आज खत्म हो रही समयसीमा, 17 फरवरी को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

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डेस्क। तमिलनाडु के मतदाताओं के लिए राज्य की संशोधित मतदाता सूची से संबंधित सुधार के लिए मंगलवार अखिरी दिन हैं। मंगलवार शाम समय सीमा समाप्त होने के साथ ही अधिकारियों को उम्मीद है कि 17 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले सभी लंबित सत्यापन कार्य पूरे हो जाएंगे। एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद, अद्यतन मतदाता सूची में तमिलनाडु में लगभग 5.65 करोड़ पंजीकृत मतदाता दिखाए जाने की उम्मीद है।

बूथ स्तर के अधिकारियों की ओर से व्यापक जमीनी सत्यापन के बाद 19 दिसंबर को मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने के साथ प्रक्रिया शुरू हुई। मसौदा सूची जारी होने के बाद नागरिकों को 30 जनवरी तक ऑनलाइन पोर्टल और जिलों में आयोजित विशेष शिविरों के माध्यम से आपत्तियां दर्ज करने, सुधारों का अनुरोध करने या अपना नाम शामिल करवाने के लिए आवेदन करने का समय दिया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि लगभग 34 लाख लोगों ने अपने नाम में बदलाव, जोड़ या हटाव करने के लिए आवेदन जमा किए। इनमें पहली बार मतदान करने वाले, निवास स्थान बदलने वाले और नाम, पता या फोटो जैसी व्यक्तिगत जानकारी में सुधार चाहने वाले अन्य लोग शामिल थे। इसी दौरान, अधिकारियों ने कई प्रविष्टियों को गहन जांच के लिए चिह्नित किया।

मसौदा सूची में जिनके नाम थे लेकिन जिन्होंने आवश्यक सहायक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए थे, ऐसे लगभग 12 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। उनसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पहचान और पात्रता का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया। चुनाव अधिकारियों ने अब जमीनी जांच और दस्तावेज संग्रह को तेज कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आज की समय सीमा समाप्त होने से पहले ऐसे सभी मामलों का समाधान हो जाए। ईसीआई ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे जांच को शीघ्रता से पूरा करें ताकि अंतिम सूची में केवल पात्र मतदाताओं को ही शामिल किया जा सके।

नरवणे की किताब पर पेंगुइन इंडिया का नया बयान, प्री-ऑर्डर पर दी सफाई

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पूर्व थलसेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर चल रहे विवाद के बीच पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से एक और बयान जारी किया गया है। पब्लिशर ने मंगलवार को कहा कि किसी किताब या उसके प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होने की घोषणा को पब्लिकेशन नहीं माना जाना चाहिए। इसके साथ पब्लिकेशन हाउस ने कहा है कि प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब और पब्लिश हुई किताब एक ही बात नहीं हैं। 

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औवेसी ने सीएम सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की

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हैदराबाद। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। औवेसी ने यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट हो चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिख रहे है। पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान दे रहे हैं, जिसमें से कई बयान अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
हाल के महीनों में मुख्यमंत्री सरमा ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज किया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ाना है। ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया हालिया वीडियो, जिस वीडियो को एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और पॉइंट ब्लैंक शॉट और कोई दया नहीं जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।

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संसद में अखिलेश यादव बोले- लोहे पर पीतल चढ़ाकर भी बेटी की विदाई नहीं हो पाएगी

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में आम बजट पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए अमेरिका से डील, किसानों को राहत और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि सोने के भाव कहां पहुंच गए? अब तो चांदी तो दूर. यह सरकार चलती रही तो गरीब लोहे पर पीतल चढ़ाकर अपनी बेटी की विदाई नहीं कर पाएगा. उन्होंने कहा कि भाजपा के हर बजट एक बटा 20 मानते हैं और यह केवल पांच फीसदी लोगों के लिए है.

उन्होंने कहा कि सरकार बताये कि पहले डील तय हुई या फिर बजट. उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि जीरो बड़ा है या अठारह. उन्होंने अमेरिका के साथ हुई डील पर सवाल करते हुए कहा कि क्या डील ने आत्मनिर्भरता की परिभाषा बदल दी है? उन्होंने कहा कि यह बजट दिशाहीन है. इस बजट में कोई विजन नहीं है कि 2047 भारत विकसित बन जाएगा. इस सरकार से पहले ही उम्मीद नहीं थी. इस बजट में पीडीए के लिए कुछ नहीं है. ऐसा लग रहा है कि सरकार ने इनके बारे में सोचना छोड़ दिया है.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए कोई खास योजना नहीं है, जिससे उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों को मुख्य धारा से जोड़ी जाए. उन्होंने कहा कि आज भी किसानों को जो कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए, अभी तक सरकार नहीं दे पाई है. उन्होंने कहा कि दूध के उत्पादन पर एमएसपी की गारंटी कैसे देंगे. भाजपाई किसानों को लाभ नहीं पहुंचाना चाहते हैं. कुछ अदृश्य लोगों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि बजट में आम जनता का न तो जिक्र है और न ही फ्रिक रहता है. यदि फिक्र रहता तो किसानों को खाद समय पर मिल जाते, बीज समय पर मिल जाते. सरकार ने किसानों को अपने हाल पर छोड़ दिया है. अखिलेश यादव ने मणिकर्णिका घाट में अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़े जाने की आलोचना की और गंगा की सफाई पर भी सवाल उठाए.

 

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पटना पहुंचे नितिन नवीन बोले— आज की पीढ़ी कल्पना भी नहीं कर सकती कि जंगलराज में काम करना कितना मुश्किल था

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पटना। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सोमवार 9 फरवरी को नितिन नवीन पहली बार पटना पहुंचे। इस अवसर पर उनका भव्य स्वागत किया गया। बापू सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए नितिन नवीन भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह किन शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त करें, यह समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जताए गए भरोसे के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि वह इस जिम्मेदारी पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करेंगे। 
अपने संबोधन के दौरान नितिन नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जंगलराज के दौर में काम करना कितना मुश्किल था, यह आज की पीढ़ी शायद कल्पना भी नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, उस समय कार्यकर्ता घर-घर चुपचाप पर्चियां पहुंचाते थे। डर और अराजकता का माहौल था। हम लोगों ने बिहार को उस जंगलराज से निकालकर यहां तक पहुंचाया है। नितिन नवीन ने कहा कि भाजपा ने बिहार को विकास और सुशासन की राह पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में पिता के निधन के बाद वह राजनीति में आए थे और अब लगभग 20 साल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता से मिले संस्कारों ने यहां तक पहुंचाया है और वह उन्हें नमन करते हैं। 
यहां नितिन नवीन ने कहा, कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अब सिर्फ यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि बिहार का लड़का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया है, बल्कि संगठन को और मजबूत करने के लिए जमीन पर काम करना होगा। कार्यक्रम में मौजूद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नितिन नवीन का इस पद पर पहुंचना बिहार के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में 202 सीटों की जीत के बाद यह जिम्मेदारी मिलना पार्टी की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को और मजबूत करने का आह्वान किया और कहा कि अगला लक्ष्य पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और केरल में भाजपा की सरकार बनाना है। 
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो राष्ट्र के लिए काम करती है, जहां केवल सदस्यता नहीं बल्कि संबंध मायने रखते हैं। उन्होंने दोहरी इंजन सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने विकास के नए आयाम छुए हैं।
वहीं, बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने नितिन नवीन को बिहार की धरती का सपूत बताते हुए कहा कि भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे पार्टी की संगठनात्मक ताकत का प्रतीक बताया। 

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विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किया अविश्वास प्रस्ताव

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नई दिल्ली।   संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। मंगलवार को सचिवालय को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया गया है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि स्पीकर को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 94-सी के तहत लोकसभा सचिवालय को नोटिस दिया गया है।   विपक्षी सांसदों के पत्र के जवाब में भाजपा की महिला सांसदों ने खोला मोर्चा, स्पीकर से की ये मांग संसद में आज भी टकराव टलना मुश्किल, कार्यवाही चलाने को लेकर शर्तों पर फंसा पेंच संसद में साजिश: पीएम मोदी को सदन न आने की सलाह क्यों? सुरक्षा को लेकर स्पीकर की चिंता जायज; कटघरे में विपक्ष ‘अगर संसद में चर्चा नहीं हुई, तो विपक्ष को होगा नुकसान’, रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया: विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव, जानें नियम; पहले कब हुआ ऐसा?

नोटिस पर 120 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष के करीब 120 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस, डीएमके, सपा के सांसद शामिल हैं।

नोटिस में विपक्ष ने कहा है, लोकसभा स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोक रहे हैं। नोटिस में बताया गया कि अनुच्छेद 94(सी) के तहत नोटिस दिया गया है क्योंकि स्पीकर खुलेआम पक्षपात कर रहे हैं। 

विपक्ष के आठ सांसदों को मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया है; उन्हें केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किया जा रहा है।

कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति ही नहीं दी गई, जबकि यह उनका मौलिक अधिकार है।

कांग्रेस सांसद और चीफ व्हिप के सुरेश ने कई विपक्षी पार्टियों की तरफ से लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस दिया।

गौरतलब है कि टीएमसी के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही वे इस नोटिस का हिस्सा हैं। 

राहुल गांधी को न बोलने देने के मुद्दे पर संसद में हंगामा लोकसभा में राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्ष हंगामा कर रहा है।

दरअसल 2 फरवरी को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब में कथित तौर पर लिखी गई बातों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी को सदन में नहीं बोलने दिया। 
इसके बाद 4 फरवरी को पीएम मोदी का लोकसभा में संबोधन होना था, लेकिन इसे टाल दिया गया।

अगले दिन लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कई विपक्षी सांसदों का सदन में व्यवहार उग्र और लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं था। ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए उनका संबोधन रद्द कर दिया गया।

विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के दावे को खारिज कर दिया और स्पीकर के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। 

विपक्षी सांसदों ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर उन पर पक्षपाती व्यवहार करने का आरोप लगाया।

आईसीसी के सामने घुटने टेके, पर मंच से गीदड़भभकी जारी! नकवी ने आसिम मुनीर का नाम लेकर दिखाई झूठी अकड़

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भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच पर लंबे ड्रामे के बाद जब अंततः खेलने की सहमति बन गई, उसी समय पीसीबी अध्यक्ष और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने ऐसा बयान दे दिया जिसने नई बहस छेड़ दी। समझौते के कुछ घंटों पहले उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान पर किसी का दबाव नहीं है।उन्होंने कहा, ‘न मैं भारत और आईसीसी की धमकियों से डरता हूं, न पाकिस्तान की सरकार डरती है, और जहां तक फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर का सवाल है, आप उन्हें जानते ही हैं, वह कभी नहीं डरते।’ नकवी का यह बयान अब मजाक का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब अंत में मैदान में उतरना ही पड़ा, तब इस तरह की भाषा पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत नहीं बल्कि विरोधाभासी बनाती है।

ताकत का संदेश या सियासी मंच?

आसिम मुनीर का नाम पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से शक्ति और सैन्य प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में पेश किया जाता रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उन्हें फील्ड मार्शल बनाए जाने को वहां बड़े राजनीतिक संदेश की तरह प्रचारित किया गया, लेकिन खेल के विवाद में सेना के शीर्ष पद का उल्लेख करना कई विशेषज्ञों को असहज करने वाला कदम लगा। उनके मुताबिक, इससे यह संकेत गया कि क्रिकेट से ज्यादा यह घरेलू राजनीतिक दर्शकों को संदेश देने की कोशिश थी। पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देने के लिए जाना जाता है। अपने देश में मुनीर से आतंकवादी खत्म नहीं किए जा रहे और नकवी बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। इस्लामाबाद में हाल ही में विस्फोट में कई लोग मारे गए थे। मुनीर और नकवी (जो कि पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं) अपने लोगों की हिफाजत कर नहीं पा रहे और दुनिया भर की बातें करने चले हैं। 

पहले सख्ती, फिर यू-टर्न

हफ्तों तक बहिष्कार, शर्तें और बयानबाजी चलती रही। मगर आखिरकार बातचीत, राजनयिक संपर्क और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान को तय कार्यक्रम मानना पड़ा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुआई में चर्चा के बाद टीम को 15 फरवरी को खेलने की अनुमति दी गई। सरकार ने इसे बहुपक्षीय संवाद का नतीजा बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भावना को बनाए रखना जरूरी था, लेकिन सवाल यही उठा- अगर खेलना ही था, तो फिर इतनी तीखी बयानबाजी किसके लिए? इतना ड्रामा किसके लिए?
 
आईसीसी ने क्या कहा

आईसीसी ने अपने स्तर पर हुई बैठकों को सकारात्मक बताया। माहौल को रचनात्मक कहा गया और किसी सजा की बात नहीं की गई। यानी अंत में मामला बातचीत से सुलझा, न कि दहाड़ से। साफ हो गया कि गीदड़भभकियों से न तो समाधान निकलता है और न ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई प्रभावित होता है, उल्टा मजाक जरूर बनता है, आपका भी और आपके देश का भी। जिस बांग्लादेश के मुद्दे पर पाकिस्तान ने सख्ती का रुख दिखाने की कोशिश की, वही आखिरकार मैच खेलने के पक्ष में नजर आया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी ऊंची आवाज किसके लिए थी।

25% अतिरिक्त टैरिफ हटाने के बाद ट्रंप का भारत पर सख्त एक्शन, लागू किया कड़ा निगरानी तंत्र

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नई दिल्‍ली। रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर लगे 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हट गए हैं। अंतरिम व्‍यापार समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश जारी किए हैं। इसमें भारत को तत्काल यह राहत दी गई है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस राहत से कहीं ज्‍यादा महत्वपूर्ण वहां सख्त निगरानी तंत्र है जो इसके साथ आया है। एक जियो रणनीतिकार ने इस लेकर पोस्ट किया है। अपने पोस्ट में उन्‍होंने कहा कि यह आदेश अमेरिकी वाणिज्य मंत्री को भारत के तेल स्रोत को ट्रैक करने का काम सौंपता है। इससे एक्‍शन के लिए एक साफ ट्रिगर बनता है। ट्रंप के ऑर्डर सशर्त हैं। इसका मतलब है कि शर्त टूटने पर 25 प्रतिशत टैरिफ की वापसी हो सकती हैं।
जानकार ने लिखा, रूसी तेल पर ट्रंप के कार्यकारी आदेश में असली चुभन इसके निगरानी जनादेश में निहित है। यह औपचारिक रूप से वाणिज्य मंत्री को भारतीय तेल आयात पर नजर रखने का काम सौंपता है जो स्पष्ट ट्रिगर बनाता है। यह पता चलने पर कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात फिर से शुरू कर दिया है, 25 प्रतिशत अतिरिक्‍त (दंडात्मक) टैरिफ वापस लागू हो सकता है।
जानकार ने चेतावनी दी कि अप्रत्यक्ष रूप से शब्द का समावेश प्रवर्तन के दायरे को काफी हद तक बढ़ा देता है। जानकार ने बताया कि रियायती रूसी यूराल क्रूड को बाजार-मूल्य वाले अमेरिकी तेल से बदलना भारत के तेल आयात बिल में सालाना 4 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी कर सकता है। यह लंबी परिवहन दूरी के कारण और भी महंगा होगा है। उन्‍होंने कहा, वॉशिंगटन का इरादा साफ है…भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ज्‍यादा महंगा और भौगोलिक रूप से दूर सप्‍लायर अमेरिका से जोड़ना।
अमेरिका ने कहा है कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात बंद करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की है। इस कदम से वॉशिंगटन ने पिछले अगस्त में भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जारी कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत ने अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग का विस्तार करने के लिए अमेरिका के साथ एक ढांचे के लिए भी प्रतिबद्धता जाहिर की है। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया है कि टैरिफ रोलबैक सशर्त है।
रणनीतिकार ने बताया कि कार्यकारी आदेश में अमेरिका भारत के तेल स्रोत पर बारीकी से नजर रखेगा। उन्‍होंने कहा, वाणिज्य मंत्री, राज्य मंत्री, वित्त मंत्री और किसी भी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के साथ समन्वय में जिसे वाणिज्य मंत्री उचित समझता है, यह निगरानी करेगा कि क्या भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात फिर से शुरू करता है, जैसा कि कार्यकारी आदेश 14329 की धारा 7 में परिभाषित है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की ओर से एक निर्धारण आगे की कार्रवाई को ट्रिगर कर सकता है। अगर वाणिज्य मंत्री को पता चलता है कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात फिर से शुरू किया है, तब राज्य मंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री, गृह मंत्री, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए राष्ट्रपति के सहायक, आर्थिक नीति के लिए राष्ट्रपति के सहायक और व्यापार और विनिर्माण के लिए राष्ट्रपति के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार के साथ परामर्श में यह सिफारिश करेगा कि क्या और किस हद तक मुझे भारत के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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‘ओ रोमियो’ में नेशनल अवॉर्ड विनर अभिनेता और इस एक्ट्रेस ने फ्री में किया काम, विशाल भारद्वाज का बड़ा खुलासा

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मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्में बनाने वाले निर्देशक विशाल भारद्वाज अब ‘ओ रोमियो’ लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म में एक बार फिर विशाल भारद्वाज शाहिद कपूर के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, फिल्म में एक बड़ी स्टारकास्ट नजर आएगी। इसमें नाना पाटेकर, अविनाश तिवारी, तृप्ति डिमरी, दिशा पाटनी, तमन्ना भाटिया और विक्रांत मैसी जैसे कलाकारों के नाम शामिल हैं। अब विशाल भारद्वाज ने फिल्म से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है, जिसमें उन्होंने उन कलाकारों के बारे में बताया जिन्होंने फिल्म में बिना एक भी पैसा लिए काम किया है।

विक्रांत ने नहीं ली कोई फीस

फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार, विशाल भारद्वाज ने बताया कि विक्रांत मैसी ने ‘ओ रोमियो’ के लिए कई साल पहले हामी भरी थी। उस समय जब अभिनेता अभी भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना रहे थे। तब से, विक्रांत के करियर में काफी बदलाव आया है, खासकर ’12वीं फेल’ की जबरदस्त सफलता के बाद। हालांकि, जब विशाल ने उनसे दोबारा संपर्क किया, तो विक्रांत ने अपनी पुरानी बात का सम्मान करते हुए कोई भी फीस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने निर्देशक को बताया कि ‘मकबूल’ फिल्म ने उन्हें सिनेमा में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया था और इस फिल्म ने उनकी जिंदगी बदल दी थी। उन्होंने कहा कि यह भूमिका निभाना उनके लिए एक ट्रिब्यूट जैसा था। व्यस्त कार्यक्रम और बढ़ती मांग के बावजूद विक्रांत ने फिल्म के लिए लगभग आठ से नौ दिनों तक शूटिंग की। लेकिन एक रुपए फीस नहीं ली।

तमन्ना ने भी फ्री में किया काम

विशाल भारद्वाज ने यह भी खुलासा किया कि विक्रांत के अलावा तमन्ना भाटिया ने भी एक भी पैसा लिए बिना ‘ओ रोमियो’ में काम करने के लिए सहमति दी। हालांकि, बजट की कमी एक कारण थी, लेकिन उनका निर्णय वित्तीय कारणों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था। हालांकि, दोनों ही कलाकारों की भूमिका छोटी है, लेकिन कहानी में इसका काफी महत्व है, जिससे एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आता है। तमन्ना ने तुरंत इस भूमिका के लिए हामी भर दी और लगभग 12 दिनों तक शूटिंग की, जो मूल योजना से कहीं अधिक थी। अपने किरदार की तैयारी के लिए तमन्ना ने वर्कशॉप भी किए। विशाल भारद्वाज ने इन दोनों ही कलाकारों की उदारता के लिए उनका आभार भी जताया है।

13 फरवरी को रिलीज होगी ‘ओ रोमियो’

विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित ‘ओ रोमियो’ हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीन्स ऑफ बॉम्बे’ पर आधारित है। फिल्म में शाहिद कपूर का किरदार मुंबई के गैगस्टर हुसैन उस्तरा से प्रेरित बताया जा रहा है। उनके साथ तृप्ति डिमरी फिल्म में प्रमुख भूमिका में हैं। इसके अलावा फिल्म में नाना पाटेकर, दिशा पटानी, अविनाश तिवारी और फरीदा जलाल भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

पाक एजेंट आरोप पर बोले गौरव गोगोई— मुझे मजबूर किया गया तो चुप नहीं रहूंगा

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गुवाहाटी। असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर लगाए गए ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ के आरोपों पर अब गोगोई ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को न सिर्फ अस्वीकार्य बताया, बल्कि इसे राजनीतिक शिष्टाचार की सभी सीमाओं को पार करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि मुझे मजबूर किया तो फिर मैं चुप नहीं रहूंगा।  
दरअसल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की वर्ष 2013 की पाकिस्तान यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके वीजा में लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जाने की अनुमति थी, जबकि उन्होंने तक्षशिला का दौरा किया, जो पंजाब के रावलपिंडी जिले में स्थित है। मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी कहा कि रावलपिंडी एक हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र है, जहां पाकिस्तानी सेना का जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) मौजूद है और वहां आम नागरिकों का प्रवेश आसान नहीं होता। ऐसे में यह दौरा किसी संस्थागत व्यवस्था के बिना संभव नहीं हो सकता। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया। 
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस एसआईटी रिपोर्ट का हवाला दिया था, उसे छह महीने तक दबाकर रखा गया, क्योंकि सरकार उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश करने में असफल रही। गोगोई ने सवाल किया कि यदि यह मामला वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, तो मुख्यमंत्री इतने समय तक चुप क्यों बैठे रहे। गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि असम में कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, जब हमने मुख्यमंत्री के परिवार के पास कथित रूप से 12 हजार बीघा जमीन होने का मुद्दा उठाया, तभी से यह पूरा नाटक शुरू हुआ। उन्होंने पाकिस्तान से किसी भी तरह के संबंधों के दावों को सिरे से खारिज किया।
मुख्यमंत्री द्वारा उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के साथ संबंधों के आरोप पर भी गोगोई ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी काम के सिलसिले में पाकिस्तान गई थीं और वह 2013 में 10 दिन की सामान्य यात्रा पर उनके साथ गए थे, जिसमें कुछ भी गुप्त या गैरकानूनी नहीं था। गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर उनके नाबालिग बच्चों को राजनीति में घसीटने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई नेताओं के बीच होनी चाहिए, बच्चों को इसमें शामिल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, मुझे ऐसी स्थिति में मजबूर न करें, जहां मुझे जवाब देना पड़े। गोगोई ने यह भी कहा कि यह मामला इतना गंभीर है कि सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

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News Desk