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Tuesday, September 29, 2026
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‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर थोड़ी देर में लगेगी मुहर, इकॉनमी को मिलेगा काफी बढ़ावा

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नई दिल्ली: भारत और यूरोपियन यूनियन मंगलवार को लंबी बातचीत के बाद ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की घोषणा करेंगे. भारत और यूरोपियन यूनियन मिलकर विश्व व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और दुनिया की आबादी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो इस पार्टनरशिप के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.

यूरोपियन यूनियन और भारत करीबी पार्टनर हैं जो आर्थिक खुशहाली, नियमों पर आधारित इंटरनेशनल ऑर्डर और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं. ट्रेड और इन्वेस्टमेंट इस रिश्ते के मुख्य आधार बने हुए हैं. मंगलवार को होने वाले यूरोपियन यूनियन -भारत समिट में दोनों तरफ के नेताओं से एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा अपनाने और चल रही मुक्त व्यापार समझौता वार्ता के संदर्भ में व्यापार पर चर्चा करने की उम्मीद है. इसे पहली बार 2007 में लॉन्च किया गया था और 2022 में फिर से लॉन्च किया गया और सोमवार को खत्म हुआ.

आने वाली डील पर बात करते हुए यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘भारत और यूरोप ने एक स्पष्ट चुनाव कर लिया है.’ रणनीतिक साझेदारी, बातचीत और खुलेपन का चुनाव. अपनी एक-दूसरे को पूरा करने वाली ताकतों का फायदा उठाना और आपसी मजबूती बनाना. हम खंडित दुनिया को दिखा रहे हैं कि एक और रास्ता भी मुमकिन है.’

यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने भी यही बात दोहराते हुए कहा, ‘भारत-यूरोपियन यूनियन के लिए एक जरूरी पार्टनर है. हम सब मिलकर नियमों पर आधारित इंटरनेशनल ऑर्डर को बचाने की क्षमता और जिम्मेदारी शेयर करते हैं. सामान के व्यापार में यूरोपियन यूनियन भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, जो चीन के ठीक बाद और अमेरिका से आगे है, और भारत के कुल सामान व्यापार का 11.5 प्रतिशत हिस्सा है.

आधिकारिक डेटा के मुताबिक 2024 में यूरोपियन यूनियन-भारत के बीच सामान का ट्रेड 120 बिलियन यूरो से ज्यादा का था. इसमें भारत से यूरोपियन यूनियन का 71.4 बिलियन यूरो का इंपोर्ट और भारत को यूरोपियन यूनियन का 48.8 बिलियन यूरो का एक्सपोर्ट शामिल था.

पिछले दस सालों में सामान का दोनों देशों के बीच ट्रेड दोगुना हो गया है. इस दौरान, भारत से यूरोपियन यूनियन का इंपोर्ट 140 फीसदी बढ़ा, जबकि भारत को यूरोपियन यूनियन का एक्सपोर्ट 58 फीसदी बढ़ा, जिससे कमर्शियल रिश्तों में लगातार बढ़ोतरी दिख रही है.

यूरोपियन यूनियन से भारत को एक्सपोर्ट होने वाले मुख्य सामान में मशीनरी और अप्लायंसेज, ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट और केमिकल्स शामिल हैं. दूसरी ओर यूरोपियन यूनियन मुख्य रूप से भारत से मशीनरी और अप्लायंसेज, केमिकल्स और फ्यूल इम्पोर्ट करता है.

सर्विसेज के ट्रेड में भी अच्छी ग्रोथ देखी गई है. 2024 में यूरोपियन यूनियन-भारत के बीच सर्विसेज का ट्रेड 66 बिलियन यूरो से ज्यादा का था, जिसमें यूरोपियन यूनियन इम्पोर्ट 37 बिलियन यूरो से ज्यादा और यूरोपियन यूनियन एक्सपोर्ट लगभग 29 बिलियन यूरो था.

पिछले दस सालों में दोनों देशों के बीच सर्विसेज का ट्रेड दोगुने से ज्यादा हो गया है, जिसमें 243 फीसजी की वृद्ध हुई है. भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ट्रेड होने वाली मुख्य सर्विसेज में टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग जैसी दूसरी बिजनेस सर्विसेज, और ट्रांसपोर्ट सर्विसेज शामिल हैं.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इस रिश्ते की गहराई को और दिखाता है. 2024 में भारत में यूरोपियन यूनियन के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वैल्यू 132 बिलियन यूरो से ज्यादा थी, जिससे यूरोपियन यूनियन देश में सबसे बड़ा निवेशक बन गया.

पॉलिसी के मामले में यूरोपियन यूनियन और भारत ने जून 2022 में एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए बातचीत फिर से शुरू की. उसी समय, इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन और जियोग्राफिकल इंडिकेशन पर अलग से बातचीत शुरू की गई. ट्रेड बातचीत का मकसद रुकावटों को दूर करना है और इससे एक्सपोर्ट को और बढ़ाने, सर्विसेज को खोलने में मदद मिलेगी.

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