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Tuesday, September 22, 2026
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भरी अदालत में भड़क उठे सीजेआई बोले- अटॉर्नी जनरल को बता दीजिए….

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नई दिल्ली। अटॉर्नी जनरल के लगातार अनुपस्थित रहने पर सीजेआई बीआर गवई भड़क गए। ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लगातार तीसरी बार अटॉर्नी जनरल सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी को शब्दों में निर्देश दिया कि वे अटॉर्नी जनरल को बता दें कि सोमवार को इस मामले की सुनवाई पूरी की जाएगी, ऐसे में वे अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद रहें।
सीजेआई गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सोमवार 10 नवंबर 2025 को इस मामले को क्लोज कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 की संवैधानिक वैधता को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा एक बार फिर स्थगन की मांग किए जाने पर सीजेआई जस्टिस गवई ने कड़ा रुख अपनाया। सीजेआई ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि केंद्र इस मामले की सुनवाई 23 नवंबर को मेरे रिटायर होने के बाद ही करवाना चाहती है। मामला विभिन्न प्रमुख ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति और उनके कार्यकाल एवं प्रक्रियाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था ट्रिब्यूनलों की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है, क्योंकि नियुक्तियों में कार्यपालिका की भूमिका बहुत अधिक है। सीजेआई की बेंच ने एएसजी ऐश्वर्य भाटी से रूबरू होते हुए स्पष्ट शब्दों में पूछा कि अगर आप नहीं चाहतीं कि हम सुनवाई करें, तो स्पष्ट कह दें।
दरअसल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई न करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने 7 नवंबर की तिथि पहले ही तय कर रखी थी। एएसजी ने कोर्ट को बताया कि अटॉर्नी जनरल आर। वेंकटरमणी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में व्यस्त हैं। इस पर सीजेआई जसिटस गवई ने तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई जस्टिस गवई ने कहा, ‘अगर आप नहीं चाहते कि हम सुनें और फैसला दें, तो बस बता दें। ऐसा लगता है कि आप चाहते हैं कि यह मामला 24 नवंबर के बाद सुना जाए।’ सीजेआई जस्टिस गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। सीजेआई की पीठ ने यह भी कहा कि अदालत ने एजी को तीन बार समय दिया, लेकिन हर बार यही बताया गया कि वे व्यस्त हैं। एएसजी ऐश्वर्य भाटी ने बताया कि एजी व्यक्तिगत रूप से यह मामला देख रहे हैं, लेकिन सीजेआई ने इस पर भी आपत्ति जताई और कहा कि तीन बार स्थगन के बावजूद एजी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। सीजेआई जस्टिस गवई ने 2 नवंबर की आधी रात को केंद्र द्वारा दाखिल उस अर्जी का भी उल्लेख किया जिसमें इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ‘पहले आप स्थगन मांगते रहते हैं और फिर रात में अर्जी देते हैं कि मामला संविधान पीठ को भेजा जाए। यह अदालत के साथ न्यायपूर्ण रवैया नहीं है।

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News Desk

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