16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी

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आज के समय में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. दुनिया के लगभग सभी देशों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. सोशल मीडिया लोगों के लिए जितना फायदेमंद है, उतना ही नुकसानदायक भी हो सकता है. इसी के चलते ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और डेनमार्क जैसी सरकारें बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. वहीं इन देशों के बाद अब स्पेन और ग्रीस भी 16 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं.

स्पेन के प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर क्या बोले?

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को घोषणा की कि देश में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना बहुत जरूरी है.
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि यह कदम युवाओं के सुरक्षित भविष्य और उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है.
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कम उम्र के बच्चे अक्सर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनके भविष्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

प्रधानमंत्री कंटेंट को लेकर क्या कहा?

संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित एक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री सांचेज़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और डीपफेक जैसे अवैध व आपत्तिजनक कंटेंट की व्यापक मौजूदगी पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने इन डिजिटल खतरों पर कड़े सवाल खड़े करते हुए तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही तय करने और युवाओं को इस ‘डिजिटल वाइल्ड वेस्ट’ से सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया.

सरकार ‘आयु जांच प्रणाली’ के लिए बाध्य करेगी

उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकारें अब इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगी. यह पाबंदी सिर्फ नाममात्र की नहीं होगी, बल्कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों को एक मजबूत ‘आयु जांच प्रणाली’ अपनाने के लिए बाध्य करेगी.

ठोस तकनीक पर ध्यान देना होगा

कंपनियों को अब केवल औपचारिकता निभाने वाले ‘चेक बॉक्स’ से आगे बढ़कर ऐसी ठोस तकनीक पर ध्यान देना होगा, जो असल में बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने से रोक सके. फिलहाल अधिकतर ऐप्स पर न्यूनतम आयु 13 वर्ष निर्धारित है, लेकिन बच्चे अपनी गलत उम्र दर्ज कर बड़ी आसानी से अपना अकाउंट बना लेते हैं.

दिल दहला देने वाली घटना: तीन बेटियों की खुदकुशी

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नई दिल्ली।  देश को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना में तीन सगी बेटियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर सामने आई है। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया, बल्कि समाज और प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, तीनों बेटियाँ एक ही परिवार से थीं। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, हालांकि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। मानसिक तनाव, पारिवारिक परिस्थितियां या किसी बाहरी दबाव की भी जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते लापता लोगों के मामले भी गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। बीते कुछ समय में बच्चों, युवतियों और युवाओं के गुमशुदा होने की घटनाओं में इज़ाफा हुआ है। कई मामलों में परिजनों की शिकायत के बावजूद लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं और बढ़ती गुमशुदगी, दोनों ही सिस्टम की संवेदनशीलता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, पारिवारिक संवाद और समय पर काउंसलिंग बेहद ज़रूरी है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि लापता मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है और संबंधित थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं तीन बेटियों की आत्महत्या के मामले में भी निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया है।यह घटनाएं समाज के लिए एक चेतावनी हैं कि मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग और नागरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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संजय राउत का बड़ा हमला- प्रफुल्ल पटेल भाजपा के ज्यादा करीब

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शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी)  के नेता प्रफुल्ल पटेल पर निशाना साधा। राउत ने कहा कि पटेल अपनी पार्टी से ज्यादा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के करीब हैं। उन्होंने कहा कि पटेल को वही करना चाहिए जो महाराष्ट्र और मराठी मानुष के लिए स्वीकार्य हो। 

संजय राउत ने क्या कहा?

संजय राउत ने कहा, एनसीपी पवारों की पार्टी है, पटेलों की नहीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे भी भाजपा की ओर झुकाव रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, प्रफुल्ल पटेल को वहीं करना चाहिए जो केवल महाराष्ट्र और मराठी मानुष के लिए मंजूर हो। एनसीपी पवारों की पार्टी है, पटेलों की नहीं। वह अपनी पार्टी के नेता नेता होने से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बड़े भक्त हैं। 

प्रफुल्ल पटेल ने क्या कहा था?

प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को कहा था कि वह एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दौड़ में नहीं हैं। यह पद दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पास था।उन्होंने यह भी कहा कि अजितपवार की पिछले हफ्ते एक विमान में हादसे में मौत के बाद पार्टी के फैसलों पर ऐसे लोग बोल रहे हैं, जिनका एनसीपी से कोई लेना-देना नहीं है।विपक्षी दल प्रफुल्ल पटेल पर यह कहते हुए निशाना साध रहे हैं कि अजित पवार के निधन के बाद वह एनसीपी की कमान संभालना चाहते हैं। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि मूल एनसीपी और शिवसेना में जो टूट हुई है, उसके लिए भाजपा जिम्मेदार है। एनसीपी की स्थापना शरद पवार और शिवसेना की बाल ठाकरे ने की थी। संसद में गतिरोध बरकरार: लोकसभा में पीएम मोदी का भाषण टला, विपक्षी दलों के हंगामे के बीच दिनभर नहीं हो सका काम

चंद्रपुर के महापौर को लेकर राउत ने क्या कहा?

चंद्रपुर के महापौर का पद कौन संभालेगा, इस सवाल को लेकर राउत ने कहा कि वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही बहुमत नहीं मिला है और वे छोटे दलों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वहां के शिवसेना (यूबीटी) पार्षदों को निर्देश दिया है कि वे भाजपा के साथ किसी भी तरह का गठबंधन न करें।
 
चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?

66 सीटों वाले चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं, भाजपा को 23 सीटें मिलीं और शिवसेना (यूबीटी) को छह सीटें मिलीं। बसपा और शिवसेना को एक-एक सीट मिली है।

क्लाउड पार्टिकल घोटाले में बड़ा खुलासा, 1800 करोड़ रुपये का हिसाब गायब

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व्यूनाउ ग्रुप के सीईओ और संस्थापक सुखविंदर सिंह खारौर ने अन्य आरोपियों/संस्थाओं के साथ मिलकर हजारों करोड़ रुपये का ‘क्लाउड पार्टिकल घोटाला’ किया है। उन्होंने आम जनता (निवेशकों) की मेहनत की कमाई अपने निजी लाभ के लिए हड़प ली। सेल एंड लीज बैक (एसएलबी) मॉडल पर आधारित क्लाउड पार्टिकल का मूल व्यवसाय अस्तित्वहीन पाया गया। निवेशकों को धोखा देने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। यह भी पता चला है कि डेटा सेंटर ग्राहकों से कोई किराया नहीं लिया जाता था या बहुत कम राशि ली जाती थी। वजह, क्योंकि व्यूनाउ ग्रुप का पूरा व्यवसाय केवल एक धन-चक्रण योजना थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, क्लाउड पार्टिकल्स की बिक्री के बदले निवेशकों से कुल मिलाकर लगभग 3700 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे। इसमें से लगभग 1800 करोड़ रुपये निवेशकों को किराए के रूप में लौटा दिए गए और शेष अपराध से प्राप्त धन (पीओसी) का उपयोग व्यापारिक उद्देश्यों के अलावा अन्य कामों के लिए किया गया। मेसर्स वीएमएसएल और समूह की कंपनियों द्वारा चैनल पार्टनर्स को उच्च कमीशन देने, विभिन्न विलासितापूर्ण वाहनों, सोने और हीरों की खरीद, फर्जी संस्थाओं के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि का हस्तांतरण और संपत्तियों में निवेश करने में इसका दुरुपयोग किया गया।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत, मेसर्स वुएनो समूह की कंपनियों से संबंधित धन शोधन जांच के सिलसिले में 30.01.2026 को 19.10 करोड़ रुपये मूल्य का अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है। ईडी ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा बीएनएस, 2023 के प्रावधानों के तहत दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। ईडी के मुताबिक, जांच के दौरान पहले से जब्त/अचल संपत्तियों के अतिरिक्त, अचल संपत्तियों, सावधि जमाओं और सूचीबद्ध शेयरों के रूप में 19.10 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त संपत्तियां बरामद की गईं। अचल संपत्तियां सुखविंदर सिंह खारौर, मेसर्स व्यूनो इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नितिन श्रीवास्तव और उनकी पत्नी रुचि श्रीवास्तव तथा व्यूनो ग्रुप के लेखाकार विजय झा के परिवार के सदस्यों की हैं, जबकि शेयर सुखविंदर सिंह खारौर और डिंपल खारौर के हैं।इससे पहले, 6 फरवरी 2025 के अनंतिम कुर्की आदेश के तहत बैंक बैलेंस, वाहनों और अचल संपत्तियों के रूप में लगभग 178.12 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई थी। 14 अगस्त 2025 को तलाशी अभियान के दौरान 73.72 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति भी फ्रीज कर दी गई थी। जांच के दौरान, आरोपी सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को 28 फरवरी 2025 को और आरिफ निसार को 24 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल ये आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बाद, उनके और उनसे संबंधित संस्थाओं के खिलाफ 24 अप्रैल 2025 को पीएमएलए विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। केस की आगे की जांच जारी है।

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सुनेत्रा पवार को मिले एनसीपी की कमान? चिखलीकर का बड़ा बयान

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महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भी नेतृत्व करना चाहिए। लोहा से विधायक प्रताप चिखलीकर ने यह इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि है कि एनसीपी कार्यकर्ता यह चाहते हैं।चिखलीकर अपने गृह नगर बारामती (पुणे जिला) में 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियां विसर्जित करने से पहले मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को पार्टी प्रमुख बनना चाहिए। हम सभी ने उनसे एनसीपी का नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया है।पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं की भी यही इच्छा मुंबई में हुई एक बैठक का हवाला देते हुए चिखलीकर ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रफुल्ल पटेल सहित अन्य नेता मौजूद थे। उनकी भी यही राय थी कि सुनेत्रा पवार को संगठन की कमान सौंपी जाए।

सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री जल्दी बनाने के निर्णय का किया बचाव

विधायक ने अजीत पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह सही है कि निर्णय जल्दी लिया गया, लेकिन अगर परिवार और संगठन को संभालना है तो नेतृत्व किसी को सौंपना पड़ता है। सभी की भावनाओं का सम्मान करते हुए सुनेत्रा पवार ने यह जिम्मेदारी स्वीकार की।

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MP में 57 हजार मजदूरों की मौत से हड़कंप, श्रम विभाग हुआ सतर्क

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मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना में पंजीकृत असंगठित श्रमिकों की सामान्य और दुर्घटनाजनित मौतों की बढ़ती संख्या ने श्रम विभाग की चिंता बढ़ा दी है. इन मौतों पर हो रहे भारी खर्च को देखते हुए अब सरकार ने रोकथाम पर जोर देने का फैसला किया है. इसके तहत सभी जिलों में श्रमिकों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनकी निगरानी कलेक्टर करेंगे.

सामान्य मृत्यु पर 2 लाख दिए जाते हैं

मध्य प्रदेश में 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के असंगठित श्रमिक मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना में पंजीकृत हैं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश में पंजीकृत श्रमिकों के बीच 57 हजार सामान्य मौतें और करीब 5,800 दुर्घटनाजनित मौतें दर्ज हुईं, जिनमें संबल योजना के तहत हितलाभ वितरित किए गए. प्रदेश की औसत आयु 67 वर्ष है, लेकिन 60 वर्ष से पहले होने वाली मौतों पर योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर दो लाख और दुर्घटना मृत्यु पर चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है.

प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को निर्देश जारी

हर साल 60 हजार से अधिक मामलों में हितलाभ दिए जाने से योजना पर खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसी को देखते हुए श्रम विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि जिलों में श्रमिक स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए जाए. ये शिविर औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, ईंट भट्टों, कारखानों और कृषि आधारित कार्यस्थलों पर लगाए जाएंगे. शिविरों का आयोजन मासिक ग्राम सभा और वार्ड सभाओं के साथ किया जाएगा तथा अनुग्रह सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी भी ग्राम सभा की विषय सूची में शामिल की जा सकेगी.

कार्यस्थल सुरक्षा पर सख्ती

कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन के निर्देश भी दिए गए हैं. कारखानों और निर्माण स्थलों पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, ग्लब्स, मास्क सहित सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा. इसके साथ ही श्रमिकों को सड़क सुरक्षा और सुरक्षित परिवहन के प्रति भी जागरूक किया जाएगा.

नियमित स्वास्थ्य जांच और समन्वय

श्रमिकों को नियमित स्वास्थ्य जांच, जैसे बीपी, शुगर, बीएमआई और कार्डियक रिस्क से जोड़ा जाएगा. उच्च जोखिम वाले श्रमिकों की पहचान कर उन्हें समय पर चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय से प्रत्येक जिले में संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

भोपाल में SIR को लेकर कांग्रेस की हाई लेवल बैठक, नेताओं ने नाम कटौती को बताया लोकतंत्र पर वार

कार्यशील आयु वर्ग में मौतों के कारणों का विश्लेषण कर उन्हें रोकने के उपायों पर मासिक समीक्षा करने के भी निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं. सरकार का मानना है कि निवारक स्वास्थ्य उपायों और सुरक्षा जागरूकता से श्रमिकों की मृत्यु दर घटेगी और संबल योजना पर बढ़ते खर्च को भी नियंत्रित किया जा सकेगा.

चहल की संभावित भारतीय प्लेइंग-11 चौंकाने वाली! ईशान को ही किया बाहर; अपने दोस्त को भी नहीं चुना

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टी20 विश्व कप का आगाज सात फरवरी से होने जा रहा है। भारत सात को अपने पहले मुकाबले में अमेरिका से भिड़ेगा। इस पहले मुकाबले से पहले टीम इंडिया के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी संभावित प्लेइंग-11 चुनकर क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अमेरिका के खिलाफ होने वाले इस मैच के लिए चहल ने ईशान किशन और कुलदीप यादव जैसे बड़े नामों को बाहर रखा है। खास बात तो यह है कि कुलदीप मौजूदा समय में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं और चहल के खास दोस्त भी हैं। चहल ने कुलदीप पर वरुण चक्रवर्ती को तरजीह दी है।

ईशान को बाहर रखना सरप्राइज

हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार फॉर्म में रहे ईशान किशन को प्लेइंग-11 में जगह न मिलना सबसे चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है। चहल ने ओपनिंग के लिए संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की जोड़ी पर भरोसा जताया है। संजू सैमसन का हालिया प्रदर्शन साधारण रहा है, इसके बावजूद चहल ने उन पर भरोसा दिखाया। चहल ने इस चयन को लेकर कहा, ‘टी20 में मुझे ऐसे खिलाड़ी चाहिए जो दबाव में भी गेम को कंट्रोल कर सकें।’

मिडिल ऑर्डर में संतुलन पर जोर

चहल की टीम में नंबर तीन पर चोट से वापसी कर रहे तिलक वर्मा को जगह मिली है। इसके बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव नंबर चार पर बल्लेबाजी करेंगे। मिडिल ऑर्डर और फिनिशर की भूमिका हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे और रिंकू सिंह निभाएंगे। यह संयोजन टीम को गहराई और पावर दोनों देता है। उन्होंने ईशान पर रिंकू को तरजीह दी, जबकि ईशान ने मध्यक्रम में शानदार फॉर्म दिखाया है।

गेंदबाजी में आक्रामक रणनीति

गेंदबाजी विभाग में चहल ने दो स्पिनर, अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती को चुना है। तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह के कंधों पर होगी। इसी संतुलन के चलते कुलदीप यादव को बाहर रखा गया है, जिन्होंने 2025 एशिया कप फाइनल के बाद सीमित टी20 मैच खेले हैं।

ग्रुप ए में भारत की चुनौती

डिफेंडिंग चैंपियन भारत को ग्रुप ए में पाकिस्तान, अमेरिका, नीदरलैंड्स और नामीबिया के साथ रखा गया है। टीम इंडिया का लक्ष्य इतिहास रचना है। भारत की नजर घरेलू धरती पर खिताब बचाने वाली पहली टीम बनना और तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीतना है।चहल की संभावित प्लेइंग-11: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह।

तीन बहनों की मौत से हिला देश

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन नाबालिग लड़कियों ने एक अपार्टमेंट की नौंवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। शुरुआत में लोगों को यह आत्महत्या का एक सामान्य मामला लगा, लेकिन जब पुलिस ने इस जांच की तो सामने आया कि यह आत्महत्या किसी अवसाद या परेशानी के चलते नहीं, बल्कि एक लत की वजह से थी, जिसे छोड़ने के बजाय लड़कियों ने मौत को गले लगाना सही समझा। 

आइये जानते हैं कि गाजियाबाद में तीन लड़कियों की मौत के मामले में पुलिस की जांच अभी कहां तक पहुंची है और इसके पीछे क्या वजह सामने आई है?

गाजियाबाद का यह केस है क्या, बच्चियों की कब-कैसे हुई मौत?

मामला गाजियाबाद के टीलामोड़ थानाक्षेत्र इलाके का है। यहां 3 फरवरी (मंगलवार) देर रात करीब दो बजे तीन नाबालिग लड़कियां अचानक एक अपार्टमेंट के नौंवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट की खिड़की से कूद गईं। जब यह घटना हुई, तब लड़कियों के माता-पिता दूसरे कमरे में सो रहे थे। लड़कियों की उम्र 16, 14 और 12 वर्ष थी। पुलिस जब जांच के लिए पहुंची तो यह साफ नहीं हुआ कि बच्चियों के आत्महत्या की क्या वजह है। इसके बाद उनके परिजनों से पूछताछ शुरू की गई। परिवार के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, ‘रात करीब 2:15 बजे सूचना मिली कि भारत सिटी में 9वीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियां कूद गईं। मौके पर तीन बच्चियों की गिरने के कारण मौत हो गई। तीनों को लोनी के अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। किशोरियों के पिता ऑनलाइन ट्रेडिंग का करते हैं और तीन वर्ष से भारत सिटी सोसायटी में किराये पर रह रहे हैं, मूल रूप से दिल्ली निवासी हैं।’ 

कैसे पता चला लड़कियों ने आत्महत्या की?

पुलिस ने जब घटनास्थल की छानबीन की तो उसे किशोरियों के कमरे से आठ पन्ने का एक कथित सुसाइड नोट मिला। इस सुसाइड नोट में बच्चियों की हैडराइटिंग में सुसाइड करने के लिए अपने माता-पिता से माफी मांगी गई है। इसमें लिखा है- ‘इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो क्योंकि ये सब सच है। आई एम सॉरी, पापा।’ सुसाइड नोट में एक इमोजी भी बना है, जिसमें एक लड़की रोते हुए दिखाई गई है।’

‘पापा सॉरी…’, रोती हुई इमोजी के साथ पत्र में ‘डायरी’ का जिक्र; गाजियाबाद की तीन बहनों की सुसाइड की कहानी

गाजियाबाद के डीसीपी निमिष पाटिल ने कहा, “अभी तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियों ने आत्महत्या की है। हमें एक नोट भी प्राप्त हुआ है, जिसकी आधिकारिक जांच की जा रही है। जांच में किसी एप का नाम नहीं है, लेकिन नोट में लिखा है कि लड़कियां कोरियन कल्चर से प्रभावित थीं। उसी के चलते उन्होंने आत्महत्या की है। लड़कियों के पिता की दो शादियां हुई थी, इनकी माएं अलग-अलग हैं।” 

जांच में कैसे जुड़ा कोरियाई गेम की लत का एंगल?

एसीपी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, शुरुआती जांच में लड़कियों के एक कोरियाई टास्क-आधारित इंटरएक्टिव- ‘लव गेम’ की लत में पड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने बताया कि लड़कियों को ऑनलाइन गेमिंग की लत कोरोनावायरस महामारी में लगे लॉकडाउन के दौरान लगी थी। तीनों बहनें साथ ही कोरियाई गेम खेलती थीं। धीरे-धीरे वे हर काम एक साथ करने लगीं थीं। नहाने से लेकर खाना-पीना, सोना और स्कूल जाने तक। पुलिस के मुताबिक, “लड़कियों के माता-पिता ने भी उनके मोबाइल फोन की लत को लेकर हाल के दिनों में नाराजगी जताई थी। परिवारवालों ने उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, इससे वे लड़कियां काफी व्यथित थीं और हो सकता है कि इस नाराजगी से ही उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया हो।” डीसीपी पाटिल के मुताबिक, इस गेम का असर इतना था कि लड़कियों की शिक्षा तक अनियमित हो गई थी। तीनों लड़कियां दो साल से स्कूल नहीं गई थीं। यहां तक कि पहले भी पढ़ाई में उनका प्रदर्शन लगातार खराब हो रहा था। उन्होंने कहा अभी यह साफ नहीं है कि मोबाइल फोन और गेमिंग की लत उन्हें कब लगी। हालांकि, यह तय है कि वे मोबाइल फोन के इस्तेमाल की पूरी तरह लती थीं। 

क्या है लव गेम, जिसकी लत लगने की आशंका?

पुलिस को आशंका है कि लड़कियों को कोरियन लव गेम की लत थी। यह एक ऑनलाइन, टास्क-आधारित इंटरैक्टिव गेम है, जिसमें खिलाड़ी एक वर्चुअल पार्टनर के साथ जुड़ते हैं। इस गेम में खिलाड़ी एक वर्चुअल साथी चुनते हैं, जो उनसे कोरियन भाषा में बात करता है, प्यार भरे संदेश भेजता है और उन्हें रोजाना नए काम (टास्क) सौंपता है। यह गेम मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से फैलता है।

इसकी लत क्यों लग जाती है?

भावनात्मक जुड़ाव: खिलाड़ी अपने वर्चुअल पार्टनर के साथ एक फैंटेसी दुनिया में जीने लगते हैं। गाजियाबाद की घटना में लड़कियों ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि ‘कोरिया ही हमारी जिंदगी है’, जो उनके गहरे मानसिक जुड़ाव को दर्शाता है।
पहचान का बदलना: अत्यधिक लत के कारण खिलाड़ी अपनी भारतीय पहचान को भूलकर खुद को कोरियन मानने लगते हैं। वे अपने कोरियन नाम भी रख लेते हैं।
दबाव और धमकियां: जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ता है, टास्क कठिन और व्यक्तिगत होते जाते हैं। कुछ मामलों में, निर्देशों को न मानने पर खिलाड़ियों को धमकाया भी जाता है, जिससे वे मानसिक तनाव और दबाव में आ जाते हैं।

कितना बड़ा खतरा हो सकता है ये गेम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विशेषज्ञ और पुलिस इस गेम की तुलना कुख्यात ब्लू व्हेल चैलेंज से कर रहे हैं, जो कि 2016-18 के बीच काफी वायरल हुआ था। तब कई रिपोर्ट्स से सामने आया था कि बच्चों ने कथित तौर पर इस गेम के टास्क पूरे करने के दौरान मौत तक को गले लगा लिया।दरअसल, इस तरह के गेम शुरुआती आसान कामों के बाद, बाद के टास्क जोखिम भरे या हानिकारक हो सकते हैं। इतना ही नहीं इसकी लत लगने पर बच्चे अपने दूसरे काम, जैसे- पढ़ाई, स्कूल जाना और खेल खेलना तक छोड़ देते हैं और परिवार से कटने लगते हैं।
 

संसद के गेट पर सियासी टकराव, राहुल गांधी ने बिट्टू को कहा ‘गद्दार दोस्त

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 नई दिल्ली।  संसद पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू आपस में ही भिड़ गए. जहां राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहा तो वहीं रवनीत ने राहुल पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘देश के दुश्मनों’ से कोई लेना-देना नहीं है. यह बातचीत उस दौरान हुई, जब राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी बीच बगल से रवनीत सिंह बिट्टू निकल रहे थे. राहुल गांधी ने उनसे हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया लेकिन रवनीत ने हाथ नहीं मिलाया. इस दौरान दोनों के बीच जुबानी जंग देखने को मिली. अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें साफ दिखाई दे रहा है कि प्रदर्शन के दौरान बगल से निकल रहे केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से हाथ मिलाने के लिए राहुल गांधी आगे बढ़ाते हैं. लेकिन रवनीत ने हाथ नहीं मिलाया. इस दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की तारीफ करते हुए रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ बोल दिया. यह सुनकर रवनीत बिट्टू ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ‘देश के दुश्मनों’ से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू के बीच जुबानी जंग देखने को मिली है. इससे पहले भी कई बार दोनों के बीच कहासुनी हो चुकी है।

कांग्रेसी सांसद क्यों कर रहे प्रदर्शन?

संसद में कार्यवाही के दौरान कुछ सांसदों ने स्पीकर पर पेपर उछाल दिए. इस दौरान स्पीकर ने विपक्ष के 8 सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया. निलंबन के विरोध में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्ष के सांसदों ने संसद के बाहर विरोध करना शुरू कर दिया. स्पीकर ने कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन, मणिक्कम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत सिंह औजला, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पाडोले, एस. वेंकटेशन और डीन कुरियाकोस को निलंबित किया है।

कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?

रवनीत सिंह बिट्टू वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं. बिट्टू कांग्रेस पार्टी से भी 3 बार सांसद रह चुके हैं, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन कर लिया. हालांकि उन्हें इस चुनाव में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें केंद्रीय मंत्री बना दिया. बिट्टू के पास रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी है।

रोहित-कोहली को 2027 वर्ल्ड कप में मौका मिलना चाहिए? MS Dhoni का जवाब हो गया वायरल

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MS Dhoni On Rohi-Virat: 7 फरवरी से भारत-श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में टी20 वर्ल्ड कप खेला जाना है. भारत इस फॉर्मैट में डिफेंडिंग चैंपियन है और कप्तान सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में टीम इंडिया खिताब बचाने उतरेगी. इस वर्ल्ड के साथ ही फैंस का ध्यान 2027 के वर्ल्ड कप पर भी है और उनके जेहन में एक ही सवाल है कि क्या 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की भारतीय टीम में पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली को मिलेगी या नहीं? भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से जब ये सवाल किया गया तो उनका जवाब सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है.

उम्र टीम में चयन का पैमाना नहीं- धोनी
दरअसल, धोनी से एक प्रोग्राम के दौरान पूछा गया कि क्या रोहित-कोहली को 2027 के वर्ल्ड कप के लिए टीम में जगह मिलनी चाहिए? इस पर धोनी ने कहा, क्यों नहीं…इसके बाद धोनी ने अपनी बात रखते हुए बताया कि टीम में सिलेक्शन का पैमाना क्या होना चाहिए. धोनी ने कहा, “मेरे मुताबिक उम्र कोई पैमाना नहीं है, हां..प्रदर्शन और फिटनेस पैमाना जरूर है. मुझे लगता है कि किसी को कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं है. लेकिन एक चीज स्पष्ट है कि सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए.”

आपको अनुभवी लोग कैसे मिलेंगे?- माही
भारतीय टीम को तीन आईसीसी टूर्नामेंट्स में जीत दिलाने वाले पूर्व कप्तान ने कहा,” निश्चित तौर पर उम्र पैमाना नहीं होना चाहिए. अगर आप 22 साल के हैं और फिट नहीं है तो फिर आप उस लायक नहीं हैं. अगर कोई 30 साल का हो गया है, तो हम ये तय नहीं कर सकते हैं कि वे खेलेंगे या नहीं… ये उनको तय करना होगा. अगर वे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और देश के लिए अच्छा करने का चाह रखते हैं तो क्यों नहीं खेलना चाहिए. फिर आपको अनुभवी लोग कैसे मिलेंगे. आप 20 साल के खिलाड़ी से वो उम्मीद नहीं कर सकते हैं, अगर वो सचिन तेंदुलकर नहीं है तो…अगर कोई परफॉर्म कर रहा है तो टीम में रहेगा… वरना नहीं.”

गरजा है रोहित-कोहली का बल्ला
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में रोहित ने शानदार बल्लेबाजी की थी. वहीं कोहली ने तीसरे मुकाबले में 74 रन की पारी खेली थी. कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में दो शतक और एक अर्ध शतक जड़ा था. इसके अलावा न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भी कोहली का बल्ला जमकर बोला था.

इसी तरह, रोहित शर्मा ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में रन बनाए थे. दोनों खिलाड़ियों ने विजय हजारे ट्रॉफी में भी शतक जड़ा था. ऐसे में दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें वर्ल्ड कप के लिए टीम में शामिल न करने का फैसला आसान नहीं होगा. हालांकि, अभी वर्ल्ड कप में एक साल से अधिक का वक्त है लेकिन दोनों खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर अक्सर ही बातें होती रहती हैं.