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Monday, November 2, 2026
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नरेंद्र मोदी बोले— जनहित और वैश्विक भलाई के लिए हो एआई का उपयोग

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दिल्ली में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि एआई का इस्तेमाल सभी के फायदे के लिए कैसे किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘बुद्धिमत्ता, तर्कसंगतता और निर्णय लेने की क्षमता विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जनता के लिए उपयोगी बनाती है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि एआई का उपयोग सभी के लाभ के लिए कैसे किया जा सकता है।’

ग्लोबल साउथ में AI पर पहला वैश्विक सम्मेलन 

16 फरवरी से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों, मंत्रियों, वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं, प्रख्यात शोधकर्ताओं, बहुपक्षीय संस्थानों और उद्योग जगत के हितधारकों को एक मंच पर लाया गया ताकि समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और सतत विकास को सक्षम बनाने में एआई की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके। साथ ही, यह पहली बार है कि इस मुद्दे पर इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक सम्मेलन का आयोजन ग्लोबल साउथ में किया जा रहा है।

20 फरवरी को शिखर सम्मेलन का समापन

पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन जो 20 फरवरी को समाप्त होगा, इसमें 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और उप मंत्री शामिल हैं, साथ ही सीईओ, संस्थापक, शिक्षाविद, शोधकर्ता, सीटीओ और परोपकारी संगठनों सहित 500 से अधिक वैश्विक एआई नेता भी शामिल होंगे। 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन भाषण देंगे, जो वैश्विक सहयोग की दिशा तय करेगा और समावेशी एवं जिम्मेदार एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेगा।

क्या हैं सम्मेलन प्रमुख आकर्षण?

शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण तीन प्रमुख वैश्विक प्रभाव चुनौतियां हैं- एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवआई- जिनका समापन फाइनलिस्टों की घोषणा और ग्रैंड फिनाले शोकेस के साथ होगा। समावेशी, जिम्मेदार और विकासोन्मुखी  एआई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ये चुनौतियां राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक विकास उद्देश्यों के अनुरूप स्केलेबल, उच्च-प्रभाव वाले एआई समाधानों को गति प्रदान करने के लिए शुरू की गई थीं।इन चुनौतियों के लिए 60 से अधिक देशों से 4650 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जो मजबूत अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को दर्शाते हैं और जिम्मेदार और स्केलेबल एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) नवाचार के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में भारत के उदय को मजबूत करते हैं। कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं द्वारा किए गए एक कठोर बहुस्तरीय मूल्यांकन के बाद, तीनों श्रेणियों में शीर्ष 70 टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है। ये फाइनलिस्ट नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और शिक्षाविदों के साथ जुड़ेंगे, साथ ही राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपने नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए मान्यता और सहयोग प्राप्त करेंगे।18 फरवरी को हैदराबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से एआई और उसके व्यापक प्रभावों पर एक महत्वपूर्ण अनुसंधान संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। यह संगोष्ठी शिखर सम्मेलन का प्रमुख शैक्षणिक मंच मानी जा रही है, 
जहां एआई से जुड़े कई आयामों पर गंभीर विमर्श होगा। इस संगोष्ठी के लिए अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका सहित कई देशों से लगभग 250 शोध प्रस्तुतियां प्राप्त हुई हैं, जो इस विषय पर वैश्विक रुचि और सहभागिता को दर्शाती हैं। कार्यक्रम में एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी भाग ले रहे हैं। यह विश्व स्तर पर प्रसिद्ध एआई विशेषज्ञों और अग्रणी अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाता है ताकि एआई-संचालित वैज्ञानिक खोज, सुरक्षा और शासन ढांचे, बुनियादी ढांचे तक समान पहुंच और ग्लोबल साउथ में अनुसंधान सहयोग पर विचार-विमर्श किया जा सके।

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