतिगत फैसले राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इस पर न्यायपालिका का हस्तक्षेप सीमित है।CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आशंका जताई कि यदि घरेलू कामगारों के लिए अनिवार्य न्यूनतम वेतन तय किया गया, तो इसके उलटे परिणाम हो सकते हैं। CJI ने कहा, “अगर ऐसा हुआ तो हर घर मुकदमे में फंस जाएगा।” इसके आगे मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “न्यूनतम वेतन तय होते ही हर घर मुकदमेबाजी में फंस जाएगा। लोग घरेलू कामगार रखना ही बंद कर देंगे। ट्रेड यूनियनें हर घर को अदालत तक घसीटेंगी।” इसके साथ ही CJI ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई उद्योगों में ट्रेड यूनियनों के हस्तक्षेप के बाद रोजगार के अवसर घटे हैं और घरेलू कामगारों के मामले में भी ऐसा ही हो सकता है।

भगवान के लिए ऐसा मत करो, UGC नियमों पर रोक लगाते हुए CJI ने कह दी बड़ी बात

मौलिक अधिकार की दलील पर कोर्ट ने जताई चिंता

हालांकि, सुनवाई के दौरान पीठ ने माना कि यह तर्क आकर्षक लगता है कि न्यूनतम वेतन के बिना घरेलू कामगारों के समानता, गैर-भेदभाव और निष्पक्ष रोजगार से जुड़े अधिकार (अनुच्छेद 14, 15, 16) प्रभावित होते हैं, लेकिन कोर्ट ने आगाह किया कि अति-सक्रिय ट्रेड यूनियनें इन कामगारों को और बदतर हालात में छोड़ सकते हैं। CJI ने कहा, “कृपया इसके परिणामों पर विचार करें। ट्रेड यूनियनें अंत में इन्हें छोड़ देंगी और इनके पास कहीं जाने की जगह नहीं बचेगी।”

एजेंसियों के शोषण पर भी सवाल

बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू कामगारों को रोजगार देने वाली एजेंसियों की भूमिका पर भी चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में भी पहले एजेंसियों के जरिए कामगार रखे गए थे। उन्होंने कहा, “हम एजेंसियों को 40,000 रुपये प्रति कर्मचारी देते थे, लेकिन उन गरीब लड़कियों को सिर्फ 19,000 रुपये मिलते थे। यही वजह है कि भरोसा टूटता है।” उन्होंने कहा कि कई आपराधिक घटनाएं भी तब सामने आती हैं, जब घरेलू कामगार एजेंसियों के माध्यम से रखे जाते हैं, न कि सीधे मानवीय संपर्क के आधार पर।आरक्षण के लिए धर्मांतरण करा रहे हैं सवर्ण; CJI सूर्यकांत बोले- यह नया फर्जीवाड़ याचिका पर अदालत का रुख अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस तरह का आदेश चाहते हैं, उसके लिए कानून में संशोधन जरूरी होगा और ऐसा निर्देश देना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, “जब तक विधायिका से कानून बनाने को नहीं कहा जाता, तब तक कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं किया जा सकता। ऐसा निर्देश देना इस अदालत के लिए उचित नहीं है।” हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यों को घरेलू कामगारों की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और शोषण रोकने के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।

क्या थी याचिका

याचिका में मांग की गई थी कि घरेलू कामगारों को न्यूनतम वेतन का मौलिक अधिकार घोषित किया जाए और उन्हें न्यूनतम वेतन अधिनियम या वेज कोड, 2019 से बाहर रखने को असंवैधानिक ठहराया जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि सिंगापुर जैसे देशों में घरेलू कामगारों के लिए छुट्टी और अन्य अधिकार अनिवार्य हैं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि घरेलू कामगारों के लिए कोई कल्याणकारी कानून नहीं हैं। उन्होंने असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय आर्थिक नीतियों के मामलों में बेहद सतर्क रहता है।

रणवीर सिंह के खिलाफ बेंगलुरु में FIR, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप

#LatestBollywoodNews #BollywoodNews #BollywoodUpdate #BollywoodNews #BollywoodHindiNews

बेंगलुरु: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के खिलाफ बुधवार को बेंगलुरु में एक FIR दर्ज की गई है। अभिनेता पर आरोप है कि उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर दिए गए बयान से धार्मिक भावनाओं को आहत किया। यह मामला कर्नाटक की पारंपरिक ‘भूत कोला’ और दैव परंपरा से जुड़ा बताया जा रहा है। फिलहाल यह आरोप जांच के दायरे में हैं और रणवीर सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता प्रशांत मेथिल (46) के अनुसार, रणवीर सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मजाकिया अंदाज में कुछ एक्सप्रेशन दिए और उसकी तुलना फिल्म कांतारा में दिखाई गई दैव परंपरा से की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अभिनेता ने चावुंडी दैव को “महिला भूत” कहकर संबोधित किया, जिससे समाज के कुछ वर्गों की धार्मिक आस्थाएं आहत हुईं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि देवताओं को इस तरह संबोधित करना निंदनीय है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह टिप्पणी जानबूझकर एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर की गई।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (ACJM) अदालत के निर्देश पर बेंगलुरु पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 और 302 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गोवा में हुआ था कार्यक्रम

बताया जा रहा है कि जिस कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ, वह 28 जनवरी 2026 को गोवा में आयोजित किया गया था। FIR दर्ज होने के समय रणवीर सिंह न्यूयॉर्क में हैं, जहां वे एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने गए हैं।

अजित पवार की मौत के बाद कौन संभालेगा NCP की कमान… इन चार नेताओं पर नजरें!

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के उप मुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) के मुखिया अजित पवार (Ajit Pawar) की विमान हादसे में दर्दनाक मौत ने न सिर्फ राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है बल्कि उनकी पार्टी एक ऐसे असमंजस भरे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जिसके भविष्य पर अटकलों का बाजार गर्म हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी इस पर अलग-अलग मत है। कुछ का मानना है कि पार्टी का देर-सबेर शरद पवार (Sharad Pawar) गुट वाले NCP में विलय हो सकता है क्योंकि खुद अजित पवार इसकी अगुवाई कर रहे थे, तो दूसरी तरफ कुछ जानकारों का कहना है कि फिलहाल पार्टी महायुति गठबंधन का हिस्सा ही बनी रहेगी।

पार्टी की अगुवाई कौन करेगा, इस पर भी संशय के बादल हैं। हालांकि, कमोबेश सभी विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी की कमान पवार परिवार के पास ही रहेगा। चेहरा भले ही सुनेत्रा पवार हों या पार्थ पवार या फिर कोई और पवार लेकिन पर्दे के पीछे पार्टी के कुछ नेता सभी अहम फैसले कर सकते हैं। राजनीतिक जानकार ये भी कह रहे हैं कि NCP के सामने फिलहाल दो रास्ते हैं, पहला, परिवार और सहानुभूति आधारित नेतृत्व का और दूसरा अनुभव और संगठनात्मक मजबूती पर आधारित फैसला। उनके मुताबिक, डिप्टी सीएम पद केवल सम्मान का सवाल नहीं, बल्कि महायुति सरकार की स्थिरता और 2029 की चुनावी रणनीति से भी जुड़ा है।

 

चार चेहरे कौन?
ऐसे में अंतिम फैसला सिर्फ NCP के भीतर नहीं, बल्कि भाजपा नेतृत्व और गठबंधन समीकरणों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। दरअसल, अजित पवार की राजनीतिक विरासत भारी है और उसी विरासत को संभालने के लिए NCP को अब भावना और व्यवहारिक राजनीति के बीच संतुलन साधना होगा। इन सबके बीच पार्टी के चार चेहरों का जिक्र होने लगा है, जो संकटमोचक बनकर उभर सकते हैं। अजित पवार गुट के पास इस वक्त 41 विधायक हैं। स्पष्ट उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में पार्टी किसी अनुभवी नेता को आगे कर सकती है। इस कड़ी में चार बड़े नाम सामने हैं:

प्रफुल्ल पटेल
प्रफुल्ल पटेल NCP के सबसे वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं में गिने जाने जाते हैं। पार्टी विभाजन के समय प्रफुल्ल पटेल अजित पवार के साथ मजबूती से खड़े रहे। उनके पास केंद्र और राज्य दोनों स्तरों का अनुभव है। उनकी एक राष्ट्रीय पहचान है और महायुति में भी स्वीकार्यता है। इसलिए वह एक संतुलित विकल्प बनकर उभर सकते हैं। 1957 में जन्मे, पटेल को पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन और भारी उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है। वे शरद और अजित पवार के करीबी माने जाते रहे हैं। एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत के साथ वह महाराष्ट्र के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे हैं। छह बार सांसद रहे हैं।

छगन भुजबल
ओबीसी (माली) समुदाय से आने वाले छगन भुजबल के पास करीब 40 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है। उनके पास मजबूत ओबीसी आधार है। वह मराठी राजनीति में पिछड़ा वर्ग की प्रभावी आवाज और NCP के सबसे अनुभवी चेहरों में एक हैं। अजित पवार के साथ उनके खड़े रहने से यह संकेत भी मिलता है कि पार्टी उन्हें भरोसेमंद मानती है। वह दो बार डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। मौजूदा फडणवीस सरकार में वह मंत्री हैं। उन्होंने 1960 के दशक में शिवसेना के साथ सियासी सफर की शुरुआत की, मुंबई के मेयर रहे, और बाद में एनसीपी में शामिल हो गए।

धनंजय मुंडे
मराठवाड़ा और बीड क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले धनंजय मुंडे संगठन और गठबंधन दोनों में संतुलन साधने की क्षमता रखते हैं। भाजपा नेतृत्व से उनकी नजदीकी और महायुति में उनकी भूमिका उन्हें पावर ब्रिज के रूप में स्थापित करती है। वह दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं, जिन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है। वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता, सामाजिक न्याय मंत्री, और बीड जिले के पालक मंत्री (Guardian Minister) रह चुके हैं। एक सरपंच की हत्या के मामले में नाम आने के बाद पिछले साल मार्च 2025 में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

सुनील तटकरे
सुनील तटकरे फिलहाल NCP के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोकसभा में पार्टी के इकलौते सांसद हैं। तटकरे संगठनात्मक दृष्टि से बेहद मजबूत माने जाते हैं। कोकण क्षेत्र में उनकी पकड़ और विधानसभा–लोकसभा दोनों में अनुभव उन्हें पार्टी का स्थिर चेहरा बना सकता है। वह वे राज्य सरकार में वित्त, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाबर आजम का नाम सुनकर चिढ़ गए पाकिस्तान टीम के कप्तान, बोले- एक दिन…

#LatestsportNews #sportNews #sportUpdate #technlogyNews #sportHindiNews

पाकिस्तान की टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने घर पर 3 मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज खेलने वाली है। इसकी शुरुआत आज यानी 29 जनवरी से हो रही है। इस मुकाबले से पहले पाकिस्तान टीम के कप्तान सलमान अली आगा प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए और उन्होंने तमाम सवालों के जवाब दिए, लेकिन जब उनसे बाबर आजम की स्लो बैटिंग को लेकर पूछा गया तो वे बाबर के बारे में सुनते ही चिढ़ गए और उन्होंने कहा कि उनकी ख्वाहिश है कि एक दिन वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में आएं और उस दिन बाबर की बात न हो। उन्होंने कहा कि टीम में 14 खिलाड़ी और भी हैं।लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में मैच की पूर्व संध्या पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सलमान अली आगा से पूछा गया कि बीबीएल में उनका प्रदर्शन खराब था। उनकी स्लो बैटिंग थी। क्या वे इसमें सुधार करेंगे? इसके जवाब में सलमान अली आगा ने कहा, “मेरी तो एक ही ख्वाहिश है कि किसी दिन मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में आऊं तो बाबर के बारे में ना सवाल हो। मतलब और भी 14 लोग हैं टीम में और भी बैट्समैन हैं उनके बारे में भी सोचे उनके बारे में भी बात किया करें। छोड़ दें उननको करने दें बैटिंग अब। वह अच्छी बैटिंग ही कर रहे थे। आप बिग बैश में कह सकते हैं कि वह उस तरह की परफॉर्मेंस नहीं कर सके, जिस तरह की उनकी टीम उनसे उम्मीद कर रही होगी, लेकिन हमारे लिए वह बहुत अच्छी परफॉर्मेंस कर रहे हैं मेरे ख्याल से। जो उनका रोल है वह उसको बहुत अच्छे तरीके से निभा रहे हैं और अब मेरे लिए वही मैटर करता है। बिग बैश में क्या हुआ? मुझे उससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता।”आपको बता दें, पत्रकार कप्तान सलमान आगा से उस प्रदर्शन के बारे में बात कर रहे थे, जो उन्होंने हाल ही में समाप्त हुई बिग बैश लीग यानी बीबीएल में किया था। वे फाइनल से पहले ही टीम से ड्रॉप कर दिए गए थे और बहाना दिया गया था कि वे नेशनल ड्यूटी की वजह से टीम छोड़ रहे हैं। बाबर आजम ने बीबीएल में 11 मैचों में कुल 202 रन बनाए। 58 उनका बेस्ट स्कोर था। औसत उनका 22.44 का था, जबकि स्ट्राइक रेट 103.06 का था। 19 चौके और 3 छक्के पूरे सीजन में उन्होंने लगाए।

Previous articleमहाराष्ट्र का डिप्टी CM कौन बनेगा? सुनेत्रा पवार के नाम पर सियासी चर्चा तेज, जाने भाजपा का क्‍या है मूड?
Next articleU19 वर्ल्ड कप में भारत का अगला मैच पाकिस्तान से; जानें कब, कहां और कैसे देखें लाइव?
News Desk