केरल के इमाम ने हिंदू भक्तों के लिए मस्जिद और घर खोले

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केरल। के पलियम इमाम वी.पी. सुहैब मौलवी की एक ऐसी अपील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने आगामी अट्टुकल पोंगाला उत्सव के अवसर पर हिंदू श्रद्धालुओं के लिए मस्जिदों और मुस्लिम घरों को खोलने का आह्वान किया है। इस पहल को सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ‘असली केरल की कहानी’ के रूप में सराहा रहे हैं।

3 मार्च को अट्टुकल पोंगल उत्सव

दरअसल, केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित अट्टुकल भगवती मंदिर में मनाया जाने वाला अट्टुकल पोंगल प्रसिद्ध 10 दिवसीय उत्सव है। अट्टुकल पोंगल, जो इस वर्ष 3 मार्च को पड़ रहा है दुनियाभर में महिलाओं के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। इस उत्सव में विभिन्न आयु वर्ग की लाखों महिलाएं राजधानी शहर में इकट्ठा होती हैं और अनुष्ठानों में भाग लेती हैं। इससे पहले पालयाम इमाम की ओर से एकजुटता और आतिथ्य सत्कार की अपील करने वाले एक भाषण ने ऑनलाइन व्यापक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। इमाम ने आग्रह किया कि त्योहार के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मस्जिदें और घर खोले जाएं और पोंगल के दिन उनके लिए भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था की जाए। पालयाम के इमाम डॉ. सुहैब मौलवी ने अपने संदेश में कहा, ‘अट्टुकल पोंगाला बस कुछ ही दिनों में आने वाला है। चूंकि यह एक अलग धर्म से जुड़ा है, इसलिए हम इसके रीति-रिवाजों और समारोहों में भाग नहीं लेते हैं। हालांकि, कई बहनें और बच्चे अतिथि के रूप में तिरुवनंतपुरम आएंगे। हमें उनका सर्वोत्तम स्वागत करने का प्रयास करना चाहिए।’

मस्जिदें और घर उनके लिए पूरी तरह खुले हो: इमाम

इमाम ने आगे कहा कि पिछले साल की तरह इस साल भी पोंगाला रमजान के दौरान ही हो रहा है। हमें पोंगाला में आने वाली बहनों और उनके बच्चों के साथ रमजान के बेहतरीन अनुभवों, उसकी खुशी, भाईचारे और प्यार को साझा करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें उन्हें पीने का पानी और रमजान के पकवान उपलब्ध कराने चाहिए। हमें उनके आराम के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसी स्थिति बनानी होगी, जहां हमारी मस्जिदें और घर उनके लिए पूरी तरह खुले हों। यह हमारे प्रेम और भाईचारे को खुलकर प्रदर्शित करने का अवसर है।’

सोशल मीडिया पर हो रही मौलवी की तारीफ

मौलवी ने आगे जोर दिया कि देश और दुनिया में बढ़ते इस्लामोफोबिया और नफरत का मुकाबला सिर्फ प्यार और भाईचारे से ही असरदार तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने इस त्योहार को मेलजोल के संदेश को मजबूत करने का एक अच्छा मौका बताया। अब मुस्लिम धर्मगुरु का भाषण जल्द ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। अलग-अलग धर्मों के लोगों ने उनके वीडियो क्लिपिंग्स को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शेयर किया और उनके इस कदम को केरल की असली कहानी, केरल में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के बीच मेलजोल और भाईचारे का एक उदाहरण बताया।
 

शादी के बाद भी अभिनेत्रियों के साथ हो रही ये अच्छी चीज, जीनत अमान ने इंडस्ट्री में हुए इस बदलाव पर जताई खुशी

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अभिनेत्री जीनत अमान ने हाल ही में बताया कि पहले के मुकाबले अब बॉलीवुड कितना बदल गया है। उन्होंने कहा कि आज की अभिनेत्रियों को पहले के मुकाबले ज्यादा आजादी और अच्छे मौके मिल रहे हैं। उनके मुताबिक, अब शादी या मां बनने से एक अभिनेत्री के करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

जीनत अमान ने क्या कहा?

जीनत अमान ने कहा ‘आजकल अभिनेत्रियों को शादी करने और मां बनने के बाद भी अच्छे रोल मिल रहे हैं। मेरे समय में ऐसा नहीं था। तब हीरोइन का करियर बहुत छोटा होता था।’ उन्होंने बताया कि पहले शादी या मां बनने के बाद अक्सर हीरोइन का करियर खत्म मान लिया जाता था।

सेट पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

जीनत अमान ने फिल्म इंडस्ट्री, खासकर कैमरे के पीछे महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा ‘मुझे बहुत गर्व है कि आजकल सेट पर बहुत सी लड़कियां और महिलाएं काम कर रही हैं। मेरे समय में सेट पर कोई लड़की काम नहीं करती थी। सिर्फ मैं और मेरी हेयरड्रेसर होती थीं।’
 
इंडस्ट्री में हुआ बदलाव

इंडस्ट्री में हुए बदलाव को लेकर अभिनेत्री ने कहा ‘अब आप देखिए ‘द रॉयल्स’ में कैमरा पर्सन, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर वे सभी लेडीज थीं। यह एक बहुत ही सुंदर बदलाव है।’रोहित शेट्टी फायरिंग मामले में मिला अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, इस देश से हुई थी फंडिंग; क्राइम ब्रांच का दावा

जीनत अमान का फिल्मी सफर

जीनत अमान ने 1971 में फिल्म ‘हलचल’ से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। इसके बाद वो हरे राम हरे कृष्णा, यादों की बारात, डॉन और सत्यम शिवम सुंदरम जैसी कई हिट फिल्मों में नजर आईं। 1970 के दशक में उन्हें सबसे ग्लैमरस और प्रोग्रेसिव स्टार्स में गिना जाता था।
हाल ही में अभिनेत्री सीरीज ‘द रॉयल्स’ में नजर आईं।

बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी का महिला सुरक्षा पर बड़ा दांव

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कोलकाता।  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगामी चुनाव से पहले महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कोलकाता पुलिस की दो नई पहलों की घोषणा की है। 

ऑल-वुमन पिंक बूथ से सुरक्षा कैसे बढ़ेगी?

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि शहर के प्रमुख चौराहों पर ऑल-वुमन पिंक बूथ स्थापित किए जाएंगे, जो शाम से लेकर आधी रात तक संचालित रहेंगे। इन बूथों पर तैनात महिला पुलिसकर्मी सीधे तौर पर महिलाओं की सहायता और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि इन पिंक बूथों के जरिए शहर की महिलाएं जरूरत पड़ने पर सीधे महिला अधिकारियों से संपर्क कर सकेंगी, जिससे सुरक्षा के प्रति भरोसा और बढ़ेगा।

शाइनिंग मोबाइल पेट्रोलिंग टीम क्या करेगी?

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने ‘शाइनिंग’ नाम से ऑल-वुमन मोबाइल पेट्रोलिंग टीमों की तैनाती की भी घोषणा की। ये टीमें रात 8 बजे से सुबह 2 बजे तक ईएम बाइपास और शहर की अन्य प्रमुख सड़कों पर गश्त करेंगी, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में कामकाजी महिलाएं रात के समय करती हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि कोलकाता वर्षों से देश का सबसे सुरक्षित शहर बना हुआ है और ये दो नई पहल महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। कोलकाता पुलिस के अधिकारियों द्वारा इन पहलों की तैनाती, संचालन और रणनीति से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द साझा किए जाने की उम्मीद है।
 

आंखों में आंसू, दिल में देश; पिता को खोकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों के त्याग-हौसले को सलाम

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भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे पल आए हैं जब खिलाड़ियों को अपने निजी जीवन और देश के बीच कठिन चुनाव करना पड़ा। कुछ ने अंतिम संस्कार के लिए घर लौटकर फिर मैदान संभाला, तो कुछ ने दिल पर पत्थर रखकर देश के लिए खेलना जारी रखा। इन घटनाओं में सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग और भावनाओं की गहराई झलकती है।

रिंकू सिंह: शोक के बीच जिम्मेदारी

हाल ही में रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया। वह लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। पिता के अंतिम दर्शन के लिए रिंकू अलीगढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। ऐसे कठिन समय में उनका वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में खेलना संदिग्ध माना जा रहा था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि रिंकू शनिवार को कोलकाता में टीम से जुड़ेंगे।यह फैसला बताता है कि एक बेटा अपने पिता को अंतिम विदाई देने के बाद भी अपने पेशेवर दायित्व से पीछे नहीं हटता। रिंकू के संघर्षों में उनके पिता की अहम भूमिका रही थी। अब उसी सपने को आगे बढ़ाना उनके लिए पुत्र धर्म के साथ-साथ राष्ट्र धर्म भी है।

विराट कोहली: 18 साल की उम्र में असाधारण निर्णय

आज दुनिया के महान बल्लेबाजों में शुमार विराट कोहली के जीवन में 18 दिसंबर 2006 की रात हमेशा के लिए दर्ज है। रणजी ट्रॉफी में दिल्ली बनाम कर्नाटक मुकाबले के दौरान उनके 54 वर्षीय पिता प्रेम कोहली का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उस वक्त 18 वर्षीय विराट 40 रन बनाकर नाबाद थे और दिल्ली को फॉलोऑन से बचाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।कोच और साथियों ने उन्हें घर जाने की सलाह दी, लेकिन विराट ने फैसला किया कि वह पहले टीम को संकट से उबारेंगे। अगले दिन उन्होंने 90 रनों की जुझारू पारी खेली, टीम को फॉलोऑन से बचाया और फिर सीधे अंतिम संस्कार के लिए रवाना हो गए। उस दिन एक युवा खिलाड़ी ने अपने दुख को दिल में दबाकर देश और टीम के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। यही घटना उन्हें मानसिक रूप से परिपक्व बना गई और आगे चलकर वही लड़का भारतीय क्रिकेट की धड़कन बन गया।

मोहम्मद सिराज: पिता का सपना, देश की ड्यूटी

मोहम्मद सिराज की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। उनके पिता मोहम्मद गौस एक ऑटो चालक थे, जिन्होंने कठिन हालात में भी बेटे के सपनों को जिंदा रखा। साल 2020 में जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थी, तभी उनके पिता का निधन हो गया। पृथकवास (क्वारंटीन) नियमों के कारण सिराज भारत लौटकर अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।भावुक सिराज ने कहा था कि उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा खो दिया, लेकिन उनके पिता का सपना था कि वह देश के लिए खेलें। सिराज ने उसी सपने को अपना संबल बनाया और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर शानदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यह त्याग केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि उस भावना का प्रतीक था जिसमें देश पहले आता है और निजी दुख बाद में।

सचिन तेंदुलकर: शतक जो पिता को समर्पित था

1999 विश्व कप के दौरान सचिन तेंदुलकर के पिता रमेश तेंदुलकर का निधन हो गया था। वह उस समय इंग्लैंड में थे। सूचना मिलते ही वह भारत लौटे, अंतिम संस्कार में शामिल हुए और फिर टीम के साथ जुड़ गए। कीनिया के खिलाफ मैच में उन्होंने शतक जड़ा। शतक पूरा करते ही उन्होंने आसमान की ओर देखा मानो पिता को यह उपलब्धि समर्पित कर रहे हों। वह पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी, बल्कि एक बेटे की पिता को श्रद्धांजलि थी।ये घटनाएं बताती हैं कि भारतीय क्रिकेटर सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और त्याग की मिसाल हैं। उन्होंने यह साबित किया कि पुत्र धर्म और राष्ट्र धर्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे को पूर्ण करने वाले हैं।

‘क्या उनकी टिप्पणी गंभीरता से लेनी चाहिए’? ‘द केरल स्टोरी 2’ पर अनुराग कश्यप के किया तंज तो बोले विपुल अमृतलाल

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फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ अपनी रिलीज से पहले विवादों में रही। मामला कोर्ट तक भी पहुंचा। इस बीच निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप ने भी इस फिल्म पर तीखा हमला बोला था। इस पर अब फिल्म के प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फिल्म के बारे में की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाया है। 

बोले- ‘मैं पर्सनली कमेंट नहीं करता’

मीडिया से बात करते हुए शाह ने कहा, ‘देखिए, मैं अनुराग जी पर पर्सनली कमेंट नहीं करता। उनकी अपनी राय है।  हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मेरे जो निर्देशक हैं उन्होंने एक बहुत अच्छा मुद्दा रखा था, उसका जवाब अभी तक अनुराग जी के पास से आया नहीं’। बता दें कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ का निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया है। 

बोले- ‘क्या उनकी टिप्पणी गंभीरता से लेनी चाहिए’

बता दें कि अनुराग कश्यप ने मीडिया से बात करते हुए ‘द केरल स्टोरी 2’ के ट्रेलर की आलोचना करते हुए इसे ‘प्रोपेगैंडा’ बताया था। विपुल अमृतलाल शाह ने यह भी बताया कि कश्यप ने एक फिल्म ‘दैट गर्ल इन येलो बूट्स’ बनाई थी, जिसमें ‘पिता और बेटी के अनैतिक संबंध’ को दिखाया गया था। क्या उनकी ऐसी किसी टिप्पणी को गंभीरता से लेना चाहिए? विपुल अमृतलाल शाह ने आगे बताया कि डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह ने यह सवाल सबके सामने उठाया था और उम्मीद जताई कि कश्यप इस पर खुलकर बात करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद थी कि अनुराग खुलकर बात करेंगे। शायद आने वाले दिनों में उनका जवाब आ जाएगा’। 

फिल्म के निर्देशक ने क्या कहा था?

इससे पहले डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह ने फिल्म को लेकर चल रहे विवादों और आलोचनाओं पर कड़े शब्दों में जवाब देते हुए फिल्ममेकर अनुराग कश्यप को भी उनके बयानों के लिए आड़े हाथों लिया। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कामाख्या सिंह ने जोर देकर कहा कि अनुराग कश्यप समाज के बारे में ‘सच्चाई को लेकर अंधे’ रहे हैं। डायरेक्टर ने कहा, ‘कई वर्षों से उनकी सारी फिल्में फ्लॉप हुई हैं…वे मानसिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। उनको सच्चाई दिखती नहीं है’। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर उन्हें हमारी फिल्म में दिखाई गई सच्चाई से दिक्कत है, तो इसका मतलब है कि उन्हें पूरी दुनिया से दिक्कत है। हमारी फिल्म का हर सीन सच्ची घटनाओं पर आधारित है। अगर अनुराग जी चाहेंगे, तो हम सारा रिसर्च मटीरियल उनके घर भेज देंगे। लेकिन उन्हें हर चीज में गलती निकालनी है। वह सच को देखते हुए अंधे हो गए हैं। वह इसे देखना या समझना नहीं चाहते’।

‘डॉल्फिन हंटर’ INS Anjadip ने बेड़े में संभाली कमान

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भारतीय नौसेना अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए 200 जंगी जहाजों को शामिल करने की तैयारी कर रहा है. इसकी जानकारी शुक्रवार को नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने दी है. उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2035 तक 200 से अधिक जहाजों को अपने बेडे़ में शामिल करने का है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि 2047 तक पूरी तरह भारत को आत्मनिर्भर बल से रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. इस साल यानी 2026 में भी 15 जहाजों को शामिल करने की योजना है. जानें नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने क्या कहा? नौसेना प्रमुख ने यह जानकारी शुक्रवार को चेन्नई बंदरगाह पर INS अंजदीप के कमीशनिंग समारोह के बाद दी है. इस दौरान नौसेना प्रमुख ने बताया कि साल 2026 में लगभग 15 नए जहाज शामिल करने की तैयारी है, जो एक साल के अंदर सबसे ज्यादा नौसेना के बेड़े में जहाज शामिल होगी. इसके अलावा देशभर के शिपयार्ड में 50 जहाजों का निर्माण किया जा रहा है, जो रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदम है।

मेक इन इंडिया’ पर जोर

नौसेना प्रमुख ने बताया, नौसेना की अभियानगत क्षमता हिंद महासागर क्षेत्र से लेकर उसके काफी आगे तक फैली हुई है, जिसमें नौसैन्य इकाइयां निगरानी, जलदस्यु रोधी और समन्वित गश्त के लिए लगातार तैनात रहती हैं, जो निरंतर पहुंच और विश्वसनीय अभियान क्षमता को दर्शाती है. इसके अलावा उन्होंने मेक इन इंडिया पर जोर देते हुए कहा कि अब आत्मनिर्भर भारत को न केवल रणनीतिक अनिवार्यता के रूप में बल्कि भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए निवेश के रूप में अपनाने की तैयारी है।

50 जहाजों का निर्माण कार्य शुरू

एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा, 50 जहाजों का निर्माण किया जा रहा है. 2035 तक भारतीय नौसेना के बेड़े में 200 से अधिक जंगी जहाज शामिल किए जाएंगे. इसके अलावा हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भरता को घटक स्तर तक ले जाना और 2047 तक आत्मनिर्भर बल का निर्माण करना है।

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News Desk

‘द व्हाइट लोटस’ को ठुकराने की खबरों के बीच दीपिका का क्रिप्टिक पोस्ट, लिखा- ‘फालतू रिएक्शन को भूलना पड़ता है’

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दीपिका पादुकोण इन दिनों एक हॉलीवुड प्रोजेक्ट को ठुकरा देने को लेकर सुर्खियों में हैं। दरअसल, बीते दिनों ऐसी खबरें आईं कि दीपिका हॉलीवुड की पॉपुलर ब्लैक कॉमेडी सीरीज ‘द व्हाइट लोटस’ के चौथे सीजन में नजर आ सकती हैं। मगर, अब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अभिनेत्री ने इसमें काम करने से इनकार कर दिया है। ऐसी खबरों के बीच दीपिका ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक क्रिप्टिक पोस्ट साझा किया है। 

क्यों ठुकराया दीपिका ने ऑफर?

दीपिका पादुकोण भारतीय फिल्मों ‘कल्कि 2’ और ‘स्पिरिट’ से पहले ही कुछ कारणों से इनकार कर चुकी हैं। अब उन्होंने हॉलीवुड सीरीज से भी किनारा कर लिया है। वैराइटी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपिका ने ‘द व्हाइट लोटस’ सीरीज में काम करने से इसलिए मना कर दिया, क्योंकि वे अपने किरदार के लिए ऑडिशन नहीं देना चाहती थीं। वहीं, सीरीज के मेकर्स ऑडिशन लेना चाहते थे।

‘चुप रहना मुश्किल है’

इस तरह की तमाम खबरों के बीच दीपिका पादुकोण ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसका सार यह है कि जब लोग शोर मचा रहे हों, आपको लेकर बातें हो रही हैं, तब चुप रहना चुन पाना मुश्किल होता है और यही असली ताकत है। दीपिका के पोस्ट में लिखा है, ‘शांत रहना सबसे बड़ा फ्लेक्स है। कोई भी अपना आपा खो सकता है, तुरंत रिएक्ट कर सकता है। जोर से बात कर सकता है और शोर मचा सकता है। इसके लिए जीरो ताकत चाहिए। असली ताकत तब दिखती है जब अफरा-तफरी मच जाती है और आप झुकते नहीं हैं। जब ड्रामा आपको अपनी ओर खींचने की कोशिश करता है और आप जमीन पर टिके रहते हैं। जब जिंदगी आपको बार-बार परेशान करती है और आप फिर भी कंट्रोल चुनते हैं। इसके लिए हिम्मत चाहिए। फालतू रिएक्शन को भूलना पड़ता है और बेचैनी के साथ बैठना पड़ता है। इमोशंस को हावी नहीं होने देना पड़ता’।

‘शांत रहना एक सुपरपावर है’

आगे लिखा है, ‘शांत रहना कमजोरी नहीं है, यह मास्टरी है। यह जानना है कि आपको कुछ भी साबित करने, सब कुछ समझाने या हर किसी पर रिएक्ट करने की जरूरत नहीं है। जब दूसरे लोग घबराकर एनर्जी खर्च करते हैं, तो आप चुपचाप, साफ और जान-बूझकर आगे बढ़ते हैं। शोर की आदी दुनिया में, शांत रहना एक जबर्दस्त सुपरपावर है’। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑडिशन नहीं देने के फैसले के चलते दीपिका ने यह बड़ा प्रोजेक्ट ठुकरा दिया। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह पहली बार नहीं है, जब दीपिका को इस सीरीज का ऑफर मिला हो। इससे पहले उन्हें तीसरे सीजन के दौरान भी ऑफर आया था। मगर, तब प्रेग्नेंसी के चलते उन्होंने इसमें काम करने से इनकार कर दिया था। 

ओडिशा राज्यसभा चुनाव में सियासी चाल तेज, बीजद ने छह नामांकन फॉर्म लेकर बढ़ाई हलचल

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भुवनेश्वर। ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अधिसूचना जारी होते ही बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने एक साथ छह नामांकन फॉर्म हासिल कर लिए, जिससे पार्टी की रणनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

दरअसल, 147 सदस्यीय विधानसभा के आंकड़ों के मुताबिक बीजद को एक सीट पक्की मानी जा रही है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है। चौथी सीट के लिए किसी भी दल के पास जरूरी 30 प्रथम वरीयता वोट नहीं हैं। भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलाकर कुल संख्या 82 हो जाती है, जो तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक आंकड़े से आठ कम है।

वहीं, बीजद के पास दो विधायकों के निलंबन के बाद 48 विधायक रह गए हैं। एक सीट जीतने के बाद उसके पास 18 प्रथम वरीयता वोट बचेंगे, जबकि दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 12 और वोटों की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि सीपीआई-एम का एक विधायक है। इस बीच कांग्रेस ने बीजद प्रमुख नवीन पटनायक से मुलाकात का समय मांगा है और चौथी सीट के लिए संयुक्त उम्मीदवार उतारने की इच्छा जताई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘संख्या बल कम होने के बावजूद हम राज्यसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। मैं दिल्ली जाकर हाईकमान से चर्चा करूंगा और उसके बाद तय होगा कि पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी या किसी बाहरी उम्मीदवार को समर्थन देगी।’ उधर, बीजद की राजनीतिक मामलों की समिति सर्वसम्मति से नवीन पटनायक को उम्मीदवारों के चयन का अंतिम अधिकार सौंप दिया है।

विधानसभा में विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने कहा कि सभी विधायक पार्टी अध्यक्ष के फैसले के अनुसार मतदान करेंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पांच मार्च तक चलेगी। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च को होगी, जबकि 9 मार्च नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है। वहीं राज्यसभा चुनाव का मतदान 16 मार्च को होगा। ये चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि अप्रैल में बीजद के निरंजन बिशी और मुन्ना खान व भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

 

 शादी के तीन महीने बाद नवविवाहिता ने दी जान

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पुणे। हाथों की मेहँदी का रंग अभी छूटा भी नहीं था कि ससुरालवालों की प्रताड़ना से परेशान होकर नवविवाहिता ने अपनी जान दे दी। जी हाँ, पुणे में वैष्णवी हगवणे का मामला अभी ताज़ा ही है कि एक और महिला ने अपने ससुराल वालों की प्रताड़ना के कारण ख़ुदकुशी कर ली। खबर है कि महिला ने एक बिल्डिंग से नीचे कूदकर अपनी जान दे दी। इस संदर्भ में मृतक महिला के ससुराल वालों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और पुलिस घटना की जांच कर रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना पुणे के बाणेर इलाके में हुई। मृतक महिला का नाम गंगा तेजस बेंबलकर (27) है। उसके पति का नाम तेजस शिवा बेंबलकर है। तेजस ने अमेरिका से उच्च शिक्षा हासिल की है। तेजस और गंगा की शादी 3 महीने पहले हुई थी। लेकिन शादी के बाद गंगा को खुशी मिलने के बजाय अपने ससुराल वालों की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। गंगा के घरवालों ने आरोप लगाया है कि इसी प्रताड़ना से तंग आकर नई-नवेली दुल्हन ने उसी बिल्डिंग से कूदकर सुसाइड कर लिया जहां वह रहती थी। इस मामले में मृतक महिला के पिता ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है, और पुणे के बाणेर पुलिस स्टेशन में उसके पति, सास, ननद और ससुर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने घटनास्थल पर पंचनामा किया। उन्हें घटनास्थल पर एक सुसाइड नोट मिला। इस सुसाइड नोट में महिला ने लिखा है कि वह मौत के लिए खुद जिम्मेदार है, लेकिन पुलिस महिला के परिवार के आरोपों के आधार पर जांच कर रही है। वहीं इस घटना से इलाके में हड़कंप मचा है और सवाल उठ रहा है कि आखिर और कितने वैष्णवी और गंगा मारे जाएंगे ?

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News Desk

भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के हित में है

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देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ग्वालियर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसल बीमा की राशि, भारत अमेरिका ट्रेड डील सहित अन्य राजनीतिक मुद्दों पर अपना बयान दिया।केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस पर उनको नमन करते हुए कहा कि भारत माता की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर किया और वह आज भी हमारी प्रेरणा हैं। वह देश के लिए संपूर्ण जीवन देकर गए। हम देश के लिए जिए यही संकल्प करें और देश के लिए जीने का मतलब यही है कि हम अपनी ड्यूटी अपना कर्तव्य जो काम हमारी तरफ तय किया गया है उसे कैसे मेहनत से करें, ईमानदारी से करें, प्रामाणिकता के साथ करें और केवल अपना ही ना सोच अपने साथ-साथ समाज का भी देश का भी विचार करें। स्वदेशी अपनाएं,अपने देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान करें।

शक्तिशाली भारत का निर्माण

इजराइल की संसद में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कई चीजें पहली बार हो रही हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एक वैभवशाली गौरवशाली संपन्न समृद्ध शक्तिशाली आत्मनिर्माण और विकसित भारत का निर्माण हो रहा है। यह हम नहीं कहते जमाना कहता है। भारत आगे बढ़ रहा है और मेरा विश्वास है कि आज जिस गति से भारत आगे बढ़ रहा है हम विश्व बंधु तो हैं ही, हम अपनी नहीं सोचते हम दुनिया की भी सोचते हैं। दुनिया को बेहतर दिशा देने में हम सक्षम होंगे।

अन्नदाताओं के चरणों में मेरा बार-बार प्रणाम

मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कल वोत्सवाना से आठ चीतों के कूनो आने को लेकर शिवराज सिंह ने कहा कि चीतों का स्वागत है। इससे पर्यटन बढ़ेगा। उनको फिर से स्थापित करने का यह काम हुआ है। इससे न केवल टूरिज्म में बढ़ेगा जीव के प्रति जो हमारा कर्तव्य है हम उसकी पूर्ति भी करेंगे और पर्यावरण भी अच्छा होगा। फसल बीमा की राशि किसानों के खातों में कब तक आएगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा अन्नदाताओं के चरणों में मेरा बार-बार प्रणाम है। मेरे लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा है। मैं हमेशा खेतों में ही रहता हूं। हम एक के बाद एक अलग-अलग योजनाओं के क्रियान्वयन के जरिए किसानों के जीवन को बेहतर बनाने का काम कर रहे हैं। उनका जायज हक उन्हें जरूर मिलेगा।

किसानों के हित सुरक्षित

भारत- अमेरिका ट्रेड डील को कांग्रेस द्वारा किसान विरोधी कहने के सवाल पर कहा कि यह कांग्रेस कह रही है, जो देश के लिए कुछ नहीं कर पाए हैं वह सिर्फ कहेंगे। वह सिर्फ विलाप कर रहे हैं, सच यह है कि भारत के सभी हित सुरक्षित हैं। किसानों के हित सुरक्षित हैं। एक कृषि मंत्री भी कह रहा है, एक किसान भी कह रहा है, किसान निश्चिंत रहें। वहीं ASI की रिपोर्ट में भोजशाला के हिंदू मंदिर होने के खुलासे के सवाल पर शिवराज सिंह ने कहा कि सारी रिपोर्ट कोर्ट में है।