भारत के पास अब दुनिया की ग्लोबल जीडीपी के 70 प्रतिशत हिस्से तक सीधी पहुंच

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नई दिल्ली। भारत के पास अब दुनिया की ग्लोबल जीडीपी के 70 प्रतिशत हिस्से तक सीधी पहुंच है और ज्यादातर वैश्विक बाजारों में भारतीय निर्यात पर जीरो ड्यूटी है। यह बयान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को दिया। राष्ट्रीय राजधानी में एक इवेंट में गोयल ने कहा कि भारत ने पिछले तीन वर्षों में 38 देशों के साथ नौ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किए हैं। इसमें उच्च आय वर्ग वाले देश भी शामिल हैं और दुनिया के ज्यादातर विकसित बाजारों तक अब भारतीय निर्यातकों की पहुंच है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 27-राष्ट्रों के ब्लॉक यूरोपीय संध, चार-राष्ट्र के ब्लॉक ईएफटीए, यूके, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत ट्रेड डील कर चुका है, जबकि जापान और कोरिया आसियान देशों के साथ व्यापार समझौते पहले संपन्न हुए थे।
गोयल ने भारत के मेडटेक सेक्टर के आग्रह किया कि वह घरेलू बाजार से आगे बढ़कर देखें और भारत के व्यापार समझौतों का लाभ उठाएं, जो कि दुनिया की 70 प्रतिशत जीडीपी तक पहुंच प्रदान करते हैं।
मंत्री ने कहा कि सस्ती और स्केलेबल मेडिकल टेक्नोलॉजी भारत के दूरदराज के हिस्सों तक पहुंचने में मदद कर सकती है और अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के वैश्विक बाजारों तक भी पहुंच बना सकती है।
मंत्री के अनुसार, स्टार्टअप को खुद को घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रखना चाहिए और वैश्विक मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेना चाहिए।
उन्होंने आश्वासन दिया कि वाणिज्य मंत्रालय प्रतिनिधिमंडलों का समर्थन करेगा और 190 से अधिक देशों में भारत के मिशन नवप्रवर्तकों की सहायता के लिए उपलब्ध हैं। 

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 पीएम मोदी और शाह से मिली सुनेत्रा पवार……..शरद गुट के साथ विलीनीकरण का मुद्दा ठड़े बस्ते में 

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मुंबई। महाराष्ट्र की नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अपने पति और एनसीपी नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पदभार संभालने वाली सुनेत्रा का यह पहला दिल्ली दौरा है। 
सुनेत्रा के साथ इस दौरे पर उनके दोनों बेटे, पार्थ और जय, तथा एनसीपी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अजित पवार के निधन पर गहरा दुख जताया और सुनेत्रा पवार को उनके नए उत्तरदायित्व के लिए केंद्र के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया। 
इन चर्चाओं के विपरीत, एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेताओं ने स्पष्ट किया कि शरद पवार गुट के साथ विलीनीकरण का मुद्दा वर्तमान एजेंडे में शामिल नहीं है। पार्टी के कई विधायक विलीनीकरण के विचार का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
एनसीपी का अजित पवार गुट मर्जर का विरोध जारी रखे हुए है। अजित के साथ जुड़े नेताओं ने किसी भी तरह के कंसोलिडेशन के साथ जाने से मना किया है। दौरे के दौरान एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के मर्जर के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई, और यह एजेंडा में भी नहीं था।
बात दें कि सुनेत्रा पवार ने अभी तक राज्यसभा से इस्तीफा नहीं दिया है। वह फिलहाल अपने अगले पॉलिटिकल कदम के बारे में “वेट एंड वॉच” अप्रोच अपना रही हैं। वहीं सुनेत्रा को नेशनल प्रेसिडेंट बनाने पर पार्टी में आम सहमति है।
नेशनल प्रेसिडेंट बनाने का प्रोसेस फरवरी के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद है। इन कदमों को फॉर्मल बनाने के लिए मुंबई में नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग होगी। वहीं खबर है कि पार्टी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने को लेकर पॉजिटिव है।

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पश्चिम बंगाल  में महिला नर्स की निपाह वायरस संक्रमण के बाद मौत 

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उत्तर 24 परगना । पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में 25 वर्षीय  महिला नर्स की निपाह वायरस संक्रमण के बाद मौत हो गई। राज्य के हालिया इतिहास में यह निपाह से जुड़ी पहली मृत्यु बताई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, नर्स की स्थिति पिछले कुछ दिनों से बेहद नाजुक थी। भले ही हाल में उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन शारीरिक हालत में सुधार नहीं हो सका। उन्हें लंबे समय तक क्रिटिकल केयर यूनिट  में रखा गया था। हालत बिगड़ने पर बुधवार को वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया, जहां गुरुवार शाम करीब 4 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसी अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के दो सदस्यों में निपाह संक्रमण की पुष्टि हुई थी। दोनों को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया था। जनवरी में एक पुरुष नर्स पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया, लेकिन महिला नर्स की हालत लगातार गंभीर बनी रही। निपाह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने की क्षमता रखता है, खासकर संक्रमित तरल पदार्थों के संपर्क से। संक्रमण की आशंका के बाद कई एशियाई देशों ने अतीत में हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाई थी, क्योंकि यह वायरस सीमापार भी फैल सकता है।
निपाह एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। फल खाने वाले चमगादड़ों को इसका मुख्य स्रोत माना जाता है। इनके लार, मल या पेशाब से दूषित खाद्य पदार्थ- खासकर खजूर का कच्चा रस- संक्रमण का माध्यम बन सकते हैं। सूअरों के जरिए भी इसके फैलने के मामले सामने आए हैं। संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से भी यह बीमारी आगे बढ़ सकती है, हालांकि यह कोविड-19 की तरह तेज़ी से नहीं फैलती। संक्रमण के लक्षण आमतौर पर 4 से 21 दिनों के भीतर दिखते हैं। शुरुआती संकेतों में बुखार, सिरदर्द और खांसी शामिल हैं, जो बाद में गंभीर निमोनिया या मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) का रूप ले सकते हैं। 

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‘विशेषाधिकार’ प्रस्ताव के सवाल पर मीडिया पर भड़के राहुल गांधी, लगाये गंभीर आरोप

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी गुरुवार को मीडियाकर्मियों के एक वर्ग पर अपना आपा खो बैठे, जब उन्होंने बजट सत्र के दौरान सत्ताधारी दल द्वारा उनके खिलाफ संभावित विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) को लेकर सवाल पूछा. राहुल ने पत्रकारों पर तंज कसते हुए पूछा, “क्या आपको आज के लिए यह कोड वर्ड दिया गया है?” उन्होंने मीडिया से अपने काम में निष्पक्ष रहने और अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने को कहा.

बुधवार 11 फरवरी 2026 को राहुल गांधी ने लोकसभा में एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ बड़े उद्योगपतियों के बीच कथित संबंधों का जिक्र किया था. उन्होंने कुछ आरोप लगाए थे. इसको लेकर काफी विवाद हुआ. पहले यह कहा जा रहा था कि सत्ता पक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाएगी.

 

 

हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि सत्तापक्ष उनके खिलाफ कोई प्रस्ताव ला रहा है या नहीं. सरकार के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि विशेषाधिकार प्रस्ताव की संभावना कम है. यह जानकारी आयी कि सरकार ने फैसला किया कि राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन नहीं लाया जाएग, बल्कि उनके भाषण के कुछ शब्दों/लाइनों को संसद की रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा, क्योंकि वे बिना प्रमाण के थे.

गुरुवार 12 फरवरी को जब राहुल संसद परिसर के बाहर अपनी कार की ओर जा रहे थे, तो पत्रकारों ने उनके खिलाफ संभावित विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) पर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उन्हें घेर लिया. इस बात से वे स्पष्ट रूप से भड़क गए और पत्रकारों से पूछा, “क्या आज के लिए ‘विशेषाधिकार’ कोड वर्ड है? क्या आज के लिए आपको यह शब्द दिया गया है?”

पत्रकारों पर और हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “कल शब्द ‘प्रमाणीकरण’ था, आज यह ‘विशेषाधिकार’ है. आपको कुछ निष्पक्ष काम करने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा, “आप जिम्मेदार लोग हैं, आप मीडिया के लोग हैं, आपकी जिम्मेदारी निष्पक्ष रहने की है. आप इस देश का अहित कर रहे हैं. क्या आप इसे पहचान नहीं पा रहे हैं?”

भाजपा ओवैसी को ‘अलादीन का चिराग’ बनाकर वोट बटोरती है: सीएम रेवंत रेड्डी

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हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी लाभ के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी को मुद्दा बनाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करती है।

सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में रेवंत रेड्डी ने कहा कि भाजपा की राजनीति में ओवैसी एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से भगवान राम का नाम लेती है, लेकिन राजनीतिक रणनीति में ओवैसी को केंद्र में रखती है। उनके अनुसार, भाजपा बार-बार ओवैसी का उल्लेख कर ध्रुवीकरण की राजनीति करती है।

हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी लाभ के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी को मुद्दा बनाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करती है।

सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में रेवंत रेड्डी ने कहा कि भाजपा की राजनीति में ओवैसी एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से भगवान राम का नाम लेती है, लेकिन राजनीतिक रणनीति में ओवैसी को केंद्र में रखती है। उनके अनुसार, भाजपा बार-बार ओवैसी का उल्लेख कर ध्रुवीकरण की राजनीति करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में ओवैसी को “अलादीन का जादुई चिराग” की तरह इस्तेमाल करती है और उनके नाम पर वोट मांगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा ओवैसी की विचारधारा की आलोचना करती है, तो फिर उन्हें राजनीतिक मुद्दा बनाकर बार-बार क्यों उछाला जाता है।

 

रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में AIMIM एक वैध राजनीतिक दल है, जो विभिन्न राज्यों में चुनाव लड़ता है और जहां समर्थन मिलता है वहां जीत दर्ज करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को केवल विरोध के आधार पर राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के बजाय नीतियों और विकास के मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर वैचारिक कमजोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं और व्यक्तियों को केंद्र में रखकर राजनीति करना “आइडियोलॉजिकल गरीबी” को दर्शाता है। उन्होंने तेलंगाना के मतदाताओं से सोच-समझकर मतदान करने की अपील भी की।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में ओवैसी को “अलादीन का जादुई चिराग” की तरह इस्तेमाल करती है और उनके नाम पर वोट मांगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा ओवैसी की विचारधारा की आलोचना करती है, तो फिर उन्हें राजनीतिक मुद्दा बनाकर बार-बार क्यों उछाला जाता है।

 

रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में AIMIM एक वैध राजनीतिक दल है, जो विभिन्न राज्यों में चुनाव लड़ता है और जहां समर्थन मिलता है वहां जीत दर्ज करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को केवल विरोध के आधार पर राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के बजाय नीतियों और विकास के मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर वैचारिक कमजोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं और व्यक्तियों को केंद्र में रखकर राजनीति करना “आइडियोलॉजिकल गरीबी” को दर्शाता है। उन्होंने तेलंगाना के मतदाताओं से सोच-समझकर मतदान करने की अपील भी की।

राहुल गांधी ने बोला तीखा हमला, भारत माता को बेचने का लगाया आरोप

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नई दिल्ली । संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि इस समझौते के जरिए सरकार ने डेढ़ अरब भारतीयों के भविष्य को बंधक रख दिया है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हितों और कपड़ा क्षेत्र के लिए अमेरिका के समक्ष पूरी तरह से समर्पण है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, आप सदन में इस करार का बचाव कैसे कर सकते हैं? क्या आपको शर्म नहीं आती? आपने भारत को बेच दिया है, आपने हमारी माँ भारत माता को बेच दिया है।
कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सोयाबीन, कपास, मक्का और लाल ज्वार उगाने वाले भारतीय किसानों को विशाल अमेरिकी मशीनीकृत खेतों की दया पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार सौदे के बाद भारत का कपड़ा उद्योग पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। राहुल गांधी ने केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश का महत्वपूर्ण डेटा अमेरिका को सौंप दिया है। उन्होंने सवाल किया कि कोई भी प्रधानमंत्री ऐसे समझौते के लिए तब तक तैयार नहीं हो सकता, जब तक कि उन पर कोई भारी दबाव न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास राजनीतिक वित्तीय ढांचे और विदेशी कानूनी मामलों से बचने के लिए देश के हितों की बलि दी गई है।अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एपस्टीन मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि तीस लाख फाइलें अब भी बंद हैं। उन्होंने कुछ उद्योगपतियों का नाम लेते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी निशाना साधा। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष और आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने उन्हें उन लोगों के नाम लेने से रोका जो सदन के सदस्य नहीं हैं।

सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सदन में स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है और कोई भी भारत को बेच या खरीद नहीं सकता। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में राहुल गांधी के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइलों के संदर्भों की चुनिंदा और गलत व्याख्या की जा रही है और केवल राजनीति चमकाने के लिए बार-बार इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि यह व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक कदम है।

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लोकसभा में हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित, राज्यसभा में भी उठा दलित उत्पीड़न का मुद्दा

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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। 
लोकसभा में आसन पर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी विराजमान थे। कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर वेल में आ गए। स्पीकर द्वारा बार-बार शांत रहने की अपील के बावजूद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी। हंगामे के चलते करीब सात मिनट  के बाद ही स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 
वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही की शुरुआत अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही। शून्यकाल के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने ओडिशा में एक दलित व्यक्ति के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने मध्य प्रदेश में हुई एक पुरानी घटना का भी जिक्र करते हुए सरकार से जवाब मांगा। हालांकि बाद में राज्यसभा में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा देखने को मिला। बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में लगातार हो रहे हंगामे से विधायी कार्य प्रभावित हो रहा है। विपक्ष जहां विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है, वहीं सरकार सुचारु रूप से सदन चलाने की अपील कर रही है।

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रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगा स्पीकर चैंबर का वीडिया कर दिया जारी  

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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार 12 फरवरी को लोकसभा में एक बार फिर हंगामे के चलते प्रश्नकाल नहीं चल सका। इसी बीच संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें लोकसभा स्पीकर के चैंबर में हुए कथित हंगामे का जिक्र किया गया है। रिजिजू ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों ने प्रियंका गांधी की मौजूदगी में स्पीकर को अपशब्द कहे। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है। खुद रिजिजू ने भी राहुल गांधी द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में प्रिविलेज मोशन लाने की बात कही थी। 

भाजपा सांसदों के तीखे बयान
बीजेपी सांसद रेखा शर्मा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं और बिना सोचे-समझे किसी का नाम लेकर आरोप लगा देते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना उचित कदम है। वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस देने की बात कही। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने उनकी सदस्यता समाप्त करने और आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की है।

प्रियंका गांधी ने आरोपों को झूठा बताया 
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिजिजू के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी ने स्पीकर को गाली नहीं दी। उन्होंने कहा कि एक-दो सांसद भावुक हो गए थे, लेकिन उन्हें उकसाने या बढ़ावा देने का आरोप पूरी तरह झूठ है। प्रियंका ने कहा कि वह चुपचाप बैठी थीं और अंत में शांतिपूर्वक अपनी बात रखी। 

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राइट टू हेल्थ पर चिकित्सा मंत्री के बयान से सियासत तेज, गहलोत का तीखा पलटवार

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जयपुर। राजस्थान में राइट टू हेल्थ एक्ट को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में गुरुवार को राइट टू हेल्थ को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा चुनावी फायदे के लिए जाते जाते कांग्रेस सरकार यह बिल लाई थी। चिकित्सा मंत्री के बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि मंत्री का बयान न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि गरीब लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा कि आज विधानसभा में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने ‘राइट टू हेल्थ’ पर बयान दिया कि इसकी जरूरत ही नहीं है। उनका यह बयान न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि बढ़ते मेडिकल खर्च से परेशान गरीब एवं मध्यम वर्ग के जख्मों पर नमक के समान है।

 

भाजपा सरकार राइट टू हेल्थ के नियम बनाने में विफल
उन्होंने कहा कि हमारी कांग्रेस सरकार ने यूनिवर्सल हेल्थकेयर योजनाएं जैसे चिरंजीवी योजना एवं निरोगी राजस्थान योजना लागू होने के बावजूद राइट टू हेल्थ की परिकल्पना की। जिससे किसी भी कारणवश आपातकालीन स्थिति में मरीज इलाज से वंचित न रहे। भाजपा सरकार राइट टू हेल्थ के नियम बनाने में विफल रही है और अब इस तरह की बहानेबाजी कर रही है।

मेडिकल लॉबी के सामने भाजपा सरकार का सरेंडर
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेशवासी देख रहे हैं कि जहां कांग्रेस सरकार राइट टू हेल्थ देकर उन्हें महंगे इलाज के खर्च से बचाने का इरादा रखती थी। वहीं, भाजपा सरकार मेडिकल लॉबी के सामने सरेंडर कर राइट टू हेल्थ तक को गलत बता रही है।
 

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने राज्यसभा में उठाया जातिगत भेदभाव का मुद्दा, बोले- सामाजिक न्याय संविधान की आत्मा 

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नई दिल्ली। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में जातिगत भेदभाव का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि दलितों, वंचितों और कमजोर वर्गों के उत्थान की बातें अक्सर की जाती हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इन्हें जमीन पर उतारने की ठोस पहल हो। सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा है और इसकी रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। 
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने ओडिशा की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इक्कीसवीं सदी में जब हम सामाजिक विकास और एकता की बात करते हैं, तब ऐसी घटनाएं हमें आईना दिखाती हैं। उन्होंने बताया कि ओडिशा के एक आंगनवाड़ी केंद्र में पिछले तीन महीनों से बहिष्कार चल रहा है, क्योंकि वहां भोजन एक दलित महिला हेल्पर और कुक द्वारा तैयार किया जा रहा है। समुदाय विशेष के कुछ लोग अपने बच्चों को वह भोजन देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक महिला का अपमान नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक चेतना की परीक्षा है।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की बुनियाद होते हैं। यदि वहां जातिगत पूर्वाग्रह को बढ़ावा मिलेगा, तो इसका असर बच्चों के मन और भविष्य पर पड़ेगा। छोटे बच्चों के सामने इस तरह का भेदभाव उनके भीतर विभाजन और नफरत के बीज बो सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21(क) के तहत शिक्षा के अधिकार और अनुच्छेद 47 के तहत राज्य की पोषण संबंधी जिम्मेदारी की भावना के खिलाफ बताया।
खड़गे ने कहा कि इस घटना को केवल एक सामाजिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसे कार्यस्थलों पर व्यापक जाति-आधारित भेदभाव के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में एक आदिवासी मजदूर के साथ हुई अमानवीय घटना, गुजरात में एक दलित सरकारी कर्मचारी की कथित उत्पीड़न के बाद आत्महत्या और चंडीगढ़ में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मृत्यु के बाद सामने आए संस्थागत भेदभाव के आरोपों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये घटनाएं दर्शाती हैं कि जातिगत पूर्वाग्रह समाज के साथ-साथ संस्थागत ढांचे में भी मौजूद है। 
संविधान का हो रहा उल्लंघन 
उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का स्पष्ट उल्लंघन है, जो समानता, भेदभाव निषेध और अस्पृश्यता उन्मूलन की गारंटी देते हैं। साथ ही, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम जैसे सख्त कानून भी ऐसे अपराधों को रोकने और दोषियों को दंडित करने के लिए मौजूद हैं।

ऐसे मामलों को गंभीरता से ले सरकार 
खड़गे ने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। जहां भी जातिगत भेदभाव की घटनाएं सामने आएं, वहां त्वरित और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने आंगनवाड़ी जैसे संवेदनशील संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत बताई, ताकि बच्चों के मन में बराबरी, सम्मान और सामाजिक समरसता के संस्कार विकसित हो सकें।

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