स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी में कसा तंज, कहा भाजपा की सरकार में न्याय की आशा नहीं

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वाराणसी । शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी पहुंचकर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोगों ने वीडियो में देखा कि बटुकों को उनकी चोटी पकडक़र उन्हें अपमानित किया जा रहा है। अपनी गलती को गलती न मानना और अपने अपराध को न स्वीकार करना ये उन पर निर्भर करता है। जो अपराध किया वो सबके सामने आ ही गया है। अपने लोगों ने तो संयम से 11 दिन प्रयागराज में रहकर उनको मौका दिया कि आपसे जो अपराध हुआ है चाहे तो आप सुधार सकते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुधारा। इसके बाद काशी वापस लौट गए हैं। इस पार्टी की सरकार में न्याय की कोई आशा न करे यही संदेश मिला है।
यूजीसी के नए नियमों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह नियम इसी लिए लाया गया है कि उनकी कमियां जो हैं उसकी चर्चा कोई न करे। सवाल ये है कि यूजीसी जैसा नियम जो सनातन धर्म के लिए बहुत बड़ा खतरा है। सनातन धर्म में जातियां हैं, जातियां इसलिए नहीं हैं कि एक दूसरे से लड़ें, ये इसलिए है कि सभी लोगों की आजीविका सुरक्षित रहे। ये पुराने लोगों की बनाई गई परंपरा है। अब यूजीसी के सहारे इन लोगों ने एक जाति को दूसरे जाति के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। इससे आपस में लडक़र उनको मरना ही मरना है। पूरे सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए एक मशीन ले आए हैं। यूजीसी के नियम हिंदू समाज के लिए घातक हैं। इसलिए हम इसका विरोध करते हैं।

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असम में अमित शाह का दो दिवसीय दौरा, देंगे तमाम सौगातें

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डिब्रूगढ़: गृह मंत्री अमित शाह दो दिन के असम दौरे पर गुरुवार देर रात डिब्रूगढ़ पहुंचे. जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री को लेकर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) का स्पेशल प्लेन रात करीब 12 बजे डिब्रूगढ़ के मोहनबाड़ी में डॉ. भूपेन हजारिका एयरपोर्ट पर उतरा. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत किया.

गृह मंत्री आज शनिवार को डिब्रूगढ़ में असम विधानसभा भवन और वाइल्डलाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट की आधारशिला रखेंगे. नया विधानसभा परिसर आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. जानकारी के मुताबिक जिस वाइल्डलाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट की नींव रखी जाएगी, वह असम की रिच बायोडायवर्सिटी के साइंटिफिक रिसर्च, कंजर्वेशन और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा. गृह मंत्री दक्षिणी असम में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए खानिकर स्टेडियम प्रोजेक्ट के पहले फेज़ का भी उद्घाटन करेंगे. यह इवेंट आज सुबह डिब्रूगढ़ के खानिकर में होगा.

इसके बाद अमित शाह करेंग चापोरी में होने वाले 10वें मिसिंग कल्चरल फेस्टिवल में शामिल होने के लिए धेमाजी के लिए रवाना होंगे. बता दें, यह फेस्टिवल हर साल मिसिंग समुदाय द्वारा आयोजित किया जाता है और पारंपरिक डांस, संगीत, कला, कॉस्ट्यूम और देसी खाने के जरिए जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाता है. शाह शाम को गुवाहाटी के लिए निकलेंगे और फिर राज्य BJP हेडक्वार्टर पहुंचेंगे. ऑफिस पहुंचने के बाद वह पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। चर्चा में संगठनात्मक मुद्दों, आने वाले राजनीतिक एजेंडे और राज्य में जमीनी स्तर पर पहुंच मजबूत करने पर फोकस रहने की उम्मीद है.

बता दें, असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार तैयारियों में जुटी है. वहीं, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा भी दोबारा सरकार पर काबिज होने को कमर कस रहे हैं. उनका कहना है कि राज्य से अवैध बांग्लादेशियों को हर कीमत में बाहर निकाल कर रहेंगे. वहीं, वे विपक्षी दल कांग्रेस पर भी तीखे हमले बोल रहे हैं.

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साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, सोशल मीडिया पर उठे गंभीर सवाल

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जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर से एक सनसनीखेज और भावनात्मक मामला सामने आया है। सनातन धर्म के प्रचार से जुड़ी साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत के करीब चार घंटे बाद सोशल मीडिया पर उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक कथित सुसाइड नोट पोस्ट होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया ट्रोलिंग, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ लोगों को संदेह है कि साध्वी के पिता ने ही उनकी हत्या कराई है। शव का पोस्टमार्टम हो चुका है। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपने को लेकर विवाद हो रहा है। संत समाज समाधि स्थल पर शव ले जाना चाहता है। वहीं, पिता ने घर ले जाने की इच्छा जताई है।

साध्वी प्रेम बाईसा बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं और उनके वीडियो भी वायरल हो चुके थे। इन्हीं वीडियो को लेकर उन्होंने एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए थे। साध्वी का कहना था कि वायरल किया गया वीडियो उनके पिता से जुड़ा हुआ था, जिसे एडिट कर गलत तरीके से फैलाया गया। उन्होंने इस मामले में ब्लैकमेलिंग के प्रयास का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उसके परिजनों ने साध्वी से माफी मांगी थी। साध्वी ने बड़ा हृदय दिखाते हुए आरोपी को माफ कर दिया था।

आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद उसी व्यक्ति ने वीडियो को दोबारा एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद साध्वी को भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही सोशल मीडिया टिप्पणियों और मानसिक दबाव ने क्या उन्हें इस हद तक तोड़ दिया कि उन्होंने यह कदम उठाया ? यह सवाल अब हर किसी के मन में है।

 

मौत के चार घंटे बाद साध्वी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर जो पोस्ट सामने आई, उसमें उन्होंने अपने जीवन और विचारों को शब्दों में पिरोया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन का हर क्षण सनातन धर्म के प्रचार के लिए जिया और अंतिम सांस तक सनातन उनके हृदय में रहा। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने आदि जगतगुरु शंकराचार्य और देश के कई संत-महात्माओं को अग्नि परीक्षा के लिए लिखित निवेदन किया था, लेकिन प्रकृति को शायद कुछ और ही मंजूर था। पोस्ट के अंत में उन्होंने न्याय मिलने की उम्मीद जताई, यदि जीवन में नहीं, तो मृत्यु के बाद।

हालांकि, इस पोस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह पोस्ट पहले से शेड्यूल किया गया हो सकता है, जो मौत के बाद अपने आप सोशल मीडिया पर प्रकाशित हुआ। पुलिस अब इस तकनीकी पहलू की भी जांच कर रही है। निर्दलीय विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी ने इस घटना को लेकर कहा कि जो ही घटना क्रम हुआ है काफी दुखद है। मारवाड़ में इस तरह की घटना दुखद है , डिजिटल युग के कई प्लस-माइनस हैं, जो भी इसके पीछे घटनाक्रम है, उसकी जांच होनी चाहिए।

मौत के बाद रात में आरती नगर स्थित आश्रम में भारी हंगामा देखने को मिला। स्थानीय लोगों और समर्थकों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में कुछ छुपाने की कोशिश की जा रही है। साध्वी के पिता द्वारा शुरुआत में पोस्टमार्टम से इंकार किए जाने पर स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। लोगों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ गए। साथ ही आश्रम से सीसीटीवी फुटेज गायब होने के भी आरोप लगाए गए।

देर रात साध्वी के पार्थिव शरीर को महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम किया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है, चाहे वह सोशल मीडिया ट्रोलिंग हो, ब्लैकमेलिंग का मामला हो या सुसाइड नोट की सत्यता। फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने न केवल जोधपुर बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। यह मामला अब सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी, मानसिक उत्पीड़न और न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, गलत इस्तेमाल की जताई आशंका

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नई दिल्ली।  यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (University Grant Commission) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्च ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले की सुनवाई करते हुए नियमों पर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि नियम अस्पष्ट हैं, इनका दुरुपयोग हो सकता है. जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है, क्या हम उल्टी दिशा की ओर जा रहे हैं।

अगली सुनवाई कब होगी ?

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील विष्णु जैन दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि हम यूजीसी के रेगुलेशन के सेक्शन 3C यानी एससी, एसटी और ओबीसी को चुनौती दे रहे हैं, क्योंकि इसमें जातिगत भेदभाव की बात की गई है. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी, तब तक के लिए उन्होंने रोक लगा दी है।

CJI ने क्या टिप्पणी की?

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रों के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं. इस तरह मत कीजिए. रिजर्व्ड कैटेगरी में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो चुके हैं. उनके पास दूसरों की तुलना में बहुत ही अच्छी सुविधाएं हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर विवाद क्यों रहा है?

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रों के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं. इस तरह मत कीजिए. रिजर्व्ड कैटेगरी में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो चुके हैं. उनके पास दूसरों की तुलना में बहुत ही अच्छी सुविधाएं हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर विवाद क्यों रहा है?

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स’ नाम से नये नियम जारी किए।

इन नियमों के तहत महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में जाति, लिंग, धर्म, जन्मस्थान आदि के आधार पर हो रहे भेदभाव को रोकने के लिए कमेटी बनानी होगी।

इससे SC, ST और ओबीसी के छात्रों को न्याय मिलता. इन वर्गों के छात्रों द्वारा भेदभाव की शिकायत करने पर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को 7 दिनों के भीतर जांच करनी होगी और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

यूजीसी के इस नियम को जनरल कैटेगरी के छात्रों ने विरोध किया था।

ब्लैक बॉक्स बरामद, हादसे की असली वजह का जल्द होगा खुलासा

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Ajit Pawar Plane Black Box को जांच एजेंसियों ने बरामद कर लिया है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे के बाद यह जांच का सबसे अहम सुराग माना जा रहा है। ब्लैक बॉक्स में उड़ान से जुड़ी हर गतिविधि रिकॉर्ड रहती है—पायलट की बातचीत, तकनीकी अलर्ट और अंतिम पलों की पूरी टाइमलाइन। यही वजह है कि इससे हादसे की असली वजह तक पहुंचने में एजेंसियों को बड़ी मदद मिलेगी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, बारामती के पास हुए इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के तुरंत बाद सभी जरूरी बचाव और जांच तंत्र सक्रिय कर दिए गए थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जा रही है। AAIB (Aircraft Accident Investigation Bureau), दिल्ली से तीन अधिकारियों की टीम और DGCA, मुंबई रीजनल ऑफिस से तीन अधिकारियों की एक अन्य टीम 28 जनवरी को घटनास्थल पर पहुंची थी। AAIB के डायरेक्टर जनरल भी उसी दिन मौके पर मौजूद रहे।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि जांच AAIB नियम, 2025 के नियम 5 और 11 के तहत, तय SOPs और दिशानिर्देशों के अनुसार आगे बढ़ रही है। Ajit Pawar Plane Black Box की डिकोडिंग के बाद तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या मौसम जैसे संभावित कारणों पर स्पष्टता आएगी।

गौरतलब है कि यह हादसा बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे हुआ, जब विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई थी। ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही दुर्घटना के कारणों पर अंतिम रिपोर्ट सामने लाई जा सकेगी।

 

बंगाल की खाड़ी में भारत-रूस का संयुक्त युद्धाभ्यास, समंदर से दुनिया को दिखेगी दोनों देशों की सैन्य ताकत

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नई दिल्ली । रूसी नौसेना के बेड़े का एक जहाज अभ्यास( Ship exercises)में भाग लेने के लिए ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होगा और 18 से 25 फरवरी तक भारतीय बंदरगाह विशाखापत्तनम(Visakhapatnam Port) कअनौपचारिक दौरा करेगा भारत और रूस(India and Russia) की जोड़ी जल्द ही समंदर( Ocean)से पूरी दुनिया को ताकत दिखाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस और भारत आगामी फरवरी में हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास(Naval exercises) करेंगे। इस ज्वॉइंट नेवल एक्सरसाइज का आयोजन बंगाल की खाड़ी में किया जाएगा। रूस की TASS सरकारी समाचार एजेंसी ने बुधवार को रूसी मैरीटाइम कॉलेज की प्रेस सेवा के हवाले से यह जानकारी दी है।
TASS की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े का एक फ्रिगेट मिलान-2026 अभ्यास में भाग लेने के लिए ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होगा। इसके बाद यह जहाज 18 से 25 फरवरी तक भारतीय बंदरगाह विशाखापत्तनम का अनौपचारिक दौरा करेगा। बता दें कि भारत और रूस हर साल अभ्यास इंद्र के नाम से एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं।

इससे पहले मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने बीते सोमवार को कहा है कि भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं और व्यापार के दायरे को बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
राजदूत कुमार ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा, “पिछला वर्ष विशेष रूप से सक्रिय रहा। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा अत्यंत सफल रही। 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना पूरी तरह से संभव है।” उन्होंने कहा, “नए उत्पादों की पहचान सहित कई कदम उठाए जा रहे हैं, और एक मुक्त व्यापार समझौता इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक, कृषि और अभियांत्रिकी में नए अवसरों के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है।

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बारामती विमान हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन

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बारामती। सिविल एविएशन मंत्रालय ने 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, AAIB की टीम ने मुंबई कार्यालय के DGCA की तीन सदस्यीय टीम के साथ हादसे वाले दिन ही दुर्घटना स्थल पर जाकर जांच शुरू कर दी। इस दौरान AAIB के महानिदेशक ने भी जहाज के घटनास्थल का दौरा किया। बता दें कि इस हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और अन्य चार लोगों की मौत हुई है।

घटनास्थल की जांच के बाद अधिकारियों ने बताया कि कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, जिन्हें ब्लैक बॉक्स कहा जाता है, बरामद कर लिए गए हैं। इनकी जांच से ही पता चलेगा कि यह बड़ा हादसा कैसे हुआ। अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच में टीम मुख्य रूप से विजिबिलिटी की स्थिति, पायलट के निर्णय और बारामती जैसे अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड पर संचालन की सीमाओं पर ध्यान दे रही है। टीम ने फॉरेंसिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं, जिनमें विमान का मलबा सुरक्षित करना और महत्वपूर्ण साक्ष्य इकट्ठा करना शामिल है।

 

टीम ने एयरफ्रेम और इंजन लॉगबुक, रखरखाव रिकॉर्ड, निरीक्षण इतिहास, वर्क ऑर्डर और ऑनबोर्ड दस्तावेज दिल्ली स्थित VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड से मांगे हैं। DGCA से क्रू की योग्यता रिकॉर्ड और विमान प्रमाणन दस्तावेज भी प्राप्त किए जा रहे हैं। सिविल एविएशन मंत्रालय के अनुसार, विमान सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना हुआ और 8:18 बजे बारामती एयरफील्ड से संपर्क स्थापित किया। रनवे 11 पर पहली अप्रोच के दौरान, क्रू ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है और उन्होंने स्टैंडर्ड गो-अराउंड किया। इसके बाद विमान ने दोबारा पोजिशनिंग के बाद एयरफील्ड को सूचित किया कि जब रनवे दिखाई देगा, तब रिपोर्ट करेंगे। 8:43 बजे विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई, लेकिन कोई फीडबैक प्राप्त नहीं हुआ। लगभग एक मिनट बाद, एयरफील्ड कर्मियों ने रनवे थ्रेशोल्ड के पास आग देखी और कंट्रोल रूम को सूचित किया।

केंद्रीय सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रारंभिक संकेत खराब विजिबिलिटी की ओर इशारा करते हैं, लेकिन जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘AAIB सक्षम प्राधिकरण है और पारदर्शी एवं उत्तरदायी जांच के माध्यम से तथ्य स्थापित करेगा।’ DGCA ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि क्रू को विजुअल मौसमीय परिस्थितियों (VMC) में उतरने की सलाह दी गई थी, जिसमें अनुमानित दृश्यता लगभग 3,000 मीटर और हवा शांत थी।

वहीं, VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विजय कुमार सिंह ने कहा कि विमान का रखरखाव सही था और यह उड़ान के योग्य था। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार कोई तकनीकी दोष नहीं था। पायलट ने विजिबिलिटी के कारण मिस्ड अप्रोच लिया और दूसरी लैंडिंग का प्रयास किया। जिससे यह दुर्घटना हुई।’ सिंह ने बताया कि विमान के कप्तान के पास 16,000 घंटे से अधिक के उड़ान का अनुभव था, जबकि सह-पायलट के पास लगभग 1,500 घंटे का अनुभव था।

SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप पर SC सख्त, सरकारी दफ्तरों के बाहर सूची लगाने के निर्देश

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नई दिल्ली। तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। याचिकाओं में चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई थी। जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगति सूची में शामिल किए गए हैं, उनकी सूची को ग्राम पंचायत भवन, प्रत्येक उपखंड कार्यालय और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किया जाए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम इस सूची में हैं, वे सूची प्रकाशित होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर खुद या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। सूची में विसंगति के संक्षिप्त कारण भी दर्ज किए जाएंगे। आपत्तियां उपखंड स्तर के कार्यालयों में दर्ज कराई जा सकेंगी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सभी जिला कलेक्टरों को चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने और एसआईआर प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा है। इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त यह सुनिश्चित करें कि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं सुचारू रूप से संपन्न हो। बता दें कि तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होंगे। 234 विधानसभा सीट वाले राज्य में चुनावी माहौल शुरू हो गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की दलों ने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। बता दें कि तमिलनाडु में इस वक्त डीएमके की सरकार है, जो कि कांग्रेस के साथ सहयोगी दल है।

 

 

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डेडलाइन्स, दबाव से मुक्ति और डायरेक्शन में एंट्री! अरिजीत सिंह के रिटायरमेंट की जानें बड़ी वजह

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मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने प्लेबैक सिंगिंग (Playback Singing) छोड़ने का इशारा क्या दिया, पूरी इंडस्ट्री (Industry) में जैसे भूकंप आ गया है. जिस आवाज के दम पर फिल्में थोड़ा ज्यादा कमाई करती थीं, वो आवाज अब फिल्मों से विदाई ले रही है. अरिजीत सिंह की आवाज ने पिछले एक दशक से हर आशिक का दिल बहलाया और हर टूटे दिल को सहारा दिया, यही वजह है कि उनके अचानक प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट (Retirement) के ऐलान से उनके फैंस भी दंग रह गए. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर रिटायरमेंट के बाद अरिजीत क्या करेंगे? आइए समझते हैं अरिजीत के इस कदम के पीछे की 4 सबसे बड़ी थ्योरीज, जो फैंस के सवालों का जवाब दे सकती हैं.

1. पिछले 4 दशकों से म्यूजिक इंडस्ट्री कवर कर रहीं सीनियर जर्नलिस्ट लिपिका वर्मा कहती हैं कि अब तक अरिजीत सिंह एक गाना गाते थे, फिल्म हिट होती थी, म्यूजिक कंपनी करोड़ों कमाती थी, लेकिन अरिजीत को मिलती थी सिर्फ एक बार की ‘फिक्स फीस’. इसे एक तरह से ‘फ्री पीआर टूल’ की तरह इस्तेमाल करना भी कहते हैं. लेकिन अब अरिजीत ने खेल पलट दिया है. उनके पास अब उनका करोड़ों का ‘फैनबेस है, उसे वो अपने ‘इंडी लेबल’ (ओरियन म्यूजिक) पर शिफ्ट कर रहे हैं. जब अरिजीत सिंह अपना गाना खुद के चैनल पर रिलीज करेंगे, तो उस गाने की ‘आईपी’ (मालिकाना हक) उनके पास होगी, जिसके लिए ताउम्र जो भी रॉयल्टी आएगी, वो सीधा अरिजीत की जेब में जाएगी. ये वही मॉडल है, जिसे आज के बड़े एक्टर्स अपनाते हैं, यानी खुद की फिल्म बनाओ और खुद ही मालिक बनो! हाल ही में जावेद अख्तर और शंकर महादेवन ने भी कई सिंगर और म्यूजिशियन के साथ मिलकर गुनगुनालो ऐप बनाया है, इस ऐप पर आर्टिस्ट खुद का म्यूजिक बनाकर अपलोड कर सकते हैं और अगर किसी फिल्म के लिए मेकर्स को वो खरीदना है, तो उन्हें सीधे आर्टिस्ट से बात करनी होगी और उनकी शर्तों पर म्यूजिक खरीदना होगा. अरिजीत भी इसी पैटर्न का इस्तेमाल कर सकते हैं.

 

2. एक बड़े म्यूजिक लेबल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बॉलीवुड में अब कई प्रोजेक्ट्स में कॉर्पोरेट्स और मार्केटिंग की दखलंदाजी बढ़ रही है. कई बार यहां गायक को गाना कैसे गाना है, ये म्यूजिक डायरेक्टर से ज्यादा कुछ और लोग तय करते हैं और अरिजीत जैसे कलाकार के लिए यह ‘क्रिएटिव जेल’ से कम नहीं है. अरिजीत अब उस लेवल पर हैं जहां उन्हें किसी बैनर की जरूरत नहीं. रिटायरमेंट का मतलब है कि अब वो ‘मसाला’ गानों की डिमांड से आजाद हैं. लेकिन यहां एक डर भी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अरिजीत जैसे बड़े नाम हट गए, तो म्यूजिक कंपनियां ‘सस्ते और नए टैलेंट’ को और भी बुरी तरह निचोड़ेंगी. यानी शोषण का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जहां अच्छी आवाजों को कौड़ियों के भाव खरीदा जाएगा.

3. सीनियर जर्नलिस्ट और फिल्म क्रिटिक आरती सक्सेना ने कहा, “आज के दौर में प्लेबैक सिंगिंग सिर्फ एक ‘विजिटिंग कार्ड’ रह गया है. असली पैसा फिल्मों में नहीं, बल्कि ‘स्टेडियम कॉन्सर्ट्स’ में है. अरिजीत अब खुद को एक ग्लोबल ब्रैंड की तरह देख रहे हैं. फिल्मों के लिए घंटों स्टूडियो में बंद रहने के बजाय, वो अपना समय वर्ल्ड टूर और लाइव परफॉर्मेंस को देना चाहते हैं और इन कॉन्सर्ट के लिए भारत एक अच्छा मार्केट है. एक फिल्म के गाने से ज्यादा कमाई वो एक रात के शो से कर सकते हैं. ऐसा हो सकता है कि रिटायरमेंट लेकर वो बॉलीवुड की ‘डेडलाइन्स’ से मुक्त होना चाहते हो ताकि वो अपने लाइव म्यूजिक के अनुभव को अगली पीढ़ी के लिए ‘लेजेंडरी’ बना सकें. उनका ये फैसला सफल रहा तो ये बाकी सिंगर्स के लिए मिसाल बनेगा. आगे चलकर उनकी तरह कुछ और सिंगर्स भी प्लेबैक सिंगिंग को बाय-बाय कहकर अपना खुद का अलग अस्तित्व बनाने की ओर कदम बढ़ा सकते हैं.”

4. हालांकि ये बात अब थ्योरी नहीं रही, बल्कि लगभग कन्फर्म हो गई है कि अरिजीत सिनेमा से दूर नहीं जा रहे, बल्कि वो अब खुद के बैनर के तहत फिल्में बना रहे हैं. जल्द ही वो अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस लॉन्च करेंगे. वो ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो उनकी सादगी और गहरी सोच को दिखा सकें. वो अब दूसरों के गानों के लिए चेहरा नहीं बनेंगे, बल्कि खुद अपनी फिल्में प्रोड्यूस करेंगे. यानी अब ‘अरिजीत सिंह फिल्म्स’ के बैनर तले आपको वो कहानियां देखने को मिलेंगी, जिनमें संगीत रूह तक उतरेगा. उम्मीद की जा रही है, अरिजीत का प्रोडूसर बनना, बॉलीवुड के उस ‘मसाला’ कल्चर को जवाब होगा जहां कंटेंट से ज्यादा शोर होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक

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SC on UGC New Rules: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाते हुए साफ किया है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक वर्ष 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि नए नियमों का दुरुपयोग होने की आशंका है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 19 मई तय की गई है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समाज में बढ़ते जातिगत विभाजन पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी हम जाति की दीवारों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। ऐसे फैसले देश को पीछे की ओर ले जाते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भारत को उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग स्कूल हों, जैसा कि अमेरिका में कभी गोरे बच्चों के लिए अलग स्कूल हुआ करते थे।

केंद्र सरकार को नोटिस जारी

SC on UGC New Rules के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट का मानना है कि यूजीसी के नए जाति संबंधी नियम स्पष्ट नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट होने के कारण उनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। शिक्षा संस्थानों में एकता दिखनी चाहिए, क्योंकि अगर वहां भेदभाव का माहौल बनेगा, तो देश में सामाजिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

सेक्शन 3C को दी गई चुनौती

याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि उन्होंने यूजीसी अधिसूचना के सेक्शन 3C को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि इसमें जनरल कैटेगरी को बाहर रखते हुए SC, ST और OBC से जुड़े मामलों को ही जातिगत भेदभाव माना गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप नहीं है।