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Sunday, November 1, 2026
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विस चुनावों के प्रदर्शन से तय होगा पार्टी का भविष्य और सांगठनिक ढांचा

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा कार्यभार संभालने के साथ ही संगठन में व्यापक फेरबदल और भविष्य की तैयारियों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी समय में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव न केवल पार्टी के लिए राजनीतिक परीक्षा होंगे, बल्कि कई नेताओं के भविष्य का फैसला भी करेंगे। इन चुनावों में नेताओं के जमीनी प्रदर्शन के आधार पर ही नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें जगह दी जाएगी।
पार्टी ने विशेष रूप से असम के लिए एक सशक्त रणनीतिक टीम तैनात की है। चुनाव प्रभारी बैजयंत जय पांडा के मार्गदर्शन में काम कर रही इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे प्रमुख चेहरों को शामिल किया गया है। इनके साथ राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे अनुभवी नेताओं को भी जोड़ा गया है। यह टीम भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करेगी। इन नेताओं की जिम्मेदारी केवल चुनावी सभाओं और प्रचार तक सीमित नहीं है। उन्हें सूक्ष्म चुनावी प्रबंधन का जिम्मा सौंपा गया है, जिसमें हर नेता को एक से दो लोकसभा क्षेत्रों के भीतर बूथ स्तर की रणनीति बनाने और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के गहन विश्लेषण का कार्य दिया गया है। टिकट वितरण और मतदाताओं के बीच पार्टी की सकारात्मक छवि बनाने में भी इनकी भूमिका निर्णायक होगी। नेताओं के चयन में उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि, विशेषकर आरएसएस, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है।
45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक महत्वपूर्ण पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। उनकी टीम में ऊर्जावान नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों के मिश्रण की उम्मीद है। चूंकि इस वर्ष कई वरिष्ठ नेता राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं और केंद्र सरकार के कार्यकाल का आधा समय भी पूरा होने वाला है, ऐसे में पार्टी संगठन के साथ-साथ कैबिनेट में भी फेरबदल की संभावनाएं प्रबल हैं। जो नेता इन राज्यों में शानदार प्रदर्शन करेंगे, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां मिलना लगभग तय है। नितिन नवीन के नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा असम और पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने यानी हैट्रिक के लक्ष्य के साथ मैदान में है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन जैसे मुद्दों पर ध्रुवीकरण की रणनीति अपना रही है। नवीन ने राज्य में बूथों की संख्या 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी सौंपकर विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के किले में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
पश्चिम बंगाल में चुनौती और भी कठिन है, जहां भाजपा 14 वर्षों के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। बंगाल में किसी बड़े स्थानीय मास लीडर के अभाव में पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और विकास के मॉडल पर निर्भर है। भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाते हुए पार्टी ने राज्य को अलग-अलग जोन में बांटकर क्षेत्रीय वॉर-रूम तैयार किए हैं। नितिन नवीन ने खुद बंगाल का दौरा कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का रोडमैप तैयार किया है। इन राज्यों के नतीजे यह तय करेंगे कि भाजपा का नया सांगठनिक ढांचा कितना मजबूत और प्रभावी साबित होता है।

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News Desk

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