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Tuesday, November 3, 2026
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10 साल का सूखा खत्म कर पाएंगी प्रियंका गांधी? असम की सत्ता के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस

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नई दिल्‍ली। देशभर में कई चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद अब कांग्रेस किसी तरह से यह सूखा खत्म करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी ने केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुच्चेरी (Kerala, Tamil Nadu, West Bengal, Puducherry) के लिए शनिवार को स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है। प्रियंका गांधी को असम में स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह केरल में दिग्गज नेता मधुसूदन मिस्त्री को, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी का जिम्मा छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव को दिया गया है। पश्चिम बंगाल के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बीके हरिप्रसाद को बनाया गया है।

पश्चिम बंगाल में यही उम्मीद है कि मुख्य लड़ाई ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच होगी। वहीं तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमे के बीच लड़ाई होगी। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही गठबंधन में सहयोगी हैं। अब कांग्रेस की मुख्य लड़ाई असम में होनी है। इसीलिए असम की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपी गई है।

 

असम की सत्ता के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस

कांग्रेस चाहती है कि इस बार असम की सत्ता बीजेपी से छीन ली जाए। बीजेपी असम में 2016 से ही सत्तासीन है। ऐसे में कांग्रेस एंटीइनकंबेंसी का भी फायदा उठाना चाहती है। असम में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री तरुण गोगोई थे और अब उनके बेटे गौरव गोगोई कांग्रेस की तरफ से आगे किए जा सकते हैं। फिलहाल वह लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं।

प्रियंका गांधी के लिए क्यों अहम है असम

असम में पहली बार गांधी परिवार को कोई सदस्य इतनी बड़ी जिम्मेदारी ले रहा है। इसलिए प्रियंका गांधी का स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया जाना बेहद अहम माना जा रहा है। स्क्रीनिंग कमेटी का काम होता है कि वह प्रत्याशियों की संभावित लिस्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजता है और वहां इनपर मुहर लगाई जाती है। गांधी के करीबी माने जाने वाले इमरान मसूद और सप्तगिरि शंकर को असम स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य बनाया गाय है।

बता दें कि 2019में प्रियंका गांधी ने राजनीति में कदम रखा था और फिर 2022 में ही कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की देखरेख में ही लड़ा था। बीते कुछ समय से प्रियंका गांधी केंद्र की नीतियों के खिलाफ झंडा बुलंद कर रही हैं। जी राम जी विधेयक को लेकर भी उन्होंने संसद के बाहर और अंदर केंद्र सरकार का जमकर विरोध किया।

असम के पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 126 सीटों वाले राज्य में एनडीए ने 75 और कांग्रेस के गठबंधन ने 50 सीटें जीती थीं। ऐसे में दोनों के बीच सीटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था। दोनों गठबंधनों के बीच वोट शेयर का केवल 1.6 फीसदी का अंतर था।

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