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Monday, August 24, 2026
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तीन बहनों की मौत से हिला देश

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन नाबालिग लड़कियों ने एक अपार्टमेंट की नौंवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। शुरुआत में लोगों को यह आत्महत्या का एक सामान्य मामला लगा, लेकिन जब पुलिस ने इस जांच की तो सामने आया कि यह आत्महत्या किसी अवसाद या परेशानी के चलते नहीं, बल्कि एक लत की वजह से थी, जिसे छोड़ने के बजाय लड़कियों ने मौत को गले लगाना सही समझा। 

आइये जानते हैं कि गाजियाबाद में तीन लड़कियों की मौत के मामले में पुलिस की जांच अभी कहां तक पहुंची है और इसके पीछे क्या वजह सामने आई है?

गाजियाबाद का यह केस है क्या, बच्चियों की कब-कैसे हुई मौत?

मामला गाजियाबाद के टीलामोड़ थानाक्षेत्र इलाके का है। यहां 3 फरवरी (मंगलवार) देर रात करीब दो बजे तीन नाबालिग लड़कियां अचानक एक अपार्टमेंट के नौंवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट की खिड़की से कूद गईं। जब यह घटना हुई, तब लड़कियों के माता-पिता दूसरे कमरे में सो रहे थे। लड़कियों की उम्र 16, 14 और 12 वर्ष थी। पुलिस जब जांच के लिए पहुंची तो यह साफ नहीं हुआ कि बच्चियों के आत्महत्या की क्या वजह है। इसके बाद उनके परिजनों से पूछताछ शुरू की गई। परिवार के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, ‘रात करीब 2:15 बजे सूचना मिली कि भारत सिटी में 9वीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियां कूद गईं। मौके पर तीन बच्चियों की गिरने के कारण मौत हो गई। तीनों को लोनी के अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। किशोरियों के पिता ऑनलाइन ट्रेडिंग का करते हैं और तीन वर्ष से भारत सिटी सोसायटी में किराये पर रह रहे हैं, मूल रूप से दिल्ली निवासी हैं।’ 

कैसे पता चला लड़कियों ने आत्महत्या की?

पुलिस ने जब घटनास्थल की छानबीन की तो उसे किशोरियों के कमरे से आठ पन्ने का एक कथित सुसाइड नोट मिला। इस सुसाइड नोट में बच्चियों की हैडराइटिंग में सुसाइड करने के लिए अपने माता-पिता से माफी मांगी गई है। इसमें लिखा है- ‘इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो क्योंकि ये सब सच है। आई एम सॉरी, पापा।’ सुसाइड नोट में एक इमोजी भी बना है, जिसमें एक लड़की रोते हुए दिखाई गई है।’

‘पापा सॉरी…’, रोती हुई इमोजी के साथ पत्र में ‘डायरी’ का जिक्र; गाजियाबाद की तीन बहनों की सुसाइड की कहानी

गाजियाबाद के डीसीपी निमिष पाटिल ने कहा, “अभी तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियों ने आत्महत्या की है। हमें एक नोट भी प्राप्त हुआ है, जिसकी आधिकारिक जांच की जा रही है। जांच में किसी एप का नाम नहीं है, लेकिन नोट में लिखा है कि लड़कियां कोरियन कल्चर से प्रभावित थीं। उसी के चलते उन्होंने आत्महत्या की है। लड़कियों के पिता की दो शादियां हुई थी, इनकी माएं अलग-अलग हैं।” 

जांच में कैसे जुड़ा कोरियाई गेम की लत का एंगल?

एसीपी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, शुरुआती जांच में लड़कियों के एक कोरियाई टास्क-आधारित इंटरएक्टिव- ‘लव गेम’ की लत में पड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने बताया कि लड़कियों को ऑनलाइन गेमिंग की लत कोरोनावायरस महामारी में लगे लॉकडाउन के दौरान लगी थी। तीनों बहनें साथ ही कोरियाई गेम खेलती थीं। धीरे-धीरे वे हर काम एक साथ करने लगीं थीं। नहाने से लेकर खाना-पीना, सोना और स्कूल जाने तक। पुलिस के मुताबिक, “लड़कियों के माता-पिता ने भी उनके मोबाइल फोन की लत को लेकर हाल के दिनों में नाराजगी जताई थी। परिवारवालों ने उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, इससे वे लड़कियां काफी व्यथित थीं और हो सकता है कि इस नाराजगी से ही उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया हो।” डीसीपी पाटिल के मुताबिक, इस गेम का असर इतना था कि लड़कियों की शिक्षा तक अनियमित हो गई थी। तीनों लड़कियां दो साल से स्कूल नहीं गई थीं। यहां तक कि पहले भी पढ़ाई में उनका प्रदर्शन लगातार खराब हो रहा था। उन्होंने कहा अभी यह साफ नहीं है कि मोबाइल फोन और गेमिंग की लत उन्हें कब लगी। हालांकि, यह तय है कि वे मोबाइल फोन के इस्तेमाल की पूरी तरह लती थीं। 

क्या है लव गेम, जिसकी लत लगने की आशंका?

पुलिस को आशंका है कि लड़कियों को कोरियन लव गेम की लत थी। यह एक ऑनलाइन, टास्क-आधारित इंटरैक्टिव गेम है, जिसमें खिलाड़ी एक वर्चुअल पार्टनर के साथ जुड़ते हैं। इस गेम में खिलाड़ी एक वर्चुअल साथी चुनते हैं, जो उनसे कोरियन भाषा में बात करता है, प्यार भरे संदेश भेजता है और उन्हें रोजाना नए काम (टास्क) सौंपता है। यह गेम मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से फैलता है।

इसकी लत क्यों लग जाती है?

भावनात्मक जुड़ाव: खिलाड़ी अपने वर्चुअल पार्टनर के साथ एक फैंटेसी दुनिया में जीने लगते हैं। गाजियाबाद की घटना में लड़कियों ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि ‘कोरिया ही हमारी जिंदगी है’, जो उनके गहरे मानसिक जुड़ाव को दर्शाता है।
पहचान का बदलना: अत्यधिक लत के कारण खिलाड़ी अपनी भारतीय पहचान को भूलकर खुद को कोरियन मानने लगते हैं। वे अपने कोरियन नाम भी रख लेते हैं।
दबाव और धमकियां: जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ता है, टास्क कठिन और व्यक्तिगत होते जाते हैं। कुछ मामलों में, निर्देशों को न मानने पर खिलाड़ियों को धमकाया भी जाता है, जिससे वे मानसिक तनाव और दबाव में आ जाते हैं।

कितना बड़ा खतरा हो सकता है ये गेम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विशेषज्ञ और पुलिस इस गेम की तुलना कुख्यात ब्लू व्हेल चैलेंज से कर रहे हैं, जो कि 2016-18 के बीच काफी वायरल हुआ था। तब कई रिपोर्ट्स से सामने आया था कि बच्चों ने कथित तौर पर इस गेम के टास्क पूरे करने के दौरान मौत तक को गले लगा लिया।दरअसल, इस तरह के गेम शुरुआती आसान कामों के बाद, बाद के टास्क जोखिम भरे या हानिकारक हो सकते हैं। इतना ही नहीं इसकी लत लगने पर बच्चे अपने दूसरे काम, जैसे- पढ़ाई, स्कूल जाना और खेल खेलना तक छोड़ देते हैं और परिवार से कटने लगते हैं।
 

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