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Sunday, November 1, 2026
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तमिलनाडु चुनाव में बढ़ी दिलचस्पी, ‘थलपति’ विजय की पहली परीक्षा; स्टालिन की साख दांव पर

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तमिलनाडु। विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. चुनाव आयोग के अनुसार, 23 अप्रैल को मतदान होगा, जिसकी गिनती 4 मई को होगी. इस बार का तमिलनाडु चुनाव काफी दिलचस्प रहने वाला है, क्योंकि इस चुनाव में सीएम स्टालिन की साख दांव पर लगी है. वहीं ‘थलपति’ विजय की पहली परीक्षा होगी, तो EPS के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति देखने को मिलेगी. भाजपा भी इस चुनाव में पीछे नहीं रहने वाली है. भाजपा अपने वोट शेयर बढ़ाने के लिए युवा और शहरी मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर सकती है. जानें क्या है तमिलनाडु का राजनीतिक समीकरण?

तमिलगा वेट्री कझगम (विजय की पार्टी)

अभिनेता से राजनेता बने विजय भी इस बार अपनी नई पार्टी को लेकर विधानसभा चुनाव में उतरेंगे. विजय के लिए यह किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि पहली बार विजय राजनीतिक परीक्षा के लिए तैयार हैं. तमिलनाडु में माना जा रहा है कि विजय एक विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, लेकिन अब देखना यह होगा कि वे कितना कमाल दिखा पाते हैं. लेकिन विजय के पास युवाओं का अच्छा खासा सपोर्ट माना जा रहा है।

डीएमके (स्टालिन की पार्टी)

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की विधानसभा चुनाव में साख दांव पर लगी है. स्टालिन डीएमके के अध्यक्ष भी हैं. वर्तमान में तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है और स्टालिन मुख्यमंत्री हैं. स्टालिन विधानसभा चुनाव में अपनी जनकल्याणी योजनाओं को लेकर चुनावी रण में हैं. अब देखना यह होता है कि डीएमके का शासन मॉडल मतदाताओं को पसंद आता है या नहीं।

AIADMK (ई के पलानीस्वामी)

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी की AIADMK पार्टी है. पलानीस्वामी को EPS भी कहा जाता है. इस चुनाव में EPS पार्टी सत्ताधारी दल डीएमके के खिलाफ महंगाई, बेरोजगारी और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में उतरेगी. AIADMK पार्टी प्रमुख जयललिता के निधन के बाद कुछ खास कमाल नहीं दिखाई. इस बार देखना यह होगा कि खुद को AIADMK पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित करने वाले पलानीस्वामी क्या कमाल दिखाएंगे।

एनडीए

तमिलनाडु में वैसे तो क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा है, लेकिन एनडीए भी पीछा नहीं छोड़ने वाली है. एनडीए भी चुनाव में अपने पूरे दमखम के साथ उतरेगी. हालांकि अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. एनडीए दल की प्रमुख पार्टी भाजपा को पूरी उम्मीद है कि इस बार के चुनाव में पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा सीटें और वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल, मतदान से पहले सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा करने से पीछे नहीं हटते हैं. अब देखना यह होगा कि तमिलनाडु की जनता किसे अपना नेता चुनती है. इसके लिए 4 मई का इंतजार करना पड़ेगा।

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