असम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित वीडियो से बढ़ा राजनीतिक टकराव

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गुवाहाटी। असम (Assam) में तथाकथित “मिया” मुसलमानों को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में एक एआई-निर्मित वीडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसमें मुख्यमंत्री (Himanta Biswa Sarma) को कथित तौर पर मुस्लिम पहचान वाले लोगों पर निशाना साधते हुए दिखाया गया था।

यह वीडियो राज्य इकाई Bharatiya Janata Party के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था, जिसके बाद विपक्ष ने इसे “भड़काऊ” बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने पर वीडियो हटा लिया गया और पार्टी ने कहा कि इसे बिना उचित अनुमति के पोस्ट किया गया था।

 

क्या है पूरा विवाद

 

सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो में “विदेशी-मुक्त असम” और “बांग्लादेशियों को कोई माफी नहीं” जैसे संदेश दिखाई दिए। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह सामग्री सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाली है।

मुख्य विपक्षी दल Indian National Congress ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जबकि वाम दलों—Communist Party of India (Marxist) और Communist Party of India—ने मामले को लेकर अदालत का रुख किया।
बताया गया कि वीडियो में दिखाया गया एक चेहरा कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi से मिलता-जुलता था, जो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री Tarun Gogoi के पुत्र हैं।

मुख्यमंत्री और बीजेपी की सफाई

विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उनका विरोध “असमिया मुसलमानों” से नहीं, बल्कि कथित तौर पर Bangladesh से अवैध रूप से आने वाले लोगों से है। पार्टी की ओर से भी बयान जारी कर कहा गया कि वीडियो “अपरिपक्व तरीके” से साझा हुआ और जिम्मेदार पदाधिकारी को हटा दिया गया है।

‘मिया’ शब्द क्यों बना राजनीतिक मुद्दा

असम में “मिया” शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर बंगाली-भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इसे कई लोग अपमानजनक मानते हैं। इस समुदाय पर लंबे समय से अवैध प्रवास के आरोप लगाए जाते रहे हैं। नागरिकता, मतदाता सूची और भूमि अतिक्रमण जैसे मुद्दों के साथ यह बहस जुड़ती रही है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

यह पहली बार नहीं है जब राज्य की राजनीति में इस तरह की सामग्री को लेकर विवाद हुआ हो।
पिछले वर्ष भी एआई से तैयार एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें कथित तौर पर “घुसपैठ” का दृश्य दिखाया गया था। उस मामले में भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद सामग्री हटानी पड़ी थी। इससे जुड़े मामलों पर Supreme Court of India तक याचिकाएं पहुंच चुकी हैं।

जनसंख्या और राजनीतिक समीकरण

2011 की जनगणना के अनुसार असम में मुसलमानों की आबादी लगभग 34% थी, जो अब विभिन्न अनुमानों में अधिक बताई जाती है।
राज्य के कई सीमावर्ती जिले मुस्लिम-बहुल हैं, और इन्हीं इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान तथा नागरिकता से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक राजनीतिक बहस का कारण बने हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की क्या राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा सिर्फ असम की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव पड़ोसी राज्य West Bengal की राजनीति तक जोड़कर देखा जा रहा है। पहचान, प्रवास और मतदाता आधार से जुड़े सवालों को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

आगे क्या?

विवादित वीडियो को हटाया जा चुका है और पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच जारी है।
हालांकि, “मिया” पहचान, अवैध प्रवास और नागरिकता जैसे मुद्दे असम की राजनीति में आने वाले समय में भी प्रमुख बने रहने के संकेत दे रहे हैं।

जयपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने 8 महीने की मासूम की हत्या की

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जयपुर: राजधानी के मालपुरा गेट थाना इलाके में एक हैवान पिता ने अपनी मात्र 8 महीने की मासूम बेटी की कैंची से गला काटकर हत्या कर दी. इसके बाद आरोपी ने शव को कंबल में छुपाकर खुद भी आत्महत्या करने का प्रयास किया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. जयपुर (पूर्व) डीसीपी संजीव नैन ने बताया कि लालापुरवा (उत्तर प्रदेश) निवासी शादाब मोहम्मद पर अपनी बेटी की हत्या का आरोप है. ये घटना 6 फरवरी की है, लेकिन पुलिस ने आरोपी को आज गिरफ्तार करके घटना का खुलासा किया है. पुलिस अब उससे पूछताछ और मामले की जांच जारी है. बच्ची की मां ने मालपुरा गेट थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है.

ससुराल लौटने की बात पर शुरू हुआ विवाद: डीसीपी संजीव नैन ने बताया कि पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि उसके पिता उसे और उसकी 8 महीने की बेटी शहनाज को लालपुरवा से सांगानेर लेकर आए थे. दो दिन बाद आरोपी शादाब भी पुणे से आ गया और उनके साथ रहने लगा. 6 फरवरी को सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने पत्नी से ससुराल चलने को कहा. पत्नी ने तीन-चार दिन बाद चलने की बात कही तो कहासुनी हो गई और विवाद बढ़ गया.

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पत्नी से मारपीट, साले पर भी हमला: इसके बाद आरोपी ने पत्नी के साथ मारपीट की और गला दबाने का प्रयास किया. इस दौरान पीड़िता का छोटा भाई सोहिल बीच-बचाव करने आया तो शादाब ने केतली से उसके सिर पर हमला कर दिया. आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया और समझाइश की. लोगों के जाने के बाद शादाब मासूम बच्ची को कमरे में ले गया और कमरा बंद कर लिया.

कमरे में ले जाकर काटा बच्ची का गला: डीसीपी ने बताया कि कमरे में जाकर आरोपी ने कैंची से बच्ची का गला काटकर हत्या कर दी और खुद भी आत्महत्या करने का प्रयास किया. परिजनों और पड़ोसियों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर आरोपी को संभाला, लेकिन जब कंबल हटाकर देखा तो बच्ची लहूलुहान पड़ी थी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया और आरोपी को सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया. जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी शादाब मोहम्मद को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है. मामले में आगे की जांच जारी है.

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राज्यसभा में कांग्रेस के भीतर तकरार, खरगे और जयराम रमेश के बीच तीखी बहस

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नई दिल्ली। संसद (Parliament) के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा (Rajya Sabha) में कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) आपस में भिड़ गए। यह झगड़ा औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सामने आया, जब दोनों ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की बातों पर असहमति जताई।

विधेयक पर बहस
जयराम रमेश ने कहा कि बिल मजदूर विरोधी है, लेकिन विपक्ष को इसे समर्थन देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके तुरंत बाद खरगे ने उनके बयान का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बिल का समर्थन कभी नहीं कर सकता। खरगे के रुख के बाद विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि संशोधन विधेयक केवल तीन पुराने कानूनों को संहिता में वापस शामिल करने का प्रावधान है। नए श्रम कानूनों में सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम न करने का प्रावधान है, न्यूनतम मजदूरी अनिवार्य है और विश्व श्रम संगठन के मानकों के अनुरूप नियम हैं।

सोनिया गांधी ने दिया वाम का साथ
गुरुवार को संसद में कांग्रेस और वामपंथी दलों ने श्रम कानूनों के खिलाफ एकजुटता दिखाई। CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने ‘जीरो ऑवर’ में देशव्यापी आम हड़ताल का मुद्दा उठाया, और कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने उनके समर्थन में फॉर्म पर हस्ताक्षर किए। यह कदम आम तौर पर शून्यकाल में हस्ताक्षर न करने वाली सोनिया गांधी के लिए आश्चर्यजनक रहा और कांग्रेस तथा वामपंथी सदस्यों दोनों को चौंकाया।

 

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कचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आगामी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, 2026 के हिसाब से कचरा प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं करते.

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने यह बात भोपाल नगर निगम की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), सेंट्रल जोनल बेंच, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) को चुनौती दी गई थी. एनजीटी ने 31 जुलाई, 2023 और 11 अगस्त, 2023 के अपने विवादित आदेशों से भोपाल नगर निगम को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपये और 121 करोड़ रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया था.

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले बदलते कानूनी सिस्टम पर ध्यान देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (मैनेजमेंट और हैंडलिंग) रूल्स, 2000 को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 से बदल दिया गया था, जिनकी जगह अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 ने ले ली है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले हैं.

हालांकि, जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्राउंड लेवल पर लागू करने में कमी पर चिंता जताई. आदेश में कहा गया, “कोर्ट का मानना ​​है कि जमीनी स्तर पर कई कारणों से कानूनी प्रणाली से मनचाहा नतीजा नहीं मिल रहा है.”

नए नियमों को लागू करने को ‘अच्छा कदम’ बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि जब तक तैयारी का काम समय पर पूरा नहीं हो जाता, तब तक सिर्फ नए नियमों की अधिसूचना काफी नहीं होगी.

पीठ ने टिप्पणी की, “नए नियमों की शुरुआत, हालांकि एक स्वागत योग्य कदम है, अधिकारियों से प्रभावी तिथि निर्धारित होने से पहले काम पूरा करने की उम्मीद है, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं करेंगे.”

यह देखते हुए कि आगामी 2026 नियमों के अनुसार पर्याप्त बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना आवश्यक होगा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि 2026 नियमों के अनुसार अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाए.”

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने अपीलकर्ता भोपाल नगर निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा. कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन अधिकारियों को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए: अतिरिक्त मुख्य सचिव, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (मध्य प्रदेश) और प्रधान सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग (मध्य प्रदेश).

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, “अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह बदलाव करे और अगली सुनवाई के दिन या उससे पहले बदला हुआ केस टाइटल (मामले का विवरण) दे.”

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की है.

मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके

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मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) में पंचायत और नगर निकाय चुनाव (Panchayat and Municipal Elections) अब खत्म हो चुके हैं। चुनावों के खत्म होने के बाद ठाकरे बंधुओं की पार्टियों के बीच में एक बार फिर से तनाव देखने को मिल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए। हालांकि, उद्धव गुट (Uddhav Group) और भाजपा की तरफ से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है।

महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच उस समय से तनातनी चल रही है जब कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद, शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के समर्थन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महापौर चुन लिया गया।

राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथों लिया। कल्याण डोंबिवली स्थानीय निकाय में मनसे नेताओं द्वारा शिवसेना शिंदे गुट का समर्थन करने पर संजय राउत द्वारा की गई आलोचना का जिक्र कते हुए उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही आचरण माना जाता है लेकिन जब मनसे ऐसा करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है। देशपांडे ने दावा किया, “चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के प्रत्येक पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।”

मुंबई में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण हासिल करने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (उबाठा) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया।

देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है। इसी बीच, संजय राउत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। राउत ने संवाददाताओं से कहा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है और उसे स्थानीय शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के साथ अधिक गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी।

 

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एपस्टीन फाइल्स में नाम होने का दावा, CEO के उड़ गए होश

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नई दिल्ली। आईआईटी हैदराबाद के एक छात्र की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। वजह है ईमेल, जिसकी सब्जेक्ट लाइन ने सीधे सीईओ को चौंका दिया और इंटरनेट पर बहस छेड़ दी। लेगिट एआई के फाउंडर और सीईओ हर्षदीप रापाल को जो मेल मिला, उसकी सब्जेक्ट लाइन थी- आपका नाम एपस्टीन फाइलों में है। यह पढ़ते ही रापाल सन्न रह गए, लेकिन जब उन्होंने ईमेल खोला, तो कहानी कुछ और निकली। पहली ही लाइन थी- मजाक कर रहा था, मैं चाहता था कि आप मेल खोलें। यानी पूरा मामला सिर्फ अटेंशन पाने का था।
मेल भेजने वाला सीएसई का छात्र था उसने आगे लिखा कि कंपनी की वेबसाइट देखी और खासतौर पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स असिस्टेंट की अवधारणा में उसकी दिलचस्पी है। उसने अपना परिचय दिया, चर्चा की इच्छा जताई और अपना रिज्यूम भी भेजा। मकसद साफ तौर पर पेशेवर था, लेकिन शुरुआत इतनी चौंकाने वाली थी कि वही चर्चा का केंद्र बन गई। रापाल ने इस मेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया, छात्र का नाम छुपाते हुए साफ संदेश दिया- दोस्तों, कृपया ऐसा न करें। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी अनुबंधों के कारोबार में काम करती है, जो बेहद गंभीर क्षेत्र है। यहां जवाबदेही, स्वामित्व और पेशेवर रवैया सबसे अहम है। अगर पहला ईमेल ही ऐसे सब्जेक्ट और ओपनिंग मैसेज से भरा हो, तो ज्यादातर फाउंडर जवाब देना पसंद नहीं करेंगे।
पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने छात्र के तरीके को अपरिपक्व बताया। किसी ने कहा कि इस सोच के साथ, भले ही उम्मीदवार कितना भी कुशल क्यों न हो, नौकरी मिलना मुश्किल है तो किसी ने इसे गैर-गंभीर और अस्वीकार्य करार दिया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर साफ कर दिया-वायरल होने की कोशिश और प्रोफेशनल छवि बनाने में जमीन-आसमान का फर्क है। पहला ईमेल ही आपकी पहचान बनाता है। गलत शुरुआत और मौका शुरू होने से पहले ही खत्म।

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राम चरण और उपासना ने किया अपने जुड़वा बच्चों का नामकरण, बताया नाम का मतलब, बोले- ‘ये सिर्फ नाम नहीं…’

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राम चरण के परिवार में खुशियां दोगुनी हो गई हैं। कपल के घर में 31 जनवरी को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। अब अभिनेता राम चरण और उपासना कोनिडेला ने अपने जुड़वां बच्चों का नामकरण एक पारंपरिक नामकरण समारोह में किया, जिसमें परिवार और उनके करीबी दोस्त शामिल हुए।

रीति-रिवाजों के साथ किया नामकरण 

नामकरण समारोह में परिवार की परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों का खास ध्यान रखा गया। राम चरण ने बताया कि उनके लिए बच्चों का नाम रखना सिर्फ एक रस्म नहीं था, बल्कि एक बहुत ही निजी और आध्यात्मिक फैसला था।राम चरण ने वैरायटी से बातचीत में कहा, ‘बच्चों का नाम रखना हमारे लिए बहुत ही खास फैसला था। मैंने और उपासना ने इस बारे में काफी बातचीत की। हमारे माता-पिता भी इस फैसले का अहम हिस्सा थे। हमारी संस्कृति में बड़ों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन बहुत मायने रखता है।’

शिवराम और अनवीरा देवी रखा है नाम

उनके बेटे का नाम शिवराम रखा गया है। यह नाम भगवान शिव और भगवान राम से प्रेरित है। राम चरण ने बताया कि इस नाम में शक्ति, संयम, धर्म और करुणा का भाव जुड़ा है। साथ ही, यह नाम उनके पिता के जन्म के नाम ‘शिव शंकर वरा प्रसाद’ से भी जुड़ा हुआ है, जिससे परिवार की विरासत आगे बढ़ती है।वहीं बेटी का नाम अनवीरा देवी रखा गया है। इस नाम में साहस और नारी शक्ति की भावना है। राम चरण ने बताया, ‘वीरा का मतलब बहादुरी होता है और ‘अन’ इसे असीम बना देता है। ‘देवी’ शब्द हमने जानबूझकर जोड़ा है, ताकि यह याद रहे कि ताकत और सौम्यता साथ-साथ चल सकती हैं।’उन्होंने कहा कि उनके लिए ये नाम सिर्फ नाम नहीं हैं, बल्कि अपने बच्चों के लिए शक्ति, प्यार और हिम्मत की कामना हैं।

कौन थी ‘ओ रोमियो’ की असल सपना? हुसैन उस्तरा और दाउद से क्या रहा कनेक्शन? आखिर में मिली दर्दनाक मौत

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रिलीज के बाद से शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म ‘ओ रोमियो’ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ पर आधारित है। फिल्म में शाहिद कपूर ने एक माफिया डॉन हुसैन उस्तरा का रोल किया है। वहीं सपना उर्फ सपना दीदी के रोल में तृप्ति डिमरी नजर आ रही हैं। लेकिन असल में सपना दीदी कौन थीं? क्यों वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम को मारना चाहती थीं? जानिए सपना दीदी की असल कहानी? 

दाउद इब्राहिम से बदला था सपना दीदी का मकसद 

यह कहानी 80 के दशक के आखिरी वर्षों की है। सपना दीदी का असल नाम अशरफ था। वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम को मारना चाहती थीं। दरअसल, अशरफ उर्फ सपना दीदी के शौहर की हत्या दाउद इब्राहिम की करवाई थी।ऐसे में सपना की जिंदगी का एक ही मकसद था कि वह दाउद इब्राहिम को खत्म करे। इसके लिए वह हुसैन उस्तरा की मदद लेती है। हुसैन की दुश्मनी भी दाउद इब्राहिम से थी। ऐसे में सपना और हुसैन उस्तरा साथ मिलकर काम करते हैं। हुसैन उस्तरा, सपना को सीखाता है कि कैसे किसी आदमी को मारा जाता है। 

दाउद के काम को पहुंचाया नुकसान 

सपना दीदी ने चुपचाप दाउद इब्राहिम के काले साम्राज्य काे चुनौती दी। उसने अपना एक गैंग बनाया, जो दाउद के खिलाफ लड़ने में उसकी मदद करता था। सपना दीदी ने मुंबई में डी कंपनी के जुए के अड्डे, डांस बार और दूसरे कई बुरे काम बंद करवाए। उसने 1990 के दशक में शारजहां में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद इब्राहिम की हत्या की साजिश रची थी। लेकिन सपना दीदी का प्लान लीक हो गया। वह दाउद को नहीं मार सकी। 

दाउद के लोगों ने सपना दीदी को बेरहमी से मारा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1994 में दाउद इब्राहिम के गुड़ों ने सपना दीदी पर हमला किया। 22 बार चाकू मारा। सपना दीदी की कहानी यही पर खत्म हुई। वैसे फिल्म ‘ओ रोमियो’ में सपना और हुसैन उस्तरा के बीच एक लव स्टोरी भी दिखाई गई। जिस पर हुसैन उस्तरा के परिवार को आपत्ति है। 

हुसैन उस्तरा के परिवार को फिल्म ‘ओ रोमियो’ पर जताई थी आपत्ति

फिल्म ‘ओ रोमियो’ रिलीज हो चुकी है लेकिन इसकी रिलीज से पहले विवाद भी खड़ा हुआ। फिल्म ‘ओ रोमियो’ का एक गाना ‘हम तो तेरे ही लिए’ जब रिलीज हुआ था, इसमें सपना (तृप्ति डिमरी) और हुसैन उस्तरा (शाहिद कपूर) के बीच रोमांस दिखाया गया। इस बात पर हुसैन उस्तरा के परिवार को आपत्ति थी। एक मीडिया इंटरव्यू में हुसैन उस्तरा की बेटी ने कहा, ‘फिल्म में दिखाई गई कहानी गलत है।मेरे पिता ने सपना दीदी को ट्रेनिंग दी थी। वह उनके लिए बहन जैसी थीं। वह हमारे घर और हमारे ऑफिस आती थीं। सपना दीदी का कोई नहीं था। जब उनके पति की हत्या हुई, तो वह अकेली थीं। उनके कोई बच्चे नहीं थे। वह हर जगह मदद मांगने गईं। मेरे बाबा ने उनकी मदद की। दोनों ने मिलकर अपराधियों के खिलाफ काम किया। उनका तरीका गलत था लेकिन यह भी 28 साल पहले हुआ था। फिल्म उनकी इमेज को खराब करती है।’ 

राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘राइट टू रिकॉल’ का मुद्दा” जानिए किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (MP Raghav Chadha) ने बुधवार को संसद (Parliament) में ‘राइट टू रिकॉल’ पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करते हैं, तो वोटर्स को उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार होना चाहिए।

शून्यकाल के दौरान अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार है, वैसे ही काम न करने पर उन्हें अपने जनप्रतिनिधि को हटाने का हक भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा और नेताओं को जवाबदेह बनायेगा।”

राइट टू रिकॉल क्या है?
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर बताया कि राइट टू रिकॉल एक ऐसी प्रक्रिया है जो मतदाताओं को किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल खत्म होने से पहले उन्हें पद से हटाने का अधिकार देती है। सरल शब्दों में, अगर मतदाता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

राष्ट्रपति और जज को हटाया जा सकता है, नेताओं को क्यों नहीं?
चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए पहले ही महाभियोग की व्यवस्था है और सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। ऐसे में चुने हुए नेताओं के लिए भी यही अधिकार होना चाहिए।

दुरुपयोग रोकने के उपाय
सांसद ने यह स्पष्ट किया कि राइट टू रिकॉल केवल लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का साधन है, किसी नेता के खिलाफ हथियार नहीं। इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने कुछ शर्तें सुझाईं:
जनप्रतिनिधि को हटाने के लिए लगभग 35–40% मतदाताओं के हस्ताक्षर आवश्यक हों।
नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके।
ऐसा होने पर पार्टियां भी योग्य और काम करने वाले नेताओं को ही टिकट देंगी।

किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?
चड्ढा ने बताया कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड और कनाडा सहित दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में राइट टू रिकॉल लागू है। भारत में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में भी यह प्रावधान मौजूद है। इसके अलावा, इस अधिकार से मतदाता अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान और कनाडा में अपनी सरकार को जवाबदेह बना सकते हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ खेलेंगे अभिषेक? वरुण चक्रवर्ती बोले- उन्होंने अभ्यास किया, स्थिति पहले से बेहतर

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भारत के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है लेकिन 15 फरवरी को कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले महत्वपूर्ण टी20 विश्व कप ग्रुप मुकाबले में उनके खेलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पेट के संक्रमण से जुड़ी समस्या से जूझ रहे अभिषेक को तेज बुखार और पेट दर्द की शिकायत के बाद दो दिन के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उन्हें बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन गुरुवार को जब भारतीय टीम ने कोटला मैदान पर अभ्यास किया, तब अभिषेक ने बहुत ज्यादा ट्रेनिंग नहीं की क्योंकि वह अब भी थोड़ा कमजोरी महसूस कर रहे हैं।

अभिषेक का कम हुआ है वजन

अभिषेक का थोड़ा वजन भी कम हुआ है और पेट के गंभीर संक्रमण की स्थिति में पूरी तरह स्वस्थ होकर शीर्ष स्तर का क्रिकेट खेलने लायक ताकत और सहनशक्ति हासिल करने में समय लगता है। हालांकि, उनके स्वास्थ्य पर टीम इंडिया के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने बड़ा अपडेट दिया है, जिससे फैंस को खुशी मिल सकती है।
 
चक्रवर्ती ने अभिषेक के स्वास्थ्य पर अपडेट दिया

चक्रवर्ती ने कहा कि अभिषेक अब बेहतर महसूस कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि वह अगला मैच खेल सकते हैं। चक्रवर्ती ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अभिषेक अगला मैच खेलेंगे। मुझे उनकी स्थिति के बारे में पूरी तरह नहीं पता, लेकिन मैंने उनसे बात की है, वह अच्छी स्थिति में लग रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को कुछ अभ्यास भी किया। उन्होंने बताया कि वह वापसी की प्रक्रिया में हैं।’पाकिस्तान के खिलाफ कुछ नई गेंदें आजमा सकते हैं वरुण चक्रवर्ती ने साथ ही कहा कि वह पाकिस्तान के खिलाफ प्रेमदासा स्टेडियम में कुछ नई गेंदें भी आजमा सकते हैं क्योंकि वहां बाउंड्री लंबी हैं। नामीबिया के खिलाफ वरुण ने तीन विकेट झटके। अपनी फिरकी का जादू चलाने के बाद वरुण कहा कि वह अपनी गेंदबाजी में और विविधता लाने के अलावा मौजूदा गेंदों को बिलकुल सटीक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी में विविधता (वेरिएशन) लाने के अलावा मौजूदा गेंदों को बेहतर करने पर अधिक ध्यान दिया है।’गति, स्पिन और गेंद पर अधिक रोटेशन…’उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी गेंदबाजी के कुछ पहलुओं पर काम किया है जैसे गति, स्पिन और गेंद पर अधिक रोटेशन। लोग वेरिएशन पर भी काम करते हैं लेकिन मैंने अपनी मौजूदा गेंदों को परफेक्ट बनाने पर काम किया जिससे बहुत मदद मिली।’ चक्रवर्ती ने नामीबिया के खिलाफ लंबे फॉलो थ्रू (गेंद फेंकते हुए आगे की ओर जाना) के साथ गेंदबाजी की और इस स्पिनर ने कहा कि अपनी गेंदों की गति बढ़ाने के लिए उन्होंने ऐसा किया।अपने फॉलो थ्रू पर काम किया’इस लेग स्पिनर ने कहा, ‘मैंने अपने फॉलो थ्रू पर काम किया जिससे कि मैं विकेट पर अधिक तेजी से गेंद डाल सकूं। मैंने आज पहली ही गेंद गुगली फेंकी जबकि आम तौर पर मैं अपनी स्टॉक गेंद के साथ शुरुआत करता हूं।’ चक्रवर्ती ने कहा, ‘अगर आप हमारे खेले गए मुकाबलों को देखें तो इस विश्व कप से पहले हुए सभी द्विपक्षीय मैच सपाट पिचों पर थे। यह निश्चित रूप से थोड़ा हैरान करने वाला था। पहले मैच का विकेट भी और यह विकेट भी। लेकिन हमें जो भी विकेट मिलता है हमें उसके हिसाब से खुद को ढालना होगा।

‘पाकिस्तान से मैच पर क्या बोले चक्रवर्ती?

चक्रवर्ती ने साथ ही कहा कि रात के मैच में दूसरी पारी में गेंदबाजी करते हुए ओस की भी भूमिका है और पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में 15 फरवरी को होने वाले भारत के अगले मैच में भी ऐसा देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा, ‘ओस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जब आप दूसरी पारी में गेंदबाजी कर रहे होते हैं और आपको लक्ष्य का बचाव करना होता है तो कभी-कभी यह एक बड़ा मुद्दा होती है। आज भी बहुत ओस थी लेकिन हम अच्छा कर पाए। हम अनुभवी भी हैं क्योंकि हम आईपीएल में बहुत मैच खेलते हैं। हमें पता है कि अगर ओस आती है तो कैसे गेंदबाजी करनी है।’अच्छा प्रदर्शन करना वरुण का लक्ष्य चक्रवर्ती के लिए 2021 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच बुरे सपने की तरह रहा था। इस मुकाबलें में भारत को चक्रवर्ती से काफी उम्मीदें थी, लेकिन वह एक भी विकेट नहीं चटका पाए और टीम को 10 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। उस मैच से अब तक अपनी गेंदबाजी में आए बदलाव पर चक्रवर्ती ने कहा, ‘मैंने साइड स्पिन की जगह अपनी ओवर स्पिन और विकेट से अधिक गति और जिप पर काम किया है। कुछ वेरिएशन हैं जिन्हें मैं पिछले छह वर्ष से आजमा रहा हूं लेकिन अब भी परफेक्ट नहीं हुए जबकि कुछ काफी जल्दी काम कर जाते हैं। यह गेंद की जटिलता पर निर्भर करता है।’अभिषेक अब भी कमजोरी महसूस कर रहे कप्तान सूर्यकुमार यादव ने संकेत दिया कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उनका खेलना संदिग्ध हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘अभिषेक अभी पूरी तरह ठीक नहीं हैं, एक-दो मैच लग सकते हैं।’ समझा जाता है कि कोलंबो में उनका अभ्यास सत्र इस बात का संकेत देगा कि वह किस स्थिति में हैं। यदि वह नेट्स में सामान्य रूप से लंबे समय तक बल्लेबाजी करते हैं तो इसे उनके खेलने के लिए फिट होने का संकेत माना जा सकता है। पिछले एक साल में भारतीय टीम के नेट सत्र पर नजर डालें तो अभिषेक कई बार बल्लेबाजी करते हैं और तीन घंटे के अभ्यास सत्र में वह लगभग 75 से 90 मिनट तक बल्लेबाजी करते हैं।