अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे का विवादित बयान, बोले- राजनीति में सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है

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नई दिल्ली। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने लिखा है कि महाराष्ट्र की राजनीति(Maharashtra politics) ने एक बेहतरीन नेता खो दिया है। अजित पवार(Ajit Pawar) और मैंने लगभग एक ही समय में राजनीति(politics) में कदम रखा था, हालांकि हमारी जान-पहचान बहुत बाद में हुई।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री(Deputy Chief Minister) अजित पवार(Ajit Pawar) के असामयिक निधन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(Maharashtra Navnirman Sena (MNS) president) (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अजित पवार(Ajit Pawar) को अपना दोस्त बताते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी(Expressing his profound grief) है। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा है कि ऐसे समय में, जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, महाराष्ट्र ने एक असाधारण नेता खो दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इस ट्वीट में एक बड़ी बात कही है। उन्होंने लिखा, “राजनीति में स्पष्ट बोलने की कीमत(speaking frankly in politics) चुकानी होती है, पता नहीं अजीत पवार (Ajit Pawar)को कितनी चुकानी पड़ी होगी।”

कम समय में शिखर तक पहुंचे
अजित पवार(Ajit Pawar) के विमान हादसे की खबर सामने आने के कुछ ही घंटों बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया X पर मराठी में एक लंबा श्रद्धांजलि संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अजित पवार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। उन्होंने लिखा, “महाराष्ट्र ने एक बेबाक और सक्षम नेता खो दिया।” राज ठाकरे ने आगे लिखा, “मेरे मित्र और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति ने एक उत्कृष्ट नेता खो दिया है। हम दोनों ने लगभग एक ही समय राजनीति में प्रवेश किया था। हालांकि हमारी निकटता बाद में हुई, लेकिन राजनीति के प्रति उनके जुनून ने उन्हें बहुत कम समय में शिखर तक पहुंचाया।”

राजनीति में बदलाव की थी गहरी समझ
उन्होंने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) भले ही पवार साहेब की राजनीतिक परंपरा से आए हों, लेकिन उन्होंने समय के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई और उसे पूरे महाराष्ट्र में स्थापित किया। राज ठाकरे ने 1990 के दशक का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में महाराष्ट्र में तेजी से शहरीकरण हुआ। ग्रामीण क्षेत्र अर्ध-शहरी बनने लगे, लेकिन राजनीति का स्वर ग्रामीण ही बना रहा, जबकि समस्याएं शहरी होती चली गईं। उन्होंने लिखा, “अजित पवार(Ajit Pawar) को इस बदलाव की गहरी समझ थी और वे इस तरह की राजनीति को संभालने में माहिर थे। पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती इसके जीवंत उदाहरण हैं। इन दोनों क्षेत्रों का जिस तरह उन्होंने विकास किया, उसे उनके राजनीतिक विरोधी भी स्वीकार करते हैं।”

 

पवार की प्रशासन पर मजबूत पकड़ थी
राज ठाकरे ने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) की प्रशासन पर असाधारण पकड़ थी। उन्होंने लिखा, “वे जानते थे कि अटकी हुई फाइलों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आज के दौर में जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, ऐसे नेता का जाना बेहद दुखद है। राज ठाकरे ने अजित पवार(Ajit Pawar) की बेबाकी और स्पष्टवादिता को उनकी सबसे बड़ी पहचान बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई काम नहीं हो सकता था, तो अजित पवार सामने से मना कर देते थे। और अगर हो सकता था, तो उसे पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे। लोगों को झूठे वादों से बहलाना या भीड़ जुटाकर राजनीति करना उनका तरीका नहीं था।”

साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है
इसी संदर्भ में उन्होंने लिखा, “राजनीति में साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है। यह बात मैं अपने अनुभव से जानता हूं और अंदाजा लगाया जा सकता है कि अजित पवार ने इसके लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाई होगी।” राज ठाकरे ने अजित पवार को जातिवाद से मुक्त राजनीति करने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में ऐसे नेता कम होते जा रहे हैं, जो बिना जातिगत गणनाओं के काम करने का साहस रखते हों और अजित पवार उनमें सबसे आगे थे।

भारत-यूरोपीय संघ के बाद अब अमेरिका के साथ बड़ी व्यापारिक डील की तैयारी

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नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद अब भारत के लिए वैश्विक आर्थिक मोर्चे से एक और बड़ी खुशखबरी आ सकती है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता में बहुत महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है और दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सकारात्मक परिणामों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को संकेत दिया कि जहां एक ओर भारत ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम चरण तक पहुँचाया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी बातचीत की गति को निरंतर बनाए रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूरोपीय संघ समझौता अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों का विकल्प नहीं है, क्योंकि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के वार्ताकार एक ऐसे निष्कर्ष की ओर बढ़ रहे हैं जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता कुछ जटिल मुद्दों के कारण धीमी पड़ गई थी। अगस्त में अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बाद बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया था। इसमें विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क, आव्रजन नीति और टैरिफ से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल थे। इन चुनौतियों के बावजूद, हालिया प्रगति दर्शाती है कि दोनों देश अपने आपसी मतभेदों को सुलझाने के प्रति गंभीर हैं। व्यापार जगत में यह धारणा भी बनी थी कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ डील संभवतः अमेरिका की कठोर शुल्क नीति के जवाब में की है, परंतु सूत्रों ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। स्पष्ट किया गया है कि यूरोपीय संघ के साथ समझौता पूरी तरह से आपसी हितों और लाभ के आधार पर है। भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और यूरोप दोनों ही क्षेत्रों में अपना निर्यात बढ़ाना है, ताकि देश के भीतर विनिर्माण को गति मिले और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
आगामी सप्ताह कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अगले सप्ताह वाशिंगटन की यात्रा पर जाने की संभावना है, जहाँ वे महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। 4 फरवरी को होने वाली इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी पूर्व में संकेत दिए थे कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले आठ देशों के समूह पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। राजदूत के इस आश्वासन और विदेश मंत्री की संभावित यात्रा से यह उम्मीद और बलवती हो गई है कि टैरिफ और तेल आयात जैसे विवादित मुद्दों पर जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है और एक ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता धरातल पर उतर सकता है।

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News Desk

विमान हादसे से पहले भावुक थे अजित बोले- मैं अब थक चुका हूं, मुझे अब कुछ नहीं चाहिए

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति के दादा कहे जाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया है। यह न केवल उनकी पार्टी एनसीपी के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि राज्य की राजनीति के एक युग का अंत भी है। पिछले कुछ वर्षों में विवादों, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और चुनावी चुनौतियों का सामना करने वाले अजित पवार अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले अंदरूनी तौर पर काफी व्यथित और थके हुए महसूस कर रहे थे। उनके सबसे करीबी मित्र और बारामती विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी किरण गूजर ने उनके अंतिम दिनों की उन भावुक यादों को साझा किया है, जो एक कठोर नेता के भीतर छिपे संवेदनशील इंसान को उजागर करती हैं।
किरण गूजर, जिन्होंने 1984 में अजित पवार को राजनीति के पहले चुनाव के लिए मनाया था, बताते हैं कि पिछले कुछ समय से अजित पवार का राजनीति से मोहभंग होने लगा था। कुछ दिन पहले ही उन्होंने गूजर से अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा था, अब मुझे यह सब नहीं चाहिए, मैं थक चुका हूँ। गूजर के अनुसार, अजित पवार अपनी कड़ी मेहनत के बावजूद मिलने वाली आलोचनाओं और राजनीतिक झटकों से आहत थे। उन्होंने बेहद भावुक होकर अपने मित्र से पूछा था, मैं दिन-रात इतनी मेहनत कर रहा हूँ, फिर भी मुझे यह सब (विरोध और आलोचना) क्यों सहना पड़ रहा है? लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद तो वे इतने टूट गए थे कि विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में भी नहीं थे, लेकिन करीबी साथियों के समझाने पर वे दोबारा सक्रिय हुए थे।
अजित पवार के व्यक्तित्व में आए बदलावों पर चर्चा करते हुए किरण गूजर बताते हैं कि शुरुआती दिनों में वे अध्यात्म और मंदिर जाने के सख्त खिलाफ थे। बचपन में पिता को खोने और परिवार की विषम परिस्थितियों के कारण उनके मन में ईश्वर की अवधारणा को लेकर एक अलग सोच थी। वे अक्सर कहते थे कि भगवान ने उनके साथ अच्छा नहीं किया, इसलिए वे वहां क्यों जाएं? हालांकि, उम्र और अनुभव के साथ उनके व्यवहार में नरमी आई थी। वे भगवान पर भरोसा तो करने लगे थे, लेकिन कभी अंधविश्वासी नहीं रहे और न ही उन्होंने कभी धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया।
अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए गूजर भावुक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि मौत से महज पांच दिन पहले अजित पवार ने उनसे कहा था कि वे ऊब रहे हैं और उन्हें कहीं बाहर जाना चाहिए। दोनों ने साथ में आधा दिन बिताया और रात का खाना खाया। वह अजित पवार के साथ उनका आखिरी भोजन था। उस समय भी अजित पवार ने अपनी थकान और राजनीति से दूर रहने की इच्छा जाहिर की थी, जिसे सुनकर उनके मित्र भी हैरान थे कि आखिर दादा के मन में क्या चल रहा है। हादसे वाले दिन की दास्तां बयां करते हुए किरण गूजर ने बताया कि विमान में सवार होने से ठीक पहले अजित पवार ने उन्हें फोन किया था। वे उन्हें लेने खुद हवाई अड्डे पहुंचे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी आंखों के सामने ही वह विमान क्रैश हो गया। गूजर ने बताया कि मलबे से जब अजित पवार का पार्थिव शरीर निकाला गया और उसे कार में रखा गया, तो उन्होंने ही अपने प्रिय दादा की पहचान की। वे कहते हैं कि यह सब एक बुरे सपने जैसा लगता है, जिस पर विश्वास करना नामुमकिन है कि बारामती के लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाला नेता अब हमारे बीच नहीं रहा। 1984 में छत्रपति कारखाना चुनाव से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर, 2026 की इस दुखद दोपहर में हमेशा के लिए थम गया।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी में कसा तंज, कहा भाजपा की सरकार में न्याय की आशा नहीं

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वाराणसी । शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी पहुंचकर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोगों ने वीडियो में देखा कि बटुकों को उनकी चोटी पकडक़र उन्हें अपमानित किया जा रहा है। अपनी गलती को गलती न मानना और अपने अपराध को न स्वीकार करना ये उन पर निर्भर करता है। जो अपराध किया वो सबके सामने आ ही गया है। अपने लोगों ने तो संयम से 11 दिन प्रयागराज में रहकर उनको मौका दिया कि आपसे जो अपराध हुआ है चाहे तो आप सुधार सकते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुधारा। इसके बाद काशी वापस लौट गए हैं। इस पार्टी की सरकार में न्याय की कोई आशा न करे यही संदेश मिला है।
यूजीसी के नए नियमों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह नियम इसी लिए लाया गया है कि उनकी कमियां जो हैं उसकी चर्चा कोई न करे। सवाल ये है कि यूजीसी जैसा नियम जो सनातन धर्म के लिए बहुत बड़ा खतरा है। सनातन धर्म में जातियां हैं, जातियां इसलिए नहीं हैं कि एक दूसरे से लड़ें, ये इसलिए है कि सभी लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे। ये पुराने लोगों की बनाई गई परंपरा है। अब यूजीसी के सहारे इन लोगों ने एक जाति को दूसरे जाति के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। इससे आपस में लडक़र उनको मरना ही मरना है। पूरे सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए एक मशीन ले आए हैं। यूजीसी के नियम हिंदू समाज के लिए घातक हैं। इसलिए हम इसका विरोध करते हैं।

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असम में अमित शाह का दो दिवसीय दौरा, देंगे तमाम सौगातें

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डिब्रूगढ़: गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के असम दौरे पर गुरुवार देर रात डिब्रूगढ़ पहुंचे. जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री को लेकर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) का स्पेशल प्लेन रात करीब 12 बजे डिब्रूगढ़ के मोहनबाड़ी में डॉ. भूपेन हजारिका एयरपोर्ट पर उतरा. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत किया.

गृह मंत्री आज शनिवार को डिब्रूगढ़ में असम विधानसभा भवन और वाइल्डलाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट की आधारशिला रखेंगे. नया विधानसभा परिसर आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. जानकारी के मुताबिक जिस वाइल्डलाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट की नींव रखी जाएगी, वह असम की रिच बायोडायवर्सिटी के साइंटिफिक रिसर्च, कंजर्वेशन और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा. गृह मंत्री दक्षिणी असम में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए खानिकर स्टेडियम प्रोजेक्ट के पहले फेज़ का भी उद्घाटन करेंगे. यह इवेंट आज सुबह डिब्रूगढ़ के खानिकर में होगा.

इसके बाद अमित शाह करेंग चापोरी में होने वाले 10वें मिसिंग कल्चरल फेस्टिवल में शामिल होने के लिए धेमाजी के लिए रवाना होंगे. बता दें, यह फेस्टिवल हर साल मिसिंग समुदाय द्वारा आयोजित किया जाता है और पारंपरिक डांस, संगीत, कला, कॉस्ट्यूम और देसी खाने के जरिए जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाता है. शाह शाम को गुवाहाटी के लिए निकलेंगे और फिर राज्य BJP हेडक्वार्टर पहुंचेंगे. ऑफिस पहुंचने के बाद वह पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। चर्चा में संगठनात्मक मुद्दों, आने वाले राजनीतिक एजेंडे और राज्य में जमीनी स्तर पर पहुंच मजबूत करने पर फोकस रहने की उम्मीद है.

बता दें, असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार तैयारियों में जुटी है. वहीं, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा भी दोबारा सरकार पर काबिज होने को कमर कस रहे हैं. उनका कहना है कि राज्य से अवैध बांग्लादेशियों को हर कीमत में बाहर निकाल कर रहेंगे. वहीं, वे विपक्षी दल कांग्रेस पर भी तीखे हमले बोल रहे हैं.

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साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, सोशल मीडिया पर उठे गंभीर सवाल

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जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर से एक सनसनीखेज और भावनात्मक मामला सामने आया है। सनातन धर्म के प्रचार से जुड़ी साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत के करीब चार घंटे बाद सोशल मीडिया पर उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक कथित सुसाइड नोट पोस्ट होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया ट्रोलिंग, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ लोगों को संदेह है कि साध्वी के पिता ने ही उनकी हत्या कराई है। शव का पोस्टमार्टम हो चुका है। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपने को लेकर विवाद हो रहा है। संत समाज समाधि स्थल पर शव ले जाना चाहता है। वहीं, पिता ने घर ले जाने की इच्छा जताई है।

साध्वी प्रेम बाईसा बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं और उनके वीडियो भी वायरल हो चुके थे। इन्हीं वीडियो को लेकर उन्होंने एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए थे। साध्वी का कहना था कि वायरल किया गया वीडियो उनके पिता से जुड़ा हुआ था, जिसे एडिट कर गलत तरीके से फैलाया गया। उन्होंने इस मामले में ब्लैकमेलिंग के प्रयास का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उसके परिजनों ने साध्वी से माफी मांगी थी। साध्वी ने बड़ा हृदय दिखाते हुए आरोपी को माफ कर दिया था।

आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद उसी व्यक्ति ने वीडियो को दोबारा एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद साध्वी को भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही सोशल मीडिया टिप्पणियों और मानसिक दबाव ने क्या उन्हें इस हद तक तोड़ दिया कि उन्होंने यह कदम उठाया ? यह सवाल अब हर किसी के मन में है।

 

मौत के चार घंटे बाद साध्वी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर जो पोस्ट सामने आई, उसमें उन्होंने अपने जीवन और विचारों को शब्दों में पिरोया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन का हर क्षण सनातन धर्म के प्रचार के लिए जिया और अंतिम सांस तक सनातन उनके हृदय में रहा। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने आदि जगतगुरु शंकराचार्य और देश के कई संत-महात्माओं को अग्नि परीक्षा के लिए लिखित निवेदन किया था, लेकिन प्रकृति को शायद कुछ और ही मंजूर था। पोस्ट के अंत में उन्होंने न्याय मिलने की उम्मीद जताई, यदि जीवन में नहीं, तो मृत्यु के बाद।

हालांकि, इस पोस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह पोस्ट पहले से शेड्यूल किया गया हो सकता है, जो मौत के बाद अपने आप सोशल मीडिया पर प्रकाशित हुआ। पुलिस अब इस तकनीकी पहलू की भी जांच कर रही है। निर्दलीय विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी ने इस घटना को लेकर कहा कि जो ही घटना क्रम हुआ है काफी दुखद है। मारवाड़ में इस तरह की घटना दुखद है , डिजिटल युग के कई प्लस-माइनस हैं, जो भी इसके पीछे घटनाक्रम है, उसकी जांच होनी चाहिए।

मौत के बाद रात में आरती नगर स्थित आश्रम में भारी हंगामा देखने को मिला। स्थानीय लोगों और समर्थकों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में कुछ छुपाने की कोशिश की जा रही है। साध्वी के पिता द्वारा शुरुआत में पोस्टमार्टम से इंकार किए जाने पर स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। लोगों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ गए। साथ ही आश्रम से सीसीटीवी फुटेज गायब होने के भी आरोप लगाए गए।

देर रात साध्वी के पार्थिव शरीर को महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम किया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है, चाहे वह सोशल मीडिया ट्रोलिंग हो, ब्लैकमेलिंग का मामला हो या सुसाइड नोट की सत्यता। फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने न केवल जोधपुर बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। यह मामला अब सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी, मानसिक उत्पीड़न और न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, गलत इस्तेमाल की जताई आशंका

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नई दिल्ली।  यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (University Grant Commission) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्च ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले की सुनवाई करते हुए नियमों पर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि नियम अस्पष्ट हैं, इनका दुरुपयोग हो सकता है. जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है, क्या हम उल्टी दिशा की ओर जा रहे हैं।

अगली सुनवाई कब होगी ?

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील विष्णु जैन दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि हम यूजीसी के रेगुलेशन के सेक्शन 3C यानी एससी, एसटी और ओबीसी को चुनौती दे रहे हैं, क्योंकि इसमें जातिगत भेदभाव की बात की गई है. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी, तब तक के लिए उन्होंने रोक लगा दी है।

CJI ने क्या टिप्पणी की?

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रों के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं. इस तरह मत कीजिए. रिजर्व्ड कैटेगरी में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो चुके हैं. उनके पास दूसरों की तुलना में बहुत ही अच्छी सुविधाएं हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर विवाद क्यों रहा है?

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रों के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं. इस तरह मत कीजिए. रिजर्व्ड कैटेगरी में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो चुके हैं. उनके पास दूसरों की तुलना में बहुत ही अच्छी सुविधाएं हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर विवाद क्यों रहा है?

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स’ नाम से नये नियम जारी किए।

इन नियमों के तहत महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में जाति, लिंग, धर्म, जन्मस्थान आदि के आधार पर हो रहे भेदभाव को रोकने के लिए कमेटी बनानी होगी।

इससे SC, ST और ओबीसी के छात्रों को न्याय मिलता. इन वर्गों के छात्रों द्वारा भेदभाव की शिकायत करने पर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को 7 दिनों के भीतर जांच करनी होगी और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

यूजीसी के इस नियम को जनरल कैटेगरी के छात्रों ने विरोध किया था।

ब्लैक बॉक्स बरामद, हादसे की असली वजह का जल्द होगा खुलासा

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Ajit Pawar Plane Black Box को जांच एजेंसियों ने बरामद कर लिया है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे के बाद यह जांच का सबसे अहम सुराग माना जा रहा है। ब्लैक बॉक्स में उड़ान से जुड़ी हर गतिविधि रिकॉर्ड रहती है—पायलट की बातचीत, तकनीकी अलर्ट और अंतिम पलों की पूरी टाइमलाइन। यही वजह है कि इससे हादसे की असली वजह तक पहुंचने में एजेंसियों को बड़ी मदद मिलेगी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, बारामती के पास हुए इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के तुरंत बाद सभी जरूरी बचाव और जांच तंत्र सक्रिय कर दिए गए थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जा रही है। AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau), दिल्ली से तीन अधिकारियों की टीम और DGCA, मुंबई रीजनल ऑफिस से तीन अधिकारियों की एक अन्य टीम 28 जनवरी को घटनास्थल पर पहुंची थी। AAIB के डायरेक्टर जनरल भी उसी दिन मौके पर मौजूद रहे।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि जांच AAIB नियम, 2025 के नियम 5 और 11 के तहत, तय SOPs और दिशानिर्देशों के अनुसार आगे बढ़ रही है। Ajit Pawar Plane Black Box की डिकोडिंग के बाद तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या मौसम जैसे संभावित कारणों पर स्पष्टता आएगी।

गौरतलब है कि यह हादसा बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे हुआ, जब विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई थी। ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही दुर्घटना के कारणों पर अंतिम रिपोर्ट सामने लाई जा सकेगी।

 

बंगाल की खाड़ी में भारत-रूस का संयुक्त युद्धाभ्यास, समंदर से दुनिया को दिखेगी दोनों देशों की सैन्य ताकत

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नई दिल्ली । रूसी नौसेना के बेड़े का एक जहाज अभ्यास( Ship exercises)में भाग लेने के लिए ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होगा और 18 से 25 फरवरी तक भारतीय बंदरगाह विशाखापत्तनम(Visakhapatnam Port) कअनौपचारिक दौरा करेगा भारत और रूस(India and Russia) की जोड़ी जल्द ही समंदर( Ocean)से पूरी दुनिया को ताकत दिखाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस और भारत आगामी फरवरी में हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास(Naval exercises) करेंगे। इस ज्वॉइंट नेवल एक्सरसाइज का आयोजन बंगाल की खाड़ी में किया जाएगा। रूस की TASS सरकारी समाचार एजेंसी ने बुधवार को रूसी मैरीटाइम कॉलेज की प्रेस सेवा के हवाले से यह जानकारी दी है।
TASS की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े का एक फ्रिगेट मिलान-2026 अभ्यास में भाग लेने के लिए ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होगा। इसके बाद यह जहाज 18 से 25 फरवरी तक भारतीय बंदरगाह विशाखापत्तनम का अनौपचारिक दौरा करेगा। बता दें कि भारत और रूस हर साल अभ्यास इंद्र के नाम से एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं।

इससे पहले मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने बीते सोमवार को कहा है कि भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं और व्यापार के दायरे को बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
राजदूत कुमार ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा, “पिछला वर्ष विशेष रूप से सक्रिय रहा। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा अत्यंत सफल रही। 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना पूरी तरह से संभव है।” उन्होंने कहा, “नए उत्पादों की पहचान सहित कई कदम उठाए जा रहे हैं, और एक मुक्त व्यापार समझौता इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक, कृषि और अभियांत्रिकी में नए अवसरों के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है।

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News Desk

बारामती विमान हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन

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बारामती। सिविल एविएशन मंत्रालय ने 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, AAIB की टीम ने मुंबई कार्यालय के DGCA की तीन सदस्यीय टीम के साथ हादसे वाले दिन ही दुर्घटना स्थल पर जाकर जांच शुरू कर दी। इस दौरान AAIB के महानिदेशक ने भी जहाज के घटनास्थल का दौरा किया। बता दें कि इस हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और अन्य चार लोगों की मौत हुई है।

घटनास्थल की जांच के बाद अधिकारियों ने बताया कि कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, जिन्हें ब्लैक बॉक्स कहा जाता है, बरामद कर लिए गए हैं। इनकी जांच से ही पता चलेगा कि यह बड़ा हादसा कैसे हुआ। अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच में टीम मुख्य रूप से विजिबिलिटी की स्थिति, पायलट के निर्णय और बारामती जैसे अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड पर संचालन की सीमाओं पर ध्यान दे रही है। टीम ने फॉरेंसिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं, जिनमें विमान का मलबा सुरक्षित करना और महत्वपूर्ण साक्ष्य इकट्ठा करना शामिल है।

 

टीम ने एयरफ्रेम और इंजन लॉगबुक, रखरखाव रिकॉर्ड, निरीक्षण इतिहास, वर्क ऑर्डर और ऑनबोर्ड दस्तावेज दिल्ली स्थित VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड से मांगे हैं। DGCA से क्रू की योग्यता रिकॉर्ड और विमान प्रमाणन दस्तावेज भी प्राप्त किए जा रहे हैं। सिविल एविएशन मंत्रालय के अनुसार, विमान सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना हुआ और 8:18 बजे बारामती एयरफील्ड से संपर्क स्थापित किया। रनवे 11 पर पहली अप्रोच के दौरान, क्रू ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है और उन्होंने स्टैंडर्ड गो-अराउंड किया। इसके बाद विमान ने दोबारा पोजिशनिंग के बाद एयरफील्ड को सूचित किया कि जब रनवे दिखाई देगा, तब रिपोर्ट करेंगे। 8:43 बजे विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई, लेकिन कोई फीडबैक प्राप्त नहीं हुआ। लगभग एक मिनट बाद, एयरफील्ड कर्मियों ने रनवे थ्रेशोल्ड के पास आग देखी और कंट्रोल रूम को सूचित किया।

केंद्रीय सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रारंभिक संकेत खराब विजिबिलिटी की ओर इशारा करते हैं, लेकिन जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘AAIB सक्षम प्राधिकरण है और पारदर्शी एवं उत्तरदायी जांच के माध्यम से तथ्य स्थापित करेगा।’ DGCA ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि क्रू को विजुअल मौसमीय परिस्थितियों (VMC) में उतरने की सलाह दी गई थी, जिसमें अनुमानित दृश्यता लगभग 3,000 मीटर और हवा शांत थी।

वहीं, VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विजय कुमार सिंह ने कहा कि विमान का रखरखाव सही था और यह उड़ान के योग्य था। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार कोई तकनीकी दोष नहीं था। पायलट ने विजिबिलिटी के कारण मिस्ड अप्रोच लिया और दूसरी लैंडिंग का प्रयास किया। जिससे यह दुर्घटना हुई।’ सिंह ने बताया कि विमान के कप्तान के पास 16,000 घंटे से अधिक के उड़ान का अनुभव था, जबकि सह-पायलट के पास लगभग 1,500 घंटे का अनुभव था।