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Monday, September 28, 2026
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सुपर जेट के बाद बड़ा समझौता? भारत में Su-57 फाइटर जेट की एंट्री की अटकलें तेज

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नई दिल्‍ली। भारत और रूस (India and Russia) के बीच 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Sukhoi Su-57E को मिलकर बनाने की बातचीत चल रही है, जो अब आगे बढ़कर टेक्निकल लेवल पर पहुंच गई है। हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन  (UAC ) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब ‘खतरनाक’ सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे?

SJ-100 समझौता: एक नया मोड़
भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक ‘टेस्ट केस’ साबित हो सकती है।

क्या बोले रूसी अधिकारी?
खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं।

Su-57 ‘Felon’: रूस का सबसे घातक योद्धा
Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे-

स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है।

सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता।

हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं।
भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम)

आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:

इंजन की तकनीक में कमी।
स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।
लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे।

क्या अब पासा पलट रहा है?

SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-

नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया ‘स्टेज 2’ इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।
युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।
चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है।

चुनौतियां और ‘आत्मनिर्भर भारत’

भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल ‘खरीदने’ में नहीं, बल्कि ‘भारत में बनाने’ और ‘पूर्ण तकनीक’ प्राप्त करने में रुचि रखता है।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है।

कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो ‘Felon’ भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

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