केंद्र ने गेहूं और चीनी के निर्यात को दी हरी झंडी

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नई दिल्ली। घरेलू बाजार (domestic market) में बंपर पैदावार और गोदामों में भरे सरप्लस स्टॉक (surplus stock) को देखते हुए केंद्र सरकार (Central government) ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शुक्रवार को 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और रबी सीजन की नई फसल आने से पहले किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है।

खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, गेहूं के अलावा 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की भी अनुमति दी गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब निजी और सरकारी, दोनों ही स्तरों पर देश में अनाज का भंडार आरामदायक स्थिति में है।

गेहूं: गोदाम फुल, निर्यात का रास्ता खुला
सरकार के इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण गेहूं का भारी स्टॉक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है।

निजी क्षेत्र के पास स्टॉक: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निजी कंपनियों और व्यापारियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 32 लाख टन ज्यादा है।

एफसीआई की स्थिति: भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 1 अप्रैल, 2026 तक केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। यह आंकड़ा यह सुनिश्चित करने के लिए काफी है कि निर्यात की अनुमति देने से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी।

बुवाई में बढ़ोतरी: रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह दर्शाता है कि किसानों ने एमएसपी और सरकारी खरीद पर भरोसा जताते हुए जमकर बुवाई की है और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद है।

चीनी मिलों को नई राहत
गेहूं के साथ-साथ सरकार ने चीनी उद्योग को भी राहत दी है। चीनी सत्र 2025-26 के लिए ‘इच्छुक’ चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है।

पिछला ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले 14 नवंबर, 2025 को सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी, 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाया है, जबकि लगभग 2.72 लाख टन के सौदे अनुबंधित हो चुके हैं।

कड़ी शर्तें: अतिरिक्त पांच लाख टन का कोटा केवल उन मिलों को दिया जाएगा जो इसके लिए इच्छा जताएंगे। शर्त यह है कि आवंटित कोटे का कम से कम 70% हिस्सा 30 जून, 2026 तक निर्यात करना अनिवार्य होगा। आवंटन प्रो-राटा (अनुपातिक) आधार पर होगा और मिलों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि इस निर्यात कोटे को किसी दूसरी मिल के साथ बदला नहीं जा सकेगा।

सरकार का यह कदम बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) सुधारने और पीक सीजन में ‘डिस्ट्रेस सेल’ (औने-पौने दाम पर बिक्री) को रोकने के लिए उठाया गया है। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी।

 चुनावी रेवड़ी या महिला सम्मान? स्टालिन ने करोड़ों महिलाओं को दिए 5000 रुपये

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चेन्नई। दक्षिण के राज्य तमिलनाडू के सीएम एम के स्टालिन ने महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा कर ‘कलाइग्नार मगलीर उरिमाई थोगई’ योजना के तहत 1.31 करोड़ महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में 5,000 रुपये जमा करवाए हैं। चेन्नई में जारी वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि फरवरी, मार्च और अप्रैल महीनों के लिए अग्रिम रूप से 3,000 रुपये (प्रति माह 1,000 रुपये) दिए गए हैं, जबकि 2,000 रुपये की अतिरिक्त ग्रीष्मकालीन विशेष सहायता भी प्रदान की गई है।
सीएम स्टालिन ने स्पष्ट किया कि यह केवल चुनावी वादा नहीं, बल्कि महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक योगदान का सम्मान है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के ‘द्रविड़ मॉडल 2.0’ के तहत यदि उनकी पार्टी दोबारा सत्ता में आती है, तब वर्तमान 1,000 रुपये की मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाएगा। तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 10 मई 2026 को समाप्त हो रहा है और चुनाव 2026 की पहली छमाही में प्रस्तावित हैं। 2021 के चुनावों में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 133 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि एआईएमडीएमके को 66 सीटें मिली थीं।
यह योजना सितंबर 2023 में शुरू की गई थी और शुरुआत में 1.13 करोड़ महिलाओं को इसका लाभ मिला था। बाद में इसका दायरा बढ़ाकर 1.31 करोड़ महिलाओं तक किया गया। स्टालिन सरकार का कहना है कि यह आर्थिक सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवार की आय में सहयोग देने के उद्देश्य से दी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव से पहले इतनी बड़ी राशि का वितरण विपक्ष द्वारा ‘चुनावी रेवड़ी’ कहा जा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है। अब देखना यह होगा कि आगामी चुनावों में महिलाओं का समर्थन किस दिशा में जाता है।

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लखनऊ, अयोध्या और काशी की 19 कचहरी में बम धमकी, सुरक्षा कारणों से परिसर खाली कराया गया

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नई दिल्ली। यूपी में लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी (Lucknow, Ayodhya and Varanasi) समेत 19 जिलों की कचहरी (court) में बम विस्फोट करने की धमकी भरे मेल से हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही कचहरी परिसर को तत्काल खाली करा लिया गया है। इस घटना के मद्देनजर पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कचहरी को वकीलों व वादकारियों से खाली कराया जा रहा है। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और परिसर की गहन तलाशी ली जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है।

धमकी भरे मेल की जांच की जा रही है कि यह किसने और क्यों भेजा है। सीजेएम ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल ली है। सीओ सिटी सहित काफी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। फिलहाल, किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। सूत्रों का कहना है कि धमकी भरा मेल जिला जज की मेल आईडी पर आया था। हिंदी में लिखे गए मेल में कहा गया था कि आज दोपहर डेढ़ बजे जुम्मे के बाद कचहरी को बम से उड़ा दिया जाएगा। बच सको तो बच लो।

लखनऊ सिविल कोर्ट में चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन
लखनऊ के सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी भरा मेल मिलने के बाद कोर्ट परिसर में जांच और सुरक्षा एजेंसीयां पहुंची हैं। स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर अफसर मौजूद हैं। एलआईयू, बीडीडीएस और डॉग स्क्वाड के साथ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कोर्ट के सभी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर सुरक्षाकर्मी सतर्क हो गए है। फिलहाल कोर्ट का कामकाज रोक दिया गया है और कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट में ढूंढने के लिए फोर्स सर्च ऑपरेशन चला रही है।

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एनसीपी विलय की चर्चाओं पर बोलीं सुप्रिया सुले- अधूरे सपने को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी 

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मुंबई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार के निधन के बाद पहली बार उनकी चचेरी बहन और एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत की और पार्टी के भविष्य पर अपना नजरिया साझा किया। यहां सुप्रिया सुले ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य अजित पवार के अधूरे सपने को पूरा करना है। 
यहां सुप्रिया सुले ने बताया कि अगर दादा आज हमारे बीच होते, तो एनसीपी के विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाती। उन्होंने पुरानी बातें नहीं दोहराने और व्यक्तिगत मुद्दों को मीडिया में उजागर न करने की बात भी कही। सुप्रिया सुले से सीधे सवाल किया गया कि क्या वह एनडीए में जाएंगी। इस पर उन्होंने कहा, लोकतंत्र सभी को अपनी बात कहने का हक देता है। मेरी अपनी जानकारी है। उन्होंने इस सवाल को सीधे जवाब देने से बचते हुए इसे अपने और पार्टी की रणनीति से जोड़ा। 

पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय भूमिका
चर्चा है कि इस महीने के अंत तक सुनेत्रा पवार एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकती हैं। साथ ही लंबे समय से अटकलें हैं कि सुप्रिया सुले केंद्र में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं।

विमान हादसे और सवाल
सुप्रिया सुले ने पहली बार अजित पवार के विमान क्रैश मामले पर भी बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जांच की बात कही है और विधायक रोहित पवार की बेचैनी स्वाभाविक है। कई सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। रोहित पवार ने इस हादसे में साजिश की आशंका जताई और पहले प्रफुल्ल पटेल और फिर पार्टी के सलाहकार नरेश अरोड़ा को निशाने पर रखा है।
सुप्रिया सुले का बयान महाराष्ट्र में एनसीपी की भविष्य की राजनीतिक दिशा और पार्टी के विलय को लेकर अटकलों के बीच आया है। उनका फोकस फिलहाल अजित पवार के अधूरे सपने और पार्टी की एकजुटता पर केंद्रित है।

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सबरीमाला मंदिर मामले में पंकज भंडारी को राहत नहीं, गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका खारिज

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तिरुवनंतपुरम। बहुचर्चित सबरीमाला सोना चोरी मामले में केरल हाईकोर्ट ने चेन्नई स्थित कंपनी स्मार्ट क्रिएशंस के सीईओ पंकज भंडारी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए गए। न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में ऐसा कोई गंभीर उल्लंघन नहीं पाया गया, जिससे उसे अवैध ठहराया जा सके।

स्मार्ट क्रिएशंस के सीईओ पंकज भंडारी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उनकी गिरफ्तारी अवैध है, क्योंकि अनिवार्य प्रक्रियाओं (जैसे गिरफ्तारी की सूचना देना और कारण बताना) का पालन नहीं किया गया। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इन दावों को निराधार बताते हुए कहा कि सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया गया था। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी अधिकारी द्वारा भंडारी को समय पर विशेष विजिलेंस अदालत, कोल्लम में पेश नहीं किया जा सका, लेकिन यह देरी चिकित्सकीय परीक्षण और तिरुवनंतपुरम से कोल्लम तक लगभग 71 किलोमीटर की दूरी तय करने के कारण हुई। न्यायालय ने कहा कि केवल इस आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता।

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 “हम जनप्रतिनिधि हैं, हमें जनता के बीच जाना……किसानों को लेकर भ्रम पैदा कर रहा विपक्ष 

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नई दिल्ली । केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रेड डील, किसानों और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से केंद्र सरकार का पक्ष रखा। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष बेवजह भ्रम फैलने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोई भी जिम्मेदार सरकार देश के सबसे बड़े और संवेदनशील वर्ग, यानी किसानों, के हितों से समझौता नहीं कर सकती। केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा, “हम भी जनप्रतिनिधि हैं और हमें भी जनता के बीच जाना है। किसानों के हितों की अनदेखी कर कोई भी राजनीतिक दल आगे नहीं बढ़ सकता।”
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर कहा कि बीते एक दशक में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना रही है। उनका कहना था कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो। देश में जारी आर्थिक सुधारों का उल्लेख कर केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा कि जनधन योजना, यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी पहलों ने देश की आर्थिक संरचना को नई मजबूती दी है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंची है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका घटी। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया, जो लंबे समय तक हाशिए पर थे, परिणामस्वरूप टैक्सदाताओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर बताकर मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को अक्सर अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ती है। यदि वैल्यू एडिशन और आधुनिक प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाए, तब फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी, बेहतर कीमत मिलेगी और खाद्य अपव्यय में कमी आएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते है। 
केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा कि भारत के पास वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है और देश “ग्लोबल फूड बास्केट” बन सकता है। सरकार निवेश, बुनियादी ढांचे और नीतिगत सुधारों के माध्यम से कृषि और फूड प्रोसेसिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापार समझौतों और निवेश को बढ़ावा देते समय किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

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DGCA ने Air India पर लगाया 1 करोड़ का जुर्माना

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एयर इंडिया पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। एविएशन रेगुलेटर ने गंभीर उल्लंघन को लेकर यह कार्रवाई की है। साथ ही सिक्योरिटी में चूक के लिए डीजीसीए ने एयर इंडिया के टॉप-लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार भी ठहराया है। बता दें कि बिना वैलिड एयरवर्दीनेस परमिट के आठ बार एयरबस A320 प्लेन ऑपरेट करने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एविएशन रेगुलेटर ने इस उल्लंघन को ‘गंभीर’ बताया है।

डीजीसीए के ऑर्डर में क्या कहा गया?
जुर्माना लगाने वाले डीजीसीए के ऑर्डर में कहा गया है कि एयरबस A320 एयरक्राफ्ट को पिछले साल 24 और 25 नवंबर के बीच नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद को जोड़ने वाली फ्लाइट्स समेत कई सेक्टर्स पर बिना जरूरी एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (एआरसी) के उड़ाया गया था।

एआरसी एक जरूरी सालाना सर्टिफिकेशन है जो एविएशन रेगुलेटर तब जारी करता है जब कोई एयरक्राफ्ट तय सेफ्टी और कम्प्लायंस चेक को सफलतापूर्वक पास कर लेता है। इसके बिना उड़ान भरना एविएशन सेफ्टी नॉर्म्स का गंभीर उल्लंघन है।

नियम तोड़ने पर एयर इंडिया ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, डीजीसीए ने इस नियम तोड़ने पर सख्त रुख अपनाया और इसे एयरलाइन का लापरवाह रवैया बताया। उधर, डीजीसीए के ऑर्डर पर एयर इंडिया के एक स्पोक्सपर्सन ने जवाब दिया।

एक बयान में उन्होंने कहा- एयर इंडिया इस बात को मानता है कि उसे 2025 में रिपोर्ट की गई एक घटना के बारे में DGCA का ऑर्डर मिला था।

तब से सभी पहचानी गई कमियों को ठीक कर दिया गया है और अथॉरिटी के साथ शेयर किया गया है। एयर इंडिया ऑपरेशनल इंटेग्रिटी और सेफ्टी के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने के अपने कमिटमेंट पर अडिग है।
 

आज से बदल गया PMO का पता, अब सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

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PM Modi Inauguration PMO: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को नए प्रधानमंत्री ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया है. आज से देश का पॉवर सेंटर बदल गया है. पीएम मोदी ने दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया है. नया ऑफिस प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लगभग सभी सुविधाओं से लैस बनाया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नए कार्यालय में वित्त मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय तथा जनजातीय मामलों का मंत्रालय स्थित हैं. इसके अलावा इस परिसर में कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. डिजिटल रूप से जुड़े ऑफिस, जनता से संपर्क के लिए अलग और व्यवस्थित जोन और रिसेप्शन की भी व्यवस्था की गई है.

13 फरवरी 1931 में दिल्ली बनी थी राजधानी

‘सेवा तीर्थ’ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक ही परिसर में आ गए हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर संचालित होते थे. बता दें, 13 फरवरी को ही नई दिल्ली 1931 में औपचारिक रूप से भारत की राजधानी बनी थी. आज से इसे 95 साल पूरे हो गए हैं. शायद यही वजह रही होगी कि ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन की डेट 13 फरवरी रखी गई.

1189 करोड़ की लागत से बना नया PMO

बता दें, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पिछले 80 सालों से कैबिनेट मीटिंग होती आई है. लेकिन अब आज से साउथ ब्लॉक में कैबिनेट की मीटिंग नहीं होगी. नए कार्यालय सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में NSA एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय बनाया गया है. जिसकी कुल लागत 1,189 करोड़ रुपए है. यह लगभग 2 लाख 26 हजार वर्ग फुट में फैला हुआ है.

पहले ही दिन मिली मंजूरी

पीएम मोदी नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में पहले ही दिन काम शुरू करते ही कई अहम फैसलों पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसमें पीएम राहत योजना, लखपति दीदी का लक्ष्य दोगुना, किसानों के लिए बड़ा ऐलान और इसके अलावा स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी दी है.

हथियार लहराते नजर आए विधायक, ‘धुरंधर’ पर बनी रील से बढ़ा राजनीतिक तापमान

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नई दिल्ली। कर्नाटक(Karnataka) के कलबुर्गी जिले(Kalaburagi district) में एक पारिवारिक समारोह(family function) के दौरान कांग्रेस विधायक मतीन पटेल (Congress MLA Matin Patel )का कथित तौर पर हथियार लेकर डांस करने का वीडियो सामने आने के बाद सियासी और सामाजिक हलकों में हंगामा मच गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस रील ने न सिर्फ विधायक की कार्यशैली(MLA’s style of functioning) पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि सार्वजनिक आयोजनों (public events)में बढ़ती गन कल्चर को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
वायरल वीडियो क्लिप में मतीन पटेल एक काली एसयूवी से उतरते दिखाई देते हैं। इसके बाद वह फिल्म धुरंधर के एक गाने पर पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु हाथ में लेकर डांस करते नजर आते हैं। वीडियो में उनके कुछ समर्थक भी बंदूक जैसी वस्तुएं थामे दिख रहे हैं। जैसे ही यह क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैली लोगों ने इसे गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए कड़ी आलोचना शुरू कर दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधियों को इस तरह का प्रदर्शन शोभा नहीं देता और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

मामले के तूल पकड़ने पर विधायक मतीन पटेल ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तु असली हथियार नहीं बल्कि खिलौना बंदूक थी। उनके अनुसार यह एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम था और उन्होंने बच्चों के आग्रह पर फिल्म के एक किरदार की तरह कपड़े पहनकर यह प्रस्तुति दी थी। पटेल का कहना है कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और पुलिस इस संबंध में उनसे पहले ही पूछताछ कर चुकी है।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। कलबुर्गी शहर के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी ने बताया कि अधिकारियों को यह सत्यापित करने के निर्देश दिए गए हैं कि वीडियो में दिखाए गए हथियार असली थे या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वीडियो किस स्थान पर शूट किया गया और वह क्षेत्र किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में हथियार असली पाए जाते हैं तो यह देखा जाएगा कि उनके पास वैध लाइसेंस था या नहीं और क्या किसी नियम या शर्त का उल्लंघन हुआ है। अगर अवैध हथियार या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन करना कानूनन अपराध है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच की जाएगी।

 

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वाराणसी कचहरी में बम धमकी से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

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वाराणसी। वाराणसी (Varanasi) जिले में उस समय हड़कंप (commotion) मच गया जब जिला जज (District Judge) के ई-मेल पर कचहरी को बम से उड़ाने (bomb threat) की धमकी मिली। इसकी जानकारी मिलते ही बार पदाधिकारियों ने बैठक की। वहीं कचहरी परिसर में गहमागहमी का माहौल हो गया। रात 1.30 बजे ई-मेल पर धमकी भरा मैसेज आने की जानकारी मिली है।

जिला जज को ई-मेल पर मिली धमकी के बाद कचहरी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार और कैंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा फोर्स और बम निरोधक दस्ते के साथ कचहरी में चेकिंग अभियान चला रहे हैं।

वहीं, अधिवक्ताओं ने भी अपने स्तर से चैंबर और संदिग्ध सामानों की जांच शुरू कर दी है। उधर, साइबर सेल की ओर से ई-मेल की जांच की जा रही है।

सेंट्रल बार अध्यक्ष प्रेमप्रकाश सिंह गौतम ने बताया कि जिला जज ने दोनों बार के अध्यक्ष महामंत्री को अपने चैंबर में बुलाकर जानकारी दी कि उनके यहां ई-मेल आया है, जिसमें डेढ़ बजे आतंकवादी संगठनों ने कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी दी है। ऐसे में सभी मामलों में तारीखें दी जा रही हैं और कचहरी खाली करने का अनुरोध किया गया है।

बम निरोधक दस्ता ने मौके पर पहुंचकर गहनता से कचहरी परिसर की जांच की। इसकी जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंची। साथ ही अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरि मीणा भी कचहरी पहुंचे। उन्होंने जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

मौके पर भारी पुलिस फोर्स
मौके पर तीन कंपनी पीएसी, डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी और चार इंस्पेक्टर समेत 50 से अधिक पुलिस कर्मियों की टीम कचहरी में जांच अभियान चला रही है।

जिला जज को एक लाइन में ई-मेल पर धमकी मिली कि अधिवक्ताओं और जजों को बम से उड़ाया जाएगा। यह सूचना आग की तरह पूरे शहर में फैल गई है। सूचना पर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे।

वाराणसी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कैंट रेलवे स्टेशन पर भी चेकिंग अभियान चलाया गया। काउंटर से लेकर प्रवेश द्वार तक और सभी प्लेटफार्म पर पहुंचकर सुरक्षाकर्मियों ने जांच की।