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Text Before Tradition: Varun Gupta Advocates Evidence-Based Epic Interpretation

At a time when mythological narratives are often interpreted through sentiment or ideology, Varun Gupta promotes a text-first approach rooted in manuscript evidence and critical editions. His methodology emphasizes internal consistency, structural analysis, and comparative recension study. By prioritizing textual data over assumption, Gupta aims to distinguish original narrative frameworks from later expansions. His scholarship engages with historiography, hermeneutics, and epic composition theory, positioning classical Indian texts within global literary discourse. This disciplined research model strengthens academic engagement with Sanskrit literature while maintaining respect for its cultural significance.

New Delhi, India — Varun Gupta, an Indian scholar of Indic civilizational literature, is emerging as a significant voice in the world of Sanskrit epic studies, thanks to his rigorous text-first approach to the Mahābhārata, Rāmāyaṇa, and Purāṇic traditions. Gupta’s work focuses on textual criticism, narrative architecture, and ethical philosophy within classical Indian scripture, offering new perspectives on age-old narratives.

Gupta’s research portfolio bridges philological analysis, manuscript study, and comparative recension theory, emphasizing the importance of internal textual coherence over devotional or sensational interpretations. His analytical framework draws on diverse scholarly traditions — including historiography, hermeneutics, and narrative theory — to reconstruct layered epic formation and doctrinal developments.

Innovative Research in Epic Narrative Structure

Among Gupta’s academic pursuits is an extensive examination of the compositional architecture of conflict scenes in the Mahābhārata. His work delves into the structure of major war episodes, celestial intervention narratives, and the ethical interplay between characters amid martial tensions. Gupta places special emphasis on distinguishing original narrative layers from later interpolations and theological expansions through critical edition comparison.

In the Rāmāyaṇa tradition, Gupta analyzes comparative recension variants, exploring how regional and chronological textual layers contribute to evolving interpretations of kingship, dharma, and exile motifs. In Purāṇic literature, he studies mythographic structure and cosmological symbolism to understand how later texts interact with and reshape epic material within a civilizational framework.

Ongoing Projects Highlight Scholarly Depth

Gupta’s current research includes a range of advanced studies within the Mahābhārata tradition, such as:

  • Narrative amplification in the Ghoṣa-yātrā episode
  • Structural and historiographical analysis of the Virāṭa Yuddha
  • Solar theophany and hyper-intensification in the Jayadratha episode

Constructing the Young Warrior: narrative intensification and age instability in the Abhimanyu episode of the Droṇa Parva (Day Thirteen)

These projects further underline Gupta’s commitment to unveiling the complex ethical dramaturgy and compositional layering inherent in ancient Sanskrit epics.

Public Engagement and Recognition

Beyond academia, Gupta actively contributes to public discourse on classical texts. He is the founder and host of GrahRahasya Decoded, a digital lecture series that applies scholarly rigor to textual questions in epic literature. In 2025, he delivered a keynote titled “Historicity, Itihāsa, and Proto-Psychological Dimensions of Epic Conflict” at the Samvad Connect Civilizational Forum, integrating interpretive theory with psychological models of narrative identity.

Gupta’s contributions have been recognized with an honorary doctorate for his work in Indic literatures, and he continues to shape conversations on cultural text interpretation both within and beyond academic circles.

Connect with Varun Gupta

Learn more about Gupta’s insights and research through his official channels:
🔹 YouTube – GrahRahasya Decoded
🔹 Instagram – @grahrahasya_decoded
📧 office@shrivarungupta.com

बंगाल की 84 SC-ST सीटों पर TMC का बड़ा दांव, ‘तपशिलीर संगलाप’ से साधेगी समीकरण

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कोलकाता|पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्य की 84 अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वाली विधानसभा सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी की है। इसके लिए टीएमसी 60 दिनों का एक विशेष जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। पार्टी ने इस अभियान के साथ ही बीजेपी पर राज्य का फंड रोकने और पिछड़े समुदायों का अपमान करने का भी आरोप लगाया है।

5 मार्च से शुरू होगा ‘तपशिलीर संगलाप’ अभियान

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को इस अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘तपशिलीर संगलाप’ नाम का यह अभियान होली के बाद 5 मार्च से शुरू होगा। इस दो महीने के कार्यक्रम के दौरान, टीएमसी के प्रतिनिधियों की टीमें विशेष वाहनों से लक्षित विधानसभा क्षेत्रों के गांवों और बूथों तक पहुंचेंगी।अभिषेक बनर्जी ने कहा कि हर वाहन में तीन से पांच सदस्यों की टीम होगी। यह टीम जमीनी स्तर पर लोगों से बातचीत करेगी और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताएगी। साथ ही, वे बीजेपी द्वारा एससी और एसटी समुदायों पर किए जा रहे अत्याचार का भी खुलासा करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, “इन 84 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी आपके कंधों पर है।”

बीजेपी पर आरक्षण खत्म करने की साजिश का आरोप

अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने बार-बार पिछड़े समुदायों का अपमान किया है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन का जिक्र करते हुए दावा किया कि पवित्र जल ले जाने के बावजूद मतुआ समुदाय के सदस्यों को मंदिर परिसर में प्रवेश करने से रोका गया था।बनर्जी ने यह भी दावा किया कि बीजेपी बी आर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में संशोधन करके एससी और एसटी के लिए आरक्षण खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के केवल 240 सदस्य होने पर भी वे ऐसा करने का इरादा रखते हैं।

केंद्र पर फंड रोकने का लगाया आरोप

टीएमसी नेता ने केंद्र पर पश्चिम बंगाल की ‘आर्थिक नाकेबंदी’ करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दी कि वे साबित करें कि केंद्र सरकार ने पिछले पांच साल में राज्य में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम जैसी योजनाओं के लिए फंड जारी किया है।उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने राज्य से लगभग 7 लाख करोड़ रुपये टैक्स के रूप में वसूले, लेकिन बंगाल का बकाया बिहार और गुजरात जैसे अन्य राज्यों को दे दिया गया। उन्होंने कहा, “अगर वे यह साबित कर दें कि मोदी सरकार ने बंगाल के 2 करोड़ 64 लाख जॉब कार्ड धारकों को 100 दिन के काम के लिए दस पैसे भी दिए हैं, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।”

‘रथ यात्रा’ पर भी साधा निशाना

अभिषेक बनर्जी ने बंगालियों की खाने-पीने की आदतों पर बीजेपी नेताओं की कथित टिप्पणियों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग “दिल्ली के जमींदारों” को यह तय नहीं करने देंगे कि वे क्या खाएंगे या कैसे रहेंगे। उन्होंने बीजेपी की ‘रथ यात्रा’ पर तंज कसते हुए पार्टी नेताओं को ‘धोखेबाज’ कहा।बनर्जी ने कार्यकर्ताओं से कहा, “जब उनका रथ आपके इलाके से गुजरे, तो बंगाल के आतिथ्य से उनका स्वागत करें। उन्हें मछली और मांस भेंट करें।” उन्होंने बीजेपी के ‘बंगाल विरोधी’ रुख की याद दिलाने के लिए उन्हें मिठाई खिलाने को भी कहा। उन्होंने यह भी कहा कि इन रथों को संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि ‘उल्टो रथ’ के दौरान इन नेताओं को वापस भेजा जा सके।

कार्यकर्ताओं को दिया 250 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य

अभिषेक बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि राज्य में बीजेपी की सीटों की संख्या शून्य हो जाए। उन्होंने टीएमसी सरकार के लिए लगातार चौथी बार 250 से अधिक सीटों के साथ जीत हासिल करने का आह्वान किया। बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है।

तुष्टिकरण से नहीं होगा बंगाल का विकास, 8 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा राज्य

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बंगाल में चुनावी बिगुल फूंका। उन्होंने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एक जनसभा के दौरान तृणमूल कांग्रेस की नीतियों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण से राज्य का विकास नहीं हो सकता। शाह ने दावा किया कि राज्य आठ लाख करोड़ के कर्ज में डूबा है। शाह ने मदरसों को मिलने वाली आर्थिक मदद पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दूसरे राज्यों के विपक्षी दलों की सियासत पर भी हमले बोले। उन्होंने बिहार, असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए तेजस्वी यादव, गौरव गोगोई और एमके स्टालिन की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की।

आगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा की परिवर्तन यात्रा का उद्देश्य राज्य में बदलाव लाना और बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल में भ्रष्ट तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाकर विकास का नया दौर शुरू करना चाहती है। शाह ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राज्य का विकास प्रभावित हुआ है और बंगाल की स्थिति लगातार खराब हुई है।

 

ममता बनर्जी पर शाह ने साधा निशाना
अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर गलती से फिर तृणमूल कांग्रेस सत्ता में लौटती है तो सरकार ममता बनर्जी नहीं बल्कि उनके ‘भतीजे’ द्वारा चलाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी राज्य के विकास में रुचि नहीं रखतीं और सिर्फ अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं। शाह ने यह भी कहा कि पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा भेजा जा रहा है, जिनके कार्यकाल में बंगाल में भ्रष्टाचार बढ़ा।

 घुसपैठियों पर कही ये बात
गृह मंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को घुसपैठियों के लिए सुरक्षित जगह बना दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर घुसपैठियों को राज्य से बाहर किया जाएगा और सीमा वाले राज्य की सुरक्षा मजबूत की जाएगी। शाह ने भरोसा दिलाया कि किसी भी हिंदू शरणार्थी की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। साथ ही उन्होंने वादा किया कि भाजपा सत्ता में आने पर राज्य सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन सुनिश्चित करेगी।

 

 

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यात्रीगण ध्यान दें! होली पर AI से कम होगा ट्रेनों का इंतजार, जानें कैसे मिलेगी राहत

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नई दिल्ली|इस बार होली पर यात्रियों की संभावित भारी भीड़ को कंट्रोल करने के लिए भारतीय रेलवे ने नई रणनीति अपनाई है। टिकट बिक्री, ट्रेनों के रूट निर्धारण और स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लिया जा रहा है। रेलवे का दावा है कि इससे यात्रियों को लंबी कतारों और इंतजार से राहत मिलेगी।उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया, किसी भी स्टेशन पर अव्यवस्था की स्थिति न बने। एआई के जरिए भीड़ का रियल टाइम आकलन किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर सिर्फ आधे घंटे में स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया जा रहा है, ताकि यात्रियों को तुरंत राहत मिल सके।होली के त्योहार को देखते हुए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इस बार विशेष होल्डिंग एरिया तैयार किया गया है। यहां हाई रिजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो अनारक्षित यात्रियों की संख्या का लगातार आकलन करते हैं। इन कैमरों से मिलने वाले डेटा के आधार पर एआई सिस्टम भीड़ का रियल टाइम विश्लेषण करता है। उसी के अनुसार ट्रेनों की संख्या, समय और संचालन की योजना तय की जाती है, ताकि अचानक बढ़ने वाली भीड़ को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। रेलवे ने नई दिल्ली स्टेशन पर अनारक्षित यात्रियों के लिए अलग से होल्डिंग एरिया तैयार किया गया है, जहां टिकट बिक्री का पूरा डाटा सीधे एआई सिस्टम को भेजा जा रहा है। जिस रूट के लिए सबसे ज्यादा अनारक्षित टिकट बिक रहे हैं, उसी दिशा में ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जा रही है। यानी अब ट्रेनों का संचालन तय समय से नहीं, बल्कि यात्रियों की वास्तविक मांग और भीड़ के आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है।

होल्डिंग एरिया में यात्रियों को मिलेगी ये सुविधाएं

नई दिल्ली स्टेशन पर अजमेरी गेट के पास बने होल्डिंग एरिया को प्री-टिकटिंग, टिकटिंग और पोस्ट टिकटिंग हिस्सों में बांटा गया है। यहां 25 से अधिक टिकट काउंटर और 25 एटीवीएम मशीन लगाई गई हैं। यात्रियों की मदद के लिए रेलवे स्टाफ तैनात हैं। इस क्षेत्र में 150 से ज्यादा टॉयलेट, फूड स्टॉल और पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। स्टेशन पर बड़ी संख्या में आरपीएफ और जीआरपी के जवान तैनात हैं। साथ ही, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध है।

स्पेशल ट्रेनों और प्लेटफार्म व्यवस्था

होली स्पेशल ट्रेनें मुख्य रूप से प्लेटफार्म नंबर 16 से चलाई जा रही है। अजमेरी गेट से एंट्री होगी और यात्रियों को रेलवे स्टाफ की मदद से कतारबद्ध करे प्लेटफार्म नंबर 16 पर ले जाया जा रहा है। अनारक्षित टिकट धारक पहले होल्डिंग एरिया में रहेंगे और ट्रेन के समय प्लेटफार्म पर भेजे जाएंगे। विशेष ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि भीड़ कम हो। उत्तर रेलवे ने होली पर विशेष ट्रेनें चलाई हैं। इनमें अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल और असम के लिए हैं। भीड़ बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें भी शुरू की जाएंगी।

एंट्री-एग्जिट नियम भी बदले

— स्पेशल ट्रेन वाले यात्री केवल अजमेरी गेट से प्रवेश कर सकेंगे।
— अन्य ट्रेनों के कंफर्म टिकट वाले यात्री पहाड़गंज और अजमेरी गेट से आ सकेंगे।
— बिना टिकट यात्री या प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को वेटिंग एरिया में रुकना होगा।
— यात्रियों के लिए स्टेशन पर किए गए है ये इंतजाम
— अतिरिक्त टिकट काउंटर और हेल्प डेस्क।
— खानपान और पीने के पानी की सुविधा।
— फुट ओवर ब्रिज और मेट्रो गेट के पास सुरक्षाकर्मी तैनात।
— यात्रियों के लिए बड़ी संख्या में पंडाल और मिनी कंट्रोल रूम।
— जरूरत पड़ने पर रिजर्व रैक और बैकअप ट्रेनें तैयार।

रेलवे ने यात्रियों से किया ये अनुरोध

— अपनी ट्रेन के निर्धारित समय से कम से कम एक घंटा पहले स्टेशन पहुंचें।
— सीढ़ियों और प्लेटफार्म पर सामान न रखें।
— अफवाहों पर ध्यान न दें और रेलवे स्टाफ की मदद लें।

 चर्चा में उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया, सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक होली का पर्व है। घर से दूर काम या व्यवसाय करने वाले कई लोग घर पर अपनों के साथ होली का त्योहार मनाना चाहते हैं। इसके लिए उत्तर रेलवे ने यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। हर बड़े स्टेशन जैसे नई दिल्ली, आनंद विहार और अन्य महत्वपूर्ण स्टेशनों पर जहां बड़ी संख्या में लोग ट्रेन पकड़ने आते हैं, वहां पुख्ता व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुरक्षा में कर्मियों की ड्यूटी बढ़ाई गई है।उपाध्याय ने बताया, होली को देखते हुए उत्तर रेलवे की ओर से कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही है। इनमें से लगभग अधिकांश ट्रेनें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, असम के लिए हैं। भीड़ अधिक बढ़ने की स्थिति में अन्य स्पेशल ट्रेनें भी शुरू की जाएगी। दिल्ली के सभी रेलवे स्टेशनों पर स्पेशल ट्रेनों की जानकारी के लिए घोषणाएं की जा रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी इसकी जानकारी दी जाएगी। यात्रियों को टिकट खरीदने में परेशानी न हो इसके लिए सभी रेलवे स्टेशनों में तैयार किए गए होल्डिंग एरिया में ही टिकट काउंटर भी बनाए गए है। ताकि यात्री वहीं से आसानी से टिकट खरीद सके।

छठी बार टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में टीम इंडिया, जानें पिछली 5 बार का पूरा रिकॉर्ड

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Team India Record in T20 World Cup Semifinal: आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के एक महत्वपूर्ण मुकाबले में रविवार को भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। यह छठा मौका है जब भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप के अंतिम चार में जगह पक्की की है। इससे पहले भारतीय टीम 2007, 2014, 2016, 2022 और 2024 में भी सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर चुकी है। अब चलिए जानते हैं कि कब-कब भारतीय टीम सेमीफाइनल से आगे बढ़ी और कब-कब सेमीफाइनल में ही उसका सफर समाप्त हो गया।

पहले ही वर्ल्डकप में मिला सेमीफाइनल का टिकट

साउथ अफ्रीका की मेजबानी में साल 2007 में पहले टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ था, जहां भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुंची। टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और सुपर 4 के पहले ही मुकाबले में उसे न्यूजीलैंड से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इंग्लैंड और साउथ अफ्रिका को हराकर टीम इंडिया ने सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। अंतिम 4 में भारतीय टीम ने उस टाइम की वनडे वर्ल्ड चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में भारतीय टीम का सामना पाकिस्तान से हुआ। खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को हराकर पहली बार ट्रॉफी उठाई।

इसके बाद भारतीय टीम 7 साल बाद नॉकआउट में पहुंची। 2014 में आयोजित टी20 वर्ल्डकप के अंतिम 4 में भारतीय टीम ने शानदार अंजाद में प्रवेश किया। यहां भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका को हराकर फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम श्रीलंका से हार गई। इसके बाद धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम लगातार छठा टी20 वर्ल्डकप खेलने उतरी। 2016 में भारतीय टीम तीसरी बार सेमीफाइनल में पहुंची, जहां उसे वेस्टइंडीज ने मात दी।

2021 में टीम इंडिया पहले राउंड से हुई बाहर

2018 और 2020 का टी20 वर्ल्डकप अलग-अलग कारणों की वजह से नहीं हो पाया। 2021 में UAE में टी20 वर्ल्डकप आयोजन हुआ और भारतीय टीम यहां पहली बार वर्ल्डकप पाकिस्तान से हार गई। इस वर्ल्डकप में भारतीय टीम न्यूजीलैंड को तिलिस्म फिर तोड़ने में नाकाम रही और पहले ही राउंड से बाहर हो गई। इसके बाद 2022, 2024 और 2026 के टी20 वर्ल्डकप में भारतीय टीम ने अंतिम 4 में जगह बनाई।

2022 के टी20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में भारतीय टीम को इंग्लैंड से 10 विकेट से शिकस्त झेलनी पड़ी। इसके बाद 2024 के टी20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने उसी इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाई। भारतीय टीम ने अब तक 5 टी20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में हिस्सा लिया है और 3 बार आगे बढ़ी है तो दो बार सेमीफाइनल में ही सफर समाप्त हो गया है।

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होलिका दहन आज या कल? जानिए सही तिथि, भद्रा काल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

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Holika Dahan 2026 Shubh Muhurat Puja Timing Live Updates in Hindi: होली हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार होता है, जो हर वर्ष फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है जिसका विशेष महत्व होता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत की त्योहार होता है। लेकिन इस वर्ष होलिका दहन और होली की डेट को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिन, होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण है जिसके कारण संशय है, कि आखिर होलिका दहन कब है और रंगों वाली होली कब खेली जाएगी।
इस वर्ष होलिका दहन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि 2 या 3 मार्च को कब होलिका दहन करना होगा शुभ। कई ज्योतिष के जानकार 2 मार्च को होलिका दहन करना ज्यादा शुभ और लाभकारी बता रहे हैं। पंचांग के अनुसार 2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू हो जाएगी जो अगले दिन यानी 3 मार्च को शाम 5 बजकर 08 मिनट पर खत्म होगी। लेकिन भद्रा 2 मार्च को ही शाम 5 बजकर 28 मिनट पर लगेगी और यह रात 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों में होलिका दहन भद्रा में करना वर्जित माना जाता है। लेकिन अगर होलिका दहन के दिन पूरी रात भद्रा रहे तो भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन करना उचित रहेगा। पंचांग के अनुसार 2 मार्च को भद्रा पुच्छ रात 11 बजकर 53 मिनट से लेकर रात्रि 01 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस दौरान होलिका दहन करना शुभ रहेगा। वहीं 3 मार्च को चंद्रग्रहण लगेगा जिसमें होलिका दहन करना वर्जित रहता है। 
होलिका दहन से पहले विधि-विधान से होलिका पूजन का विशेष महत्व होता है। पूजन के बाद ही होलिका दहन करना शुभ माना जाता है। अग्नि में कई चीजों को अर्पित करने का विधान होता है। होलिका दहन में विशेष सामग्रियों को अर्पित करने से जीवन में से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। होलिका दहन पर इन चीजों के जरूर करें अर्पित। 

नारियल
धूप
रोली
गुलाल
अनाज
उपलों से बनी माला
सरसों का दान 
पान और सुपारी
गेहूं और चने की बालियां 
भद्रा और चंद्रग्रहण के कारण कई ज्योतिष के जानकार, आज यानी 02 मार्च 2026 को होलिका दहन करना शुभ मान रहे हैं। होलिका दहन करने से पहले होलिका की पूजा करने का विशेष विधान होता है। होलिकी पूजन में सबसे पहले आपको रोली, अक्षत, गुड़, नारियल और बताशे  अर्पित करें फिर होलिका को जल अर्पित करते हुए परिक्रमा करें और सुख-समृद्धि की कामना करें। इसके बाद अग्नि को प्रच्वलित करें। 
होलिका दहन में भगवान विष्णु और भक्त प्रह्रलाद की पूजा करें और अग्नि में जौं और गेहूं की बालियां को अर्पित करना बहुत ही शुभ फलदायी साबित होता है। नई फसल की आहुति देने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 
इस बार होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। जिसके चलते होलिका दहन और फिर होली को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण 3 मार्च को पड़ रहा है। चंद्र ग्रहण के लगने से पहले ही सूतककाल शुरू हो जाता है। सूतक काल का अच्छा नहीं माना जाता है। 3 मार्च को चंद्रग्रहण शाम को 6 बजकर 47 मिनट पर खत्म होगा। ऐसे में 4 मार्च 2026 को ही रंगों वाली होली खेली जाएगी। 

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भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले गोरखा नेता, गोरखालैंड की मांग फिर तेज

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सिलीगुड़ी|देश की संघीय संरचना और राज्यों के पुनर्गठन से जुड़ा गोरखालैंड का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर अलग गोरखालैंड राज्य की पुरानी मांग दोहराई। साथ ही यह भी कहा कि यदि अलग राज्य संभव नहीं है तो उत्तर बंगाल को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए।सिलीगुड़ी में हुई इस बैठक में गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों ने पहाड़ी क्षेत्रों की प्रशासनिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं को विस्तार से रखा। बैठक में दार्जिलिंग से भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट और भाजपा विधायक नीरज जिम्बा भी मौजूद थे।बैठक के बाद सांसद राजू बिष्ट ने कहा, हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और गोरखा समाज की पीड़ा को सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा संवाद के जरिए समाधान में विश्वास करती है और यदि 2026 में राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो पहाड़ की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद के रूप में वे गोरखा समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं।

गोरखालैंड की मांग नई नहीं

गोरखालैंड की मांग 1980 के दशक से राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा रही है। दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में अलग राज्य की मांग को लेकर कई बार आंदोलन हुए। 2007 के आंदोलन के बाद गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्वशासन के जरिए समस्याओं का समाधान करना था। हालांकि, गोरखा संगठनों का आरोप है कि जीटीए के गठन के बावजूद मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

राज्य पुनर्गठन और राष्ट्रीय संदर्भ

देश में समय-समय पर नए राज्यों के गठन का इतिहास रहा है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ बने, जबकि 2014 में तेलंगाना का गठन हुआ। ऐसे में गोरखालैंड की मांग को भी समर्थक संवैधानिक दायरे में वैध राजनीतिक मांग बताते रहे हैं। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के विभाजन के किसी भी प्रस्ताव का लगातार विरोध किया है।

राजनीतिक समीकरण

दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर लंबे समय से भाजपा का वर्चस्व रहा है। पहाड़ी क्षेत्र में भाजपा को लगातार समर्थन मिलता रहा है, लेकिन अलग राज्य की मांग पूरी न होने को लेकर स्थानीय असंतोष भी समय-समय पर सामने आता रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य विभाजन का मुद्दा भाजपा के लिए भी संतुलन साधने वाली चुनौती है, क्योंकि एक ओर पहाड़ की आकांक्षाएं हैं तो दूसरी ओर पूरे राज्य की राजनीतिक संवेदनशीलता।

केंद्र की पहल

पहाड़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले भी वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और मध्यस्थ नियुक्त करने की पहल की है, ताकि संवाद के जरिए समाधान का रास्ता निकाला जा सके। इसी क्रम में गोरखा नेताओं के साथ भाजपा नेतृत्व की ताजा बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोरखालैंड का प्रश्न केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संघीय ढांचे, पहचान की राजनीति और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि संवाद और राजनीतिक सहमति के जरिए इस लंबे समय से लंबित मांग का कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं।

आज पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच द्विपक्षीय वार्ता, भारत-कनाडा रिश्तों को नई दिशा देने का प्रयास

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चार दिवसीय भारत यात्रा पर शुक्रवार को मुंबई पहुंचने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति बन सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनिरल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में कई अहम समझौते हो सकते हैं। यह द्विपक्षीय वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब ईरान पर इस्राइल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति है।

रणनीतिक संबंधों को पटरी पर लाने की पहल

कार्नी की भारत यात्रा को 2023 में दोनों देशों के बीच हुए राजनयिक विवाद से कमजोर पड़े रणनीतिक संबंधों को पटरी पर लाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कार्नी का यह दौरा भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहा है। दरअसल 2023 में कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन त्रूदो द्वारा खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के आरोप के कारण दोनों देशों के संबंध बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

 

सत्ता परिवर्तन के बाद आया बदलाव

पिछले साल अप्रैल में कनाडा में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद कार्नी ने भारत से संबंध सुधारने की पहल शुरू की। चंद महीने बाद ही दोनों पक्षों ने उच्चायुक्तों को फिर से तैनात किया। पिछले साल जून में जी-7 शिखर सम्मेलन में कनाडा पहुंचे पीएम ने सम्मेलन के इतर कार्नी से व्यापक बातचीत की थी। इस दौरान दोनों देशों में सीईपीए पर आगे बढऩे पर सहमति बनी थी।

 

खालिस्तानी चरमपंथियों पर होगी बात

पीएम मोदी-कार्नी के बीच बातचीत में कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों पर लगाम लगाने पर भी बातचीत होगी। भारत दौरे से पूर्व कार्नी ने मुंबई आतंकी हमला मामले के मास्टर माइंड तहव्वुर राणा की कनाडा की नागरिकता रद्द करने संबंधी प्रक्रिया की शुरुआत कर अपने देश की भूमि का भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाई है।

सीईपीए क्यों है दोनों देशों के लिए खास?

भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए दोनों देश 2010 से ही सीईपीए के लिए प्रयासरत हैं। समझौते के बाद भारत से निर्यात होने वाली दवाईयों, कृत्रिम आभूषण, कपड़े जैसे उत्पादों पर कम शुल्क लगेगा, जबकि कनाडा को दालों को भारतीय बाजार तक पहुंच मिलेगी।

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Groomy लाया दिल्ली एनसीआर और चंडीगढ़ में प्रोफेशनल स्पा एट होम

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प्रमाणित मेल थेरेपिस्ट और प्रोफेशनल ग्रूमिंग एक्सपर्ट्स सीधे ग्राहकों के घर जाकर सुरक्षित और आरामदायक वातावरण में उच्च स्तरीय स्पा और सैलून सेवाएं प्रदान करते हैं।


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हर अपॉइंटमेंट में सख्त हाइजीन प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है, जिसमें सैनिटाइज्ड उपकरण और प्रोफेशनल सर्विस स्टैंडर्ड शामिल हैं।

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बुकिंग सीधे कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से की जा सकती है।

मणिपुर में तीन उग्रवादी गिरफ्तार, हथियार भी जब्त  

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मणिपुर पुलिस ने पूर्व और पश्चिमी इंफाल जिलों में जबरन वसूली में शामिल दो अलग-अलग प्रतिबंधित  संगठनों के तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया। राज्य पुलिस के रविवार को जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, तीनों आरोपियों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पूर्वी इंफाल जिले के वांगखेई अयांगपल्ली से यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (कोइरेंग) के दो सक्रिय कैडर को गिरफ्तार किया। इनके पास से एक पिस्टल और 16 जिंदा राउंड से भरी दो मैगजीन बरामद की गईं। वहीं, कंगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (नोंगड्रेनखोम्बा) के एक कैडर को शनिवार को इंफाल वेस्ट जिले के खगेमपल्ली पंखा न्गानापी थोंग ममांग में उसके घर से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए सुरक्षाबल जिलों के बाहरी और कमजोर इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।

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