पद को लेकर बीजेपी–शिवसेना गठबंधन में टकराव, बाल ठाकरे की सियासी विरासत का भी है मामला

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मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव चार साल की देरी के बाद संपन्न हो चुके हैं, लेकिन मेयर पद को लेकर महायुति गठबंधन में तनाव गहरा गया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच इस पद को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। विवाद केवल सत्ता के पद तक सीमित नहीं है, बल्कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत को लेकर भी बहस का केंद्र बन गया है।
शिंदे गुट का कहना है कि बीएमसी मेयर पद को रोटेशन के आधार पर बांटा जाना चाहिए और पांच साल के कार्यकाल में पहले ढाई साल तक शिवसेना का मेयर होना चाहिए। उनका तर्क है कि 2026 बाल ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष है और इस मौके पर मुंबई का मेयर एक शिवसैनिक होना बालासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शिंदे खुद मुख्यमंत्री पद गंवाने के बाद सत्ता में हाशिये पर महसूस कर रहे हैं, जिससे यह मांग और भी संवेदनशील बन गई है।
बीएमसी चुनावों में 227 सदस्यीय सदन में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। दोनों मिलकर 118 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े से ऊपर हैं। विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतकर मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। बावजूद इसके, महायुति गठबंधन अब तक बीएमसी के लिए औपचारिक नेतृत्व तय नहीं कर पाई है।
गठबंधन में विवाद तब खुलकर सामने आया, जब शिंदे गुट ने अचानक अपने 29 पार्षदों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। इसके बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ प्रस्तावित बैठक और अहम कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया। शिंदे का अपने पैतृक गांव लौटना और उनके समर्थक मंत्रियों का बैठक से दूरी बनाना नाराजगी का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा शिंदे शिवसेना को ठाणे नगर निगम और बीएमसी की स्थायी समिति जैसे अहम निकायों में भूमिका देने का विकल्प सोच रही है, ताकि मेयर पद पर सहमति बनाई जा सके। हालांकि, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर मतभेदों से इनकार किया और कहा कि जल्द ही महायुति का मेयर आम सहमति से चुना जाएगा।
इस पूरे विवाद के बीच बाल ठाकरे की विरासत राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। शिंदे गुट इसे “असली शिवसेना” की पहचान के साथ जोड़कर देख रहा है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट आरोप लगाता है कि बालासाहेब की विरासत के नाम पर दिल्ली के सामने झुककर फैसले लिए जा रहे हैं। स्पष्ट है कि बीएमसी मेयर का फैसला केवल मुंबई की नगर राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता और शिवसेना की पहचान तय करने वाला साबित हो सकता है।

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पार्टी में मतभेदों के बीच खडग़े-राहुल से मिले , कहा- सब साथ मिलकर कर रहे काम

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नई दिल्ली। कांग्रेस में पार्टी हाईकमान से मतभेद की खबरों के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और राहुल गांधी से मुलाकात की। तीनों के बीच बैठक संसद में खडग़े के कार्यालय में हुई। मुलाकात के बाद थरूर ने कहा कि मेरी पार्टी के दोनों नेताओं से बातचीत हुई। सब ठीक है। हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच कुछ मतभेद सामने आए थे। हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर एआईसीसी की एक बैठक हुई थी, जिसमें थरूर शामिल नहीं हुए थे। वहीं केरल का सीएम बनने के सवाल पर थरूर ने कहा कि मेरी इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।

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राहुल गांधी और कनिमोझी के बीच चली घंटे भर बैठक पर गठबंधन के लिए नहीं बन सकी सहमति

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नई दिल्ली। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन को लेकर चल रही असहजता के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और डीएमके सांसद कनिमोझी के बीच एक अहम बैठक हुई। दिल्ली में बुधवार को हुई यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली, लेकिन गठबंधन की कार्ययोजना या सीटों के बंटवारे को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक डीएमके की पहल पर हुई थी, ताकि अपने पुराने सहयोगी कांग्रेस के साथ तालमेल को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, बैठक के दौरान किसी भी तरह के आंकड़ों या फार्मूले पर चर्चा नहीं हुई। राहुल गांधी ने कनिमोझी से आग्रह किया कि इस विषय पर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा गठित नेताओं की समिति के साथ बातचीत की जाए और उसी मंच पर गठबंधन से जुड़े मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाए। कांग्रेस सूत्र बता रहे हैं, कि बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा, लेकिन निर्णय आगे की बातचीत पर छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु में करीब दो दशक पुराने इस गठबंधन में इस बार तनाव की स्थिति है। इसकी मुख्य वजह कांग्रेस की राज्य इकाई की ओर से सरकार में हिस्सेदारी की मांग बताई जा रही है, जिसे डीएमके ने स्वीकार नहीं किया है। कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं ने झारखंड मॉडल की तर्ज पर तमिलनाडु में भी सत्ता में भागीदारी की मांग उठाई है। इसी पृष्ठभूमि में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) नेतृत्व ने सभी प्रमुख राज्य नेताओं की बैठक बुलाकर उनके विचार सुने। बैठक के बाद यह तय किया गया कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा।
तमिलनाडु में डीएमके के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस के राज्य प्रभारी गिरीश चोडंकर ने एक बातचीत के दौरान कहा, कि गठबंधन वार्ता अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है और कांग्रेस डीएमके की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा, हम पिछले दो महीनों से इंतजार कर रहे हैं। हमारा विपक्ष काफी आक्रामक तरीके से काम कर रहा है। नवंबर में हमने गठबंधन समिति का गठन किया था और अनुरोध किया था कि 15 दिसंबर तक बातचीत पूरी कर ली जाए, लेकिन अभी तक देरी हो रही है।
ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं, जब तमिलनाडु में इस साल के पहले छह महीनों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, हालांकि भारतीय चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया है। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 2021 के चुनावों में डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं, जबकि पीएमके ने 5, वीसीके ने 4 और अन्य दलों ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत तेज हो सकती है, क्योंकि दोनों दल चुनाव से पहले किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहेंगे।

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इंस्टाग्राम से ‘गायब’ किंग कोहली का अकाउंट फिर एक्टिव, फैंस ने ली राहत की सांस

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Virat Kohli Instagram: टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर विराट कोहली के इंस्टाग्राम अकाउंट ने पूरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हलचल मचा दी. गुरुवार की रात से अचानक गायब हुए अकाउंट ने फैंस को चिंता में डाल दिया था. हालांकि, अब विराट कोहली का Instagram अकाउंट फिर से वापस आ गया है. फैंस ने राहत की सांस ली है. अकाउंट नहीं खुलने पर लोग कई तरह के कयास लगाने लगे थे. लेकिन अब इन कयासों पर विराम लग गया है. फिलहाल, अकाउंट किन वजहों से डिएक्टिवेट हो गया था. इसको लेकर विराट कोहली या उनकी टीम की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

दरअसल, गुरुवार की रात से अचानक 274 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स वाला विराट कोहली का ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट सर्च में दिखना बंद हो गया था. अकाउंट सर्च करने पर ‘पेज नॉट अवेलेबल’ का एरर मैसेज आता था. जिसके बाद पूरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विराट कोहली से जुड़े हैशटैग ट्रेंड करने लगे. विराट कोहली के फैंस अकाउंट सर्च में नहीं आने से काफी चिंतित हो गए और कई तरह से कयास लगाने लगे.

फैंस अनुष्का शर्मा से पूछे सवाल
विराट कोहली के अकाउंट बंद होने पर उनके फैन्स पत्नी अनुष्का शर्मा के इंस्टाग्राम की पोस्ट पर जाकर कमेंट करते हुए सवाल पूछ रहे थे कि विराट कोहली कहां हैं?
हालांकि इन सवालों के जवाब मिलने से पहले ही विराट कोहली का अकाउंट वापस आ गया. यह किन कारणों से हुआ था. अभी इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.

एशिया में सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वाले व्यक्ति हैं कोहली
बता दें, विराट कोहली का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिर्फ इंस्टाग्राम अकाउंट ही बंद हुआ था, बाकि सभी प्लेटफॉर्म एक्टिव थे. विराट कोहली इंस्टाग्राम अकाउंट से सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाले व्यक्ति हैं. इसके अलावा पूरे एशिया में विराट कोहली के सबसे ज्यादा फॉलोवर्स हैं. अब अकाउंट एक्टिव होने के बाद सबकी निगाहें विराट कोहली के बयानों पर टिकी हुई हैं, आखिर ऐसा क्या रहा कि अकाउंट कई घंटो तक बंद रहा. यह तो विराट कोहली ही जानते होंगे. फिलहाल, अभी तक कोई बयान नहीं दिया है.

बीएचयू में दो हॉस्टल के छात्रों में हुई मारपीट, एक पीजी छात्र गंभीर रूप से घायल

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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में दो छात्रावासों के छात्रों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। रुइया हॉस्टल और बिरला-सी हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट और पथराव की घटना में पीजी छात्र पीयूष तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई है, जिसके बाद उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। घटना के बाद पूरे कैंपस में तनाव का माहौल बन गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, कि रुइया हॉस्टल के गेट पर उस समय करीब 50–60 छात्र प्रॉक्टोरियल बोर्ड से किसी मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पीयूष तिवारी बाइक से वहां से गुजरा। तभी उसकी बिरला-सी हॉस्टल के तीन छात्रों से कहासुनी हो गई। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई, जिसमें पीयूष के सिर पर गंभीर चोट लग गई।
पीयूष के घायल होने की खबर फैलते ही रुइया हॉस्टल के छात्र आक्रोशित हो गए। इसी बीच आरोप है कि बिरला-सी हॉस्टल के 30–40 छात्र, जिनमें कुछ के चेहरे कपड़े से ढंके थे, लाठी-डंडे और पत्थर लेकर रुइया हॉस्टल की ओर दौड़ पड़े और जमकर पथराव किया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना मिलते ही लंका थाना पुलिस, बीएचयू चौकी प्रभारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी काशी गौरव स्वयं मौके पर पहुंचे। हालात काबू में करने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों, 3 एसीपी, 5 थानों की फोर्स, एक टीम पीएसी और आरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया। इसी के साथ ही पूरे इलाके की ड्रोन से निगरानी रखी गई।  
पुलिस ने बिरला-सी हॉस्टल को चारों ओर से घेर लिया है। तलाशी अभियान के तहत कई कमरों के ताले तोड़कर जांच की गई है। इस दौरान विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड भी मौके पर मौजूद रहा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी करने की बात कही है।  
छात्रों का आरोप है कि घटना में कुछ निष्कासित छात्र भी शामिल थे, जिनके खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। घायल छात्र के समर्थन में रुइया हॉस्टल के छात्र आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। फिलहाल कैंपस में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

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महाराष्ट्र में होने वाला था बड़ा राजनीतिक बदलाव, 8 फरवरी को NCP गुटों का विलय का था प्‍लान

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मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में जल्द बड़ी उठा पटक के आसार हैं। खबर है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट फरवरी में फिर से एक होने की घोषणा करने वाले थे, लेकिन अजित पवार (Ajit Pawar) के निधन के कारण इसे टाल दिया गया है। एक गुट की अगुवाई अजित के पास थी। जबकि, दूसरे गुट एनसीपी एसपी के प्रमुख वरिष्ठ नेता शरद पवार (Sharad Pawar) थे। हाल ही में चाचा और भतीजे पुणे स्थानीय निकाय चुनाव के लिए एक हुए थे, जिसके बाद एनसीपी के एक होने की अटकलें तेज हो गईं थीं।

8 फरवरी को होने वाली थी घोषणा
एक रिपोर्ट के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुट 8 फरवरी को साथ आने का ऐलान करने वाले थे। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि विलय को लेकर चर्चाएं काफी आगे बढ़ गई थीं और नेता जिला परिषद चुनाव के बाद औपचारिक ऐलान करने वाले थे। एनसीपी नेताओं के अनुसार, डिप्टी सीएम के निधन के बाद अनिश्चितताएं आ गईं हैं, लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया जारी है।

रिपोर्ट के मुतबाकि, बारामती पहुंचे एनसीपी नेताओं ने बुधवार रात बैठक भी की थी। सूत्रों ने बताया है कि दोनों गुटों के एक होना शरद पवार की एनसीपी एसपी का ‘सरकार में शामिल होने’ की ओर एक कदम होगा। एनसीपी एसपी महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है। जबकि, अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल है।

 

हो रही थीं बैठकें
मीडिया से बातचीत में एनसीपी एसपी विधायक जयंत पाटिल और एनसीपी एसपी नेता शशिकांत शिंदे ने गुटों के एक होने की बात की चर्चा की पुषअटि की है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि बात इतने आगे बढ़ गई थी कि संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए लोगों को शामिल करने को लेकर अनौपचारिक रूप से बातें हो रही थीं।

पाटिल ने अजित पवार के निधन को बड़ा नुकसान बताया है। अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में हम लगातार मिल रहे थे। 16 जनवरी को हम मेरे आवास पर मिले थे, ताकि चुनाव साथ लड़ने को लेकर अंतिम दौर की बात हो सके। 17 जनवरी को शरद पवार जी के घर पर बैठक हुई थी।’

क्या था प्लान
शिंदे ने बताया कि मर्ज होने की बात दोनों पार्टियों के बीच सहमति से पहले की तरह हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘अब सच बोलना जरूरी है। अजित पवार ने कहा था कि हम निकाय चुनावों के बाद साथ आ जाएंगे। इस संबंध में बैठकें भी हुई थीं। अजित दादा ने यह शरद पवार की ओर देखते हुए कहा था। अब हम उस दिशा में प्रगति करेंगे।’

अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने को तैयार है प्रयागराज प्रशासन? दावे पर अधिकारियों के बयान से विवाद गहराया

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Swami Avimukteshwaranand Controversy: माघ मेला के दौरान स्नान को लेकर हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस के बीच विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अब यह मामला प्रयागराज हाई कोर्ट पहुंच गया है. एक ओर जहां अविमुक्तेश्वरानंद के PRO का दावा है कि उनको मनाने के लिए प्रशासन काफी कोशिश में जुटा है, तो वहीं प्रशासन ने इसको सिरे से खारिज कर दिया है. अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ का दावा है कि अगर स्वामी जी की दोनों शर्तें मानी जाएंगी, तभी वे स्नान करेंगे. फिलहाल, प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.

अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ ने क्या कहा?
मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि प्रयागराज प्रशासन के बड़े अधिकारी दोबारा पूरे सम्मान के साथ स्नान कराने के लिए मना रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने स्नान करने से पहले अपनी कई शर्तें रखी हैं. उन्होंने शिष्यों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई, लिखित माफी मांगने और चारों शंकराचार्यों के लिए स्नान करने के लिए स्थाई SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाने की मांग की है.

हाई कोर्ट पहुंचा विवाद
दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान करने के लिए जा रहे थे. इस दौरान प्रशासन ने उन्हें भीड़ का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया. प्रशासन के मना करने पर पुलिस और उनके शिष्यों के बीच विवाद हो गया. आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने शिष्यों के साथ मारपीट की, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था. विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और वे बिना स्नान किए ही वापस लौट गए. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मामले में कानून का सहारा लिया है और हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

मेला प्रशासन ने दावे को किया खारिज
अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ द्वारा कही गई बातों को प्रयागराज प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि उनकी ओर से ऐसी कोई कोशिश नहीं की गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने प्रयागराज हाई कोर्ट में लेटर पिटीशन दायर कर कार्रवाई की मांग की है.
पिटीशन में शिष्यों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने और इससे जुड़े अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग उठाई है. मामले में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो दोषियों को सजा मिले, इसके लिए सीबीआई से जांच कराने की अपील की है.

बिना स्नान किए लौटे अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बाद माघ मेला से बिना स्नान किए प्रयागराज से वाराणसी चले गए हैं. उनके शिष्यों का कहना है कि अगर प्रशासन हमारी शर्तों को स्वीकार करता है, तो वाराणसी आकर उन्हें मनाना होगा और ससम्मान प्रयागराज में स्नान कराना होगा. फिलहाल, प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है.

हिमाचल में बर्फ देखने उमड़े पर्याटक, सड़कों पर ट्रैफिक जाम, रोज 15 हजार वाहन पहुंच रहे

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शिमला। शिमला और मनाली पर्यटकों से पूरी तरह पैक है। बर्फबारी थमने के बाद जैसे-जैसे सड़कें बहाल हो रही है, पर्यटक अब शिमला के नालदेहरा, कुफरी, महासू पीक, मनाली के सोलंगनाला और चंबा के डलहौजी तक पहुंचना लगे हैं। हिमाचल प्रदेश में बर्फ के फोटो-वीडियो वायरल होते ही देशभर से पर्यटकों का पहाड़ों पर जमावड़ा उमड़ने लगा हैं। इन जगह पर टूरिस्ट बर्फ में खेलने, डांस, स्नोमैन बनाने, हॉर्स व यॉक राइडिंग, स्केटिंग, स्नो स्कूटर, पैराग्लाइडिंग और रील्स रिकॉर्ड कर अपनी यात्रा को यादगार बना रहे हैं। दिनभर टूरिस्ट बर्फ में मस्ती कर रहे हैं। इस बीकेंड तक सड़क बहाली के बाद नारकंडा और अटल टनल तक टूरिस्ट पहुंच सकेंगे।
बता दें कि शिमला और मनाली के होटलों में 70 से 80 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी हो चुकी है। वीकेंड पर इसके शत-प्रतिशत होने की संभावना है। इसलिए, वीकेंड पर शिमला-मनाली आने वाले टूरिस्ट को एडवांस बुकिंग की सलाह दी जाती है। शिमला के होटेलियर अश्ननी सूद ने बताया कि शिमला में चार साल बाद बर्फबारी हुई है। इससे अगले 15-20 दिन अच्छा टूरिस्ट आने की उम्मीद है।
वहीं पुलिस के अनुसार- अकेले शिमला में रोजाना 12 हजार से 15 हजार टूरिस्ट व्हीकल पहुंच रहे हैं। इससे शिमला शहर के साथ साथ छराबड़ा, कुफरी और फागू के बीच भी ट्रैफिक जाम लग रहा है। एक घंटे के सफर में चार से पांच घंटे लग रहे हैं। इससे टूरिस्ट के साथ साथ लोकल भी परेशान है। मनाली में भी बीते एक सप्ताह से पतलीकूलह, 15 व 16 मील से मनाली तक ट्रैफिक जाम टूरिस्ट लग रहा है। मनाली में ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह आसपास के पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बंद होना भी है क्योंकि भारी हिमपात के कारण जीभी वैली, सोलंग नाला, अटल टनल, कोकसर, केलांग इत्यादि पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बंद थी। मगर अब सड़कों से बर्फ हटाने का काम जारी है। इससे एक-दो दिन में टूरिस्ट इन सभी पर्यटन स्थलों पर पहुंचना शुरू होगा। तब जाकर मनाली में ट्रैफिक जाम से भी निजात मिलेगी।

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क्या सुनेत्रा पवार बनेंगी महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री? अजित पवार के निधन के बाद अटकलें तेज

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मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Maharashtra Deputy Chief Minister Ajit Pawar) के निधन के बाद राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी आ गई है. अजित पवार के निधन से उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री (Deputy Chief Minister and Finance Minister) के पद रिक्त हो गए हैं. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को इन पदों पर नियुक्त किया जाएगा. इस बीच एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की. उसके बाद यह अटकलें और भी तेज हो गई हैं.

सूत्रों का कहना है कि एनसीपी नेता यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सुनेत्रा पवार एनसीपी का नेतृत्व संभालें और उपमुख्यमंत्री का पद भी ग्रहण करें. इस बीच, अजित पवार के समर्थकों ने मांग की है कि अजित पवार के बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए. अजित पवार के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के बाद, बारामती में अजित पवार के समर्थकों ने ये मांग की.

 

सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज
उनका कहना है कि अगर सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उपमुख्यमंत्री के रूप में सुनेत्रा अजित पवार का नाम ही रह जाएगा. कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि पवार परिवार को मिलकर दोनों राष्ट्रवादियों (एनसीपी) के विलय पर फैसला लेना चाहिए. हालांकि, इन कार्यकर्ताओं का यह भी मानना ​​है कि अब परिवार को मिलकर नेतृत्व पर विचार-विमर्श करना चाहिए और फैसला लेना चाहिए.

दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक संजीव उन्हाले का कहना है कि अजित पवार राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे. सुनेत्रा पवार के लिए इन सभी पदों को संभालना संभव नहीं है. इसलिए, वह राष्ट्रवादी पार्टी की अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं.

अजित पवार के निधन के बाद अटकलें तेज
हालांकि, संजीव उन्हाले ने यह भी अनुमान लगाया कि यह सब भाजपा के नेतृत्व में होगा. यदि अजित पवार की विचारधारा को कायम रखना है, तो सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार और जय पवार को मौका दिया जाना चाहिए. अगर उन्हें यह मौका मिलता है, तो पार्टी पर अजित पवार की छाप बनी रहेगी. हर किसी की महत्वाकांक्षा होती है. ऐसा नहीं है कि सांसद सुनील तटकरे की महत्वाकांक्षा नहीं है.

उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि राष्ट्रवादी पार्टी के कई नेता उपमुख्यमंत्री पद के लिए उत्सुक हो सकते हैं, क्योंकि छगन भुजबल समेत कई नेताओं ने अजित पवार के साथ काम किया है. अजित पवार की बुधवार को बारामती हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी. गुरुवार की सुबह बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य प्रमुख नेता इस अवसर पर उपस्थित थे.

 

 

समीर वानखेड़े को हाई कोर्ट से झटका

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नई दिल्ली। आर्यन खान ड्रग केस के जांच अधिकारी रहे समीर वानखेड़े को गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा। अदालत ने आर्यन खान की वेब सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड के खिलाफ दायर उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का उसके पास अधिकार नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समीर वानखेड़े चाहें तो उचित अदालत में दोबारा याचिका दायर कर सकते हैं। अंतरिम याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने दो अहम सवालों पर विचार किया। समीर वानखेड़े ने इस मुकदमे में 2 करोड़ रुपए का मुआवजा भी मांगा था। उनका कहना था कि वह इस राशि को टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान करना चाहते हैं।

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News Desk