इंस्टाग्राम से ‘गायब’ किंग कोहली का अकाउंट फिर एक्टिव, फैंस ने ली राहत की सांस

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Virat Kohli Instagram: टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर विराट कोहली के इंस्टाग्राम अकाउंट ने पूरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हलचल मचा दी. गुरुवार की रात से अचानक गायब हुए अकाउंट ने फैंस को चिंता में डाल दिया था. हालांकि, अब विराट कोहली का Instagram अकाउंट फिर से वापस आ गया है. फैंस ने राहत की सांस ली है. अकाउंट नहीं खुलने पर लोग कई तरह के कयास लगाने लगे थे. लेकिन अब इन कयासों पर विराम लग गया है. फिलहाल, अकाउंट किन वजहों से डिएक्टिवेट हो गया था. इसको लेकर विराट कोहली या उनकी टीम की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

दरअसल, गुरुवार की रात से अचानक 274 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स वाला विराट कोहली का ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट सर्च में दिखना बंद हो गया था. अकाउंट सर्च करने पर ‘पेज नॉट अवेलेबल’ का एरर मैसेज आता था. जिसके बाद पूरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विराट कोहली से जुड़े हैशटैग ट्रेंड करने लगे. विराट कोहली के फैंस अकाउंट सर्च में नहीं आने से काफी चिंतित हो गए और कई तरह से कयास लगाने लगे.

फैंस अनुष्का शर्मा से पूछे सवाल
विराट कोहली के अकाउंट बंद होने पर उनके फैन्स पत्नी अनुष्का शर्मा के इंस्टाग्राम की पोस्ट पर जाकर कमेंट करते हुए सवाल पूछ रहे थे कि विराट कोहली कहां हैं?
हालांकि इन सवालों के जवाब मिलने से पहले ही विराट कोहली का अकाउंट वापस आ गया. यह किन कारणों से हुआ था. अभी इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.

एशिया में सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वाले व्यक्ति हैं कोहली
बता दें, विराट कोहली का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिर्फ इंस्टाग्राम अकाउंट ही बंद हुआ था, बाकि सभी प्लेटफॉर्म एक्टिव थे. विराट कोहली इंस्टाग्राम अकाउंट से सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाले व्यक्ति हैं. इसके अलावा पूरे एशिया में विराट कोहली के सबसे ज्यादा फॉलोवर्स हैं. अब अकाउंट एक्टिव होने के बाद सबकी निगाहें विराट कोहली के बयानों पर टिकी हुई हैं, आखिर ऐसा क्या रहा कि अकाउंट कई घंटो तक बंद रहा. यह तो विराट कोहली ही जानते होंगे. फिलहाल, अभी तक कोई बयान नहीं दिया है.

बीएचयू में दो हॉस्टल के छात्रों में हुई मारपीट, एक पीजी छात्र गंभीर रूप से घायल

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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में दो छात्रावासों के छात्रों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। रुइया हॉस्टल और बिरला-सी हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट और पथराव की घटना में पीजी छात्र पीयूष तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई है, जिसके बाद उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। घटना के बाद पूरे कैंपस में तनाव का माहौल बन गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, कि रुइया हॉस्टल के गेट पर उस समय करीब 50–60 छात्र प्रॉक्टोरियल बोर्ड से किसी मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पीयूष तिवारी बाइक से वहां से गुजरा। तभी उसकी बिरला-सी हॉस्टल के तीन छात्रों से कहासुनी हो गई। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई, जिसमें पीयूष के सिर पर गंभीर चोट लग गई।
पीयूष के घायल होने की खबर फैलते ही रुइया हॉस्टल के छात्र आक्रोशित हो गए। इसी बीच आरोप है कि बिरला-सी हॉस्टल के 30–40 छात्र, जिनमें कुछ के चेहरे कपड़े से ढंके थे, लाठी-डंडे और पत्थर लेकर रुइया हॉस्टल की ओर दौड़ पड़े और जमकर पथराव किया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना मिलते ही लंका थाना पुलिस, बीएचयू चौकी प्रभारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी काशी गौरव स्वयं मौके पर पहुंचे। हालात काबू में करने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों, 3 एसीपी, 5 थानों की फोर्स, एक टीम पीएसी और आरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया। इसी के साथ ही पूरे इलाके की ड्रोन से निगरानी रखी गई।  
पुलिस ने बिरला-सी हॉस्टल को चारों ओर से घेर लिया है। तलाशी अभियान के तहत कई कमरों के ताले तोड़कर जांच की गई है। इस दौरान विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड भी मौके पर मौजूद रहा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी करने की बात कही है।  
छात्रों का आरोप है कि घटना में कुछ निष्कासित छात्र भी शामिल थे, जिनके खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। घायल छात्र के समर्थन में रुइया हॉस्टल के छात्र आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। फिलहाल कैंपस में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

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महाराष्ट्र में होने वाला था बड़ा राजनीतिक बदलाव, 8 फरवरी को NCP गुटों का विलय का था प्‍लान

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मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में जल्द बड़ी उठा पटक के आसार हैं। खबर है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट फरवरी में फिर से एक होने की घोषणा करने वाले थे, लेकिन अजित पवार (Ajit Pawar) के निधन के कारण इसे टाल दिया गया है। एक गुट की अगुवाई अजित के पास थी। जबकि, दूसरे गुट एनसीपी एसपी के प्रमुख वरिष्ठ नेता शरद पवार (Sharad Pawar) थे। हाल ही में चाचा और भतीजे पुणे स्थानीय निकाय चुनाव के लिए एक हुए थे, जिसके बाद एनसीपी के एक होने की अटकलें तेज हो गईं थीं।

8 फरवरी को होने वाली थी घोषणा
एक रिपोर्ट के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुट 8 फरवरी को साथ आने का ऐलान करने वाले थे। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि विलय को लेकर चर्चाएं काफी आगे बढ़ गई थीं और नेता जिला परिषद चुनाव के बाद औपचारिक ऐलान करने वाले थे। एनसीपी नेताओं के अनुसार, डिप्टी सीएम के निधन के बाद अनिश्चितताएं आ गईं हैं, लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया जारी है।

रिपोर्ट के मुतबाकि, बारामती पहुंचे एनसीपी नेताओं ने बुधवार रात बैठक भी की थी। सूत्रों ने बताया है कि दोनों गुटों के एक होना शरद पवार की एनसीपी एसपी का ‘सरकार में शामिल होने’ की ओर एक कदम होगा। एनसीपी एसपी महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है। जबकि, अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल है।

 

हो रही थीं बैठकें
मीडिया से बातचीत में एनसीपी एसपी विधायक जयंत पाटिल और एनसीपी एसपी नेता शशिकांत शिंदे ने गुटों के एक होने की बात की चर्चा की पुषअटि की है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि बात इतने आगे बढ़ गई थी कि संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए लोगों को शामिल करने को लेकर अनौपचारिक रूप से बातें हो रही थीं।

पाटिल ने अजित पवार के निधन को बड़ा नुकसान बताया है। अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हाल के समय में हम लगातार मिल रहे थे। 16 जनवरी को हम मेरे आवास पर मिले थे, ताकि चुनाव साथ लड़ने को लेकर अंतिम दौर की बात हो सके। 17 जनवरी को शरद पवार जी के घर पर बैठक हुई थी।’

क्या था प्लान
शिंदे ने बताया कि मर्ज होने की बात दोनों पार्टियों के बीच सहमति से पहले की तरह हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘अब सच बोलना जरूरी है। अजित पवार ने कहा था कि हम निकाय चुनावों के बाद साथ आ जाएंगे। इस संबंध में बैठकें भी हुई थीं। अजित दादा ने यह शरद पवार की ओर देखते हुए कहा था। अब हम उस दिशा में प्रगति करेंगे।’

अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने को तैयार है प्रयागराज प्रशासन? दावे पर अधिकारियों के बयान से विवाद गहराया

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Swami Avimukteshwaranand Controversy: माघ मेला के दौरान स्नान को लेकर हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस के बीच विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अब यह मामला प्रयागराज हाई कोर्ट पहुंच गया है. एक ओर जहां अविमुक्तेश्वरानंद के PRO का दावा है कि उनको मनाने के लिए प्रशासन काफी कोशिश में जुटा है, तो वहीं प्रशासन ने इसको सिरे से खारिज कर दिया है. अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ का दावा है कि अगर स्वामी जी की दोनों शर्तें मानी जाएंगी, तभी वे स्नान करेंगे. फिलहाल, प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.

अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ ने क्या कहा?
मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि प्रयागराज प्रशासन के बड़े अधिकारी दोबारा पूरे सम्मान के साथ स्नान कराने के लिए मना रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी ने स्नान करने से पहले अपनी कई शर्तें रखी हैं. उन्होंने शिष्यों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई, लिखित माफी मांगने और चारों शंकराचार्यों के लिए स्नान करने के लिए स्थाई SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाने की मांग की है.

हाई कोर्ट पहुंचा विवाद
दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान करने के लिए जा रहे थे. इस दौरान प्रशासन ने उन्हें भीड़ का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया. प्रशासन के मना करने पर पुलिस और उनके शिष्यों के बीच विवाद हो गया. आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने शिष्यों के साथ मारपीट की, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था. विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और वे बिना स्नान किए ही वापस लौट गए. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस मामले में कानून का सहारा लिया है और हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

मेला प्रशासन ने दावे को किया खारिज
अविमुक्तेश्वरानंद के पीआरओ द्वारा कही गई बातों को प्रयागराज प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि उनकी ओर से ऐसी कोई कोशिश नहीं की गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने प्रयागराज हाई कोर्ट में लेटर पिटीशन दायर कर कार्रवाई की मांग की है.
पिटीशन में शिष्यों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने और इससे जुड़े अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग उठाई है. मामले में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो दोषियों को सजा मिले, इसके लिए सीबीआई से जांच कराने की अपील की है.

बिना स्नान किए लौटे अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बाद माघ मेला से बिना स्नान किए प्रयागराज से वाराणसी चले गए हैं. उनके शिष्यों का कहना है कि अगर प्रशासन हमारी शर्तों को स्वीकार करता है, तो वाराणसी आकर उन्हें मनाना होगा और ससम्मान प्रयागराज में स्नान कराना होगा. फिलहाल, प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है.

हिमाचल में बर्फ देखने उमड़े पर्याटक, सड़कों पर ट्रैफिक जाम, रोज 15 हजार वाहन पहुंच रहे

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शिमला। शिमला और मनाली पर्यटकों से पूरी तरह पैक है। बर्फबारी थमने के बाद जैसे-जैसे सड़कें बहाल हो रही है, पर्यटक अब शिमला के नालदेहरा, कुफरी, महासू पीक, मनाली के सोलंगनाला और चंबा के डलहौजी तक पहुंचना लगे हैं। हिमाचल प्रदेश में बर्फ के फोटो-वीडियो वायरल होते ही देशभर से पर्यटकों का पहाड़ों पर जमावड़ा उमड़ने लगा हैं। इन जगह पर टूरिस्ट बर्फ में खेलने, डांस, स्नोमैन बनाने, हॉर्स व यॉक राइडिंग, स्केटिंग, स्नो स्कूटर, पैराग्लाइडिंग और रील्स रिकॉर्ड कर अपनी यात्रा को यादगार बना रहे हैं। दिनभर टूरिस्ट बर्फ में मस्ती कर रहे हैं। इस बीकेंड तक सड़क बहाली के बाद नारकंडा और अटल टनल तक टूरिस्ट पहुंच सकेंगे।
बता दें कि शिमला और मनाली के होटलों में 70 से 80 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी हो चुकी है। वीकेंड पर इसके शत-प्रतिशत होने की संभावना है। इसलिए, वीकेंड पर शिमला-मनाली आने वाले टूरिस्ट को एडवांस बुकिंग की सलाह दी जाती है। शिमला के होटेलियर अश्ननी सूद ने बताया कि शिमला में चार साल बाद बर्फबारी हुई है। इससे अगले 15-20 दिन अच्छा टूरिस्ट आने की उम्मीद है।
वहीं पुलिस के अनुसार- अकेले शिमला में रोजाना 12 हजार से 15 हजार टूरिस्ट व्हीकल पहुंच रहे हैं। इससे शिमला शहर के साथ साथ छराबड़ा, कुफरी और फागू के बीच भी ट्रैफिक जाम लग रहा है। एक घंटे के सफर में चार से पांच घंटे लग रहे हैं। इससे टूरिस्ट के साथ साथ लोकल भी परेशान है। मनाली में भी बीते एक सप्ताह से पतलीकूलह, 15 व 16 मील से मनाली तक ट्रैफिक जाम टूरिस्ट लग रहा है। मनाली में ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह आसपास के पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बंद होना भी है क्योंकि भारी हिमपात के कारण जीभी वैली, सोलंग नाला, अटल टनल, कोकसर, केलांग इत्यादि पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली सड़कें बंद थी। मगर अब सड़कों से बर्फ हटाने का काम जारी है। इससे एक-दो दिन में टूरिस्ट इन सभी पर्यटन स्थलों पर पहुंचना शुरू होगा। तब जाकर मनाली में ट्रैफिक जाम से भी निजात मिलेगी।

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क्या सुनेत्रा पवार बनेंगी महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री? अजित पवार के निधन के बाद अटकलें तेज

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मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Maharashtra Deputy Chief Minister Ajit Pawar) के निधन के बाद राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी आ गई है. अजित पवार के निधन से उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री (Deputy Chief Minister and Finance Minister) के पद रिक्त हो गए हैं. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को इन पदों पर नियुक्त किया जाएगा. इस बीच एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की. उसके बाद यह अटकलें और भी तेज हो गई हैं.

सूत्रों का कहना है कि एनसीपी नेता यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सुनेत्रा पवार एनसीपी का नेतृत्व संभालें और उपमुख्यमंत्री का पद भी ग्रहण करें. इस बीच, अजित पवार के समर्थकों ने मांग की है कि अजित पवार के बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए. अजित पवार के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के बाद, बारामती में अजित पवार के समर्थकों ने ये मांग की.

 

सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज
उनका कहना है कि अगर सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उपमुख्यमंत्री के रूप में सुनेत्रा अजित पवार का नाम ही रह जाएगा. कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि पवार परिवार को मिलकर दोनों राष्ट्रवादियों (एनसीपी) के विलय पर फैसला लेना चाहिए. हालांकि, इन कार्यकर्ताओं का यह भी मानना ​​है कि अब परिवार को मिलकर नेतृत्व पर विचार-विमर्श करना चाहिए और फैसला लेना चाहिए.

दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक संजीव उन्हाले का कहना है कि अजित पवार राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे. सुनेत्रा पवार के लिए इन सभी पदों को संभालना संभव नहीं है. इसलिए, वह राष्ट्रवादी पार्टी की अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं.

अजित पवार के निधन के बाद अटकलें तेज
हालांकि, संजीव उन्हाले ने यह भी अनुमान लगाया कि यह सब भाजपा के नेतृत्व में होगा. यदि अजित पवार की विचारधारा को कायम रखना है, तो सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार और जय पवार को मौका दिया जाना चाहिए. अगर उन्हें यह मौका मिलता है, तो पार्टी पर अजित पवार की छाप बनी रहेगी. हर किसी की महत्वाकांक्षा होती है. ऐसा नहीं है कि सांसद सुनील तटकरे की महत्वाकांक्षा नहीं है.

उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि राष्ट्रवादी पार्टी के कई नेता उपमुख्यमंत्री पद के लिए उत्सुक हो सकते हैं, क्योंकि छगन भुजबल समेत कई नेताओं ने अजित पवार के साथ काम किया है. अजित पवार की बुधवार को बारामती हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी. गुरुवार की सुबह बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य प्रमुख नेता इस अवसर पर उपस्थित थे.

 

 

समीर वानखेड़े को हाई कोर्ट से झटका

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नई दिल्ली। आर्यन खान ड्रग केस के जांच अधिकारी रहे समीर वानखेड़े को गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा। अदालत ने आर्यन खान की वेब सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड के खिलाफ दायर उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का उसके पास अधिकार नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समीर वानखेड़े चाहें तो उचित अदालत में दोबारा याचिका दायर कर सकते हैं। अंतरिम याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने दो अहम सवालों पर विचार किया। समीर वानखेड़े ने इस मुकदमे में 2 करोड़ रुपए का मुआवजा भी मांगा था। उनका कहना था कि वह इस राशि को टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान करना चाहते हैं।

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अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे का विवादित बयान, बोले- राजनीति में सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है

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नई दिल्ली। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने लिखा है कि महाराष्ट्र की राजनीति(Maharashtra politics) ने एक बेहतरीन नेता खो दिया है। अजित पवार(Ajit Pawar) और मैंने लगभग एक ही समय में राजनीति(politics) में कदम रखा था, हालांकि हमारी जान-पहचान बहुत बाद में हुई।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री(Deputy Chief Minister) अजित पवार(Ajit Pawar) के असामयिक निधन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(Maharashtra Navnirman Sena (MNS) president) (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अजित पवार(Ajit Pawar) को अपना दोस्त बताते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी(Expressing his profound grief) है। राज ठाकरे(Raj Thackeray) ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा है कि ऐसे समय में, जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, महाराष्ट्र ने एक असाधारण नेता खो दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इस ट्वीट में एक बड़ी बात कही है। उन्होंने लिखा, “राजनीति में स्पष्ट बोलने की कीमत(speaking frankly in politics) चुकानी होती है, पता नहीं अजीत पवार (Ajit Pawar)को कितनी चुकानी पड़ी होगी।”

कम समय में शिखर तक पहुंचे
अजित पवार(Ajit Pawar) के विमान हादसे की खबर सामने आने के कुछ ही घंटों बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया X पर मराठी में एक लंबा श्रद्धांजलि संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अजित पवार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। उन्होंने लिखा, “महाराष्ट्र ने एक बेबाक और सक्षम नेता खो दिया।” राज ठाकरे ने आगे लिखा, “मेरे मित्र और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति ने एक उत्कृष्ट नेता खो दिया है। हम दोनों ने लगभग एक ही समय राजनीति में प्रवेश किया था। हालांकि हमारी निकटता बाद में हुई, लेकिन राजनीति के प्रति उनके जुनून ने उन्हें बहुत कम समय में शिखर तक पहुंचाया।”

राजनीति में बदलाव की थी गहरी समझ
उन्होंने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) भले ही पवार साहेब की राजनीतिक परंपरा से आए हों, लेकिन उन्होंने समय के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई और उसे पूरे महाराष्ट्र में स्थापित किया। राज ठाकरे ने 1990 के दशक का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में महाराष्ट्र में तेजी से शहरीकरण हुआ। ग्रामीण क्षेत्र अर्ध-शहरी बनने लगे, लेकिन राजनीति का स्वर ग्रामीण ही बना रहा, जबकि समस्याएं शहरी होती चली गईं। उन्होंने लिखा, “अजित पवार(Ajit Pawar) को इस बदलाव की गहरी समझ थी और वे इस तरह की राजनीति को संभालने में माहिर थे। पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती इसके जीवंत उदाहरण हैं। इन दोनों क्षेत्रों का जिस तरह उन्होंने विकास किया, उसे उनके राजनीतिक विरोधी भी स्वीकार करते हैं।”

 

पवार की प्रशासन पर मजबूत पकड़ थी
राज ठाकरे ने कहा कि अजित पवार(Ajit Pawar) की प्रशासन पर असाधारण पकड़ थी। उन्होंने लिखा, “वे जानते थे कि अटकी हुई फाइलों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आज के दौर में जब प्रशासन को सत्ता से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, ऐसे नेता का जाना बेहद दुखद है। राज ठाकरे ने अजित पवार(Ajit Pawar) की बेबाकी और स्पष्टवादिता को उनकी सबसे बड़ी पहचान बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई काम नहीं हो सकता था, तो अजित पवार सामने से मना कर देते थे। और अगर हो सकता था, तो उसे पूरा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे। लोगों को झूठे वादों से बहलाना या भीड़ जुटाकर राजनीति करना उनका तरीका नहीं था।”

साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है
इसी संदर्भ में उन्होंने लिखा, “राजनीति में साफगोई और ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है। यह बात मैं अपने अनुभव से जानता हूं और अंदाजा लगाया जा सकता है कि अजित पवार ने इसके लिए कितनी बड़ी कीमत चुकाई होगी।” राज ठाकरे ने अजित पवार को जातिवाद से मुक्त राजनीति करने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में ऐसे नेता कम होते जा रहे हैं, जो बिना जातिगत गणनाओं के काम करने का साहस रखते हों और अजित पवार उनमें सबसे आगे थे।

भारत-यूरोपीय संघ के बाद अब अमेरिका के साथ बड़ी व्यापारिक डील की तैयारी

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नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद अब भारत के लिए वैश्विक आर्थिक मोर्चे से एक और बड़ी खुशखबरी आ सकती है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता में बहुत महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है और दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सकारात्मक परिणामों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को संकेत दिया कि जहां एक ओर भारत ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम चरण तक पहुँचाया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी बातचीत की गति को निरंतर बनाए रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूरोपीय संघ समझौता अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों का विकल्प नहीं है, क्योंकि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के वार्ताकार एक ऐसे निष्कर्ष की ओर बढ़ रहे हैं जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता कुछ जटिल मुद्दों के कारण धीमी पड़ गई थी। अगस्त में अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बाद बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया था। इसमें विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क, आव्रजन नीति और टैरिफ से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल थे। इन चुनौतियों के बावजूद, हालिया प्रगति दर्शाती है कि दोनों देश अपने आपसी मतभेदों को सुलझाने के प्रति गंभीर हैं। व्यापार जगत में यह धारणा भी बनी थी कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ डील संभवतः अमेरिका की कठोर शुल्क नीति के जवाब में की है, परंतु सूत्रों ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। स्पष्ट किया गया है कि यूरोपीय संघ के साथ समझौता पूरी तरह से आपसी हितों और लाभ के आधार पर है। भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और यूरोप दोनों ही क्षेत्रों में अपना निर्यात बढ़ाना है, ताकि देश के भीतर विनिर्माण को गति मिले और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
आगामी सप्ताह कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अगले सप्ताह वाशिंगटन की यात्रा पर जाने की संभावना है, जहाँ वे महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। 4 फरवरी को होने वाली इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी पूर्व में संकेत दिए थे कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले आठ देशों के समूह पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। राजदूत के इस आश्वासन और विदेश मंत्री की संभावित यात्रा से यह उम्मीद और बलवती हो गई है कि टैरिफ और तेल आयात जैसे विवादित मुद्दों पर जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है और एक ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता धरातल पर उतर सकता है।

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विमान हादसे से पहले भावुक थे अजित बोले- मैं अब थक चुका हूं, मुझे अब कुछ नहीं चाहिए

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति के दादा कहे जाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया है। यह न केवल उनकी पार्टी एनसीपी के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि राज्य की राजनीति के एक युग का अंत भी है। पिछले कुछ वर्षों में विवादों, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और चुनावी चुनौतियों का सामना करने वाले अजित पवार अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले अंदरूनी तौर पर काफी व्यथित और थके हुए महसूस कर रहे थे। उनके सबसे करीबी मित्र और बारामती विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी किरण गूजर ने उनके अंतिम दिनों की उन भावुक यादों को साझा किया है, जो एक कठोर नेता के भीतर छिपे संवेदनशील इंसान को उजागर करती हैं।
किरण गूजर, जिन्होंने 1984 में अजित पवार को राजनीति के पहले चुनाव के लिए मनाया था, बताते हैं कि पिछले कुछ समय से अजित पवार का राजनीति से मोहभंग होने लगा था। कुछ दिन पहले ही उन्होंने गूजर से अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा था, अब मुझे यह सब नहीं चाहिए, मैं थक चुका हूँ। गूजर के अनुसार, अजित पवार अपनी कड़ी मेहनत के बावजूद मिलने वाली आलोचनाओं और राजनीतिक झटकों से आहत थे। उन्होंने बेहद भावुक होकर अपने मित्र से पूछा था, मैं दिन-रात इतनी मेहनत कर रहा हूँ, फिर भी मुझे यह सब (विरोध और आलोचना) क्यों सहना पड़ रहा है? लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद तो वे इतने टूट गए थे कि विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में भी नहीं थे, लेकिन करीबी साथियों के समझाने पर वे दोबारा सक्रिय हुए थे।
अजित पवार के व्यक्तित्व में आए बदलावों पर चर्चा करते हुए किरण गूजर बताते हैं कि शुरुआती दिनों में वे अध्यात्म और मंदिर जाने के सख्त खिलाफ थे। बचपन में पिता को खोने और परिवार की विषम परिस्थितियों के कारण उनके मन में ईश्वर की अवधारणा को लेकर एक अलग सोच थी। वे अक्सर कहते थे कि भगवान ने उनके साथ अच्छा नहीं किया, इसलिए वे वहां क्यों जाएं? हालांकि, उम्र और अनुभव के साथ उनके व्यवहार में नरमी आई थी। वे भगवान पर भरोसा तो करने लगे थे, लेकिन कभी अंधविश्वासी नहीं रहे और न ही उन्होंने कभी धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया।
अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए गूजर भावुक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि मौत से महज पांच दिन पहले अजित पवार ने उनसे कहा था कि वे ऊब रहे हैं और उन्हें कहीं बाहर जाना चाहिए। दोनों ने साथ में आधा दिन बिताया और रात का खाना खाया। वह अजित पवार के साथ उनका आखिरी भोजन था। उस समय भी अजित पवार ने अपनी थकान और राजनीति से दूर रहने की इच्छा जाहिर की थी, जिसे सुनकर उनके मित्र भी हैरान थे कि आखिर दादा के मन में क्या चल रहा है। हादसे वाले दिन की दास्तां बयां करते हुए किरण गूजर ने बताया कि विमान में सवार होने से ठीक पहले अजित पवार ने उन्हें फोन किया था। वे उन्हें लेने खुद हवाई अड्डे पहुंचे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी आंखों के सामने ही वह विमान क्रैश हो गया। गूजर ने बताया कि मलबे से जब अजित पवार का पार्थिव शरीर निकाला गया और उसे कार में रखा गया, तो उन्होंने ही अपने प्रिय दादा की पहचान की। वे कहते हैं कि यह सब एक बुरे सपने जैसा लगता है, जिस पर विश्वास करना नामुमकिन है कि बारामती के लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाला नेता अब हमारे बीच नहीं रहा। 1984 में छत्रपति कारखाना चुनाव से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर, 2026 की इस दुखद दोपहर में हमेशा के लिए थम गया।

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News Desk